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समग्र और सुव्यवस्थित विकास का ख़ाका खींच कर योगी सरकार काशी को विश्व पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभार रही है

प्राचीन काल से ही काशी अपनी संस्कृति, धर्म, अध्यात्म और विरासत के लिए विश्वभर में रही है ख्यातिप्राप्त वाराणसी प्राचीन संस्कृति,आध्यात्मिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध काशी जिसे दुनिया "वाराणसी" और 'बनारस' के नाम से भी जानती है। अब ये शहर एक बार फिर अपने पुराने वैभव की ओर लौट रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार के नेतृत्व में चल रहे सतत विकास कार्यों के चलते यह नगरी न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनी हुई है, बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर भी नई चमक के साथ उभर रही है। योगी सरकार द्वारा 2017 में प्रदेश की बागड़ोर संभाले के बाद वाराणसी के पर्यटन विकास को प्राथमिकता मिली। आठ सालों के दौरान 35,705.07 लाख रुपये की लागत से 79 परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ । इन परियोजनाओं में से कई कार्य पूर्ण हो चुका हैं, जबकि कई पर्यटन विकास कार्यो पर काम तीव्र गति से चल रहा हैं। काशी के समग्र और सुव्यवस्थित विकास का ख़ाका खींच कर योगी सरकार काशी को विश्व पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभार रही है। पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार ने बताया कि पिछले करीब 8 सालों में 19219.57 लाख की लागत से 49 पर्यटन के विकास कार्यो को कराया जा चुका है। जबकि 30 पर्यटन विकास के महत्वपूर्ण विकास कार्यों को 16485.5 लाख रूपये की लागत तेजी से कराया जा रहा है।   19219.57 लाख की लागत से पूर्ण हुए प्रमुख पर्यटन विकास के कार्य  गलियों का शहर कहे जाने वाली काशी की गलियों के सौंदर्यीकरण को आधुनिक तरीके से विकसित किया गया है। घाटों का सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। काशी की चार धाम यात्रा,काशी विष्णु यात्रा,द्वादश आदित्य यात्रा, नव दुर्गा, अष्ट भैरव, नव गौरी, विनायक, द्वादशज्योतिर्लिंग के लिए पावन पथ का निर्माण कार्य, पंचक्रोशी यात्रा के पांच पड़ाव के पर्यटन विकास का कार्य एवं अन्य कई धार्मिक यात्राओ और मार्ग में पड़ने वाले मंदिरो का विकास, रोहनिया, पिंडरा, शिवपुर आदि क्षेत्रो के ग्रामीण इलाकों में प्राचीन आस्था के केंद्र, मंदिरो, तालाबों, कुंडो आदि का कार्य, सामने घाट एवं रामनगर में शास्त्रीय घाट का पक्के घाट के रूप में निर्माण।  मांर्कण्डये महादेव मंदिर, सारंग नाथ तालाब, शूलटंकेश्वर मदिर गंगा घाट व अन्य मंदिरो और घाटों, सारनाथ में लाइट एंड साउंड शो, बुद्धा थीम पार्क, संत शिरोमणि रविदास जी के जन्म स्थली पर जन सुविधा के कार्य,  क्रूज़ बोट का संचालन, लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर पर्यटन सूचना केंद्र, नरसिंह मठ, शंकुलधारा मठ, राजघाट पर चेंजिंग रूम, पिंडरा में माँ भद्रकाली मंदिर का सौंदर्यीकरण आदि कार्य है।  16485.5 लाख की लागत से  प्रमुख से गतिमान पर्यटन विकास के कार्य  टूरिज्म डेवलपमेंट के योजना के अंतर्गत, जैन तीर्थंकर चंद्रप्रभु की जन्मस्थली चंद्रावती, सारनाथ के सारंग नाथ मंदिर का पर्यटन विकास, मणिकर्णिका घाट सतुआ बाबा आश्रम का पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण एवं डोमरी स्थित आश्रम में यात्री निवास, पर्यटन आवास गृह परेड कोठी व राही पर्यटक आवास गृह का उच्चीकरण मनारी रोड पर सरफेस पार्किंग, संत रविदास पार्क सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार, तेलियाना घाट पर निषादराज की प्रतिमा, मांडवी कुंड व गणेश मंदिर, हेलीपोर्ट, सात प्रमुख घाटों पर 7 जेटी चेंजिंग रूम, गुरुधाम मंदिर का पर्यटन विकास, थाईवट टेम्पल (बुद्धा स्टेचू ) पर फसाद लाइट, करखियाँव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पार्क का निर्माण, लमही स्थित मुंशी प्रेमचंद के घर को संग्रहालय के रूप में विकसित करना, बौद्ध परिपथ में साइनेज, नगवा स्थित संत रविदास पार्क का सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार, मांडवी कुंड का सौंदर्यीकरण, संत कबीर प्राकट्य स्थल का पर्यटन विकास आदि पर्यटन विकास के कई कार्य निर्माणाधीन है।  काशी में पर्यटन विकास पर लोगों की राय  "योगी सरकार ने काशी  का चौतरफा विकास कराया है,जिसमे छोटे से लेकर बड़े पर्यटन स्थल का जीर्णोद्धार हुआ है। जिसको देखने के लिए पर्यटकों अब अधिक दिन तक काशी प्रवास कर रहे है। इससे होटल उद्योग को लाभ हो रहा है।"   होटल व्यवसायी , विकास अग्रवाल  "पहले पर्यटकों श्री काशी विश्वनाथ धाम, घाट ,सारनाथ  आदि स्थानों तक सिमित रहते थे , योगी सरकार ने पिछेल साढ़े आठ सालो में पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से विकास कराया है। इन स्थलों तक आसानी से पहुंचना ,अच्छी सुविधा होना ,और रख-रखाव अच्छा होने से पर्यटकों का आवागमन बढ़ रहा है। जिससे काशी के पर्यटन उद्योग को काफी फायदा हों रहा है।"   अभिषेक शर्मा, गवर्मेंट एप्रूव्ड गाइड, यूपी टूरिज्म

रायपुर में ट्रैफिक से राहत का रोडमैप: पाँच मुख्य सड़कों को 6 और 8 लेन तक किया जाएगा चौड़ा

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी में सिक्स लेन सिर्फ रायपुर से सिगमा तक है. बाकी राजधानी को जोड़ने वाली ज्यादातर सड़कें 4 लेन है. इसलिए राजधानी को रफ्तार देने के लिए करीब 5 सिक्स लेन और आठ लेन सड़क बनेगी, इसमें रायपुर-विशाखापट्टनम, रायपुर- लखनादौन, रायपुर – बलौदाबाजार, दुर्ग-आरंग बाइपास सिक्स लेन और सिगमा से बिलासपुर सड़क 8 लेन चौड़ी होगी. ये सड़कें न केवल यात्रियों की दूरी कम करेंगी, बल्कि समय, ईंधन और ट्रैफिक जाम से भी निजात दिलाएंगी. छत्तीसगढ़ में इन सड़कों के प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है. ये प्रोजेक्ट राज्य की परिवहन व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाएंगे. राजधानी से जुड़े होने के कारण उक्त प्रोजेक्ट पूरे होने पर यात्री सुविधा के साथ माल ढुलाई आसान होगी. सड़क विस्तार से कारोबार बढ़ेगा. रायपुर से सारंगढ़ 186 किमी लंबी फोरलेन रायपुर से सारंगढ़ तक की 186 किलोमीटर लंबी सड़क को फोरलेन किया जा रहा है. इसमें रायपुर से धनेली 0 प्वाइंट से 53.1 किमी तक प्रथम चरण में, फिर 85.6 किमी तक दूसरे चरण में और अंत में 186 किमी तक तीसरे चरण में काम किया जाएगा. एनएच ने इस सड़क के एलाइन्मेंट की जानकारी जिला प्रशासन को सौंप दी है. लगभग 35 गांवों की जमीन पर पहले लगी खरीदी-बिक्री की रोक हटा ली गई है. एनएचएआई की टीम ने भूमि अभिलेखों का मिलान भी पूरा कर लिया है. अध्ययन में यह पाया गया कि अधिकतर भूमि पहले से ही नेशनल हाईवे की है, इसलिए मात्र 10% भूमि ही अधिग्रहित की जानी है. डीपीआर लगभग तैयार है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. यह फोरलेन रायपुर से बलौदाबाजार होते हुए सारंगढ़ जाएगी. इससे न केवल ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह एक नई लाइफलाइन बनेगा. इसका निर्माण दो चरणों में होगा. पहले चरण में ग्राम धनेली (रायपुर) से और वहां से ग्राम बिनौरी तक 72 किमी बनाई जाएगी. रायपुर – लखनादौन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे रायपुर से लखनादौन (मध्यप्रदेश) तक करीब 300 किमी लंबे छह लेन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे की योजना पर भी काम तेजी से चल रहा है. यह सड़क बालाघाट, सिवनी, छपारा और लखनादौन होते हुए रायपुर को जोड़ेगी और करीब 12 जिलों को इससे फायदा होगा. इस परियोजना की लागत करीब 15,000 करोड़ रुपए आंकी गई है. एनएचएआई ने इसके लिए तीन संभावित रूटों का सर्वे शुरू कर दिया है. इनमें से एक रूट कान्हा और पेंच नेशनल पार्क के पास से होकर गुजरता है, जिससे पर्यावरणीय बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं. रायपुर-बिलासपुर मार्ग 8 लेन रायपुर से बिलासपुर तक नेशनल हाईवे का नए सिरे से चौड़ीकरण होगा. एनएचएआई ने इसकी चौड़ाई बढ़ाकर 8 लेन करने जा रहा है. विभाग ने डीपीआर के लिए टेंडर डाक्यूमेंट्स बनाकर दिल्ली मुख्यालय भेज दिया है. रायपुर से सिमगा तक 8 लेन और सिमगा से बिलासपुर तक सिक्स लेन सड़क बनाई जाएगी. अभी ये सड़क रायपुर से सिमगा तक 6 लेन और सिमगा से बिलासपुर तक 4 लेन है. इसी सड़क को रायपुर से बिलासपुर तक 8 लेन बनाने की योजना पर काम हो रहा है. अफसरों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष तक टेंडर जारी कर काम शुरू कर दिया जाएगा. मुंबई-कोलकाता लिंक : दुर्ग – रायपुर होते हुए आरंग तक निर्माण भारतमाला परियोजना के तहत दुर्ग से आरंग के बीच 92.5 किमी लंबे सिक्स लेन इकॉनोमिक कॉरिडोर का भी निर्माण चल रहा है. यह राजनांदगांव, दुर्ग, पाटन, अभनपुर और आरंग तहसीलों से होकर गुजरेगा. यह दुर्ग से रायपुर होते हुए नई राजधानी तक जाने के मौजूदा 70-75 किलोमीटर के सफर को घटाकर 55 किलोमीटर कर देगा. इससे 20 किलोमीटर दूरी घटेगी, बल्कि समय और ईंधन की भी बचत होगी. यह कॉरिडोर मुंबई-कोलकाता आर्थिक कॉरिडोर में शामिल होगा. यह 6 लेन प्रोजेक्ट है. इसकी अनुमानित लागत 2297 करोड़ रुपए है.