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राजस्थान में दिल दहला देने वाली घटना: स्कूल जाते ही 4 साल के बच्चे पर कुत्ते का हमला

बीकानेर राजस्थान के बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल के पहले ही दिन चार साल का एक मासूम आवारा कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना उपनी गांव के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल की है, जहां बच्चा अपने बड़े भाई के साथ पहली बार स्कूल गया था। रिपोर्ट के मुताबिक क्लास से बाहर निकलते ही मेन गेट के पास आवारा कुत्तों ने उसे घेर लिया और बुरी तरह नोंच डाला। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल का गेट खुला होने और सुरक्षा गार्ड ना होने के कारण कुत्ते परिसर में दाखिल हुए। बच्चे को तुरंत बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, कुत्तों ने बच्चे के सिर की खाल को बुरी तरह फाड़ दिया है, जिससे उसे गहरे जख्म आए हैं। इस घटना ने स्कूल प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

शादी के मंडप में बवाल: कुत्ते को लेकर भिड़े दोनों पक्ष, लाठी-डंडे चले, चार घायल

फतेहपुर यूपी के फतेहपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक शादी समारोह में कुत्ते को लेकर जमकर बवाल हो गया। वर और वधू पक्ष के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मामला हाथापाई तक आ गया। दोनों तरफ से हुई मारपीट में चार लोग घायल हो गए। इसके अलावा शादी भी टूट गई। वहीं, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ये मामला खागा क्षेत्र के कैनाल स्थित एक मैरिज हॉल की है। जानकारी के मुताबिक कल रात 19 फरवरी इस मैरिज हॉल में शादी थी। रात करीब तीन बजे वरमाला के बाद वैवाहिक रस्मों की तैयारी चल रही थी। चर्चा रही कि इसी दौरान कन्या पक्ष के साथ आया पालतू कुत्ता मंडप के पास पहुंच गया। उसे हटाने को लेकर शुरू हुई कहासुनी ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। आरोप प्रत्यारोप के बीच दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। लोगों को कमरों में बंद करना पड़ा। इस लेकर मौके पर अफरा तफरी मच गई। दोनों तरफ से हुई मारपीट में महिला समेत चार लोग घायल हो गए। वहीं, महिलाएं बचाव के लिए चिल्लाती रहीं। मैरिज हॉल में मारपीट की सूचना पर पहुंची पुलिस ने हालात काबू में किए और घायलों को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया। जहां हालत गंभीर देख प्राथमिक उपचार के बाद सभी को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इस मामले में कोतवाली प्रभारी रमेश पटेल ने बताया कि सूचना पर पुलिस गई थी। कुत्ते को लेकर वर एवं वधू पक्ष में झगड़ा और मारपीट हो गया था। बाद में दोनों ने आपसी समझौता करते हुए शादी तोड़ने का फैसला किया है। लेनदेन कर तोड़ दी शादी गुरुवार को मारपीट के बाद दोनों पक्षों ने आपसी समझौते के अंतर्गत शादी न करने का फैसला किया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पक्षों से मिले उपहार एवं आभूषणों को लौटा दिया। घटना के बाद चर्चा का विषय यही रहा कि जहां विवाह जैसे पवित्र संस्कार को केंद्र में होना चाहिए था, वहां एक कुत्ते की एंट्री ने पूरा माहौल बिगाड़ दिया।  

झारखंड के नसबंदी डेटा पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, अन्य राज्यों को भी लगाई फटकार

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले पर साफ कहा कि राज्य सरकारें सिर्फ हवा में बातें कर रही हैं. धरातल पर कोई ठोस काम नहीं दिख रहा है. एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट के सामने कई राज्यों की रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट ने राज्यों की पोल खोलकर रख दी है. बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख राज्यों के प्रति बहुत सख्त नजर आया है. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य के वकीलों को आगे बुलाया और दखल देने वालों को पीछे हटने को कहा. बेंच ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि वकीलों को संभालना बहुत मुश्किल काम हो गया है. पहले सिस्टम को ठीक करना जरूरी है. सुनवाई के दौरान एमीकस क्यूरी ने चार मुख्य बिंदुओं पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है. इसमें एबीसी सेंटर्स की कार्यप्रणाली और डॉग शेल्टर बनाने की बात शामिल है. संस्थानों से कुत्ते हटाने और हाईवे से मवेशी हटाने पर भी चर्चा हुई है. कोर्ट ने राज्यों के हलफनामों को देखने के बाद उन्हें ‘आई वॉश’ यानी आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है. पढ़ें, आज की सुनवाई में क्या-क्या हुआ. असम और झारखंड के आंकड़ों में क्या है फर्जीवाड़ा? असम सरकार की रिपोर्ट ने कोर्ट को सबसे ज्यादा हैरान किया है. असम में डॉग बाइट यानी कुत्तों के काटने के आंकड़े बहुत डरावने हैं. साल 2024 में वहां कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले सामने आए थे. साल 2025 के सिर्फ जनवरी महीने में ही 20900 मामले दर्ज हुए हैं. कोर्ट ने इन आंकड़ों को देखकर बहुत चिंता जाहिर की है. असम के पास कुत्तों के लिए पर्याप्त सेंटर भी मौजूद नहीं हैं. एमीकस क्यूरी ने बताया कि असम में 318 स्टेडियम हैं लेकिन कुत्तों के लिए व्यवस्था नहीं है. कोर्ट ने कहा कि असम के हलफनामे में मैनपावर की जानकारी ही गायब है. असम सरकार ने इसके लिए 6 महीने का समय मांगा है. वहीं, झारखंड के आंकड़ों ने तो कोर्ट को गुस्से से भर दिया. झारखंड सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 1.89 लाख कुत्तों की नसबंदी की है. कोर्ट ने जब गहराई से देखा तो पता चला कि इसमें से 1.6 लाख नसबंदी सिर्फ 2 महीने में दिखाई गई है. कोर्ट ने इसे पूरी तरह फर्जी आंकड़ा करार दिया है. जजों ने पूछा कि एक गाड़ी में एक दिन में कितने कुत्ते पकड़े जा सकते हैं. झारखंड के इन आंकड़ों को कोर्ट ने पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है. शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों में कुत्तों का खतरा कैसे टलेगा? सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों से कुत्ते हटाने पर विशेष जोर दिया है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि कर्नाटक ने संस्थानों में कुत्तों की पहचान तो की है लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया है. कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक ने अब तक एक भी कुत्ता संस्थानों से बाहर नहीं निकाला है. जजों ने साफ किया कि हर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के पास बाउंड्री वॉल होनी चाहिए. सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत जरूरी है. स्कूलों में बाउंड्री वॉल न होना बच्चों के लिए बड़ा खतरा है. कोर्ट ने राज्यों से पूछा कि उन्होंने इन संस्थानों से कुत्ते हटाने के लिए क्या किया है. हरियाणा जैसे राज्यों का हलफनामा इस मामले में पूरी तरह चुप है. कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य समय मांगते तो समझ आता. लेकिन गलत और अस्पष्ट जानकारी देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राज्यों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि आप लोग सिर्फ हवा में महल बना रहे हैं. किसी भी राज्य ने डॉग बाइट के सही आंकड़े पेश नहीं किए हैं. केवल असम ने ही इस मामले में डेटा दिया है जो कि बहुत डराने वाला है. गोवा और केरल के टूरिज्म पर आवारा कुत्तों का क्या असर है? सुनवाई के दौरान गोवा और केरल के समुद्र तटों यानी बीचेस पर चर्चा हुई है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि गोवा के बीचेस पर बहुत ज्यादा कुत्ते मौजूद हैं. वहां ये कुत्ते शैक और मछली के अवशेषों पर निर्भर रहते हैं. कोर्ट ने कहा कि इससे गोवा का टूरिज्म बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. हाल ही में एससीओआरए कॉन्फ्रेस के दौरान जजों ने खुद यह स्थिति देखी है. जजों का कहना है कि इन कुत्तों को वहां से हटाकर अच्छी जगह रखना होगा. इनके लिए कोई बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की जरूरत नहीं है. बस एक सुरक्षित जगह चाहिए जहां इनकी देखभाल हो सके. गुजरात सरकार ने बताया कि उन्होंने इसके लिए 60 करोड़ का बजट रखा है. अगले साल के लिए 75 करोड़ का बजट भी तय किया गया है. लेकिन कोर्ट गुजरात की रिपोर्ट से भी संतुष्ट नहीं दिखा है. वहां डॉग पाउंड्स के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी है कि वे अगले हलफनामे में सही डेटा पेश करें. हाईवे पर आवारा पशुओं से होने वाले हादसों का जिम्मेदार कौन है? कोर्ट ने कुत्तों के साथ-साथ हाईवे पर आवारा मवेशियों के मुद्दे को भी उठाया है. एनएचएआई और राज्यों को इस पर मिलकर काम करने को कहा गया है. एमीकस क्यूरी ने हाईवे पर उन जगहों की पहचान करने को कहा है जहां मवेशी सबसे ज्यादा आते हैं. असम में राइनो यानी गैंडों के हाईवे पार करने की समस्या पर भी बात हुई है. इसके लिए वहां एलिवेटेड रोड बनाई गई है. कोर्ट ने कहा कि मवेशियों के हाईवे पर आने के कारणों का पता लगाना जरूरी है. आंध्र प्रदेश ने 14000 संस्थानों की पहचान की है जहां फेंसिंग का काम चल रहा है. लेकिन एमीकस क्यूरी का कहना है कि नसबंदी सेंटर्स की क्षमता का ऑडिट होना चाहिए. राज्यों को यह बताना होगा कि उनके पास मौजूद सेंटर पूरी तरह इस्तेमाल हो रहे हैं या नहीं. कोर्ट ने कहा कि पालतू कुत्ते भी कभी-कभी काट लेते हैं चाहे उन्हें वैक्सीन लगी हो. इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए. कोर्ट अब इस मामले में राज्यों के खिलाफ सख्त आदेश पारित करने की तैयारी में है.

MP में कुत्तों और मवेशियों का ‘आतंक’ खत्म होगा, स्कूल और अस्पतालों के बाहर बनाई जाएगी ‘किलानुमा’ दीवार

भोपाल  मध्यप्रदेश की गलियों और मुख्य सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे आवारा कुत्तों और बेसहारा मवेशियों के खिलाफ मोहन सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा 'डेथ वारंट' जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने एक ऐसी एसओपी (SOP) तैयार की है, जो शहरों की तस्वीर बदल देगी। अब आवारा जानवरों का खुलेआम घूमना बीते दिनों की बात होगी। खूनी आंकड़ों ने हिलाया प्रशासन: 6 महीने, 14 हजार शिकार प्रदेश के छह बड़े शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रतलाम को पूरी तरह 'रैबीज मुक्त' करने का महाभियान शुरू हो रहा है। यह फैसला बेवजह नहीं है; साल 2025 के शुरुआती छह महीनों में ही इन शहरों में 13,947 निर्दोष लोग खूंखार कुत्तों का शिकार बन चुके हैं। किलानुमा बाउंड्रीवाल से सुरक्षित होंगे सार्वजनिक स्थल नई एसओपी के तहत अब स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील इलाकों के चारों ओर ऊंची बाउंड्रीवाल खड़ी की जाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इन 'सेफ जोन' में एक भी कुत्ता या मवेशी नजर नहीं आना चाहिए। स्थानीय निकायों को आदेश दिए गए हैं कि वे उन 'हॉटस्पॉट्स' को तुरंत चिह्नित करें जहां कुत्तों का आतंक सबसे ज्यादा है। बनेगा आश्रय, मवेशियों पर भी होगा कड़ा पहरा सड़कों पर यमराज की तरह घूमने वाले बेसहारा मवेशियों को अब गौशालाओं और शेल्टर होम्स का रास्ता दिखाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य साफ है: आम आदमी की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और बेसहारा जानवरों को भी व्यवस्थित ठिकाना मिलेगा।  

इंदौर में डॉग फीडिंग के नियमों में बदलाव, निगम ने 172 फूड प्वाइंट्स तय कर सख्त गाइडलाइन जारी की

इंदौर नगर निगम ने शहर में आवारा श्वानों को लेकर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है। शहरभर के सभी वार्डों में 172 स्थानों को आवारा श्वानों के लिए फूड प्वाइंट के रूप में चिन्हित किया गया है। इन स्थानों पर आने वाले दिनों में सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे, ताकि नागरिकों को तय स्थानों की जानकारी मिल सके। शहर में विवाद रोकने के लिए तय किए गए फूड प्वाइंट नगर निगम द्वारा सभी जोनों के अंतर्गत आने वाले वार्डों में ऐसे खुले स्थानों की पहचान की गई है, जहां आवारा श्वानों को भोजन दिया जा सके। अक्सर गलियों और रहवासी इलाकों में श्वानों को भोजन देने को लेकर विवाद की स्थिति बनती रही है। इसी को देखते हुए निगम ने ऐसे स्थान तय किए हैं, जहां किसी भी रहवासी को आपत्ति न हो। ये स्थान खुले इलाकों में और रहवासी क्षेत्रों से दूर रखे गए हैं। 172 स्थानों की सूची निगम वेबसाइट पर उपलब्ध नगर निगम अधिकारी डॉ. उत्तम यादव के अनुसार पहले चरण में 172 स्थानों को आवारा श्वानों के लिए फूड प्वाइंट के रूप में चिह्नित किया गया है। इन सभी स्थानों की सूची निगम की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। जल्द ही यह सूची सभी जोनल कार्यालयों को भेजी जाएगी, ताकि संबंधित कार्यालयों में इसे चस्पा किया जा सके। तय स्थानों पर सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे, जिससे लोग केवल निर्धारित स्थानों पर ही भोजन सामग्री दे सकें। नियम तोड़ने वालों पर होगी चालानी कार्रवाई नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे आवारा श्वानों को भोजन केवल तय किए गए फूड प्वाइंट पर ही दें। प्रारंभ में लोगों को समझाइश दी जाएगी, लेकिन बाद में नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। निर्धारित स्थानों के अलावा अन्य जगहों पर श्वानों को भोजन देने वालों के खिलाफ निगम द्वारा चालान बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। पालतू श्वान मालिकों के लिए भी जारी की चेतावनी नगर निगम ने पालतू श्वान पालने वालों के लिए भी जाहिर सूचना जारी की है। निगम ने श्वान मालिकों से अपील की है कि वे अपने पालतू श्वानों का रजिस्ट्रेशन और टीकाकरण अनिवार्य रूप से कराएं। पत्थर गोदाम रोड स्थित निगम मुख्यालय में टीकाकरण और रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है। निगम के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में श्वान पालने वाले ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक अपने श्वानों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है।  

रायगढ़ में कुत्तों को नसबंदी के बाद बिरयानी? कांग्रेस और मेयर के बीच सत्ता-विपक्ष की भिड़ंत

रायगढ़ रायगढ़ नगर निगम के आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके आहार को लेकर शहर में विवाद खड़ा हो गया है। महापौर जीवर्धन चौहान ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों का बधियाकरण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उन्हें बताया गया कि नसबंदी के बाद कुत्ते दो दिन तक कुछ नहीं खाते। ऐसे कमजोर कुत्तों को विशेष आहार के तौर पर बिरयानी खिलाई जाती है। महापौर का यह बयान अलग तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश किया जाने लगा, जिसके बाद विपक्ष के नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार और अनावश्यक खर्च बताया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी आवारा कुत्तों के आहार और खर्च पर पारदर्शिता नहीं दिखा रही है। वहीं कुत्तों को बिरयानी खिलाने को लेकर निगम के नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने बीजेपी मेयर जीवर्धन चौहान को घेरा है। उन्होंने ने कहा कि अब आवारा कुत्ते भी बिरयानी खाएंगे। कुत्तों को चिकन या मटन किसकी बिरयानी खिलाई जाएगी। इसके लिए फंड किस मद से खर्च किया जाएगा। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, रायगढ़ में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान शुरू किया गया है। पिछले दिनों रायगढ़ के महापौर जीवर्धन चौहान खुद नसबंदी केंद्र पहुंचे। वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। कुत्तों की देखभाल और दिए जाने वाले भोजन की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान महापौर जीवर्धन चौहान ने कुत्तों को पौष्टिक आहार देने की बात कही। उन्होंने अपने बयान में कुत्तों को खिचड़ी, दलिया और बिरयानी का जिक्र किया। महापौर के इसी बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। चिकन या मटन की खिलाएंगे बिरयानी- कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने कहा कि, अगर आवारा कुत्तों को बिरयानी खिलाई जाएगी, तो यह स्पष्ट किया जाए कि वह चिकन की होगी या मटन की। साथ ही सवाल उठाया कि इसके लिए शासन से कोई आदेश आया है या नहीं। खर्च किस मद से किया जाएगा। नगर निगम ने इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए भिलाई के एक एनजीओ को जिम्मेदारी सौंपी है। एनजीओ कुत्तों को ट्रांसपोर्ट नगर लाकर नसबंदी करता है और दो दिनों तक उन्हें वहां रखकर स्वास्थ्य स्थिति की जांच करता है। नसबंदी और स्वास्थ्य देखभाल की निगरानी के लिए तीन डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। महापौर जीवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया, “मैं बधियाकरण का निरीक्षण करने गया था। टीम ने मुझे कुत्तों की नसबंदी, खान-पान और उपचार की जानकारी दी। कुछ कुत्ते नसबंदी के बाद एक-दो दिन तक खाना नहीं खाते हैं, इसलिए उनको बिरयानी दी जाती है। इस बयान को अलग तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।” नगर निगम रायगढ़ ने आवारा कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए बजट भी तय किया है। इस राशि के तहत एनजीओ को समुचित व्यवस्था करने और कुत्तों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने का निर्देश दिया गया है। शहर में इस समस्या को लेकर अभी भी बहस जारी है और राजनीतिक बयानबाजी तेज़ है।     शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा रह है। इसके लिए बजट भी तय किया गया है। इस राशि में एनजीओ को समुचित व्यवस्था करना है। बधियाकरण का निरीक्षण करने मैं गया था, वहां टीम से कुत्तों की नसबंदी, खान-पान व उपचार की जानकारी दी। यह भी बताया गया कि कुछ कुत्ते नसबंदी के बाद एक-दो दिन खाना नहीं खाते है, तो उनको बिरयानी खिलाया जाता है। बिरयानी खिलाने वाले बयान को अलग तरीके से तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।     – जीवर्धन चौहान महापौर, नगर निगम रायगढ़।  

कॉलेज-स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की मॉनिटरिंग अनिवार्य, शिक्षकों को जल्द सौंपनी होगी रिपोर्ट

चंडीगढ़  सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हरियाणा के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा निदेशालय की ओर से आए आदेशों में कहा गया है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय, कॉलेज और स्कूल में एक प्रोफेसर या शिक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो कुत्तों की निगरानी और जोखिम की स्थिति में स्थानीय प्रशासन या नगर निगम को सूचित करने की जिम्मेदारी निभाएगा। इसके तहत रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, हिसार, कैथल सहित अन्य जिलों के स्कूलों में खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश भेजे जा चुके हैं। हर स्कूल में नोडल अधिकारी का नाम, पद और मोबाइल नंबर परिसर में प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही इस कार्य की रिपोर्ट शुक्रवार तक मांगे जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। हसला ने जताई नाराजगी हालांकि, इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (HASLA) के राज्य प्रधान सतपाल सिंधु ने कहा कि शिक्षक पहले ही शिक्षण कार्य के अतिरिक्त 20 से अधिक गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। अब कुत्तों की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं सौंपना बिल्कुल अनुचित है।   आदेश तुरंत रद्द किए जाऐं उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मूल भूमिका विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है, न कि पशु नियंत्रण से जुड़े कार्य करना। आवारा पशुओं व कुत्तों को नियंत्रित करना नगर निगम, पशुपालन विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसे शिक्षकों पर थोपना शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करेगा। शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि यह आदेश तुरंत रद्द किया जाए और आवारा कुत्तों के प्रबंधन का दायित्व संबंधित विभागों को ही सौंपा जाए।

पेबल बे फेस 1, बागमुगलिया कटारा हिल्स में आवारा कुत्ते ने बच्चे को काटा

बागमुगलिया बागमुगलिया कटारा हिल्स स्थित पेबल बे फेस 1 में आवारा कुत्तों का आतंक एक बार फिर सामने आया है। ताज़ा घटना में एक बच्चे को आवारा कुत्ते ने काट लिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, निगम की टीम कई बार इन कुत्तों को पकड़ने आती है, लेकिन वहां मौजूद कुछ डॉग लवर्स इन कुत्तों को पकड़ने नहीं देते। निवासियों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में जिन लोगों ने कुत्तों को पकड़ने से रोका, उन पर भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

मध्य प्रदेश में डॉग बाइट्स रिपोर्ट: रतलाम टॉप पर, भोपाल सबसे नीचे

भोपाल  नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) द्वारा राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भारत सरकार के निर्देश पर मध्य प्रदेश के छह बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रतलाम में डाग बाइट्स के मामलों का सर्वे किया गया। यह सर्वे वर्ष 2024 और जनवरी से जून 2025 की अवधि को लेकर किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, छह शहरों में राजधानी भोपाल में डॉग बाइट्स के सबसे कम मामले दर्ज हुए, जबकि रतलाम इस मामले में पहले स्थान पर रहा। वहीं उज्जैन दूसरे, इंदौर तीसरे, जबलपुर चौथे और ग्वालियर पांचवें स्थान पर रहा। वर्ष 2024 में भोपाल में 19 हजार 285 डॉग बाइट्स के मामले सामने आए, जो औसत 0.8 प्रतिशत रहा। वहीं 2025 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में यह औसत घटकर मात्र 0.07 प्रतिशत रह गया। आंकड़े बताते है शहर में डाग बाइट्स के मामलों में कमी आई है। हर साल 22 हजार आवारा श्वानों की कर रहे नसबंदी रैबीज मुक्त शहर-2030 कार्यक्रम के तहत भोपाल नगर निगम ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर भारत सरकार को भेजी है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में यह योजना भेजने वाला भोपाल ही एकमात्र शहर है। योजना के क्रियान्वयन के तहत नगर निगम शहर में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर संचालित कर रहा है, जहां हर साल लगभग 22 हजार आवारा डॉग्स की नसबंदी की जा रही है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक 10 वार्ड पर एक नसबंदी केंद्र होना चाहिए, लेकिन भोपाल में मानक से कम केंद्रों के बावजूद अधिक से अधिक आवारा डॉग की नसबंदी की जा रही है। उपलब्ध संसाधनों की तुलना में नसबंदी आपरेशन की संख्या काफी अधिक है, जिसके परिणामस्वरूप डॉग बाइट्स के मामलों में कमी दर्ज की गई है।  

नगर निगम का अनोखा फैसला: बेंगलुरु के आवारा कुत्तों को मिलेगा चिकन और चावल, बजट 2.9 करोड़

बेंगलुरु  कर्नाटक के राजधानी बेंगलुरु के आवारा कुत्तों के लिए सरकार ने नई पहल की शुरुआत की है. बेंगलुरु की बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) ने ‘कुक्किर तिहार’ नाम के योजना के तहत शहर के 5,000 आवारा कुत्तों के लिए पोषण युक्त भोजन प्रदान किया जाएगा. इसके तहत रोजाना स्ट्रीट डॉग्स को 367 ग्राम चिकन राइस परोसा जाएगा.  इस योजना के तहत हर कुत्ते पर प्रतिदिन 22 रुपये खर्च आएंगे और सालाना खर्च लगभग 2.88 करोड़ रुपये होगा. शुरुआत में इसे ‘कुक्किर तिहार’ नाम से पेश किया गया था, जो एक जनभागीदारी अभियान है. इसका उद्देश्य सिर्फ कुत्तों को खाना देना नहीं, बल्कि लोगों को भी यह समझाना है कि आवारा पशुओं की देखभाल सामूहिक जिम्मेदारी है.  कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने जताई आपत्ति बेंगलुरु में स्ट्रीट डॉग्स को चिकन राइस खिलाने की योजना पर तमिलनाडु से कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा, 'क्या यह सच है? कुत्तों की सड़कों पर कोई जगह नहीं होनी चाहिए. उन्हें शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाना चाहिए, जहां उनका टीकाकरण और नसबंदी हो सके. उन्हें सड़कों पर घूमने की आज़ादी देकर खाना खिलाना एक गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा खतरा है'. 28 मार्च 2025 को कार्ति चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की थी, जिसमें उन्होंने देशभर में आवारा कुत्तों से जुड़ी बढ़ती स्वास्थ्य और सुरक्षा समस्याओं पर चिंता जताई.  कार्ति चिदंबरम ने साथ ही में एक्स पर लिखा,  भारत में करीब 6.2 करोड़ आवारा कुत्ते हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ी आबादी में से एक है.  इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भारत आज भी रेबीज से प्रभावित देशों में शामिल है, और दुनिया में होने वाली रेबीज से मौतों में 36 फीसदी सिर्फ भारत में होती हैं. उन्होंने ये भी कहा कि भले ही 2023 में पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम लागू किए गए हों, लेकिन उनका प्रभावी इम्प्लीमेंटेशन नहीं हो पाया. राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने का सुझाव कार्ति चिदंबरम ने इस संकट के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने का प्रस्ताव रखा, जो व्यापक, मानवीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस समस्या का हल तलाशे और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर काम करे. उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि देशभर में स्थायी शेल्टर हाउस और एक दीर्घकालिक रणनीति बनाई जानी चाहिए, ताकि आवारा पशुओं से जुड़ी समस्या को स्थायी रूप से सुलझाया जा सके.  BBMP ने आमंत्रित किए टेंडर, 8 जोन में रोजाना कुत्तों को खाना खिलाने की योजना BBMP के पशुपालन विभाग ने एक नई पहल के तहत आठ जोन में आवारा कुत्तों को रोज़ाना भोजन उपलब्ध कराने के लिए टेंडर जारी किया है.  प्रस्ताव के अनुसार, हर ज़ोन में 500 कुत्तों को खाना खिलाने की योजना है, जिनमें ईस्ट, वेस्ट, साउथ, आरआर नगर, दसरहल्ली, बोम्मनहल्ली, येलहंका और महादेवपुरा शामिल हैं. पहले चरण में कुल 4,000 कुत्तों को प्रतिदिन खाना देने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि आखिरी लक्ष्य 5,000 कुत्तों तक पहुंचना है. FSSAI-पंजीकृत कैटरर्स ही कर सकेंगे निविदा में भाग इस योजना के तहत केवल वे ही कैटरिंग सर्विस प्रोवाइडर्स निविदा में भाग ले सकते हैं, जो भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से पंजीकृत हैं. अनुबंध शुरू में एक वर्ष के लिए वैध होगा, और प्रदर्शन के आधार पर इसे BBMP मुख्य आयुक्त की मंजूरी से एक साल और बढ़ाया जा सकता है.