samacharsecretary.com

धनबाद में ED ने की रेड, कारोबारी ने रोकने के लिए छोड़े कुत्ते; थैलों में मिले भारी नोट और ज्वेलरी

रांची  केन्द्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement/ED) ने झारखंड (Jharkhand) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में कोयला माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई में बड़े खुलासे हुए हैं. 21 नवंबर की सुबह करीब साढ़े पांच बजे ही इस सर्च ऑपरेशन के दौरान झारखंड के 18 लोकेशन पर दबिश दी गई, जिसके बाद कोयला माफियाओं के बीच यह खबर चर्चा का विषय बन गया. काफी समय के बाद इतने बड़े स्तर पर कोयला माफियाओं के खिलाफ सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया है. कोयला माफियाओं के यहां से बड़ी मात्रा में नकदी और ज्‍वेलरी बरामद की गई हैं. जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि झारखंड के 18 लोकेशन और उसी वक्त पश्चिम बंगाल के करीब 24 से अधिक लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई प्रारंभ की गई. इन कोयला माफियाओं का आपस में काफी करीबी संबंध बताया जा रहा है, जिसका आपस में कई राज्यों में अपना नेटवर्क है. इसके मार्फत वो अपना काला साम्राज्य चलाते हैं. इसी काले नेटवर्क को तोड़ने के लिए जांच एजेंसी ईडी द्वारा बड़े पैमाने पर दो राज्यों में सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया है. एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि जांच के शुरुआती चरण में ही काफी महत्वपूर्ण सबूतों और इलेक्ट्रोनिक एविडेंस को कई लोकेशन से इकठ्ठा किए गए हैं. इसके आधार पर अब जांच का दायरा काफी आगे बढ़ने वाला है. धनबाद में भी एक्‍शन झारखंड की कोयला राजधानी के तौर पर चर्चित धनबाद के कई कोल माफियाओं के यहां सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है. धनबाद में लाल बहादुर सिंह का नाम भी शामिल है. बड़े स्तर के कोयला कारोबारी के यहां जब जांच एजेंसी की टीम पहुंची तब आसपास काफी संख्या में लोग इकठ्ठा होने लगे. लिहाजा पहले से ही मुस्तैद जांच एजेंसी की टीम अर्धसैनिक बल के जवानों की संख्या में और ज्यादा बढ़ोतरी कर दी, ताकि कानून व्यवस्था बरकरार रहे. सूत्र बताते हैं कि धनबाद स्थित देव विला इलाके में पहले भी अन्य एजेंसी द्वारा दबिश दी गई थी, लेकिन आरोपियों के इशारे पर काफी संख्या में लोग इकट्ठे हो जाते थे और जांच एजेंसी की टीम को परेशान कर उन्हें प्रभावित करने का प्रयास करते थे. इस बार ईडी की टीम मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के साथ लोकेशन पर पहुंची और अपने स्तर पर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है. हर तरफ मची खलबली जांच एजेंसी के सूत्र की मानें तो 21 नवंबर को जब ये सर्च ऑपरेशन स्टार्ट हुआ तब कोल माफियाओं के बीच खलबली मच गई. ऐसा माना जाता है कि उनके कनेक्शन कई राजनीतिक हस्तियों सहित अन्य प्रभावशाली लोगों के साथ हैं. ईडी द्वारा कोलकाता के सॉल्टलेक जैसे प्राइम लोकेशन में रहने वाले आरोपी नरेंद्र खड़का (Narendra Kharka ) के कोलकाता, दुर्गापुर सहित कई लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. इसके साथ ही अन्य कोल माफियाओं के हावड़ा, दुर्गापुर, आसनसोल, पुरुलिया, वर्धमान में भी सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. सूत्र बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में चर्चित कोल माफिया (कृष्ण मुरारी, युधिष्ठिर घोष, परवेज आलम सिद्दकी) के आवास सहित अन्य लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. ED टीम को रोकने के लिए कारोबारी ने छोड़े पालतू कुत्ते प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध कोयला खनन और परिवहन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में झारखंड और पश्चिम बंगाल में 40 से अधिक जगहों पर एक समन्वित और बड़ी कार्रवाई शुरू की है. कोयला कारोबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सबसे पहले आज धनबाद में बड़ी कार्रवाई की. ईडी की टीम ने तड़के सुबह कोल कारोबारी एल.बी. सिंह के आवास और उनसे जुड़े प्रतिष्ठानों पर एकसाथ छापेमारी शुरू की. जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम ने धनबाद में देव बिला क्षेत्र सहित कुल 18 ठिकानों पर दबिश दी है.  एक अधिकारी ने बताया कि ये सर्च ऑपरेशन कोयला चोरी और स्मगलिंग के कई बड़े मामलों से जुड़े हैं, जिसमें अनिल गोयल, संजय उद्योग, एलबी सिंह और अमर मंडल के मामले शामिल हैं. इन मामलों में कुल मिलाकर कोयले की बड़ी चोरी और चोरी शामिल है, जिससे सरकार को सैकड़ों करोड़ का भारी फाइनेंशियल नुकसान हुआ है. पने पालतू कुत्तों को छोड़ दिया. कुत्ते परिसर में घूम रहे हैं और ईडी अफसरों को घर में घुसने से रोके हुए हैं, जबकि एल.बी. सिंह घर के अंदर से बाहर नहीं निकल रहे हैं. यह घटना ईडी की कार्रवाई में बाधा डालने के प्रयास को दर्शाती है. ईडी के अधिकारी अब कानूनी और सुरक्षात्मक उपायों के तहत परिसर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि छापेमारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके. बंगाल में भी छापेमारी इसके अलावा, ईडी कोलकाता, दुर्गापुर, पुरुलिया और हावड़ा जिलों में अवैध कोयला खनन, गैर-कानूनी ट्रांसपोर्टेशन और कोयले के स्टोरेज से संबंधित मामलों में 24 स्थानों पर तलाशी ले रहा है. इस कार्रवाई के तहत जिन लोगों से जुड़ी जगहों को कवर किया जा रहा है, उनमें नरेंद्र खरका, अनिल गोयल, युधिष्ठिर घोष, कृष्ण मुरारी कयाल और अन्य शामिल हैं. यह कार्रवाई झारखंड और पश्चिम बंगाल में सक्रिय कोयला माफियाओं के खिलाफ ईडी की व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है. 

ईडी की बड़ी कार्रवाई: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे की ₹61.20 करोड़ की संपत्ति जब्त

नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की चल रही जांच के तहत बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ₹61.20 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। धन शोधन के मामलों की जांच के तहत कार्रवाई ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में ₹59.96 करोड़ मूल्य की 364 आवासीय भूखंडों और कृषि भूमि के रूप में अचल संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा, ₹1.24 करोड़ की चल संपत्तियां बैंक बैलेंस और सावधि जमा के रूप में पाई गई हैं। यह कदम छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामलों की जांच के दौरान उठाया गया है। ईडी की कार्रवाई से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ईडी ने इन संपत्तियों को कुर्क किया     59.96 करोड़ रुपये मूल्य के 364 आवासीय भूखंडों और कृषि भूमि के रूप में अचल संपत्तियां     1.24 करोड़ रुपये मूल्य की बैंक बैलेंस और सावधि जमा के रूप में चल संपत्तियां।     अनुसूचित अपराधों के माध्यम से अर्जित 2500 करोड़ रुपये की अपराध आय (पीओसी)। ईडी ने बताया- चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर थे ईडी के अनुसार पीएमएलए के तहत की गई जांच से पता चला है कि भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर तैनात थे। मुख्यमंत्री के पुत्र होने के नाते, उन्हें शराब सिंडिकेट का नियंत्रक और अंतिम अधिकारी बनाया गया था। वह सिंडिकेट की ओर से एकत्रित सभी अवैध धन का हिसाब रखते थे। ये धन (अपराध की आय या पीओसी) के संग्रह, चैनलाइजेशन और वितरण से संबंधित सभी बड़े फैसले उनके निर्देशों के तहत लिए जाते थे। चैतन्य बघेल को हुई अपराध की आय ईडी की जांच में यह पता चला कि चैतन्य बघेल के पास अपराध से हुई आय गई। इसे उन्होंने अपने रियल एस्टेट व्यवसाय के माध्यम से बढ़ाया और बेदाग संपत्ति के रूप में पेश किया। चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से प्राप्त पीओसी का उपयोग अपनी स्वामित्व वाली कंपनी मेसर्स बघेल डेवलपर्स के तहत अपनी रियल एस्टेट परियोजना विट्ठल ग्रीन के विकास के लिए किया। चैतन्य बघेल को ईडी ने 18 जुलाई 2025  को गिरफ्तार किया और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री की हो चुकी है गिरफ्तारी इससे पहले, इस मामले में अनिल टुटेजा (पूर्व आईएएस), अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी (आईटीएस) और कवासी लखमा (विधायक और छत्तीसगढ़ के तत्कालीन आबकारी मंत्री) को ईडी ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने बताया कि 61.20 करोड़ रुपये की वर्तमान कुर्की, लगभग 215 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों की पूर्व में की गई कुर्की का ही एक हिस्सा है। आगे की जांच जारी है।