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इंदौर में ED का बड़ा कदम: पूर्व नगर निगम अधिकारी की करोड़ों की संपत्ति कुर्क

इंदौर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नगर निगम के पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज 1 करोड़ 6 लाख रुपये की अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत की गई है। कुर्क की गई संपत्तियों में एक आवासीय मकान, एक प्लॉट, एक फ्लैट और कृषि भूमि शामिल है। ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर ईडी ने बताया कि यह जांच भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत राजेश परमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अपने और परिवार के नाम पर अर्जित की। घोषित आय से 175 प्रतिशत अधिक संपत्ति जांच में सामने आया कि वर्ष 2007 से 2022 के बीच परमार ने करीब 1 करोड़ 66 लाख रुपये की संपत्ति जुटाई। यह राशि उनकी घोषित आय से लगभग 175 प्रतिशत अधिक बताई गई है। ईडी ने अपनी जांच में करीब 1 करोड़ 21 लाख रुपये को संदिग्ध और अवैध आय माना है। दस्तावेज पेश नहीं कर सके परमार जांच एजेंसी के अनुसार परमार और उनके परिवार के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा किया गया। यह राशि अलग-अलग खातों के माध्यम से जमा कर बाद में संपत्तियों की खरीद में उपयोग की गई। ईडी का कहना है कि पूछताछ के दौरान परमार इन संपत्तियों के लिए इस्तेमाल किए गए धन के वैध स्रोत से जुड़े ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके।

IWL के नाम से फर्जी परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट का खुलासा, 226 करोड़ के टेंडर में धोखाधड़ी पर EOW का केस

जबलपुर जबलपुर स्थित एमपी पावर ट्रांसमिशन कंपनी से ठेका प्राप्त करने के लिए कैलाश देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 226 करोड़ रुपये के ठेके हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए थे। जांच के बाद EOW ने संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया। EOW से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कैलाश देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के संचालकगण द्वारा वर्ष 2016 से 2020 तक फर्जी दस्तावेज़ पेश कर ठेके प्राप्त करने की शिकायत मिली थी। जांच में पाया गया कि एमपी पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के कुल 20 ठेके प्राप्त किए गए थे, जिनमें से तीन ठेकों के लिए कंपनी ने नोएडा स्थित एक कंपनी के परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट पेश किए थे। फर्जी परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट से लिया था 226 करोड़ का काम जानकारी के मुताबिक हाथीताल निवासी कैलाश देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध संचालक कैलाश शुक्ला ने अपने परिवारजनों के साथ मिलकर नोएडा की इनॉक्सविंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस लिमिटेड के नाम से कूटरचित परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट तैयार करवाया। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर कंपनी ने हाईटेंशन लाइनों और 220 केवी सब स्टेशन के निर्माण के लिए मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड से 226 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल कर लिए। EOW की जांच में खुलासा शिकायत मिलने पर एसपी EOW अनिल विश्वकर्मा के निर्देश पर जब जांच शुरू हुई तो पता चला कि इनॉक्सविंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस लिमिटेड ने ऐसा कोई परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया था। EOW की टीम फिर नोएडा स्थित कंपनी के कॉर्पोरेट ऑफिस पहुंची, जहां से स्पष्ट रूप से बताया गया कि उनके द्वारा ऐसा कोई दस्तावेज जारी नहीं किया गया है। इन टेंडरों में किया गया था फर्जीवाड़ा कंपनी ने 2 मार्च 2017 को कूटरचित सर्टिफिकेट लगाकर पावर ट्रांसमिशन कंपनी से टीआर-36/16, टीआर-13/20 और टीआर-35/20 के टेंडर प्राप्त किए थे। सभी टेंडर उच्च क्षमता के सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन निर्माण से जुड़े थे। कंपनी संचालकों पर FIR दर्ज जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने पर EOW ने कैलाश कुमार शुक्ला प्रबंध संचालक देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सीमा शुक्ला और भानू शुक्ला डायरेक्टर के खिलाफ धारा 34, 420, 465, 468, 471, 120-बी के तहत अपराध क्रमांक 156/2025 पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी गई है। 226 करोड़ का घोटाला यह 226 करोड़ का घोटाला है। EOW आगे वित्तीय लेन-देन एवं फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने की साजिश का भी पता लगा रही है। मामला सामने आने के बाद ऊर्जा व ट्रांसमिशन क्षेत्र में बड़ी हलचल मच गई है। इनॉक्स विंड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस लिमिटेड, नोएडा ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा देवबिल्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को कोई परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। कंपनी ने ठेके प्राप्त करने के लिए कूटरचित परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट पेश किए थे। हाईटेंशन लाइन व सब-स्टेशन बनाती है कंपनी प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कंपनी हाईटेंशन लाइनों और सब-स्टेशनों का निर्माण करती है। फर्जी परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट का उपयोग करके कंपनी ने 220 केवी के सब-स्टेशन निर्माण सहित दो अन्य ठेके प्राप्त किए थे। तीनों ठेकों की कुल राशि 226 करोड़ रुपये थी, जो निर्धारित दरों से कम पर हासिल किए गए थे। EOW ने जांच के बाद कैलाश कुमार शुक्ला (प्रबंध संचालक, कैलाश देवबिल्ड इंडिया प्रा. लि.), सीमा शुक्ला (डायरेक्टर) और भानू शुक्ला (डायरेक्टर), निवासी हाथीताल कॉलोनी, को आरोपी बनाया है। 

EOW की एंट्री: रतलाम में करोड़ों के स्विमिंग पूल की लीज सिर्फ ₹1.5 लाख, टेंडर गड़बड़ी की जांच शुरू

रतलाम   करोड़ों रुपए की लागत से बने तरण ताल को ओने पौने दाम पर ठेके पर देने की शिकायत की जांच के लिए ईओडब्ल्यू की टीम रतलाम पहुंची है. टीम ने यहां टेंडर से संबंधित दस्तावेज और तरण ताल पहुंचकर फिजिकल वेरिफिकेशन किया है. EOW में की गई शिकायत के अनुसार रतलाम नगर निगम ने इस तरणताल को बेहद कम दरों पर चलाने के लिए एक निजी फर्म को दिया गया है. इसकी टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और नगर निगम को हुए आर्थिक नुकसान की जांच के EOW उज्जैन की टीम पहुंची है. क्या है स्विमिंग पूल में गड़बड़ी का मामला? 8 साल पहले बनकर तैयार हुए इस तरणताल को शुरू होने में लंबा वक्त लग गया, जिसके बाद जैसे तैसे नगर निगम ने इसका संचालन शुरू किया था लेकिन एक हादसे में 12 वर्षीय बालक की डूब कर हुई मौत के बाद ये स्विमिंग पूल बंद ही पड़ा हुआ था. इसके बाद इस वर्ष की शुरुआत में दिल्ली की एक निजी फॉर्म को 12,हजार 600 रुपए प्रति माह की दर पर 10 वर्षों के लिए इसे लीज पर दिया गया है. जिसकी शिकायत ईओडब्ल्यू उज्जैन को की गई थी. नगर निगम को हुआ 3 करोड़ का नुकसान शिकायत में बताया गया था कि करीब 3 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान रतलाम नगर निगम और शासन को हुआ है. इसके बाद इस मामले की जांच के लिए ईओडब्ल्यू की टीम के निरीक्षक रामनिवास यादव और लोकेंद्र सिंह ने नगर निगम पहुंचकर टेंडर से संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए. शास्त्री नगर स्थित स्विमिंग पूल पहुंचकर टीम ने इसका निरीक्षण भी किया. इस दौरान नगर निगम के कर्मचारी और सब इंजीनियर से भी पूछताछ की गई. ईओडब्ल्यू उज्जैन के निरीक्षक रामनिवास यादव ने बताया कि कम दरों पर टेंडर देने की शिकायत की जांच की जा रही है. टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत तरण ताल को कम दाम पर ठेके पर देने की शिकायत स्थानीय स्विमिंग पूल संचालक द्वारा की गई है. शिकायत में उनके द्वारा नगर निगम पर पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं करने और महज डेढ़ लाख रुपए प्रति वर्ष की दर पर निजी फॉर्म को लाभ पहुंचते हुए स्विमिंग पूल देने की बात कही गई है. इस मामले में पहले तो करोड़ों रुपए की लागत से बने तरण ताल का लंबे समय तक संचालन ही नहीं किया गया, जिसके बाद अब निजी फर्म को दिए गए टेंडर पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. वर्तमान में निजी फर्म द्वारा मेंटेनेंस के चलते स्विमिंग पूल का संचालन नहीं किया जा रहा है. वहीं, इस मामले को लेकर ईओडबल्यू उज्जैन के निरीक्षक रामनिवास यादव ने कहा, '' नगर नगम टेंडर से लीज पर दिए गए स्विमिंग पूल को लेकर शिकायत आई थी. टेंडर प्रक्रिया को लेकर गड़बड़ी की शिकायत मिली थी, जिसकी जांच की जा रही है.''  

EOW का बड़ा खुलासा — पूर्व IAS अनिल टूटेजा पर कस्टम मिलिंग घोटाले की साजिश का आरोप, 1500 पेज की चार्जशीट दाखिल

रायपुर कस्टम मिलिंग घोटाला मामले में ईओडब्ल्यू ने सोमवार को विशेष कोर्ट में सेवानिवृत्त आइएएस अनिल टुटेजा और होटल कारोबारी अनवर ढेबर के खिलाफ करीब 1500 पन्नों का पूरक चालान पेश किया। दोनाें आरोपित फिलहाल रायपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं। इससे पहले जांच एजेंसी ने फरवरी 2025 में राइस मिल एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रहे रोशन चंद्राकर और मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी के खिलाफ प्रथम चालान प्रस्तुत किया था। ईओडब्ल्यू ने पूरक चालान में अनिल टुटेजा पर प्रदेश राइस मिलर एसोसिएशन के पदाधिकारियाें के साथ मिलकर प्रारंभ से आपराधिक षडयंत्रपूर्वक कस्टम मिलिंग घोटाले को अंजाम देने का आरोप लगाया है। ईओडब्ल्यू की ओर से पेश किए गए चालान में कहा गया कि राइस मिलराें से अवैध वसूली कर 20 करोड़ रूपये प्राप्त किया गया है। राइस मिलरों से अवैध वसूली करने मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारियाें पर दबाव बनाकर राइस मिलरों का बिल लंबित रखा जाता था। दबाव में आकर मिलर 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अवैध रकम देते थे। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में प्रभावशाली रहे अनवर ढेबर ने वर्ष 2022-23 में जमकर मनमाने काम किए। आयकर विभाग के छापे के दौरान प्राप्त डिजिटल सबूतों से इस बात के प्रमाण मिले हैं कि वह न केवल शराब घोटाले बल्कि पीडब्ल्यूडी, वन विभाग पर भी गहरा व प्रत्यक्ष प्रभाव डालते थे। अनवर ढेबर के द्वारा कस्टम मिलिंग घोटाले में अनिल टुटेजा के लिए राइस मिलराें से की गई अवैध वसूली का संग्रहण, खर्च और निवेश का उपभोग किया था। घोटाले में शामिल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल एवं अन्य आरोपितों के विरूद्ध विवेचना जारी है। जनवरी 2024 को ईओडब्ल्यू ने दर्ज की थी FIR ईडी के बाद ईओडब्ल्यू ने कस्टम मिलिंग घोटाले में 29 जनवरी 2024 को पहली एफआइआर दर्ज की। इसमें रोशन चंद्राकर, मनोज सोनी, सेवानिवृत्त आइएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, सिद्धार्थ सिंघानिया, कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल आदि के नाम शामिल हैं। ईओडब्ल्यू की जांच में साफ हुआ कि कस्टम मिलिंग की राशि मिलर्स को देने के नाम पर यह वसूली की गई है। वर्ष 2020-21 से पहले कस्टम मिलिंग के बदले मिलर्स को प्रति क्विंटल 40 रुपये भुगतान किया जाता था। मिलर्स की मांग पर कांग्रेस सरकार ने इस राशि को तीन गुना बढ़ाया। आरोप है कि राइस मिलरों से 140 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध वसूली की गई। इस खेल में अफसरों से लेकर मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी तक शामिल थे। राइस मिल एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रहे रोशन चंद्राकर लेवी वसूलकर अफसरों को जानकारी देते थे। जिनसे मिलरों से रुपये नहीं मिलते उनका भुगतान रोक दिया जाता था।

यूनाइटेड स्पिरिट्स की जमीन पर जांच शुरू, ईओडब्ल्यू ने विजय माल्या से जुड़े मामले को लिया निशाने पर

भोपाल   सहारा समूह की बेशकीमती जमीन के गड़बड़झाले के बाद अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने विजय माल्या के आधिपत्य वाली यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड के जमीन से जुड़े मामले की जांच शुरू की है। रातीबड़ के किसानों ने ईओडब्ल्यू से 20.16 एकड़ जमीन से जुड़े मामले को लेकर शिकायत की थी। ईओडब्ल्यू (EOW) ने माल्या की कंपनी के बेंगलूरु दफ्तर को नोटिस भेजा है। आरोप है कि जमीन विटारी डिस्लरी की है। माल्या की कंपनी अपना बता बेचने का प्रयास कर रही है। प्राथमिक पड़ताल में सामने आया है कि हर्ष पैकेजिंग की ओर से भोपाल की इस जमीन पर कब्जा जताया जा रहा है। दावा है कि उन्होंने जमीन बोली के जरिए खरीदी। बेचने वाली यूनाइटेड स्पिरिट्स खुद इस जमीन का कागजों में मालिकाना हक नहीं रखती। जांच के लिए ईओडब्ल्यू ने हर्ष पैकेजिंग को नोटिस जारी कर किया है। ऐसे समझिए विवाद – 1999 में विटारी डिस्टलरीज ने 20 एकड़ जमीन खरीदी। चार एकड़ में प्लांट और 16 एकड़ में किसान खेती के लिए थी। – मई 2001 में विटारी का माल्या की मैगडॉवल स्पिरिट्स लि. में कोर्ट के जरिए विलय हो गया, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में जमीन विटारी के नाम रही। – 2019 में नामांतरण की फाइल बढ़ाई तो जिला डिप्टी रजिस्ट्रार ने स्टाम्प शुल्क पेनल्टी सहित 3.50 करोड़ तय किए। – 26 मार्च 2023 को कंपनी ने 1.59 स्टाम्प शुल्क जमा किया तो तहसीलदार ने 20 जून 2023 को यूनाइटेड स्पिरिट्स के रिकॉर्ड में दर्ज किया। – 2023 में शुल्क बदलकर 1.59 करोड़ कर दिया। इस पर काफी विवाद हुआ। – किसानों ने कब्जे को लेकर विवाद किया तो 12 जुलाई 2023 को यूनाइटेड स्पिरिट्स का नामांतरण निरस्त कर दिया गया। – 21 अक्टूबर 2024 को तहसीलदार ने फिर से यूनाइटेड स्पिरिट्स का नामांतरण दर्ज कर दिया। बिना रजिस्ट्री के बेचने नियुक्त किए दो प्रतिनिधि जमीन 1999 में विटारी डिस्लरी प्रालि. ने खरीदी। बाद में विलय मेसर्स मैगडॉवल स्पिरिट्स लि. में हो गया। 2006 में केंद्र ने मैगडॉवल से यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमि. कर दिया। रिकॉर्ड में जमीन विटारी के नाम रही। माल्या के प्रतिनिधि गुलाम, राकेश सिन्हा ने कलेक्टर न्यायालय ऑफ स्टाम्प में आवेदन कर नामांतरण का प्रयास किया।

EOW ने पेट्रोल पंप पर दबोचा रिश्वत लेते अधिकारी, मंडला में हंगामा

मंडला जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) अरविंद विश्वकर्मा को रिश्वत लेते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा है। पत्नी के हाथों रुपये का लिफाफा रिलायंस पेट्रोल पंप पर लेते ही दोनों को मौके पर ही ईओडब्ल्यू ने पकड़ कार्रवाई शुरू कर दी। इस मामले में एपीसी को भी सह आरोपित बनाया गया है। डीपीसी ने मांगी थी एक लाख 20 हजार की मदद बताया गया है कि डीपीसी ने विद्या निकेतन ग्राम ककैया स्कूल को मान्यता देने के नाम पर एक लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। जिसके एवज में दूसरी क़िस्त की राशि 60 हजार रुपये स्कूल संचालक द्वारा देते ही ईओडब्ल्यू टीम ने पकड़ लिया। जानकारी अनुसार स्कूल का भवन पूरा नहीं होने से मान्यता समाप्त हो गई थी। दोबारा मांगी गई थी रिश्वत पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए स्कूल संचालक रविकांत नंदा से एक लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी। पहली किश्त 50 हजार रुपये डीपीसी को स्कूल संचालक कुछ दिन पहले दे चुका था। 60 हजार रुपये की मांग पुनः की गई थी। इस पर स्कूल संचालक रविकांत नंदा यह राशि देने बिंझिया स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप पहुंचा। जहां राशि का लिफाफा डीपीसी को देने पर उन्होंने पत्नी को देने कहा। लिफाफा पत्नी के हाथों में आते ही ईओडब्ल्यू ने रंगे हाथों पकड़ लिया। ईओडब्ल्यू डीएसपी स्वर्ण जीत सिंह धामी व टीम के द्वारा पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कार्रवाई की जा रही है।  

EOW ने किया बड़ा खुलासा: फर्जी मुख्तारनामा के जरिए करोड़ों की जमीन हड़पने का प्रयास

भोपाल  आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने राजधानी में जमीन संबंधी एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। आरोपियों ने कूटरचित मुख्तारनामा (Forged Power of Attorney) तैयार कर वास्तविक मालिक की जमीन को धोखाधड़ी से बेच डाला। मामला ग्राम बरखेड़ी कलां, तहसील हुजूर, जिला भोपाल स्थित 0.134 हेक्टेयर (लगभग 0.33 एकड़) भूमि से जुड़ा है। इस जमीन की वास्तविक मालिक मेवल रेबेलो हैं, जो वर्तमान में गोवा में निवासरत हैं। शिकायतकर्ता पीएमके भारद्वाज की रिपोर्ट पर हुई जांच में सामने आया कि आरोपी राहुल शर्मा ने मेवल रेबेलो के नाम से फर्जी मुख्तारनामा तैयार कराया था। पंजीयन क्रमांक, पुस्तक व पृष्ठ संख्या की जांच में यह पाया गया कि जिस क्रमांक का उल्लेख मुख्तारनामे में किया गया था, उस पर वास्तव में सुरैया हसन और मोहम्मद ताहिर के बीच अन्य दस्तावेज दर्ज था। इसके बावजूद आरोपी राहुल शर्मा ने स्वयं को मुख्तारनामा धारक बताते हुए 12 दिसंबर 2024 को विक्रय पत्र तैयार कराया और भूमि को आरोपी नीरज पटेल के नाम बेच दिया। विक्रय पत्र में 71 लाख 72 हजार रुपये का भुगतान दर्शाया गया, जिसमें सात चेक और नकद राशि शामिल थी। लेकिन EOW की जांच में पता चला कि पांच चेक बाउंस हो गए और वास्तविक भुगतान केवल 8 लाख 22 हजार रुपये ही हुआ। बैंक विवरणों से भी यह तथ्य पुष्ट हुआ। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी राहुल शर्मा और नीरज पटेल ने आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए फर्जी दस्तावेज का उपयोग कर जमीन का नामांतरण करा लिया। EOW ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318, 336, 338, 340 सहपठित धारा 61 के तहत अपराध दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी है। 

60 Cr फ्रॉड केस: राज कुंद्रा पर शिकंजा, EOW ने तलब किया

 मुंबई    शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को 60.48 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. पिछले हफ्ते ही मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दोनों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया था. अब इस मामले में मुंबई पुलिस ने एक्शन लेते हुए शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा को समन जारी किया है. जानकारी के मुताबिक, यह मामला 13 अगस्त को दर्ज हुआ था. राज कुंद्रा अब 15 सितंबर (सोमवार) को EOW दफ्तर पहुंचकर बयान दर्ज कराएंगे. EOW के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘बुधवार (10 सितंबर) को राज कुंद्रा को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने अपने प्रतिनिधि के जरिए निवेदन किया कि वे सोमवार (15 सितंबर) को शामिल होंगे.’ क्यों जारी हुआ था लुक आउट सर्कुलर पिछले हफ्ते, EOW ने शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था, क्योंकि यह कपल अक्सर विदेश यात्रा करता है. यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कि जांच के दौरान दोनों मुंबई में उपलब्ध रहें. दीपक कोठारी की शिकायत यह धोखाधड़ी का मामला मुंबई के बिजनेसमैन और लोटस कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज के निदेशक दीपक कोठारी की शिकायत पर आधारित है. बिजनेसमैन दीपक कोठारी ने आरोप लगाया है कि 2015 से 2023 के बीच शिल्पा और राज ने उनके साथ 60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. दीपक का दावा है कि यह राशि कंपनी के विस्तार के लिए ली गई थी, लेकिन इसका इस्तेमाल निजी खर्चों के लिए किया गया. कोठारी का आरोप है कि शिल्पा और राज ने शुरू में 75 करोड़ रुपये का ऋण 12% वार्षिक ब्याज पर मांगा था, लेकिन बाद में टैक्स बचाने के लिए इसे निवेश के रूप में दिखाने की सलाह दी. कोठारी ने अप्रैल 2015 में 31.95 करोड़ रुपये और सितंबर 2015 में 28.53 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जो बेस्ट डील टीवी के बैंक खातों में जमा हुए. लिखित गारंटी और कंपनी से इस्तीफा दीपक कोठारी का कहना है कि अप्रैल 2016 में शिल्पा शेट्टी ने लिखित रूप से व्यक्तिगत गारंटी दी थी कि राशि एक निश्चित समय में 12% ब्याज के साथ लौटाई जाएगी. लेकिन कुछ ही महीनों बाद, सितंबर 2016 में शिल्पा ने कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया. उन्हें बाद में पता चला कि 2017 में कंपनी के खिलाफ 1.28 करोड़ रुपये का एक दिवालियापन मामला भी चल रहा था, जिसके बारे में उन्हें पहले नहीं बताया गया. ईओडब्ल्यू की जांच मामला 10 करोड़ रुपये से अधिक का होने के कारण जुहू पुलिस स्टेशन से ईओडब्ल्यू को ट्रांसफर कर दिया गया. पुलिस ने शिल्पा, राज और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 403 (बेईमानी से संपत्ति का दुरुपयोग), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 34 (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है.

सिवान नगर निगम के ईओ के ठिकानों पर ईओयू की छापेमारी

सिवान नगर निगम के ईओ के ठिकानों पर ईओयू की छापेमारी – ईओयू ने डीए मामले में अनुभूति श्रीवास्तव के तीन ठिकानों पर की छापेमारी – वास्तविक आय से 78.91 प्रतिशत अधिक अवैध आय के मिले प्रमाण – ईओयू के डीआईजी ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में दी जानकारी पटना आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले में सिवान नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) अनुभूति श्रीवास्तव के ठिकानों पर ईओयू ने छापेमारी की। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की अलग-अलग टीमों ने ईओ के उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर के एडेल्को ग्रीन्स स्थित पैतृक आवास, पटना के रूपसपुर थाना के तिलकनगर स्थित अर्पणा मेंशन के फ्लैट नंबर 406-बी एवं 407-बी तथा सिवान नगर कार्यपालक पदाधिकारी कार्यालय समेत अन्य ठिकानों पर सघन छापेमारी की। इस दौरान बड़ी संख्या में निवेश संबंधित दस्तावेजों के अलावा ज्वेलरी, कैश, बैंक खाते समेत अन्य कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनकी जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितने की अवैश संपत्ति बरामद की गई है। यह जानकारी ईओयू के डीआईजी (आर्थिक अपराध) मानवजीत सिंह ढिल्लो ने बुधवार को पुलिस मुख्यालय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी।       डीआईजी ने कहा कि अब तक की जांच में उनके खिलाफ 71 लाख 1 हजार 908 रुपये की अवैध संपत्ति का पता चला है, जो उनके वैद्य आय से 78.91 प्रतिशत अधिक है। जांच में यह बात सामने आई है कि अनुभूति श्रीवास्तव ने सीवान जिला में पदस्थापना के दौरान अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध आय अर्जित की है। इस मामले को लेकर ईओयू में एफआईआर भी दर्ज की गई है। अनुभूति श्रीवास्तव के खिलाफ 31 अगस्त 2021 को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम की धारा 13(1)(बी) के अंतर्गत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। आय से अधिक संपत्ति मामले में उस समय भी इनके खिलाफ हुई कार्रवाई में 230 प्रतिशत अवैध आय का मामला सामने आया था। उस समय जांच में यह पाया गया था कि नवंबर 2013 से सितंबर 2021 के बीच आय के वैध स्रोतों से 1 करोड़ 99 लाख 77 हजार रुपये से अधिक की संपत्ति बरामद की गई थी। इस मामले में उनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र समर्पित किया गया है। यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। निलंबन मुक्त होने के बाद उनकी तैनाती रक्सौल, सहरसा के बाद सीवान में हुई।  मधुबनी का कुख्यात तस्कर हुआ गिरफ्तार डीआईजी ने बताया कि मादक पदार्थों एवं द्रव्यों की तस्करी के मामले में मधुबनी के बिस्फी थाना क्षेत्र का रहने वाला कुख्यात तस्कर प्रभाकर चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे एनसीबी कोलकाता के सहयोग से गिरफ्तार कर जयपुर स्थित केंद्रीय कारा भेजा गया है। प्रभाकर के खिलाफ केंद्रीय वित्त मंत्रालय के स्तर से वारंट जारी किया गया था। वह पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल और बिहार में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में बेहद सक्रिय था। उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। पेपर लीक कांडः तीन महीने में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन आया सामने सिपाही पेपर लीक गिरोह का मुख्य आरोपी राजकिशोर साह को गिरफ्तार कर लिया गया है। केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के पेपर लीक से संबंधित मामले की जांच ईओयू के स्तर से की जा रही है। राजकिशोर अरवल जिला के करपी थाना के बख्तारी गांव का रहने वाला है। उसके बैंक खातों की जांच में पाया गया कि तीन महीने में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आय़ा है। इसमें बड़ा हिस्सा संजीव मुखिया गिरोह को ट्रांसफर हुआ है। इस मामले में दो कोचिंग संचालकों मुकेश सर और चंदन सर का नाम प्रमुखता से सामने आई है। इन दोनों का सत्यापन हो गया है। जल्द इनकी गिरफ्तारी होगी। कुछ अन्य कोचिंग संचालकों के नाम भी सामने आए हैं। सिम बॉक्स मामले में देवघर से हुई गिरफ्तारी ईओयू की साइबर टीम ने सिम बॉक्स मामले में देवघर के पारो थाना क्षेत्र से मुकेश को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले इस मामले में वैशाली से सुल्तान को भी गिरफ्तार किया गया था। उसके साथ मुकेश के काफी चैट और पैसे की लेनदेन से जुड़े साक्ष्य बरामद किए गए हैं। इससे संबंधित काफी साक्ष्य बरामद मिलने के बाद उसकी गिरफ्तारी की गई है। सिम बॉक्स मामले में 21 जुलाई को सबसे पहले सुपौल से हर्षित कुमार को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वैशाली और इससे जुड़ा देवघर का कनेक्शन सामने आने के बाद गिरफ्तारी की गई है। यह जानकारी डीआईजी (साइबर) संजय कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पेट्रोलिंग यूनिट 432 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें 115 वेबसाइटों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। शेष मामलों की जांच जारी है। साइबर से जुड़े मामलों का निपटारा भी बड़ी संख्या में किया जा रहा है।

सहकारिता विभाग में विवाद! शिवेन्द्र देव पांडेय प्रकरण में हाई लेवल जांच की मांग तेज

भोपाल  मध्यप्रदेश सहकारिता विभाग राजपत्रित अधिकारी संघ द्वारा आज माननीय मुख्यमंत्री, माननीय सहकारिता मंत्री, अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन), प्रमुख सचिव (सहकारिता), महानिदेशक (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएँ को ज्ञापन सौंपकर  शिवेन्द्र देव पांडेय, संयुक्त आयुक्त, सहकारिता, सागर संभाग, के विरुद्ध दर्ज प्रकरण की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच की माँग की गई है।  पांडेय को 23 जुलाई 2025 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा कथित भ्रष्टाचार के आरोप में 50 हज़ार रुपये लेने का प्रकरण दर्ज  किया गया था, परंतु 23 जुलाई को न्यायालय द्वारा उन्हें जमानत प्रदान कर दी गई। संघ का कहना है कि यह प्रकरण पूर्व नियोजित, आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने पूर्व में सेवा सहकारी समिति पनवारी में सेल्समैन नियुक्ति हेतु आवेदन दिया था, एवं चूँकि यह उनके अधिकार क्षेत्र का कार्य नहीं रहा अतः नियमानुसार कार्यवाही हेतु श्री पांडेय द्वारा उसे संबंधित जिला कार्यालय में भेजने के निर्देश भी दे दिए गए थे। गौरतलब है कि शिकायत कर्ता के आवेदन में संलग्न समिति का प्रस्ताव अहस्ताक्षरित था तथा समिति द्वारा जारी नहीं किया गया था। संघ का कहना है कि घटना स्थल पर EOW टीम द्वारा प्रकरण दर्ज करने के लिए श्री पांडेय के हाथ के पृष्ठ भाग में जबरदस्ती कर  रकम स्पर्श करायी गई एवं कार्यालय के कुछ कर्मचारियों के साथ जोर ज़बरदस्ती भी की गई जिस पर पुलिस सहित उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई है । सहकारिता विभाग एवं प्रदेश की सहकारी समितियों में ऐसी कार्यवाही से भय एवं आक्रोश का वातावरण व्याप्त है। स्पष्ट है कि यह कार्यवाही षड्यंत्रपूर्वक की गई है।  संघ ने मांग की है कि पांडेय जी की निष्कलंक छवि और उनकी वर्षों की ईमानदार सेवाओं को देखते हुए इस मामले की उच्च स्तरीय, समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और सच्चाई सामने आ सके।