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सहारा निवेशकों के लिए बड़ी खबर! Refund Portal बहाल, करीब 20 लाख पेंडिंग क्लेम की होगी जांच; जानें आवेदन का तरीका

नई दिल्‍ली  सहारा समूह मे अपनी कमाई फंसा चुके लाखों निवेशकों के लिए राहत की खबर है. केंद्र सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल को एक बार फिर एक्टिव कर दिया है. पोर्टल के दोबारा चालू होने से करीब 20 लाख लंबित दावों की जांच शुरू हो गई है. साथ ही अब अन्‍य लोग भी अपना पैसा वापस पाने के लिए ऑनलाइन क्‍लेम कर सकते हैं. यदि आपका भी पैसा सहारा में अटका हुआ है जान लें कि घर बैठे क्लेम कैसे करें और किन-किन दस्‍तावेजों की जरूरत होगी।  सहकारिता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू किए गए इस पोर्टल के जरिए अब तक करीब 42 लाख जमाकर्ताओं को 9,267 करोड़ रुपये की राशि लौटाई जा चुकी है. यह पोर्टल मुख्य रूप से सहारा समूह की चार प्रमुख सोसायटियों, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी के पात्र निवेशकों को रिफंड दिलाने के लिए बनाया गया है।  सहारा रिफंड पोर्टल पर कैसे दर्ज करें क्‍लेम? सहारा रिफंड पोर्टल पर आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद आसान-     सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल (https://mocrefund.crcs.gov.in/depositor/#/home) पर जाएं और लॉगिन करें.     रजिस्ट्रेशन के लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के जरिए सत्यापन पूरा करें.     इसके बाद स्क्रीन पर दिख रहे ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में अपनी सदस्यता संख्या, जमा खाता संख्या और सोसायटी का नाम भरें.     यदि आपने चारों सोसायटियों में पैसा लगाया है, तो सभी दावों को अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही आवेदन फॉर्म में जोड़ें.     अंत में जमा राशि के प्रमाण संबंधी कागजात अपलोड कर फॉर्म सबमिट करें. सबमिट होते ही एक रसीद संख्या मिल जाएगी. आवेदन की 30 दिन में होगी स्‍क्रूटनी ऑनलाइन क्लेम दर्ज होने के बाद सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी. सहारा ग्रुप ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज 30 दिनों के भीतर निवेशक के दावों और दस्तावेजों की स्क्रूटनी करेगी. इसके बाद अगले 15 दिनों में सरकारी तंत्र द्वारा अंतिम मंजूरी दी जाएगी. इस तरह आवेदन की तारीख से कुल 45 दिनों के अंदर आपके दावे के बारे में आपको बता दिया जाएगा. दावा सही पाए जाने पर स्वीकृत रकम सीधे निवेशक के आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।  ये कागज रखें तैयार रिफंड फॉर्म भरते समय किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए जरूरी दस्तावेजों को पहले से स्कैन करके रख लें. क्‍लेम के लिए निवेशक का आधार कार्ड, आधार से लिंक एक्टिव मोबाइल नंबर और आधार से जुड़ा बैंक खाते की जानकारी देनी होगी. सहारा सोसाइटी में पैसा जमा करते समय मिली मूल रसीद, पासबुक या निवेश प्रमाणपत्र (बॉन्ड) आदि भी मांगे जा सकते हैं।  दस्तावेजों में दर्ज सदस्यता संख्या (Membership Number), अकाउंट नंबर और नाम का सही मिलना चाहिए. यदि मूल जमाकर्ता की मृत्यु हो चुकी है, तो कानूनी उत्तराधिकारी या नॉमिनी को संबंधित कानूनी दस्तावेज और मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा. नाम या बैंक विवरण में कोई गलती होने पर रिफंड अटक सकता है, इसलिए पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने से पहले अपने सभी कागजात अच्छी तरह जांच लें।      सहारा रिफंड आवेदनों की दोबारा जांच, लाखों को मिले पैसे।     सीआरसीएस पोर्टल पर आधार-मोबाइल से जमाकर्ता पंजीकरण करें।     फॉर्म भरें, स्कैन कर अपलोड करें, 45 दिन में राशि। किन सोसाइटियों में जमा पैसे वापस मिलेंगे? सहारा की चार कोऑपरेटिव सोसाइटियों के पात्र जमाकर्ताओं को रिफंड दिया जा रहा है. इनमें शामिल है…     स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड     सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड     हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड     सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड क्लेम के समय ठगों से सावधान रिफंड के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक से जुड़ी जानकारी न दें. अगर आपको क्लेम के लिए आवेदन करना है तो इसके लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें, दूसरी फर्जी वेबसाइट से बचकर रहें, वरना आप ठगी के शिकार हो सकते हैं.  सबसे पहले करना होगा रजिस्ट्रेशन     ऑनलाइन क्लेम दर्ज करने के लिए सबसे पहले CRCS रिफंड पोर्टल पर जाएं.     इसके बाद Depositor Registration का विकल्प आएगा, उसपर क्लिक करें.     फिर आधार के आखिर 4 अंक दर्ज करें.     इसके साथ ही आधार से लिंक मोबाइल नंबर भी दर्ज करें.     फिर आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा उससे वेरिफिकेशन पूरा करें.     इसके बाद आप पोर्टल पर क्लेम का प्रोसेस आगे पूरा कर सकते हैं. ऑनलाइन क्लेम कैसे दर्ज करें?     रजिस्ट्रेशन करने के बाद सबसे पहले Depositor CRCS Refund Portal पर लॉगिन करें.     इसके बाद अपनी सहारा सोसाइटी का नाम चुनें.     फिर अकाउंट नंबर, सदस्यता नंबर, रसीद नंबर और जमा राशि की जानकारी भरें.     इसके बाद आप जमा रसीद या फिर पासबुक की स्कैन कॉपी अपलोड करें.     जब आप सारी जानकारी दर्ज कर देंगे तो पोर्टल पर Cliam Request Form तैयार होगा.     इसको डाउनलोड करके प्रिंट करें.     अपनी पासपोर्ट साइज फोटो लगाएं और साइन करें.     50 हजार से ज्यादा क्लेम करने के लिए पैन नंबर दर्ज करें.     इसके बाद आप साइड किए गए Claim Request Form को स्कैन करें और पोर्टल पर अपलोड कर दें.     इसके बाद आवेदन सबमिट कर दें और Claim Request नंबर को अपने पास नोट करके सुरक्षित रखें.      अगर आपके आवेदन में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है तो पैसे 45 दिन में आ जाता है, जिसकी जानकारी आपको SMS के जरिए मिल जाती है. इन चीजों को रखें तैयार सहारा की सोसाइटियों में रिफंड क्लेम करने के लिए पहले कुछ चीजों को तैयार रखें इनमें शामिल है…     सदस्यता नंबर     अकाउंट नंबर     पासबुक या रसीद     जमा प्रमाणपत्र     आधार से लिंक मोबाइल नंबर (OTP के लिए)     आधार से लिंक और DBT एक्टिव बैंक अकाउंट     50 हजार या उससे ज्यादा के क्लेप के लिए PAN कार्ड    

Sahara Refund: सहारा निवेशकों के लिए खुशखबरी: 45 दिन में 10 लाख तक का रिफंड पाने का तरीका

 नई दिल्ली अगर आपने सहारा इंडिया (Sahara India) की किसी स्कीम में पैसा लगाया था और अभी तक आपको रिफंड नहीं मिला है, तो आपके लिए बड़ी राहत की खबर है. अब आप क्लेम कर 10 लाख रुपये तक रिफंड पा सकते हैं.  केंद्र सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल (Sahara Refund Portal) पर फिर से आवेदन करने का मौका दिया है. दरअसल, जिन लोगों ने पहले से ही क्लेम किया हुआ है, लेकिन किसी गलती या दस्तावेज की कमी की वजह से रिफंड नहीं मिला है, वे अब उसे सुधारकर दोबारा जमा कर सकते हैं. इस बीच अब क्लेम की राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक कर दी गई है. पहले ये राशि अधिकतम 50 हजार रुपये थी. आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक 19 नवंबर 2025 से 10 लाख रुपये तक रिफंड की सुविधा शुरू की गई है.  सहारा रिफंड को लेकर बिग अपडेट यानी अब सहारा इंडिया निवेशक 10 लाख रुपये तक के दावों के लिए दोबारा अप्लाई कर सकते हैं. केवल ये ध्यान रखना है कि अगर आपने पहले से क्लेम कर रखा है, तो 45 दिन के बाद री-क्लेम कर सकते हैं. पहले अगर आपके दावे में कोई जानकारी गलत थी, दस्तावेज साफ नहीं थे या बैंक डिटेल में गड़बड़ी थी, तो आप उसे सही करके दोबारा आवेदन कर सकते हैं. यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और इसके लिए आपको CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल पर जाना होगा.  सरकार का कहना है कि सही तरीके से दोबारा जमा किए गए दावों को 45 वर्किंग डे के भीतर जांचकर निपटाया जाएगा. इससे पहले कई लोगों को 50,000 रुपये तक की रकम वापस भी मिल चुकी है. लेकिन जिनके आवेदन में कमी पाई गई थी, उन्हें सुधार करने का मौका दिया जा रहा है. अप्लाई का फुल प्रोसेस आवेदन करते समय ध्यान रखें कि सभी जानकारी सही भरें. आधार नंबर, मोबाइल नंबर और बैंक खाता विवरण बिल्कुल सही होना चाहिए. गलत जानकारी देने पर क्लेम फिर से अटक सकता है. वहीं अगर आपने 50 हजार रुपये तक के लिए क्लेम कर चुके हैं तो 45 दिन के बाद स्टेट्स चेक करें.   रीसबमिशन के लिए पोर्टल (https://mocresubmit.crcs.gov.in/resubmission/#/home) पर जाएं. अगर आपको रीसबमिशन प्रक्रिया में कोई तकनीकी कठिनाई या मदद चाहिए, तो आप पोर्टल के हेल्पडेस्क से सहायता ले सकते हैं. इसके लिए पोर्टल हेल्पलाइन नंबर 011-20909044 और 011-20909045 पर संपर्क कर सकते हैं.  सरकारी अनुमान के मुताबिक सहारा-SEBI खाते में करीब 26,000 करोड़ रुपये जमा है, जिसमें से 5,000 करोड़ रुपये रिफंड के लिए अलग किए गए थे. केंद्र सरकार ने साल 2022 में बताया था कि सहारा इंडिया ग्रुप की कंपनियों में कुल निवेशकों का संख्या करीब 13 करोड़ है, और इन निवेशकों के 1.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक फंसे हुए हैं.  रीसबमिशन से जुड़ी मुख्य बातें फिलहाल,10 लाख रुपये तक के दावों को दोबारा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जारी है। एक बार जब आप अपना क्लेम सही तरीके से दोबारा जमा कर देते हैं, तो इसे 45 वर्किंग डेज के भीतर प्रोसेस कर दिया जाएगा। यह पूरा प्रोसेस डिजिटल और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। अब तक 50000 रुपये तक क्लेम प्रोसेस्ड CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल में जमा किए गए एप्लीकेशन प्रोसेस हो गए हैं और हर एप्लीकेशन पर 50,000 रुपये या उससे कम का पेमेंट उन एलिजिबल डिपॉजिटर्स को किया गया है, जिनके क्लेम वेरिफाई हो सके। जिन डिपॉजिटर्स के क्लेम में कमियों की वजह से वेरिफाई नहीं हो सके, उन्हें “CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल” के जरिए कमी के मैसेज भेजे गए हैं। यह CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल (रीसबमिशन) कमियों को ठीक करने के बाद क्लेम को फिर से जमा करने के लिए शुरू किया गया है। ये डिपॉजिटर्स अपने हर कमी वाले क्लेम की कमियों को ठीक कर सकते हैं और रीसबमिशन पोर्टल के जरिए आगे की प्रोसेसिंग के लिए अपने क्लेम को फिर से जमा कर सकते हैं, जिसे पोर्टल पर लोड को मैनेज करने के लिए धीरे-धीरे कमियों वाले डिपॉजिटर्स के लिए खोला गया है। पोर्टल ऑनलाइन क्लेम दोबारा जमा करने के 45 वर्किंग डेज के अंदर दोबारा जमा किए गए क्लेम को प्रोसेस करेगा। डिपॉजिटर्स से रिक्वेस्ट है कि वे रीसबमिशन एप्लीकेशन फ़ॉर्म में चारों सोसाइटियों से जुड़ी कमियों वाले सभी क्लेम दोबारा जमा करें। केवल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन दोबारा जमा किए गए क्लेम ही माने जाएंगे। इसके लिए आप सीधे इस लिंक पर जा सकते हैं: https://mocresubmit.crcs.gov.in/resubmission/#/home कहां करें संपर्क? अगर आपको किसी तकनीकी सहायता या जानकारी की आवश्यकता हो, तो आप पोर्टल हेल्पडेस्क नंबर 01120909044 और 01120909045 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, समितियों के नंबर 0522 6937100, 0522 3108400, 0522 6931000 और 08069208210 पर भी फोन किया जा सकता है। संपर्क करने का समय सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक, सोमवार से शुक्रवार (केंद्र सरकार की छुट्टियों को छोड़कर) है।

सहारा केस: सिब्बल ने जताई आपत्ति, कहा टुकड़ों में बिक्री से नुकसान; सुप्रीम कोर्ट बोले- देखेंगे!

नई दिल्ली सहारा इंडिया ग्रुप चाहता है कि उसकी प्रॉपर्टीज एक साथ बेच दी जाएं. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान Sahara India Commercial Corporation Ltd (SICCL) ने यही गुहार लगाई. ग्रुप ने विभिन्न संपत्तियों जिनमें अंबी वैली (महाराष्ट्र) और सहारा शहर (लखनऊ) जैसी हाई-वैल्यू प्रॉपर्टीज शामिल हैं, को Adani Properties Pvt Ltd को बेचने की अनुमति मांगी है. कोर्ट ने कहा कि पहले यह तय किया जाएगा कि किन प्रॉपर्टीज पर विवाद है और किन पर नहीं. चीफ जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की बेंच ने केंद्र सरकार, SEBI और अमिकस क्यूरी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी. ‘अंबी वैली’ से ‘सहारा शहर’ तक, 88 प्रॉपर्टीज की सूची, पर कई पर विवाद     सहारा की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि समूह अपनी संपत्तियां बेचकर बकाया राशि चुकाने की योजना बना रहा है. उनके मुताबिक, इन संपत्तियों की वैल्यू लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये है. सिब्बल ने कहा, ‘इनमें 88 प्रॉपर्टीज शामिल हैं. इन्हें एक साथ बेचना जरूरी है. टुकड़ों में बेचने से खरीदार नहीं मिलेंगे.’     SEBI की ओर से कहा गया कि सहारा इन प्रॉपर्टीज को बेच सकता है, बशर्ते बिक्री मार्केट रेट के 90% से कम पर न हो. SEBI ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोर्ट अनुमति देती है, तो उन्हें किसी प्रस्ताव की अलग से जांच करने की आवश्यकता नहीं.     वहीं, एडवोकेट मुकुल रोहतगी, जो Adani Properties Pvt Ltd की ओर से पेश हुए, ने कहा कि कंपनी सभी प्रॉपर्टीज खरीदने को तैयार है. उन्होंने कहा, ‘अगर इसे हिस्सों में बेचा गया तो मुकदमेबाजी कभी खत्म नहीं होगी. हम सब कुछ, सभी क्लेम्स के साथ लेने को तैयार हैं.’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले अधिकार तय करो, फिर बिक्री होगी     सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि फिलहाल किसी बिक्री पर अनुमति देने से पहले सभी पक्षों के अधिकारों को क्रिस्टलाइज करना जरूरी है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘कुछ प्रॉपर्टीज पर कई दावेदार हैं, कुछ पर मुकदमे चल रहे हैं. पहले यह साफ होना चाहिए कि कौन सी प्रॉपर्टी विवादित है और कौन सी नहीं.’     सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन (अमिकस क्यूरी) ने कहा कि कुछ जमीनें ऐसी हैं जिन्हें बेचा ही नहीं जा सकता, क्योंकि वे ‘वेटलैंड्स (जल क्षेत्र)’ हैं. इस पर सीजेआई गवई ने कहा, ‘अगर कोई वेटलैंड खरीदे भी तो वहां निर्माण संभव नहीं होगा.’     कोर्ट ने अमिकस को निर्देश दिया कि वह एक विस्तृत चार्ट तैयार करें, जिसमें यह दर्ज हो कि कौन सी संपत्तियां विवादित हैं, किन पर हक तय हो चुका है, और किन पर ‘शैडो ऑफ डाउट’ है. केंद्र, SEBI और सहारा, तीनों को जवाब दाखिल करने का निर्देश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो केंद्र की ओर से पेश हुए, ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है और सरकार को भी अपनी राय रखने का अवसर मिलना चाहिए. इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि वित्त मंत्रालय (MoF) को भी पार्टी बनाया जाए ताकि केंद्र सरकार इस पर अपना रुख साफ कर सके. सिब्बल ने बताया कि सहारा ने हाल ही में SEBI–Sahara फंड से 500 करोड़ रुपये जारी किए हैं ताकि कुछ कोऑपरेटिव सोसायटीज के भुगतान किए जा सकें. लेकिन अन्य वकीलों ने दावा किया कि अभी भी करीब 9000 करोड़ रुपये का डेफिसिट है. अदालत ने कहा कि सहारा को पहले कर्मचारियों के दावों और बकाया राशि की स्थिति स्पष्ट करनी होगी. ‘एक साथ बिक्री जरूरी’, सिब्बल की दलील, कोर्ट ने कहा ‘देखेंगे’ कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि संपत्तियों को ‘एक बास्केट में’ बेचना ही व्यवहारिक विकल्प है. उन्होंने कहा, ‘अगर एक-एक करके बेचा गया तो निवेशक पीछे हट जाएंगे, जैसा पहले वर्सोवा प्रोजेक्ट में हुआ था.’ जस्टिस गवई ने कहा कि अदालत यह तय करेगी कि प्रॉपर्टीज को एकमुश्त (en bloc) बेचा जाए या अलग-अलग (piecemeal). सीनियर एडवोकेट अरविंद दातर ने सुझाव दिया कि जिन प्रॉपर्टीज पर कोई विवाद नहीं है, उन्हें पहले बेचा जा सकता है और बाकी पर अलग सुनवाई हो.  

यूनाइटेड स्पिरिट्स की जमीन पर जांच शुरू, ईओडब्ल्यू ने विजय माल्या से जुड़े मामले को लिया निशाने पर

भोपाल   सहारा समूह की बेशकीमती जमीन के गड़बड़झाले के बाद अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने विजय माल्या के आधिपत्य वाली यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड के जमीन से जुड़े मामले की जांच शुरू की है। रातीबड़ के किसानों ने ईओडब्ल्यू से 20.16 एकड़ जमीन से जुड़े मामले को लेकर शिकायत की थी। ईओडब्ल्यू (EOW) ने माल्या की कंपनी के बेंगलूरु दफ्तर को नोटिस भेजा है। आरोप है कि जमीन विटारी डिस्लरी की है। माल्या की कंपनी अपना बता बेचने का प्रयास कर रही है। प्राथमिक पड़ताल में सामने आया है कि हर्ष पैकेजिंग की ओर से भोपाल की इस जमीन पर कब्जा जताया जा रहा है। दावा है कि उन्होंने जमीन बोली के जरिए खरीदी। बेचने वाली यूनाइटेड स्पिरिट्स खुद इस जमीन का कागजों में मालिकाना हक नहीं रखती। जांच के लिए ईओडब्ल्यू ने हर्ष पैकेजिंग को नोटिस जारी कर किया है। ऐसे समझिए विवाद – 1999 में विटारी डिस्टलरीज ने 20 एकड़ जमीन खरीदी। चार एकड़ में प्लांट और 16 एकड़ में किसान खेती के लिए थी। – मई 2001 में विटारी का माल्या की मैगडॉवल स्पिरिट्स लि. में कोर्ट के जरिए विलय हो गया, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में जमीन विटारी के नाम रही। – 2019 में नामांतरण की फाइल बढ़ाई तो जिला डिप्टी रजिस्ट्रार ने स्टाम्प शुल्क पेनल्टी सहित 3.50 करोड़ तय किए। – 26 मार्च 2023 को कंपनी ने 1.59 स्टाम्प शुल्क जमा किया तो तहसीलदार ने 20 जून 2023 को यूनाइटेड स्पिरिट्स के रिकॉर्ड में दर्ज किया। – 2023 में शुल्क बदलकर 1.59 करोड़ कर दिया। इस पर काफी विवाद हुआ। – किसानों ने कब्जे को लेकर विवाद किया तो 12 जुलाई 2023 को यूनाइटेड स्पिरिट्स का नामांतरण निरस्त कर दिया गया। – 21 अक्टूबर 2024 को तहसीलदार ने फिर से यूनाइटेड स्पिरिट्स का नामांतरण दर्ज कर दिया। बिना रजिस्ट्री के बेचने नियुक्त किए दो प्रतिनिधि जमीन 1999 में विटारी डिस्लरी प्रालि. ने खरीदी। बाद में विलय मेसर्स मैगडॉवल स्पिरिट्स लि. में हो गया। 2006 में केंद्र ने मैगडॉवल से यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमि. कर दिया। रिकॉर्ड में जमीन विटारी के नाम रही। माल्या के प्रतिनिधि गुलाम, राकेश सिन्हा ने कलेक्टर न्यायालय ऑफ स्टाम्प में आवेदन कर नामांतरण का प्रयास किया।

EOW का शिकंजा: विधायक संजय पाठक की कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू, मामला दर्ज

भोपाल  सहारा समूह की 310 एकड़ बेशकीमती जमीनों की खरीद-फरोख्त में 72.82 करोड़ रुपए के गबन का खुलासा हुआ है। हैरानी यह है कि 310 एकड़ जमीन का बाजार मूल्य करीब 1000 करोड़ था। उसे पहले 90 करोड़ रुपए में बेचा। इसमें भी 72.82 करोड़ का गबन ही कर लिया गया। इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष (ईओडब्ल्यू) ने शुक्रवार को एफआइआर दर्ज की है।  जनवरी से अबतक 6 माह में जमीनों के खरीदार और विक्रेता पक्ष से सवाल-जवाब करने के बाद ईओडब्ल्यू ने सहारा के तीन प्रमुख अधिकारियों सहारा प्रमुख सुब्रता रॉय के भाई जेबी रॉय, बेटे सीमांतो रॉय और ओपी श्रीवास्तव समेत अन्य पर केस दर्ज किया है। बता दें, चे जमीनें बिजयराघवगढ़ के भाजपा विधायक संजय पाठक (bjp mla sanjay pathak) के परिवार की शेयर होल्डिंग कंपनियों के जरिए खरीदी गई है। बताते है, इस एफआइआर के बाद विधायक पाठक की मुश्किलें भी बढ़ सकती है। कौन है तीनों आरोपी     सीमांतो रॉय, कॉर्पोरेट कंट्रोल मैनेजमेंटसहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के बेटे हैं। जबलपुर और कटनी के जमीन सौदे के निर्णय में सीधे तौर पर शामिल थे।     जेबी रॉय डिप्टी मैनेजिंग वर्करसहारा प्रमुख के भाई हैं। भोपाल की जमीन सौदे में सक्रिय भूमिका थी। लंबे समय से विदेश में हैं।     ओपी श्रीवास्तव डिप्टी मैनेजिंग वर्करसहारा के लैंड डिविजन के प्रमुख हैं। इसलिए जमीनों की खरीद-फरोख्त के मसले में आरोपी बनाया गया। हैरान कर देने वाला विचित्र घोटाला सहारा समूह की भोपाल, सागर, जबलपुर, कटनी और ग्वालियर स्थित जमीनों में गबन किया गया है। ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ है कि भोपाल और सागर में सहारा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया। नियमानुसार, जमीन बेचने के बाद पूरी राशि सहारा और सेबी के संयुक्त खाते में जमा करना था। लेकिन 48 करोड़ में जमीन बेचने के बाद भी एक पैसा जमा नहीं किया। जबलपुर और कटनी में भूमि विकास व्यय और विविध शासकीय व्यय के नाम पर 9.6 करोड़ से अधिक राशि काट ली गई। ग्वालियर में भी 1.22 करोड़ की राशि काटकर गबन किया गया। विधायक संजय पाठक की पारिवारिक फर्मों ने किया सौदा सहारा की 310 एकड़ जमीन कौड़ी के भाव विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक के परिकर की फर्मों से किया। भोपाल में 110 एकड़ जमीन पाठक की पारिवारिक कर्म सिनाप रियल एस्टेट प्रालि को बेची। फर्म में विधायक की मां निर्मला पाठक और बेटे यश पातक की 50-50% शेयर हैं। कटनी और जबलपुर में सहारा की करीब 200 एकड़ जमीन थी। इसका सौदा भी मेसर्स नामसा देवबिल्ड प्राप्ति से किया। इस फर्म में भी निर्मला पाठक और यश 50 50% के शेयर होल्डर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये आदेश सहारा को जमीनों की बिकी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 11 जुलाई 2016 को स्पष्ह निर्देश जामी इलाके अनुसार, सहामा की संपति की बिक्री की राशि सेबी-सहारा रिफंड अकाउंट में उमा करनी थी। ताकि सहारा के निवेशकों का लौटाया जा सके। इसी आदेश का उल्लघन किया गया।