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ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर कदम: जालंधर में शुरू होंगी 97 इलेक्ट्रिक बसें

जालंधर. जालंधर. शहर में प्रस्तावित प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए ऐप भी डेवलप की जाएगी। लोगों को इस ऐप के जरिये हर बस की रीयल टाइम लोकेशन पता चलती रहेगी। ऐप बताएगी कि कौन-सी बस किस बस स्टॉप पर कब पहुंचेगी। बस की रीयल टाइम लोकेशन पता होने से यात्री बस स्टॉप पहुंचने के लिए अपना शेड्यूल तय कर सकेंगे। ऐप पर सभी रूट का मैप रहेगा। यही नहीं ऐप और बस सर्विस को इंटेग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से भी जोड़ा जाएगा। इससे कंट्रोल रूम में हर बस की जानकारी रहेगी और कहीं कोई मुश्किल आती है तो तुरंत सहायता उपलब्ध करवाना, रूट डायवर्ट करना आसान रहेगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत 220 बस स्टॉप भी बनाए जाने हैं। विभिन्न कंपनियों से हो सकता है करार प्रत्येक बस स्टॉप पर करीब एक लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। बस स्टॉप निर्माण के लिए विभिन्न कंपनियों से करार किया जा सकता है। इसके बदले कंपनियां बस स्टॉप पर अपना विज्ञापन लगा सकेंगी। यह योजना अभी फाइनल नहीं हुई है। बस स्टॉप के निर्माण के लिए केंद्र फंड नहीं दे रहा है, इसलिए फंड का इंतजाम स्थानीय स्तर पर ही करना होगा। शहर में कई सालों से बस सर्विस बंद है। शहर में लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट देने के लिए यह प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। बस सर्विस के लिए रूट फाइनल हो चुके हैं और इन रूटों पर दिक्कतों को दूर करने के लिए निगम का जोर लगाना होगा। यहीं नहीं सिटी बस सर्विस बंद होने का बड़ा कारण बनी ऑटो यूनियनों को भी संभालना होगा। अब ऑटो के साथ ही शहर में बड़ी गिनती में ई-रिक्शा भी चल पड़े हैं। शहर में सिर्फ दो ही बस डिपो-चार्जिंग को मंजूरी प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए अब तीन के बजाय दो जगह चार्जिंग स्टेशन होंगे। बस स्टैंड पर चार्जिंग स्टेशन को केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी है। अब सिर्फ नगर निगम के लम्मा पिंड चौक स्थित वर्कशाप और निगम मुख्यालय के साथ खाली जमीन पर ही बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन बनेगा। इन दोनों जगह पर बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए एनआइटी ने सर्वे रिपोर्ट भी फाइनल कर दी है। दोनों साइट्स पर बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का खर्च भी दोगुना हो गया है। नगर निगम ने दोनों साइट्स पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए चार करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया था। एनआइटी की टीम ने जो सर्वे किया है उसमें बेहतर मटीरियल प्रस्तावित है और इसी वजह से बस डिपो-चार्जिंग स्टेशन का खर्च 9.25 करोड़ तक पहुंच गया है। इसमें 60 प्रतिशत पैसा केंद्र देगा और 40 प्रतिशत पंजाब सरकार और नगर निगम के हिस्से में है। स्मार्ट सिटी कंपनी ने फंड रिलीज करने के लिए केंद्र को पत्र भी लिख दिया है। यह पैसा केंद्र सरकार पहले ही सैंक्शन कर चुकी है और जैसे ही पैसा पहुंचेगा तो उसके हिसाब से टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सात, नौ और 12 मीटर की केंद्र से मिलेंगी ई-बसें बता दें कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए केंद्र सरकार ने नगर निगम जालंधर को 97 बसें देने की मंजूरी दी है। यह बसें तीन साइज सात मीटर, नौ मीटर और 12 मीटर की होंगी। तंग इलाकों में भी ये छोटी बसें आसानी से चल सकेंगी।

हरियाणा के धार्मिक स्थलों तक चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को विधानसभा में बतौर वित्त मंत्री ₹2,23,658.17 करोड़ का बजट पेश किया। यह पिछले बजट की तुलना में 10.28 प्रतिशत ज्यादा है। सैनी ने बजट भाषण की शुरुआत गुरु नानक देव जी के सिद्धांत, ‘किरत कर, नाम जप, वंड छक’ से की। अभी CM सैनी बजट भाषण पढ़ रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि चंडीगढ़-दिल्ली एयरपोर्ट-गुरुग्राम और चंडीगढ़ से मुख्य धार्मिक स्थलों जैसे कटरा, सालासर, खाटूश्याम, हरिद्वार, अमृतसर आदि की यात्रा के लिए हरियाणा रोडवेज द्वारा 50 नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की जाएगी, जिससे पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में 12 शहरों में चल रही इलैक्ट्रिक सिटी बसों के समान यह सेवा शेष जिला मुख्यालयों में भी शुरू की जाएगी। विद्यार्थियों को बेहतर यातायात सुविधाएं प्रदान करने के लिए 1,000 नई बसों की खरीद की जाएगी, और महिला यात्रियों व छात्राओं के लिए समर्पित बसों की संख्या 273 से बढ़ाकर 500 की जाएगी। इसके अतिरिक्त, कनीना, नरवाना, गन्नौर एवं कलायत में नए बस अड्डों का निर्माण किया जाएगा, और एचएसएससी के परीक्षार्थियों को मुफ्त यात्रा सुविधा देने के लिए एक वेब पोर्टल बनाया जाएगा। इन पहलों का उद्देश्य राज्य में परिवहन सेवाओं को सुगम, सुरक्षित और पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाना है।

MP में 972 ई-बसेस का वितरण, 8 नगर निगमों में जल्द शुरू होगी इलेक्ट्रिक बस सेवा

भोपाल   मध्यप्रदेश के शहरी परिवहन को और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के आठ नगर निगमों को कुल 972 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की मंजूरी प्रदान की है। इन बसों के संचालन से डीजल और पेट्रोल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।  केंद्र से स्वीकृत ई-बसें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, देवास और सतना नगर निगमों को मिलेंगी। इनमें भोपाल को 195, इंदौर को 270, ग्वालियर को 100, जबलपुर को 200, उज्जैन को 100, सागर को 32, देवास को 55 और सतना को 20 बसें आवंटित की गई हैं। राज्य सरकार ने सभी नगर निगमों को बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से संबंधित आवश्यक ढांचा निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक नगर निगम में चार्जिंग पॉइंट और परिचालन सुविधाओं का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्र और राज्य दोनों खर्च वहन करेंगे  ई-बस परियोजना पर होने वाला खर्च केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से वहन करेंगे। बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि प्रदान करेगी। वहीं चार्जिंग पॉइंट्स के निर्माण पर केंद्र सरकार 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता देगी। बसों का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यह सेवा आम नागरिकों को सस्ती, सुरक्षित और ईको फ्रेंडली परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी।