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मार्च महीने में सभी अवकाश दिनों में बिजली बिल भुगतान केंद्र रहेंगे खुला

मार्च में सभी अवकाश दिनों में बिजली बिल भुगतान केन्द्र खुलेंगे भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत 07 मार्च, 14 मार्च, 21 मार्च, 28 मार्च शनिवार एवं 01 मार्च, 08 मार्च, 15 मार्च, 22 मार्च, तथा 29 मार्च रविवार, 03 मार्च होली, 19 मार्च गुड़ी पड़वां, 20 मार्च जमात- उल-विदा/ ईद उल-फितर के ठीक पूर्व का दिवस/ रानी अवंती बाई का बलिदान दिवस, 27 मार्च रामनवमीं तथा 31 मार्च महावीर जयंती को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे। भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त अवकाश के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ता राजधानी के जोनल आफिस में पीओएस (pos) मशीन से कैश के जरिए बिल भुगतान तथा ऑनलाइन माध्यम से भी बिल भुगतान कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है। ऑनलाइन भुगतान करें और पाएं छूट मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्नदाब घरेलू उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान करने पर उनके कुल बकाया बिल पर 0.50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। साथ ही अधिकतम छूट के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है। इसी प्रकार उच्चदाब उपभोक्ताओं को प्रति बिल कैशलेस भुगतान पर 100 रूपये से 1000 रुपये तक की छूट दी जा रही है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से बिजली का बिल ऑनलाइन भुगतान करने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ताओं को एम.पी.ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, वॉट्सऐप पे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल एप के माध्यम से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।  

बिजली की कीमतों में 10.2% का इजाफा, 23-26 फरवरी को नियामक आयोग की जनसुनवाई में भाग लें

भोपाल प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से बिजली की दरों में 10.2 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव पर विद्युत नियामक आयोग 23 फरवरी से 26 फरवरी तक जनसुनवाई आयोजित करेगा। यह जनसुनवाई हाइब्रिड मोड में होगी, जिसमें उपभोक्ता ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से या भोपाल स्थित आयोग के कोर्ट कक्ष में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।   आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन उपभोक्ताओं ने लिखित आपत्तियां पहले ही प्रस्तुत कर दी हैं, वे निर्धारित तिथि पर अपने पक्ष को विस्तार से रख सकते हैं।  दरों में 15 फीसदी कमी की गुंजाइश : अग्रवाल विद्युत मामलों के विशेषज्ञ और अधिवक्ता राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में बिजली दरों में वृद्धि की बजाय लगभग 15 प्रतिशत तक कमी संभव है। उन्होंने दावा किया कि इसके समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं। अग्रवाल 23 फरवरी को सत्यापन याचिका 2024-25 की सुनवाई में तथा 24 फरवरी को पूर्व क्षेत्र की जनसुनवाई में आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। उन्होंने उपभोक्ताओं से भी अपील की है कि वे जनसुनवाई में भाग लेकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। 9 लाख से अधिक लोगों को मिल रही मुफ्त बिजली राज्य सरकार द्वारा बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को मुफ्त या रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 9 लाख 30 हजार उपभोक्ताओं को निशुल्क बिजली का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा अटल गृह ज्योति योजना के तहत लगभग एक करोड़ हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है, जबकि अटल कृषि ज्योति योजना के अंतर्गत करीब 26 लाख किसानों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। यह जानकारी हाल ही में सरकार ने विधानसभा में दी है।  कंपनियों ने अपनी याचिका में कुल 6,044 करोड़ रुपये का घाटा बताते हुए इस वृद्धि की मांग की है. इस प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और उपभोक्ताओं से 25 जनवरी 2026 तक आपत्तियां आमंत्रित की हैं. आपत्तियों के निराकरण और चर्चा के लिए जनसुनवाई का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया गया है. – पूर्व क्षेत्र (जबलपुर): 24 फरवरी 2026 – पश्चिम क्षेत्र (इंदौर): 25 फरवरी 2026 – मध्य क्षेत्र (भोपाल): 26 फरवरी 2026 – पुरानी खारिज राशियों को घाटे में शामिल करने का आरोप विद्युत मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने इस टैरिफ वृद्धि का पुरजोर विरोध किया है. उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कंपनियों द्वारा दर्शाए गए 6,044 करोड़ रुपये के घाटे में 3,451 करोड़ रुपये की वह राशि भी शामिल है जो 12 साल पुरानी है और जिसे आयोग पहले ही अवैधानिक मानकर खारिज कर चुका है. इसके अतिरिक्त, 750 करोड़ रुपये की मांग स्मार्ट मीटर के नाम पर की गई है, जो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ है. श्री अग्रवाल ने मांग की है कि कोरोना काल से चली आ रही ऑनलाइन सुनवाई को बंद कर पूर्व की भांति जबलपुर, इंदौर और भोपाल में व्यक्तिगत उपस्थिति वाली जनसुनवाई आयोजित की जाए. उन्होंने तर्क दिया कि भौतिक उपस्थिति वाली सुनवाई से ही अधिक से अधिक उपभोक्ता प्रभावी ढंग से अपना विरोध दर्ज करा सकेंगे.  

छत्तीसगढ़ में बिजली टैरिफ पर जन सुनवाई, नागरिकों को मिलेगा अपनी राय रखने का मौका

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत टैरिफ याचिकाओं पर जन सुनवाई रायपुर  राज्य के स्वामित्व वाली बिजली कंपनियों छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य भार प्रेषण केंद्र द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के टू-अप, वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR), टैरिफ निर्धारण तथा पूंजीगत निवेश योजना के अनुमोदन संबंधी याचिकाएँ आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई हैं। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा दिनांक 11.07.2025 के टैरिफ आदेश के पुनरीक्षण हेतु भी याचिका दायर की गई है। उक्त याचिकाओं के सारांश जनवरी माह में विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जा चुके हैं तथा विस्तृत याचिकाएँ आयोग की वेबसाइट www.cserc.gov.in एवं संबंधित याचिकाकर्ता कंपनियों की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। आयोग द्वारा उपरोक्त याचिकाओं पर ऑनलाईन एवं ऑफलाईन जन सुनवाई आयोजित की गई है। उक्त याचिकाओं पर आयोजित ऑनलाईन जन सुनवाई में सम्मिलित होने के लिये आयोग द्वारा विद्युत वितरण कंपनी के छः क्षेत्रों, दिनांक 17/02/2026 को दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव एवं दिनांक 18/02/2026 को अंबिकापुर, जगदलपुर एवं रायगढ़ में मुख्य अभियंता / कार्यपालक निदेशक के कार्याल में व्यवस्था की गई है. इच्छुक व्यक्ति निम्नलिखित तिथि एवं समय पर मुख्य अभियंता/कार्यपालक निदेशक के क्षेत्रिय कार्याल में उपस्थित होकर ऑन लाईन आयोग कार्यालय से जुड़ कर जन सुनवाई में भाग ले सकते हैं। ऑनलाइन जन-सुनवाई (क्षेत्रीय स्तर पर) 17 फरवरी 2026 दुर्ग प्रातः 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक बिलासपुर दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक राजनांदगांव दोपहर 03:00 से 04रू30 बजे तक 18 फरवरी 2026 अंबिकापुर- प्रातः 10:30 से दोपहर 12 रू00 बजे तक जगदलपुर- दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक रायगढ़ दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक आयोग द्वारा उक्त याचिकाओं पर दिनांक 19/02/2026 को कृषि, घरेलू, गैर-घरेलू श्रेणी एवं दिनांक 20/02/2026 को स्थानीय निकाय, निम्न दाब एवं उच्च दाब उद्योक के लिए आयोग कार्यालय, रायपुर में भी प्रत्यक्ष जन सुनवाई आयोजित की गई है। इच्छुक उपभोक्ता / पक्षकार निम्नलिखित तिथि व समय पर उपस्थित होकर अपनी आपत्तियों एवं सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं। आयोग कार्यालय, रायपुर में प्रत्यक्ष जन-सुनवाई 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) दोपहर 12:00 01:30 बजे तक कृषि एवं कृषि संबंधी कार्य दोपहर 02:30 04:00 बजे तक घरेलू उपभोक्ता सायं 04:00 05:30 बजे तक गैर-घरेलू उपभोक्ता 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार) दोपहर 12:00 01:30 बजे तक स्थानीय निकाय/नगर निगम / ट्रेड यूनियन आदि दोपहर 02:30 04:00 बजे तक निम्न दाब उद्योग सायं 04:00 05:30 बजे तक उच्च दाब उद्योग विस्तृत जानकारी एवं याचिकाएँ आयोगे की वेबसाइट www.cserc.gov.in पर उपलब्ध

बिजली दरों में 20% बढ़ोतरी का प्रस्ताव, यूपी में महंगी होने लगी बिजली

लखनऊ उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले कुछ महीने काफी हलचल भरे रहने वाले हैं. राज्य की बिजली कंपनियों ने घाटे की दुहाई देते हुए बिजली दरों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है. बिजली नियामक आयोग ने इस प्रस्ताव को कुछ शर्तों के साथ हरी झंडी दे दी है, जिस पर अब मार्च के महीने में अंतिम सुनवाई होगी. जनता के पास 21 दिन का समय नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को सख्त आदेश दिया है कि वे अगले 3 दिनों के भीतर अपना पूरा प्रस्ताव अखबारों में छपवाएं. इसके बाद आम उपभोक्ताओं को 21 दिन का समय दिया गया है ताकि वे इस प्रस्ताव को पढ़ सकें और अपनी आपत्तियां या सुझाव आयोग को भेज सकें. कंपनियों ने अपनी रिपोर्ट में करीब 12,453 करोड़ रुपये का घाटा दिखाया है और इसी की भरपाई के लिए रेट बढ़ाने की मांग की है. स्मार्ट मीटर का खर्च भी ग्राहकों की जेब पर? इस प्रस्ताव में एक चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनियों ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने और उनके संचालन पर होने वाले 3,837 करोड़ रुपये के खर्च का बोझ भी जनता पर डालने की तैयारी की है. कंपनियों का कहना है कि इस रकम को बिजली दरों में ही जोड़ दिया जाए. हालांकि, उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इन आंकड़ों को पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत करार दिया है. चोरी-छिपे वसूले गए 1400 करोड़ रुपये, अब होगी जांच गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पिछले 6 सालों से बिजली की दरें नहीं बढ़ी हैं, लेकिन पर्दे के पीछे का खेल कुछ और ही है. खबर है कि पिछले 11 महीनों में अलग-अलग शुल्कों के नाम पर उपभोक्ताओं से करीब 1400 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूल लिए गए हैं. ताज़ा मामला फरवरी के बिल में 10% की अतिरिक्त वसूली का है, जिससे नियामक आयोग भी हैरान है. आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से इसकी पूरी गणना के कागजात मांगे हैं. माना जा रहा है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर अब तक हुई पूरी वसूली की बड़ी जांच हो सकती है. 12 फरवरी को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान इसके बाद बिजली दरों के साथ-साथ ‘निजीकरण’ का मुद्दा भी फिर से गरमा गया है. विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है. अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश भर के बिजली कर्मचारी 12 फरवरी को बड़ा प्रदर्शन करेंगे. बिजली कर्मचारियों के इस आंदोलन को किसान संगठनों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन मिला है. कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा.

ग्रामीण किसानों को बड़ी राहत, 5 रुपये में मिले 1 लाख 57 हजार नए विद्युत कनेक्शन

अब तक एक लाख 57 हजार ग्रामीण कृषकों ने लिया मात्र 5 रुपये में नवीन विद्युत कनेक्शन भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने कार्यक्षेत्र में ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को अब मात्र 5 रुपये में स्थायी घरेलू एवं कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। दिसंबर 2024 से यह योजना शुरू हुई है तब से अब तक इस योजना का लाभ 01 लाख 57 हजार 359 ग्रामीण कृषकों को मिल चुका है। इनमें से 58 हजार 711 घरेलू तथा 98 हजार 648 कृषि पंप कनेक्शन शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू तथा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिये ऐसे कृषक जो विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं उनको सुविधानुसार आसानी से स्थाई कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है। नवीन घरेलू एवं कृषि पंप के लिये स्थायी विद्युत कनेक्शन का आवेदन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए portal.mpcz.in पर मांगी गई आवश्यक जानकारी देनी होती है। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।  

अक्टूबर 2025 में 36 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को मिली 920 करोड़ से अधिक सब्सिडी

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में अटल गृह ज्योति योजना एवं किसान ज्योति योजना के अंतर्गत माह अक्टूबर 2025 में 36 लाख 41 हजार से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने 920 करोड़ 83 लाख से अधिक की सब्सिडी का लाभ उठाया है। राज्य शासन द्वारा अटल गृह ज्योति योजना के अंतर्गत माह अक्टूबर 2025 में 26 लाख 39 हजार से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को लगभग 131 करोड़ 75 लाख रूपये एवं अटल किसान ज्योति योजना के अंतर्गत 10 लाख 02 हजार से अधिक कृषि उपभोक्ताओं को 789 करोड़ 08 लाख की सब्सिडी दी गई है।  

550 करोड़ का बिजली प्रोजेक्ट: एमपी में बिजली दरें होंगी आधी, उपभोक्ताओं को बड़ा फायदा

जबलपुर मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (जेनको) कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए सोलर प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए 550 करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी की जा रही है। 110 मेगावाट के सोलर प्लांट तीन स्थानों पर लगाए जाएंगे। दो साल में स्थापित होने वाले प्लांट कंपनी थर्मल पावर प्लांट के आसपास ही स्थापित करेगी। कंपनी के टेक्निकल डायरेक्टर सुबोध निगम का कहना है कि, ये कंपनी का अबतक का सबसे बड़ा सोलर पावर प्रोजेक्ट है। अभी तक कंपनी ने 7 मेगावाट का सोलर प्लांट मंदसौर के रातागुरड़िया में स्थापित किया है। कंपनी को लंबे समय से सोलर प्लांट लगाने की जरूरत थी। पर्यावरण को पहुंच रहा नुकसान अभी कोयले से संचालित थर्मल पावर प्लांट से बिजली की लागत अधिक होने के साथ पर्यावरण के लिए घातक गैस का उत्सर्जन हो रहा है। हालांकि, कंपनी स्तर पर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए काफी उपाय किए गए हैं और राख का पर्याप्त निष्पादन भी किया जा रहा है। ऐसे में कंपनी सोलर प्लांट लगाकर स्वच्छ ऊर्जा पैदा करने की तैयारी कर रही है।   550 करोड़ होंगे प्रोजेक्ट पर खर्च सुबोध निगम का कहना है कि, अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई में 40 मेगावाट, श्रीसिंगाजी ताप विद्युत गृह में 40 मेगावाट और बिरसिंहपुर ताप विद्युत गृह में 30 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने की योजना है। इसके लिए निविदा कंपनी स्तर पर जारी की जा रही है। इस परियोजना पर करीब 550 करोड़ रुपये खर्च आएगा।

मध्यप्रदेश: बिजली दरों में 10% से अधिक इजाफा, ग्राहकों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि करने की तैयारी चल रही है। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की टैरिफ पिटीशन मप्र विद्युत नियामक आयोग में लगाई है, जिसमें दावा किया गया है कि बिजली कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए यह वृद्धि करवाना चाहती हैं। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है। सूत्रों के अनुसार, मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने तीनों डिस्काम की तरफ से 30 नवंबर से पहले यह पिटीशन आयोग को सौंप दी है। आयोग ने पिटीशन को स्वीकार भी कर लिया है। अब जल्द ही इस पर सार्वजनिक सूचना जारी कर जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी। तारीख कंपनी वार होगी। जनसुनवाई के बाद आयोग तय करेगा कि बिजली की दरों में कितनी वृद्धि या कमी की जाए। यदि बिजली दरों में वृद्धि तय होती है तो वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक अप्रैल से इन्हें लागू किया जाएगा। मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला वित्तीय वर्ष महंगाई का नया झटका लेकर आ सकता है. राज्य में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की तैयारी शुरू हो गई है. मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विद्युत टैरिफ बढ़ाने की याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दाखिल कर दी है. टैरिफ पिटीशन स्वीकार, जल्द होगी जनसुनवाई सूत्रों के मुताबिक, तीनों डिस्कॉम की ओर से यह टैरिफ पिटीशन 30 नवंबर से पहले आयोग को सौंपी गई थी, जिसे नियामक आयोग ने स्वीकार कर लिया है. अब जल्द ही सार्वजनिक सूचना जारी कर कंपनीवार जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी. जनसुनवाई के बाद आयोग यह फैसला करेगा कि बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी या राहत दी जाए. यदि वृद्धि को मंजूरी मिलती है तो नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. हजारों करोड़ के घाटे में बिजली कंपनियां राज्य की तीनों विद्युत वितरण कंपनियां भारी वित्तीय संकट से जूझ रही हैं. आंकड़ों के अनुसार— मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर करीब 18,712 करोड़ रुपये का घाटा पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लगभग 16,378 करोड़ रुपये घाटे में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर 7,285 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान इसी घाटे की भरपाई को दर वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है. पहले भी प्रस्ताव ज्यादा, मंजूरी कम पिछले पांच वर्षों में बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित दर वृद्धि और आयोग द्वारा स्वीकृत वृद्धि में बड़ा अंतर रहा है. 2021-22: प्रस्ताव 6.23%, मंजूरी 0.63% 2022-23: प्रस्ताव 8.71%, मंजूरी 2.64% 2023-24: प्रस्ताव 3.20%, मंजूरी 1.65% 2024-25: प्रस्ताव 3.86%, मंजूरी 0.07% 2025-26: प्रस्ताव 7.52%, मंजूरी 3.46% इस बार कंपनियों ने 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है, जिससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है. उपभोक्ताओं पर सीधा असर यदि प्रस्तावित बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की मासिक बिजली बिल राशि में उल्लेखनीय इजाफा हो सकता है. आने वाले दिनों में जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठन और सामाजिक संस्थाएं अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगी. टैरिफ बढ़ोतरी से राहत उपभोक्ताओं को टैरिफ बढ़ोतरी से राहत मिलती रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग मानी जा रही हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आयोग ने बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले बहुत कम वृद्धि स्वीकृत की थी. अब जबकि प्रदेश में सहकारिता चुनाव प्रस्तावित हैं, राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद बड़ी राहत की उम्मीद कम लग रही है. सूत्रों का अनुमान है कि इस बार दरें 4 से 6 प्रतिशत की सीमा में तय हो सकती हैं, जिससे नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग निश्चित माना जा रहा है. 

बिजली से जगमग होंगे सुदूर गांव, विधायक ने स्वीकृत की विद्युतीकरण योजना

बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने डेजर्ट नेशनल पार्क क्षेत्र के विद्युतीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उन गांवों के लिए विधायक निधि से धन आवंटित करने का निर्णय लिया है, जो आजादी के इतने साल बाद भी बिजली से वंचित थे। डीएनपी क्षेत्र राजस्थान के सबसे दुर्गम इलाकों में गिना जाता है। ऐसे में इस पहल से इन गांवों के निवासियों के जीवन में सुधार आएगा और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना के तहत सिरगुवाला गांव में विद्युतीकरण कार्य, मोकमसिंह की ढाणी बच्चिया में ट्रांसफार्मर की स्थापना और कुम्पाणियों की ढाणी लांबड़ा में विद्युतीकरण कार्य किया जाएगा। इन क्षेत्रों के निवासियों के लिए यह कदम ऐतिहासिक महत्व का है, क्योंकि ये बस्तियां आजादी के लगभग 78 वर्षों बाद अब पहली बार बिजली की सुविधा से जुड़ेंगी। विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि डीएनपी क्षेत्र विकास की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां के लोग दशकों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे हैं। मेरा प्रयास है कि इस क्षेत्र का कोई भी गांव अब अंधेरे में न रहे। यह सिर्फ बिजली नहीं बल्कि विकास की पहली किरण है, जो इन बस्तियों के भविष्य को रोशन करेगी। भाटी ने यह भी बताया कि कमलाणी (बिजाबल) के लिए स्वीकृति भी जल्द ही जारी होगी और आगामी दिनों में वहां भी विद्युतीकरण का कार्य प्रारंभ होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले समय में डीएनपी क्षेत्र के शेष गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से विद्युत सुविधा से जोड़ा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों को शीघ्रता और पारदर्शिता से पूरा किया जाए ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

सरकारी कनेक्शनों पर भारी बकाया: 16 जिलों में 73 हजार कनेक्शन और 406 करोड़ का पेंडिंग बिल

भोपाल  मध्यप्रदेश में सरकारी विभागों पर बिजली कंपनियों का भारी बकाया चढ़ गया है। प्रदेश के 16 विभागों ने अब तक 406 करोड़ 36 लाख रुपये के करीब बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया है। कुल 72,900 बिल बकाया हैं।सबसे बड़ा बकायादार नगरीय विकास एवं आवास विभाग है, जिस पर 125 करोड़ 62 लाख रुपये (12,003 बिल) का बकाया है। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 102 करोड़ 32 लाख रुपये (17,049 बिल) बाकी हैं। वित्त विभाग ने इन विभागों के लिए बजट जारी कर दिया था, लेकिन फिर भी भुगतान नहीं किया गया। बिजली कंपनियों ने बार-बार नोटिस भेजे हैं, वहीं एसीएस ऊर्जा और पीएस ने भी सभी विभागों को तत्काल भुगतान करने के निर्देश दिए, मगर कोई असर नहीं दिखा। अन्य प्रमुख बकायेदार विभागों में महिला एवं बाल विकास (34.45 करोड़, 9,965 बिल), स्कूल शिक्षा (29.64 करोड़, 18,539 बिल), स्वास्थ्य (21.07 करोड़), जलसंसाधन (13.97 करोड़), गृह विभाग (10.49 करोड़) और पीएचई विभाग (11.35 करोड़) शामिल हैं। बिजली कंपनियों ने अब एसीएस और पीएस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि अगर जल्द भुगतान नहीं किया गया तो सरकारी दफ्तरों के बिजली कनेक्शन काटे जा सकते हैं, जिससे कई विभागों का कामकाज ठप पड़ सकता है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के शासकीय कनेक्शनों की प्रदेश के ग्वालियर, चंबल और भोपाल संभागों में कुल संख्या 72 हजार 900 है। इसमें सबसे अधिक 16049 कनेक्शन पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के हैं, जिन पर 102.32 करोड़ का बिजली बिल बाकी बताया गया है। मंत्री प्रहलाद पटेल के विभाग पर बकाया राशि के भुगतान के लिए संबंधित विभागाध्यक्षों को पत्र लिखे गए हैं। इसी तरह नगरीय विकास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विभाग के 12034 कनेक्शन हैं, जिन पर 125.62 करोड़ का बिल बाकी है। इसके अलावा जिन मंत्रियों के विभागों से संबंधित बिजली कनेक्शनों पर बकाया राशि अधिक है, उसमें महिला और बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल के नाम शामिल हैं। इन सभी विभागों को भी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी क्षितिज सिंघल ने पत्र लिखा है और बिल जमा कराने को कहा है। यह बकाया राशि अगस्त 2025 की स्थिति में है जबकि अभी अक्टूबर महीने का अंतिम सप्ताह चल रहा है। ऐसे में यह राशि पांच सौ करोड़ से अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। इन सरकारी विभागों पर बकाया है इतनी राशि (करोड़ रुपए) क्र. विभाग का नाम संख्या बकाया राशि 1 नगरीय विकास, आवास 12034 125.62 2 पंचायत, ग्रामीण विकास 17049 102.32 3 पीएचई 445 11.35 4 नर्मदा घाटी विकास 4 0.086 5 गृह विभाग 2070 10.49 6 स्कूल शिक्षा 18539 29.64 7 किसान कल्याण, कृषि 381 2.39 8 वन 766 4.30 9 स्वास्थ्य 1910 21.07 10 ट्राइबल 2805 6.87 11 राजस्व 485 3.76 12 लोक निर्माण 541 4.29 13 उच्च शिक्षा 331 1.56 14 जल संसाधन 497 13.97 15 महिला, बाल विकास 9965 34.45 16 अन्य विभाग 5078 34.21 17 कुल 72900 406.36