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बिजली दरों में 20% बढ़ोतरी का प्रस्ताव, यूपी में महंगी होने लगी बिजली

लखनऊ उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले कुछ महीने काफी हलचल भरे रहने वाले हैं. राज्य की बिजली कंपनियों ने घाटे की दुहाई देते हुए बिजली दरों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है. बिजली नियामक आयोग ने इस प्रस्ताव को कुछ शर्तों के साथ हरी झंडी दे दी है, जिस पर अब मार्च के महीने में अंतिम सुनवाई होगी. जनता के पास 21 दिन का समय नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को सख्त आदेश दिया है कि वे अगले 3 दिनों के भीतर अपना पूरा प्रस्ताव अखबारों में छपवाएं. इसके बाद आम उपभोक्ताओं को 21 दिन का समय दिया गया है ताकि वे इस प्रस्ताव को पढ़ सकें और अपनी आपत्तियां या सुझाव आयोग को भेज सकें. कंपनियों ने अपनी रिपोर्ट में करीब 12,453 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है और इसी की भरपाई के लिए रेट बढ़ाने की मांग की है. स्मार्ट मीटर का खर्च भी ग्राहकों की जेब पर? इस प्रस्ताव में एक चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनियों ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने और उनके संचालन पर होने वाले 3,837 करोड़ रुपये के खर्च का बोझ भी जनता पर डालने की तैयारी की है. कंपनियों का कहना है कि इस रकम को बिजली दरों में ही जोड़ दिया जाए. हालांकि, उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इन आंकड़ों को पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत करार दिया है. चोरी-छिपे वसूले गए 1400 करोड़ रुपये, अब होगी जांच गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पिछले 6 सालों से बिजली की दरें नहीं बढ़ी हैं, लेकिन पर्दे के पीछे का खेल कुछ और ही है. खबर है कि पिछले 11 महीनों में अलग-अलग शुल्कों के नाम पर उपभोक्ताओं से करीब 1400 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूल लिए गए हैं. ताज़ा मामला फरवरी के बिल में 10% की अतिरिक्त वसूली का है, जिससे नियामक आयोग भी हैरान है. आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से इसकी पूरी गणना के कागजात मांगे हैं. माना जा रहा है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर अब तक हुई पूरी वसूली की बड़ी जांच हो सकती है. 12 फरवरी को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान इसके बाद बिजली दरों के साथ-साथ ‘निजीकरण’ का मुद्दा भी फिर से गरमा गया है. विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है. अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी 12 फरवरी को बड़ा प्रदर्शन करेंगे. बिजली कर्मचारियों के इस आंदोलन को किसान संगठनों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन मिला है. कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा.

ग्रामीण किसानों को बड़ी राहत, 5 रुपये में मिले 1 लाख 57 हजार नए विद्युत कनेक्शन

अब तक एक लाख 57 हजार ग्रामीण कृषकों ने लिया मात्र 5 रुपये में नवीन विद्युत कनेक्शन भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने कार्यक्षेत्र में ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को अब मात्र 5 रुपये में स्थायी घरेलू एवं कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। दिसंबर 2024 से यह योजना शुरू हुई है तब से अब तक इस योजना का लाभ 01 लाख 57 हजार 359 ग्रामीण कृषकों को मिल चुका है। इनमें से 58 हजार 711 घरेलू तथा 98 हजार 648 कृषि पंप कनेक्शन शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू तथा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिये ऐसे कृषक जो विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं उनको सुविधानुसार आसानी से स्थाई कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है। नवीन घरेलू एवं कृषि पंप के लिये स्थायी विद्युत कनेक्शन का आवेदन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए portal.mpcz.in पर मांगी गई आवश्यक जानकारी देनी होती है। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।  

अक्टूबर 2025 में 36 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को मिली 920 करोड़ से अधिक सब्सिडी

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में अटल गृह ज्योति योजना एवं किसान ज्योति योजना के अंतर्गत माह अक्टूबर 2025 में 36 लाख 41 हजार से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने 920 करोड़ 83 लाख से अधिक की सब्सिडी का लाभ उठाया है। राज्य शासन द्वारा अटल गृह ज्योति योजना के अंतर्गत माह अक्टूबर 2025 में 26 लाख 39 हजार से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को लगभग 131 करोड़ 75 लाख रूपये एवं अटल किसान ज्योति योजना के अंतर्गत 10 लाख 02 हजार से अधिक कृषि उपभोक्ताओं को 789 करोड़ 08 लाख की सब्सिडी दी गई है।  

550 करोड़ का बिजली प्रोजेक्ट: एमपी में बिजली दरें होंगी आधी, उपभोक्ताओं को बड़ा फायदा

जबलपुर मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (जेनको) कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए सोलर प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए 550 करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी की जा रही है। 110 मेगावाट के सोलर प्लांट तीन स्थानों पर लगाए जाएंगे। दो साल में स्थापित होने वाले प्लांट कंपनी थर्मल पावर प्लांट के आसपास ही स्थापित करेगी। कंपनी के टेक्निकल डायरेक्टर सुबोध निगम का कहना है कि, ये कंपनी का अबतक का सबसे बड़ा सोलर पावर प्रोजेक्ट है। अभी तक कंपनी ने 7 मेगावाट का सोलर प्लांट मंदसौर के रातागुरड़िया में स्थापित किया है। कंपनी को लंबे समय से सोलर प्लांट लगाने की जरूरत थी। पर्यावरण को पहुंच रहा नुकसान अभी कोयले से संचालित थर्मल पावर प्लांट से बिजली की लागत अधिक होने के साथ पर्यावरण के लिए घातक गैस का उत्सर्जन हो रहा है। हालांकि, कंपनी स्तर पर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए काफी उपाय किए गए हैं और राख का पर्याप्त निष्पादन भी किया जा रहा है। ऐसे में कंपनी सोलर प्लांट लगाकर स्वच्छ ऊर्जा पैदा करने की तैयारी कर रही है।   550 करोड़ होंगे प्रोजेक्ट पर खर्च सुबोध निगम का कहना है कि, अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई में 40 मेगावाट, श्रीसिंगाजी ताप विद्युत गृह में 40 मेगावाट और बिरसिंहपुर ताप विद्युत गृह में 30 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने की योजना है। इसके लिए निविदा कंपनी स्तर पर जारी की जा रही है। इस परियोजना पर करीब 550 करोड़ रुपये खर्च आएगा।

मध्यप्रदेश: बिजली दरों में 10% से अधिक इजाफा, ग्राहकों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि करने की तैयारी चल रही है। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की टैरिफ पिटीशन मप्र विद्युत नियामक आयोग में लगाई है, जिसमें दावा किया गया है कि बिजली कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए यह वृद्धि करवाना चाहती हैं। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है। सूत्रों के अनुसार, मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने तीनों डिस्काम की तरफ से 30 नवंबर से पहले यह पिटीशन आयोग को सौंप दी है। आयोग ने पिटीशन को स्वीकार भी कर लिया है। अब जल्द ही इस पर सार्वजनिक सूचना जारी कर जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी। तारीख कंपनी वार होगी। जनसुनवाई के बाद आयोग तय करेगा कि बिजली की दरों में कितनी वृद्धि या कमी की जाए। यदि बिजली दरों में वृद्धि तय होती है तो वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक अप्रैल से इन्हें लागू किया जाएगा। मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला वित्तीय वर्ष महंगाई का नया झटका लेकर आ सकता है. राज्य में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की तैयारी शुरू हो गई है. मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विद्युत टैरिफ बढ़ाने की याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दाखिल कर दी है. टैरिफ पिटीशन स्वीकार, जल्द होगी जनसुनवाई सूत्रों के मुताबिक, तीनों डिस्कॉम की ओर से यह टैरिफ पिटीशन 30 नवंबर से पहले आयोग को सौंपी गई थी, जिसे नियामक आयोग ने स्वीकार कर लिया है. अब जल्द ही सार्वजनिक सूचना जारी कर कंपनीवार जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी. जनसुनवाई के बाद आयोग यह फैसला करेगा कि बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी या राहत दी जाए. यदि वृद्धि को मंजूरी मिलती है तो नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. हजारों करोड़ के घाटे में बिजली कंपनियां राज्य की तीनों विद्युत वितरण कंपनियां भारी वित्तीय संकट से जूझ रही हैं. आंकड़ों के अनुसार— मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर करीब 18,712 करोड़ रुपये का घाटा पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लगभग 16,378 करोड़ रुपये घाटे में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर 7,285 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान इसी घाटे की भरपाई को दर वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है. पहले भी प्रस्ताव ज्यादा, मंजूरी कम पिछले पांच वर्षों में बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित दर वृद्धि और आयोग द्वारा स्वीकृत वृद्धि में बड़ा अंतर रहा है. 2021-22: प्रस्ताव 6.23%, मंजूरी 0.63% 2022-23: प्रस्ताव 8.71%, मंजूरी 2.64% 2023-24: प्रस्ताव 3.20%, मंजूरी 1.65% 2024-25: प्रस्ताव 3.86%, मंजूरी 0.07% 2025-26: प्रस्ताव 7.52%, मंजूरी 3.46% इस बार कंपनियों ने 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है, जिससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है. उपभोक्ताओं पर सीधा असर यदि प्रस्तावित बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की मासिक बिजली बिल राशि में उल्लेखनीय इजाफा हो सकता है. आने वाले दिनों में जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठन और सामाजिक संस्थाएं अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगी. टैरिफ बढ़ोतरी से राहत उपभोक्ताओं को टैरिफ बढ़ोतरी से राहत मिलती रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग मानी जा रही हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आयोग ने बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले बहुत कम वृद्धि स्वीकृत की थी. अब जबकि प्रदेश में सहकारिता चुनाव प्रस्तावित हैं, राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद बड़ी राहत की उम्मीद कम लग रही है. सूत्रों का अनुमान है कि इस बार दरें 4 से 6 प्रतिशत की सीमा में तय हो सकती हैं, जिससे नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग निश्चित माना जा रहा है. 

बिजली से जगमग होंगे सुदूर गांव, विधायक ने स्वीकृत की विद्युतीकरण योजना

बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने डेजर्ट नेशनल पार्क क्षेत्र के विद्युतीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उन गांवों के लिए विधायक निधि से धन आवंटित करने का निर्णय लिया है, जो आजादी के इतने साल बाद भी बिजली से वंचित थे। डीएनपी क्षेत्र राजस्थान के सबसे दुर्गम इलाकों में गिना जाता है। ऐसे में इस पहल से इन गांवों के निवासियों के जीवन में सुधार आएगा और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना के तहत सिरगुवाला गांव में विद्युतीकरण कार्य, मोकमसिंह की ढाणी बच्चिया में ट्रांसफार्मर की स्थापना और कुम्पाणियों की ढाणी लांबड़ा में विद्युतीकरण कार्य किया जाएगा। इन क्षेत्रों के निवासियों के लिए यह कदम ऐतिहासिक महत्व का है, क्योंकि ये बस्तियां आजादी के लगभग 78 वर्षों बाद अब पहली बार बिजली की सुविधा से जुड़ेंगी। विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि डीएनपी क्षेत्र विकास की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां के लोग दशकों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे हैं। मेरा प्रयास है कि इस क्षेत्र का कोई भी गांव अब अंधेरे में न रहे। यह सिर्फ बिजली नहीं बल्कि विकास की पहली किरण है, जो इन बस्तियों के भविष्य को रोशन करेगी। भाटी ने यह भी बताया कि कमलाणी (बिजाबल) के लिए स्वीकृति भी जल्द ही जारी होगी और आगामी दिनों में वहां भी विद्युतीकरण का कार्य प्रारंभ होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में डीएनपी क्षेत्र के शेष गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से विद्युत सुविधा से जोड़ा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों को शीघ्रता और पारदर्शिता से पूरा किया जाए ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

सरकारी कनेक्शनों पर भारी बकाया: 16 जिलों में 73 हजार कनेक्शन और 406 करोड़ का पेंडिंग बिल

भोपाल  मध्यप्रदेश में सरकारी विभागों पर बिजली कंपनियों का भारी बकाया चढ़ गया है। प्रदेश के 16 विभागों ने अब तक 406 करोड़ 36 लाख रुपये के करीब बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया है। कुल 72,900 बिल बकाया हैं।सबसे बड़ा बकायादार नगरीय विकास एवं आवास विभाग है, जिस पर 125 करोड़ 62 लाख रुपये (12,003 बिल) का बकाया है। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 102 करोड़ 32 लाख रुपये (17,049 बिल) बाकी हैं। वित्त विभाग ने इन विभागों के लिए बजट जारी कर दिया था, लेकिन फिर भी भुगतान नहीं किया गया। बिजली कंपनियों ने बार-बार नोटिस भेजे हैं, वहीं एसीएस ऊर्जा और पीएस ने भी सभी विभागों को तत्काल भुगतान करने के निर्देश दिए, मगर कोई असर नहीं दिखा। अन्य प्रमुख बकायेदार विभागों में महिला एवं बाल विकास (34.45 करोड़, 9,965 बिल), स्कूल शिक्षा (29.64 करोड़, 18,539 बिल), स्वास्थ्य (21.07 करोड़), जलसंसाधन (13.97 करोड़), गृह विभाग (10.49 करोड़) और पीएचई विभाग (11.35 करोड़) शामिल हैं। बिजली कंपनियों ने अब एसीएस और पीएस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि अगर जल्द भुगतान नहीं किया गया तो सरकारी दफ्तरों के बिजली कनेक्शन काटे जा सकते हैं, जिससे कई विभागों का कामकाज ठप पड़ सकता है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के शासकीय कनेक्शनों की प्रदेश के ग्वालियर, चंबल और भोपाल संभागों में कुल संख्या 72 हजार 900 है। इसमें सबसे अधिक 16049 कनेक्शन पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के हैं, जिन पर 102.32 करोड़ का बिजली बिल बाकी बताया गया है। मंत्री प्रहलाद पटेल के विभाग पर बकाया राशि के भुगतान के लिए संबंधित विभागाध्यक्षों को पत्र लिखे गए हैं। इसी तरह नगरीय विकास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विभाग के 12034 कनेक्शन हैं, जिन पर 125.62 करोड़ का बिल बाकी है। इसके अलावा जिन मंत्रियों के विभागों से संबंधित बिजली कनेक्शनों पर बकाया राशि अधिक है, उसमें महिला और बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल के नाम शामिल हैं। इन सभी विभागों को भी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी क्षितिज सिंघल ने पत्र लिखा है और बिल जमा कराने को कहा है। यह बकाया राशि अगस्त 2025 की स्थिति में है जबकि अभी अक्टूबर महीने का अंतिम सप्ताह चल रहा है। ऐसे में यह राशि पांच सौ करोड़ से अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। इन सरकारी विभागों पर बकाया है इतनी राशि (करोड़ रुपए) क्र. विभाग का नाम संख्या बकाया राशि 1 नगरीय विकास, आवास 12034 125.62 2 पंचायत, ग्रामीण विकास 17049 102.32 3 पीएचई 445 11.35 4 नर्मदा घाटी विकास 4 0.086 5 गृह विभाग 2070 10.49 6 स्कूल शिक्षा 18539 29.64 7 किसान कल्याण, कृषि 381 2.39 8 वन 766 4.30 9 स्वास्थ्य 1910 21.07 10 ट्राइबल 2805 6.87 11 राजस्व 485 3.76 12 लोक निर्माण 541 4.29 13 उच्च शिक्षा 331 1.56 14 जल संसाधन 497 13.97 15 महिला, बाल विकास 9965 34.45 16 अन्य विभाग 5078 34.21 17 कुल 72900 406.36

105 दिन जनरेटर से चला घर, हाईकोर्ट के आदेश पर बेनीवाल को मिला बिजली कनेक्शन

नागौर राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच के आदेश के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल के नागौर स्थित आवास का बिजली कनेक्शन शुक्रवार शाम को बहाल कर दिया गया। डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (एसई) अशोक चौधरी ने बताया कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश में संशोधन करते हुए 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया था। यह आदेश 10 अक्टूबर को जारी हुआ था लेकिन इसकी कॉपी डिस्कॉम को शुक्रवार को प्राप्त हुई, जिसके बाद सांसद के भाई प्रेमसुख बेनीवाल के नाम पर दर्ज बिजली कनेक्शन को तुरंत जोड़ दिया गया। एसई चौधरी ने बताया कि प्रेमसुख बेनीवाल ने पहले ही 2 लाख रुपये जमा करवाए थे और अब कोर्ट के आदेशानुसार शेष राशि के लिए बैंक गारंटी जमा करने की प्रक्रिया पूरी की गई। हाईकोर्ट ने इस मामले को सेटलमेंट के लिए भेजते हुए 15 दिनों के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि डिस्कॉम ने सांसद के आवास का बिजली बिल करीब 11 लाख रुपये बकाया बताया था। मार्च 2025 में प्रेमसुख बेनीवाल ने 2 लाख रुपये जमा कर मामले को सेटलमेंट में लेने की अर्जी दी थी। इसके बावजूद लगभग तीन महीने बाद डिस्कॉम ने बिना पूर्व सूचना के सांसद के आवास का बिजली कनेक्शन काट दिया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे अनुचित ठहराते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई में 6 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया था। इसके विरोध में सांसद ने डबल बेंच में अपील की, जिसने 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया। सांसद बेनीवाल ने बताया कि इस गलती के कारण उनके आवास को 105 दिनों तक जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे उन्हें काफी असुविधा हुई। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले को सेटलमेंट में भेजते हुए दोनों पक्षों को 15 दिनों के भीतर विवाद का समाधान करने का निर्देश दिया है। सांसद ने कहा कि डिस्कॉम की कार्रवाई अनुचित थी और इस प्रक्रिया में उन्हें कोई गलती नहीं थी, फिर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक हस्तक्षेप का उदाहरण है और दर्शाता है कि बिजली विभाग की बिना सूचना की गई कार्रवाई आम जनता के लिए कितनी असुविधाजनक साबित हो सकती है। अब नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या 15 दिनों के भीतर इस विवाद का स्थायी समाधान हो पाएगा।   राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच के आदेश के बाद सांसद हनुमान बेनीवाल के नागौर स्थित आवास का बिजली कनेक्शन शुक्रवार शाम को बहाल कर दिया गया। डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता (एसई) अशोक चौधरी ने बताया कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश में संशोधन करते हुए 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया था। यह आदेश 10 अक्टूबर को जारी हुआ था लेकिन इसकी कॉपी डिस्कॉम को शुक्रवार को प्राप्त हुई, जिसके बाद सांसद के भाई प्रेमसुख बेनीवाल के नाम पर दर्ज बिजली कनेक्शन को तुरंत जोड़ दिया गया। एसई चौधरी ने बताया कि प्रेमसुख बेनीवाल ने पहले ही 2 लाख रुपये जमा करवाए थे और अब कोर्ट के आदेशानुसार शेष राशि के लिए बैंक गारंटी जमा करने की प्रक्रिया पूरी की गई। हाईकोर्ट ने इस मामले को सेटलमेंट के लिए भेजते हुए 15 दिनों के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि डिस्कॉम ने सांसद के आवास का बिजली बिल करीब 11 लाख रुपये बकाया बताया था। मार्च 2025 में प्रेमसुख बेनीवाल ने 2 लाख रुपये जमा कर मामले को सेटलमेंट में लेने की अर्जी दी थी। इसके बावजूद लगभग तीन महीने बाद डिस्कॉम ने बिना पूर्व सूचना के सांसद के आवास का बिजली कनेक्शन काट दिया। सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे अनुचित ठहराते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। सिंगल बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई में 6 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया था। इसके विरोध में सांसद ने डबल बेंच में अपील की, जिसने 4 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराने का निर्देश दिया। सांसद बेनीवाल ने बताया कि इस गलती के कारण उनके आवास को 105 दिनों तक जनरेटर पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे उन्हें काफी असुविधा हुई। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले को सेटलमेंट में भेजते हुए दोनों पक्षों को 15 दिनों के भीतर विवाद का समाधान करने का निर्देश दिया है। सांसद ने कहा कि डिस्कॉम की कार्रवाई अनुचित थी और इस प्रक्रिया में उन्हें कोई गलती नहीं थी, फिर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक हस्तक्षेप का उदाहरण है और दर्शाता है कि बिजली विभाग की बिना सूचना की गई कार्रवाई आम जनता के लिए कितनी असुविधाजनक साबित हो सकती है। अब नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या 15 दिनों के भीतर इस विवाद का स्थायी समाधान हो पाएगा।  

दो-चार घरों वाले मजरे टोले में भी पहुंची बिजली : ऊर्जा मंत्री तोमर

सेवा पर्व के दौरान 137 वनवासी घर हुए रोशन भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि रिवेम्प्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) अंतर्गत मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्य़ुत वितरण कंपनी धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में सेवा पर्व के दौरान मालवा निमाड़ में 137 उन घरों को भी रोशनी उपलब्ध कराई गई, जो घर मूल गांवों से दो से तीन किमी दूर मजरे टोले की बसाहट वाले थे। इन गांवों के वनवासी परिवार अब इस बात से खुश हैं कि घर में बच्चे बल्ब की रोशनी में पढ़ाई कर रहे हैं, मोबाइल भी अपने ही घर पर चार्ज हो रहा है और टीवी भी चलाकर मनोरंजन भी हो रहा है। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह ने बताया कि सेवा पर्व में अभियान चलाकर दूरदराज के मजरे, टोले में दो चार घर होने पर भी नए ट्रांसफार्मर, तार, पोल स्थापित कर बिजली प्रदान की गई है। इंदौर ग्रामीण वृत्त के अधीन धार जिले के 9 घरों को, देवास के बागली क्षेत्र के पांजापुरा के 4 घरों को, मंदसौर के दूरदराज के 15 घरों को, नीमच के 25, रतलाम ग्रामीण संभाग के 24 घरों को, शाजापुर के 10 घरों को और उज्जैन जिले के दूरस्थ 50 घरों के सेवा पर्व के दौरान रोशन किया गया। अभियान चलाया गया इंदौर ग्रामीण वृत्त अधीक्षण यंत्री डॉ. डीएन शर्मा ने बताया कि चार मजरों के वनवासी लाभार्थियों सर्वश्री कमल बालू, विश्राम मेढ़ा, मिथून अमर सिंह, बाल्लू धानिया, रातेश अमर सिंह, रूप सिंह बिरमन के घर बिजली कार्मिकों द्वारा ट्रेक्टर और बैलगाड़ियों से पोल, तार भेजकर रोशन किये गये।  

राजस्थान में बिजली सस्ती हुई! दो दशकों बाद उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

जयपुर राजस्थान में 25 वर्षों बाद पहली बार आमजन और उद्योगों के लिए बिजली सस्ती हुई है। जयपुर, जोधपुर और अजमेर डिस्कॉम्स ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की टैरिफ याचिका पर नियामक आयोग से मिली स्वीकृति के बाद ऊर्जा शुल्क (एनर्जी चार्ज) में कमी लागू की है। घरेलू श्रेणी में 51 से 150 यूनिट तक बिजली उपभोग करने वाले 35 लाख उपभोक्ताओं के लिए दर 6 रुपये 50 पैसे से घटाकर 6 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है। 150 से 300 यूनिट वाले उपभोक्ताओं को 35 पैसे प्रति यूनिट की राहत दी गई है। वहीं, 100 यूनिट तक उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं का पूरा बिल सरकार की सब्सिडी से शून्य ही रहेगा। राज्य में कुल 1.35 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं में से लगभग 1.04 करोड़ उपभोक्ता मुख्यमंत्री नि:शुल्क बिजली योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। कृषि उपभोक्ताओं के लिए बिजली शुल्क 5 रुपये 55 पैसे से घटाकर 5 रुपये 25 पैसे प्रति यूनिट किया गया है। प्रदेश के 20 लाख से अधिक किसान उपभोक्ताओं पर प्रस्तावित रेगुलेटरी सरचार्ज का कोई असर नहीं होगा, क्योंकि इसे भी राज्य सरकार वहन करेगी। औद्योगिक श्रेणी में पहली बार दरों को एकीकृत कर राहत दी गई है। वृहद उद्योगों के लिए शुल्क 7 रुपये 30 पैसे से घटाकर 6 रुपये 50 पैसे और मध्यम उद्योगों के लिए 7 रुपये से घटाकर 6 रुपये 50 पैसे प्रति यूनिट कर दिया गया है। स्मॉल इंडस्ट्री के लिए भी दर 6 रुपये तय की गई है। इस कदम से औद्योगिक निवेश और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। राजस्थान डिस्कॉम्स पर वर्तमान में लगभग 49,800 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी असेट्स का भार है। इसके निस्तारण के लिए रेगुलेटरी सरचार्ज लगाया गया है, लेकिन छोटे उपभोक्ताओं और किसानों पर इसका भार सरकार वहन करेगी। इससे लगभग 6,700 करोड़ रुपये की रिकवरी संभव होगी और निगमों का ऋण भार घटेगा। डिस्कॉम्स का फोकस पावर परचेज कॉस्ट कम करने और सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर है। कुसुम योजना के तहत पहले ही 1,800 मेगावाट विकेन्द्रित सौर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। आने वाले समय में लगभग 12,000 मेगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।