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सितंबर में आबकारी राजस्व ने लगाई ऐतिहासिक छलांग: करीब 800 करोड़ रुपए की अधिक कमाई

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अवैध शराब के कारोबार और माफिया तंत्र के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति का सीधा और बड़ा असर उत्तर प्रदेश के आबकारी राजस्व पर दिख रहा है। आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के सितंबर महीने में शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए गत वर्ष के मुकाबले राजस्व संग्रह में लगभग 21% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में कुल 4,611.29 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल हुआ है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि (3,811.70 करोड़) से 799.59 करोड़ रुपए अधिक है। इसके साथ ही विभाग ने इस माह 120.98% की उपलब्धि हासिल की है। माफिया तंत्र पर नकेल और ताबड़तोड़ कार्रवाई बनी राजस्व में उछाल की वजह आबकारी विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में चलाए गए सघन प्रवर्तन अभियान, अवैध शराब के ठिकानों पर छापेमारी, अवैध भट्ठियों के ध्वस्तीकरण और माफियाओं की धरपकड़ का नतीजा रहा कि समानांतर अवैध व्यापार पूरी तरह ध्वस्त हो गया। हाईवे, ढाबों और अंतर्राज्यीय सीमाओं पर लगातार चेकिंग और क्यूआर कोड आधारित ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ तकनीक की वजह से कर चोरी पर पूरी तरह लगाम कसी गई है, जिससे वैध बिक्री में तेजी आई और सीधा लाभ सरकारी खजाने को मिला। 6 माह में 29,406 करोड़ रुपए का संग्रह चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर 2026) के दौरान भी विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विभाग की कुल क्रमिक प्राप्ति 29,406.50 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में यह आंकड़ा 26,149.32 करोड़ रुपए था। इस प्रकार गत वर्ष के मुकाबले विभाग ने 3,257.18 करोड़ रुपए (112.46%) का अतिरिक्त राजस्व जुटाया है। डिस्टिलरी से लेकर फुटकर दुकानों तक कड़ा पहरा आबकारी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा विभाग की टीम ने पूरे प्रदेश में तकनीक-सक्षम निगरानी और सघन प्रवर्तन अभियान चलाकर लीकेज को पूरी तरह रोका है। डिस्टिलरी से लेकर फुटकर दुकानों तक कड़ा पहरा है। निरंतर छापेमारी, जब्ती और गिरफ्तारियों के चलते अवैध नेटवर्क को तोड़ा गया है, जिसका सीधा परिणाम इस रिकॉर्ड राजस्व संग्रह के रूप में सामने आया है। चालू वित्तीय वर्ष के आगामी महीनों में भी यह कड़ाई जारी रहेगी। सितंबर में करीब 800 करोड़ रुपए अधिक राजस्व आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश से माफिया राज और अवैध धंधे पूरी तरह समाप्त हो रहे हैं। सितंबर माह में लगभग 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व यह साबित करता है कि जनता का विश्वास पारदर्शी व्यवस्था में है। यह अतिरिक्त राजस्व प्रदेश के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं को और गति देगा। अवैध शराब का कारोबार करने वालों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है। सितंबर 2026 में चलाए गए विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत विभाग ने 89 हजार से अधिक स्थानों पर छापेमारी कर 2.33 लाख लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त की और 251 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

आबकारी विभाग की धमाकेदार शुरुआत, अप्रैल में ₹931 करोड़ ज्यादा राजस्व हासिल

2026-27 की शुरुआत में ही आबकारी राजस्व में बड़ा उछाल, अप्रैल में ₹931 करोड़ अधिक प्राप्ति पारदर्शी सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग और लीकेज रोककर योगी सरकार ने की रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि 2016-17 में ₹14 हजार करोड़ तक सीमित था आबकारी राजस्व, अब ₹57 हजार करोड़ के पार ई-गवर्नेंस और ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम से मजबूत हुआ आबकारी ढांचा अवैध कारोबार और राजस्व रिसाव पर कार्रवाई का दिखा सीधा असर लखनऊ उत्तर प्रदेश में आबकारी विभाग ने 2026-27 वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि दर्ज की है। अप्रैल 2026 में विभाग को ₹5,251 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि अप्रैल 2025 में यह आंकड़ा ₹4,319.46 करोड़ था। यानी, गत वर्ष की तुलना में अप्रैल माह में ही ₹931.54 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह वृद्धि शराब बिक्री को प्रोत्साहित किए बिना पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल मॉनिटरिंग और राजस्व लीकेज रोकने के लिए किए गए सख्त प्रशासनिक सुधारों का प्रत्यक्ष नतीजा है। उत्तर प्रदेश में आबकारी राजस्व का आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्ष 2011-12 में प्रदेश को ₹8,139 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था, जो 2016-17 तक बढ़कर ₹14,273 करोड़ पहुंचा। उस समय लक्ष्य के मुकाबले उपलब्धि प्रतिशत लगातार गिर रहा था और 2016-17 में यह केवल 74.15 प्रतिशत तक सिमट गया था। इससे यह संकेत मिलता था कि तत्कालीन सिस्टम में राजस्व रिसाव, अवैध कारोबार और निगरानी की गंभीर चुनौतियां मौजूद थीं। वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार के गठन के बाद आबकारी विभाग में बड़े स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू किए गए। लाइसेंस प्रक्रिया में ई-टेंडरिंग, आपूर्ति श्रृंखला की डिजिटल ट्रैकिंग, ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, बारकोड आधारित निगरानी, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और जिला स्तर पर जवाबदेही तय करने जैसे कदम उठाए गए। इसके साथ ही अवैध शराब कारोबार और तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। इन सुधारों का असर जल्द ही राजस्व आंकड़ों में दिखाई देने लगा। वर्ष 2018-19 में पहली बार विभाग ने लक्ष्य से अधिक 104.03 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की और ₹23,928 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया। इसके बाद राजस्व संग्रह लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2021-22 में ₹36,321 करोड़, 2022-23 में ₹41,252 करोड़, 2024-25 में ₹52,573 करोड़ और 2025-26 में रिकॉर्ड ₹57,722 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। यानी 2016-17 की तुलना में आबकारी राजस्व लगभग चार गुना तक पहुंच गया। आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह वृद्धि “सिस्टम करेक्शन मॉडल” का परिणाम है, जिसमें शराब बिक्री बढ़ाने के बजाय राजस्व लीकेज रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने पर जोर दिया गया। पहले जहां अधिकांश प्रक्रियाएं मैनुअल थीं और मानवीय हस्तक्षेप अधिक था, वहीं अब अधिकांश व्यवस्था डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित हो चुकी है। इससे भ्रष्टाचार, अनियमितता और राजस्व हानि में उल्लेखनीय कमी आई है। जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश का आबकारी मॉडल अब केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा आधारित मॉनिटरिंग, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शी प्रशासन का उदाहरण बनकर उभरा है। 2026-27 के शुरुआती आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश आबकारी राजस्व के नए रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है।

Excise Revenue Boom: पंजाब सरकार की कमाई में उछाल, तय लक्ष्य से 582 करोड़ अधिक संग्रह

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में उत्पाद शुल्क (एक्साइज) संग्रह के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बीते दिनों बताया कि विभाग ने 31 मार्च तक 11,782 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जो तय लक्ष्य 11,200 करोड़ रुपये से 582 क207 खुदरा शराब समूहोंरोड़ रुपये अधिक है। इसे सरकार की नीतिगत सख्ती और पारदर्शी व्यवस्था का नतीजा माना जा रहा है। चीमा ने कहा कि पिछले चार वर्षों में उत्पाद शुल्क से मिलने वाला राजस्व लगभग दोगुना हो गया है। वर्ष 2021-22 में जहां यह आंकड़ा 6,254.84 करोड़ रुपये था, वहीं अब बढ़कर 11,782 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि इस निरंतर बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12,800 करोड़ रुपये का नया लक्ष्य निर्धारित किया है। लाइसेंस शुल्क से 10,520 करोड़ जुटाने का लक्ष्य मंत्री ने इस सफलता का श्रेय मजबूत उत्पाद शुल्क नीति, प्रभावी प्रशासनिक प्रक्रियाओं और व्यापार-अनुकूल वातावरण को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता और नियमों के पालन को भी प्राथमिकता दी है, जिससे शराब कारोबार में स्थिरता आई है और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है। चीमा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की गई नई आबकारी नीति में लाइसेंस शुल्क से 10,520 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले वर्ष के 9,877 करोड़ रुपये से अधिक है। 207 खुदरा शराब समूहों को लाइसेंस आवंटित उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 207 खुदरा शराब समूहों को नए वित्त वर्ष के लिए लाइसेंस आवंटित कर दिए गए हैं। यह नीति के प्रति कारोबारियों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा- “उत्पाद शुल्क नीति 2026-27 को लेकर समग्र प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। इससे राज्य के खजाने में लगातार राजस्व का प्रवाह बना रहेगा और शराब व्यापार में स्थिरता सुनिश्चित होगी।”  सरकार का दावा है कि सख्त निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के कारण राजस्व में यह बढ़ोतरी संभव हो सकी है। आने वाले समय में भी विभाग इसी रणनीति पर काम करते हुए लक्ष्य से अधिक वसूली की दिशा में आगे बढ़ेगा।