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UP Power Supply: कोयला संकट के बावजूद नहीं थमी बिजली, योगी सरकार में दिनभर निर्बाध आपूर्ति का दावा

कोयला संकट के बावजूद योगी सरकार में बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुचारु, दिन में कटौतीमुक्त बिजली पीक आवर्स में पावर बैंकिंग के जरिए मिल रही 2,400 मेगावाट बिजली महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत सात राज्यों से बिजली लेकर आपूर्ति सामान्य रखने के प्रयास 19 सितंबर को 27,744 मेगावाट पीक डिमांड विद्युत आपूर्ति की गई  सभी उपभोक्ताओं को दिन में मिली कटौतीमुक्त बिजली लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। कोयला संकट और विभिन्न चुनौतियों के बावजूद प्रदेश में विद्युत आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को दिन के समय कटौती-मुक्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी औसतन 20 घंटे से अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। महाराष्ट्र समेत सात राज्यों से बिजली लेकर आपूर्ति सामान्य रखने के प्रयास पीक आवर्स में बिजली की उपलब्धता बनाए रखने के लिए प्रदेश को विभिन्न राज्यों से पावर बैंकिंग के माध्यम से औसतन लगभग 2,400 मेगावाट बिजली प्राप्त हो रही है। इसमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश शामिल हैं। दूसरे राज्यों से बिजली प्राप्त करने की इस व्यवस्था से प्रदेश में बिजली की मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल रही है। सरकार और विद्युत विभाग का जोर उपभोक्ताओं को निर्बाध और सुचारु बिजली उपलब्ध कराने पर है। दिन में कटौती मुक्त बिजली 19 सितंबर को सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को दिन में कटौती-मुक्त बिजली मिली। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 20 घंटे 33 मिनट विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई। इस अवधि में 27,744 मेगावाट की विद्युत मांग की आपूर्ति की गई। यूपी पीक डिमांड बिजली आपूर्ति में देश में दूसरे स्थान पर रहा। इससे पहले 18 सितंबर को भी सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को दिन में कटौती-मुक्त बिजली मिली थी। रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 21 घंटे 43 मिनट विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी। प्रदेश में 27,173 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई थी। यूपीपीसीएल अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जाएं और जहां से भी बिजली उपलब्ध हो, उसे प्राप्त कर आपूर्ति सामान्य बनाए रखी जाए। अनुरक्षण माह में प्रदेशभर में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए तेजी से हो रहे कार्य वहीं, सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत अनुरक्षण माह में प्रदेशभर में बिजली व्यवस्था को बेहतर और सुचारु बनाने के लिए विभिन्न अनुरक्षण कार्य किए जा रहे हैं। यूपीपीसीएल की टीमें फील्ड में आवश्यक रखरखाव कार्यों को पूरा करने में जुटी हैं, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सके।

बिजली बिल बकाया रखने वालों पर शिकंजा, जालंधर में 25,257 कनेक्शन काटने की तैयारी

 जालंधर  पावरकाम अब 20 हजार से एक लाख तक बिजली बिल बकाया वाले 25,257 उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटेगा। एक साल से उपभोक्ताओं ने बिल जमा नहीं करवाया है। तीन दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू हो जाएगी। पहले अस्थायी तौर पर कनेक्शन काटे जाएंगे। अगर उपभोक्ता दो सप्ताह में बिल जमा नहीं करवाता है तो स्थायी तौर पर कनेक्शन काट दिया जाएगा। 20 से 50 हजार तक बकाया बिल वाले 18,281 उपभोक्ता हैं, जिनसे 58.28 करोड़ व 50 हजार से एक लाख रुपये तक बकाया वाले 6,976 उपभोक्ता हैं, जिनसे 47.69 करोड़ रुपये पावरकाम ने वसूलने हैं। पिछले दो सप्ताह में पावरकाम ने एक से ढाई लाख रुपये तक बकाया वाले 5,085 उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटे थे। इनसे 12.51 करोड़ रुपये बिल की रिकवरी की गई। पावरकाम के डिप्टी चीफ इंजीनियर गुलशन चुटानी ने कहा कि कार्रवाई जारी रहेगी।     20 से 50 हजार तक बकाया बिल वाले हैं 18,281 उपभोक्ता     50 हजार से एक लाख 50 रुपये का बकाय वाले हैं 6,976 उपभोक्ता     25 हजार से ज्यादा लोगों कनेक्शन काटेगा पावरकाम।     25 करोड़ का बिजली बिल बकाया घरेलू व कमर्शियल उपभोक्ताओं का ईस्ट कैंट मॉडल टाउन वेस्ट फगवाड़ा     डिफॉल्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लिस्ट तैयार हो चुकी है। घरेलू व कमर्शियल उपभोक्ताओं का 25 करोड़ का बिल बकाया है। गुलशन चुटानी, डिप्टी चीफ इंजीनियर  

यूरोप की ऊर्जा जरूरतों का नया समाधान! समुद्र में बना आर्टिफिशियल आइलैंड, 3.5 GW विंड पावर का होगा हब

ब्रसेल्स  सौ बात की एक बात कि बिजली पैदा करने को लेकर यूरोप के देश बेल्जियम से एक ऐसी ख़बर आई जिस पर ज़्यादा लोगों का ध्यान नहीं गया लेकिन सबको ध्यान देने की ज़रूरत है. बिजली पैदा करने के लिए दुनिया में क्या-क्या किया जा रहा है, इस पर सब को नज़र रखने की ज़रूरत है. क्योंकि दुनिया में ताक़त का खेल इसी आधार पर होता जा रहा है कि किसके पास कितनी ऊर्जा बनाने की कपैसिटी है. ईरान युद्ध में सारा खेल ही तेल के व्यापार को कंट्रोल करने का है. AI की जंग जो चल रही है, उसमें दुनिया के डेटा सेंटरों पर कंट्रोल करने के लिए बड़ी भारी मात्रा में बिजली की ज़रूरत पड़ेगी, ये सब देश समझ रहे हैं. ऊधर रूस और यूक्रेन युद्ध में यूरोप ने देख लिया कि उसके हाथ इसलिए बंधे हुए हैं क्योंकि उसको सर्दियों में अपने हीटिंग सिस्टम चलाने के लिए रूस की गैस की ज़रूरत पड़ती है. और यूरोप में अब जिस हिसाब से गर्मी पड़ने लग गई है तो वो ये भी समझ रहे हैं कि अब तो वहां भी AC लगाने पड़ेंगे आगे चल कर।  अभी तक पंखे भी नहीं देखे थे उन्होंने. तो बिजली कहां से आएगी इतनी? कोयले से बना नहीं सकते क्योंकि कोयला जला-जला कर ही तो 100 साल में दुनिया का ये हाल हो गया है कि दुनिया भर में गर्मी बढ़ गई है. यूरोप दूसरों को नसीहत दे रहा है कि कोयला मत जलाओ तो ख़ुद कैसे जला लेगा? तेल और गैस के लिए या तो रूस के सामने झुकना पड़ता है या अरब देशों पर निर्भर रहना पड़ता है. परमाणु बिजली के लिए यूरेनियम की मारामारी है. सोलर बिजली के लिए ज़मीन भी चाहिए जो यूरोप के कई देशों में उतनी है नहीं और बड़ी बात ये कि सूरज तो वहां निकलता ही कितने दिन है साल में? तो यूरोप के कई देश बनाते हैं बिजली हवा से।  हवा से मतलब विंडमिल से. पवन चक्कियों से. वो देखा है ना आपने बड़ा से पंखा लगा देते हैं ऊंचाई पर और वो हवा से चलता है तो नीचे चक्की चलती है और उससे बिजली बनाते हैं. लेकिन उसके लिए क्या चाहिए? एक तो बहुत सारी पवन चक्कियां एक साथ लगाने के लिए ख़ाली मैदान चाहिएं जहां खुली हवा तेज़ी से चलती हो. इतनी ज़मीन कहां से लाएं एक साथ? और ज़मीन पर पवन चक्कियां लगा दें तो खेती नहीं कर सकते वहां फिर. वो अलग नुक़सान है. क्योंकि अगर पवन चक्कियां वहां लगाएं जहां पर भी थोड़ी-बहुत जगह मिले तो वो तो कर सकते हैं लेकिन फिर ये दूर-दूर लगे पंखों से बिजली बनाकर एक जगह लाने के लिए इतना सारी केबल लगानी पड़ेगी, नहीं तो उसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कैसे करेंगे? और यूरोप के बेल्जियम जैसे देशों के पास तो वैसे भी इतनी सारी खुली ज़मीन नहीं है एक साथ. तो जानते हैं बेल्जियम क्या कर रहा है? बेल्जियम ने लगाया टापू वाला दिमाग बेल्जियम ने देखा कि सबसे ज़्यादा खुली और तेज़ हवा बिना किसी रुकावट के कहां चलती है? दिन हो रात कौन-सी ऐसी जगह है जहां पवन चक्कियों के पंखे फ़र्र-फ़र्र चलते रहेंगे और बिजली बनाते रहेंगे? और ज़मीन भी नहीं छोड़ने पड़ेगी उनके लिए? समुद्र में. जी, बेल्जियम ने सोचा कि अगर समुद्र में पवन चक्कियां लगा दें तो? पानी में ताल बिछाकर बिजली ज़मीन तक ले आएंगे. लेकिन समुद्र में पवन चक्कियां लगाएंगे कहां? तैरते हुए प्लैटफ़ॉर्म पर तो लगा नहीं सकते क्योंकि वो तो हवा से डोल जाएंगे. तो बेल्जियम क्या कर रहा है कि समुद्र में एक पूरा टापू बना रहा है. जी, पूरा नया टापू समुद्र के अंदर. ये अपने आप में दुनिया का एक नया अजूबा बनाया जा रहा है.  वो समुद्र में एक पूरा टापू बना रहा है बिजली पैदा करने के लिए।  कहां बन रहा यह आइलैंड? नॉर्थ सी में, उत्तर सागर में, बेल्जियम अपने तट से क़रीब 45 km दूर एक आर्टिफ़िशियल एनर्जी आइलैंड बना रहा है. प्रिंसेस एलिज़ाबेथ आइलैंड के नाम से. ये दुनिया का पहला ऐसा टापू बन रहा है. और ये टापू बनाया कैसे जा रहा है वो असली समझने वाली बात है. जैसे बच्चों के खिलौने होते हैं ना जिनमें ब्लॉक जोड़-जोड़ कर कोई बिल्डिंग बनाई जाती है या कुछ भी बनाया जाता है? वैसे बना रहा है. सिमेंट के, कॉन्क्रीट के बड़े-बड़े ब्लॉक बना रहा है, बक्से बना रहा है. और इन बक्सों में समंदर में डाल दिया जाएगा और उनको जोड़कर पूरा टापू बना देंगे. द नेदरलैंड्स के फ़्लिसिंगेन बंदरगाह में 23 ऐसे बड़े-बड़े कॉन्क्रीट के डिब्बे बनाए गए हैं. बड़े-बड़े मतलब एक-एक डिब्बा क़रीब 58m लंबा है, 28m चौड़ा है और 23 से 32m ऊंचा है. 58x28x32 समझ रहे हैं आप? मतलब एक 7 मंज़िला बिल्डिंग समझ लीजिए चौड़ी वाली. दो को जोड़ दो एक फ़ुटबॉल के मैदान जितनी जगह से भी ज़्यादा घेर लें, इतने बड़े-बड़े डिब्बे हैं. और हर डिब्बे का वज़न कितना? हर एक का वज़न है क़रीब 22,000 टन।  कैसे बन रहा आइलैंड मतलब समझ लो कोई 15,000 गाड़ियों जितना वज़न एक डिब्बे का. इतना सिमेंट लगा कर बने हैं ये डिब्बे. और ये तो अभी ख़ाली डिब्बों की बात हो रही है. खोखले बनाए गए हैं. 23 ऐसे डिब्बे. और इनको उतार दिया गया है समुद्र में. इन भारी डिब्बों को जहाज़ों से खींचकर समुद्र में ले जाया गया और वहां समुद्र के तल में डुबो दिया गया. और अब इनकी दीवारों के अंदर भरी जाएगी रेत. क़रीब बीस लाख क्यूबिक मीटर रेत भरी जा रही है. और ऐसे बनाया जा रहा है समुद्र के अंदर एक 6 हेक्टेयर का ठोस टापू. 6 हेक्टेयर मतलब लगभग 15 एकड़ का टापू बनेगा. मतलब समझ लो फ़ुटबॉल के 12 मैदानों जितना. उस पर बंदरगाह बनाया जाएगा, हेलीपैड बनाया जाएगा. और एक साथ 250 से ज़्यादा पवन चक्कियां लगाई जाएंगी, उनकी टर्बआइन लगाई जाएंगीं जिससे बिजली बनेगी और तारें बिछाई जाएंगी तट तक. डिब्बे समुद्र में उतार दिये गए हैं. बाक़ी काम में 5 साल लग जाएंगे. 2031 से बिजली मिलना शुरू हो जाएगी बेल्जियम को इससे।  कैसे बिजली पैदा होगी? यानी समुद्र में लगने वाली सैकड़ों पवन … Read more

कचरे से बनेगी बिजली और बायो-CNG, शारजाह में BEEAH मुख्यालय पहुंचे CM मोहन यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित तीन दिवसीय प्रतिष्ठित 'एआईएम कांग्रेस-2026' के तीसरे दिन 8 सितंबर को शारजाह स्थित बी-आह (Bee’aH) मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बी-आह फैसेलिटी के ग्रुप सीईओ एवं वाइस-चेयरमैन खालिद अल हुरैमल के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, स्मार्ट सिटी विकास, सर्कुलर इकोनॉमी और अत्याधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट समाधानों को मध्यप्रदेश में लागू करने को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव ने सभी प्रकार के इंडस्ट्रियल वेस्ट, सीवेज वेस्ट, वेस्ट रिप्रोसेसिंग और इनर्ट मटेरियल के डिस्पोजल संबंधी ट्रीटमेंट सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि यहां विश्व की सर्वाधिक उन्नत तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा के दौरान बी-आह ग्रुप को मध्यप्रदेश के नगर निगमों में म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट तथा वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं में निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीईईएएच की डिजिटल, एआई-सक्षम और सर्कुलर इकोनॉमी क्षमताएं मध्यप्रदेश के स्मार्ट सिटी विजन और क्लीन एनर्जी मिशन के बिल्कुल अनुकूल हैं। राज्य में ईवी-आधारित फ्लीट और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विस्तार में यह साझेदारी अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इंदौर के स्वच्छता मॉडल के साथ वैश्विक तालमेल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि इंदौर ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और बायो-सीएनजी के क्षेत्र में देश और दुनिया के समक्ष एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया है। उन्होंने बी आह को इंदौर के स्थापित मॉडल के साथ जुड़कर नए आधुनिक समाधानों पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया, जिससे कचरा प्रबंधन के साथ-साथ जीरो-वेस्ट लैंडफिल के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। जीआईएस-2027 के लिए दिया आमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बी आह के ग्रुप के सीईओ खालिद अल हुरैमल को अगले साल भोपाल में आयोजित होने वाली 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027' में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि बी आह ग्रुप अपनी आगामी वैश्विक विस्तार योजनाओं में मध्यप्रदेश को एक प्रमुख और प्राथमिकता वाले गंतव्य (डेस्टिनेशन) के रूप में शामिल करे। अत्याधुनिक मुख्यालय का किया अवलोकन बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ज़ाहा हदीद द्वारा डिज़ाईन किए गए बी-आह के प्रतिष्ठित एआई-सक्षम व नेट-ज़ीरो-रेडी मुख्यालय तथा उनकी विभिन्न उन्नत सुविधाओं की सराहना की। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित बी आह आज 46 राष्ट्रीयताओं के 13 हजार से अधिक कर्मचारियों और यूएई, सऊदी अरब व मिस्र में विस्तृत परिचालनों के साथ पर्यावरण, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी का अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय समूह बन चुका है। शारजाह में 90 प्रतिशत से अधिक लैंडफिल-डायवर्जन दर और कमर्शियल स्केल वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के संचालन में समूह ने वैश्विक मानक स्थापित किए हैं। एडवांस्ड सस्टेनेबल और एआई-सक्षम है बी आह फैसिलिटी का मुख्यालय बी आह सस्टेनेबिलिटी, इनोवेशन और एआई का वैश्विक मॉडल संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में मुख्यालय वाला बी-आह (BEEAH) वैश्विक स्तर पर सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में स्थापित यह संस्था एक वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से विकसित होकर आज एनवायरमेंटल सर्विसेज, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और सस्टेनेबल रियल एस्टेट जैसे विविध क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही है। बी-आह की पहचान एडवांस्ड वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकोनॉमी सॉल्युशन्स के लिए है। उच्च वेस्ट-डायवर्जन दर के साथ संस्था शारजाह के महत्वाकांक्षी सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसका उद्देश्य कचरे को केवल निपटान की वस्तु न मानकर उसे संसाधन में बदलते हुए एक ऐसे मॉडल को विकसित करना है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति दे। बीईईएच का प्रतिष्ठित मुख्यालय इस सोच का जीवंत उदाहरण है। प्रसिद्ध वास्तुकार ज़ाहा हदीद द्वारा डिजाइन किया गया यह भवन दुनिया की अत्याधुनिक सस्टेनेबल और एआई-सक्षम इमारतों में शामिल है। भवन की डिजाइन, तकनीक और ऊर्जा दक्षता इसे भविष्य के स्मार्ट एवं पर्यावरण-अनुकूल शहरों के लिए एक प्रभावी मॉडल बनाती है। रणनीतिक साझेदारियों और नवाचार आधारित परियोजनाओं के माध्यम से बी-आह स्मार्ट और सस्टेनेबल शहरों के विकास को नई दिशा दे रहा है। पर्यावरणीय उत्कृष्टता, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में इसके प्रयासों ने शारजाह को क्षेत्रीय स्तर पर ग्रीन इनोवेशन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है।

चंडीगढ़ में बिजली बिलों की मनमानी पर सख्ती, प्रशासक ने बनाई कमेटी; मंजूरी के बिना नहीं बढ़ेंगी दरें

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में बिजली बिल की शिकायतों को लेकर प्रशासक गुलाब चंद कटारिया एक्शन मोड में आ गए हैं। वह जल्द ही इस मामले में मीटिंग करने जा रहे हैं। यह बात उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मीडिया से कही।प्रशासक ने  बताया कि कंपनी के साथ बिजली वितरण को लेकर एमओयू हुआ है। हालांकि मैंने महसूस किया है कि बिजली बिल को लेकर शिकायतें आ रही हैं। हम इनके साथ बैठकर चर्चा करेंगे। जल्द ही मीटिंग कर शिकायतों का निपटारा करेंगे। उन्होंने कहा कि आज चाहे अस्पताल हो या पढ़ाई, हर चीज के लिए बिजली जरूरी है। आजकल व्यक्ति किसी और चीज के रुकने से रुक सकता है, लेकिन अगर बिजली की सप्लाई रुक जाती है तो काफी दिक्कत होती है। उम्मीद है कि बिजली व्यवस्था में और सुधार होगा। प्रोजेक्ट को लेकर डर हमारे मन में भी था प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ देश का पहला शहर है, जहां बिजली वितरण का काम प्राइवेट सेक्टर को दिया गया था। जब हमने यह काम उन्हें सौंपा था तो हमारे मन में भी डर था। जनता के मन में भी अविश्वास था। मुलाजिम तो नाराज थे। उन्हें समझाया गया कि आपको किसी तरह की हानि नहीं होगी। इसके बाद फरवरी 2025 में हमने प्रोजेक्ट शुरू किया। हिंदुस्तान में पहला प्रयोग हम ही कर रहे अब तक बिजली वितरण को लेकर कोई बड़ी शिकायत नहीं आई। कभी-कभी कुछ शिकायतें जरूर आई हैं। देश के प्रधानमंत्री ने यह प्रोजेक्ट हमें दिया था। हमने इन्हें (कंपनी को) कहा था कि अगर आप असफल हो जाएंगे तो पावर जेनरेशन भी असफल हो जाएगा। हिंदुस्तान में यह पहला प्रयोग हम ही कर रहे हैं। पीयू जैसे हादसे अब नहीं होंगे उन्होंने कहा कि जब ऊपर तार चलते हैं तो कई तरह के फॉल्ट आ सकते हैं। बिजली जाने और उसे रिस्टोर करने में समय लगता है। अब लाइन को अंडरग्राउंड किया जा रहा है। चार लाइनों से अपने सेंटर को जोड़ दिया गया है। मान लीजिए किसी एक लाइन में फॉल्ट आ जाए तो कम से कम असर पड़ेगा। तारें बाहर रहने की वजह से नुकसान भी होते हैं। लाइन को 12 करोड़ रुपए खर्च कर बदलना है कुछ समय पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में एक बच्ची की करंट लगने से मौत हो गई थी। कंपनी ने 18 किलोमीटर की लाइन को 12 करोड़ रुपए खर्च कर बदलना है। उम्मीद है कि इससे बिजली व्यवस्था में और सुधार होगा।

पावरकॉम की बढ़ी टेंशन, बारिश के बीच बिजली की डिमांड 16,000 MW के पार; टूटा दो साल का रिकॉर्ड

अमृतसर  पंजाब में शुक्रवार को बारिश से भी पावरकाॅम की मुश्किलें कम नहीं हुईं। शुक्रवार को बिजली की मांग ने पिछले दो साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह मांग 16182 मेगावाट तक पहुंच गई। पावरकाॅम के पास बिजली की भारी कमी रही। विभिन्न थर्मल और जलविद्युत परियोजनाओं के सात यूनिट बंद होने से कुल 1275 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप रहा। इस कमी के कारण उद्योगों और कृषि क्षेत्र को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। पावरकाॅम के पास अपने सभी स्रोतों से केवल 4114 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। शुक्रवार को तलवंडी साबो थर्मल की 660 मेगावाट की तीन नंबर यूनिट बंद रही। रोपड़ प्लांट की 210 मेगावाट की पांच नंबर यूनिट भी ठप रही। लहरा मुहब्बत थर्मल की 210 मेगावाट की एक नंबर यूनिट भी बंद रही। इसके अलावा, रणजीत सागर बांध की 150 मेगावाट की एक नंबर यूनिट और यूबीडीसी के 45 मेगावाट की तीन यूनिट भी बंद रहीं। इस स्थिति के कारण पावरकाॅम को बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। तलवंडी साबो थर्मल प्लांट की 660 मेगावाट की तीन नंबर यूनिट बॉयलर ट्यूब में लीकेज के कारण वीरवार को बंद हुई थी। इसके रविवार तक ही दोबारा चलने की संभावना है। बिजली की कमी के चलते उद्योगों में पौने चार घंटे के रोटेशन में कट लगाए जा रहे हैं। खेतीबाड़ी क्षेत्र को भी आठ घंटे की पूरी बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है। किसानों को ट्यूबवेल के लिए पांच से सात घंटे ही बिजली मिल रही है, जिससे उनमें सरकार के प्रति रोष है। थर्मल संयंत्रों में कोयला संकट भी बना हुआ है। तलवंडी साबो में मात्र छह दिन का, राजपुरा प्लांट में सात दिन का और गोइंदवाल में 13 दिन का कोयला शेष है। लहरा मुहब्बत थर्मल में 15 दिन का कोयला बचा है, जबकि रोपड़ थर्मल में 29 दिन का कोयला स्टॉक नियमानुसार पर्याप्त है। थर्मल संयंत्रों में शिविर कार्यालय स्थापित होंगे  बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए पावरकाॅम ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष (सीएमडी) तथा निदेशक तुरंत साइटों का दौरा करेंगे। वे थर्मल संयंत्रों में शिविर कार्यालय स्थापित करेंगे। इसके अतिरिक्त, मुख्य अभियंता और संयंत्र प्रभारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने-अपने स्टेशनों पर लगातार मौजूद रहें। उन्हें संयंत्र की अधिकतम क्षमता पर बिना रुकावट बिजली उत्पादन बनाए रखने के लिए काम करना होगा।  फैसले के अनुसार, राजपुरा थर्मल प्लांट में प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष डॉ. बसंत गर्ग शिविर कार्यालय लगाएंगे। वाणिज्यिक निदेशक इंजीनियर हरशरण कौर त्रेहन गोइंदवाल साहिब थर्मल प्लांट में जिम्मेदारी संभालेंगी। वितरण निदेशक इंजीनियर इंद्रपाल सिंह गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल पावर प्लांट रोपड़ में मौजूद रहेंगे। वित्त निदेशक चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरिंदर कुमार बेरी तलवंडी साबो पावर स्टेशन में शिविर कार्यालय स्थापित करेंगे। वितरण निदेशक इंजीनियर पुनरदीप सिंह बराड़ गुरु हरगोबिंद साहिब थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत में अपनी सेवाएं देंगे। 

न्यू बिलिंग सिस्टम लागू होने से डिजिटल बिजली सेवाओं पर अस्थायी रोक, उपभोक्ताओं को राहत भी मिली

 पटना बिहार के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा विभाग की ओर से एक बेहद जरूरी सूचना जारी की गई है। अगर आप भी अपने घर या दुकान का बिजली बिल ऑनलाइन जमा करते हैं या स्मार्ट मीटर रिचार्ज करने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को आज रात से अगले 24 घंटे तक किसी भी प्रकार की ऑनलाइन डिजिटल सेवाएं नहीं मिल सकेंगी। बिजली कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को भविष्य में अधिक सुरक्षित, सुगम और आधुनिक डिजिटल सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक न्यू बिलिंग सिस्टम को लागू किया जा रहा है। इसी तकनीकी अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस कार्य के चलते बिजली से जुड़ी तमाम डिजिटल सुविधाओं को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया गया है। शनिवार की रात 8 बजे से 28 जून की रात 8 बजे तक बंद रहेगा पूरा पोर्टल इस तकनीकी बदलाव के कारण राज्य के उत्तर और दक्षिण दोनों बिजली डिस्कॉम के उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। इस वजह से शनिवार की रात 8 बजे से लेकर अगले दिन यानी 28 जून की रात 8 बजे तक बिजली उपभोक्ताओं से संबंधित सभी ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह और अस्थायी रूप से बंद कर दी जाएंगी। इस 24 घंटे की अवधि के दौरान उपभोक्ता न तो आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना नया बिल देख पाएंगे और न ही पुराने बकाए बिल का भुगतान डिजिटल माध्यम से कर सकेंगे। इसके साथ ही नए कनेक्शन के आवेदन या लोड बढ़ाने जैसे ऑनलाइन काम भी इस दौरान पूरी तरह से रुके रहेंगे। रीचार्ज खत्म होने पर भी नहीं कटेगी बत्ती हालांकि, इस तकनीकी शटडाउन के बीच ऊर्जा विभाग ने राज्य के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को एक बहुतबड़ी राहत दी है, जिससे आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मेंटेनेंस अवधि के दौरान यदि किसी स्मार्ट मीटर उपभोक्ता का बैलेंस खत्म हो जाता है और रिचार्ज नहीं हो पाता है, तो भी उस स्थिति में उनके घर या प्रतिष्ठान की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी। यानी बैलेंस शून्य या माइनस में जाने के बावजूद उपभोक्ताओं की बत्ती गुल नहीं होगी। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इस अवधि में धैर्य बनाए रखें, क्योंकि रविवार रात 8 बजे के बाद नई बिलिंग प्रणाली शुरू होते ही सभी सेवाएं पहले से अधिक तेज और बेहतर तरीके से काम करने लगेंगी।

लखनऊ में बिजली की अधिकतम मांग 32,673 मेगावाट तक पहुंची, खपत के सारे रिकॉर्ड टूटे

 लखनऊ प्रदेश में भीषण गर्मी से बिजली की खपत और अधिकतम मांग के पिछले सारे रिकार्ड टूटते जा रहे हैं। गुरुवार को बिजली की रिकार्ड खपत 693.46 मिलियन (69.35 करोड़) यूनिट रही। इससे पहले बुधवार को 67.84 करोड़ और 21 जून को 67.66 करोड़ यूनिट बिजली की खपत रही थी। पारा न गिरने से बुधवार रात 9.51 बजे 32,673 मेगावाट बिजली की अधिकतम मांग का भी नया रिकार्ड बना है। मानसून के विलंबित होने के कारण अब तक वर्षा न होने से इनदिनों रात और दिन के तापमान में बहुत अंतर न होने से न्यूनतम बिजली की मांग भी 23-24 हजार मेगावाट से नीचे नहीं जा रही है। वर्षा न होन से बिजली की मांग के 34 हजार मेगावाट के भी पार जाने का अनुमान है। इस बीच विभिन्न कारणों से तापीय परियोजनाओं की तीन यूनिटें घाटमपुर की 660-660 मेगावाट की दो व पारीछा की 250 मेगावाट की एक यूनिट के ठप होने से लगभग डेढ़ हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन घट गया है। हालांकि, पावर कारपोरेशन प्रबंधन का दावा है कि प्रदेशवासियों को तय शेड्यूल से कहीं अधिक बिजली की आपूर्ति की जा रही है दावा है कि शहरों को 24 घंटे बिजली देने के साथ ही गांवों में भी 18 के बजाय 21 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। पावर एक्सचेंज से पर्याप्त बिजली न मिलने से गांवों में जरूर रात के समय दो-तीन घंटे बिजली की कटौती की जा रही हैं लेकिन उसकी भरपाई दिन में कहीं ज्यादा बिजली देकर की जा रही है।

बिजली से वंचित टोलों पर प्रशासन का फोकस, DC ने दिए सख्त निर्देश

लोहरदगा झारखंड के लोहरदगा जिले में अब बिजली से वंचित टोलों और गांवों तक भी बिजली सुविधा पहुंचाने की दिशा में प्रशासन ने पहल तेज कर दी है. जिले के उपायुक्त संदीप कुमार मीणा की अध्यक्षता में जिला विद्युत समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न बिजली योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना तथा संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन टोलों और गांवों में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए. उपायुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों तक पहुंच पथ उपलब्ध है, वहां जुलाई माह तक हर हाल में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि ग्रामीणों को बिजली की सुविधा मिल सके. सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लिए अपनाए जाएंगे तकनीकी विकल्प बैठक के दौरान उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने कहा कि जिन दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क या पहुंच पथ उपलब्ध नहीं है, वहां विशेष प्रकार के पोल और अन्य तकनीकी उपायों का इस्तेमाल किया जाए. इसके लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक अनुमति प्राप्त कर जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि तकनीकी चुनौतियों के कारण किसी भी गांव या टोले को बिजली सुविधा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा. नए चिन्हित गांवों का होगा भौतिक सत्यापन उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को निर्देश दिया कि हाल में चिह्नित किए गए गांवों और टोलों का भौतिक सत्यापन किया जाए. सत्यापन के बाद वहां बिजली आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. उन्होंने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके. कोई भी परिवार बिजली से वंचित नहीं रहेगा उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने स्पष्ट कहा कि जिले का कोई भी परिवार बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए. इसके लिए सभी संबंधित पदाधिकारी और अभियंता जिम्मेदारी के साथ कार्य करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर योजनाओं को धरातल पर उतारना सुनिश्चित करें. बैठक में विद्युत विभाग के अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों ने भी विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्यों को पूरा करने का भरोसा दिलाया.

बिजली उपभोक्ताओं को राहत: यूपी में टली 10% बिजली महंगाई, आयोग ने UPPCL को दिया झटका

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी है. यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा फ्यूल सरचार्ज के नाम पर बिजली के दाम बढ़ाने के प्रयासों पर रोक लग गई है. विद्युत नियामक आयोग ने 10% टैरिफ को अवैध बताया है. नियामक आयोग ने बढ़े टैरिफ पर रोक लगा दी है. UPPCL ने इसी महीने से 10 फीसदी फ्यूल सरचार्ज वसूली की योजना बनाई थी. हर 100 रुपये पर 10 रुपये तक बढ़ोतरी की आशंका थी. उपभोक्ता परिषद की आयोग की दलीलों पर आयोग ने ये आदेश सुनाया है।  यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बिजली की कीमतें बढ़ाने का पिछले हफ्ते फैसला किया था. UPPCL ने फ्यूल सरचार्ज 10 प्रतिशत जून से वसूलने का आदेश दिया था. मार्च में 10 प्रतिशत बकाया वसूली शुरू होनी थी. यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने प्रति 100 रुपये के बिजली बिल पर बिजली ग्राहकों को 10 रुपये अतिरिक्त चुकाने की बात थी. ये शुल्क हर महीने बिजली के बिल में ऐड करना होता है. इस बार जून महीने में ये शुल्क 10 फीसदी आएगा. UPPCL जून के बाद के महीनों में भी शुल्क बढ़ा सकता है।  यूपीपीसीएल का कहना था कि मार्च 2026 महीने के लिए 10% ‘फ्यूल एंड पावर परचेस एडजस्टमेंट सरचार्ज' (FPPAS) अब जून के बिल में जोड़ा जाएगा. उसका कहना था कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने अधिसूचना के जरिये नियम बनाया था कि किसी एक महीने का फ्यूल सरचार्ज चौथे महीने के बिल में जोड़ा जाएगा।  किस आधार पर बढ़ाया गया है बोझ? बता दें कि बीते सोमवार को विद्युत नियामक आयोग ने यूपी पावर कारपोरेशन लिमिटेड से जवाब तलब किया था. आयोग ने प्रारंभिक तौर पर इस शुल्क वृद्धि पर सवाल उठाते हुए इस फैसले को नियमों के विपरीत बताया था. साथ ही यूपीसीएल को सात दिन के अंदर स्पष्ट करने को कहा गया था कि आखिर किस आधार पर उपभोक्ताओं पर यह अतिरिक्त बोझ डाला गया है।  हर हाल में यूपीपीसीएल को यह फैसला लेना होगा वापस भीषण गर्मी के बीच बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर पहले से ही उपभोक्ताओं में नाराजगी थी. ऐसे में आयोग की इस सख्त टिप्पणी के बाद करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि आयोग की इन टिप्पणियों के बाद यह तो साफ हो गया है कि यूपीपीसीएल को अपना यह फैसला वापस लेना होगा।  हालांकि उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन का कहना है कि पावर टैरिफ यानी बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी. यह फ्यूल सरचार्ज है और इसका ज्यादा अंतर बिजली के बिल में नहीं पड़ेगा।  उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने फ्यूल सरचार्ज को चुनौती देते हुए जनहित में एक प्रस्ताव पेश किया था. उसने इसे उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ अनुचित है. परिषद ने नियामक आयोग से दखल देने की मांग की थी. उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को अब 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज लगाने के अपने फैसले को वापस लेना होगा. इस फैसले से पूरे राज्य में लाखों बिजली उपभोक्ताओं को फायदा होगा।