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रायपुर: मुख्य सचिव ने साइबर अपराध रोकने और डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की दी निर्देश

रायपुर : साइबर अपराध रोकने, डिजिटल सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जाएः- मुख्य सचिव राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक संपन्न  रायपुर मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में  मंत्रालय महानदी भवन में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 100वीं तिमाही बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। बैठक में शासन की जनहित योजनाओं के अंतर्गत बैंक प्रकरणों में त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश बैंकर्स को दिए गये हैं। बैठक में राज्य स्तरीय लीड बैंक तथा अन्य बैंकों में लंबित ऋण प्रकरणों की विस्तार से समीक्षा की गई। इसी तरह से राज्य के विभिन्न जिलों में बैंक नेटवर्क की स्थिति के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा है कि राज्य के सभी इलाको में लोगों को बैकिंग सुविधा मिले यह सुनिश्चित किया जाये। बैठक में जानकारी दी गई की राज्य में क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात का औसत उपलब्धि स्तर अब राष्ट्रीय स्तर के समकक्ष पहुंच गया है, जो राज्य की मजबूत बैंकिंग प्रगति को दर्शाता है। बैठक में बैंकर्स को डिजिटल लेन-देन के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम  आयोजित करने कहा गया है।   मुख्य सचिव विकासशील ने उद्गम पोर्टल की चर्चा करते हुए कहा कि विभिन्न बैंको के खातों में लोगों की राशि पिछले कई वर्षों से जमा है। बैंक में पड़ी ऐसी राशि जिसका अपने या अपने परिवार का  दावा नहीं किये गये है ऐसे बचत खाताओं का पता लगाकर लोगों की मदद की जाये और उनकी जमा राशि वापिस की जाये। इसके लिए उद्गम पोर्टल की जानकारी लोगों को प्रचार-प्रसार कर दी जानी चाहिए। उद्गम पोर्टल बैंक खातेदारों को बताता हैं कि आपका पैसा कहां है और फिर आपको उस पैसे को पाने के लिए बैंकर्स से मिलकर आवश्यक औपचारिकताएं कर बैंको में कई वर्षों से पड़ी राशि प्राप्त की जा सकती है।   बैठक में डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में भी विशेष जागरूकता अभियान चलाए जायें, ताकि आमजन डिजिटल अपराधों से सावधान एवं सतर्क रहें। उन्होंने आधार से बैंक खातो को लिंक करने की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी बैंक खातों में आधार से लिंक किया जाये जिससे   सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से हितग्राहियों को लाभ मिलेगा।  मुख्य सचिव ने बैंकों को ऋण वितरण (डिस्बर्समेंट) की प्रक्रिया में सुधार लाने के निर्देश देते हुए कहा कि पात्र हितग्राहियों को सरल और शीघ्र प्रक्रिया के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाए, जिससे स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्य सचिव ने विशेष रूप से राज्य के बस्तर क्षेत्र  सहित अन्य ग्रामीण एवं दूरस्थ इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने तथा जनहितकारी सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया।  बैठक में बताया गया कि वित्तीय समावेशन संतृप्ति अभियान के तहत राज्य में अब तक 11,680 शिविरों का आयोजन किया जा चुका है। इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों, महिला स्वयं सहायता समूहों और कमजोर वर्गों को बैकिंग सुविधा एवं योजनाओं की जानकारी दी गई। जन-धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), अटल पेंशन योजना (APY) किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री आवास 0.2, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि योजना सहित अन्य योजनाओं की प्रगति पर भी विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण अनुदान योजना सहित अन्य जनहित की योजनाओं के अंतर्गत बैंक प्रकरणों से फायदा पहुंचाने के लिए बैंकर्स को निर्देश दिये गये है। बैठक में बैंको में ऋण प्रकरणों की विस्तार से समीक्षा की गई। राज्य लीड बैंक अधिकारी ने एस.एल.बी.सी. में बैंकिंग प्रकरणों के बारे में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, नाबार्ड सहित विभिन्न बैंको के प्रतिनिधी, राज्य शासन के अधिकारी सहित बैंकर्स एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेंटी के अन्य सदस्य मौजूद थे। 

VR टेक्नोलॉजी से होगी सिंहस्थ की निगरानी, पुलिस 54 हजार कर्मियों को देगी वर्चुअल ट्रेनिंग

उज्जैन  उज्जैन पुलिस ने देशभर के 54 हजार जवानों को वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक के माध्यम से प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। यह पहल 2028 के महाकुंभ के दौरान लागू की जाएगी, जो कि देश में अपनी तरह की पहली योजना होगी। उज्जैन पुलिस इस तकनीक का उपयोग करते हुए कुंभ ड्यूटी पर तैनात होने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करेगी। वर्चुअल रियलिटी से कुंभ ड्यूटी का प्रशिक्षण उज्जैन में महाकुंभ की तैयारियां जोरों पर हैं। पुलिसकर्मी वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से उज्जैन की गलियों, सड़कों, चौराहों और श्रद्धालुओं के मार्ग को समझेंगे। उन्हें यह प्रशिक्षण अपने शहर में बैठे-बैठे ही मिलेगा। इस तकनीक के जरिए पुलिसकर्मी जान सकेंगे कि उन्हें कहां तैनात किया जाएगा और किस मार्ग का उपयोग करना होगा। जो अपने शहर राज्य में बैठकर उज्जैन की गलियों, सड़क, मार्ग, चौराहे, एंट्री एग्जिट और श्रद्धालुओं को किस मार्ग पर भेजना और रोकने की ट्रेनिंग भी VR के माध्यम से लेंगे। उज्जैन पुलिस ने फिलहाल 200 VR सेट मंगवाए हैं। VR से ट्रेनिंग पुलिस आर्म्स फोर्स होमगार्ड वॉलिंटियर्स को दी जाएगी। उज्जैन में होने वाले महाकुंभ के आयोजन में पुलिस हाईटेक टेक्नोलॉजी का उपयोग करेगी। ऐसा प्रयागराज कुंभ में भी देखने को नहीं मिला था। पहली बार VR टेक्नोलॉजी का उपयोग कर अपने अपने शहर में उज्जैन की सड़कों-गलियों आने-जाने के मार्ग की ट्रेनिंग VR से मिलेगी। पहले उज्जैन में, फिर अपने शहर में लेंगे ट्रेनिंग एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ट्रेनिंग में ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का उपयोग करेंगे। दूसरे प्रदेश और जिले से आने वाले पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए VR ट्रेनिंग का माध्यम चुना है। सड़कों के 3D वीडियो बनवाए हैं। ये पुलिसकर्मियों को VR के माध्यम से उनके शहर में ही दिखाए जाएंगे। सोमवार को VR सेट का परीक्षण किया है। सबसे पहले पुलिसकर्मी उज्जैन आकर देखेंगे कि उनकी ड्यूटी कहां लगेगी। कौन सा रास्ता कहां से किधर जाएगा। इसके बाद उन्हें बार-बार ट्रेनिंग के लिए उज्जैन नहीं आना पड़ेगा। पुलिसकर्मी अपने प्रदेश में कहीं भी होगा, वह VR के माध्यम से शहर की भौगोलिक स्थिति और रियल टाइम स्थिति जानकर ट्रेनिंग पूरा कर लेगा। ट्रेनिंग प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ट्रेनिंग में अधिक से अधिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। दूसरे राज्यों और जिलों से आने वाले पुलिसकर्मियों के लिए VR तकनीक का चयन किया गया है। इसके तहत सड़कों के 3D वीडियो तैयार किए गए हैं, जिनका उपयोग पुलिसकर्मियों को उनकी शहर की भौगोलिक स्थिति समझाने के लिए किया जाएगा। सोमवार को VR सेट का परीक्षण किया गया, जिसके बाद पुलिसकर्मी उज्जैन आकर देखेंगे कि उनकी ड्यूटी कहां लगेगी। इससे उन्हें बार-बार उज्जैन आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, और वे अपने प्रदेश में कहीं से भी इस प्रशिक्षण को पूरा कर सकेंगे। आपातकालीन स्थितियों में VR का महत्व शुरुआत में इंदौर रोड से शिप्रा नदी के घाट तक का वीडियो तैयार किया गया है। इस वीडियो की मदद से पुलिसकर्मी आपातकालीन स्थितियों का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे। एसपी ने बताया कि 200 VR सेट का ऑर्डर दिया गया है और भविष्य में उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। इस तकनीक का उद्देश्य यह है कि पुलिसकर्मी जब VR का उपयोग करेंगे, तो उन्हें ऐसा लगेगा जैसे वे वास्तव में उस स्थान पर खड़े हैं, जहां उनकी ड्यूटी लगाई गई है। इससे उनकी प्रशिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसमें AI-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम, मोबाइल ऐप ट्रैकिंग जैसी तकनीकें भीड़ प्रबंधन में सहायक होंगी। उज्जैन के चार रेलवे स्टेशनों को भी हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें नई खेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामन और विक्रम नगर स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों पर फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर, हाई क्वालिटी CCTV कैमरे और ड्रोन निगरानी के माध्यम से संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जाएगी। स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए 5 हजार करोड़ रुपए की लागत से स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण किया जाएगा। यह सिटी 2378 हेक्टेयर भूमि पर बनाई जाएगी, जिसमें इंटरकनेक्टेड चौड़ी सड़कें, अंडरग्राउंड लाइट, अस्पताल, स्कूल और अन्य सुविधाएं शामिल होंगी। इस परियोजना के माध्यम से उज्जैन को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने का लक्ष्य है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव प्रदान करेगा। इस नई पहल से यह स्पष्ट होता है कि उज्जैन पुलिस और स्थानीय प्रशासन महाकुंभ को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आपातकालीन समय में भी काम आएगा VR अभी शुरुआत में इंदौर रोड का शिप्रा नदी के घाट तक का वीडियो बनवाया है। इससे ट्रेनिंग की शुरुआत होगी। VR आपातकालीन समय में कैसे काम आ सकता है, इस पर भी काम कर रहे हैं। जल्द ही उस दिशा में भी आगे बढ़ेंगे। 200 वीआर सेट के ऑर्डर दिए हैं। बाद में धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती जाएगी। उज्जैन कुंभ में खड़े होने का होगा अहसास वीडियो में बैकग्राउंड में हिंदी और इंग्लिश में नरेशन भी है। इसमें पूरे शहर की हर छोटी-बड़ी डिटेल दी जाएगी। जो बाद में भी काम आएगी। एसपी प्रदीप शर्मा का कहना है कि ट्रेनिंग में मैप पर समझा भी देंगे तो याद नहीं रहेगा। लेकिन, जब वह पुलिसकर्मी VR से देखेंगे तो उन्हें ऐसा प्रतीत होगा जैसे उसी जगह खड़े हैं। जहां उनकी ड्यूटी लगाई गई है। इससे फील्ड याद रहेगा। कुछ प्लान चेंज भी हुए तो भी दिक्कत नहीं होगी। देश में पहली बार पुलिस उज्जैन में उपयोग करेगी। AI-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम भी सन 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके "हाईटेक" कुम्भ आयोजित होगा। जिसमें AI-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम, मोबाइल ऐप ट्रैकिंग जैसी तकनीक भीड़ प्रबंधन में उपयोग में ली जायेगी। रेलवे स्टेशन भी हाईटेक होंगे उज्जैन के चार रेलवे स्टेशन नई खेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामन और विक्रम नगर स्टेशन को हाईटेक बनाया जाएगा। इन स्टेशनों पर अगर कोई अपराधी ट्रेन से उज्जैन आता है तो फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर, हाई क्वालिटी सीसीटीवी … Read more