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चंडीगढ़ में बिजली बिलों को लेकर नया नियम लागू

चंडीगढ़. चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) ने शहर के घरेलू और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिलिंग चक्र में बड़ा बदलाव करते हुए अब हर महीने बिल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 19 जनवरी से प्रभावी इस फैसले के साथ लंबे समय से चली आ रही द्वि-मासिक (दो महीने में एक बार) बिलिंग प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) के दिशा-निर्देशों के तहत लिए गए इस निर्णय का उद्देश्य उपभोक्ताओं को एक साथ भारी बिलों के बोझ से बचाना और बिलिंग प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाना है। कंपनी का मानना है कि अब निवासी हर महीने मीटर रीडिंग और खपत का सटीक हिसाब रख सकेंगे। इससे घरेलू बजट बिगड़ने का जोखिम कम होगा। सीपीडीएल के अनुसार यह बदलाव बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और नई तकनीक को अपनाने का हिस्सा है। इस प्रणाली से न केवल मीटर रीडिंग में शुद्धता आएगी, बल्कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा। कंपनी ने स्पष्ट किया कि मासिक बिलिंग से उपभोक्ताओं को बिल भुगतान में सुविधा होगी और वे मोबाइल के माध्यम से भी डुप्लीकेट बिल प्राप्त कर सकेंगे। व्हाट्सएप नंबर 9240216666 पर करें बिजली संबंधी शिकायत बिजली से संबंधित किसी भी जानकारी या शिकायत के लिए 24 घंटे संचालित कॉल सेंटर नंबर 19121 या व्हाट्सएप नंबर 9240216666 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा, सीपीडीएल ऐप और वेबसाइट के माध्यम से भी सेवाएं ली जा सकती हैं। शहर में स्थित 14 शिकायत केंद्र और 10 सब-डिवीजन कार्यालय भी उपभोक्ताओं की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। कंपनी ने लोगों को सतर्क किया है कि वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। सीपीडीएल ने इस सुधार के माध्यम से चंडीगढ़ में बिजली वितरण प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाने का दावा किया है।

MP में बिजली बिल पर बड़ा बदलाव: KW की जगह KVA से तय होगा बिल, उपभोक्ताओं को होगा 15% अधिक खर्च

भोपाल  मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा झटका तय माना जा रहा है। प्रदेश में अब बिजली बिल किलोवाट (KW) नहीं बल्कि किलो-वोल्ट एम्पीयर (KVA) के आधार पर वसूले जाने की तैयारी है। मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने यह प्रस्ताव 2026-27 के टैरिफ प्लान के तहत मप्र विद्युत नियामक आयोग को भेज दिया है। मध्य प्रदेश में बिजली बिल बनाने का तरीके में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब तक जहां बिल किलोवाट के आधार पर बनाए जाते थे, लेकिन 2026 से इसे किलोवोल्ट एंपियर यानी केवीए के आधार पर बनाया जाएगा. यह फैसला मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने लिया है और इसे 2026-27 के प्रस्तावित टैरिफ में शामिल किया गया है. इसका सीधा असर मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर देखने को मिल सकता है. मिली जानकारी के मुताबिक, अकेले भोपाल में 33 हजार से ज्यादा उपभोक्ता इसके दायरे में हैं, जिनका बिजली बिल में 15 फीसदी तक इजाफा हो सकता है.  किलोवोल्ट एम्पियर के आधार पर बिलिंग को आसान भाषा में समझा जाए, तो यह केवल इस्तेमाल की गई बिजली ही नहीं बल्कि सप्लाई के दौरान होने वाली तकनीकी नुकसान को भी जोड़कर बिजली बनाती है. अभी तक किलोवाट में सिर्फ वास्तविक खपत ही दिखाई जाती थी, लेकिन किलोवोल्ट एम्पियर में वायरिंग, ट्रांसफार्मर और उपकरणों से होने वाला लॉस भी शामिल होगा. शुरुआत में यह व्यवस्था हाईटेंशन यानी एचटी उपभोक्ताओं पर लागू होगी, बाद में अन्य उपभोक्ताओं को भी इसमें शामिल किया जा सकता है. ऐसे काम करेगा ये सिस्टम बिजली कंपनी की तरफ से कहा गया है कि पिछले 15 सालों में लाइन लॉस घटाने के लिए भोपाल में करीब तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. नई लाइनें बिछाने, एचवीडीएस सिस्टम, फीडर सेपरेशन और सब-स्टेशन की क्षमता बढ़ाने जैसे काम किए गए. अब जो औसतन 15 प्रतिशत तकनीकी नुकसान है, वह नए बिलिंग सिस्टम में सीधे उपभोक्ता के बिल में जुड़ जाएगा. यानी अब यह खर्च कंपनी की जगह उपभोक्ता की जेब से जाएगा. इन लोगों को होगा फायदा आगे बताया कि इस नई व्यवस्था में उन उपभोक्ताओं को फायदा होगा, जिनकी वायरिंग, ट्रांसफार्मर और बिजली उपकरण अच्छे और आधुनिक हैं. ऐसे मामलों में केवीए और किलोवाट लगभग बराबर रहेगा और बिल में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. लेकिन जिन जगहों पर पुरानी वायरिंग, पुराने मोटर या खराब पावर फैक्टर वाले उपकरण लगे हैं, वहां लॉस ज्यादा होगा. इसका सीधा असर बिल पर पड़ेगा और रकम पहले से ज्यादा चुकानी होगी. ग्रिड ज्यादा मजबूत बनेगा बिजली कंपनी का कहना है कि किलोवोल्ट एम्पियर पर बिलिंग से सिस्टम पर दबाव कम होगा, लाइन लॉस घटेगा और ग्रिड ज्यादा मजबूत बनेगा. साथ ही उपभोक्ताओं को भी तकनीकी रूप से जिम्मेदार बनाया जा सकेगा. इस बदलाव का मकसद पावर फैक्टर सुधारना, अनावश्यक बिजली खपत रोकना और सप्लाई को ज्यादा कुशल बनाना है. हालांकि आम उपभोक्ताओं के लिए यह बदलाव समझना और अपनाना आसान नहीं होगा, लेकिन आने वाले समय में यही नया नियम बनाए जा सकते हैं.   अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो हजारों उपभोक्ताओं का बिजली बिल 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। क्या है पूरा मामला? अब तक बिजली बिल केवल वास्तविक खपत यानी KW के आधार पर बनता था, लेकिन KVA आधारित बिलिंग में उपभोक्ताओं से न सिर्फ इस्तेमाल की गई बिजली बल्कि तकनीकी नुकसान (लाइन लॉस, खराब पावर फैक्टर) का पैसा भी वसूला जाएगा। यानी जितनी बिजली सप्लाई होगी, उसका पूरा हिसाब अब उपभोक्ता के बिल में जुड़ेगा। सबसे पहले किन पर पड़ेगा असर? शुरुआत HT (हाई टेंशन) उपभोक्ताओं से होगी अकेले भोपाल जिले में करीब 33 हजार HT उपभोक्ता इसकी जद में बड़े उद्योग, संस्थान और कॉर्पोरेट उपभोक्ता होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित आगे चलकर आम उपभोक्ताओं पर भी लागू हो सकती है व्यवस्था क्यों बढ़ेगा बिजली बिल? पुरानी वायरिंग जर्जर ट्रांसफार्मर पुराने विद्युत उपकरण खराब पावर फैक्टर इन वजहों से KW और KVA का अंतर बढ़ेगा, और यही अंतर सीधे बिल को भारी बना देगा। पहले ही खर्च हो चुके हैं 3000 करोड़! भोपाल में तकनीकी नुकसान कम करने के लिए पिछले 15 सालों में करीब 3000 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। HVDs सिस्टम नई लाइनें फीडर सेपरेशन ट्रांसफार्मर व सब-स्टेशन क्षमता बढ़ाना इसके बावजूद आज भी औसतन 15% तकनीकी लॉस बना हुआ है, जिसका बोझ अब उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा। किसे मिलेगी राहत? जिनके यहां नई वायरिंग है आधुनिक मशीनें और उपकरण हैं पावर फैक्टर बेहतर है ऐसे उपभोक्ताओं के लिए KW और KVA लगभग बराबर रहेगा और बिल में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। बिजली कंपनी को क्या फायदा? लाइन लॉस में कमी ट्रांसफार्मर पर दबाव कम ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ेगी सिस्टम ज्यादा कुशल बनेगा KVA बिलिंग का असली उद्देश्य पावर फैक्टर सुधारना अनावश्यक लोड घटाना बिजली आपूर्ति को स्मार्ट बनाना उपभोक्ताओं को तकनीकी रूप से जिम्मेदार बनाना MP में बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में बिजली सिर्फ रोशनी नहीं, बड़ा खर्च भी बन सकती है। सतर्क उपभोक्ता राहत में रहेंगे, जबकि लापरवाही सीधे जेब पर भारी पड़ेगी।

मध्यप्रदेश में 2026-27 के लिए प्रस्तावित टैरिफ, नए साल से बिजली बिल में 15% की बढ़ोतरी

भोपाल  नए साल में शहर के 33 हजार से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का झटका लगेगा। बिजली कंपनी ने बिलिंग फार्मूले में परिवर्तन करते हुए किलोवॉट की जगह किलो वोल्ट एम्पियर से बिलिंग का फार्मूला लागू करने का फैसला लिया है। इसके असर यह होगा कि अनुपयोगी बिजली का बिल बनेगा और उपभोक्ता से इसकी वसूली की जाएगी। इसका सबसे ज्यादा असर बड़े संस्थान, उद्योग उपभोक्ताओं पर आएगा। इससे इनका बिजली बिल पंद्रह फीसदी तक बढ़ जाएगा। बिजली दर बढ़ाने का या पिछले दरवाजे का रास्ता है। मप्र विद्युत नियामक आयोग को कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित टैरिफ में इसे प्रस्तावित किया है। केवीए को प्रकट शक्ति यानी अपेरेंट पावर भी कहते हैं। ये सप्लाई की गई कुल बिजली है। प्रस्ताव आयोग को दिया कंपनी ने अपना एआरआर प्रस्ताव आयोग को दिया है। इसमें तमाम तरह के प्रस्ताव है। आयोग के निर्णय के आधार पर ही दर और तरीका तय होगा। – क्षितिज सिंघल, एमडी, मध्यक्षेत्र ऐसे समझें पूरा हिसाब बिजली का बिल किलोवॉट की बजाय किलो वोल्ट एम्पीयर के आधार पर बनाना तय किया जा रहा है। किलोवॉट बिजली की वास्तविक खपत को बताता है, जबकि किलो-वोल्ट एम्पीयर लॉस वाली बिजली का भी आंकलन करता है। यदि पुराने उपकरण, वायरिंग से परिसर में बिजली का तकनीकी हानि होती है तो वह भी उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ जाएगी। अभी एचटी उपभोक्ताओं के बिल इससे बनेंगे, धीरे-धीरे अन्य उपभोक्ताओं तक भी इसे बढ़ाएंगे। जिले में फिलहाल 33000 एचटी उपभोक्ता इसके दायरे में रहेंगे। बिजली कंपनी को ये लाभ लाइन लॉस कम। ट्रांसफॉर्मर व केबल पर कम दबाव। सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ेगी। बिल केवीए पर शिफ्ट इसका उद्देश्य है पावर फैक्टर सुधारना। ग्रिड पर अनावश्यक लोड कम करना। बिजली आपूर्ति को अधिक कुशल बनाना। उपभोक्ता को तकनीकी रूप से जिम्मेदार बनाना। जिले में बिजली लाइन के तकनीकी लॉस को घटाने 15 साल में 3000 करोड़ खर्च कर चुके हैं। इससे एचवीडीएस सिस्टम विकसित करने से लेकर नई लाइन बिछाने, फीडर सेपरेशन समेत ट्रांसफार्मर – सब स्टेशन की क्षमता वृद्धि तक की गई। ये औसत 15 फीसदी है जो बिलिंग सिस्टम बदलने से ग्राहक की जेब पर शिफ्ट हो जाएगा। लापरवाही से बढ़ेगा बिल केवीए आधार पर बिलिंग से वही उपभोक्ता लाभ में रहेंगे जो सही तरीके से बिजली का उपयोग करेंगे। लापरवाही करने वालों का बिल बढ़ेगा। यदि किसी परिसर में बिजली आपूर्ति करने वाला ट्रांसफार्मर, वायरिंग, उपकरण नए व बेहतर है तो किलोवॉट व केवीए एक समान रहेंगे। यहां बिल में अंतर नहीं होगा। जहां पुराने उपकरण, पुरानी वायरिंग है वहां बिजली का पॉवर फैक्टर खराब होगा। केवीए और किलोवॉट में अंतर होगा। इससे बिल बढ़ेगा। बीएमसी ने नहीं भरा बिजली बिल, बिजली कटी राजधानी के कोटरा क्षेत्र स्थित पीएम आवास योजना के गंगानगर में निगम न बिल का भुगतान नहीं करने से बिजली कंपनी ने कनेक्शन काट दिया। इससे रविवार को ब्लॉक सी-1 और सी-3 की लिफ्ट 10 घंटे तक बंद रहीं। नौ मंजिला इमारत में रहने वाले रहवासियों, विशेषकर जैसे बने रहे। रहवासियों के बुजुर्ग और मरीज दिनभर बंधक अनुसार रविवार 12 बजे अचानक लिफ्ट बंद हो गई। जब लिफ्ट मेंटेनेंस स्टाफ से संपर्क किया तो पता चला कि बिजली बिल बकाया होने से सप्लाई काट दी है। काफी हंगामे और अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद शाम 6 बजे बिजली बहाल हुई। ब्लॉक सी-1 के फ्लैट नंबर 602 में रहने वाले 62 वर्षीय परशुराम कुम्हरे ने बताया कि उनकी पत्नी की हाल ही में सर्जरी हुई है। लिफ्ट बंद होने से पत्नी को सीढ़ियों से ले जाने में भारी दिक्कतें हुई। इस मामले में नगर निगम के अपर आयुक्त तन्मय शर्मा का कहना है कि मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं आया है। इसकी जांच कराई जाएगी और नियमानुसार रहवासियों को सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी

बिजली-बीज बिल के ऐलान से किसानों में उबाल, सरकार को दी सख्त चेतावनी

अमृतसर केंद्र की सरकार द्वारा चल रहे सांसद सेशन में बिजली बिल 2025 और बीज बिल 2025 लाने की घोषणा विरुद्ध संयुक्त किसान मोर्चे द्वारा इसका डटकर विरोध करने के लिए व्यापक कार्यक्रम तैयार किया है। इसके तहत अमृतसर जिले के दो दर्जन से अधिक किसानों, ग्रामीण/कृषि श्रमिकों, कर्मचारियों, बिजली कर्मचारी संगठनों व ट्रेड यूनियनों ने भाग लिया और किसान नेता बघेल सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। संयुक्त किसान मोर्चा के निर्णय के अनुसार यह चेतावनी दी गई है कि जिस दिन संसद में बिजली संशोधन बिल 2025 और बीज संशोधन बिल 2025 प्रस्तुत किए जाएंगे और चारों श्रम-विरोधी कानूनों को निरस्त करवाने के लिए अगले दिन दोपहर 12 से 3 बजे तक ट्रेनें रोकी जाएंगी व 16 जनवरी को एस.ई. बिजली बोर्ड के कार्यालय के सामने विशाल धरने लगाए जाएंगे और गांवों, कस्बों और शहरों में सभाएं आयोजित की जाएंगी, साथ ही मोटरसाइकिल/ट्रैक्टर मार्च निकालकर संघर्ष को तेज किया जाएगा और जन समर्थन जुटाया जाएगा। इस मौके पर डा. सतनाम सिंह अजनाला, जतिंदर सिंह छीना, सुच्चा सिंह अजनाला, धनवंत सिंह खतराए कलां, सविंदर सिंह मीरां कोट, लखबीर सिंह निजामपुर, गुरदेव सिंह वरपाल, जोगिंदर सिंह बदेशा, बलबीर सिंह मुधल, नरिंदर कुमार बल, कुलदीप सिंह उदोके, सैमुअल हंस आदि मौजूद थे। 

बिजली बिल जमा करना हुआ आसान, पोस्ट ऑफिस और IPPB में मिलेगी सुविधा बिना अतिरिक्त चार्ज

भोपाल  मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड अपने उपभोक्ताओं के लिए कई तरह की फायदेमंद स्कीम और सुविधाएँ उपलब्ध कराती है, इसी क्रम में अब बिजली बिल भुगतान को लेकर कंपनी ने एक नई सुविधा उपलब्ध कराई है, विशेष बात ये है कि इसमें कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को डाकघरों और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के अधिकृत प्रतिनिधि (डाकिये) के माध्‍यम से बिना किसी अतिरिक्‍त शुल्‍क के बिजली बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराई गयी है। पोस्ट ऑफिस में भी होगा बिजली बिल भुगतान  कंपनी ने कहा अब बिजली उपभोक्‍ताओं को यह सरल और सुलभ भुगतान की सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नजदीकी डाकघर में मिलना शुरू हो गई है। डिजिटल और सुरक्षित तरीके से डाकघर के माध्‍यम से बिल भुगतान की सुविधा शहरी क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी उपलब्‍ध है। गौरतलब है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को दी जा रही सेवाओं का विस्तार करते हुए बिल भुगतान की व्यवस्था को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाते हुए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के माध्‍यम से बिजली बिल भुगतान की विशेष सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए एक समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किया गया है। नहीं लगेगा कोई अतिरिक्त चार्ज  इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के सहायता प्राप्त चैनलों के माध्यम से बिजली बिल संग्रहण को सक्षम बनाते हुए बिजली उपभोक्‍ताओं को बिना अतिरिक्‍त प्‍लेटफॉर्म चार्ज के बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराना है। अब बिजली उपभोक्ता इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के विस्तृत नेटवर्क और डाकिया/ग्रामीण डाक सेवक की सहायता से भी अपने घर के पास या घर बैठे ही आसानी से बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में बिजली बिल भुगतान की सुविधा शुरू

भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को डाकघरों और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के अधिकृत प्रतिनिधि (डाकिये) के माध्‍यम से बिना किसी अतिरिक्‍त शुल्‍क के बिजली बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराई गयी है। अब बिजली उपभोक्‍ताओं को यह सरल और सुलभ भुगतान की सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नजदीकी डाकघर में मिलना शुरू हो गई है। डिजिटल और सुरक्षित तरीके से डाकघर के माध्‍यम से बिल भुगतान की सुविधा शहरी क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी उपलब्‍ध है। गौरतलब है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को प्रदत्त सेवाओं का विस्तार करते हुए बिल भुगतान की व्यवस्था को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाते हुए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के माध्‍यम से बिजली बिल भुगतान की विशेष सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए एक समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किया गया है। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के सहायता प्राप्त चैनलों के माध्यम से बिजली बिल संग्रहण को सक्षम बनाते हुए बिजली उपभोक्‍ताओं को बिना अतिरिक्‍त प्‍लेटफॉर्म चार्ज के बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराना है। अब बिजली उपभोक्ता इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के विस्तृत नेटवर्क और डाकिया/ग्रामीण डाक सेवक की सहायता से भी अपने घर के पास या घर बैठे ही आसानी से बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे।