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MY अस्पताल में डॉक्टरों का जोरदार प्रदर्शन, ‘वन नेशन-वन स्टाइपेंड’ की मांग पर अड़े; मरीजों की बढ़ी परेशानी

इंदौर इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच में चिकित्सा व्यवस्था उस समय प्रभावित हुई जब जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। यहां के डॉक्टर भोपाल में हुए लाठीचार्ज और 'वन नेशन-वन स्टाइपेंड' की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर्स 3 दिन से सड़कों पर हैं। भोपाल में सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां डॉक्टर सड़क पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में इसका असर दिख रहा है और कई जगह ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से ठप हैं। हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की अस्पताल परिसर में एकत्र हुए रेजिडेंट डॉक्टरों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी चिकित्सकों का कहना है कि एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र अस्पतालों में दिन-रात सेवाएं देते हैं। इसके बावजूद देश के अलग-अलग राज्यों में उनके मानदेय में भारी असमानता है। डॉक्टरों की मांग है कि पूरे देश में एक समान मानदेय व्यवस्था लागू की जाए और भोपाल में चिकित्सकों पर बल प्रयोग करने वाले दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो। इंटर्न डॉक्टर राजेश सोनी ने कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होगी, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। डॉ. रागिनी खन्ना ने बताया कि धूप और गर्मी में भी हम लगातार आंदोलन करेंगे। सीनियर डॉक्टर, हमारे सभी साथी और परिचित इस आंदोलन में हमारे साथ हैं।  स्टाइपेंड पर पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था की मांग जूडा इंदौर के अध्यक्ष डॉक्टर विक्रम नेतू ने कहा कि भोपाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों पर लाठीचार्ज किया गया। हम दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हैं। इस तरह का सलूक कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमारी प्रमुख मांग है कि पूरे देश में समान स्टाइपेंड व्यवस्था लागू होना चाहिए।   अस्पताल प्रबंधन बोला मरीज परेशान नहीं होंगे अस्पताल प्रबंधक डॉक्टर अशोक यादव का कहना है कि मरीजों की देखभाल प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। प्रबंधन के अनुसार ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से चालू हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों और कंसल्टेंट्स को मोर्चे पर तैनात किया गया है। वहीं कई रेजिडेंट डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया है ताकि मरीजों की जान जोखिम में न पड़े। 

हमीदिया अस्पताल में इलाज पर संकट! स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर डॉक्टरों की हड़ताल, मरीज परेशान

भोपाल मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर्स स्टाइपेंड बढ़वाने 3 दिन से सड़कों पर हैं। भोपाल में सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां डॉक्टर सड़क पर बैठकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में इसका असर दिख रहा है। ओपीडी सेवाएं ठप हैं। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बुधवार को 12 बजे तक ओपीडी बंद कर दी गई। सीनियर डॉक्टर्स ने मरीजों को देखा। किडनी और लिवर के मरीज भटकते दिखे। हमीदिया में आज सिर्फ 2 ऑपरेशन हुए, जबकि बाकी दिन 40 से ज्यादा होते थे। कमला पार्क के पास आंदोलन, रास्ते को वन-वे किया गया भोपाल में कमला पार्क के पास बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठे हैं। प्रदर्शन के कारण ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। रास्ते को वन-वे किया गया है। पुलिस और प्रशासन डॉक्टरों से बातचीत कर रहे हैं, ताकि प्रदर्शन से आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। इंटर्न डॉक्टर सौरभ सोनी ने बताया- जब तक मांग पूरी नहीं होगी, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। डॉ. शालिनी खन्ना ने बताया कि धूप और गर्मी से काफी दिक्कत हो रही है, लेकिन खाने-पीने की परेशानी नहीं है। सीनियर डॉक्टर, साथी और भोपाल के लोग भी हमारे लिए खाना भेज रहे हैं। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा- जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इंटर्न डॉक्टरों की मांगों को लेकर कल मेडिकल कॉलेज में विस्तृत चर्चा हुई थी। आज भी उन्हें बातचीत के लिए बुलाया गया है। प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और ट्रैफिक भी सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने कहा- छात्रों को अपने बीच से तय प्रतिनिधियों के जरिए प्रशासन से तुरंत बातचीत करनी चाहिए। प्रदर्शन करना उनका अधिकार है, लेकिन सरकार के फैसले के बाद यह भी देखना चाहिए कि उनकी मांगों में से सरकार ने किस हद तक सहमति दी है। हर व्यक्ति के असंतुष्ट होने पर लगातार विरोध जारी रखना उचित नहीं है।

डॉक्टर्स डे पर इनर व्हील क्लब मुरैना ने चिकित्सकों का किया सम्मान, नई कार्यकारिणी का भी हुआ परिचय

इनर व्हील क्लब मुरैना ने डॉक्टर्स डे पर चिकित्सकों का किया सम्मान, नई कार्यकारिणी का भी हुआ परिचय मुरैना  इनर व्हील क्लब मुरैना द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) के अवसर पर शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सकों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज एवं स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों को सम्मानित कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर क्लब की वर्ष 2026-27 की नई कार्यकारिणी का भी परिचय कराया गया। नई कार्यकारिणी में अध्यक्ष श्रीमती प्रतीक्षा बांदिल, सचिव श्रीमती मीनाक्षी माहेश्वरी, कोषाध्यक्ष श्रीमती भावना मित्तल, आईएसओ डॉ. सुधा माहेश्वरी, सीसी श्रीमती रंजिता शिवहरे तथा संपादक श्रीमती आस्था मंगल को दायित्व सौंपा गया। कार्यक्रम में क्लब की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती करुणा जैन की गरिमामयी उपस्थिति रही। डॉक्टर्स डे के अवसर पर जिन चिकित्सकों का सम्मान किया गया उनमें डॉ. हेमा सिंघल, डॉ. मीरा प्रेमी, डॉ. सुधा माहेश्वरी, डॉ. ऋतु राठी, डॉ. अनुभव माहेश्वरी, डॉ. सरोज गुप्ता, डॉ. नीरज गुप्ता, डॉ. दीप्ति जैन, डॉ. मेघा गोयल तथा डॉ. दीक्षा गुप्ता शामिल रहे। कार्यक्रम में क्लब की सदस्य श्रीमती पूजा मोदी, श्रीमती माधुरी मित्तल, श्रीमती मधु गुप्ता, श्रीमती राधिका माहेश्वरी, श्रीमती साक्षी गोयल, श्रीमती शिल्पी जैन, श्रीमती अंजलि जैन, श्रीमती शिल्पा बंसल, श्रीमती निशा शर्मा, श्रीमती पूजा मंगल एवं  श्रीमती भावना मंगल  सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि चिकित्सक मानव सेवा का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण हैं। अपने ज्ञान, समर्पण और सेवा भावना से वे समाज को स्वस्थ एवं सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्लब ने सभी सम्मानित चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल एवं स्वस्थ भविष्य की कामना की।

जालंधर डॉक्टर डेथ केस: करोड़ों का लोन, रिश्तों में दरार और कई अनसुलझे सवाल, सामने आई पूरी कहानी

 जालंधर  पंजाब के जालंधर में सरकारी लेडी डॉक्टर डॉ. मीनाक्षी सूद की मौत के बाद उनके पति और नेशनल आई केयर हॉस्पिटल से जुड़े डॉक्टर पीयूष सूद पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. लेडी डॉक्टर के परिजनों का दावा है कि डॉ. मीनाक्षी लंबे समय से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना कर रही थीं. परिवार ने पति पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, मारपीट और उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर करोड़ों रुपये का लोन लेने के आरोप लगाए हैं. वहीं पुलिस ने परिजनों के बयानों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  मृतका के पिता प्रमोद कुमार के मुताबिक उनकी बेटी की शादी अक्टूबर 2018 में डॉक्टर पीयूष सूद के साथ हुई थी. परिवार का आरोप है कि शादी के बाद खरीदी गई थार गाड़ी का लोन डॉ. मीनाक्षी के नाम पर लिया गया था और उसकी किश्तें भी वही भर रही थीं. परिजनों का दावा है कि बाद में अस्पताल और अन्य कामों से जुड़े लोन भी उनके नाम पर लिए गए।  पति से रह रही थीं अलग  पिता का कहना है कि जुलाई 2025 से उनकी बेटी पति से अलग रह रही थी. परिवार के अनुसार कुछ दिन पहले जब डॉ. मीनाक्षी बैंक में मकान खरीदने से संबंधित प्रक्रिया के लिए पहुंचीं तो उन्हें पता चला कि उनके नाम पर करीब 2.5 करोड़ रुपये का लोन चल रहा है. परिजनों का आरोप है कि संबंधित दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं थे. इसके बाद वह काफी परेशान रहने लगी थीं. मृतका की मां ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ कई बार मारपीट की गई. परिवार का दावा है कि डॉक्टर पीयूष सूद कई मौकों पर खुद फोन कर मारपीट की बात स्वीकार करते थे और बाद में माफी मांगते थे. पिता ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी उनकी बेटी का गला घोंटकर जान लेने की कोशिश की गई थी. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।  नर्स के साथ अफेयर का भी आरोप  परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर पीयूष सूद का अस्पताल में काम करने वाली एक महिला के साथ कथित संबंध था. पिता के अनुसार जब डॉ. मीनाक्षी को इस बात का संदेह हुआ तो उन्होंने अस्पताल के CCTV फुटेज की जांच की. परिवार का दावा है कि फुटेज में दोनों को साथ देखा गया. परिजनों का कहना है कि संबंधित फुटेज पुलिस को भी उपलब्ध कराए गए हैं. थाना नंबर 6 के प्रभारी सुशील कुमार ने बताया कि महिला डॉक्टर की मौत के मामले में परिजनों के बयानों के आधार पर BNS की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया गया है।  उन्होंने कहा कि आरोपी पति से अभी पूछताछ नहीं हो पाई है और कानूनी प्रक्रिया जारी है. एएसआई सतपाल के अनुसार सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी. घर के दरवाजे बंद थे. लोगों की मौजूदगी में घर का शीशा तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, जहां डॉक्टर मीनाक्षी का शव जमीन पर पड़ा मिला. इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।  पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार  मृतका की मां का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि उनकी बेटी की मौत किन परिस्थितियों में हुई. परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वहीं पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. मृतका के पिता के अनुसार बेटी मार पिटाई से तंग थी, इसलिए वह डॉक्टर पीयूष से अलग रहने लगी थी।  नया मकान बनाना चाह रही थी  पिता का कहना है कि जून 2026 में वह अपना मकान लेने का प्लान बना रही थी. मकान लेने के लिए कुछ दिन पहले जब बैंक में गई तो पता चला कि उसने नाम पर 2.5 करोड़ का लोन चल रहा है. जबकि कागजों पर उसके साइन भी नहीं थे. पिता प्रमोद ने बताया कि अब बेटी तलाक लेना चाहती थी. मैंने बेटी को कहा था कि तुम्हारा कोर्ट से तलाक करवा देते हैं. तुम कुछ देर रुक जाओ. इस बीच लोन की बात पता चल गई जिससे बेटी परेशान हो गई. उन्होंने बताया कि मीनाक्षी कपूरथला के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर थी. पिता ने कहा कि डॉक्टर पीयूष ने ही बेटी को मरने के लिए मजबूर किया है. परिवार की मांग है कि पुलिस डॉक्टर पीयूष को अरेस्ट करे और इंसाफ दिलाए। 

स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा, जाली प्रमाणपत्रों पर नौकरी करने वाले 9 लोगों पर FIR

भोपाल  मध्य प्रदेश में ऐसे डॉक्टरों का नेटवर्क सामने आया है, जिन्होंने फर्जी डिग्री, फर्जी मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन या दूसरे डॉक्टरों के पंजीयन नंबर के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की। इनमें किसी ने दूसरे डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर इस्तेमाल किया। मेडिकल काउंसिल की वेबसाइट पर साधारण सत्यापन से पकड़ी जा सकने वाली इन गड़बड़ियों के बावजूद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और जिला स्तर के अधिकारियों ने इन्हें संजीवनी क्लीनिकों में पदस्थ कर दिया। जनवरी 2026 से ये लोग मरीजों का इलाज करते रहे। मामले में भोपाल की चूनाभट्‌टी पुलिस ने 9 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनके नाम डॉ. आकाश चंदेलकर, डॉ. मोहर सिंह, डॉ. कमल किशोर, डॉ. मोनिका, डॉ. हारून, डॉ. शांति, डॉ. सोनम, डॉ. बुद्धमान और डॉ. पवन बताए गए हैं। मेडिकल काउंसिल से मिलान पर पकड़ाया फर्जीवाड़ा दरअसल, इन 9 डॉक्टर्स के डिग्री और दस्तावेजों को लेकर एनएचएम दफ्तर को शिकायत मिली थी। जांच में इनके दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। जब मेडिकल काउंसिल से मिलान कराया गया तो पता चला कि दिए गए रजिस्ट्रेशन नंबर दूसरे डॉक्टरों के नाम पर दर्ज हैं। जांच एजेंसियों को यह भी पता चला कि आरोपियों ने असली डॉक्टरों के दस्तावेजों की कॉपी हासिल कर उन्हें एडिट किया। फिर अपने नाम से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए। इनके आधार पर नौकरी हासिल कर वे सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे थे। चूना भट्‌टी पुलिस के मुताबिक, ये सभी आरोपी करीब पांच महीने तक अलग-अलग सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में काम करते रहे। अंदरूनी मिलीभगत के एंगल से भी जांच पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में कोई संगठित गिरोह या अंदरूनी मिलीभगत तो शामिल नहीं है। भर्ती प्रक्रिया में लापरवाही या जानबूझकर की गई अनदेखी की भी पड़ताल की जा रही है।

मेडिकल साइंस का कमाल… चीन में मौजूद डॉक्टर ने हैदराबाद में किया ऑपरेशन

हैदराबाद तकनीक और मेडिकल साइंस ने एक बार फिर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनियाभर का ध्यान खींच लिया है. चीन के वुहान में मौजूद भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने हैदराबाद में मौजूद एक मरीज की रोबोट की मदद से सफल सर्जरी की. खास बात यह रही कि डॉक्टर और मरीज के बीच करीब 3000 किलोमीटर की दूरी थी।  रिपोर्ट के मुताबिक, यह यूरेट्रल रीइम्प्लांटेशन सर्जरी थी, जिसमें यूरेटर (किडनी से यूरिन ब्लैडर तक ले जाने वाली नली) को दोबारा ब्लैडर से जोड़ा गया. यह ऑपरेशन चीन में विकसित रोबोटिक तकनीक और हाई-स्पीड 5G इंटरनेट की मदद से किया गया. पूरा ऑपरेशन करीब 90 मिनट तक चला. इस दौरान वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल और हैदराबाद की मेडिकल टीम के बीच लगातार समन्वय बना रहा।  इस उपलब्धि को भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया. उन्होंने लिखा कि भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने वुहान में बैठकर हैदराबाद के मरीज की सिर्फ 90 मिनट में रोबोट-असिस्टेड सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की।  ऑपरेशन शुरू होने से पहले वुहान और हैदराबाद के डॉक्टरों ने ऑनलाइन मरीज की मेडिकल रिपोर्ट्स की संयुक्त समीक्षा की. इसके बाद रोबोटिक आर्म्स की मूवमेंट को लेकर पूरी योजना तैयार की गई. हैदराबाद में मौजूद मेडिकल स्टाफ ने मरीज को एनेस्थीसिया दिया और ऑपरेशन थिएटर में रोबोटिक सिस्टम को तैयार किया।  इस रोबोटिक सिस्टम में बेहद बारीक सर्जिकल उपकरण और हाई-डेफिनिशन 3D कैमरे लगे थे, जो हैदराबाद से लाइव तस्वीरें वुहान भेज रहे थे. डॉ. गौस वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल में एक कंट्रोल कंसोल पर बैठे थे, जहां से उन्होंने पूरे ऑपरेशन के दौरान रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित किया।   200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड रोबोट ले रहे थे निर्देश रिपोर्ट के अनुसार, 5G नेटवर्क की मदद से डॉक्टर के निर्देश सिर्फ 200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड के भीतर हैदराबाद पहुंच रहे थे. इतनी कम देरी की वजह से रोबोटिक आर्म्स लगभग उसी समय डॉक्टर के हाथों की हरकतों को दोहरा पा रहे थे. यही वजह रही कि हजारों किलोमीटर दूर बैठने के बावजूद सर्जरी के दौरान सटीकता और नियंत्रण बनाए रखा जा सका।  हैदराबाद में मौजूद डॉक्टरों की टीम भी पूरे समय ऑपरेशन थिएटर में मौजूद रही और किसी भी इमरजेंसी स्थिति में तुरंत मदद के लिए तैयार थी.यह सर्जरी International Hepato-Pancreato-Biliary Association के चीनी चैप्टर की 10वीं कांग्रेस के दौरान दिखाई गई 26 सर्जरी में से एक थी. इनमें भारत, ब्राजील, जॉर्जिया, ग्रीस और उज्बेकिस्तान के विशेषज्ञों के साथ लाइव अंतरराष्ट्रीय रिमोट सर्जरी भी शामिल थीं।  टोंगजी हॉस्पिटल में सर्जरी विभाग के निदेशक चेन शियाओपिंग ने कहा कि AI, रोबोटिक्स और अगली पीढ़ी की कम्युनिकेशन तकनीकें दुनिया भर के हेल्थकेयर सिस्टम को तेजी से बदल रही हैं। 

सरकारी अस्पताल में जटिल ऑपरेशन, महिला के पेट से 8 किलो की गठान सफलतापूर्वक हटाई गई

बुरहानपुर  स्व नंदकुमार सिंह चौहान जिला अस्पताल में डॉक्टरों को एक जटिल सर्जरी में सफलता मिली है. नागझीरी निवासी 57 वर्षीय महिला मरीज उषा बाई पति संतोष की आठ किलो वजन की बड़ी गठान डॉ. दर्पण टोके के नेतृत्व में सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने निकाली है. इतनी बड़ी और जटिल गठान के कारण मरीज को दर्द सहना पड़ता था, इससे कई बार महिला की तबीयत भी बिगड़ जाती थी. जांच में सामने आई थी ट्यूमर की बात महिला ने पिछले दिनों जिला अस्पताल में जांच कराई थी, इस जांच में बड़ी गठान की बात सामने आई. इसके बाद डॉक्टरों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद मरीज को सुरक्षित उपचार प्रदान किया, उन्होंने सफलतापूर्वक ऑपरेशन को अंजाम दिया. यह ऑपरेशन सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ. दर्पण टोके के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया. डॉक्टरों द्वारा सर्जरी के दौरान विशेष सावधानियां बरती गई, ताकि मरीज को किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा लिया. डॉक्टरों ने किया महिला का जटिल ऑपरेशन एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. श्वेता शिवहरे ने बेहोशी की प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से संभाला, जिससे ऑपरेशन बिना किसी बाधा के पूरा हो सका. अब महिला मरीज की हालत में सुधार हो रहा है. सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति सामान्य बताई जा रही है और वह अब डॉक्टरों की निगरानी में स्वस्थ हो रही हैं, जिला अस्पताल के लिए यह सर्जरी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जो यहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञता को दर्शाती है. इस सफलता पर सीएमएचओ डॉ आरके वर्मा और सिविल सर्जन डॉ प्रदीप मोजेस ने इस ऑपरेशन में शामिल डॉक्टर व नर्सिंग टीम की सराहना की है, उन्होंने सभी को बधाई दी और भविष्य में भी इसी प्रकार जनसेवा के लिए कार्य करते रहने की शुभकामनाएं दी हैं. सिविल सर्जन डॉ प्रदीप मोजेस ने बताया कि, ''इस सफल सर्जरी में नर्सिंग ऑफिसर निलिमा नेलसन और गायत्री ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके साथ ही अभय सिंह, हिमांशु एवं अन्य अस्पताल कर्मचारियों ने भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सहयोग प्रदान किया. टीमवर्क और समन्वय का अच्छा उदाहरण पेश किया, जिसने इस जटिल ऑपरेशन को संभव बनाया.'' महिला को मिली नई जिंदगी सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ दर्पण टोके ने बताया कि, ''महिला के पेट में दर्द होता था, इस दर्द स्व लंबे समय से जूझ रही थी, पिछले दिनों उसने जिला अस्पताल में जांच कराई, हमारी टीम ने ऑपरेशन की सलाह दी, इसके बाद उसके परिजन राजी हो गए. मंगलवार को ऑपरेशन किया, इस ऑपरेशन का मैंने नेतृत्व किया, टीम को सफलता मिली है, महिला को इस जटिल समस्या से निजात दिलाई है.''

पति-पत्नी के रिश्ते में दर्दनाक अंत, डॉक्टर ने पत्नी को इंजेक्शन देकर ली जान: पुलिस जांच जारी

बेंगलुरु बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल के 32 साल के जनरल सर्जन डॉ. महेंद्र रेड्डी ने अपनी चिकित्सकीय जानकारी का इस्तेमाल किसी की जान बचाने के बजाय अपनी पत्नी की जान लेने के लिए किया। छह महीने तक इसे प्राकृतिक मौत माना गया, लेकिन अब पुलिस ने खुलासा किया है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। 28 साल की त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) डॉ. कृतिका रेड्डी की मौत के मामले में उनके पति महेंद्र को 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, महेंद्र ने एनेस्थीसिया की जानलेवा खुराक देकर पत्नी की हत्या की। आपको बता दें कि दोनों का विवाह 26 मई 2024 को हुआ था। मौत से महज 11 महीने पहले। व्हाइटफील्ड डीसीपी एम. परशुराम ने बताया, “महेंद्र ने अपनी पत्नी की हत्या बड़ी सावधानी से योजनाबद्ध की थी। वह उसकी चिकित्सीय कमजोरियों को जानता था और उसने उसी का फायदा उठाया।” पुलिस जांच से पता चला कि 21 अप्रैल को महेंद्र ने अपने घर पर पत्नी को पेट दर्द के बहाने IV इंजेक्शन दिया। अगले दिन वह उसे मराठहल्ली स्थित मायके ले गया, यह कहते हुए कि उसे आराम की जरूरत है। 23 अप्रैल की रात, वह दोबारा ससुराल पहुंचा और एक और इंजेक्शन लगाया। अगले दिन सुबह 24 अप्रैल को कृतिका को बेसुध पाया गया। डॉक्टर होने के बावजूद महेंद्र ने सीपीआर देने का प्रयास नहीं किया और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पहले इसे अनैसर्गिक मृत्यु बताया गया था, लेकिन पोस्टमार्टम और एफएसएस रिपोर्ट में शरीर में एनेस्थीसिया के अंश पाए गए। इसके बाद केस को हत्या में बदला गया। कृतिका के पिता के. मुनी रेड्डी की शिकायत पर महेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उन्होंने कहा, “हमारी बेटी को लगता था कि उसका विवाह सम्मान और प्रेम पर आधारित है। पर उसी मेडिकल ज्ञान का इस्तेमाल उसकी जान लेने के लिए किया गया।” जांच में पता चला कि शादी के बाद महेंद्र को यह मालूम हुआ कि कृतिका को लंबे समय से गैस्ट्रिक और मेटाबॉलिक विकार हैं। परिवार ने यह जानकारी पहले नहीं दी थी। पुलिस को शक है कि इसी बात ने उसके भीतर नाराजगी और प्रतिशोध की भावना पैदा की जो अंततः हत्या में बदल गई। पत्नी की मौत के बाद भी महेंद्र ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। उसने पुलिस से कहा कि उसकी पत्नी की मौत स्वाभाविक थी। परंतु FSL रिपोर्ट के बाद पुलिस ने उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) के तहत गिरफ्तार किया। बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने कहा, “पुलिस टीम ने उस हत्या को उजागर किया जिसे एक मेडिकल दुर्घटना की तरह पेश किया गया था।” डॉक्टर कृतिका वह 4 मई को अपना खुद का क्लिनिक स्किन एंड स्कैल्पेल खोलने वाली थीं। उनके सहयोगियों ने बताया, “वह हमेशा कहती थीं कि डर्मेटोलॉजी के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती हैं। यह सोचना भी दर्दनाक है कि उनका अपना पति ही उनके खिलाफ हो गया।”