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हिमाचल में बिजली सब्सिडी का नया नियम, 250 यूनिट तक फ्री बिजली और 300 यूनिट तक मिलेगी राहत

शिमला   हिमाचल प्रदेश सरकार ने बिजली ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए सब्सिडी का नया और स्पष्ट पैमाना तय किया है. अब राज्य में घरेलू उपभोक्ताओं को दो मीटरों पर कुल 250 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी, जबकि एक लाख गरीब परिवारों को 300 यूनिट तक निशुल्क बिजली देने का फैसला लागू कर दिया गया है. ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव शुभकर्ण सिंह ने इस संबंध में बिजली बोर्ड को निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे मुख्यमंत्री की बजट घोषणा को अमलीजामा पहनाया गया है।  कैसे मिलेगा 250 यूनिट फ्री बिजली का लाभ? एक उपभोक्ता को दो बिजली मीटरों पर कुल 250 यूनिट मुफ्त बिजली मिलेगी।  यानी एक मीटर पर 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली।  यह लाभ एक राशन कार्ड पर अधिकतम दो मीटरों तक ही सीमित रहेगा।  जिनके पास दो से अधिक मीटर हैं, उनके लिए दो मीटर का चयन सिस्टम के जरिए होगा।      गरीब परिवारों को 300 यूनिट फ्री दी जाएगी. इससे राज्य के एक लाख निर्धन परिवारों को बड़ा फायदा होगा. इन परिवारों को एक मीटर पर 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी. यानि पूरी तरह जीरो बिल मिलेगा. इसमें SET, ED और मीटर टैक्स भी नहीं लगेगा. पात्र परिवारों की सूची संबंधित विभाग बिजली बोर्ड को देगा।  स्लैब के हिसाब से समझें सब्सिडी का गणित     0 से 125 यूनिट: पूरी तरह मुफ्त (जीरो बिल)      126 यूनिट से ऊपर: कोई सब्सिडी नहीं.     यानी 126–300 और 301+ यूनिट पर पूरी दर से बिल देना होगा.     जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक कंज्यूमर आईडी को राशन कार्ड से लिंक नहीं किया, उन्हें सब्सिडी पाने के लिए यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी.     0 से 125 यूनिट: पूरी तरह मुफ्त (जीरो बिल).     126 यूनिट से ऊपर: कोई सब्सिडी नहीं.     यानी 126–300 और 301+ यूनिट पर पूरी दर से बिल देना होगा.     जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक कंज्यूमर आईडी को राशन कार्ड से लिंक नहीं किया, उन्हें सब्सिडी पाने के लिए यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी.     हिमाचल प्रदेश : NDPS Act में चार्ज फ्रेम होते ही पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे     हिमाचल प्रदेश : NDPS Act में चार्ज फ्रेम होते ही पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे     शिमला में प्रतिबंधित सड़कों पर गाड़ी चलाकर दिखाओ, लगेगा खासा मोटा जुर्माना     शिमला में प्रतिबंधित सड़कों पर गाड़ी चलाकर दिखाओ, लगेगा खासा मोटा जुर्माना     खंडवा: 2.60 लाख बिजली उपभोक्ताओं देना होगा बढ़ा बिल, हर महीने 1 करोड़ का भार     खंडवा: 2.60 लाख बिजली उपभोक्ताओं देना होगा बढ़ा बिल, हर महीने 1 करोड़ का भार     हिमाचल में बदला मौसम, दिन में धूप से गर्मी, शाम को बारिश-तूफान का अलर्ट     हिमाचल में बदला मौसम, दिन में धूप से गर्मी, शाम को बारिश-तूफान का अलर्ट ज्यादा मीटर वालों के लिए क्‍या बनाए गए नियम दो से ज्यादा मीटर होने पर केवल दो मीटर पर ही सब्सिडी दी जाएगी. बाकी मीटरों पर सामान्य दर से बिल आएगा. 125 यूनिट तक भी ऐसे मामलों में प्रति यूनिट तय दर से भुगतान करना होगा. कृषि उपभोक्ताओं को भी राहत सरकार ने किसानों के लिए भी सब्सिडी जारी रखी है. 0 से 20 KVA कनेक्शन पर बिजली दर 5.03 रुपये प्रति यूनिट इसमें 4.73 रुपये सब्सिडी यानी प्रभावी दर सिर्फ 30 पैसे प्रति यूनिट फिक्स्ड चार्ज: 105 रुपये प्रति माह  

1 अप्रैल से MP में बिजली और प्रॉपर्टी महंगी, आम आदमी की जेब पर होगा असर

भोपाल नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की जेब पर असर डालने वाले कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। बिजली बिल में बढ़ोतरी, प्रॉपर्टी खरीदना महंगा होना और रेलवे रिजर्वेशन के नियमों में बदलाव जैसे फैसले सीधे आम आदमी के खर्च को प्रभावित करेंगे। वहीं, कचरा प्रबंधन के नए नियमों के तहत लापरवाही पर जुर्माना भी देना पड़ सकता है। सरकार और प्रशासन का कहना है कि ये बदलाव व्यवस्था सुधारने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं, लेकिन इससे आम नागरिकों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और शहरी आबादी पर इन फैसलों का व्यापक असर देखने को मिलेगा। बिजली बिल में बढ़ोतरी नए नियमों के तहत बिजली की दरों में औसतन पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। हालांकि यह बढ़ोतरी स्लैब के अनुसार अलग-अलग होगी। जानकारी के अनुसार 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को करीब 80 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है, जबकि 400 यूनिट तक खपत करने वालों का बिल 150 रुपये तक बढ़ सकता है। इससे गर्मी के मौसम में पहले से ही बढ़ी बिजली खपत के बीच उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रॉपर्टी खरीदना हुआ महंगा प्रॉपर्टी से जुड़ी कलेक्टर गाइडलाइन में करीब 12 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। इसका सीधा असर जमीन और मकान खरीदने वालों पर पड़ेगा। नई दरें लागू होने के बाद रजिस्ट्री शुल्क भी बढ़ेगा, जिससे घर खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो जाएगा। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी अधिक प्रभाव डाल सकती है। कचरा प्रबंधन के नए नियम शहरों में अब कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य किया जा रहा है। गीला, सूखा और अन्य प्रकार के कचरे को अलग नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। नगर निगम ने इसके लिए सख्त नियम बनाए हैं, जिनके तहत घरों, होटलों और संस्थानों को कचरा पृथक्करण सुनिश्चित करना होगा। इससे साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। रेलवे रिजर्वेशन नियमों में बदलाव रेलवे रिजर्वेशन के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। अब वेटिंग टिकट और कंफर्मेशन से जुड़े नियमों को और पारदर्शी बनाया गया है। साथ ही टिकट कैंसिलेशन और रिफंड प्रक्रिया में भी सुधार किया गया है, जिससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी। नए नियमों के लागू होने से यात्रा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। आयकर प्रणाली में सुधार आयकर कानून को सरल बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसमें टैक्स भुगतान और रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान किया गया है। डिजिटल माध्यमों के जरिए भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और समय की बचत होगी। आम आदमी पर सीधा असर इन सभी बदलावों का सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन और बजट पर पड़ेगा। जहां एक ओर खर्च बढ़ेंगे, वहीं कुछ क्षेत्रों में सुविधाएं भी बेहतर होंगी। ऐसे में लोगों को अपने खर्च और योजनाओं में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।

MP में बिजली की दरों में बढ़ोतरी: 1 अप्रैल से 150 यूनिट के बाद होगा बिल महंगा

 भोपाल मध्य प्रदेश की जनता को महंगाई का एक और झटका लगने जा रहा है. रसोई गैस और अन्य चीजों की बढ़ती कीमतों के बीच अब बिजली दरों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है. मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ जारी किया है, जिसके तहत बिजली दरों में करीब 4.80 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. इसका असर प्रदेश के करीब डेढ़ करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।  हालांकि आयोग ने निम्न दाब (एलवी-1) और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए उनकी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके अलावा, 100 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तरह रियायत मिलती रहेगी. लेकिन 150 यूनिट से ज्यादा खपत करने वालों पर इस बढ़ोतरी का असर पड़ेगा।  नई व्यवस्था के तहत 151 यूनिट का स्लैब पार करते ही प्रति यूनिट दर के साथ-साथ फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ जाएगा. फिक्स्ड चार्ज को 28 रुपए से बढ़ाकर 30 रुपए प्रति 0.1 किलोवॉट कर दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं का कुल बिल बढ़ना तय है।  अगर अलग-अलग खपत के हिसाब से देखें तो 150 यूनिट से ज्यादा खपत पर बिजली बिल करीब 1017 रुपए तक पहुंच सकता है, जो लगभग 4.94 प्रतिशत की वृद्धि है. वहीं 200 यूनिट से ज्यादा खपत पर बिल करीब 1696 रुपए तक हो सकता है, यानी करीब 5.30 प्रतिशत बढ़ोतरी. इसी तरह 250 यूनिट पर बिल लगभग 2183 रुपए (5.10 प्रतिशत वृद्धि), 300 यूनिट पर 2668 रुपए (4.98 प्रतिशत वृद्धि) और 400 यूनिट से अधिक खपत पर बिल करीब 3689 रुपए (4.82 प्रतिशत ज्यादा) तक पहुंच सकता है।  जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर गर्मियों के मौसम में होगा, जब एसी, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है. ऐसे में ज्यादा खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भारी बिल का सामना करना पड़ सकता है।  इसके अलावा, नई दरों में टाइम ऑफ डे (TOD) व्यवस्था को भी प्रभावी किया गया है. इसके तहत शाम 6 बजे से रात 10 बजे के बीच बिजली की खपत पर ज्यादा फीस देनी होगी. यानी पीक ऑवर्स में बिजली का इस्तेमाल महंगा पड़ेगा, जबकि दिन के समय बिजली इस्तेमाल करने पर कम खर्च आएगा. अनुमान है कि पीक टाइम में बिल 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।  बिजली कंपनियों ने आयोग के सामने 10.19 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था. कंपनियों का तर्क था कि पिछले वित्तीय वर्ष में उन्हें करीब 6,044 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए दरें बढ़ाना जरूरी है. हालांकि आयोग ने इस प्रस्ताव को कम करते हुए 4.80 प्रतिशत तक ही वृद्धि को मंजूरी दी. कुल मिलाकर, नई दरों के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को अपने खर्च में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना होगा। 

बिहार में बिजली बिल में बदलाव: दिन में सस्ती और शाम को महंगी बिजली, स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए नया सिस्टम

पटना  बिहार विद्युत विनियामक आयोग (बीईआरसी) ने बिजली कंपनियों की याचिका स्वीकार कर ली है. अब 1 अप्रैल 2026 से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे 87 लाख से अधिक घरेलू. व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे (टीओडी) टैरिफ लागू होगा. इसका मतलब है कि बिजली खपत का समय तय करेगा बिल कितना आएगा. इसके तहत अब दिन में सस्ती और रात में महंगी बिजली मिलेगी. जानकारी के अनुसार, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली इस्तेमाल करने पर उपभोक्ताओं को सिर्फ 80 प्रतिशत राशि चुकानी होगी. यानी 100 रुपये की खपत पर 80 रुपये ही. शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक पीक आवर में खपत पर 120 प्रतिशत दर लगेगी. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आयोग ने इसे 110 प्रतिशत रखा है. जबकि रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक पूरी तरह सामान्य दर लागू रहेगी. कृषि कनेक्शन को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।  क्या है टाइम ऑफ डे टैरिफ? टाइम ऑफ डे टैरिफ का मतलब है कि दिन के अलग-अलग समय पर बिजली की दर अलग-अलग होगी. इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिजली उपयोग का समय बदलने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि पीक आवर में लोड कम किया जा सके. पहले यह व्यवस्था सिर्फ औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक सीमित थी, लेकिन अब इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है।  तीन टाइम स्लैब में बंटी बिजली दरें जानकारी के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत दिन को तीन हिस्सों में बांटा गया है.     सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक: इस दौरान बिजली सबसे सस्ती रहेगी और उपभोक्ताओं को सामान्य दर का करीब 80% ही देना होगा.     शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक: यह पीक आवर होगा, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को लगभग 10% अधिक और गैर-घरेलू को 20% तक ज्यादा शुल्क देना पड़ेगा।      रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक: इस दौरान सामान्य दर पर ही बिजली मिलेगी. किन उपभोक्ताओं पर लागू होगा नियम? यह नया नियम मुख्य रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाले उपभोक्ताओं पर लागू होगा. इसके अलावा जिन उपभोक्ताओं का लोड 10 किलोवाट से अधिक है, उन पर भी यह व्यवस्था लागू की जा सकती है. कृषि उपभोक्ताओं को फिलहाल इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।  क्यों लिया गया यह फैसला? ऊर्जा विभाग और आयोग का मानना है कि दिन के समय खासकर सोलर ऊर्जा की उपलब्धता ज्यादा होती है, जिससे बिजली उत्पादन सस्ता पड़ता है. इसलिए दिन में दर कम रखी गई है. वहीं शाम के समय मांग बढ़ने के कारण दरें बढ़ाई गई हैं, ताकि उपभोक्ता अपनी खपत को संतुलित करें।  कितने उपभोक्ताओं पर असर? बिहार में करीब 2 करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं और इनमें बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इस फैसले का असर लाखों उपभोक्ताओं पर सीधे तौर पर पड़ेगा, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां स्मार्ट मीटर तेजी से लगाए जा रहे हैं।  क्या होगा आम लोगों पर असर? इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को अपने बिजली उपयोग का समय बदलना होगा. अगर लोग दिन में ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे तो उनका बिल कम आएगा, जबकि शाम के समय ज्यादा उपयोग करने पर बिल बढ़ सकता है. यानी अब बिजली बचाने के साथ-साथ समय प्रबंधन भी जरूरी हो जाएगा।  पूरी कवायद का क्या होगा असर? बिहार में बिजली बिल की यह नई व्यवस्था उपभोक्ताओं की आदतों को बदलने वाली है. सरकार और आयोग का लक्ष्य बिजली की मांग को संतुलित करना और सस्ती ऊर्जा का बेहतर उपयोग करना है. हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव शुरुआत में चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही उपयोग से बिजली बिल में बचत भी संभव है। 

दिल्ली में बिजली के दामों में होगी वृद्धि, अप्रैल से लागू होगा नया प्लान

नई दिल्ली दिल्लीवासियों के लिए बड़ी खबर है. अप्रैल से बिजली की दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है. दावा किया जा रहा है कि ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि दिल्ली सरकार तीन बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को 38000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के बकाया का भुगतान करने की तैयारी कर रही है।  एक एजेंसी के मुताबिक सरकार बिजली की दरों में बढ़ोतरी पर सब्सिडी देने की भी योजना बना रही है, ताकि उपभोक्ताओं पर इसका असर कम हो सके. पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को एक निर्देश दिया था. जिसमें कहा गया था कि सरकार तीन निजी डिस्कॉम BRPL, BYPL और TPDDL – को 27200 करोड़ रुपये की कैरिंग कॉस्ट (ब्याज) सहित रेगुलेटरी एसेट्स का भुगतान 7 साल के अंदर करे।  रेगुलेटरी एसेट्स वे लागतें हैं जिनकी वसूली भविष्य में होने की उम्मीद होती है. आम आदमी पार्टी के शासन के पिछले एक दशक में बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी न होने के कारण तेज़ी से बढ़ी हैं. दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने जनवरी में केंद्रीय एजेंसी, अपीलीय बिजली न्यायाधिकरण (APTEL) को सूचित किया कि दिल्ली में कुल रेगुलेटरी एसेट्स 38,552 करोड़ रुपये हैं।  जानें किस डिस्कॉम की है कितनी राशि डीईआरसी की फाइलिंग के अनुसार बकाया राशि में BRPL के लिए 19,174 करोड़ रुपये, BYPL के लिए 12,333 करोड़ रुपये और TPDDL के लिए 7,046 करोड़ रुपये शामिल हैं. ये राशि डिस्कॉम द्वारा बिजली की आपूर्ति के लिए किए गए अनुमोदित खर्च है. वसूली में देरी के कारण ब्याज जमा होने से मूल रेगुलेटरी एसेट्स की राशि बढ़ गई है।  अदालत ने DERC को एक वसूली योजना तैयार करने, कैरिंग कॉस्ट (ब्याज) का हिसाब रखने और लागत वसूली में हुई लंबी देरी की व्याख्या करते हुए एक विस्तृत ऑडिट करने का भी निर्देश दिया था. यह वसूली 7 साल की अवधि में बिजली के बिलों में रेगुलेटरी एसेट सरचार्ज बढ़ाकर किए जाने की संभावना है।  दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने पिछले साल मार्च में कहा था कि डिस्कॉम को रेगुलेटरी एसेट्स के रूप में जमा हुए 27,000 करोड़ रुपये वसूलने का अधिकार दिया गया है. जिससे यह संकेत मिला था कि शहर में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। 

छत्तीसगढ़ के 29 लाख उपभोक्ताओं को मिलेगा राहत, 758 करोड़ का बकाया बिजली बिल होगा माफ

रायपुर  मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना छत्तीसगढ़ के आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लगभग 29 लाख उपभोक्ताओं को 758 करोड़ रुपये की सीधी छूट दी जाएगी। योजना मुख्य रूप से निम्नदाब घरेलू, बीपीएल और कृषि उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके तहत 31 मार्च 2023 तक की बकाया राशि को आधार माना गया है। सरचार्ज को भी माफ किया जाएगा पात्र उपभोक्ताओं को न केवल मूल राशि में रियायत मिलेगी, बल्कि बकाया पर लगने वाले भारी-भरकम अधिभार (सरचार्ज) को भी माफ किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन और प्रोटोकाल के कारण महीनों तक मीटर रीडिंग नहीं हो सकी थी। इसके बाद जब एकमुश्त भारी बिल आए, तो आर्थिक तंगी के चलते लाखों परिवार इन्हें चुकाने में असमर्थ रहे। अब सरकार की इस पहल का उद्देश्य इन्हीं परिवारों को कर्ज के चक्रव्यूह से बाहर निकालना है। ऐसे उठाएं योजना का लाभ उपभोक्ता मोर बिजली एप या नजदीकी बिजली वितरण केंद्र पर जाकर पंजीयन करा सकते हैं। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी। गांव-गांव में विशेष शिविर लगाकर अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जाएगा। वितरण केंद्र के अधिकारियों से संपर्क करें बिल भुगतान के पश्चात पात्र उपभोक्ता एम-ऊर्जा योजना का लाभ लेने के लिए भी पात्र हो जाएंगे। बिजली कंपनी ने अपील की है कि किसी भी संशय की स्थिति में वितरण केंद्र के अधिकारियों से तुरंत संपर्क करें। 

न्यूक्लियर फ्यूजन का कमाल: आधा टन का चुंबक और अनलिमिटेड बिजली, सूरज जैसी शक्ति अब इंसानों के पास

नई दिल्ली न्यूजीलैंड की एक छोटी सी कंपनी ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज ने न्यूक्लियर फ्यूजन की रेस में पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है. इस स्टार्टअप ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे अब तक नामुमकिन माना जा रहा था. कंपनी ने आधे टन के भारी-भरकम चुंबक को हवा में तैराकर प्लाज्मा को सफलतापूर्वक कंट्रोल किया है. यह दुनिया में अपनी तरह का पहला कमर्शियल प्रयोग है. न्यूक्लियर फ्यूजन को मॉडर्न फिजिक्स का सबसे बड़ा लक्ष्य माना जाता है. अगर यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है, तो इंसानों को असीमित बिजली मिल सकेगी. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें न तो कार्बन उत्सर्जन होता है और न ही खतरनाक रेडियोएक्टिव कचरा निकलता है. हवा में तैरते चुंबक से कैसे पैदा होगी बिजली?     ओपनस्टार के फाउंडर रातु माताइरा ने इस मशीन के काम करने का तरीका समझाया है. उनकी कंपनी ‘लेविटेटेड डायपोल’ नाम की एक खास तकनीक पर काम कर रही है.     इसमें एक शक्तिशाली चुंबक को मैग्नेटिक फील्ड की मदद से हवा में लटकाया जाता है. इसी तैरते हुए चुंबक के चारों ओर प्लाज्मा को रोककर रखा जाता है.     अब तक पूरी इंडस्ट्री को लगता था कि ऐसी मशीन बनाना इंजीनियरिंग के हिसाब से संभव नहीं है. लेकिन न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है.     उन्होंने ‘जूनियर’ नाम के प्रोटोटाइप से यह दिखा दिया कि यह तकनीक न सिर्फ काम करती है, बल्कि इसे बड़े स्तर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. फ्यूजन और फिशन के बीच क्या अंतर है? आजकल के परमाणु रिएक्टर ‘फिशन’ तकनीक पर चलते हैं. इसमें एटम्स को तोड़ा जाता है, जिससे एनर्जी निकलती है. लेकिन इस प्रोसेस में बहुत सारा खतरनाक कचरा भी पैदा होता है. इसके उलट ‘फ्यूजन’ की प्रक्रिया तारों और सूरज के अंदर होती है. इसमें दो एटम्स के केंद्र को आपस में जोड़ा जाता है. इस प्रोसेस से फिशन के मुकाबले कई गुना ज्यादा ऊर्जा निकलती है. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस प्रोसेस को शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती थी. ओपनस्टार की नई खोज ने इस मुश्किल को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. अब कम ऊर्जा खर्च करके ज्यादा बिजली बनाने का रास्ता साफ हो गया है. क्या 2030 तक घर-घर पहुंचेगी परमाणु बिजली? ओपनस्टार की सफलता के बाद अब अगले चरण की तैयारी शुरू हो गई है. कंपनी का अगला प्रोटोटाइप ‘ताही’ होगा, जिसकी मैग्नेटिक फील्ड मौजूदा मशीन से चार गुना ज्यादा ताकतवर होगी. न्यूजीलैंड की सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट की अहमियत को समझते हुए 3.5 करोड़ डॉलर की मदद देने का वादा किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह हाई-एनर्जी फ्लक्स-पंप तकनीक आने वाले समय में रिसर्च की दिशा बदल देगी. कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 के दशक तक ऐसे कमर्शियल रिएक्टर तैयार कर लिए जाएं, जो शहरों को बिजली सप्लाई कर सकें. यह सफलता कोल और गैस जैसे पुराने ईंधन पर दुनिया की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है.

विद्युत समाधान योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई गई, ऊर्जा मंत्री तोमर का ऐलान

विद्युत समाधान योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई गई : ऊर्जा मंत्री  तोमर 31 मार्च तक एकमुश्त राशि जमा करने पर सरचार्ज में मिलेगी 90 प्रतिशत तक की छूट भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री  तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। 21 लाख 67 हजार उपभोक्ताओं ने लिया लाभ मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में 28 फरवरी तक 21 लाख 67 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1043 करोड़ 53 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 388 करोड़ 77 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 6 लाख 38 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 616 करोड़ 42 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 285 करोड़ 39 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 222 करोड़ 82 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 73 करोड़ 7 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 29 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 204 करोड़ 29 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 30 करोड़ 31 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना में सरचार्ज में 50 से लेकर 90 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। समाधान योजना 2025-26 एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।  

मार्च महीने में सभी अवकाश दिनों में बिजली बिल भुगतान केंद्र रहेंगे खुला

मार्च में सभी अवकाश दिनों में बिजली बिल भुगतान केन्द्र खुलेंगे भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत 07 मार्च, 14 मार्च, 21 मार्च, 28 मार्च शनिवार एवं 01 मार्च, 08 मार्च, 15 मार्च, 22 मार्च, तथा 29 मार्च रविवार, 03 मार्च होली, 19 मार्च गुड़ी पड़वां, 20 मार्च जमात- उल-विदा/ ईद उल-फितर के ठीक पूर्व का दिवस/ रानी अवंती बाई का बलिदान दिवस, 27 मार्च रामनवमीं तथा 31 मार्च महावीर जयंती को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे। भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त अवकाश के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ता राजधानी के जोनल आफिस में पीओएस (pos) मशीन से कैश के जरिए बिल भुगतान तथा ऑनलाइन माध्यम से भी बिल भुगतान कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है। ऑनलाइन भुगतान करें और पाएं छूट मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्नदाब घरेलू उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान करने पर उनके कुल बकाया बिल पर 0.50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। साथ ही अधिकतम छूट के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है। इसी प्रकार उच्चदाब उपभोक्ताओं को प्रति बिल कैशलेस भुगतान पर 100 रूपये से 1000 रुपये तक की छूट दी जा रही है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से बिजली का बिल ऑनलाइन भुगतान करने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ताओं को एम.पी.ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, वॉट्सऐप पे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल एप के माध्यम से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।  

बिजली की कीमतों में 10.2% का इजाफा, 23-26 फरवरी को नियामक आयोग की जनसुनवाई में भाग लें

भोपाल प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से बिजली की दरों में 10.2 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव पर विद्युत नियामक आयोग 23 फरवरी से 26 फरवरी तक जनसुनवाई आयोजित करेगा। यह जनसुनवाई हाइब्रिड मोड में होगी, जिसमें उपभोक्ता ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से या भोपाल स्थित आयोग के कोर्ट कक्ष में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।   आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन उपभोक्ताओं ने लिखित आपत्तियां पहले ही प्रस्तुत कर दी हैं, वे निर्धारित तिथि पर अपने पक्ष को विस्तार से रख सकते हैं।  दरों में 15 फीसदी कमी की गुंजाइश : अग्रवाल विद्युत मामलों के विशेषज्ञ और अधिवक्ता राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में बिजली दरों में वृद्धि की बजाय लगभग 15 प्रतिशत तक कमी संभव है। उन्होंने दावा किया कि इसके समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं। अग्रवाल 23 फरवरी को सत्यापन याचिका 2024-25 की सुनवाई में तथा 24 फरवरी को पूर्व क्षेत्र की जनसुनवाई में आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। उन्होंने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे जनसुनवाई में भाग लेकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। 9 लाख से अधिक लोगों को मिल रही मुफ्त बिजली राज्य सरकार द्वारा बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को मुफ्त या रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 9 लाख 30 हजार उपभोक्ताओं को निशुल्क बिजली का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा अटल गृह ज्योति योजना के तहत लगभग एक करोड़ हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है, जबकि अटल कृषि ज्योति योजना के अंतर्गत करीब 26 लाख किसानों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। यह जानकारी हाल ही में सरकार ने विधानसभा में दी है।  कंपनियों ने अपनी याचिका में कुल 6,044 करोड़ रुपये का घाटा बताते हुए इस वृद्धि की मांग की है. इस प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और उपभोक्ताओं से 25 जनवरी 2026 तक आपत्तियां आमंत्रित की हैं. आपत्तियों के निराकरण और चर्चा के लिए जनसुनवाई का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया गया है. – पूर्व क्षेत्र (जबलपुर): 24 फरवरी 2026 – पश्चिम क्षेत्र (इंदौर): 25 फरवरी 2026 – मध्य क्षेत्र (भोपाल): 26 फरवरी 2026 – पुरानी खारिज राशियों को घाटे में शामिल करने का आरोप विद्युत मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने इस टैरिफ वृद्धि का पुरजोर विरोध किया है. उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कंपनियों द्वारा दर्शाए गए 6,044 करोड़ रुपये के घाटे में 3,451 करोड़ रुपये की वह राशि भी शामिल है जो 12 साल पुरानी है और जिसे आयोग पहले ही अवैधानिक मानकर खारिज कर चुका है. इसके अतिरिक्त, 750 करोड़ रुपये की मांग स्मार्ट मीटर के नाम पर की गई है, जो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ है. श्री अग्रवाल ने मांग की है कि कोरोना काल से चली आ रही ऑनलाइन सुनवाई को बंद कर पूर्व की भांति जबलपुर, इंदौर और भोपाल में व्यक्तिगत उपस्थिति वाली जनसुनवाई आयोजित की जाए. उन्होंने तर्क दिया कि भौतिक उपस्थिति वाली सुनवाई से ही अधिक से अधिक उपभोक्ता प्रभावी ढंग से अपना विरोध दर्ज करा सकेंगे.