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सरकारी अस्पताल में जटिल ऑपरेशन, महिला के पेट से 8 किलो की गठान सफलतापूर्वक हटाई गई

बुरहानपुर  स्व नंदकुमार सिंह चौहान जिला अस्पताल में डॉक्टरों को एक जटिल सर्जरी में सफलता मिली है. नागझीरी निवासी 57 वर्षीय महिला मरीज उषा बाई पति संतोष की आठ किलो वजन की बड़ी गठान डॉ. दर्पण टोके के नेतृत्व में सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने निकाली है. इतनी बड़ी और जटिल गठान के कारण मरीज को दर्द सहना पड़ता था, इससे कई बार महिला की तबीयत भी बिगड़ जाती थी. जांच में सामने आई थी ट्यूमर की बात महिला ने पिछले दिनों जिला अस्पताल में जांच कराई थी, इस जांच में बड़ी गठान की बात सामने आई. इसके बाद डॉक्टरों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद मरीज को सुरक्षित उपचार प्रदान किया, उन्होंने सफलतापूर्वक ऑपरेशन को अंजाम दिया. यह ऑपरेशन सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ. दर्पण टोके के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया. डॉक्टरों द्वारा सर्जरी के दौरान विशेष सावधानियां बरती गई, ताकि मरीज को किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा लिया. डॉक्टरों ने किया महिला का जटिल ऑपरेशन एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. श्वेता शिवहरे ने बेहोशी की प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से संभाला, जिससे ऑपरेशन बिना किसी बाधा के पूरा हो सका. अब महिला मरीज की हालत में सुधार हो रहा है. सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति सामान्य बताई जा रही है और वह अब डॉक्टरों की निगरानी में स्वस्थ हो रही हैं, जिला अस्पताल के लिए यह सर्जरी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जो यहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञता को दर्शाती है. इस सफलता पर सीएमएचओ डॉ आरके वर्मा और सिविल सर्जन डॉ प्रदीप मोजेस ने इस ऑपरेशन में शामिल डॉक्टर व नर्सिंग टीम की सराहना की है, उन्होंने सभी को बधाई दी और भविष्य में भी इसी प्रकार जनसेवा के लिए कार्य करते रहने की शुभकामनाएं दी हैं. सिविल सर्जन डॉ प्रदीप मोजेस ने बताया कि, ''इस सफल सर्जरी में नर्सिंग ऑफिसर निलिमा नेलसन और गायत्री ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके साथ ही अभय सिंह, हिमांशु एवं अन्य अस्पताल कर्मचारियों ने भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सहयोग प्रदान किया. टीमवर्क और समन्वय का अच्छा उदाहरण पेश किया, जिसने इस जटिल ऑपरेशन को संभव बनाया.'' महिला को मिली नई जिंदगी सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ दर्पण टोके ने बताया कि, ''महिला के पेट में दर्द होता था, इस दर्द स्व लंबे समय से जूझ रही थी, पिछले दिनों उसने जिला अस्पताल में जांच कराई, हमारी टीम ने ऑपरेशन की सलाह दी, इसके बाद उसके परिजन राजी हो गए. मंगलवार को ऑपरेशन किया, इस ऑपरेशन का मैंने नेतृत्व किया, टीम को सफलता मिली है, महिला को इस जटिल समस्या से निजात दिलाई है.''

पति-पत्नी के रिश्ते में दर्दनाक अंत, डॉक्टर ने पत्नी को इंजेक्शन देकर ली जान: पुलिस जांच जारी

बेंगलुरु बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल के 32 साल के जनरल सर्जन डॉ. महेंद्र रेड्डी ने अपनी चिकित्सकीय जानकारी का इस्तेमाल किसी की जान बचाने के बजाय अपनी पत्नी की जान लेने के लिए किया। छह महीने तक इसे प्राकृतिक मौत माना गया, लेकिन अब पुलिस ने खुलासा किया है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। 28 साल की त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) डॉ. कृतिका रेड्डी की मौत के मामले में उनके पति महेंद्र को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, महेंद्र ने एनेस्थीसिया की जानलेवा खुराक देकर पत्नी की हत्या की। आपको बता दें कि दोनों का विवाह 26 मई 2024 को हुआ था। मौत से महज 11 महीने पहले। व्हाइटफील्ड डीसीपी एम. परशुराम ने बताया, “महेंद्र ने अपनी पत्नी की हत्या बड़ी सावधानी से योजनाबद्ध की थी। वह उसकी चिकित्सीय कमजोरियों को जानता था और उसने उसी का फायदा उठाया।” पुलिस जांच से पता चला कि 21 अप्रैल को महेंद्र ने अपने घर पर पत्नी को पेट दर्द के बहाने IV इंजेक्शन दिया। अगले दिन वह उसे मराठहल्ली स्थित मायके ले गया, यह कहते हुए कि उसे आराम की जरूरत है। 23 अप्रैल की रात, वह दोबारा ससुराल पहुंचा और एक और इंजेक्शन लगाया। अगले दिन सुबह 24 अप्रैल को कृतिका को बेसुध पाया गया। डॉक्टर होने के बावजूद महेंद्र ने सीपीआर देने का प्रयास नहीं किया और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पहले इसे अनैसर्गिक मृत्यु बताया गया था, लेकिन पोस्टमार्टम और एफएसएस रिपोर्ट में शरीर में एनेस्थीसिया के अंश पाए गए। इसके बाद केस को हत्या में बदला गया। कृतिका के पिता के. मुनी रेड्डी की शिकायत पर महेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उन्होंने कहा, “हमारी बेटी को लगता था कि उसका विवाह सम्मान और प्रेम पर आधारित है। पर उसी मेडिकल ज्ञान का इस्तेमाल उसकी जान लेने के लिए किया गया।” जांच में पता चला कि शादी के बाद महेंद्र को यह मालूम हुआ कि कृतिका को लंबे समय से गैस्ट्रिक और मेटाबॉलिक विकार हैं। परिवार ने यह जानकारी पहले नहीं दी थी। पुलिस को शक है कि इसी बात ने उसके भीतर नाराजगी और प्रतिशोध की भावना पैदा की जो अंततः हत्या में बदल गई। पत्नी की मौत के बाद भी महेंद्र ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। उसने पुलिस से कहा कि उसकी पत्नी की मौत स्वाभाविक थी। परंतु FSL रिपोर्ट के बाद पुलिस ने उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) के तहत गिरफ्तार किया। बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने कहा, “पुलिस टीम ने उस हत्या को उजागर किया जिसे एक मेडिकल दुर्घटना की तरह पेश किया गया था।” डॉक्टर कृतिका वह 4 मई को अपना खुद का क्लिनिक स्किन एंड स्कैल्पेल खोलने वाली थीं। उनके सहयोगियों ने बताया, “वह हमेशा कहती थीं कि डर्मेटोलॉजी के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती हैं। यह सोचना भी दर्दनाक है कि उनका अपना पति ही उनके खिलाफ हो गया।”