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रामगढ़ के पतरातू प्लांट से अब 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन, गर्मी में मिलेगी राहत

रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू स्थित पीवीयूएनएल प्लांट में 11 मई 2026 को शाम 7:15 बजे 800 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट-2 का सफलतापूर्वक ट्रायल ऑपरेशन किया गया. इस सफलता के साथ यूनिट-2 के नियमित संचालन और कमर्शियल ऑपरेशन का मार्ग प्रशस्त हो गया है. इस यूनिट के शुरू होने से झारखंड सहित अन्य राज्यों में गर्मी के मौसम के दौरान बढ़ी हुई बिजली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी. इससे बिजली संकट को कम करने में अहम भूमिका निभाई जाएगी. झारखंड को मिलेगा 85 प्रतिशत बिजली रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड स्थित पीभीयूएनएल का दूसरा यूनिट का सफलता पूर्वक ट्रायल हुआ इस यूनिट से 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा. इससे पहले यूनिट 1 से 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. अब रामगढ़ जिले के पतरातू पीवीयूएनएल से 1600 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा इसमें झारखंड राज्य को 1360 मेगावाट बिजली मिलेगा. गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ी हुई है अब पतरातू से बिजली झारखंड को मिलने के बाद पूरे राज्य को फायदा होगा. पतरातू प्लांट से उत्पादित कुल बिजली का 85 प्रतिशत हिस्सा झारखंड राज्य को उपलब्ध होगी, जिससे औद्योगिकीकरण और विकास को गति मिलेगी. अधिकारियों ने मनाया सफलता का जश्न इस अवसर पर पीवीयूएनएल के सीईओ ए के सहगल, सीजीएम प्रोजेक्ट अनुपम मुखर्जी, जीएम ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट मनीष खेतरपाल, जीएम जोगेश चंद्र पत्रा, जीएम विष्णु दत्ता दास और जीएम ओपी सोलंकी सहित पीवीयूएनएल, एनटीपीसी और बीएचईएल के अधिकारियों और कर्मचारियों खुशी जाहिर किया है. सीईओ ए के सहगल ने टीम को दी बधाई. सीईओ ए के सहगल ने सभी कर्मचारियों, अभियंताओं और सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता पूरी टीम की मेहनत, समर्पण और सामूहिक कोशिश का परिणाम है. यूनिट-1 के बाद यूनिट-2 भी संचालन के लिए तैयार सीईओ ए के सहगल ने बताया कि 5 नवंबर 2025 को यूनिट-1 के वाणिज्यिक संचालन की घोषणा की गई थी और अब यूनिट-2 भी कमर्शियल ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार है. सहयोगी संस्थाओं का जताया आभार सीईओ ए के सहगल ने एनटीपीसी, झारखंड सरकार, जेबीवीएनएल और अन्य हितधारकों का उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया.

19 मई 2026 तक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कर्मचारियों (नियमित/संविदा) के सेवा संबंधी मामलों में विस्तार करते हुए कार्मिकों के स्वयं के व्यय पर स्थानान्तरण की सुविधा को और अधिक सरल बनाते हुए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई है। कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं लाइन स्टॉफ को स्वयं अथवा परिवार में किसी सदस्य की गंभीर बीमारी, पति/पत्नी के शासकीय सेवा में अन्यत्र स्थान पर कार्यरत होने पर/शासकीय अनुदान प्राप्त संस्था में कार्यरत होने पर, आपसी स्थानान्तरण तथा अन्य कारणों से उनके स्वयं के व्यय पर स्थानान्तरण के लिये ऑनलाइन आवेदन की सुविधा प्रदान की है। उप महाप्रबंधक स्‍तर तक के अधिकारी/कर्मचारी स्थानांतरण के लिये ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे एवं ऐसे अधिकारी कर्मचारी जिनकी एक ही स्थान पर पदस्थापना की अवधि 01 वर्ष से कम है उनके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। स्थानान्तरण के लिये ऑनलाइन आवेदन करने की लिंक कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर इंटरनल यूज एप्लीकेशन के अन्तर्गत ‘’Employee Transfer Module’’ के नाम से उपलब्ध है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (मा.सं. एवं प्रशा.)  राकेश शर्मा ने कहा है कि इस नई व्यवस्था से कंपनी कार्मिकों को अन्य दफ्तरों में जाए बिना स्थानान्तरण के आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ऑनलाइन प्रक्रिया में आवेदन में दिये गये विकल्प स्थानों पर कार्मिक स्वयं के व्यय पर अपना स्थानान्तरण करा सकेंगे। कंपनी ने कहा है कि कार्मिक 05 मई 2026 से 19 मई 2026 तक अपने स्थानान्तरण के लिये आवेदन कर सकते हैं। कोई भी कार्मिक एक ही बार ऑनलाइन स्थानांतरण आवेदन प्रस्तुत (सबमिट) कर सकेगा एवं स्थानांतरण के लिये केवल ऑनलाईन आवेदन ही स्वीकार किये जायेंगे, किसी भी स्थिति में ऑफलाईन आवेदन स्वीकार नहीं किये जायेंगे।  

एमपी में बिजली बिल में सरचार्ज का तगड़ा झटका, एक महीने तक बढ़ेगी जेब पर अतिरिक्त खर्च

भोपाल  प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर अप्रैल माह के बिल में अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) ने फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) की दर 5.36 प्रतिशत तय की है। यह दर उपभोक्ताओं के बिजली बिल में ऊर्जा शुल्क के साथ जोड़ी जाएगी। बिजली कंपनियों ने एक महीने पहले ही बिजली दरों में 4.8 प्रतिशत का इजाफा किया था। यह सरचार्ज 24 अप्रैल 2026 से 24 मई 2026 एक महीने की अवधि के लिए लागू रहेगा।  कंपनी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अप्रैल 2026 के लिए FPPAS की गणना 5.40 प्रतिशत आई थी। नियामक आयोग के नियमों के तहत यदि यह 5 प्रतिशत से अधिक होता है तो 5 प्रतिशत मूल रूप से लागू किया जाता है और शेष राशि का 90 प्रतिशत जोड़कर अंतिम दर तय की जाती है। इसी आधार पर 5.36 प्रतिशत FPPAS निर्धारित किया गया है। इस दौरान उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिल में ऊर्जा शुल्क के साथ यह अतिरिक्त राशि भी चुकानी होगी। इसके बाद अगले महीने के लिए दरें अलग से तय की जाएंगी, जो उस समय की फ्यूल और पावर खरीद लागत पर निर्भर करेंगी।  इस आदेश के तहत सभी बिजली वितरण कंपनियों पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस सरचार्ज को उपभोक्ताओं के बिल में शामिल करें और इसकी जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करें। इस फैसले से घरेलू और व्यावसायिक दोनों उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में बढ़ोतरी होगी। पहले से ही महंगाई के दबाव में चल रहे उपभोक्ताओं पर यह अतिरिक्त शुल्क आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला माना जा रहा है।  चुपचाप बढ़ा दिए बिजली के दाम बताया जा रहा है कि, बिजली कंपनियों को बिजली खरीदने में ज्यादा खर्च आ रहा है, जिसका बोझ अब बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर डाला जा रहा है। हालांकि, इस बढ़ोतरी को लेकर अबतक विभागीय अधिकारियों की ओर से किसी तरह की जानकारी या सफाई नहीं दी गई है। आम लोगों के बजट पर पड़ेगा असर ज्यादातर लोगों को अभी तक इसकी जानकारी भी नहीं है। सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बार-बार इस तरह की बढ़ोतरी से आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित होता है और लोगों में नाराजगी भी बढ़ सकती है। अब आम आदमी को 4.26 की जगह 11 प्रतिशत ज्यादा बिल चुकाना होगा। बढ़ने लगी लोगों की चिंता मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने अप्रैल 2026 के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज की नई दर 5.36 फीसदी तय कर दी है। इसके बाद मई 2026 से कुल 6 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है, जबकि मार्च 2026 में ये दर ऋणात्मक 0.63 प्रतिशत थी। राज्य में पहले अप्रैल 2026 से 4.8 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी। इस तरह लगातार जारी बिजली दरों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, इस तरह हुई बढ़ोतरी को लेकर अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। -बिजली कंपनी ने अप्रैल और मई 2026 से बिजली बिल में कुल मिलाकर करीब 11 फीसदी सरचार्ज की बढ़ोतरी की गई है। -इस बढ़ोतरी का असर प्रदेश के गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की जेब पर पड़ेगा। -कंपनियों को बिजली खरीदने में ज्यादा खर्च आ रहा है, जिसका बोझ अब बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर डाला गया है। -हालिया बढ़ोतरी को लेकर अबतक विभागीय अधिकारियों की ओर से किसी तरह की जानकारी या सफाई नहीं दी गई है। यानी ये बढ़ोतरी चुपचाप कर दी गई है। 

67 करोड़ बकाया वसूली के लिए बिजली विभाग का बड़ा एक्शन प्लान

करनाल एक लाख रुपये से अधिक राशि के डिफाल्टरों को बिजली निगमों ने निशाने पर ले लिया है। करोड़ों रुपये की अपनी रिकवरी करने के लिए बिजली निगम पहली बार सख्ती बरतते हुए डिफाल्टर उपभोक्ताओं की संपत्ति नीलाम की प्रक्रिया अपनाएगा। सबसे पहले एसडीओ संबंधित उपभोक्ता को तीन नोटिस देगा और इसके बाद कार्यकारी अभियंता एक नोटिस देगा। इसके बाद भी उपभोक्ता द्वारा बिल अदा नहीं किया तो निगम बैंक की तर्ज पर तहसीलदार के माध्यम से संबंधित की प्रॉपर्टी नीलाम करेगा। गौर हो कि हरियाणा में निगमों का 8247 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें उत्तर हरियाणा का 3573 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम का 4674 करोड़ रुपये शामिल है। करनाल जिले की बात करें तो ऐसे 2710 डिफाल्टर हैं जिन पर करीब 67 करोड़ रुपये का बकाया है। इनमें सबसे अधिक 1178 डिफाल्टर सब अर्बन और मेरठ रोड क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर हैं। इसलिए ऐसे डिफाल्टरों से बकाया वसूलने के लिए निगम ने सख्ती से पेश आने का फैसला लिया है। सबसे पहले एसडीओ अपने स्तर पर तीन बार और एक्सईएन अपने स्तर पर एक बार नोटिस जारी करेंगे। इसके बावजूद भुगतान न करने पर मामला तहसीलदार के पास भेजा जाएगा, जहां से अंतिम नोटिस जारी होगा। यदि डिफाल्टर फिर भी भुगतान नहीं करते हैं तो लैंड रिकवरी एक्ट के तहत उनकी जमीन, वाहन, मशीनें और यहां तक कि गहनों की भी नीलामी की जा सकती है। बिजली अधिकारियों के अनुसार, एक लाख रुपये से अधिक राशि वाले डिफाल्टरों पर ही यह विशेष जांच की जाएगी। डिफाल्टर नहीं खरीद बेच सकेगा प्रॉपर्टी जिले में ऐसे जितने भी बिजली बिल डिफाल्टर हैं, जिन्होंने सालों से लाख से करोड़ों रुपये का अपना बिल जमा नहीं करवाया है। जब तक वह ऐसा नहीं करते हैं तो भविष्य में वह अपनी प्रॉपर्टी खरीद व बेच नहीं सकेंगे। इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निगम 26 डिफाल्टरों के केस भेज चुका: एसई बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता नसीब सिंह ने बताया कि निगम ने ऐसे 26 डिफाल्टरों के केस जिनके ऊपर दो करोड़ 27 लाख का बिजली बिल पेंडिंग है, उनको तहसीलदार के पास भेज दिया है। आगे भी ऐसे लोगों की लिस्ट बनाकर तहसीलदार को भेजे जाएंगे। दो हजार से अधिक ऐसे डिफाल्टर हैं, जिनके ऊपर करोड़ों में बिल पेंडिंग हैं। लैंड रिकवरी एक्ट के तहत जमीन कुर्क की जा सकती है। सालों से है बिल बकाया जिले के सभी सब डिवीजनों में हजारों की संख्या में बिजली बिल न भरने के कारण डिफाल्टर घोषित किए हुए हैं जिनकी बिल की राशि बड़ी है और जिन्होंने सालों से बिजली का बिल नहीं जमा करवाया है। ऐसी स्थिति में कईयों के कनेक्शन काट दिए गए हैं। लेकिन बावजूद इसके कुछ उपभोक्ताओं को छोड़कर अभी भी डिफाल्टर बकाया बिल नहीं जमा करवा रहे हैं।  

हिमाचल में बिजली सब्सिडी का नया नियम, 250 यूनिट तक फ्री बिजली और 300 यूनिट तक मिलेगी राहत

शिमला   हिमाचल प्रदेश सरकार ने बिजली ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए सब्सिडी का नया और स्पष्ट पैमाना तय किया है. अब राज्य में घरेलू उपभोक्ताओं को दो मीटरों पर कुल 250 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी, जबकि एक लाख गरीब परिवारों को 300 यूनिट तक निशुल्क बिजली देने का फैसला लागू कर दिया गया है. ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव शुभकर्ण सिंह ने इस संबंध में बिजली बोर्ड को निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे मुख्यमंत्री की बजट घोषणा को अमलीजामा पहनाया गया है।  कैसे मिलेगा 250 यूनिट फ्री बिजली का लाभ? एक उपभोक्ता को दो बिजली मीटरों पर कुल 250 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी।  यानी एक मीटर पर 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली।  यह लाभ एक राशन कार्ड पर अधिकतम दो मीटरों तक ही सीमित रहेगा।  जिनके पास दो से अधिक मीटर हैं, उनके लिए दो मीटर का चयन सिस्टम के जरिए होगा।      गरीब परिवारों को 300 यूनिट फ्री दी जाएगी. इससे राज्य के एक लाख निर्धन परिवारों को बड़ा फायदा होगा. इन परिवारों को एक मीटर पर 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी. यानि पूरी तरह जीरो बिल मिलेगा. इसमें SET, ED और मीटर टैक्स भी नहीं लगेगा. पात्र परिवारों की सूची संबंधित विभाग बिजली बोर्ड को देगा।  स्लैब के हिसाब से समझें सब्सिडी का गणित     0 से 125 यूनिट: पूरी तरह मुफ्त (जीरो बिल)      126 यूनिट से ऊपर: कोई सब्सिडी नहीं.     यानी 126–300 और 301+ यूनिट पर पूरी दर से बिल देना होगा.     जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक कंज्यूमर आईडी को राशन कार्ड से लिंक नहीं किया, उन्हें सब्सिडी पाने के लिए यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी.     0 से 125 यूनिट: पूरी तरह मुफ्त (जीरो बिल).     126 यूनिट से ऊपर: कोई सब्सिडी नहीं.     यानी 126–300 और 301+ यूनिट पर पूरी दर से बिल देना होगा.     जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक कंज्यूमर आईडी को राशन कार्ड से लिंक नहीं किया, उन्हें सब्सिडी पाने के लिए यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी.     हिमाचल प्रदेश : NDPS Act में चार्ज फ्रेम होते ही पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे     हिमाचल प्रदेश : NDPS Act में चार्ज फ्रेम होते ही पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे     शिमला में प्रतिबंधित सड़कों पर गाड़ी चलाकर दिखाओ, लगेगा खासा मोटा जुर्माना     शिमला में प्रतिबंधित सड़कों पर गाड़ी चलाकर दिखाओ, लगेगा खासा मोटा जुर्माना     खंडवा: 2.60 लाख बिजली उपभोक्ताओं देना होगा बढ़ा बिल, हर महीने 1 करोड़ का भार     खंडवा: 2.60 लाख बिजली उपभोक्ताओं देना होगा बढ़ा बिल, हर महीने 1 करोड़ का भार     हिमाचल में बदला मौसम, दिन में धूप से गर्मी, शाम को बारिश-तूफान का अलर्ट     हिमाचल में बदला मौसम, दिन में धूप से गर्मी, शाम को बारिश-तूफान का अलर्ट ज्यादा मीटर वालों के लिए क्‍या बनाए गए नियम दो से ज्यादा मीटर होने पर केवल दो मीटर पर ही सब्सिडी दी जाएगी. बाकी मीटरों पर सामान्य दर से बिल आएगा. 125 यूनिट तक भी ऐसे मामलों में प्रति यूनिट तय दर से भुगतान करना होगा. कृषि उपभोक्ताओं को भी राहत सरकार ने किसानों के लिए भी सब्सिडी जारी रखी है. 0 से 20 KVA कनेक्शन पर बिजली दर 5.03 रुपये प्रति यूनिट इसमें 4.73 रुपये सब्सिडी यानी प्रभावी दर सिर्फ 30 पैसे प्रति यूनिट फिक्स्ड चार्ज: 105 रुपये प्रति माह  

1 अप्रैल से MP में बिजली और प्रॉपर्टी महंगी, आम आदमी की जेब पर होगा असर

भोपाल नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की जेब पर असर डालने वाले कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। बिजली बिल में बढ़ोतरी, प्रॉपर्टी खरीदना महंगा होना और रेलवे रिजर्वेशन के नियमों में बदलाव जैसे फैसले सीधे आम आदमी के खर्च को प्रभावित करेंगे। वहीं, कचरा प्रबंधन के नए नियमों के तहत लापरवाही पर जुर्माना भी देना पड़ सकता है। सरकार और प्रशासन का कहना है कि ये बदलाव व्यवस्था सुधारने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं, लेकिन इससे आम नागरिकों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और शहरी आबादी पर इन फैसलों का व्यापक असर देखने को मिलेगा। बिजली बिल में बढ़ोतरी नए नियमों के तहत बिजली की दरों में औसतन पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। हालांकि यह बढ़ोतरी स्लैब के अनुसार अलग-अलग होगी। जानकारी के अनुसार 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को करीब 80 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है, जबकि 400 यूनिट तक खपत करने वालों का बिल 150 रुपये तक बढ़ सकता है। इससे गर्मी के मौसम में पहले से ही बढ़ी बिजली खपत के बीच उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रॉपर्टी खरीदना हुआ महंगा प्रॉपर्टी से जुड़ी कलेक्टर गाइडलाइन में करीब 12 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इसका सीधा असर जमीन और मकान खरीदने वालों पर पड़ेगा। नई दरें लागू होने के बाद रजिस्ट्री शुल्क भी बढ़ेगा, जिससे घर खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो जाएगा। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी अधिक प्रभाव डाल सकती है। कचरा प्रबंधन के नए नियम शहरों में अब कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य किया जा रहा है। गीला, सूखा और अन्य प्रकार के कचरे को अलग नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। नगर निगम ने इसके लिए सख्त नियम बनाए हैं, जिनके तहत घरों, होटलों और संस्थानों को कचरा पृथक्करण सुनिश्चित करना होगा। इससे साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। रेलवे रिजर्वेशन नियमों में बदलाव रेलवे रिजर्वेशन के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। अब वेटिंग टिकट और कंफर्मेशन से जुड़े नियमों को और पारदर्शी बनाया गया है। साथ ही टिकट कैंसिलेशन और रिफंड प्रक्रिया में भी सुधार किया गया है, जिससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी। नए नियमों के लागू होने से यात्रा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। आयकर प्रणाली में सुधार आयकर कानून को सरल बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसमें टैक्स भुगतान और रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान किया गया है। डिजिटल माध्यमों के जरिए भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और समय की बचत होगी। आम आदमी पर सीधा असर इन सभी बदलावों का सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन और बजट पर पड़ेगा। जहां एक ओर खर्च बढ़ेंगे, वहीं कुछ क्षेत्रों में सुविधाएं भी बेहतर होंगी। ऐसे में लोगों को अपने खर्च और योजनाओं में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।

MP में बिजली की दरों में बढ़ोतरी: 1 अप्रैल से 150 यूनिट के बाद होगा बिल महंगा

 भोपाल मध्य प्रदेश की जनता को महंगाई का एक और झटका लगने जा रहा है. रसोई गैस और अन्य चीजों की बढ़ती कीमतों के बीच अब बिजली दरों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है. मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ जारी किया है, जिसके तहत बिजली दरों में करीब 4.80 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. इसका असर प्रदेश के करीब डेढ़ करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।  हालांकि आयोग ने निम्न दाब (एलवी-1) और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए उनकी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके अलावा, 100 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह रियायत मिलती रहेगी. लेकिन 150 यूनिट से ज्यादा खपत करने वालों पर इस बढ़ोतरी का असर पड़ेगा।  नई व्यवस्था के तहत 151 यूनिट का स्लैब पार करते ही प्रति यूनिट दर के साथ-साथ फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ जाएगा. फिक्स्ड चार्ज को 28 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए प्रति 0.1 किलोवॉट कर दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं का कुल बिल बढ़ना तय है।  अगर अलग-अलग खपत के हिसाब से देखें तो 150 यूनिट से ज्यादा खपत पर बिजली बिल करीब 1017 रुपए तक पहुंच सकता है, जो लगभग 4.94 प्रतिशत की वृद्धि है. वहीं 200 यूनिट से ज्यादा खपत पर बिल करीब 1696 रुपए तक हो सकता है, यानी करीब 5.30 प्रतिशत बढ़ोतरी. इसी तरह 250 यूनिट पर बिल लगभग 2183 रुपए (5.10 प्रतिशत वृद्धि), 300 यूनिट पर 2668 रुपए (4.98 प्रतिशत वृद्धि) और 400 यूनिट से अधिक खपत पर बिल करीब 3689 रुपए (4.82 प्रतिशत ज्यादा) तक पहुंच सकता है।  जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर गर्मियों के मौसम में होगा, जब एसी, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है. ऐसे में ज्यादा खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भारी बिल का सामना करना पड़ सकता है।  इसके अलावा, नई दरों में टाइम ऑफ डे (TOD) व्यवस्था को भी प्रभावी किया गया है. इसके तहत शाम 6 बजे से रात 10 बजे के बीच बिजली की खपत पर ज्यादा फीस देनी होगी. यानी पीक ऑवर्स में बिजली का इस्तेमाल महंगा पड़ेगा, जबकि दिन के समय बिजली इस्तेमाल करने पर कम खर्च आएगा. अनुमान है कि पीक टाइम में बिल 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।  बिजली कंपनियों ने आयोग के सामने 10.19 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था. कंपनियों का तर्क था कि पिछले वित्तीय वर्ष में उन्हें करीब 6,044 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए दरें बढ़ाना जरूरी है. हालांकि आयोग ने इस प्रस्ताव को कम करते हुए 4.80 प्रतिशत तक ही वृद्धि को मंजूरी दी. कुल मिलाकर, नई दरों के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को अपने खर्च में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना होगा। 

बिहार में बिजली बिल में बदलाव: दिन में सस्ती और शाम को महंगी बिजली, स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए नया सिस्टम

पटना  बिहार विद्युत विनियामक आयोग (बीईआरसी) ने बिजली कंपनियों की याचिका स्वीकार कर ली है. अब 1 अप्रैल 2026 से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे 87 लाख से अधिक घरेलू. व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे (टीओडी) टैरिफ लागू होगा. इसका मतलब है कि बिजली खपत का समय तय करेगा बिल कितना आएगा. इसके तहत अब दिन में सस्ती और रात में महंगी बिजली मिलेगी. जानकारी के अनुसार, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली इस्तेमाल करने पर उपभोक्ताओं को सिर्फ 80 प्रतिशत राशि चुकानी होगी. यानी 100 रुपये की खपत पर 80 रुपये ही. शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक पीक आवर में खपत पर 120 प्रतिशत दर लगेगी. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आयोग ने इसे 110 प्रतिशत रखा है. जबकि रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक पूरी तरह सामान्य दर लागू रहेगी. कृषि कनेक्शन को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।  क्या है टाइम ऑफ डे टैरिफ? टाइम ऑफ डे टैरिफ का मतलब है कि दिन के अलग-अलग समय पर बिजली की दर अलग-अलग होगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिजली उपयोग का समय बदलने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि पीक आवर में लोड कम किया जा सके. पहले यह व्यवस्था सिर्फ औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक सीमित थी, लेकिन अब इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है।  तीन टाइम स्लैब में बंटी बिजली दरें जानकारी के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत दिन को तीन हिस्सों में बांटा गया है.     सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक: इस दौरान बिजली सबसे सस्ती रहेगी और उपभोक्ताओं को सामान्य दर का करीब 80% ही देना होगा.     शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक: यह पीक आवर होगा, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को लगभग 10% अधिक और गैर-घरेलू को 20% तक ज्यादा शुल्क देना पड़ेगा।      रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक: इस दौरान सामान्य दर पर ही बिजली मिलेगी. किन उपभोक्ताओं पर लागू होगा नियम? यह नया नियम मुख्य रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले उपभोक्ताओं पर लागू होगा. इसके अलावा जिन उपभोक्ताओं का लोड 10 किलोवाट से अधिक है, उन पर भी यह व्यवस्था लागू की जा सकती है. कृषि उपभोक्ताओं को फिलहाल इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।  क्यों लिया गया यह फैसला? ऊर्जा विभाग और आयोग का मानना है कि दिन के समय खासकर सोलर ऊर्जा की उपलब्धता ज्यादा होती है, जिससे बिजली उत्पादन सस्ता पड़ता है. इसलिए दिन में दर कम रखी गई है. वहीं शाम के समय मांग बढ़ने के कारण दरें बढ़ाई गई हैं, ताकि उपभोक्ता अपनी खपत को संतुलित करें।  कितने उपभोक्ताओं पर असर? बिहार में करीब 2 करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं और इनमें बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इस फैसले का असर लाखों उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर पड़ेगा, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां स्मार्ट मीटर तेजी से लगाए जा रहे हैं।  क्या होगा आम लोगों पर असर? इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को अपने बिजली उपयोग का समय बदलना होगा. अगर लोग दिन में ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे तो उनका बिल कम आएगा, जबकि शाम के समय ज्यादा उपयोग करने पर बिल बढ़ सकता है. यानी अब बिजली बचाने के साथ-साथ समय प्रबंधन भी जरूरी हो जाएगा।  पूरी कवायद का क्या होगा असर? बिहार में बिजली बिल की यह नई व्यवस्था उपभोक्ताओं की आदतों को बदलने वाली है. सरकार और आयोग का लक्ष्य बिजली की मांग को संतुलित करना और सस्ती ऊर्जा का बेहतर उपयोग करना है. हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव शुरुआत में चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही उपयोग से बिजली बिल में बचत भी संभव है। 

दिल्ली में बिजली के दामों में होगी वृद्धि, अप्रैल से लागू होगा नया प्लान

नई दिल्ली दिल्लीवासियों के लिए बड़ी खबर है. अप्रैल से बिजली की दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है. दावा किया जा रहा है कि ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि दिल्ली सरकार तीन बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को 38000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के बकाया का भुगतान करने की तैयारी कर रही है।  एक एजेंसी के मुताबिक सरकार बिजली की दरों में बढ़ोतरी पर सब्सिडी देने की भी योजना बना रही है, ताकि उपभोक्ताओं पर इसका असर कम हो सके. पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को एक निर्देश दिया था. जिसमें कहा गया था कि सरकार तीन निजी डिस्कॉम BRPL, BYPL और TPDDL – को 27200 करोड़ रुपये की कैरिंग कॉस्ट (ब्याज) सहित रेगुलेटरी एसेट्स का भुगतान 7 साल के अंदर करे।  रेगुलेटरी एसेट्स वे लागतें हैं जिनकी वसूली भविष्य में होने की उम्मीद होती है. आम आदमी पार्टी के शासन के पिछले एक दशक में बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी न होने के कारण तेज़ी से बढ़ी हैं. दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने जनवरी में केंद्रीय एजेंसी, अपीलीय बिजली न्यायाधिकरण (APTEL) को सूचित किया कि दिल्ली में कुल रेगुलेटरी एसेट्स 38,552 करोड़ रुपये हैं।  जानें किस डिस्कॉम की है कितनी राशि डीईआरसी की फाइलिंग के अनुसार बकाया राशि में BRPL के लिए 19,174 करोड़ रुपये, BYPL के लिए 12,333 करोड़ रुपये और TPDDL के लिए 7,046 करोड़ रुपये शामिल हैं. ये राशि डिस्कॉम द्वारा बिजली की आपूर्ति के लिए किए गए अनुमोदित खर्च है. वसूली में देरी के कारण ब्याज जमा होने से मूल रेगुलेटरी एसेट्स की राशि बढ़ गई है।  अदालत ने DERC को एक वसूली योजना तैयार करने, कैरिंग कॉस्ट (ब्याज) का हिसाब रखने और लागत वसूली में हुई लंबी देरी की व्याख्या करते हुए एक विस्तृत ऑडिट करने का भी निर्देश दिया था. यह वसूली 7 साल की अवधि में बिजली के बिलों में रेगुलेटरी एसेट सरचार्ज बढ़ाकर किए जाने की संभावना है।  दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने पिछले साल मार्च में कहा था कि डिस्कॉम को रेगुलेटरी एसेट्स के रूप में जमा हुए 27,000 करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार दिया गया है. जिससे यह संकेत मिला था कि शहर में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। 

छत्तीसगढ़ के 29 लाख उपभोक्ताओं को मिलेगा राहत, 758 करोड़ का बकाया बिजली बिल होगा माफ

रायपुर  मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना छत्तीसगढ़ के आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लगभग 29 लाख उपभोक्ताओं को 758 करोड़ रुपये की सीधी छूट दी जाएगी। योजना मुख्य रूप से निम्नदाब घरेलू, बीपीएल और कृषि उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके तहत 31 मार्च 2023 तक की बकाया राशि को आधार माना गया है। सरचार्ज को भी माफ किया जाएगा पात्र उपभोक्ताओं को न केवल मूल राशि में रियायत मिलेगी, बल्कि बकाया पर लगने वाले भारी-भरकम अधिभार (सरचार्ज) को भी माफ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन और प्रोटोकाल के कारण महीनों तक मीटर रीडिंग नहीं हो सकी थी। इसके बाद जब एकमुश्त भारी बिल आए, तो आर्थिक तंगी के चलते लाखों परिवार इन्हें चुकाने में असमर्थ रहे। अब सरकार की इस पहल का उद्देश्य इन्हीं परिवारों को कर्ज के चक्रव्यूह से बाहर निकालना है। ऐसे उठाएं योजना का लाभ उपभोक्ता मोर बिजली एप या नजदीकी बिजली वितरण केंद्र पर जाकर पंजीयन करा सकते हैं। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। गांव-गांव में विशेष शिविर लगाकर अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जाएगा। वितरण केंद्र के अधिकारियों से संपर्क करें बिल भुगतान के पश्चात पात्र उपभोक्ता एम-ऊर्जा योजना का लाभ लेने के लिए भी पात्र हो जाएंगे। बिजली कंपनी ने अपील की है कि किसी भी संशय की स्थिति में वितरण केंद्र के अधिकारियों से तुरंत संपर्क करें।