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राजस्थान,लापरवाही पर शिक्षकों को चार्जशीट, कंप्यूटर अनुदेशक सस्पेंड

 चित्तौड़गढ़ राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुरा निम्बाहेड़ा के पूरे स्टाफ को जांच के दायरे में लिया. शिकायतें मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय ने विशेष जांच दल बनाया था. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है. दो शिक्षकों को थमाए गए गंभीर आरोप पत्र विभागीय जानकारी के अनुसार नीलम मीणा और शैलेन्द्र कुमार को राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के नियम 16 के तहत गंभीर आरोप पत्र जारी किए गए हैं. इन पर लगाए गए आरोपों को गंभीर मानते हुए आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. प्रधानाध्यापक समेत चार को नोटिस लापरवाही के मामले में प्रधानाध्यापक वीरमदेव मीना सहित चार अन्य शिक्षकों सीमा जाट रमेश चन्द्र मीणा और विश्व ज्योति को सीसीए नियम 17 के तहत नोटिस दिए गए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि जवाब मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. पोक्सो मामले में कंप्यूटर अनुदेशक सस्पेंड दूसरे मामले में विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सामरिया खुर्द बेंगू में तैनात कंप्यूटर अनुदेशक राजेश कुमावत को निलंबित कर दिया है. उनके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है. न्यायिक हिरासत में आरोपी, जांच शुरू पुलिस कार्रवाई के बाद आरोपी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में है. इसी को देखते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंशन लागू किया. निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बड़ी सादड़ी रखा गया है और उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता मिलेगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा हेतु जारी किए कड़े निर्देश

स्कूलों में बच्चों को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था लागू रायपुर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Suo Moto Writ Petition (Civil) No. 05/2025 में दिए गए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुपालन में तथा छत्तीसगढ़ शासन, पशुधन विकास विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर के पत्र क्रमांक E-166671 & 153108/LAW-42/1802/2025/1724 दिनांक 13.11.2025 के आधार पर शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सभी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए  आदेश जारी किया गया है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब राज्य के प्रत्येक स्कूल के प्राचार्य या संस्था प्रमुख को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। नोडल अधिकारी की यह जिम्मेदारी होगी कि स्कूल परिसर या आसपास यदि आवारा कुत्ते दिखाई दें, तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम के डॉग क्रैचर नोडल अधिकारी को दें। साथ ही स्कूल परिसर में कुत्तों का प्रवेश रोकने के लिए आवश्यक अवरोधक उपाय सुनिश्चित करें। यदि किसी बच्चे के साथ आवारा कुत्ते द्वारा काटे जाने की घटना होती है, तो बच्चे को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होगी, ताकि आवश्यक प्राथमिक इलाज समय पर उपलब्ध कराया जा सके। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का उद्देश्य प्रदेश के सभी स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित, भय-मुक्त और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप तथा पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन में यह अभियान पूरे प्रदेश में तेजी और संवेदनशीलता के साथ लागू किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों, बीईओ, बीआरसी, सीआरसी तथा स्कूल प्रबंधन समितियों से अपेक्षा की है कि वे इन दिशा-निर्देशों का कठोरतापूर्वक पालन सुनिश्चित करें और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

कल बिहार के सभी स्कूल रहेंगे बंद, सरकार ने जारी किए निर्देश

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के तहत पटना जिले के सभी 14 विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना राजधानी पटना के एएन कॉलेज में शुक्रवार, 14 नवंबर को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। मतगणना के दौरान यातायात प्रबंधन, जनसुविधा और जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं और इसी क्रम में पटना जिले के सभी विद्यालयों में 12वीं कक्षा तक के पठन-पाठन कार्य 14 नवंबर को स्थगित कर दिए गए हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला निर्वाचन पदाधिकारी- सह- जिलाधिकारी डॉ त्यागराजन एसएम ने बताया कि मतगणना स्थल के आसपास सुरक्षा और व्यवस्था के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। साथ ही जनता की सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है कि विद्यालय एक दिन के लिए बंद रहेंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मतगणना स्थल के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगायें और यातायात नियमों का पालन करें।

बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापकों की पदोन्नति पर शिक्षा विभाग को दी समय सीमा

ग्वालियर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सहायक अध्यापकों को बड़ी राहत देते हुए शिक्षा विभाग को उनकी पदोन्नति पर तीन माह में विचार करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता उनकी वास्तविक नियुक्ति तिथि (पांच और सात सितंबर 1998) से मानी जाएगी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विभाग को 18 रिक्त अध्यापक पदों पर तीन माह के भीतर उनके प्रमोशन पर निर्णय लेना होगा। साथ ही सभी लक्षित लाभ दिए जाएंगे, हालांकि बकाया वेतन नहीं मिलेगा।   यह था पूरा मामला     याचिकाकर्ताओं ने 25 अगस्त 2014 में जारी विभागीय आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी पदोन्नति की मांग खारिज कर दी गई थी।     उनका कहना था कि वे 1998 में शिक्षा कर्मी ग्रेड-3 के रूप में नियुक्त हुए और 2007 से सहायक अध्यापक कैडर में शामिल हुए, लेकिन विभाग ने उनकी वरिष्ठता 2001 से गिनकर पदोन्नति से वंचित कर दिया।     विभाग ने तर्क दिया था कि वरिष्ठता 2001 से मानी जाएगी, जब उनका समायोजन हुआ था, लेकिन हाई कोर्ट ने साफ किया कि 2008 के नियमों के लागू होने के बाद शिक्षा कर्मियों की सेवाओं को ही वरिष्ठता का आधार माना जाएगा।   इसके साथ ही, कोर्ट ने 25 अगस्त 2014 का विभागीय आदेश रद कर दिया। इस फैसले से सहायक अध्यापकों को न केवल वरिष्ठता का लाभ मिलेगा, बल्कि पदोन्नति की राह भी खुल गई है।