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बिजली ऑफिस के चक्करों से मिलेगी मुक्ति, रक्सौल में हर सोमवार और शुक्रवार को दर्ज करा सकेंगे अपनी समस्याएं

रक्सौल रक्सौल जिले में लोगों की बिजली बिल से जुड़ी समस्याएं सिर्फ तीन दिनों में ही निपटा दिए जायेंगे. इसके लिए कैंप लगाया जाएगा, जहां कंज्यूमर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. कैंप सुबह के 11 बजे से दोपहर के 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा.  बिजली बिल से जुड़ी काफी समस्याएं लोगों को झेलनी पड़ रही है. इस बीच रक्सौल जिले में नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) ने खास पहल की है. इसके साथ ही कंज्यूमर्स की समस्या के समाधान के लिए कैंप लगाए जाने का फैसला लिया है. कंज्यूमर्स के लिए यह कैंप सुबह के 11 बजे से दोपहर के 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा. हफ्ते में 2 दिन लगाए जायेंगे कैंप जानकारी के मुताबिक, हफ्ते में दो दिन सोमवार और शुक्रवार को कैंप लगाए जायेंगे. इसके बाद तय समय पर कंज्यूमर्स कैंप में पहुंच कर अपनी-अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. रक्सौल विद्युत प्रमंडल के सभी ऑफिसों में अप्रैल महीने से यह सुविधा कंज्यूमर्स के लिए शुरू की गई है. इस कैंप का उद्देश्य बिजली बिल से जुड़ी गलतियों या फिर शिकायतों को जल्द से जल्द का निपटारा करना है. ये सभी शिकायतें करा सकेंगे दर्ज इलेक्ट्रिकल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की माने तो, कैंप में नया कनेक्शन, बिजली बिल में सुधार, स्मार्ट प्री-पेड मीटर, ‘पीएम सूर्य घर योजना’ से जुड़े एप्लीकेशन समेत कई अन्य मामलों से जुड़ी शिकायतें कंज्यूमर्स दर्ज करा सकते हैं. खास बात यह भी है कि सिर्फ 3 दिनों में ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा. लेकिन कुछ ऐसे मामले, जिसके लिए किसी जगह पर जाकर जांच करने की जरुरत होगी, वैसे मामलों में तीन दिन से ज्यादा का समय लग सकता है. लोगों से की गई ये अपील जानकारी के मुताबिक, कैंप से जुड़ी प्रोग्रेस रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी. ऐसे में स्थानीय लोगों से कैंप में आने और शिकातय दर्ज कराने की अपील की है. इससे कंज्यूमर्स को भी यह फायदा हो सकेगा कि उन्हें बार-बार ऑफिस का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा. साथ ही राजस्व वसूली में भी तेजी आ सकती है.

बिजली बिल का नया झंझट: अधूरे मैसेज से बढ़ा भ्रम, उपभोक्ता असमंजस में

चंडीगढ़. पंजाब में बिजली बिलों के मोबाइल मैसेज में पुराने और नए मीटर की रीडिंग शामिल करने की मांग उठी है। असल में, पावरकॉम की तरफ से कंज्यूमर्स को भेजे जाने वाले मोबाइल मैसेज में सिर्फ अकाउंट नंबर और कुल रकम की जानकारी होती है और नई और पुरानी रीडिंग के बिना खपतकार के लिए समझना मुश्किल हो जाता है कि बिल सही है या नहीं, जिससे बिजली विभाग के प्रति अविश्वास पैदा होता है। यह मांग जाने-माने समाजसेवी संजीव कुमार टोनी, प्रीतिंदर सिंह ढींडसा, सतपाल सिंह सत्ता सूरजगढ़, मनजीत सिंह मोटेमाजरा, दलजीत सिंह बिल्लू मोही, हरप्रीत सिंह अमला आदि ने उठाई है और कहा है कि बिजली खपतकारों के हित में बिजली बिलों के मोबाइल मैसेज में पुराने और नए मीटर की रीडिंग शामिल की जानी चाहिए। ऊपर बताए गए नेताओं ने मांग की है कि पावरकॉम की तरफ से खपतकार को भेजे जाने वाले मोबाइल मैसेज में सिर्फ अकाउंट नंबर और टोटल अमाउंट होती है और नई और पुरानी रीडिंग के बिना खपतकार के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कितने यूनिट बिजली खर्च हुई है, बिल सही है या नहीं। इलाके के युवाओं ने मांग की कि डिजिटल जमाने में पारदर्शिता लाना जरूरी है और पावरकॉम की तरफ से भेजे जाने वाले मोबाइल मैसेज में नई और पुरानी रीडिंग दिखाई जानी चाहिए ताकि खपतकारों को भेजे गए बिल को समझने में कोई दिक्कत न हो। 

मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना: BPL परिवारों को मूल बकाया में छूट, जल्द उठाएं लाभ

गरियाबंद. जिले के 56,102 बीपीएल बिजली कनेक्शनधारकों पर कुल 43 करोड़ रुपये का बकाया है, जिनके पास राहत पाने का सुनहरा मौका है। दरअसल, बकायादार बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना शुरू की है। योजना के तहत निर्धारित समय में पंजीयन कर अंतर की राशि का भुगतान करने पर जिले के बकायादार उपभोक्ताओं को कुल 36.50 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। इसका मतलब यह है कि बीपीएल कनेक्शनधारकों को केवल 6 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। योजना का सबसे अधिक लाभ देवभोग, झाखरपारा और गोहरापदर वितरण केंद्र के ग्रामीणों को मिलेगा। सरकार की ओर से जारी विवरण के अनुसार, योजना से निष्क्रिय बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया में 75 प्रतिशत और अधिभार में 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल बकाया में अधिकतम 50 प्रतिशत और अधिभार में 100 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। बचत राशि का भुगतान अधिकतम 6 किस्तों में किया जा सकेगा, लेकिन किस्तों में छूट का प्रतिशत कम होता जाएगा। विभाग के कार्यपालन अभियंता हेमंत ठाकुर ने बताया कि भुगतान की अंतिम तिथि 30 जून 2026 तक है। पंजीयन के लिए केवल बीपी और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी। इसे ‘मोर बिजली’ एप या नजदीकी बिजली स्टेशन पर कराया जा सकता है। जागरूकता बढ़ाने के लिए विभाग प्रत्येक वितरण केंद्र क्षेत्र में साप्ताहिक बाजार और बड़े गांवों में शिविर आयोजित करेगा। साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की गई है कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। देवभोग में सर्वाधिक उपभोक्ता जिले के 12 वितरण केंद्रों में सबसे अधिक 14,715 बीपीएल उपभोक्ता देवभोग केंद्र में हैं। सहायक अभियंता हेमंत कुमार नागवंशी के अनुसार, इन पर 12.93 करोड़ रुपये का बकाया है। तय समय में 1.69 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर उन्हें सीधे 11.23 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। झाखरपारा वितरण केंद्र में 7,818 उपभोक्ताओं पर 6.85 करोड़ रुपये का बकाया है, जिनमें केवल 92 लाख रुपये का भुगतान करने पर 5.93 करोड़ रुपये की छूट मिलेगी। अधिकांश बकायादार कनेक्शनधारकों ने बिजली मीटर लगाने के बाद एक बार भी बिल का भुगतान नहीं किया है। योजना के अनुसार, उन्हें अधिकतम 30 यूनिट प्रति माह खपत की छूट दी गई थी, लेकिन इससे अधिक खपत पर बिल का भुगतान नहीं किया गया। बीपीएल कनेक्शन मूल रूप से बुनियादी घरेलू सुविधाओं के लिए दिए जाते हैं, लेकिन कई कनेक्शन पर पंखा, कूलर और सबमर्सिबल पंप का भी इस्तेमाल हुआ। जिले के किन इलाकों में BPL कनेक्शन को मिलेगी कितनी छूट ? गोहरापदर: 7,940 उपभोक्ता, 1 करोड़ रुपये भुगतान पर 6.12 करोड़ छूट। अमलीदपर: 7,215 उपभोक्ता, 86 लाख भुगतान पर 5.24 करोड़ छूट। बिन्द्रानवागढ़: 3,291 उपभोक्ता, 35 लाख भुगतान पर 2.31 करोड़ छूट। मैनपुर: 3,365 उपभोक्ता, 31 लाख भुगतान पर 1.75 करोड़ छूट। मड़ेली: 3,178 उपभोक्ता, 23 लाख भुगतान पर 1.31 करोड़ छूट। रसेला: 2,896 उपभोक्ता, 24 लाख भुगतान पर 1.27 करोड़ छूट। छुरा: 1,907 उपभोक्ता, 12 लाख भुगतान पर 54 लाख छूट। पाण्डुका: 933 उपभोक्ता, 1.86 करोड़ भुगतान पर 6.95 करोड़ छूट। गरियाबंद ग्रामीण: 2,103 उपभोक्ता, 13 लाख भुगतान पर 5.7 करोड़ छूट। नहीं चुकाया बिल तो प्रीपेड योजना लागू होते ही कट जाएगा कनेक्शन ? गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना सीमित समय के लिए है। इसके बाद प्रीपेड स्कीम लागू की जाएगी, जिसमें बकायादार कनेक्शनधारक वंचित रह सकते हैं। इसलिए लाभ पाने के लिए समय रहते पंजीयन कर योजना का लाभ उठाना ही फायदेमंद रहेगा।

बड़ी खुशखबरी! अप्रैल-जुलाई में घटेगा बिजली बिल, यूपी के 40 करोड़ लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

लखनऊ विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड को कास्ट डाटा बुक का उल्लंघन करने के मामले में उपभोक्ताओं का पैसा वापस करने के निर्देश दिए हैं। निर्देशों में उल्लेख किया गया है कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के करीब एक लाख उपभोक्ताओं का 40 करोड रुपए वापस किया जाए। यह धनराशि बिजली विभाग को अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 के बिजली बिलों में समायोजित करनी होगी l बिजली विभाग ने कास्ट डाटा बुक की अनदेखी करते हुए बिजली उपभोक्ताओं से कनेक्शन का निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क लिया था। इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और केंद्र व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया था। अधिक पैसा देने वाले उपभोक्ता भी इससे अंजान थे। मामला आयोग पहुंचा तो उपभोक्ताओं ने भी बिजली विभाग द्वारा अधिक कनेक्शन शुल्क लेने पर नाराजगी जताई थी। विद्युत नियामक आयोग में मामले की सुनवाई कई महीनों से चल रही थी इस पर विद्युत नियामक आयोग ने बिजली विभाग को निर्देश दिए हैं कि कास्ट डाटा बुक के हिसाब से ही कनेक्शन शुल्क लिया जाए। कनेक्शन शुल्क के मुताबिक बिजली विभाग को सिंगल फेस का 2800 रुपये लेना चाहिए लेकिन बिजली विभाग के अभियंताओं ने 6,016 रुपए लिए। l इसी तरह थ्री फेस का 4,100 लेना चाहिए लेकिन बिजली विभाग ने 11,341 रुपए लिए। इस संबंध में बिजली अभियंताओं का तर्क है कि जो कंप्यूटर पर धनराशि आती है, वही अभियंता व काउंटर पर बैठा कर्मी काटता है। उसमें फेरबदल उच्च स्तर पर ही हो सकता है। इसमें अभियंता की कोई गलती नहीं है। वहीं बिजली विभाग अधिक कनेक्शन धनराशि देने वाले उपभोक्ता को शेष धनराशि बिल में समायोजित करेगी। वर्मा के मुताबिक इससे पहले भी बिजली विभाग ने कास्ट डाटा बुक के नियमों की अनदेखी की थी, तब बिजली विभाग को एक करोड़ 75 लाख रुपये वापस करने पड़े थे। क्या है कास्ट डाटा बुक कष्ट डाटा बुक में बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं से जो बिजली के अलग-अलग मद का शुल्क लिया जाता है उसका उल्लेख होता है। इससे अतिरिक्त बिजली विभाग नहीं ले सकता। यह कास्ट डाटा बुक विद्युत नियामक आयोग द्वारा अभियंताओं व उपभोक्ताओं की आपत्तियां सुनने के बाद तैयार की जाती है। उसके आधार पर ही पूरे उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं से हर मद का शुल्क लेने का नियम है।  

अचानक बढ़े बिजली बिल से घरवालों की नींद उड़ी, स्मार्ट मीटर मामले में आयोग ने आदेश जारी किए

 ग्वालियर  ग्वालियर में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के खिलाफ दायर एक महत्वपूर्ण प्रकरण में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने स्मार्ट मीटर लगाने के बाद अचानक बढ़े बिजली बिल को सेवा में कमी मानते हुए बिजली कंपनी को संशोधित बिल जारी करने और क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं। स्मार्ट मीटर लगते ही बढ़ गया बिल प्रकरण में सामने आया कि स्मार्ट मीटर लगाने के दो दिन के भीतर ही उपभोक्ता का बिजली बिल चार गुना बढ़ गया। अप्रैल 2025 में 159 यूनिट खपत पर 437 रुपए का बिल जारी हुआ था, लेकिन दो दिन बाद ऑनलाइन पोर्टल पर 157 यूनिट खपत के साथ 1830 रुपए की राशि दर्शा दी गई। दो दिन में चार गुना बढ़ा बिल शशि वाजपेयी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि बिजली कंपनी ने बिना स्पष्ट सहमति के उनका पुराना मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर स्थापित कर दिया। विरोध के बाद पुराना मीटर दोबारा लगाया गया, लेकिन इसका सही रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया। आयोग ने माना कि एक ही माह में दो अलग बिल जारी करना और शिकायत के बावजूद सुधार न करना सेवा में कमी है। आयोग ने मानी कमी आयोग ने कंपनी को 45 दिनों में वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल जारी करने के आदेश दिए। साथ ही 2,000 रुपए मानसिक क्षति और 2,000 रुपए वाद व्यय देने के निर्देश दिए। स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ता विवाद शहर में अब तक करीब 23 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि इनसे बिजली बिल बढ़ रहा है। विरोध के चलते फिलहाल स्मार्ट मीटर लगाने का काम रोक दिया गया है। ये स्थिति केवल ग्वालियर शहर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में बनी हुई है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद लगातार दो-तीन गुना बिल बढ़ने की शिकायतें बिजली विभाग तक पहुंच रही हैं।

साय सरकार की सौगात: घरेलू उपभोक्ताओं को दोगुना बिजली रियायत का लाभ

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य के घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल में रियायत देने के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (M-URJA) – राज्य के घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत देने के लिए मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान राज्य में 01 दिसम्बर 2025 से लागू है, जिसके तहत घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 100 यूनिट से बढ़ाकर अब 200 यूनिट प्रति माह तक बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा। यह लाभ 400 यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। राज्य में 200 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को अगले एक वर्ष तक 200 यूनिट तक, बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा, इससे 6 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, ताकि इस अवधि में वे अपने घरों में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित करा सके। इस तरह मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान से प्रदेश के 42 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना का लाभ प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को मिलेगा। गौरतलब है कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य शासन की ओर से सब्सिडी दी जा रही है, जिसके तहत 1 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 15,000 रुपये तथा 2 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर 30,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। यह व्यवस्था राज्य में सौर ऊर्जा अपनाने को प्रोत्साहित करेगी और आने वाले समय में उपभोक्ताओं को हाफ बिजली से फ्री बिजली की ओर ले जाएगी। छत्तीसगढ़ भण्डार क्रय नियम, 2002 में स्थानीय लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों से क्रय को प्रोत्साहन देने तथा जेम पोर्टल में क्रय की स्पष्टता के लिए संशोधन किए जाने का निर्णय लिया गया। इन संशोधन से क्रय प्रक्रिया का सरलीकरण होगा, पारदर्शिता में वृद्धि होगी, प्रतिस्पर्धा को बढा़वा मिलेगा तथा समय और संसाधनों की बचत होगी। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना (नियोजन एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 2017 (क्र. 21 सन् 2018) में संशोधन हेतु छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के रिफॉर्म्स और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।