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12 फरवरी से राजस्थान बोर्ड की परीक्षा, शिक्षा विभाग पूरी तैयारी के साथ

जयपुर,  माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान ने सत्र 2025–26 के लिए माध्यमिक, उच्च माध्यमिक व्यावसायिक एवं राज्य स्तरीय समान परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। बोर्ड द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार प्रदेशभर में लाखों विद्यार्थियों की परीक्षाएं विभिन्न चरणों में आयोजित की जाएंगी। जारी शेड्यूल के अनुसार 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 12 फरवरी से शुरू होंगी। बोर्ड के अनुसार कक्षा 8वीं की परीक्षा 19 फरवरी से और 5वीं की परीक्षा 20 फरवरी से आयोजित की जाएगी। वहीं राज्य स्तरीय समान परीक्षा के अंतर्गत कक्षा 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं 7 मार्च से शुरू होंगी, जबकि कक्षा 3 से 7 (सीबीए) तक की परीक्षाएं 14 मार्च से प्रारंभ की जाएंगी। कक्षा वार परीक्षा तिथियां — (प्रात: 8:30 से 11:45 बजे तक) – कक्षा 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा – 12 फरवरी से (दोपहर 1:30 से 4:00 बजे तक) – कक्षा 8वीं परीक्षा – 19 फरवरी से – कक्षा 5वीं परीक्षा – 20 फरवरी से (प्रथम पारी: 8:30 से 11:45 तक, द्वितीय पारी: अपराह् 1:00 से सायं 4:15 बजे तक) – राज्य स्तरीय समान परीक्षा – (कक्षा 9 व 11) 7 मार्च से – राज्य स्तरीय समान परीक्षा – (कक्षा 3 से 7) 14 मार्च से परीक्षाओं के सफल संचालन की सभी तैयारियां पूर्ण: बोर्ड ने सभी स्कूलों और विद्यार्थियों को निर्देश दिए हैं कि वे समय पर प्रवेश पत्र प्राप्त करें और परीक्षा से जुड़ी सभी तैयारियां निर्धारित समयसीमा में पूरी करें। इन परीक्षाओं के लिए सभी केंद्रों पर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सुरक्षा एवं पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए ब्लॉक और जिला स्तर पर उड़नदस्तों की नियुक्ति की गई है। परीक्षाओं हेतु आवश्यक वीक्षकों की नियुक्ति कर ली गई है। इसके लिए प्रारंभिक शिक्षा से भी वीक्षक लगाए गए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थानीय अवकाश का बोर्ड सहित अन्य परीक्षाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सभी विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले अपना प्रवेश पत्र अनिवार्य रूप से प्राप्त करना होगा। बिना प्रवेश पत्र के किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। विद्यार्थियों से समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है।

खरगोन में प्राइवेट स्कूल की सुस्ती, 12वीं के 13 छात्र अंग्रेजी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके

खरगोन  खरगोन जिले के गायत्री विद्यापीठ हायर सेकंडरी स्कूल की घोर लापरवाही के कारण 12वीं कक्षा के 13 छात्र अंग्रेजी की बोर्ड परीक्षा नहीं दे सके. स्कूल प्रबंधन ने छात्रों से परीक्षा फॉर्म तो भरवा लिए, लेकिन उनकी फीस माध्यमिक शिक्षा मंडल को समय पर नहीं भेजी. इस कारण इन छात्रों के प्रवेश पत्र जनरेट नहीं हुए. जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर भीकनगांव में गायत्री विद्यापीठ हायर सेकंडरी स्कूल प्रबंधन ने 10वीं और 12वीं के नियमित 23 बच्चों के फॉर्म तो भरवाए, लेकिन उनकी परीक्षा फीस माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) भोपाल को नहीं भेजी गई.  लापरवाही की हद तो तब हो गई जब स्कूल प्रबंधन परीक्षा के 2 दिन पहले तक भी नहीं जागा. मंगलवार  यानी 10 फरवरी को आयोजित 12वीं की अंग्रेजी की परीक्षा के लिए जब बच्चों को सोमवार के दिन तक प्रवेश पत्र नहीं मिले तो उन्होंने स्कूल से संपर्क किया तब यह पता चला कि बच्चों की फीस ही जमा नहीं की गई है. धीरे-धीरे सभी पालकों को पता चला तो गुस्साए पालक स्कूल पहुंच गए, यहां जमकर हंगामा हुआ.  इसके बाद सैकड़ों लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ खंडवा वडोदरा स्टेट हाईवे पर गांधी प्रतिमा के सामने चक्काजाम कर दिया. चक्का जाम आधी रात तक जारी रहा. थाना इंचार्ज और बीईओ दिनेश पटेल ने गुस्साए लोगों को समझने का प्रयास किया लेकिन कोई नहीं माना. स्कूल प्रबंधन ने ताबड़तोड़ माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल के अकाउंट में 3 लाख 73 हजार जमा किए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि मंगलवार को ही 12वीं के 13 बच्चों को अंग्रेजी के पेपर में शामिल होना था. कलेक्टर और शिक्षा विभाग ने भी प्रयास किए, लेकिन पोर्टल बंद होने और समय की कमी के चलते मंगलवार सुबह होने वाले पेपर के लिए प्रवेश पत्र नहीं मिल सके. मामले को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिनेश पटेल का कहना है, छात्रों के फॉर्म तो भरवा गए, लेकिन उनकी फीस जमा नहीं की गई. इससे बच्चे परीक्षा से वंचित हुए हैं. इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को अवगत कराया गया है. स्कूल प्रबंधन के खिलाफ वे ही कार्रवाई करेंगे. 

मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षा की शुरुआत, 16 लाख छात्र परीक्षा देंगे, 3800 सेंटरों पर ‘तीसरी आंख’ रहेगा अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं का दौरआज से  शुरू होने जा रहा है। 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में इस बार 16 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे। राज्यभर में बनाए गए 3856 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा होगी, जहां नकल रोकने के लिए तकनीक और प्रशासन दोनों का कड़ा पहरा रहेगा।इस बार बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और अनुशासित बनाने पर जोर दिया गया है। सभी परीक्षाएं सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक एक ही शिफ्ट में आयोजित होंगी। परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरों से निगरानी, फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा तक हर स्तर पर सख्ती की गई है।  10 फरवरी से 12वीं, 13 फरवरी से 10वीं की परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल के अनुसार 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं आज 10 फरवरी से शुरू हो रही , जबकि 10वीं की परीक्षाएं 13 फरवरी 2026 से प्रारंभ होंगी। इस बार करीब 9.07 लाख छात्र 10वीं और लगभग 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा देंगे। हर जिले में उड़नदस्ते, संवेदनशील केंद्रों पर तीसरी आंख प्रदेश के हर जिले में चार-चार फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए गए हैं, जो परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे। संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। यहां CCTV कैमरों के जरिए भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से सीधी मॉनिटरिंग होगी। इसके अलावा थानों से प्रश्नपत्र निकालने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है। प्रदेश भर में 16 लाख से ज्यादा छात्र देंगे बोर्ड परीक्षा इस बार प्रदेश में 10वीं और 12वीं की परीक्षा में करीब 16 लाख छात्र परीक्षा में शामिल होंगे। इनमें 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी कक्षा 10वीं की परीक्षा देंगे, जबकि करीब 7 लाख छात्र 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठेंगे। इतने बड़े स्तर पर होने वाली परीक्षाओं को शांतिपूर्ण, नकलमुक्त और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग ने महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। 3856 परीक्षा केंद्र, हर जिले में सख्त निगरानी बोर्ड परीक्षाओं के लिए पूरे प्रदेश में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। राजधानी भोपाल की बात करें तो यहां 10वीं के 30 हजार 746 और 12वीं के 26 हजार 627 छात्र परीक्षा देंगे। इन छात्रों के लिए भोपाल में कुल 104 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। हर जिले में चार-चार फ्लाइंग स्क्वॉड गठित किए गए हैं। इनमें से दो स्क्वॉड विकासखंड स्तर पर और दो जिला स्तर पर काम करेंगे। हर स्क्वॉड में तीन सदस्य होंगे और तीनों पुलिस या प्रशासनिक स्तर के अधिकारी होंगे, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई हो सके। संवेदनशील केंद्रों पर ‘तीसरी आंख’ का पहरा नकल और अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए इस बार तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन ने संवेदनशील परीक्षा केंद्रों की पहचान कर वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इन केंद्रों पर होने वाली गतिविधियों पर भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से सीधी निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, थानों से प्रश्न-पत्र निकालने के दौरान भी वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है और सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती की गई है। इसका मकसद है कि परीक्षा प्रक्रिया की हर कड़ी पारदर्शी और सुरक्षित बनी रहे। स्कूलों को सख्त निर्देश… एक भी छात्र न छूटे माध्यमिक शिक्षा मंडल ने सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संशोधित टाइमटेबल की जानकारी हर हाल में छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचे। स्कूलों को कहा गया है कि नोटिस बोर्ड, मॉर्निंग असेंबली और अभिभावक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए यह सूचना तुरंत साझा करें। शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई भी छात्र पुरानी तारीखों के भरोसे परीक्षा से वंचित न रह जाए। परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश के सख्त नियम जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं को लेकर जिले में सख्त व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। परीक्षार्थियों को सुबह 8:30 बजे के बाद किसी भी हालत में परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षा केंद्रों के आसपास अनावश्यक भीड़ रोकने के लिए निर्धारित दूरी के बाद प्रवेश निषेध रहेगा। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। चयनित केंद्रों पर भोपाल से सीधी मॉनिटरिंग माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा प्रदेश के हर जिले में पांच-पांच परीक्षा केंद्रों को विशेष मॉनिटरिंग के लिए चुना गया है। इन केंद्रों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सीधे भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय से की जाएगी। इसके अलावा, औचक निरीक्षण के लिए उड़नदस्ते भी लगातार सक्रिय रहेंगे, जिनमें शिक्षा विभाग के साथ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। अब बात बच्चों की सेहत की परीक्षाओं की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे छात्रों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। 10 फरवरी से 12वीं और 13 फरवरी से 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होनी हैं। ऐसे में छात्र घंटों एक ही जगह बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। कम समय में ज्यादा सिलेबस पूरा करने की दौड़ में बच्चे अपनी सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिसका असर अब उनके शरीर पर साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी भोपाल में 104 परीक्षा केंद्र भोपाल में 10वीं के 30,746 और 12वीं के 26,627 छात्र परीक्षा देंगे। इसके लिए शहर में कुल 104 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। यहां भी हर केंद्र पर सख्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू रहेगी।बोर्ड ने पहले ही संशोधित टाइम टेबल जारी कर दिया है। किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि यह टाइम टेबल हर छात्र और अभिभावक तक अनिवार्य रूप से पहुंचे। इसके लिए नोटिस बोर्ड, असेंबली और व्हाट्सएप ग्रुप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करने को कहा गया है। एग्जाम के दौरान सख्त नियम परीक्षार्थियों को सुबह 8:30 बजे तक परीक्षा केंद्र पहुंचना अनिवार्य होगा। इसके बाद प्रवेश नहीं मिलेगा। परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ और अनावश्यक गतिविधियों पर रोक रहेगी। फिजियोथेरेपी सेंटरों में बढ़ी बच्चों की संख्या फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल बच्चों में फिजिकल एक्टिविटी लगभग खत्म हो गई है। लगातार 3 से 4 घंटे बिना ब्रेक पढ़ने से गर्दन और कंधों में दर्द, हाथों में झुन्नझुनी, सुन्नपन और कभी-कभी उल्टी जैसा मन होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। फिजियोथेरेपी सेंटर्स में 13 से 17 साल की उम्र के बच्चों की संख्या करीब 30 प्रतिशत … Read more

मार्च में होने वाली पहली से आठवीं कक्षा की परीक्षाएं, तिथियां जारी, जिला अधिकारियों को दिशा-निर्देश

चंडीगढ़  हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पहली से आठवीं कक्षा तक की वार्षिक परीक्षाओं की तिथि सूची जारी कर दी है। यह परीक्षाएं शैक्षणिक सत्र 2025-26 के तहत मार्च 2026 में आयोजित की जाएंगी, जबकि अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए अप्रैल 2026 में पूरक परीक्षाएं होंगी। निदेशालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार सभी विद्यालयों को तय कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा करवाने और आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।  जारी तिथि सूची के अनुसार पहली से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों की मुख्य विषयों की परीक्षाएं 13 मार्च से शुरू होकर 18 मार्च तक चलेंगी। इन कक्षाओं में भाषा, गणित और पर्यावरण जैसे विषय शामिल हैं। वहीं छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों की परीक्षाएं 11 मार्च से शुरू होकर 18 मार्च तक आयोजित होंगी। इन कक्षाओं में भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान तथा अन्य वैकल्पिक विषयों की परीक्षाएं निर्धारित की गई हैं। निदेशालय ने सभी जिला अधिकारियों से कहा है कि परीक्षा प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से करवाई जाए। विद्यालय प्रमुखों को विद्यार्थियों और अभिभावकों को समय से जानकारी देने तथा परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि तय समय पर परीक्षाएं पूरी कर परिणाम भी जल्द घोषित किए जाएंगे, ताकि अगले सत्र की तैयारियां समय पर शुरू हो सकें।

माशिमं ने बढ़ाई परीक्षा शुल्क, 10वीं-12वीं के लिए 460 से 800 रुपए, आवेदन शुल्क में भी 70 रुपए का इजाफा

रायपुर  छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने करीब 5 साल बाद 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के शुल्क में बढ़ोतरी की है। यह बढ़ा हुआ शुल्क शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। नए प्रावधान के तहत नियमित परीक्षार्थियों को अब बोर्ड परीक्षा, अंकसूची और प्रति विषय प्रैक्टिकल शुल्क मिलाकर 800 रुपए चुकाने होंगे, जबकि पहले इसके लिए 460 रुपए देने पड़ते थे। बोर्ड परीक्षा के आवेदन फॉर्म के शुल्क में भी 70 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां आवेदन शुल्क 80 रुपए था, अब इसे बढ़ाकर 150 रुपए कर दिया गया है। हालांकि, प्रवेश पत्र की द्वितीय प्रति के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके लिए पहले की तरह 80 रुपए ही देने होंगे। कार्यपालिका समिति की बैठक में लिया गया फैसला 10वीं और 12वीं परीक्षा शुल्क में बढ़ोतरी का निर्णय माशिमं की कार्यपालिका समिति की बैठक में लिया गया। समिति ने करीब 22 मदों के शुल्क बढ़ाने को मंजूरी दी है। इनमें नामांकन शुल्क, अतिरिक्त विषय, एक विषय या दो विषय (द्वितीय मुख्य/अवसर परीक्षा), स्वाध्यायी छात्रों के पंजीयन और अनुमति शुल्क समेत अन्य मद शामिल हैं। स्वाध्यायी छात्रों पर भी पड़ेगा असर प्रदेश के स्वाध्यायी एससी/एसटी छात्रों के पंजीयन और अनुमति शुल्क में भी लगभग डेढ़ गुना वृद्धि की गई है। पहले जहां इसके लिए 560 रुपए देने होते थे, अब 800 रुपए चुकाने होंगे। वहीं, राज्य के नए छात्रों और राज्य से बाहर के छात्रों के पंजीयन और अनुमति शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। पहले यह शुल्क 1,540 रुपए था, जिसे अब बढ़ाकर 2,000 रुपए कर दिया गया है। विषयवार परीक्षा शुल्क में इजाफा एक विषय की परीक्षा: 280 → 400 रुपए दो विषय (द्वितीय मुख्य/अवसर परीक्षा): 340 → 600 रुपए 2021 में हुई थी पिछली बढ़ोतरी गौरतलब है कि, माशिमं ने इससे पहले साल 2021 में बोर्ड परीक्षा और उससे जुड़े विभिन्न शुल्कों में वृद्धि की थी। पांच साल बाद एक बार फिर परीक्षा शुल्क बढ़ने से छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की संभावना है।

5वीं-8वीं के परीक्षा केंद्रों को 5 किमी दूर भेजने से बच्चों और अभिभावकों को बढ़ी मुश्किलें

भोपाल  प्रदेश में 5वीं और 8वीं की बोर्ड पैटर्न परीक्षाएं 20 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। इस परीक्षा में करीब 25 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे, जिनके लिए प्रदेश भर में लगभग 12 हजार से अधिक परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। ये परीक्षा केंद्र मूल विद्यालय से पांच किलोमीटर दूर के विद्यालयों में बनाए जाने से परीक्षार्थी और अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। परीक्षा 20 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित की जाएगी और इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के नियमों के अनुसार छोटे विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र स्कूल से कम दूरी पर बनाए जाने चाहिए, ताकि उन्हें आने-जाने में परेशानी न हो। राज्य शिक्षा केंद्र ने एक से तीन किमी के अंदर तक केंद्र बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई जगहों पर केंद्र चार से पांच किलोमीटर दूरी पर बनाए जाने की शिकायत सामने आ रही हैं। 5वीं व 8वीं की यह परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल के पैटर्न पर आयोजित की जा रही है। इसमें सरकारी, निजी स्कूलों तथा मदरसों के विद्यार्थी शामिल होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि वहां परिवहन की सुविधा सीमित रहती है। छोटे बच्चों को समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए अधिक समय और संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। अभिभावकों का कहना है कि अधिक दूरी होने से बच्चों की सुरक्षा और समय पर पहुंचने की चिंता बढ़ जाती है। निजी स्कूलों को अधिक बनाए गए केंद्र भोपाल जिले में 201 केंद्रों पर करीब 78 हजार बच्चे शामिल होंगे। इसमें पुराने शहर में जनशिक्षा केंद्र प्रभारी एवं जनशिक्षक के प्रस्ताव को नजरअंदाज कर विकासखंड स्रोत समन्वयकों ने सरकारी के बदले निजी स्कूलों को केंद्र बना दिया गया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि केंद्र विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखकर तय किए जाते हैं।  

परीक्षा के समय समाज और परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी

परीक्षा के समय समाज और परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी  वाराणसी परीक्षा केवल प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिका के बीच घटित होने वाली एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं है। यह एक ऐसा समय होता है जब किसी विद्यार्थी का मन, उसका आत्मविश्वास, उसका पारिवारिक परिवेश और पूरा सामाजिक वातावरण—सब मिलकर उसके भविष्य की दिशा तय करते हैं। परीक्षा के दिनों में बच्चे अकेले परीक्षार्थी नहीं होते; सच तो यह है कि उस अवधि में पूरा परिवार और समाज, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, परीक्षार्थी बन जाता है। आज जब बोर्ड परीक्षाएँ समीप आती हैं, तो समाज में अचानक एक विशेष प्रकार की हलचल दिखाई देने लगती है। जगह-जगह मोटिवेशनल भाषण, लंबे-चौड़े वक्तव्य, सोशल मीडिया पर उपदेशात्मक संदेश, सफलता के किस्से और असफलता से डराने वाले उदाहरण—सब कुछ एक साथ बच्चों पर बरसने लगता है। मंशा भले ही अच्छी हो, पर प्रश्न यह है कि क्या यही वह सहयोग है जिसकी एक परीक्षार्थी को सबसे अधिक आवश्यकता होती है? परीक्षार्थी को इस समय सबसे अधिक आवश्यकता होती है—शांति, स्थिरता और अनुकूलता की। विषयवस्तु की तैयारी जितनी महत्त्वपूर्ण है, उतना ही महत्त्वपूर्ण वह मानसिक और भावनात्मक परिवेश है जिसमें वह तैयारी की जा रही है। ज्ञान तभी फलित होता है जब मन शांत हो, जब वातावरण सहयोगी हो और जब परीक्षार्थी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। अक्सर यह देखा जाता है कि परीक्षा के समय घर का वातावरण अनजाने में ही तनावपूर्ण बना दिया जाता है। छोटी-छोटी बातों पर चर्चा, पारिवारिक समस्याओं का अनावश्यक विस्तार, रिश्तों के तनाव, भविष्य को लेकर आशंकाएँ—ये सब बातें उस मन पर अतिरिक्त बोझ डाल देती हैं, जो पहले ही परीक्षा की जिम्मेदारी से भरा होता है। बच्चे इन बातों को व्यक्त नहीं कर पाते, पर भीतर ही भीतर उनका मन विचलित होता चला जाता है। यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि परीक्षा के दौरान परीक्षार्थी से अधिक अपेक्षा नहीं, बल्कि अधिक समझ की आवश्यकता होती है। उसे बार-बार यह याद दिलाना कि यह परीक्षा जीवन का निर्णायक मोड़ है, उसे और अधिक दबाव में डाल देता है। वास्तव में, परीक्षार्थी स्वयं इस तथ्य से परिचित होता है; उसे इसकी पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि भरोसे की ज़रूरत होती है। परीक्षा के समय समाज और परिवार को कुछ समय के लिए स्वयं परीक्षार्थी बनने की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ यह नहीं कि वे किताबें खोलकर पढ़ने लगें, बल्कि यह कि वे परीक्षार्थी की संवेदनाओं को पढ़ें। वे यह समझने का प्रयास करें कि इस समय कौन-सी बात उसे सशक्त बनाएगी और कौन-सी उसे कमजोर कर देगी। एक सकारात्मक परीक्षा-परिवेश वही होता है जहाँ अनावश्यक हस्तक्षेप न हो। जहाँ बच्चे को अपनी दिनचर्या तय करने की स्वतंत्रता मिले। जहाँ उसकी नींद, भोजन और एकांत का सम्मान किया जाए। जहाँ उससे यह अपेक्षा न की जाए कि वह हर समय प्रसन्न दिखाई दे या हर प्रश्न का उत्तर दे। कई बार परीक्षार्थी को परीक्षा देने के लिए रिश्तेदारों या परिचितों के यहाँ जाना पड़ता है। ऐसे में वहाँ उपस्थित लोगों का व्यवहार अत्यंत संवेदनशील होना चाहिए। जिज्ञासावश पूछे गए प्रश्न—“तैयारी कैसी है?”, “इस बार कितने प्रतिशत आएँगे?”—अक्सर मन पर अनावश्यक दबाव बना देते हैं। उस समय सबसे बड़ा सहयोग यह होता है कि परीक्षार्थी को सामान्य, सहज और स्वाभाविक वातावरण दिया जाए। यह भी देखा गया है कि कई अत्यंत प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल इसलिए अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते क्योंकि परीक्षा के दौरान उनका पारिवारिक या सामाजिक परिवेश असंतुलित रहा। विषय की समझ और परिश्रम के बावजूद, मन की अस्थिरता उनकी क्षमता को सीमित कर देती है। यह एक गंभीर सामाजिक प्रश्न है, जिस पर सामूहिक चिंतन आवश्यक है। परीक्षा के समय जीवन की अन्य समस्याओं को परीक्षार्थी से यथासंभव दूर रखना चाहिए। जीवन में समस्याएँ हमेशा रहेंगी—यह जीवन का स्वभाव है। पर परीक्षा के कुछ सप्ताह ऐसे होते हैं, जब समाज और परिवार को यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि वे उन समस्याओं का भार परीक्षार्थी के कंधों पर न डालें। एक संतुलित परिवार वही है जो परीक्षा के समय विवादों को स्थगित करना जानता है। जहाँ यह समझ हो कि अभी प्राथमिकता क्या है। जहाँ सहयोग शब्दों से नहीं, व्यवहार से दिखाई दे। समाज की भूमिका भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। शिक्षक, पड़ोसी, रिश्तेदार, मित्र—सभी को यह समझना चाहिए कि उनका एक छोटा सा वाक्य भी परीक्षार्थी के मन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। सकारात्मक ऊर्जा वही नहीं होती जो ऊँचे स्वर में प्रेरणा देती है, बल्कि वह भी होती है जो मौन में सुरक्षा का एहसास कराती है। परीक्षा के दौरान समाज को एक सामूहिक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना चाहिए—जहाँ तुलना न हो, उपहास न हो, डर न हो। जहाँ सफलता को सम्मान मिले और असफलता को स्वीकार्यता। यह भी आवश्यक है कि परीक्षार्थी को यह महसूस कराया जाए कि उसका मूल्य केवल परीक्षा परिणाम से निर्धारित नहीं होता। परीक्षा जीवन का एक चरण है, सम्पूर्ण जीवन नहीं। यह भाव यदि ईमानदारी से व्यवहार में उतारा जाए, तो परीक्षार्थी का आत्मविश्वास स्वतः सुदृढ़ होता है। परीक्षा के समय परिवार और समाज का दायित्व केवल समर्थन देना नहीं, बल्कि सही समय पर चुप रहना भी है। यह मौन कई बार सबसे बड़ा सहयोग बन जाता है। यदि हम वास्तव में चाहते हैं कि हमारे बच्चे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, तो हमें उनके लिए एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जहाँ वे स्वयं को बोझ नहीं, बल्कि भरोसे से घिरा हुआ महसूस करें। अंततः परीक्षा एक व्यक्तिगत प्रयास है, पर उसकी सफलता सामूहिक संवेदनशीलता पर निर्भर करती है। जिस दिन समाज और परिवार यह समझ लेंगे कि परीक्षा के समय उन्हें भी परीक्षार्थी बनना है—उस दिन न केवल परिणाम बेहतर होंगे, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था अधिक मानवीय और संवेदनशील बन सकेगी। लेखक  डॉ० सदानन्द गुप्ता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वाराणसी

मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा में नई पहल: ईमानदारी की पेटी, सेंटरों पर CCTV और ऐप से मॉनिटरिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा 10 फरवरी से शुरू होने जा रही है. इस परीक्षा में बच्चों के ज्ञान के साथ नैतिकता की भी परीक्षा होगी. एमपी बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए बच्चों की नैतिकता की कसौटी कसेगा. इसके लिए सभी परीक्षा केन्द्रों के बाद इस बार ईमानदारी की पेटी भी रखी जाएगी, ताकि नकल करने के इरादे से परीक्षा हॉल में पहुंचने वाले बच्चे पहले ही नकल सामग्री को इस पेटी में डालें और पूरी ईमानदारी से परीक्षा में शामिल हों. उधर एमपी बोर्ड परीक्षा में नकल और गड़बड़ियों को रोकने कई तैयारियां की हैं. बच्चे ईमानदारी से दें परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश कुमा वैद्य कहते हैं कि "हमारी कोशिश है कि पूरी परीक्षा पारदर्शी हो. इसके लिए कई तरह के काम किए जा रहे हैं. इसमें स्टूडेंट्स को नैतिकता की कसौटी पर कसने के लिए सभी परीक्षा केन्द्रों के बाहर इस बार एक बॉक्स लगाया जा रहा है. इसका नाम ईनामदारी की पेटी रखा गया है. इसका उद्देश्य है कि यदि कोई बच्चा कोई नकल सामग्री लेकर पहुंचा है, तो वह परीक्षा शुरू होने के पहले ही इस बॉक्स में उसे डाल दे और अपनी पूरी मेहनत से परीक्षा दे. एडमिट कार्ड पर होगा क्यूआर कोड इस बार स्टूडेंट्स के प्रवेश पत्र पर क्यूआर कोड की भी व्यवस्था की गई है. प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) को स्कैन करते ही स्टूडेंट्स से जुड़ी पूरी जानकारी पलक झपकते ही सामने आ जाएगी. इससे बच्चे की पुष्टि करना आसान होगा. पेपर लीक जैसे घटनाओं को रोकने के लिए इस बार प्रश्न पत्रों को थाने से उठाने से लेकर परीक्षा केन्द्र तक पहुंचने तक की हर बंडल की लोकेशन ट्रेस होगी. इसके लिए एक एप तैयार किया गया है. इसमें प्रश्न पत्र उठाने और केन्द्र पर सौंपने के दौरान संबंधित व्यक्तियों को एप पर सेल्फी अपलोड करनी होगी. हर प्रश्न पत्र का पैकेट नंबर एप पर दर्ज करना होगा. इसके बाद प्रश्न पत्र को खोलने से लेकर इसके वितरण और परीक्षा खत्म होने के बाद कॉपी के बंडल बनने और मूल्यांकन केन्द्र तक जाने तक की एंट्री इस एप के माध्यम से ही होगी." कैमरों से होगी लाइव निगरानी उधर एमपी बोर्ड ने प्रदेश भोपाल, इंदौर, देवास, सागर, दमोह, रीवा, भिंड मुरैना, ग्वालियर जैसे 9 जिलों के 226 परीक्षा केन्द्रों को अति संवेदनशील परीक्षा केन्द्रों की सूची में रखा है. इन केन्द्रों में पूर्व में नकल के मामले सामने आ चुके हैं. इसको देखते हुए इन सभी केन्द्रों पर इस बार करीबन 1000 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों के जरिए परीक्षा की लाइव स्थिति को एमपी बोर्ड मुख्यालय में देखा जा सकेगा. इसके लिए कंट्रोल कमांड सेंटर बनाया गया है. प्रदेश में परीक्षा के लिए 3856 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं, जहां करीबन 16 लाख बच्चे परीक्षा देंगे. इन परीक्षा केन्द्रों में 448 संवेदनशील केन्द्र भी चिन्हित किए गए हैं. इन परीक्षा केन्द्रों पर विशेष निगरानी रहेगी. सिर्फ कलेक्टर प्रतिनिधि के पास होगा मोबाइल एमपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान कोई भी टीचर अपने साथ मोबाइल नहीं रख सकेगा. एमपी बोर्ड ने इसके लिए सभी जिलों में निर्देश जारी कर दिए हैं. सिर्फ कलेक्टर प्रतिनिधि ही अपने साथ मोबाइल रख सकेंगे. परीक्षा शुरू होने के पहले सभी ड्यूटी टीचर को अपने मोबाइल ऑफिस में जमा कराने होंगे.

उत्तर बस्तर कांकेर : महापरीक्षा अभियान अंतर्गत कांकेर जिला में 9765 नवसाक्षरों ने दी परीक्षा

उत्तर बस्तर कांकेर : महापरीक्षा अभियान अंतर्गत कांकेर जिला में 9765 नवसाक्षरों ने दी परीक्षा उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में 90 प्रतिशत असाक्षर हुए शामिल उत्तर बस्तर कांकेर कलेक्टर एवं अध्यक्ष निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत रविवार 07 दिसंबर को महापरीक्षा अभियान जिला में आयोजित किया गया, जिसके लिए 426 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे जहां महिला नवसाक्षर 6216 और पुरुष नवसाक्षर 3549 कुल 9765 नवसाक्षर ने परीक्षा दी। इसके अंतर्गत 15 वर्ष से अधिक उम्र के असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए 2027 तक शत-प्रतिशत साक्षर किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जिले के सातों विकासखंडों की प्राथमिक शाला और माध्यमिक शाला को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। इस बर परीक्षा में अलग नजारा देखने को मिला जहां एक ही परिवार के कई सदस्यों ने एक साथ परीक्षा दी। उम्रदराज महिला एवं पुरुष शिक्षार्थियों ने भी साक्षर होने के लिए बढ़-चढ़कर परीक्षा दी। इसी क्रम में विधानसभा कांकेर के विधायक महोदय श्री आशाराम नेताम द्वारा अन्नपूर्णापारा के प्राथमिक शाला परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया गया। साथ ही प्राथमिक शाला बागोडार के परीक्षा केंद्र का जिला शिक्षा अधिकारी श्री रमेश निषाद ने भी परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया। बताया गया कि जिले के 4 विकासखंडों में क्रमशः परीक्षा केंद्र शासकीय माध्यमिक शाला बेवरती, माध्यमिक शाला पटौद, प्राथमिक शाला करप, प्राथमिक शाला सरईटोला, माध्यमिक शाला करप, माध्यमिक शाला सरंगपाल, माध्यमिक शाला माटवाड़ा मोदी, प्राथमिक शाला तेलगरा, प्राथमिक शाला हिंगनझर का निरीक्षण परीक्षा के दौरान विभाग के अधिकारियों के द्वारा किया गया। इसके अलावा विकासखंड भानुप्रतापपुर में नक्सली पुनर्वास केंद्र मुल्ला में भी विशेष तौर पर 34 असाक्षरों के द्वारा साक्षर बनने के लिए परीक्षा दी गई। निरीक्षण के दौरान सभी परीक्षा केन्द्रों में परीक्षार्थी परीक्षा दिलाते हुए पाए गए। इसी प्रकार जिले में लक्ष्य के अनुसार 9765 नवसाक्षरों ने परीक्षा में सम्मिलित हुए, जहां नवसाक्षरों की उपस्थिति 90 प्रतिशत रही।

मंत्री अग्रवाल ने CGPSC 2024 में 14वीं रैंक पाने वाले अंबिकापुर के पंकज यादव को फोन पर दी बधाई

 मंत्री  अग्रवाल ने सीजीपीएससी 2024 की परीक्षा में 14वीं रैंक हासिल करने वाले अंबिकापुर के पंकज यादव को दूरभाष पर दी बधाई एवं शुभकामनाएं पंकज यादव की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा: मंत्री श्री राजेश अग्रवाल रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सीजीपीएससी 2024 की परीक्षा में 14वीं रैंक हासिल करने वाले अंबिकापुर के पंकज यादव को दूरभाष पर दी बधाई एवं शुभकामनाएं पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सीजीपीएससी 2024 की परीक्षा में 14वीं रैंक हासिल करने वाले अंबिकापुर के पंकज यादव को दूरभाष पर दी बधाई एवं शुभकामनाएं छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2024 की परीक्षा  में अंबिकापुर के बौरीपारा निवासी पंकज यादव ने राज्य में 14वीं रैंक हासिल कर अंबिकापुर का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस महत्वपूर्ण सफलता पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दूरभाष पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी। श्री अग्रवाल ने कहा कि पंकज की उपलब्धि न केवल उनके कठिन परिश्रम का परिणाम है, बल्कि पूरे अंबिकापुर का मान और गर्व भी है।     मंत्री श्री अग्रवाल ने पंकज से कहा कि आपने अपने माता-पिता का, शहर का और हम सभी का नाम रोशन किया है। आपके पिता ने कठिन परिस्थितियों में भी आपको पढ़ाया-लिखाया और आपने अथक मेहनत से सफलता हासिल की, इसके लिए आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।  उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता के त्याग और संघर्ष को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि उन्हीं की बदौलत आज आप इस मुकाम पर पहुंचे हैं। मंत्री श्री अग्रवाल ने पंकज यादव के माता-पिता को भी विशेष रूप से बधाई प्रेषित की। ठेलेवाले पिता के बेटे ने छुआ कामयाबी की ऊंचाई     पंकज यादव के पिता रामेश्वर यादव रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करने हेतु ठेला चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता रायवती गृहिणी हैं। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी हार नहीं मानी। पंकज ने बताया कि उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा मल्टीपरपज स्कूल अंबिकापुर से की और बीएससी कंप्यूटर व एमएससी की पढ़ाई क्रमशः साईं बाबा कॉलेज और पीजी कॉलेज से पूरी की है। छह साल के कड़े संघर्ष के बाद मिली सफलता     पंकज यादव बीते छह वर्षों से लगातार सीजीपीएससी परीक्षा की तैयारी में जुटे थे। कई प्रयासों के बाद अब जाकर उन्हें सफलता मिली। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता की कठिन मेहनत, त्याग और धैर्य को दिया। पंकज ने कहा कि उनके माता-पिता का आशीर्वाद और प्रेरणा ही इस सफलता का आधार रही है। इस सफलता से पूरे परिवार और अंबिकापुर शहर में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों ने पंकज को “संघर्ष और संकल्प का प्रतीक” बताया है, जिसका उदाहरण आने वाली पीढ़ियां लेंगी।