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ईद से पहले सख्ती: 2026 में पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर

नई दिल्ली ईद-उल-फितर के जश्न के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, क्योंकि इस त्योहार से पहले, रमजान के आखिरी दिन नमाज अदा करने के लिए नमाजी इकट्ठा हुए। धर्मगुरुओं ने घोषणा की है कि भारत में ईद-उल-फितर शनिवार को मनाई जाएगी, क्योंकि गुरुवार शाम को चांद नहीं दिखा। हालांकि, केरल में यह त्योहार शुक्रवार को ही मनाया गया। उत्तराखंड में हरदोई के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अशोक कुमार मीणा ने कहा कि ईद-उल-फितर त्योहार और चल रही चैत्र नवरात्रि को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। आज की 'अलविदा नमाज' के लिए हम कई जगहों पर फ्लैग मार्च कर रहे हैं और सभी मस्जिदों पर पुलिसकर्मी भी तैनात किए हैं। जिले को सेक्टरों और जोन में बांटा गया है। कहीं भी कोई दिक्कत नहीं है। हम किसी भी तरह के असामाजिक तत्वों पर भी नजर रख रहे हैं। दिल्ली के उत्तम नगर में भी भारी पुलिस तैनाती देखी गई, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने एक निर्देश जारी कर इलाके की पुलिस और सिविल प्रशासन को ईद के त्योहारों के दौरान सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया। दरअसल, 4 मार्च को होली के जश्न के दौरान 26 साल के तरुण कुमार की हत्या के बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है। सुरक्षा उपायों के तहत रूट मार्च करने के बाद, उत्तर प्रदेश के मऊ के एसपी श्री एलमारन जी ने कहा कि हम पूरी गश्त और चेकिंग कर रहे हैं। सिविल वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों के अलावा, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) के जवान भी तैनात किए जाएंगे। हमने जिला और पुलिस, दोनों स्तरों पर सभी के साथ बैठकें की हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पूरे त्योहार के दौरान निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। बिहार के संवेदनशील भागलपुर जिले को ईद, चैती छठ और रामनवमी त्योहारों से पहले अलर्ट पर रखा गया है। विभिन्न सुरक्षा बलों और समितियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने तैयारियों के तहत भागलपुर में एक मॉक ड्रिल की। ​​जिला मजिस्ट्रेट नवल किशोर चौधरी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि मार्च में कई त्योहारों और शहर की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है और स्थिति पर सक्रिय रूप से नजर रख रहा है। हैदराबाद के पुराने शहर में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई, क्योंकि अधिकारियों ने मक्का मस्जिद और चारमीनार के आसपास कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए, ताकि ईद-उल-फितर से पहले जुमा-तुल-विदा (ईद से पहले का आखिरी शुक्रवार) की सभा शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। कर्नाटक के मंगलुरु में एक मस्जिद में नमाज अदा करने के बाद विधानसभा स्पीकर यूटी खादर फरीद ने कहा कि मैं हर किसी को ईद-उल-फितर की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। हर धार्मिक त्योहार का संदेश शांति, हमारी संस्कृति को साझा करना, एकता बनाए रखना, और एक शांतिपूर्ण समाज, एक शांतिपूर्ण देश और एक शांतिपूर्ण दुनिया है। तमिलनाडु के मदुरै और कोयंबटूर में भी विशेष नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम नमाजियों की बड़ी भीड़ देखी गई। इस बीच, जब केरल में शुक्रवार को ईद-उल-फितर मनाया जा रहा था, तो सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और भाजपा नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के उम्मीदवारों ने राज्य में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, सुबह-सुबह राज्य भर में नमाज स्थलों का दौरा किया।

Eid-ul-Fitr 2026: ईद की तारीख भारत में कंफर्म, जानिए ईद-उल-फितर के आयोजन का तरीका

 नई दिल्ली Eid-ul-Fitr 2026: ईद उल फितर इस्लाम धर्म का बहुत ही पवित्र और खुशियों वाला त्योहार है, जो रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है. यह त्योहार नए चांद (शव्वाल महीने की शुरुआत) के दिखने पर मनाया जाता है. ईद का मतलब होता है 'खुशी' और 'उल-फितर' का मतलब है 'रोजा खोलना'. यानी यह त्योहार रोजों के पूरा होने की खुशी में मनाया जाता है. इस दिन लोग अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं कि उन्होंने उन्हें रोजे रखने की ताकत दी। इस्लामी (हिजरी) कैलेंडर में दो बड़ी ईद मनाई जाती हैं. पहली ईद-उल-फितर, जो रमजान के अंत में आती है. दूसरी ईद-उल-अजहा होती है, जो इस्लामी साल के आखिरी महीने जिलहिज्जा की 10, 11 और 12 तारीख को मनाई जाती है. तो आइए अब जानते हैं कि ईद-उल-फितर भारत में कब मनाई जाएगी और कैसे मनाई जाएगी। भारत में कब मनाई जाएगी ईद-उल-फितर? इस्लाम जानकारों के मुताबिक, वैसे तो ईद 20 मार्च को मनाई जानी चाहिए थी. लेकिन, 19 मार्च को शव्वाल का चांद ना दिखने के कारण अब 21 मार्च, शनिवार को भारत में ईद का त्योहार मनाया जाएगा. वहीं, सऊदी अरब में 20 मार्च को ईद मनाई जा रही है.  कितने दिनों तक मनाई जाती है ईद-उल-फितर? ईद-उल-फितर आमतौर पर एक दिन का त्योहार होता है. इस्लामी कैलेंडर हिजरी के अनुसार, ईद-उल-फितर शव्वाल महीने के पहले दिन मनाई जाती है. इस दिन ईद की नमाज अदा की जाती है. हालांकि, कई मुस्लिम देशों में ईद का जश्न 2 से 3 दिनों तक चलता है. इन दिनों में छुट्टी रहती है, लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं और रोजे खत्म होने का जश्न मनाते हैं. ईद-उल-फितर, ईद-उल-अजहा से अलग होती है, क्योंकि ईद-उल-अजहा तीन दिन तक मनाई जाती है. ईद-उल-फितर पर क्या करें? ईद की नमाज पढ़ें- हर मुसलमान को चाहिए कि वह मस्जिद या ईदगाह में जाकर मिलकर ईद की नमाज अदा करें और अल्लाह का शुक्रिया करें. आने-जाने का रास्ता बदलें– सुन्नत के अनुसार, ईद की नमाज के लिए जाते समय और वापस आते समय अलग-अलग रास्ता अपनाना अच्छा माना जाता है. साफ सुथरे और नए कपड़े पहनें- इस दिन साफ-सुथरे होकर, अच्छे कपड़े पहनकर ही नमाज के लिए जाना चाहिए. तोहफे और मुबारकबाद दें– ईद उल फितर के दिन अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को ईद मुबारक' कहें और गले लगाकर एक दूसरे के साथ खुशियां बांटें. दुआ और इबादत करें– इस दिन अल्लाह से दुआ करें और ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, क्योंकि यह दिन खास बरकत वाला होता है. ईद-उल-फितर के पीछे की कहानी ईद-उल-फितर की शुरुआत पैगंबर हजरत मुहम्मद ने 624 ईस्वी में मदीना में की थी. यह हिजरत के बाद दूसरा साल था, जब मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया था. जब वे मदीना पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि लोग दो खास दिनों पर जश्न मनाते हैं. इसके बाद उन्होंने बताया कि मुसलमानों के लिए दो ईद होंगी- ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा.