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मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर कांफ्रेंस में की समीक्षा

भोपाल  मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिला अपनी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में संवेदनशील प्रयास करे। लोक सेवा गारंटी, सी.एम. हेल्पलाइन और जनसुनवाई राज्य शासन के सुशासन के पैमाने हैं। सभी अधिकारियों को आमजन से जुड़े मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर संवेदनशील होकर कार्य करना होगा। उन्होंने अवैध गतिविधियों को सख्ती से रोकने और अपराधियों पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव जैन ने बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कमिश्नर, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक के साथ योजनाओं, कार्यक्रमों तथा कानून व्यवस्था की समीक्षा की। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्य सचिव जैन ने सुशासन के विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की और कलेक्टर्स से कहा कि नामांतरण, सीमांकन और बंटवारा के प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण हो और प्रयास करें कि एक भी प्रकरण निर्धारित अवधि से बाहर नहीं जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जनसुनवाई के दौरान अधिकारी मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं और शिकायतकर्ता की शिकायत को गंभीरता से लें तथा शिकायत का संतुष्टिपूर्वक निराकरण करें। उन्होंने स्वामित्व योजना में और बेहतर कार्य करने की जरूरत बताई तथा राजस्व संग्रहण बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने नजूल नवीनीकरण के कार्य को जन-अभियान चलाकर पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सी.एम हेल्पलाइन के शत-प्रतिशत प्रकरणों को अटेंड करने और पेयजल की शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता से निराकृत करने को कहा है। मुख्य सचिव जैन ने पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर्स से कहा कि अवैध गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों और अपराधियों में शासन-प्रशासन का खौफ होना चाहिए। मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिव गृह से कहा कि वे अपराधों की रोकथाम आदि के लिए एक प्रक्रियागत निर्देश कलेक्टर्स और एसपी को भेजें। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था को गंभीरता से लें। अवैध खनिज उत्खनन तथा भंडारण और परिवहन पर सख्त कार्रवाई करें, डिस्ट्रिक टास्क फोर्स की हर माह मिटिंग करें। बिना नम्बर प्लेट और टूटी-फूटी नम्बर प्लेट के खनिज के अवैध परिवहन में लिप्त पाए जाने वाले वाहनों को राजसात करें और जितनी जल्दी हो ऐसे वाहनों को नीलाम भी किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि खनन अपराधों के पुराने प्रकरण निकाले जाएं और समीक्षा कर पता लगाएं कि किन मामलों में अब तक सजा हुई है और यदि सजा नहीं हुई है तो ऐसे प्रकरणों में तत्परता से औपचारिकता पूर्ण कर सजा दिलाने के प्रयास किये जाएं। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने शैक्षणिक संस्थाओं के आस-पास के क्षेत्र को ड्रग फ्री जोन बनाने के लिए कहा है। उन्होंने एनकार्ड की बैठक हर माह करने तथा पाक्सो एक्ट के मामलों में त्वरित गति से कार्रवाई करने के लिए कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि विस्फोटक अधिनियम का पूरे प्रदेश में सख्ती से पालन किया जाए और आमजन को भी सूचना तंत्र में शामिल करें तथा अवैध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने आगामी त्यौहारों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए। मुख्य सचिव जैन ने आगामी खरीफ सीजन की समीक्षा करते हुए प्रदेश में खाद, बीज और उर्वरक के पर्याप्त भंडारण पर संतोष व्यक्त करते हुए कलेक्टर्स से कहा कि उर्वरक और खाद का वितरण ई-विकास पोर्टल के माध्यम से किया जाए। उन्होंने ई-विकास पोर्टल को देश का अग्रणी पोर्टल बताया। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स से कहा कि ऐसे प्रयास हों कि उर्वरक वितरण केन्द्रों पर न लाईन लगें और न भीड़ हो। उन्होंने डी.ए.पी. की जगह एन.पी.के. को बढ़ावा देने के लिए किसानों से संवाद करने के लिए कहा है। मुख्य सचिव ने नरवाई जलाने के प्रकरणों में कमीं लाने के लिए किसानों के बीच लाभकारी उपायों का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव जैन ने उत्पादन गतिविधियों की समीक्षा में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण का क्लस्टर के रूप में विस्तार करने के लिए क्षेत्र चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश का देश में चौथा स्थान प्राप्त करने पर बधाई दी। मुख्य सचिव ने कोल्डस्टोरेज आदि विकसित करने और एमएसएमई विभाग से समन्वय कर कृषि आधारित उद्योग लगाने पर कलेक्टर्स को योजना बनाने को कहा है। उन्होंने पशुपालन एवं डेयरी विभाग में पशुनस्ल सुधार, वेक्सीनेशन एवं निराश्रित पशुओं के गौशाला में शिफ्टिंग कार्य को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास के कार्यों में उद्यमी और हितग्राही मॉडल में और बेहतर कार्य करने की जरूरत बताई तथा स्थानीय मछुआरों को कोल्ड स्टोरेज ब्रांडिंग और मार्केटिंग में मदद करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव जैन ने उपार्जन कार्य की समीक्षा करते हुए कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि आगामी एक-दो दिन में तीन-चार संभागों के जिलों में बारिश की आशंका के दृष्टिगत उपार्जित गेहूं को सुरक्षित कर ले और प्रयास करें कि शत-प्रतिशत फसल परिवहन होकर गोदामों तक पहुंच जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि उपार्जित उपज का सम्पूर्ण भुगतान खरीदी के एक सप्ताह के भीतर किसानों को हो जाए। औद्योगिक नीति एवं निवेश तथा एमएसएमई विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर्स से कहा कि अपने जिलों की इकोनॉमी बढाने के लिए कृषि, उद्यानिकी से समन्वय कर औद्योगिक वातावरण बनाए जिससे निवेशक उनके जिलों में भी निवेश करे। मुख्य सचिव ने बताया कि जीएसडीपी में कृषि और उद्यानिकी का योगदान 37 से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने भारत सरकार की भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के तहत औद्योगिक पार्कों के विकास और निवेश आकर्षण के प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर्स को एक जिला-एक उत्पाद के तहत दूसरा उत्पाद भी चयनित करने को कहा है और मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार शेष 58 विधानसभा क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न स्व-रोजगार योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव जैन ने नगरीय एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी एवं ग्रामीण में बेहतर उपलब्धि अर्जित करने निर्देश दिए। उन्होंने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध और सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के मामले में कलेक्टर्स को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने स्वच्छता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन का सभी स्तर पर पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नेशनल ई-क्लीन प्रोग्राम … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इन्वेस्ट यूपी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों संग बैठक की। इस दौरान उन्होंने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी 5.0) की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री जी को बताया कि 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जीबीसी 5.0 के अंतर्गत हर जनपद में निवेश हो, इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। उन्होंने जनपदों की पर कैपिटा  इनकम बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि इसके लिए मैन्युफेक्चरिंग पावर को बढ़ावा देना आवश्यक है। इस अवसर पर इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों ने विगत दिनों लीड्स 2025 रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को मिले एग्जेम्प्लर अवार्ड को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समर्पित किया। अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने इस पुरस्कार के लिए इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों को बधाई दी।  मुख्यमंत्री के समक्ष जीबीसी के दौरान पूरे आयोजन का विस्तार से ब्योरा प्रस्तुत किया गया। इसमें स्टेज डिजाइन से लेकर पाथवे, एग्जीबिशन लेआउट को भी प्रस्तुत किया गया। एग्जीबिशन को 8 जोन में विभाजित किया गया है। पहला जोन- व्हाई यूपी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के बदले परिदृश्य को विस्तार से दिखाया जाएगा। जोन 2 में इंफ्रास्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन, जोन 3 में डिफेंस व एयरोस्पेस, जोन 4 में ईवी एवं ग्रीन एनर्जी सस्टेनिबिलिटी, जोन-5 में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफेक्चरिंग, जोन-6 में टेक्सटाइल्स, जोन-7 में टूरिज्म तथा जोन-8 में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में यूपी में आए सार्थक बदलाव को विस्तार से प्रदर्शित किया जाएगा।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर में भूमि की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके सापेक्ष हमें भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देना होगा। इसके अलावा उन प्रोजेक्ट्स में, जहां वर्षों पूर्व भूमि आवंटित की गई, लेकिन अब तक निवेश नहीं हुआ है। ऐसे प्रोजेक्ट्स के बारे में भी अद्यतन जानकारी हासिल की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण विषय एफडीआई को आमंत्रित करना है। इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रयास करने होंगे। इसके साथ ही पब्लिक से जुड़े मुद्दे हमारी प्राथमिकता में होने चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि एमओयू करते समय संस्थानों की पूरी पड़ताल/जानकारी अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। निवेशकों से जितना अच्छा व्यवहार होगा, समय से उनकी समस्याओं का निस्तारण करेंगे तो वह प्रदेश के लिए ब्रांड अंबेस्डर की तरह कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री जी ने लैंडबैंक बढ़ाने पर जोर दिया। इनवेस्टमेंट पर दिए जाने वाले इंसेंटिव्स को इवेंट बनाकर निवेशकों का सम्मान करें और उनका मनोबल बढ़ाएं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक औद्योगिक राज्य की छवि से आगे बढ़कर रक्षा निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का उभरता हुआ राष्ट्रीय हब बन रहा है।  मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत होने वाले उत्तर प्रदेश रक्षा व एफडीआई कॉन्क्लेव 2026 का प्रस्तुतिकरण भी किया गया। बताया गया कि “उत्तर प्रदेश रक्षा और एफडीआई कॉन्क्लेव 2026” प्रदेश की नई औद्योगिक रणनीति का बड़ा मंच साबित होगा, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) में रक्षा एवं एयरोस्पेस उद्योगों को आकर्षित करना, वैश्विक निवेशकों को जोड़ना और उद्योग, सरकार तथा रक्षा संस्थानों के बीच समन्वित इकोसिस्टम विकसित करना है।  कॉन्क्लेव लखनऊ में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें रक्षा मंत्रालय, डीपीएसयू, वैश्विक OEMs, रक्षा विशेषज्ञ, MSMEs और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाया जाएगा। एजेंडा में उत्तर प्रदेश की रक्षा विनिर्माण क्षमता, एयरोस्पेस निवेश, रोजगार प्रोत्साहन नीति 2024, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डीपीएसयू की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत पैनल चर्चाएं प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री जी और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के संबोधन के साथ बी2जी और बी 2बी इंटरैक्शन भी आयोजित किए जाने की योजना है।   कॉन्क्लेव के अपेक्षित परिणामों में निवेश समझौते (एमओयू), कॉरिडोर विस्तार का रोडमैप, टेस्टिंग एवं सर्टिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, उद्योग-सरकार साझेदारी और निवेशकों को स्पष्ट पॉलिसी सपोर्ट शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं बल्कि यूपी में एक दीर्घकालिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है।  प्रस्तुतिकरण में उत्तर प्रदेश की रणनीतिक ताकतों को विस्तार से रेखांकित किया गया है। इसमें बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, कुशल कार्यबल, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, अनुसंधान एवं विकास सहयोग और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को प्रमुख आधार बताया गया। साथ ही डीआरडीओ, एचएएल, बीईएल, बोइंग, एयरबस, टाटा, अदाणी जैसी संस्थाओं और कंपनियों की संभावित भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यूपी अब रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण के लिए तेजी से पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री को इन्वेस्ट यूपी की विभिन्न डेस्क के कामकाज से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेस्क उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावी निवेश क्षेत्रों में शामिल है। इस डेस्क के अंतर्गत 8,050 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आवेदन प्राप्त हुए हैं। ऑटोमोबाइल डेस्क में 722 करोड़ रुपये के निवेश आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। जीसीसी डेस्क के अंतर्गत लगभग 2,487 करोड़, स्टील एंड सीमेंट डेस्क में लगभग 12,232 करोड़, टेक्सटाइल्स डेस्क में लगभग 1,321 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।  बैठक में कंट्री डेस्क के कामकाज की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री को बताया गया कि जापान से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये, सिंगापुर से 40 हजार करोड़ रुपये, जर्मनी और यूके से 5 हजार करोड़ रुपये, ताइवान से 3 हजार करोड़ रुपये, यूएई से 2,074 करोड़ रुपये और दक्षिण कोरिया से 1,600 करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। बताया गया कि सिंगापुर और जापान बिजनेस मिशन ट्रिप भी अगस्त में प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने इन मिशन ट्रिप्स को अच्छे तरीके से संपन्न करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य इन मिशन ट्रिप्स के जरिए उत्तर प्रदेश को एशिया के बड़े विनिर्माण और टेक्नोलॉजी निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

31 मार्च तक हर जिले को दिया गया सभी आईडी बनाने का लक्ष्य

लखनऊ  प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने एवं सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से अभियान चलाकर फार्मर रजिस्ट्री (फार्मर आईडी) बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के किसानों की शत प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने के लिए 1 जनवरी से अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, यह 31 मार्च तक जारी रहेगा। ऐसे में किसानों के घर-घर जाकर फार्मर आईडी बनाई जा रही है। वहीं रामपुर जिला प्रशासन ने निर्धारित तिथि से पहले ही किसानों की 100 प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है। इसी के साथ रामपुर जिला प्रशासन ने शत-प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने में पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि दूसरे स्थान पर गाजियाबाद और तीसरे स्थान पर अंबेडकरनगर हैं। उत्तर प्रदेश में 2,88,70,495 किसानों की फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष अब तक 1,99,42,798 फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा चुकीं हैं।  सांस्कृतिक कार्यक्रम, खुली चौपाल, वॉल पेंटिंग से हासिल किया लक्ष्य रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जिले में शत-प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने के लिए 1 जनवरी से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में लक्ष्य को हासिल करने के लिए अन्नदाताओं को जागरूक करने के लिए किसान गोष्ठी, गांवों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, होर्डिंग, ग्राम पंचायत स्तर पर खुली चौपाल का आयोजन किया गया। इसके साथ ही वॉल पेंटिंग एवं प्रचार वाहन के जरिये प्रचार-प्रसार किया गया। साथ ही राजस्व, कृषि, पंचायती राज, ग्राम्य विकास एवं गन्ना विभाग के कर्मचारियों को किसानों के घर-घर जाकर फार्मर आईडी बनाने के निर्देश दिए गये। जिलाधिकारी ने बताया कि वह खुद प्रत्येक सप्ताह अभियान की समीक्षा करते हैं। इस दौरान अच्छा कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया गया जबकि कम प्रगति वाले कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की गई।  टॉप टेन में औरैया, बाराबंकी, हरदोई और कन्नौज ने जगह बनाई डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि रामपुर को 31 मार्च तक फार्मर रजिस्ट्री का कुल लक्ष्य 2,09,828 निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष 17 मार्च तक शत प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया। उन्होंने बताया कि रामपुर ने लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत 2,09,828 फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। इसी के साथ रामपुर ने प्रदेश में शत प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने में पहला स्थान प्राप्त किया है।  उन्होंने बताया कि इससे पहले भी रामपुर प्रदेश में सर्वप्रथम 50 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री को पूर्ण कर प्रथम पुरुस्कार प्राप्त कर चुका है। इसके अलावा गाजियाबाद ने निर्धारित लक्ष्य 38,909 के सापेक्ष अब तक 36,598 फार्मर आईडी बनाकर पूरे प्रदेश में दूसरा तथा अंबेडकरनगर ने 31 मार्च तक निर्धारित लक्ष्य 3,42,847 के सापेक्ष 3,10,145 फार्मर आईडी बनाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं टॉप टेन में औरैया, बाराबंकी, फर्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज, मीरजापुर और बिजनौर ने अपनी जगह बनाई है।  यह हैं फार्मर रजिस्ट्री के लाभ   किसान सम्मान निधि योजना का बिना बाधा लाभ प्राप्त होगा।   कृषकों को उर्वरक सुविधाजनक एवं निर्धारित मूल्य पर प्राप्त होगा।   किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने में अभिलेखों के सत्यापन की बाध्यता समाप्त होगी।   राज्य एवं केन्द्र सरकार की नवीन योजना में शामिल होने के लिए बार-बार अभिलेखों के सत्यापन से मुक्ति मिलेगी।   एग्रीस्टैक में सम्मिलित होने पर डिजीटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से एमएसपी पर उत्पादों की बिक्री सुविधाजनक एवं त्वरित होगी।