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नकली नोटों के बड़े रैकेट पर पुलिस का शिकंजा, पटियाला से 5.50 लाख की फेक करेंसी जब्त

पटियाला पंजाब को सुरक्षित राज्य बनाने के लिए चलाई गई मुहिम के दौरान नकली भारतीय करेंसी नोटों (एफआईसीएन) के प्रचलन को करारा झटका देते हुए काउंटर इंटेलिजेंस पटियाला ने जाली करेंसी मॉड्यूल में शामिल चार व्यक्तियों को 5.50 लाख रुपये की नकली करेंसी सहित गिरफ्तार कर इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। यह जानकारी पुलिस महानिदेशक पंजाब गौरव यादव ने दी। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान नाजर खान निवासी गांव झुनीर मलेरकोटला, राज मोहम्मद निवासी धूरी संगरूर, मुख्तियार सिंह उर्फ गुरजीत सिंह निवासी गांव मलिकपुर जींद हरियाणा और आसिफ अली निवासी मलेरकोटला के रूप में हुई है। डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि बरामद की गई नकली भारतीय करेंसी में सभी 500 रुपये के नोट हैं। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि गिरफ्तार किया गया राज मोहम्मद आपराधिक पृष्ठभूमि वाला आरोपी है और उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट से संबंधित एक एफआईआर दर्ज है। डीजीपी ने कहा कि इस नेटवर्क को लेकर जांच की जा रही है।  इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी देते हुए एआईजी सीआई पटियाला डॉ. सिमरत कौर ने बताया कि सीआई यूनिट मलेरकोटला की टीम द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान दो संदिग्ध व्यक्तियों नाजर खान और राज मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से 4 लाख रुपये की नकली भारतीय करेंसी के नोट बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आगे की जांच के दौरान दो अन्य आरोपियों मुख्तियार सिंह उर्फ गुरजीत सिंह और आसिफ अली  भी गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से 1.5 लाख रुपये के अन्य नकली भारतीय करेंसी नोट बरामद किए गए हैं। एआईजी ने कहा कि आगे की जांच के दौरान आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। 

‘पैसे डबल’ का झांसा देकर चलाते थे नकली नोट, पुलिस ने गिरोह का किया खुलासा

 बस्ती यूपी के बस्ती जिले में पुलिस ने फर्जी नोट चलाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. संयुक्त अभियान में थाना वाल्टरगंज पुलिस, स्वॉट टीम और सर्विलांस टीम की अहम भूमिका रही. गिरफ्तार अभियुक्तों में मुस्तफा, नबीउल्लाह, नबीउल्लाह उस्मानी, हबीबुर्रहमान और मणिकांत चौधरी शामिल हैं. पुलिस ने इनके पास से कुल 420000 रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं. जिनमें 500 रुपये के पांच बंडल, 200 रुपये के पांच बंडल और 100 रुपये के सात बंडल शामिल हैं. इसके अलावा एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन और तीन मोटरसाइकिल भी बरामद की गई है. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी संगठित तरीके से नकली नोटों का नेटवर्क चला रहे थे और विभिन्न क्षेत्रों में इन्हें खपाने का काम करते थे. गिरफ्तार आरोपियों में मणिकांत चौधरी रूपनदेही नेपाल का निवासी है. जबकि मुस्तफा और नबीउल्लाह जनपद बलरामपुर, नबीउल्लाह उस्मानी जनपद महाराजगंज और हबीबुर्रहमान जनपद संतकबीर नगर का रहने वाला है. पूरे मामले का खुलासा अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत ने प्रेसवार्ता कर बताया कि पांच लोग की गिरफ्तारी की गई है. जिसमें उनके पास से 4 लाख बीस हजार के फर्जी नोट रिकवर किए गए हैं. जिनमें 500 की पांच गड्डियां,200 की पांच गड्डियां और 100 की सात गड्डियां शामिल हैं. आरोपियों के पास से तीन बाइक भी बरामद की गई है. ये गिरफ्तारी बक्साई पुल के पास से की गई है. आरोपियों द्वारा ग्रुप बनाकर जनपद बस्ती, संत कबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, अयोध्या, अंबेडकर नगर में घूमा जाता था. ऐसे में यहां के ग्रामीण बैंक को टारगेट किया जाता था. आरोपी बैंक से बुजुर्गों को पैसे निकालते समय लालच देते थे. आरोपी कहते थे कि हम आपके रुपए डबल कर देंगे. जिसके चलते कुछ लोग उनकी बातों पर विश्वास भी कर लेते थे और इस तरह ये लोग अपनी नकली नोट खपा देते थे.

पुलिस की छापेमारी में चार जालसाज गिरफ्तार, बाजारों में खपाए जा रहे थे 500 के नकली नोट

बहराइच उत्तर प्रदेश के बहराइच में पुलिस ने नकली करंसी छापने और उसे बाजार में खपाने वाले एक गैंग का पर्दाफाश किया है. हैरानी की बात यह है कि आरोपी किसी हाईटेक मशीन का नहीं, बल्कि एक साधारण कलर प्रिंटर का इस्तेमाल कर नकली नोट तैयार कर रहे थे और उन्हें स्थानीय बाजारों में चला भी रहे थे. एजेंसी के मुताबिक, इस गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है. इनके कब्जे से 11,500 रुपये की नकली करंसी बरामद हुई है, जिसमें 500 रुपये के 23 नकली नोट शामिल हैं. साथ ही एक कलर प्रिंटर भी जब्त किया गया है, जिससे ये नोट छापे जा रहे थे. बहराइच के पुलिस अधीक्षक विजयजीत श्रीवास्तव ने बताया कि खैरिघाट इलाके में शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात सूचना के आधार पर छापेमारी की गई. इसी दौरान चारों आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गुरूचरण सिंह उर्फ विजय, सलीम उर्फ सूरज, हरिराम लोधी और अर्जुन के रूप में हुई है. पूछताछ के दौरान सभी ने स्वीकार किया कि वे कलर प्रिंटर की मदद से नकली नोट तैयार करते थे और फिर उन्हें बाजारों में खपाते थे. पुलिस का कहना है कि आरोपी नकली नोटों को असली जैसा दिखाने की कोशिश करते थे और छोटे-छोटे लेनदेन में इन्हें इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी को शक न हो. खासकर भीड़भाड़ वाले बाजार और दुकानों को निशाना बनाया जाता था, जहां जल्दी में लोग नोटों की बारीकी से जांच नहीं कर पाते. इस खुलासे के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह गैंग कब से सक्रिय था और अब तक कितनी नकली करंसी बाजार में खपा चुका है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल हैं. मामले में केस दर्ज कर चारों आरोपियों के खिलाफ एक्शन शुरू हो गया है. पुलिस का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जा रही है और आगे भी ऐसे गैंग्स के खिलाफ अभियान जारी रहेगा. आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, खासकर बड़े नोट लेते समय उनकी जांच जरूर करनी चाहिए.  

नकली नोटों का गढ़ बेनकाब: मालेगांव कनेक्शन के साथ इमाम के घर से 12 लाख रुपये के फर्जी नोट जब्त

खंडवा  मध्यप्रदेश में नकली नोट के बड़े कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने मदरसे के इमाम के घर से बड़ी मात्रा में नकली नोट, ब्लैंक पेपर समेत नोट छापने की मशीन जब्त की है। इससे साबित हो रहा कि इमाम मदरसे की आड़ में नकली नोट की छपाई कर रहा था। समाचार के लिखे जाने तक पुलिस की जांच पड़ताल जारी थी। दरअसल खंडवा के जावर थाना क्षेत्र के ग्राम पैठियां (मछौड़ी रैय्यत) के एक मदरसे के इमाम के घर से बड़ी मात्रा में नकली नोट मिले। मस्जिद में इमाम के रूप में तैनात जुबेर अंसारी के कमरे से नकली नोटों के बंडल बरामद हुआ है। 12 लाख से ज्यादा के नकली नोट मिले शुरूआती जांच में 12 लाख रुपए से ज्यादा के नकली नोट आए सामने। नकली नोट बनाने के पेपर और प्रिंट मशीन भी बरामद। हेडक्वार्टर डीएसपी जावर थाना प्रभारी सहित पुलिस बल मौके पर मौजूद। बताया जा रहा है कि नकली नोट के तार महाराष्ट्र के मालेगांव से जुड़े है। फिलहाल पुलिस कार्रवाई और नोटों की गिनती जारी थी।

जयपुर में नकली नोटों का बड़ा खुलासा, SOG की रेड में 43 लाख की फर्जी करेंसी जब्त

जयपुर राजधानी जयपुर में त्योहारों की रौनक के बीच पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। धनतेरस की शाम नारायण विहार थाना क्षेत्र में एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने छापा मारकर ₹43 लाख के नकली नोट बरामद किए हैं। इस दौरान पुलिस ने दो युवकों को मौके से गिरफ्तार किया, जो लंबे समय से फर्जी करेंसी के इस नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं।एसओजी की यह कार्रवाई पिछले 15 दिनों की निगरानी और गुप्त सूचनाओं के आधार पर की गई थी। टीम ने जिस फ्लैट पर दबिश दी, वहां से मिले नकली नोट इतने बारीक और खतरनाक स्तर पर तैयार किए गए थे कि उनमें वाटर मार्क और सिक्योरिटी फीचर तक मौजूद पाए गए — यानी, सामान्य व्यक्ति के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना लगभग नामुमकिन था। त्योहारों पर नकली नोटों का कारोबार बढ़ने की आशंका एडीजी एसओजी वी.के. सिंह ने बताया कि हर साल त्योहारों के मौसम में नकली नोटों का चलन बढ़ जाता है। बाजार में कैश ट्रांजैक्शन अधिक होने का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एसओजी की कई टीमें राजस्थान के विभिन्न जिलों में अलर्ट थीं।सूचना मिलने पर एसओजी ने जयपुर पुलिस के साथ मिलकर नारायण विहार इलाके में स्थित एक फ्लैट पर छापा मारा। वहां से 43 लाख के नकली नोट जब्त किए गए, जो सभी ₹500 के मूल्य वर्ग के थे। फिलहाल गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच साउथ जिला पुलिस को सौंप दी गई है। काटिंग से पहले की नकली शीट भी बरामद बरामद नकली नोटों में से 26 लाख रुपए की पूरी गड्डियां मिलीं, जबकि 18 लाख रुपए के नोट अब तक शीट के रूप में थे, जिनकी कटिंग नहीं की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ये शीट संभवतः किसी बाहरी राज्य से जयपुर लाई गई थीं, ताकि शहर के भीतर अलग-अलग जगहों पर सप्लाई की जा सके। यह पहलू पुलिस के लिए बेहद चौंकाने वाला है कि नकली नोटों में पहली बार “टच-एंड-फील” सिक्योरिटी फीचर और उभरा हुआ वाटर मार्क पाया गया है — यानी ये नोट केवल रंगीन प्रिंट नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से अत्यधिक उन्नत नकली करेंसी हैं। डील का फॉर्मूला: ₹1 लाख असली = ₹4 लाख नकली पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। आरोपी ₹1 लाख असली नोट के बदले ₹4 लाख नकली नोट दे रहे थे। इस डीलिंग के लिए मध्यस्थ के तौर पर बीकानेर का एक बदमाश काम कर रहा था, जो अब पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। एसओजी के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क कई शहरों तक फैला हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर राजस्थान और उससे सटे राज्यों में कई ठिकानों पर रेड की जा रही है। कौन हैं गिरफ्तार आरोपी हालांकि पुलिस ने अभी दोनों आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि दोनों की उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच है और दोनों ही लंबे समय से छोटे स्तर पर नकली नोटों का लेन-देन करते रहे हैं। एक आरोपी कंप्यूटर ग्राफिक डिजाइनिंग का जानकार बताया जा रहा है, जिसने नकली करेंसी की प्रिंटिंग में तकनीकी भूमिका निभाई, जबकि दूसरा सप्लाई और नेटवर्किंग का काम देखता था। कैसे तैयार की जाती थी नकली करेंसी जांच में सामने आया है कि नोटों की प्रिंटिंग के लिए हाई-रेज़ोल्यूशन इंकजेट प्रिंटर और विशेष प्रकार का पेपर इस्तेमाल किया गया था, जिसकी सतह असली करेंसी के कागज़ जैसी महसूस होती है। सिक्योरिटी फीचर को कॉपी करने के लिए थ्री-लेयर प्रिंटिंग और ट्रांसपेरेंट शीट तकनीक अपनाई गई। इतना ही नहीं, नोटों के बीच में वाटर मार्क जैसी पारदर्शी छवि डालने के लिए विशेष कैमिकल का प्रयोग किया गया, जिससे नकली नोट असली जैसे दिखते और महसूस होते थे। त्योहारी बाजार पर असर धनतेरस और दीपावली के समय बाजारों में भारी मात्रा में कैश का प्रवाह रहता है। एसओजी अधिकारियों का कहना है कि गिरोह की योजना थी कि त्योहारों के दौरान नकली नोट बाजार में खपाकर करोड़ों का लाभ कमाया जाए। पुलिस के अनुसार, अगर समय रहते यह खेप पकड़ी नहीं जाती तो नकली नोट बड़ी मात्रा में आम लोगों के बीच पहुंच सकते थे, जिससे स्थानीय व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक नुकसान होता। आगे की जांच और संदिग्ध नेटवर्क अब एसओजी की विशेष टीमें इस बात की जांच कर रही हैं कि ये नकली नोट कहां से प्रिंट होकर जयपुर तक पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक सुराग मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों की ओर इशारा कर रहे हैं, जहां पहले भी नकली नोट छापने की गतिविधियां पकड़ी जा चुकी हैं। जांच एजेंसी इस संभावना पर भी विचार कर रही है कि यह नेटवर्क विदेशी नकली करेंसी रैकेट से जुड़ा हो सकता है, खासकर बांग्लादेश और नेपाल बॉर्डर से आने वाली फर्जी करेंसी से। ADG वी.के. सिंह का बयान एडीजी सिंह ने बताया — “त्योहारों के मौसम में नकली नोटों की संभावना को देखते हुए हमने पहले से ही निगरानी बढ़ाई थी। यह गिरफ्तारी हमारी टीम की सतर्कता का परिणाम है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और इनके अन्य साथियों की तलाश में टीमें रवाना की गई हैं।” उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे कैश ट्रांजैक्शन के दौरान सावधानी बरतें, खासकर ₹500 और ₹2000 के नोटों को ध्यान से जांचें। नकली नोटों की पहचान कैसे करें पुलिस और आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आम जनता नीचे दिए गए फीचर्स से नकली नोटों की पहचान कर सकती है: महात्मा गांधी की तस्वीर के दाहिने हिस्से पर रंग बदलने वाली सुरक्षा पट्टी देखें। नोट को तिरछा करने पर “भारत” और “RBI” लिखा हुआ वाटर मार्क दिखाई देता है। संख्या पैनल में अंक आकार में बढ़ते क्रम में होने चाहिए। नोट की सतह पर उभरी हुई छपाई महसूस की जा सकती है। अगर कोई नोट संदिग्ध लगे तो तुरंत निकटतम पुलिस थाने या बैंक शाखा में जानकारी दें। त्योहारों के बीच जयपुर में नकली नोटों का इतना बड़ा जाल पकड़ा जाना राज्य पुलिस और एसओजी की सजगता को दर्शाता है। हालांकि इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अपराधी अब तकनीक का इस्तेमाल कर … Read more

नकली करेंसी रैकेट का भंडाफोड़, पंजाब में बरामद हुए लाखों रुपये

दीनानगर  पुलिस को आज एक बड़ी सफलता मिली है। सूचना के आधार पर पुलिस ने दो व्यक्तियों के पास से लाखों रुपये की नकली भारतीय मुद्रा बरामद की है। इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीएसपी दिनानगर, रजिंदर सिंह मिन्हास ने बताया कि पुलिस को सुनील कुमार, निवासी तालाबपुर पंडोरी, ने शिकायत दी कि उनके इलाके में ठेकेदार कमलदीप सिंह, पुत्र मोहन सिंह, निवासी संतनगर, थाना सिटी गुरदासपुर, नकली भारतीय मुद्रा का इस्तेमाल कर रहा है। इस पर कार्रवाई करते हुए थाना दौरागला पुलिस टीम ने आरोपी कमलदीप सिंह को पकड़कर उसके पास से 7 नकली 500 रुपये के नोट (करीब 3,500 रुपये) बरामद किए। कड़ी पूछताछ के बाद उसके पीछे के लिंक की जांच की गई। इसके बाद आरोपी निर्मल सिंह, पुत्र दियाल सिंह, निवासी बसंतकोट, थाना कोटली सूरत मल्लियां, को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से 400 नकली 500 रुपये के नोट (करीब 2 लाख रुपये) बरामद हुए।   डीएसपी ने बताया कि दोनों का पुलिस रिमांड लेकर कड़ी पूछताछ की जा रही है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं। इनके खिलाफ थाना दौरागला में अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अगली कार्रवाई शुरू कर दी गई है।