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बिहार में शिक्षा विभाग सख्त, 24 घंटे में जवाब नहीं देने पर होगी विभागीय कार्रवाई

जमुई जिले में ई-शिक्षाकोष पर शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग अब सख्त मोड में है। जिला शिक्षा पदाधिकारी धनंजय कुमार पासवान ने सख्त कार्रवाई करते हुए 14 विद्यालयों के प्रधान शिक्षक/प्रभारी प्रधानाध्यापक को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया है। जारी पत्र में कहा गया है कि 02 नवंबर 2026 को 14 विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। इससे स्पष्ट होता है कि उक्त तिथि को विद्यालय बंद था। डीईओ ने स्पष्ट करने को कहा है कि किस परिस्थिति में उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। कौन-कौन से विद्यालय हैं शामिल? इस सूची में जमुई का प्रावि. मिसिर मनियड्डा, अलीगंज के नप्रावि. बलियाडीह मुशहरी, महमदपुर (यादव टोला), धनामा उत्तर टोला, खैरा के कैरावतारी, मांझियानी, चकाई के धनवे, पंजरडीह, उमवि. लकरा, उमवि. घटियारी, सोनो के सिद्धेश्वरी, झाझा के रामडीह नया आबादी, बेलहर बोर्ड, लालबेरो और लक्ष्मीपुर के प्रावि. साकल निमुंडा शामिल हैं। डीईओ ने पत्र में शिक्षकों को निर्देश दिया है कि 24 घंटे के अंदर अपना स्पष्टीकरण अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। समय पर जवाब नहीं देने पर विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। इस पत्र की प्रतिलिपि संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी की जमुई स्थापना शाखा को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यार्थ प्रेषित की गई है।  

झारखंड में वित्त रहित शिक्षण संस्थानों को अनुदान देने में लापरवाही, 19 जिलों के DEO को कार्रवाई की चेतावनी

 रांची  वित्त रहित स्कूलों, कालेजों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों को अनुदान देने में कई जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह तथा माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद के सख्त निर्देश के बाद भी राज्य के पांच जिलों रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद एवं पूर्वी सिंहभूम में ही अपील के आधार पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत अनुदान राशि संबंधित संस्थानों के खाते में हस्तांतरित की जा सकी है। शेष 19 जिलों में राशि अभी तक हस्तांतरित नहीं हुई। बुधवार को यह मामला संज्ञान में आने के बाद विभागीय सचिव के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इन 19 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजकर इसके लिए नाराजगी प्रकट की। इसमें कहा गया है कि अपील आवेदन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 की विभागीय अनुदान समिति द्वारा स्वीकृत अनुदान की राशि छह अक्टूबर को ही जिलों को उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही 15 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से संस्थानों को भुगतान करने एवं इसमें किसी प्रकार की देरी को गंभीरता से लिए जाने के निर्देश दिए गए थे। रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद तथा पूर्वी सिंहभूम ने लिया एक्शन इसके बाद भी जानकारी के अनुसार, रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद तथा पूर्वी सिंहभूम जिलों के द्वारा ही संस्थानों को स्वीकृत अनुदान की राशि वितरित की गई है। शेष जिलों द्वारा अब तक उक्त राशि का वितरण संबंधित संस्थानों को नहीं किया गया है, जो विभागीय आदेश की अवहेलना है। निदेशक ने अन्य जिलों को तीन दिनों में अनुदान की राशि वितरित करने के निर्देश दिए ताकि संस्थान समय पर उपयोगिता प्रमाण के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन कर सकें। उन्होंने इसका अनुपालन नहीं होने पर अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। दरअसल, बुधवार को ही वित्त रहित शिक्षा संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने इन जिलों में अभी तक अनुदान की राशि वितरित नहीं होने की जानकारी सचिव को दी थी। मोर्चा ने 75 प्रतिशत अनुदान बढ़ाने तथा वित्त रहित संस्थानों की छात्राओं का भी सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देने पर शीघ्र निर्णय का भी आश्वासन दिया। मोर्चा ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए आश्वासन का जिक्र करते हुए इसे लागू करने की मांग की। इसपर सचिव ने कहा कि सरकार ने आश्वासन दिया है तो उसे पूरा किया जाएगा। इसपर कुछ नीतिगत निर्णय लिए जाने हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत करने पर सीएसआर से जुड़ी संस्थाओं ने किया विमर्श महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग और यूनिसेफ ने मिलकर बुधवार को धुर्वा में राज्य स्तरीय सीएसआर कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी विभागों और अन्य स्टेकहोल्डर्स ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत संरचना और सेवाओं को मजबूत करने के लिए साझेदारी के अवसर तलाशना था। समाज कल्याण निदेशालय के सहायक निदेशक ने उपस्थित लोगों को विषय की जानकारी दी। विभाग के सचिव ने खनन एवं उद्योग विभाग के साथ समन्वय कर उच्च स्तरीय बैठक और सार्वजनिक-निजी सीएसआर सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। यूनिसेफ झारखंड के सीएफओ और आइपीई ग्लोबल के राज्य प्रमुख ने पोषण एवं बाल विकास पहलों को प्रभावी बनाने के प्रस्ताव रखे। तकनीकी सत्रों में सीएसआर से आंगनबाड़ी ढांचे को सुदृढ़ करने, साझेदारी माडल और पोषण परिणामों पर चर्चा हुई। कार्यशाला में बेहतर पोषण और विकास के लिए मिलकर काम करने का रोडमैप तय हुआ।  

हरियाणा में 10वीं-12वीं के रिजल्ट सुधारने की तैयारी, 50% से कम परिणाम वाले स्कूल रेड जोन में होंगे शामिल

चंडीगढ़ हरियाणा में दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में खराब प्रदर्शन वाले सरकारी स्कूल सरकार के रडार पर हैं। बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने मिशन ‘सफलता’ शुरू किया है। प्रत्येक ब्लॉक में सबसे कमजोर तीन स्कूलों की पहचान कर यहां पढ़ाई का स्तर सुधारने पर फोकस किया जाएगा। मिशन ‘सफलता’ (स्टूडेंट अचीवमेंट फोकस्ड एकेडमिक लर्निंग टारगेटेड एक्शन प्लान) के तहत विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को मिशन को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने और कमजोर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। विद्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, सीखने में आ रही कमियों और विषयवार प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं, मार्गदर्शन, परामर्श और बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जरूरतमंद विद्यार्थियों के अभिभावकों से भी लगातार संपर्क रखा जाएगा। मिशन के तहत मिड-टर्म परीक्षा के परिणामों के आधार पर स्कूलों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले स्कूल रेड जोन, 50 से 80 फीसद परिणाम वाले स्कूल येलो जोन और 80 फीसद से अधिक परिणाम वाले स्कूल ग्रीन जोन में रखे जाएंगे। रेड जोन के स्कूलों में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। यहां डाइट के अधिकारियों को हर दो सप्ताह में दौरा कर मार्गदर्शन देने और लगातार निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। येलो जोन के स्कूलों की समीक्षा हर महीने जिला शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी करेंगे। इनका परिणाम ग्रीन जोन तक पहुंचाने के लिए लक्षित रणनीति अपनाई जाएगी। ग्रीन जोन के स्कूलों के प्रदर्शन को बनाए रखने के साथ उन्हें शत-प्रतिशत परिणाम की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों और शिक्षकों के अनुभव भी दूसरे स्कूलों के साथ साझा किए जाएंगे। अर्धवार्षिक परीक्षाओं के बाद कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर मुख्य विषयों की अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी। प्री-बोर्ड परीक्षाओं के बाद जिन विद्यार्थियों में सीखने की कमियां सामने आएंगी, उनके लिए लक्षित रेमेडियल कक्षाएं जारी रहेंगी।     बोर्ड परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए मिशन ‘सफलता’ शुरू।     प्रत्येक ब्लॉक में सबसे कमजोर तीन स्कूलों की होगी पहचान।     50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले स्कूल रेड जोन में -नियमित निरीक्षण करेंगे डाइट के अधिकारी, कमजोर विद्यार्थियों की लगेंगी अतिरिक्त कक्षाएं। मिशन के तहत की जाएगी शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले शिक्षकों की पहचान, बनाएंगे प्रेरणास्रोत मिशन के तहत उन शिक्षकों की पहचान की जाएगी, जो लगातार शत-प्रतिशत परिणाम दे रहे हैं। इनके अनुभव साझा करने के लिए प्रत्येक तिमाही में जिला स्तर पर विषयवार एक से दो दिन की कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। 50 फीसदी या इससे कम परिणाम वाले शिक्षकों के लिए इन कार्यशालाओं में भागीदारी अनिवार्य होगी। इनमें कक्षा प्रबंधन, पढ़ाने की अलग-अलग तकनीकों और कठिन विषयों की पाठ योजना पर चर्चा की जाएगी। एक जनवरी से बोर्ड परीक्षाओं तक गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक के निर्देश दसवीं-बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए एक जनवरी से बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने तक गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें गणतंत्र दिवस समारोह को अपवाद रखा गया है। इन कक्षाओं से जुड़े शिक्षकों को भी इस अवधि में गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से मुक्त रखने को कहा गया है, ताकि पढ़ाई, दोहराई, शंकाओं का समाधान और परीक्षा की तैयारी बिना रुकावट जारी रह सके।

पटना साइंस कॉलेज समेत प्रमुख संस्थानों में शाम की पढ़ाई शुरू करने का शिक्षा विभाग का प्रस्ताव

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि पटना स्थिति एएन कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। सीएम ने अनुग्रह बाबू की जयंती सह कॉलेज के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में घोषणा की। इसके साथ शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया है कि पटना साइंस कॉलेज समेत 10 प्रमुख कॉलेजों में इवनिंग पढ़ाई शुरू होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने पटना साइंस कॉलेज सहित राज्य के 10 प्रमुख महाविद्यालयों में इवनिंग कक्षाओं के संचालन का प्रस्ताव राज्यपाल सचिवालय को भेजा है। इसमें छह कॉलेज पटना व अन्य चार कॉलेज अलग-अलग जिलों में स्थित है। विभाग की ओर से कहा कि इससे बड़ी संख्या में छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन का अवसर मिल सकेगा। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि राज्य के कुछ प्रमुख महाविद्यालय अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रतिष्ठा के कारण छात्रों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हैं। ऐसे में इन संस्थानों की उपलब्ध संसाधनों और अधोसंरचना का बेहतर उपयोग करते हुए इवनिंग कॉलेज शुरू किया जाना उपयोगी होगा। इन कॉलेजों में होगी पढ़ाई पटना साइंस कॉलेज, एएन कॉलेज, बीएन कॉलेज, मगध महिला कॉलेज, कॉलेज ऑफ कॉमर्स आर्ट्स एंड साइंस, जेडी वीमेंस कॉलेज, एमएस कॉलेज मोतिहारी, एलएस कॉलेज मुजफ्फरपुर, टीएनबी कॉलेज भागलपुर और सीएम साइंस कॉलेज दरभंगा में इवनिंग क्लासेज की व्यवस्था जल्द शुरू होगी। यह व्यवस्था शुरू होने से कामकाजी लोगों को पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा और संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग हो सकेगा। बिहार में पूर्व में भी इवनिंग पढ़ाई की व्यवस्था चल रही थी। संध्या क्लास में रोजगार परक पढ़ाई को भी शामिल किया जाएगा। महिलाओं को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित किया जाएगा। 10 दिनों में एएन कॉलेज कैंपस से हटेगा थाना इधर, एएन कॉलेज स्थिति पुलिस थाना को जल्द शिफ्ट किया जाएगा। इलाके में सुरक्षा प्रबंधों के नजरिए से इस थाना को स्थापित किया गया था। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा है कि दस दिनों में थाने को नए स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की रीढ़ होती है। आम लोगों को चाहिए कि अपनी कमाई का कुछ हिस्सा शिक्षा क्षेत्र में लगाना चाहिए। सीएम ने कॉलेज की पत्रिका अनुग्रह ज्योति का लोकार्पण भी किया। उन्होने कहा कि सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने की दिशा में काम कर रही है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षकों की भर्ती, संसानों का विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री सख्त: 10 साल पुराने मुकदमों की 15 दिन में होगी पहचान और समीक्षा

पटना बिहार का शिक्षा विभाग वर्षों से मुकदमों के बोझ तले दबा जा रहा है। हाल यह है कि विभाग 10145 मुकदमों में उलझा हुआ है। हालांकि अब इसके निपटारे की कार्ययोजना बनायी जा रही है। विभाग लंबित मुकदमों में से 10 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर बिहार मुकदमा नीति के प्रावधानों के अंतर्गत उनका शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करेगा। लंबित मुकदमों के मामले को शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इसे लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। उन्होंने कहा कि मुकदमे न केवल प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी हैं, बल्कि ये शिक्षकों, कर्मियों और आम नागरिकों के हितों से जुड़े निर्णयों में भी अनावश्यक विलंब का कारण बनते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की विशेष सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जाए। मंत्री ने 15 दिनों के भीतर दस वर्ष से अधिक पुराने मामलों की पहचान, वर्गीकरण और प्रारंभिक समीक्षा पूरी कर बिहार मुकदमा नीति के अनुरूप कार्रवाई प्रारंभ करने को कहा है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। विभागीय स्तर पर इसकी नियमित निगरानी की जाएगी। मुकदमों के बोझ से मुक्त होने पर विभाग का समय, ऊर्जा और संसाधन सीधे तौर पर जनहितकारी कार्यों में लगाए जा सकेंगे। विद्यालयों की गुणवत्ता और आधारभूत ढांचे के विकास में, शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की लंबित समस्याओं के समाधान में तथा सरकारी शिक्षा योजनाओं के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन में इसका उपयोग हो सकेगा। इससे प्रशासनिक निर्णय-प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार मुकदमा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से शिक्षा विभाग के मुकदमों के बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। बिहार सरकार जवाबदेह और परिणामोन्मुख प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा विभाग इस दिशा में सुशासन की एक नई नजीर पेश करेगा।

राजस्थान,लापरवाही पर शिक्षकों को चार्जशीट, कंप्यूटर अनुदेशक सस्पेंड

 चित्तौड़गढ़ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुरा निम्बाहेड़ा के पूरे स्टाफ को जांच के दायरे में लिया. शिकायतें मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय ने विशेष जांच दल बनाया था. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है. दो शिक्षकों को थमाए गए गंभीर आरोप पत्र विभागीय जानकारी के अनुसार नीलम मीणा और शैलेन्द्र कुमार को राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के नियम 16 के तहत गंभीर आरोप पत्र जारी किए गए हैं. इन पर लगाए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. प्रधानाध्यापक समेत चार को नोटिस लापरवाही के मामले में प्रधानाध्यापक वीरमदेव मीना सहित चार अन्य शिक्षकों सीमा जाट रमेश चन्द्र मीणा और विश्व ज्योति को सीसीए नियम 17 के तहत नोटिस दिए गए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि जवाब मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. पोक्सो मामले में कंप्यूटर अनुदेशक सस्पेंड दूसरे मामले में विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सामरिया खुर्द बेंगू में तैनात कंप्यूटर अनुदेशक राजेश कुमावत को निलंबित कर दिया है. उनके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है. न्यायिक हिरासत में आरोपी, जांच शुरू पुलिस कार्रवाई के बाद आरोपी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में है. इसी को देखते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंशन लागू किया. निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बड़ी सादड़ी रखा गया है और उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता मिलेगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा हेतु जारी किए कड़े निर्देश

स्कूलों में बच्चों को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था लागू रायपुर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Suo Moto Writ Petition (Civil) No. 05/2025 में दिए गए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुपालन में तथा छत्तीसगढ़ शासन, पशुधन विकास विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर के पत्र क्रमांक E-166671 & 153108/LAW-42/1802/2025/1724 दिनांक 13.11.2025 के आधार पर शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सभी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए  आदेश जारी किया गया है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब राज्य के प्रत्येक स्कूल के प्राचार्य या संस्था प्रमुख को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। नोडल अधिकारी की यह जिम्मेदारी होगी कि स्कूल परिसर या आसपास यदि आवारा कुत्ते दिखाई दें, तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम के डॉग क्रैचर नोडल अधिकारी को दें। साथ ही स्कूल परिसर में कुत्तों का प्रवेश रोकने के लिए आवश्यक अवरोधक उपाय सुनिश्चित करें। यदि किसी बच्चे के साथ आवारा कुत्ते द्वारा काटे जाने की घटना होती है, तो बच्चे को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होगी, ताकि आवश्यक प्राथमिक इलाज समय पर उपलब्ध कराया जा सके। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का उद्देश्य प्रदेश के सभी स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित, भय-मुक्त और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप तथा पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन में यह अभियान पूरे प्रदेश में तेजी और संवेदनशीलता के साथ लागू किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों, बीईओ, बीआरसी, सीआरसी तथा स्कूल प्रबंधन समितियों से अपेक्षा की है कि वे इन दिशा-निर्देशों का कठोरतापूर्वक पालन सुनिश्चित करें और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

कल बिहार के सभी स्कूल रहेंगे बंद, सरकार ने जारी किए निर्देश

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के तहत पटना जिले के सभी 14 विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना राजधानी पटना के एएन कॉलेज में शुक्रवार, 14 नवंबर को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। मतगणना के दौरान यातायात प्रबंधन, जनसुविधा और जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं और इसी क्रम में पटना जिले के सभी विद्यालयों में 12वीं कक्षा तक के पठन-पाठन कार्य 14 नवंबर को स्थगित कर दिए गए हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला निर्वाचन पदाधिकारी- सह- जिलाधिकारी डॉ त्यागराजन एसएम ने बताया कि मतगणना स्थल के आसपास सुरक्षा और व्यवस्था के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। साथ ही जनता की सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है कि विद्यालय एक दिन के लिए बंद रहेंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मतगणना स्थल के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगायें और यातायात नियमों का पालन करें।

बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापकों की पदोन्नति पर शिक्षा विभाग को दी समय सीमा

ग्वालियर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सहायक अध्यापकों को बड़ी राहत देते हुए शिक्षा विभाग को उनकी पदोन्नति पर तीन माह में विचार करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता उनकी वास्तविक नियुक्ति तिथि (पांच और सात सितंबर 1998) से मानी जाएगी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विभाग को 18 रिक्त अध्यापक पदों पर तीन माह के भीतर उनके प्रमोशन पर निर्णय लेना होगा। साथ ही सभी लक्षित लाभ दिए जाएंगे, हालांकि बकाया वेतन नहीं मिलेगा।   यह था पूरा मामला     याचिकाकर्ताओं ने 25 अगस्त 2014 में जारी विभागीय आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी पदोन्नति की मांग खारिज कर दी गई थी।     उनका कहना था कि वे 1998 में शिक्षा कर्मी ग्रेड-3 के रूप में नियुक्त हुए और 2007 से सहायक अध्यापक कैडर में शामिल हुए, लेकिन विभाग ने उनकी वरिष्ठता 2001 से गिनकर पदोन्नति से वंचित कर दिया।     विभाग ने तर्क दिया था कि वरिष्ठता 2001 से मानी जाएगी, जब उनका समायोजन हुआ था, लेकिन हाई कोर्ट ने साफ किया कि 2008 के नियमों के लागू होने के बाद शिक्षा कर्मियों की सेवाओं को ही वरिष्ठता का आधार माना जाएगा।   इसके साथ ही, कोर्ट ने 25 अगस्त 2014 का विभागीय आदेश रद कर दिया। इस फैसले से सहायक अध्यापकों को न केवल वरिष्ठता का लाभ मिलेगा, बल्कि पदोन्नति की राह भी खुल गई है।