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मध्य प्रदेश में बिजली विभाग के सबसे बड़े कर्जदार बने सरकारी दफ्तर, पंचायतों पर 52 करोड़ बकाया

रामनगर/मैहर  सरकारी विभागों पर बिजली बिलों का करोड़ों रुपये बकाया है। सतना विद्युत वितरण मंडल के नवंबर 2025 के बकाया प्रतिवेदन के अनुसार, विभिन्न सरकारी विभागों पर कुल बकाया 62 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा ग्राम पंचायतों का है। जिले की 692 ग्राम पंचायतों पर अकेले 51.66 करोड़ रुपये की देनदारी बताई गई है। यह कुल बकाया राशि का लगभग 83 प्रतिशत है। बकाया सूची के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्रों पर 3.52 करोड़, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर 3.26 करोड़ और स्कूल शिक्षा विभाग पर 2.52 करोड़ रुपये बकाया हैं। नगर निगम सतना पर 86.22 लाख, पुलिस विभाग पर 81 हजार और स्वास्थ्य विभाग पर 39.71 लाख रुपये की देनदारी दर्ज है। लोक निर्माण विभाग पर भी 26.28 लाख रुपये बकाया बताए गए हैं। मीटर विहीन कनेक्शनों पर उठे सवाल ग्राम पंचायतों के बिजली कनेक्शनों में मीटर की उपलब्धता और बिल निर्धारण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि किसी कनेक्शन में मीटर नहीं है, तो उसकी खपत का आकलन किस आधार पर किया जा रहा है और बिलों की गणना में कितनी पारदर्शिता है, इसकी जांच जरूरी है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े अपने आप यह साबित नहीं करते कि सभी पंचायतों में मीटर नहीं लगे हैं या बिजली का उपयोग कटिया से हो रहा है। पंचायत राज संचालनालय ने दिए मीटर लगाने के निर्देश पंचायत राज संचालनालय के 6 अक्टूबर 2026 के आदेश क्रमांक 1709/पं.रा./विद्युत बिल/2026 में मीटर विहीन ग्राम पंचायतों के विद्युत कनेक्शनों में अनिवार्य रूप से मीटर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के मुताबिक, 16 सितंबर को हुई बैठक में पंचायत एवं ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा तीनों बिजली वितरण कंपनियों के प्रबंध संचालकों की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया। आदेश में यह भी उल्लेख है कि 31 मार्च 2025 तक के सभी बिलों का भुगतान राज्य स्तर से किया जा चुका है। ऐसे में भुगतान के बाद की अवधि के बिलों और बकाया राशि का मदवार मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। सब्सिडी और बिलों का हिसाब सार्वजनिक हो प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में बिजली सब्सिडी पर पिछले वर्ष 23,695 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं, अटल गृह ज्योति योजना, अटल किसान ज्योति योजना और अनुसूचित जाति-जनजाति के कृषि उपभोक्ताओं के लिए भी बड़ी राशि दी गई। ऐसे में पंचायतों के बिजली बिल, मीटर की स्थिति, खपत और सब्सिडी का स्पष्ट हिसाब सामने आना चाहिए, ताकि सरकारी धन के उपयोग को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।  

पंजाब में बढ़ा बिजली बिल? विभाग ने जारी की अहम जानकारी, जानें क्या करें

चंडीगढ़. पंजाब में बिजली उपभोक्ताओं के लिए अहम खबर सामने आई है। मीटर रीडरों की हड़ताल के चलते पी.एस.पी.सी.एल. ने बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य भर में बिजली के बिल स्पीड पोस्ट के जरिए भेजे जाएंगे। इस फैसले से 10.5 लाख से अधिक खपतकार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। बिजली विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी उपभोक्ता का बिजली बिल सामान्य से ज्यादा आया है, बिल पर ‘एन कोड’ लिखा हुआ है या कई महीनों का इकट्ठा बिल मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। एन कोड का मतलब है कि मीटर की वास्तविक रीडिंग नहीं ली जा सकी और पिछली खपत के आधार पर अंदाजन (अनुमानित) बिल जारी किया गया है। यह फाइनल बिल नहीं माना जाएगा। पी.एस.पी.सी.एल. के अनुसार, जैसे ही मीटर की असली रीडिंग ली जाएगी, उसी के अनुसार पूरा हिसाब किया जाएगा। अगर किसी उपभोक्ता ने अधिक राशि जमा करवा दी है तो वह रकम अगले बिल में एडजस्ट कर दी जाएगी, वहीं कम भुगतान की स्थिति में बाकी राशि बाद में जोड़ी जाएगी। दरअसल, पंजाब में आउटसोर्स मीटर रीडर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिस कारण कई इलाकों में मीटर रीडिंग नहीं हो सकी। इसी वजह से विभाग को मजबूरी में अनुमानित बिल जारी करने पड़े। फिलहाल मीटर रीडरों की हड़ताल खत्म होने को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है और बातचीत जारी है।

बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव, 1 जुलाई से बढ़ सकता है मासिक खर्च; लेट फीस को लेकर राहत

रायपुर छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 जुलाई 2026 से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने बिजली बिल भुगतान और टैरिफ से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब बिजली बिल देर से जमा करने पर पूरे महीने का जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि जितने दिन की देरी होगी, उसी हिसाब से लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाएगा। अब तक उपभोक्ताओं को बिजली बिल की निर्धारित तिथि निकलने के बाद डेढ़ प्रतिशत प्रतिमाह की दर से सरचार्ज देना पड़ता था। ऐसे में एक-दो दिन की देरी होने पर भी पूरे महीने का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता था। लेकिन 1 जुलाई से लागू होने वाले नए नियम के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। प्रतिदिन के हिसाब से लगेगा जुर्माना नई व्यवस्था के अनुसार बिजली बिल देर से जमा करने पर 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से लेट पेमेंट सरचार्ज लगाया जाएगा। इससे उन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी जो ड्यू डेट के कुछ दिन बाद बिल जमा करते हैं। बिजली दरों में भी बढ़ोतरी एक तरफ जहां लेट पेमेंट नियम में राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। नए टैरिफ के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। इसके चलते मासिक बिजली बिल में लगभग 30 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की वृद्धि हो सकती है। कमर्शियल उपभोक्ताओं पर भी असर नए टैरिफ के तहत कमर्शियल श्रेणी में भी 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। साथ ही स्थानीय निकायों और सरकारी कार्यालयों को घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया है। गैर-सब्सिडी कृषि पंपों को ऊर्जा प्रभार में 40 प्रतिशत तक की छूट दी गई है। राहत भी, बढ़ा खर्च भी नई व्यवस्था से देर से बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन बिजली दरों में बढ़ोतरी के कारण नियमित बिलों का खर्च बढ़ सकता है। विभाग का दावा है कि यह बदलाव बिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

पावर परचेज कॉस्ट बढ़ने से बिजली दरों में बदलाव, व्यापारियों और इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली बिजली के बिलों में पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) की बढ़ोतरी के फैसले पर सरकार ने दावा किया है कि बिजली सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की बढ़ती कीमतों के बावजूद दिल्ली सरकार ने राजधानी के बिजली उपभोक्ताओं को राहत दी है। बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं पर PPAC में हुई बढ़ोतरी का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। आशीष सूद ने साफ किया कि PPAC कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि बिजली कानूनों के तहत पहले से लागू एक नियामक प्रावधान है। इसके जरिए विजली वितरण कंपनियां ईंधन और बिजली खरीद की बढ़ी हुई लागत का एडजस्टमेंट करती है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय कारणों से पिछले एक महीने में बिजली खरीद की लागत में करीब 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उपभोक्ताओं पर इसका असर सिमित ऊर्जा मंत्री के अनुसार, इतनी बड़ी लागत वृद्धि के बावजूद दिल्ली सरकार के प्रयासों से उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रखा गया है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने औसतन केवल 2.4 प्रतिशत PPAC बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि पहले PPAC की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है। उन्होंने कहा कि DERC के आदेश में बिजली वितरण कंपनियों को लागत की वसूली चरणबद्ध तरीके से करने का प्रावधान किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं पर तत्काल प्रभाव न्यूनतम रहे। सूद ने कहा कि यह कदम बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने दोहराया कि दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे है, जबकि सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सूद ने बताया कि पहले PPAC की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है दुकानदारों और फैक्ट्री मालिकों की मुश्किलें बढ़ीं PPAC में बढ़ोतरी को लेकर दुकानदारों और फैक्ट्री मालिकों की टेशन बढ़ गई है। व्यापारी संगठन सीटीआई बृजेश गोयल ने सीएम रेखा गुप्ता को पत्र लिखा है। दावा है कि इस बढ़ोतरी से हरियाणा और यूपी के अपेक्षा दिल्ली में कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। बिजली की नई दरें 10 जून से लागू हो चुकी है, जिसका असर जुलाई में आने वाले बिजली बिलो में दिखाई देगा बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली में कमर्शल और इंडस्ट्रीज के लिए बिजली की दरे पहले से ही पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत ज्यादा है। इंडस्ट्रीज हरियाणा और उत्तर प्रदेश शिफ्ट हो सकती हैं बिजली की दरे और बढ़ने से दिल्ली की इंडस्ट्रीज पड़ोसी राज्यो हरियाणा और उत्तर प्रदेश में शिफ्ट हो सकती है क्योंकि वहां बिजली की दरें और न्यूनतम मजदूरी दिल्ली की तुलना में सस्ती होने से लागत कम पड़ेगी। बृजेश गोयल ने कहा कि रेजिडेशल बिजली दरो में सब्सिडी मिलती है, लेकिन कमर्शल और इंडस्ट्रीज में सब्सिडी नहीं मिलने से यहां बिजली की दरे हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में बहुत ज्यादा हो जाएंगी। जिससे व्यापारियों और फैक्ट्री मालिको पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और वस्तुओ के दाम बढ़ने की संभावना बढ़ेगी। अगर यही स्थिति रही तो कारोबारी अपना कारोबार हरियाणा या यूपी में शिफ्ट करने को मजबूर होगे। सबसे ज्यादा बोझ बीएसईएस उपभोक्ताओं पर घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए PPAC दरों में संशोधन के बाद 2 किलोवॉट स्वीकृत लोड वाले उपभोक्ताओं के मासिक बिल में वितरण कंपनियों के अनुसार अलग अलग बढ़ोतरी होगी। बृजेश गोयल ने कहा कि DERC के आदेश में बिजली कंपनियो को लागत की वसूली चरणबद्ध तरीके से करने का प्रावधान किया गया है, ताकि उपभोक्ताओं पर तत्काल प्रभाव न्यूनतम रहे। जानिए किसे कितना चुकाना होगा बिल बीआरपीएल का PPAC 14.5% से बढ़कर 17.9% हो गया है। इसके चलते 200 यूनिट का बिल 866 रुपये से बढ़कर 889 रुपये यानी 23 रुपये अधिक होगा, लेकिन सब्सिडी के चलते बिल जीरो आएगा। 400 यूनिट का बिल 2,086 रुपये से बढ़कर 2.142 रुपये यानी 56 रुपये अधिक होगा। 600 यूनिट का बिल 3,850 रुपये से बढ़कर 3,952 रुपये हो जाएगा, यानी 102 रुपये की बढ़ोतरी होगी। BYPL में PPAC 11.7% से बढ़कर 17.4% कर दिया गया है, जो सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। 200 यूनिट का बिल 847 रुपये से बढ़कर 885 रुपये होगा, लेकिन बिल जीरो ही रहेगा। 400 यूनिट का बिल 2,041 रुपये से बढ़कर 2,133 रुपये यानी 92 रुपये अधिक होगा। 600 यूनिट का बिल 3,766 रुपये से बढ़कर 3,936 रुपये हो जाएगा, यानी 170 रुपये की बढ़ोतरी होगी। वहीं, TPDDL में PPAC 15.9% से बढ़कर 16% हुआ है। इसके बावजूद 200. 400 और 600 यूनिट की खपत पर बिल क्रमशः 876 रुपये, 2,110 रुपये और 3,894 रुपये ही रहेगा। बढ़ोतरी नहीं होगी।  

13 करोड़ से ज्यादा बकाया वसूली के लिए बिजली निगम सख्त, उपभोक्ताओं को नोटिस जारी

 कैथल  बिजली निगम की तरफ से लंबे समय से बिजली बिल न भरने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। निगम ने 665 बड़े बकायेदार उपभोक्ताओं के मामलों को राजस्व विभाग के हवाले कर दिया है। इन उपभोक्ताओं को तहसीलदार की ओर से नोटिस जारी किए जाएंगे। तय समय सीमा के अंदर बकाया राशि जमा नहीं करवाने पर संबंधित उपभोक्ताओं की जमीन, मकान व अन्य संपत्तियों को कुर्क (जब्त) करने की कार्रवाई की जाएगी। निगम अब बकाया वसूली के लिए लैंड रेवेन्यू एक्ट का सहारा लेगा। इसके तहत डिफाल्टरों की संपत्तियों पर प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित किया जाएगा और उनकी खरीद-बिक्री पर भी रोक लगाई जा सकती है। यानी जब तक उपभोक्ता बकाया राशि जमा नहीं करवाएंगे, तब तक वे अपनी संपत्ति का लेन-देन नहीं कर सकेंगे। 665 उपभोक्ताओं पर कुल 13 करोड़ 73 लाख रुपये की राशि बकाया निगम के अनुसार इन 665 उपभोक्ताओं पर कुल 13 करोड़ 73 लाख रुपये की राशि बकाया है। इनमें कैथल डिवीजन के 370 उपभोक्ताओं पर 8 करोड़ 68 लाख रुपये, गुहला डिवीजन के 52 उपभोक्ताओं पर 89 लाख रुपये तथा पूंडरी डिवीजन के 243 उपभोक्ताओं पर 4 करोड़ 16 लाख रुपये बकाया हैं। निगम के आंकड़ों के अनुसार जिले में एक लाख रुपये से अधिक बकाया वाले 6129 उपभोक्ता डिफॉल्टर की श्रेणी में हैं। इन पर कुल 180 करोड़ 14 लाख रुपये की राशि लंबित है। सबसे अधिक बकाया कैथल डिवीजन में है, जहां 3750 उपभोक्ताओं पर 129 करोड़ चार लाख रुपये बकाया हैं। इसके अलावा गुहला डिवीजन के 636 उपभोक्ताओं पर 17 करोड़ 7 लाख रुपये और पूंडरी डिवीजन के 1743 उपभोक्ताओं पर 34 करोड़ 3 लाख रुपये बकाया हैं। निगम की ओर से शेष बकायेदारों की सूची भी जल्द तहसील प्रशासन को सौंपी जाएगी। तीन चरणों में नोटिस जारी, फिर भी नहीं हुआ भुगतान निगम ने वसूली अभियान को चरणबद्ध तरीके से चलाते हुए अब तक तीन चरणों में नोटिस जारी किए हैं। पहले चरण में 2409 उपभोक्ताओं को नोटिस भेजे गए थे, जिन पर 64 करोड़ 54 लाख रुपये बकाया था। इनमें कैथल डिवीजन के 1319 उपभोक्ताओं पर 39 करोड़ 47 लाख रुपये, गुहला के 452 उपभोक्ताओं पर 11 करोड़ 1 लाख रुपये तथा पूंडरी के 638 उपभोक्ताओं पर 14 करोड़ 6 लाख रुपये बकाया थे। दूसरे चरण में 888 उपभोक्ताओं को नोटिस जारी किए गए, जिनमें कैथल के 446, गुहला के 114 और पूंडरी के 328 उपभोक्ता शामिल थे। इसके बाद तीसरे चरण में एक्सईएन स्तर से 788 उपभोक्ताओं को अंतिम नोटिस भेजे गए। इनमें कैथल डिवीजन के 416 उपभोक्ताओं पर 9 करोड़ 78 लाख रुपये, गुहला के 49 उपभोक्ताओं पर 88 लाख रुपये और पूंडरी के 323 उपभोक्ताओं पर 6 करोड़ 57 लाख रुपये बकाया हैं। बकाया जमा करें, नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई: सोमवीर बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता सोमबीर भालोठिया ने बताया कि निगम लगातार उपभोक्ताओं से बकाया राशि जमा करवाने की अपील कर रहा हैं, लेकिन कई उपभोक्ता बार-बार नोटिस देने के बावजूद भुगतान नहीं कर रहे। ऐसे में अब नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जा रही है। बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत रखने के लिए समय पर बिल जमा होना जरूरी है। 665 मामलों को राजस्व विभाग को भेजा जा चुका है और आगामी कार्रवाई तहसीलदार स्तर पर की जाएगी। यह अभियान केवल राजस्व वसूली के लिए ही नहीं, बल्कि जिले में बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। बिजली चोरी रोकने के लिए पूरे जिले में 24 टीमों का गठन किया हुआ है।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से 13 हजार 868 हितग्राहियों को 11.75 करोड़ की मिली छूट

रायपुर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना कबीरधाम जिले के आम नागरिकों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत कबीरधाम जिले के कुल 13 हजार 868 उपभोक्ताओं को लाभ मिला है, जिन्हें अब तक 11 करोड़ 75 लाख 38 हजार 570 रुपये की छूट प्रदान की जा चुकी है। यह योजना बीपीएल, निम्नदाब घरेलू एवं कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए शुरू की गई है, ताकि वे अपने पुराने बकाया बिजली बिलों के बोझ से मुक्त हो सकें। योजना के अंतर्गत सक्रिय और निष्क्रिय दोनों प्रकार के उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके। विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता ने बताया कि जिले में योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विशेष ’समाधान शिविरों’ का भी लगाई गई। विभाग की टीमें न केवल इन शिविरों में उपस्थित रहकर सहायता प्रदान कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर भी लोगों को योजना की जानकारी दे रही हैं। उपभोक्ताओं को पात्रता, छूट की प्रक्रिया और आवेदन संबंधी जानकारी सरल भाषा में समझाई जा रही है। उन्होंने बताया कि 31 मई तक इस योजना का लाभ उठा सकते है। उन्होंने बताया कि जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल 31 मार्च 2023 से पूर्व के बकाया हैं, वे इस योजना का लाभ लेकर अपने बकाया का निपटारा कर सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। बकाया बिजली बिलों का समय पर निपटारा कर उपभोक्ता न केवल आर्थिक बोझ से राहत पा सकते हैं, बल्कि भविष्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित कर सकते हैं। साथ ही, यह कदम बिजली कंपनी के सुदृढ़ीकरण में भी सहायक होगा। उन्होंने बताया कि कवर्धा सर्कल के 5 हजार 63 उपभोक्ताओं के 3 करोड़ 75 लाख 97 हजार 706 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसके तहत कृषि के 566 उपभोक्ताओं के 22 लाख 67 हजार 926, एपीएल के 538 उपभोक्ताओं के 48 लाख 62 हजार 408 रूपए और बीपीएल के 3 हजार 959 उपभोक्ताओं के 3 करोड़ 4 लाख 67 हजार 371 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसी तरह पंडरिया सर्कल के 8 हजार 805 उपभोक्ताओं के 7 करोड़ 99 लाख 40 हजार 864 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसके तहत कृषि के 340 उपभोक्ताओं के 27 लाख 35 हजार 629, एपीएल के 1881 उपभोक्ताओं के 1 करोड़ 9 लाख 97 हजार 435 रूपए और बीपीएल के 7 हजार 284 उपभोक्ताओं के 6 करोड़ 62 लाख 7 हजार 801 रुपये की छूट प्रदान की गई है।

बिजली ऑफिस के चक्करों से मिलेगी मुक्ति, रक्सौल में हर सोमवार और शुक्रवार को दर्ज करा सकेंगे अपनी समस्याएं

रक्सौल रक्सौल जिले में लोगों की बिजली बिल से जुड़ी समस्याएं सिर्फ तीन दिनों में ही निपटा दिए जायेंगे. इसके लिए कैंप लगाया जाएगा, जहां कंज्यूमर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. कैंप सुबह के 11 बजे से दोपहर के 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा.  बिजली बिल से जुड़ी काफी समस्याएं लोगों को झेलनी पड़ रही है. इस बीच रक्सौल जिले में नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) ने खास पहल की है. इसके साथ ही कंज्यूमर्स की समस्या के समाधान के लिए कैंप लगाए जाने का फैसला लिया है. कंज्यूमर्स के लिए यह कैंप सुबह के 11 बजे से दोपहर के 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा. हफ्ते में 2 दिन लगाए जायेंगे कैंप जानकारी के मुताबिक, हफ्ते में दो दिन सोमवार और शुक्रवार को कैंप लगाए जायेंगे. इसके बाद तय समय पर कंज्यूमर्स कैंप में पहुंच कर अपनी-अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. रक्सौल विद्युत प्रमंडल के सभी ऑफिसों में अप्रैल महीने से यह सुविधा कंज्यूमर्स के लिए शुरू की गई है. इस कैंप का उद्देश्य बिजली बिल से जुड़ी गलतियों या फिर शिकायतों को जल्द से जल्द का निपटारा करना है. ये सभी शिकायतें करा सकेंगे दर्ज इलेक्ट्रिकल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की माने तो, कैंप में नया कनेक्शन, बिजली बिल में सुधार, स्मार्ट प्री-पेड मीटर, ‘पीएम सूर्य घर योजना’ से जुड़े एप्लीकेशन समेत कई अन्य मामलों से जुड़ी शिकायतें कंज्यूमर्स दर्ज करा सकते हैं. खास बात यह भी है कि सिर्फ 3 दिनों में ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा. लेकिन कुछ ऐसे मामले, जिसके लिए किसी जगह पर जाकर जांच करने की जरुरत होगी, वैसे मामलों में तीन दिन से ज्यादा का समय लग सकता है. लोगों से की गई ये अपील जानकारी के मुताबिक, कैंप से जुड़ी प्रोग्रेस रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी. ऐसे में स्थानीय लोगों से कैंप में आने और शिकातय दर्ज कराने की अपील की है. इससे कंज्यूमर्स को भी यह फायदा हो सकेगा कि उन्हें बार-बार ऑफिस का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा. साथ ही राजस्व वसूली में भी तेजी आ सकती है.

बिजली बिल का नया झंझट: अधूरे मैसेज से बढ़ा भ्रम, उपभोक्ता असमंजस में

चंडीगढ़. पंजाब में बिजली बिलों के मोबाइल मैसेज में पुराने और नए मीटर की रीडिंग शामिल करने की मांग उठी है। असल में, पावरकॉम की तरफ से कंज्यूमर्स को भेजे जाने वाले मोबाइल मैसेज में सिर्फ अकाउंट नंबर और कुल रकम की जानकारी होती है और नई और पुरानी रीडिंग के बिना खपतकार के लिए समझना मुश्किल हो जाता है कि बिल सही है या नहीं, जिससे बिजली विभाग के प्रति अविश्वास पैदा होता है। यह मांग जाने-माने समाजसेवी संजीव कुमार टोनी, प्रीतिंदर सिंह ढींडसा, सतपाल सिंह सत्ता सूरजगढ़, मनजीत सिंह मोटेमाजरा, दलजीत सिंह बिल्लू मोही, हरप्रीत सिंह अमला आदि ने उठाई है और कहा है कि बिजली खपतकारों के हित में बिजली बिलों के मोबाइल मैसेज में पुराने और नए मीटर की रीडिंग शामिल की जानी चाहिए। ऊपर बताए गए नेताओं ने मांग की है कि पावरकॉम की तरफ से खपतकार को भेजे जाने वाले मोबाइल मैसेज में सिर्फ अकाउंट नंबर और टोटल अमाउंट होती है और नई और पुरानी रीडिंग के बिना खपतकार के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कितने यूनिट बिजली खर्च हुई है, बिल सही है या नहीं। इलाके के युवाओं ने मांग की कि डिजिटल जमाने में पारदर्शिता लाना जरूरी है और पावरकॉम की तरफ से भेजे जाने वाले मोबाइल मैसेज में नई और पुरानी रीडिंग दिखाई जानी चाहिए ताकि खपतकारों को भेजे गए बिल को समझने में कोई दिक्कत न हो। 

मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना: BPL परिवारों को मूल बकाया में छूट, जल्द उठाएं लाभ

गरियाबंद. जिले के 56,102 बीपीएल बिजली कनेक्शनधारकों पर कुल 43 करोड़ रुपये का बकाया है, जिनके पास राहत पाने का सुनहरा मौका है। दरअसल, बकायादार बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना शुरू की है। योजना के तहत निर्धारित समय में पंजीयन कर अंतर की राशि का भुगतान करने पर जिले के बकायादार उपभोक्ताओं को कुल 36.50 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। इसका मतलब यह है कि बीपीएल कनेक्शनधारकों को केवल 6 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। योजना का सबसे अधिक लाभ देवभोग, झाखरपारा और गोहरापदर वितरण केंद्र के ग्रामीणों को मिलेगा। सरकार की ओर से जारी विवरण के अनुसार, योजना से निष्क्रिय बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया में 75 प्रतिशत और अधिभार में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल बकाया में अधिकतम 50 प्रतिशत और अधिभार में 100 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। बचत राशि का भुगतान अधिकतम 6 किस्तों में किया जा सकेगा, लेकिन किस्तों में छूट का प्रतिशत कम होता जाएगा। विभाग के कार्यपालन अभियंता हेमंत ठाकुर ने बताया कि भुगतान की अंतिम तिथि 30 जून 2026 तक है। पंजीयन के लिए केवल बीपी और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी। इसे ‘मोर बिजली’ एप या नजदीकी बिजली स्टेशन पर कराया जा सकता है। जागरूकता बढ़ाने के लिए विभाग प्रत्येक वितरण केंद्र क्षेत्र में साप्ताहिक बाजार और बड़े गांवों में शिविर आयोजित करेगा। साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। देवभोग में सर्वाधिक उपभोक्ता जिले के 12 वितरण केंद्रों में सबसे अधिक 14,715 बीपीएल उपभोक्ता देवभोग केंद्र में हैं। सहायक अभियंता हेमंत कुमार नागवंशी के अनुसार, इन पर 12.93 करोड़ रुपये का बकाया है। तय समय में 1.69 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर उन्हें सीधे 11.23 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। झाखरपारा वितरण केंद्र में 7,818 उपभोक्ताओं पर 6.85 करोड़ रुपये का बकाया है, जिनमें केवल 92 लाख रुपये का भुगतान करने पर 5.93 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। अधिकांश बकायादार कनेक्शनधारकों ने बिजली मीटर लगाने के बाद एक बार भी बिल का भुगतान नहीं किया है। योजना के अनुसार, उन्हें अधिकतम 30 यूनिट प्रति माह खपत की छूट दी गई थी, लेकिन इससे अधिक खपत पर बिल का भुगतान नहीं किया गया। बीपीएल कनेक्शन मूल रूप से बुनियादी घरेलू सुविधाओं के लिए दिए जाते हैं, लेकिन कई कनेक्शन पर पंखा, कूलर और सबमर्सिबल पंप का भी इस्तेमाल हुआ। जिले के किन इलाकों में BPL कनेक्शन को मिलेगी कितनी छूट ? गोहरापदर: 7,940 उपभोक्ता, 1 करोड़ रुपये भुगतान पर 6.12 करोड़ छूट। अमलीदपर: 7,215 उपभोक्ता, 86 लाख भुगतान पर 5.24 करोड़ छूट। बिन्द्रानवागढ़: 3,291 उपभोक्ता, 35 लाख भुगतान पर 2.31 करोड़ छूट। मैनपुर: 3,365 उपभोक्ता, 31 लाख भुगतान पर 1.75 करोड़ छूट। मड़ेली: 3,178 उपभोक्ता, 23 लाख भुगतान पर 1.31 करोड़ छूट। रसेला: 2,896 उपभोक्ता, 24 लाख भुगतान पर 1.27 करोड़ छूट। छुरा: 1,907 उपभोक्ता, 12 लाख भुगतान पर 54 लाख छूट। पाण्डुका: 933 उपभोक्ता, 1.86 करोड़ भुगतान पर 6.95 करोड़ छूट। गरियाबंद ग्रामीण: 2,103 उपभोक्ता, 13 लाख भुगतान पर 5.7 करोड़ छूट। नहीं चुकाया बिल तो प्रीपेड योजना लागू होते ही कट जाएगा कनेक्शन ? गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना सीमित समय के लिए है। इसके बाद प्रीपेड स्कीम लागू की जाएगी, जिसमें बकायादार कनेक्शनधारक वंचित रह सकते हैं। इसलिए लाभ पाने के लिए समय रहते पंजीयन कर योजना का लाभ उठाना ही फायदेमंद रहेगा।

बड़ी खुशखबरी! अप्रैल-जुलाई में घटेगा बिजली बिल, यूपी के 40 करोड़ लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

लखनऊ विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड को कास्ट डाटा बुक का उल्लंघन करने के मामले में उपभोक्ताओं का पैसा वापस करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों में उल्लेख किया गया है कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के करीब एक लाख उपभोक्ताओं का 40 करोड रुपए वापस किया जाए। यह धनराशि बिजली विभाग को अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 के बिजली बिलों में समायोजित करनी होगी l बिजली विभाग ने कास्ट डाटा बुक की अनदेखी करते हुए बिजली उपभोक्ताओं से कनेक्शन का निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क लिया था। इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और केंद्र व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया था। अधिक पैसा देने वाले उपभोक्ता भी इससे अंजान थे। मामला आयोग पहुंचा तो उपभोक्ताओं ने भी बिजली विभाग द्वारा अधिक कनेक्शन शुल्क लेने पर नाराजगी जताई थी। विद्युत नियामक आयोग में मामले की सुनवाई कई महीनों से चल रही थी इस पर विद्युत नियामक आयोग ने बिजली विभाग को निर्देश दिए हैं कि कास्ट डाटा बुक के हिसाब से ही कनेक्शन शुल्क लिया जाए। कनेक्शन शुल्क के मुताबिक बिजली विभाग को सिंगल फेस का 2800 रुपये लेना चाहिए लेकिन बिजली विभाग के अभियंताओं ने 6,016 रुपए लिए। l इसी तरह थ्री फेस का 4,100 लेना चाहिए लेकिन बिजली विभाग ने 11,341 रुपए लिए। इस संबंध में बिजली अभियंताओं का तर्क है कि जो कंप्यूटर पर धनराशि आती है, वही अभियंता व काउंटर पर बैठा कर्मी काटता है। उसमें फेरबदल उच्च स्तर पर ही हो सकता है। इसमें अभियंता की कोई गलती नहीं है। वहीं बिजली विभाग अधिक कनेक्शन धनराशि देने वाले उपभोक्ता को शेष धनराशि बिल में समायोजित करेगी। वर्मा के मुताबिक इससे पहले भी बिजली विभाग ने कास्ट डाटा बुक के नियमों की अनदेखी की थी, तब बिजली विभाग को एक करोड़ 75 लाख रुपये वापस करने पड़े थे। क्या है कास्ट डाटा बुक कष्ट डाटा बुक में बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं से जो बिजली के अलग-अलग मद का शुल्क लिया जाता है उसका उल्लेख होता है। इससे अतिरिक्त बिजली विभाग नहीं ले सकता। यह कास्ट डाटा बुक विद्युत नियामक आयोग द्वारा अभियंताओं व उपभोक्ताओं की आपत्तियां सुनने के बाद तैयार की जाती है। उसके आधार पर ही पूरे उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं से हर मद का शुल्क लेने का नियम है।