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पैडल मारकर भगाएंगे नशा: जालंधर जिला प्रशासन की अनोखी पहल, युवाओं ने ली पंजाब को नशामुक्त बनाने की शपथ

जालंधर  पंजाब सरकार के 'नशे के विरुद्ध युद्ध' अभियान के तहत जालंधर जिला प्रशासन ने एपीजे स्कूल के सहयोग से 'साइक्लोथॉन 4.0' का आयोजन किया। इस मेगा इवेंट का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को नशीले पदार्थों के खिलाफ लामबंद करना और युवाओं को एक स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था। इस आयोजन में लगभग 2000 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जो नशामुक्त पंजाब के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ। डीसी ने खुद संभाली कमान डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने एपीजे स्कूल से हरी झंडी दिखाकर साइक्लोथॉन को रवाना किया। खास बात यह रही कि डीसी ने न केवल इस कार्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि खुद भी अन्य अधिकारियों के साथ साइकिल चलाकर लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार नशे के खिलाफ जंग लड़ रही है, लेकिन कोई भी लड़ाई बिना जन-सहयोग के नहीं जीती जा सकती। जालंधर के लोगों ने इस कार्यक्रम में भारी संख्या में पहुँचकर यह साबित कर दिया है कि वे इस बुराई को खत्म करने के लिए सरकार के साथ हैं। तीन श्रेणियों में हुआ रोमांचक सफर यह साइक्लोथॉन तीन अलग-अलग श्रेणियों—5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 21 किलोमीटर—में आयोजित की गई थी। 21 किलोमीटर की मुख्य दौड़ एपीजे स्कूल से शुरू होकर गीता मंदिर, शहीद मेजर कपिल विनायक चौक और शाहपुर कैंपस जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस स्कूल पर समाप्त हुई। रास्ते में प्रतिभागियों का लोगों ने जोरदार स्वागत किया। प्रतिभागियों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, जिससे एकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। बहुआयामी रणनीति और समाज सुधार प्रशासन केवल जागरूकता तक ही सीमित नहीं है। डीसी वालिया ने स्पष्ट किया कि जहां एक ओर नशे के कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर नशे की लत के शिकार मरीजों का मुफ्त इलाज और उनके पुनर्वास के प्रयास भी जारी हैं। पीड़ितों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले साइकिल चालकों और सहयोगियों को सम्मानित किया गया, जबकि लोक गायक दलविंदर दयालपुरी ने गीतों के माध्यम से युवाओं को नशों से दूर रहने का आह्वान किया।

एक महीने से लापता युवक पाकिस्तान में मिला, नशे के चक्कर में पार की भारत-पाक सीमा

चंडीगढ़  पंजाब के जालंधर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां सतलुज दरिया से सटे गांव भोयपुर का रहने वाला एक युवक गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गया. युवक की पहचान शरणजीत सिंह के रूप में हुई है. इस बात की जानकारी तब सामने आई जब पाकिस्तानी रेंजर्स ने हथकड़ी लगाए युवक की तस्वीर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर की.तस्वीर वायरल होते ही उसके परिवार में हड़कंप मच गया. शरणजीत सिंह के परिजनों ने बताया कि वह बीते कई दिनों से लापता था. उसके पिता सतनाम सिंह और माता अमरजीत कौर के अनुसार शरणजीत 2 नवंबर की शाम को घर से निकला था. उसे गांव का ही एक युवक मंदीप सिंह अपने साथ ले गया था. इसके बाद शरणजीत वापस घर नहीं लौटा. परिवार ने काफी तलाश की लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो थाना शाहकोट में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई. कुश्ती खिलाड़ी है शरणजीत परिजनों का कहना है कि शरणजीत पिछले करीब 10 सालों से कुश्ती का खिलाड़ी रहा है लेकिन बीते एक साल से वह नशे की लत का शिकार हो गया था. नशे की वजह से उसका व्यवहार भी बदल गया था और वह घरवालों की बात नहीं मानता था. परिवार का आरोप है कि उसका दोस्त मंदीप सिंह भी नशे का आदी है. वही उसे खेमकरण बॉर्डर एरिया के पास छोड़कर आया था. पहले मंदीप लगातार गुमराह करता रहा लेकिन बाद में उसने स्वीकार किया कि वह शरणजीत को तरनतारन के खेमकरण इलाके में छोड़ आया था. करीब 21 दिसंबर को सोशल मीडिया के जरिए परिवार को जानकारी मिली कि शरणजीत पाकिस्तान में पकड़ा गया है. वायरल तस्वीर में वह पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ हथकड़ियों में नजर आया. जानकारी के अनुसार शरणजीत को 20 दिसंबर को पाकिस्तान के कसूर जिले के सेहजरा इलाके में गंडा सिंह पुलिस स्टेशन क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया. उस पर अवैध रूप से सीमा पार करने का आरोप लगाया गया है. एक बेटा विदेश में, दूसरा पहुंचा सीमा पार शरणजीत के पिता सतनाम सिंह ने बताया कि उनका बड़ा बेटा कई सालों से विदेश में रह रहा है जबकि बेटी पंजाब में पढ़ाई कर रही है. परिवार पहले ही एक बेटे से दूर है और अब इस घटना ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है. माता-पिता ने भारत सरकार और प्रशासन से अपील की है कि उनके बेटे को सुरक्षित भारत वापस लाने के प्रयास किए जाएं. फिलहाल परिवार को प्रशासन की ओर से किसी ठोस जानकारी का इंतजार है. यह मामला एक बार फिर नशे और सीमा से सटे इलाकों में युवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.

नशे के खिलाफ बड़ी सफलता: हरियाणा के 4200 गांव नशामुक्त, 18 हजार लोग अब भी पीड़ित

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने स्वीकार किया है कि प्रदेश में ड्रग्स की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार के रिकार्ड के अनुसार इस समय प्रदेश में 18 हजार 847 युवा नशा पीड़ित हैं। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन रानियां से विधायक अर्जुन चौटाला ने कानून-व्यवस्था तथा अन्य विषयों से संबंधित सवाल पूछा। सदन में हंगामे के चलते सदन में चर्चा नहीं हो सकी लेकिन सरकार ने आज इसका जवाब दे दिया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी के हवाले से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक कुल 18 हजार 847 नशा पीड़ितों की पहचान की गई है। वर्तमान में 11 हजार 558 नशा पीड़ित विभिन्न केंद्रों में उपचार प्राप्त कर रहे हैं।  हरियाणा सरकार ने दावा किया है कि राज्य में 4238 गांवों तथा 913 वार्डों को नशा मुक्त घोषित किया जा चुका है। नशा तस्करी के मामलों में कार्रवाई के लिए गठित एचएसएनसीबी की सराहना करते हुए सरकार ने कहा है कि नशे के खिलाफ प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।