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Fatty Liver Alert: AIIMS डॉक्टर बोले- तुरंत छोड़ दें ये 4 चीजें, शराब जितना पहुंचाती हैं लिवर को नुकसान

 नई दिल्ली शराब पीने से लिवर खराब होता है ये बात तो अधिकतर लोग जानते हैं, लेकिन खाने की कुछ ऐसी चीजें भी हैं जो लिवर को शराब की तरह ही नुकसान करती हैं. इनके कारण लिवर खराब हो सकता है. फैटी लिवर जैसी बीमारी भी हो रही है. शराब न पीने से लिवर के खराब होने को नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहते हैं. देश में बीते कुछ सालों में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसका प्रमुख कारण कुछ फूड हैं।  मेडिकल जर्नल द लैंसेट की स्टडी बताती हैं कि भारत में हर 10 में से लगभग 4 वयस्क नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज से पीड़ित हैं . द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित इस रिसर्च में  7,764 वयस्कों का फैटी लिवर का टेस्ट किया गया. इसमें से 39 प्रतिशत को नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) थी. रिसर्च में कहा गया है कि अगर फैटी लिवर के बढ़ते मरीजों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में सिरोसिस, लिवर कैंसर के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।  शराब न पीने वालों का लिवर क्यों हो रहा खराब इस बारे में डिटेल में जानने के लिए आजतक.इन ने दिल्ली AIIMS में  Department of Gastroenterology and Human Nutrition विभाग में प्रोफेसर डॉ. शालीमार से बातचीत की है. वह कहते हैं कि जब लिवर में 5 फीसदी से अधिक फैट जमा हो जाता है तो उसको फैटी लिवर कहते हैं. फैटी लिवर की बीमारी इस अंग के खराब होने की शुरुआत है. फैटी लिवर दो प्रकार का होता है. एक है अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज ( शराब पीने से लिवर का फैटी होना) और दूसरी है नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज. अब देखा जा रहा है कि नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज भी तेजी से बढ़ रही है. यह वह लोग हैं जो शराब नहीं पी रहे हैं, लेकिन फिर भी लिवर खराब हो रहा है. इसका प्रमुख कारण गलत खानपान है।  कौन से ऐसे फूड हैं जो लिवर को नुकसान कर रहे हैं अगर कोई व्यक्ति खाने में बहुत अधिक तेल का इस्तेमाल करता है और मीठा जरूरत से ज्यादा खाता है तो उसको फैटी लिवर के होने का खतरा होता है. भले ही वह शराब नहीं पीता है तो भी उसको यह हो सकता है. आजकल एक और बड़ी समस्या यह भी देखी जा रही है कि लोग कई तरह की दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के खा रहे हैं. कुछ लोग ऐसा सालों से कर रहे हैं. इससे लिवर पर गंभीर असर हो रहा है. बिना जरूरत के दवाएं खाना लिवर को खराब करता है .सिर्फ फैटी लिवर ही नहीं ये लिवर की कई बीमारियों का कारण बन सकता है।  डॉ. शालीमार कहते हैं कि अब कई लोग फास्ट फूड भी ज्यादा खाते हैं. जैसे बर्गर, पिज्जा और दूसरी ऐसी चीजें. ये आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं. जब इन बैक्टीरिया को नुकसान होता है तो फिर इसका असर लिवर पर भी होता है. कुल मिलाकर ज्यादा तेल, मीठा, फास्ट फूड और बिना वजह दवाएं खाने की आदत लिवर को शराब जितना नुकसान कर सकती हैं।  पतले लोगों को भी क्यों हो रहा फैटी लिवर अगर किसी व्यक्ति का खानपान ठीक नहीं है तो भले ही वह पतला है तो भी उसको लिवर की बीमारी हो सकती है. ऐसा गलत खानपान से होता है. बीते कुछ सालों में इस तरह के मामले सामने आ भी रहे है. लोग कहते हैं कि वह पतले हैं और शराब भी नहीं पीते हैं फिर भी उनको लिवर की बीमारी क्यों हो रही है. इसका जवाब यही है कि ये लोग खानपान का ध्यान नहीं रख रहे हैं. फास्ट फूड, तेल और चीनी को जरूरत से ज्यादा खा रहे हैं।  लिवर को फिट रखना है तो इन बातों का रखें ध्यान तेल, मैदा, चीनी का सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें  लंबे समय तक भूखा न रहें.  शराब का सेवन न करें.  डॉक्टर की सलाह के बिना खुद से कोई दवाएं न खाएं 

लिवर हेल्थ का सीक्रेट: फैटी लिवर रिवर्स करने वाले 3 बेस्ट ड्रिंक्स

  खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खान-पान के कारण आजकल फैटी लिवर  की समस्या काफी आम हो गई है। यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें लिवर के सेल्स में एक्स्ट्रा फैट जमा हो जाता है। अगर समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर लिवर डिजीज का कारण बन सकता है। हालांकि, लाइफस्टाइल में बदलाव और डाइट में कुछ खास ड्रिंक्स को शामिल करके इस समस्या को कम किया जा सकता है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने फैटी लिवर ठीक करने लिए 3 ऐसे ड्रिंक्स, जो फैटी लिवर के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। आइए जानें इन ड्रिंक्स के नाम। ग्रीन टी ग्रीन टी को स्वास्थ्य के लिए एक वरदान माना जाता है, और यह लिवर के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसमें कैटेचिन है, जो बहुत पावरफुर एंटीऑक्सीडेंट है। यह लिवर में फैट के मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देता है और फैट के जमाव को कम करने में सहायक है। साथ ही, यह लिवर की सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है, जिससे लिवर के सेल्स को डैमेज से बचाया जा सकता है। नियमित रूप से ग्रीन टी पीने से लिवर एंजाइम के सीक्रेशन में सुधार होता है। ब्लैक कॉफी बिना दूध और चीनी वाली ब्लैक कॉफी फैटी लिवर के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। कॉफी एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनोल पाए जाते हैं, जो लिवर फाइब्रोसिस के जोखिम को कम करने में सहायक है। साथ ही, यह लिवर की सूजन को कम करती है और फैट के जमाव को रोकने में मदद करती है। चुकंदर का जूस चुकंदर का जूस पोषक तत्वों और पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट का खजाना है। इसमें बीटाइन और बीटालेन जैसे कंपाउंड भरपूर मात्रा में होते हैं। यह लिवर पर फैट के जमाव को कम करता है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है। साथ ही, इसमें मौजूद नाइट्रेट्स ब्लड फ्लो को बेहतर बनाते हैं, जो लिवर के फंक्शन के लिए काफी फायदेमंद है। चुकंदर का जूस एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, लेकिन इसमें नेचुरल शुगर भी होती है। इसलिए इसे संतुलित मात्रा में ही पिएं। डायबिटीज के मरीजों को इसे पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। ये तीनों ड्रिंक्स फैटी लिवर को ठीक करने में मदद करते हैं। लेकिन इन्हें फैटी लिवर के इलाज की तरह न लें। इन ड्रिंक्स के अलाव, हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज और डॉक्टर की सलाह मानना भी बहुत जरूरी है।

फैटी लिवर बना IT सेक्टर की बड़ी चुनौती, डेस्क जॉब करने वाले भी हाई रिस्क में

इंदौर  भारत में फैटी लिवर का जाल धीरे-धीरे अपने पैर पसार रहा है और चौंकने वाली बात ये है कि सबसे ज्यादा इस बीमीरी की चपेट में देश के युवा आए हैं. ऐसा हम नहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने संसद में हैरान करने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक स्टडी के अनुसार, हैदराबाद में IT सेक्टर में काम करने वाले 84% से अधिक वर्कर्स फैटी लिवर की परेशानी से जूझ रहे हैं. इस खुलासे ने सभी को चौंका दिया है क्योंकि आईटी सेक्टर में ज्यादातर 25 से 45 साल की उम्र के लोग काम कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि फैटी लिवर कितनी गंभीर बीमारी है और क्यों ये डेस्क जॉब या युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है. फैटी लिवर क्या होता है? जो लोग फैटी लिवर का नाम पहली बार सुन रहे हैं वो सबसे पहले ये जान लें कि जब हमारी बॉडी में जरूरत से ज्यादा फैट लिवर में जमा हो जाता है तो उसे फैटी लिवर कहते हैं. इस बीमारी की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि शुरुआत में इसका कोई लक्षण दिखाई नहीं देता, मगर वक्त के साथ ये धीरे-धीरे लिवर को डैमेज कर देता है और सूजन-सिरोसिस जैसी सीरियस बीमारियों की वजह बन सकता है. फैटी लिवर को स्टीटोसिस भी कहते हैं और ये दो प्रकार का होता है. अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (AFLD) अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज उन लोगों को ज्यादा होता है जो लिमिट से ज्यादा शराब पीते हैं. नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) ऐसा नहीं है कि सिर्फ पीने से ही फैटी लिवर होता है, मोटापा, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से भी फैटी लिवर होता है जिसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहते हैं. बता दें कि अब शराब पिए बगैर लिवर से संबंधित जो बीमारियां होती है, वे सब अब एनएएफएलडी के अंदर आती हैं.  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दी चेतावनी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने संसद में बताया कि सरकार की तरफ से मेटाबोलिक डिसफंक्शन से जुड़ी फैटी लिवर डिजीज (MAFLD) को लेकर जागरुकता बढ़ाने और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के लिए एक ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी की गई हैं. जगत प्रकाश नड्डा की तरफ से सभी राज्यों को जांच के निर्देश भी दिए गए हैं. इसके साथ ही उन्होंने एक चेतावनी भी दी, उन्होंने कहा, ये एक बड़ा स्वास्थ्य खतरे की ओर इशारा करता है और अगर समय रहते लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले टाइम में देश के युवा जनरेशन की हेल्थ को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है.  फास्ट फूड खाने वाले  76.3% लोग पीड़ित   सिर्फ शराब पीने वाले या डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल ही फैटी लिवर होने का कारण नहीं है. आईसीएमआर ने एक रिसर्च की थी, जिसके मुताबिक, हफ्ते में फास्ट-फूड खाने वाले लोगों में 76.3%  लोगो में फैटी मिला है. जयपुर की तीन तहसीलों में हुई रिसर्च में 37.2 फीसदी लोगों में फैटी लिवर पाया गया और इसमें महिलाओं के मुकाबले में पुरुषों की संख्या ज्यादा पाई गई है. IT वर्कर्स में फैटी लिवर होने के कारण  लंबे समय तक बैठकर काम करना: IT सेक्टर में वर्कर्स डेली 8 से 10 घंटे कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं, जिससे फिजिकल एक्टीविटी कम हो जाती है. जंक फूड और खराब डाइट: ऑफिस के बिजी  शेड्यूल में जल्दी-जल्दी में फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक रोजाना की डाइट का हिस्सा बन चुकी है. स्ट्रेस और नींद की कमी: काम का दबाव, रात की शिफ्ट और ज्यादा स्ट्रेस से नींद पर असर पड़ता है, जो बॉडी के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ता है. शराब और मीठा: कुछ लोग स्ट्रेस कम करने के लिए वीकेंड या रोजाना ही शराब पीते हैं और कुछ लोग स्ट्रेस को मीठी चीजे खाकर स्लो करते हैं. इन दोनों के अधिक सेवन से ही लिवर पर इफेक्ट पड़ता है. IT वर्कर्स में फैटी लिवर होने के कारण क्या हैं?  दिल्ली के वसंत कुंज में फोर्टिस अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डॉ. शुभम वात्स्य ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि शराब ना पीने की वजह से भी लोग फैटी लिवर के शिकार हो रहे हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह अनहेल्दी लाइफस्टाइल और मोटापे की बढ़ती दर है. उन्होंन इसके कारण और इससे सुरक्षित रहने के लिए कुछ सुझाव भी दिए थे. क्यों बढ़ा रहा है फैटी लिवर का खतरा? लंबे समय तक बैठकर काम करना: IT सेक्टर में वर्कर्स डेली 8 से 10 घंटे कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं, जिससे फिजिकल एक्टीविटी कम हो जाती है. जंक फूड और खराब डाइट: ऑफिस के बिजी  शेड्यूल में जल्दी-जल्दी में फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक रोजाना की डाइट का हिस्सा बन चुकी है. स्ट्रेस और नींद की कमी: काम का दबाव, रात की शिफ्ट और ज्यादा स्ट्रेस से नींद पर असर पड़ता है, जो बॉडी के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ता है. शराब और मीठा: कुछ लोग स्ट्रेस कम करने के लिए वीकेंड या रोजाना ही शराब पीते हैं और कुछ लोग स्ट्रेस को मीठी चीजे खाकर स्लो करते हैं. इन दोनों के अधिक सेवन से ही लिवर पर इफेक्ट पड़ता है. फैटी लिवर के लक्षण-  आमतौर पर फैटी लिवर के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जब लक्षण दिखाई देते है तब तक हालत बिगड़ चुकी होती है. फैटी लिवर होने के लक्षण- जैसे भूख में कमी, पीलिया होना, डार्क कलर का पेशाब आना, पेट और पैरों में सूजन होना. फैटी लिवर से कैसे बचें?     हेल्दी लाइफस्टाइल     नींद पूरी करना      लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाएं     हेपेटाइटिस ए और बी का टीका लगवाएं     हाइड्रेटेड रहें और तनाव का प्रबंधन करें     शराब ना पिएं     एक्सरसाइज करें