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118 पासपोर्ट और फर्जी दस्तावेज बरामद, खाड़ी देशों में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह गिरफ्तार

 पटना  गांधी मैदान थाने की पुलिस ने विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर युवाओं से मोटी रकम ऐंठने और फर्जी दस्तावेज के आधार खाड़ी देशों में भेजने वाले वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। एग्जीबिशन रोड स्थित चांदी व्यापार भवन की पांचवीं मंजिल पर वैशाली ट्रेवल्स कंसल्टेंसी सर्विस के नाम से चल रहे कार्यालय में छापेमारी के दौरान पुलिस को फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क चलने के संकेत मिले। कार्यालय से बिहार, असम सहित अन्य राज्यों के अलग-अलग लोगों के नाम के 118 पासपोर्ट, विभिन्न संस्थाओं को फर्जी अनुभव सर्टिफिकेट, पैथाेलाजी जांच का बुकलेट, फर्जी इंटरव्यू लेटर दस्तावेज बरामद किए गए हैं। एग्जीबिशन रोड में वैशाली ट्रेवल्स कंसल्टेंसी पर छापामारी बरामद पासपोर्ट का सत्यापन कराया जा रहा है। मौके से गिरोह के तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें वैशाली के महनार निवासी तनवीर आलम, जहानाबाद के मकदुमपुर निवासी शाहिद अनवर और गर्दनीबाग निवासी तौसिफ आलम शामिल हैं। साथ ही कार्यालय से विभिन्न संस्थाओं के अनुभव प्रमाणपत्र, पैथोलाजी जांच पर्चियों की बुकलेट, फर्जी इंटरव्यू लेटर, तीन लैपटाप, एक सीपीयू, पांच मोबाइल और 1.44 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। साथ ही ओमान की सात रियाल, दुबई की 210 दिरहम और सऊदी अरब की 1000 रियाल विदेशी मुद्रा भी मिली है। गांधी मैदान थानाध्यक्ष ने बताया कि बरामद पासपोर्ट का सत्यापन कराया जा रहा है। इनके पास से कई फर्जी सर्टिफिकेट मिले हैं। छानबीन में पता चला कि यह गिरोह विदेश भेजने के नाम पर बिहार सहित दूसरे राज्यों के लोगों से मोटी रकम लेकर फर्जीवाड़ा कर रहा था। गिरोह में कई लोगों की संलिप्तता सामने आ रही है। दस्तावेजों का खेल कर अलग से वसूलते थे रकम प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह विदेश में नौकरी की तलाश करने वाले लोगों को अपने जाल में फंसाता था। उन्हें विदेश में नौकरी, बेहतर वेतन और जल्द वीजा दिलाने का भरोसा दिया जाता था। गिरोह के सदस्य खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर प्रत्येक व्यक्ति से दो से तीन लाख रुपये लेते थे। पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज तैयार कराने के नाम पर अलग से रुपये वसूल रहे थे। छानबीन में चार सौ से अधिक लोगों को विदेश भेजने की बात सामने आ रही है। अनुभव की जरूरत पड़ने पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे। कार्यालय से पैथालाजी जांच के बुकलेट मिलने से आशंका है कि अभ्यर्थियों की मेडिकल प्रक्रिया से जुड़े कागजात भी फर्जी तरीके से तैयार किए जाते थे। इसके बाद फर्जी इंटरव्यू लेटर के जरिए अभ्यर्थियों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि विदेश में नौकरी की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। ऐसे जुड़ी थी गिरोह की कड़ियां पुलिस अब गिरोह की पूरी चेन खंगाल रही है। यह भी पता किया जा रहा है कि अभ्यर्थियों को गिरोह तक कौन पहुंचाता था, पासपोर्ट कौन जमा करता था, फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र और मेडिकल दस्तावेज कौन तैयार करता था और विदेश में नौकरी या वीजा के नाम पर रकम लेने के बाद पैसा किन लोगों तक पहुंचता था? बरामद तीन लैपटाप और पांच मोबाइल पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हो सकते हैं। इनके जरिए अभ्यर्थियों की सूची, रकम के लेन-देन, एजेंटों से बातचीत और गिरोह के दूसरे सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। बरामद लैपटाप और सीपीयू की जांच से भी यह जानकारी मिलने की उम्मीद है कि कितने लोगों से नौकरी के नाम पर रकम ली गई थी और कितने लोगों को विदेश भेजने की प्रक्रिया के नाम पर फर्जी दस्तावेज दिए गए।