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ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी, तीनों सेना प्रमुख ने बताई भविष्य की तैयारियां और शांति का संदेश

महू  ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार सेना का रण संवाद-2025 कार्यक्रम मंगलवार से महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में शुरू हुआ। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक आधुनिक संघर्ष था, जिससे हमने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे। इनमें से अधिकांश पर अमल चल रहा है और कुछ को लागू भी कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन अब भी जारी है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार शाम को महू पहुंचेंगे। जनरल अनिल चौहान ने भारत की रक्षा क्षमताओं के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बात। उन्होंने कहा, 'दो-तीन दिन पहले, आपने सुना होगा कि DRDO ने एक विशेष एकीकृत प्रणाली का परीक्षण किया, जिसमें QRSAM, VSHORADS और 5-किलोवाट लेजर को इंटीग्रेट किया गया।' जनरल चौहान ने आगे कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मल्टी-डोमेन लेवल पर तैयार रहना होगा। जैसे- इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस के स्तर पर समन्वय की जरूरत है। इसके अलावा संघर्ष की स्थिति में जल, थल, नभ के अलावा समुद्र के भीतर और स्पेस में भी तैयारी की जरूरत है। इसके अलावा इन सभी क्षेत्रों में समन्वय भी जरूरी है। गीता और महाभारत से युद्ध नीति की सीख सीडीएस ने कहा कि गीता और महाभारत युद्ध नीति के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। चाणक्य की नीति ने चंद्रगुप्त मौर्य को विजय दिलाई। कौटिल्य और चाणक्य ने शक्ति, उत्साह और युक्ति को युद्ध नीति का मूल तत्व बताया है। उन्होंने जोर दिया कि शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन आवश्यक है। “हम शांति चाहते हैं, पर शांतिवादी नहीं हो सकते” सीडीएस चौहान ने कहा कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है और यह एक शांतिप्रिय राष्ट्र है। लेकिन किसी भ्रम में न रहें, हम शांतिवादी नहीं हो सकते। उन्होंने उद्धरण देते हुए कहा – “यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध के लिए तैयार रहें।” उन्होंने ‘युद्ध पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र किसी सीमा को नहीं पहचानेंगे। इसलिए सभी सेनाओं को मिलकर त्वरित और निर्णायक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। उन्होंने एआई, साइबर और क्वांटम तकनीक को संयुक्त प्रशिक्षण के साथ जोड़ने पर बल दिया और कहा कि संयुक्त कौशल ही भारत के सैन्य परिवर्तन की नींव है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड कंप्यूटेशन, डेटा एनालिटिक्स, बिग डेटा, LLM (लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स) और क्वांटम टेक्नोलॉजीज के उपयोग को अनिवार्य बताया। जनरल चौहान ने कहा, 'भारत जैसे विशाल देश के लिए इस स्तर की परियोजना में पूरे राष्ट्र की भागीदारी जरूरी होगी। लेकिन हमेशा की तरह, मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय इसे न्यूनतम और बहुत किफायती लागत पर कर लेंगे।' रण संवाद 2025 में तीन संयुक्त सैन्य सिद्धांत—मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, स्पेशल फोर्सेस ऑपरेशंस और एयरबोर्न व हेलिबोर्न ऑपरेशंस जारी किए गए। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन 26 और 27 अगस्त को होना है। वाइस एडमिरल बोले – तकनीक बनी निर्णायक कारक नौसेना के वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने कहा कि ड्रोन, आईएसआर, साइबर ऑपरेशन और सूचना युद्ध जैसे साधन यूक्रेन और गाजा संघर्ष में निर्णायक कारक रहे हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल तकनीक को और अधिक एडवांस बनाने की जरूरत बताई। वायुसेना अधिकारी ने बताई उभरती तकनीकों की अहमियत भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण कमान के एओसी-इन-सी एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने ‘युद्ध को प्रभावित करने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों की पहचान’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने खासतौर से एआई और मशीन लर्निंग, साइबर, क्वांटम, अंतरिक्ष एवं प्रति-अंतरिक्ष तकनीक, निर्देशित ऊर्जा हथियार (DEW) और हाइपरसोनिक तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला। 

सरकारी व्यवस्था मजबूत करे और सभी के लिए उपलब्ध हो

चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा देना सरकार की जिम्मेदारी सरकारी व्यवस्था मजबूत करे और सभी के लिए उपलब्ध हो  मध्य प्रदेश में पीपीपी मोड मेडिकल कॉलेजों का विरोध भोपाल/ इंदौर मध्य प्रदेश सरकार का 25 एकड़ भूमि 1 रुपये के नाममात्र मूल्य पर निजी मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय, स्वास्थ्य सेवाएँ और चिकित्सा शिक्षा, मजबूत सार्वजनिक व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराने की राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी के विपरीत है। इससे पहले, मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ  विभिन्न संगठनों ने  विरोध किया —जिनमें      एमपीएमटीए-एमपी मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन, शासकीय स्वायत्तशासी चिकित्सा अधिकारी संघ, एमपीएमओए-एमपी मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन, ईएसआई चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी चिकित्सा शिक्षा, मध्य प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, मध्य प्रदेश नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन,  कॉन्ट्रैक्चुअल डॉक्टर्स एसोसिएशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार अभियान, संविदा चिकित्सक संघ,  एमपी आशा/उषा सहयोगिनी श्रमिक संघ) जन स्वास्थ्य अभियान मध्य प्रदेश, अस्पताल बचाओं जीव बचाओ संघर्ष मोर्चा मध्य प्रदेश, और अन्य संगठनों ने भाग लिया—इनके दबाव में सरकार को 12 जिला अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने का अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। लेकिन अब, जनविरोध के बावजूद, सरकार भूमि और सुविधायें निजी संस्थाओं को देकर पीपीपी के नाम पर निजीकरण को फिर से लागू कर रही है। यह कोई वास्तविक साझेदारी नहीं है, बल्कि राज्य की मदद से निजी चिकित्सा क्षेत्र का विस्तार है, जिससे धार, बेतुल, पन्ना और कटनी में निजी मेडिकल कॉलेजों का रास्ता साफ हो रहा है। निजीकृत चिकित्सा शिक्षा मॉडल विशेष रूप से निम्न सामाजिक-आर्थिक स्तर के छात्रों के लिए समावेशी नहीं होते हैं बल्कि बहिष्कृत करने वाले होते हैं । ध्यान देने योग्य है कि प्रधानमंत्री की वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना के तहत भारत सरकार पहले ही राज्य और केंद्र के संयुक्त वित्त से मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा कर चुकी है। इसलिए राज्य सरकार को चाहिए कि — 1.    निजी मेडिकल कॉलेजों को सब्सिडी देने के बजाय सार्वजनिक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना जारी रखे। 2.    मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त शिक्षक, बुनियादी ढाँचा और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराकर मजबूत करे। 3.    निजी कॉलेजों के साथ किए गए इन नए पीपीपी मॉडल एमओयू (MoU) की प्रति सार्वजनिक करे और इनको रद्द करें। जिसमें यह स्पष्ट हो:  •    सब्सिडी देने की प्रक्रिया क्या रही। •    क्या छात्रों की फीस पर सीमा (कैप) होगी। •    क्या कम से कम 25% सीटें गरीब छात्रों के लिए निःशुल्क होंगी। •    इस तरह की साझेदारी से लंबे समय में जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। अभी तक का अनुभव बताता है कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में ऐसे पीपीपी मॉडल अक्सर सस्ती, समान और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने में असफल रहे हैं। इसके बजाय, ये छात्रों और मरीजों के लिए खर्च बढ़ाते हैं, असमानता बढ़ाते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर करते हैं। सरकार को इस त्रुटिपूर्ण पहल को छोड़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक चिकित्सा शिक्षा को मजबूत और विस्तारित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि मध्य प्रदेश के सभी नागरिकों को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें। भवदीय  अमूल्य निधि, एस. आर. आजाद, राजकुमार सिन्हा, राहुल यादव, रामप्रसाद काजले, समीना युसुफ, लक्ष्मी कौरव, उमेश तिवारी, विष्णु बाजपेयी  जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश, बारगी बांध प्रभावित एवं विस्थापित संघ, नर्मदा बचाओ आंदोलन, जिंदगी बचाओ अभियान, पत्थर खदान मजदूर संघ, आशा / उषा सहयोगी श्रमिक संघ , टोंको रोको ठोको क्रांतिकारी मोर्चा, कटनी जिला जन अधिकार मंच 

सरकार का वादा निवेशकों को निवेश करने के लिए भूमि की नहीं होगी कमी

बिहार की औद्योगिक तस्वीर बदलने वाले पैकेज को कैबिनेट की मंजूरी  सरकार का वादा निवेशकों को निवेश करने के लिए भूमि की नहीं होगी कमी  बिहार में औद्योगिक क्रांति की ओर बड़ा कदम: नीतीश सरकार ने लॉन्च किया औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025  पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में उद्योगों को नई ऊँचाई देने और युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर सृजित करने के उद्देश्य से बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 (BIPPP-2025) की घोषणा की है। जिसे आज कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गई है। इस पैकेज को सरकार की महत्वाकांक्षी पहल बताया जा रहा है, जिसके तहत अगले पाँच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को रोजगार और नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।  पैकेज की प्रमुख विशेषताएँ  # 40 करोड़ रुपए तक ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention) # नई इकाइयों को 14 वर्षों तक स्वीकृत परियोजना लागत का 300% तक SGST की प्रतिपूर्ति # 30% तक पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) # निर्यात प्रोत्साहन की सीमा 14 वर्षों तक 40 लाख रुपए प्रतिवर्ष # कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, स्टाम्प ड्यूटी एवं भूमि रूपांतरण शुल्क की प्रतिपूर्ति # निजी औद्योगिक पार्कों, पेटेंट पंजीकरण एवं गुणवत्ता प्रमाणन को सहयोग  निवेशकों को भूमि मुफ्त  # सरकार ने निवेशकों के लिए भूमि आवंटन को भी आकर्षक बनाया है। # 100 करोड़ से अधिक का निवेश और 1000 से अधिक रोजगार देने वाली इकाइयों को 10 एकड़ भूमि मुफ्त # 1000 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली कंपनियों को 25 एकड़ भूमि मुफ्त # फॉर्च्यून 500 कंपनियों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क  आवेदन की अंतिम तिथि  इस पैकेज का लाभ उठाने के लिए निवेशकों को 31 मार्च 2026 तक आवेदन करना अनिवार्य होगा।  सीएम नीतीश कुमार का लक्ष्य  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस नई औद्योगिक नीति से बिहार के युवाओं को राज्य के अंदर ही बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। उनका उद्देश्य है कि बिहार आत्मनिर्भर, औद्योगिक रूप से सशक्त और युवाओं का भविष्य सुरक्षित राज्य बने।  बिहार को मिलेगा औद्योगिक बढ़ावा  विशेषज्ञों का मानना है कि BIPPP-2025 से राज्य में न केवल निवेश का माहौल बेहतर होगा, बल्कि बिहार उद्योग और रोजगार का हब बनकर उभरेगा।

BIPPP-2025: बिहार में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए नया निवेश पैकेज लागू

पटना  बिहार में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने बियाडा एमनेस्टी पॉलिसी 2025 के बाद अब नया बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 (BIPPP-2025) लागू किया है। इसके तहतः- (1) 40 करोड़ रूपए तक की ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention) दी जाएगी। (2) नई इकाइयों को स्वीकृत परियोजना लागत का 300 प्रतिशत तक शुद्ध SGST की प्रतिपूर्ति 14 वर्षों के लिए की जाएगी। (3) 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) प्रदान की जाएगी। (4) निर्यात प्रोत्साहन की सीमा 14 वर्ष की अवधि के लए 40 लाख रूपए प्रतिवर्ष होगी। इसके अतिरिक्त कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग, स्टाम्प ड्यूटी एवं भूमि रूपांतरण शुल्क की प्रतिपूर्ति, निजी औद्योगिक पार्कों को सहयोग, पेटेंट पंजीकरण एवं गुणवत्ता प्रमाणन हेतु सहायता दी जाएगी। इस नए औद्योगिक पैकेज 2025 के तहत निवेश को बढ़ावा देने के लिए निःशुल्क भूमि आवंटित की जाएगी। 100 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली एवं 1000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने वाली औद्योगिक इकाइयों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। 1000 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली औद्योगिक इकाइयों को 25 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। फॉर्च्यून 500 कंपनियों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। इस औद्योगिक पैकेज 2025 के अंतर्गत लाभ लेने के लिए निवेशकों को 31 मार्च 2026 से पूर्व आवेदन करना अनिवार्य होगा। इस नए औद्योगिक पैकेज 2025 से 5 वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने में सहायता मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य है कि बिहार में उद्योगों को और ज्यादा बढ़ावा मिले, बिहार के युवा दक्ष एवं आत्मनिर्भर हों तथा उन्हें राज्य के अंदर ही अधिक से अधिक रोजगार मिल सके एवं उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। उद्योग विभाग  बिहार औधोिंगक निवेश पोरसाहन पैकेज (BIPp), 2025 की रचीकित के संबंध में। 2. उधोग विभाग  बिहार  में औधोिंगक सेज के िवरतार हेतु भोजपुर (आर)ि जला अ्तगत अंचल-तरारी के मौजा-मिनकप्र थानासंछया-174, रकबा-56.02 एकड मौजा-पटखोली, थानासंया-173, रकबा-15.48 एकड, मौजा-बौरी, थानानं0-175, रकबा-71.53 एकड, मौजा-बेलिउहरी, थानानं0-110, रकबा-9.98; एकड एवं मौजा-र्नी,शाना नं0-172, रकबा-96.47 अथित कुल समिकत रकबा-249.48 एकड भिम का 3आधारभत संरचना िवकास पािधकार, पटना के मायम से िधगहण एवं िधगहण कीपावकिलत रिश 50 52, 62, 22, 910/-(लपये बावन करोडबासठ लाख बाईस हजार नौ सौ दस) माब के यय कीरवीकित के संबंध में। 3. उछोग िवभाग शेखपुरा िजला अलगत अंचल-चेवड़ा, मौजा-हंसापुर थाना नं0-07 एवं मौजा-अरथावाँ, थाना नं0-04 में कुलरकबा-250.06 एकड भिम का आधारभूत संरचना िवकासािधकार, पटना के मायम से िधघहण एवं िधणहण कीपावकिलत रिश 50 42, 16, 30, 233.00 (लपये िबयािलसकरोड सोलह लाख तीस हजार दो सौ तैंतीस) माज केयय की रवीकित के संबंध में। 4. उछोग िवभाग रोहतास िजला अलतगत अंचल-िशवसागर के मौजा-तारडीह, थाना नं -574 में कुल रकबा-492.85 एकड भूमका आधारभूत संरचना ियकास पािधकार, पटना के माะयमसे धगहण एवं िधयहण की पावकिलत रिश कमश:西0 1, 54, 07, 12, 370.00 (सपये एक अरब चौबन करोडसात लाख बारह हजार तीन सौ सतर) माब के यय कीरवीकित के संबंध में। उद्योग विभाग 5. शिवहर जिला अन्तर्गत अंचल तरियानी, मौजा-सलेमपुर थाना नं०-06, रकबा 147.43 एकड़ एवं मौजा बेलाही दुल्लाह, थाना-141 रकबा 122.58 अर्थात समेकित कुल रकबा 270.01 एकड़ भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण एवं अधिग्रहण की प्राक्कलित राशि क्रमशः रु० 1,05,27,12,000/- (रूपये एक अरब पांच करोड़ सताईस लाख बारह हजार) मात्र के व्यय की स्वीकृति के संबंध में। उद्योग विभाग दरभंगा जिला अन्तर्गत अंचल बहादुरपुर, मौजा-तारालाही, थाना नं०-251 एवं मौजा-मोतनाजा तारालाही थाना-252 से कुल रकबा 361.38 एकड़ एवं अंचल-हनुमाननगर, मौजा-बिहारी मुकुन्द, थाना नं 221 एवं मौजा-अम्माडीह, थाना नं०-220 से कुल रकबा 24.07 एकड़ अर्थात समेकित कुल रकबा 385.45 एकड़ भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण एवं अधिग्रहण की प्राक्कलित राशि क्रमशः रू० 3,76,07,79,329.00 (रूपये तीन अरब छिहत्तर करोड़ सात लाख उनासी हजार तीन सौ उनतीस) मात्र के व्यय की स्वीकृति के संबंध में। उद्योग विभाग थाना पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के समीप पूर्णिया जिला अन्तर्गत अंचल-के० नगर के मौजा-बिठनौली खेमचंद, नं०-24 में रकबा 119.55 एकड़, मौजा-गणेशपुर, थाना नं०-36 में रकबा 152.40 एकड़ एवं मौजा-डरवे चकला, थाना नं०-29 रकबा 7.70 एकड़ अर्थात कुल समेकित रकबा-279.65 एकड़ भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण एवं अधिग्रहण की प्राक्कलित राशि रू० 66,91,91,318.00 (रूपये छियासठ करोड़ इकानवें लाख इकानवें हजार तीन सौ अठारह) मात्र के व्यय की स्वीकृति के संबंध में। उद्योग विभाग 8. पटना जिला अन्तर्गत अंचल-फतुहाँ में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (MMLP) परियोजना से सटे भू-भाग में GIFT- सामान औद्योगिक परियोजना के अधीन Fin Tech City विकसित करने हेतु मौजा-जैतीया, थाना नं०-79 में कुल रकबा 242 एकड़ भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण एवं अधिग्रहण की प्राक्कलित राशि 4,08,81,30,503.00 (चार सौ आठ करोड़ इक्यासी लाख तीस हजार पाँच सौ तीन) रूपये मात्र के व्यय की स्वीकृति के संबंध में। ऊर्जा विभाग 9. बिहार राज्य जल विद्युत निगम के अंतर्गत 12 निर्माणाधीन परियोजनाओं में से 09 परियोजनाओं (तेजपुरा, डेहरा, सिपहा, वलिदाद, पहरमा, मथौली, राजापुर, अमेठी एवं डेहरी स्केप) के लिए पुनरीक्षित प्राक्कलित राशि 166.81 करोड़ (एक सौ छियासठ करोड़ इक्यासी लाख) रूपये की स्वीकृति एवं शेष 03 परियोजनाओं (बरबल, रामपुर एवं नटवार) को बन्द करने की स्वीकृति प्रदान करने के संबंध में। 10. जल संसाधन विभाग पटना मुख्य नहर के बायें बांध-सह-सोन सुरक्षा तटबंध पर बैदराबाद में राष्ट्रीय राज्य मार्ग 139 (NH-139) से पालीगंज वितरणी के शीर्ष नियामक तक एवं पालीगंज वितरणी के सेवापथ पर पालीगंज शीर्ष नियामक से कोरियम मोड़ तक कालीकृत सड़क का निर्माण कार्य, प्राक्कलित राशि 10000.00 लाख रूपये (एक सौ करोड़ रूपये) की प्रशासनिक एवं व्यय की स्वीकृति। पथ निर्माण विभाग 11. पथ प्रमंडल बेनीपुर अंतर्गत कुशेश्वर स्थान (एस.एच-56) से फुलतोड़ाघाट पथ के कि०मी० 0.00 से 20.80 तक (कल लंबाई 20.80 कि०मी०) में मिट्टी कार्य, सीमेन्ट कंक्रीट पथ कार्य, आर०सी०सी० उच्चस्तरीय पुल निर्माण कार्य, क्रॉस ड्रेन कार्य, ड्रेन निर्माण कार्य, डायवर्सन निर्माण कार्य, बचाव कार्य, रिटेनिंग वाल निर्माण कार्य, कम्पेन्सेटरी एफोरेटेशन कार्य, युटिलिटी शिफ्टिंग कार्य, भू-अर्जन कार्य, विविध कार्य एवं पथ फर्निचर कार्य सहित उन्नयन / निर्माण कार्य हेतु स्वीकृत्यादेश संख्या 7025 (एस.) डब्लु.ई., दिनांक 11.09. 2018 से प्रदत्त मूल प्रशासनिक स्वीकृत राशि ₹24304.42 लाख का पुनरीक्षित राशि ₹38122.67 लाख (तीन सौ इक्कासी करोड़ बाईस लाख सड़सठ हजार) का प्रथम पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने के … Read more

रायपुर: CM साय ने वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ पैवेलियन का किया दौरा, प्रदेश की संस्कृति रही आकर्षण का केंद्र

वर्ल्ड एक्सपो 2025 में दिखी प्रदेश की संस्कृति और समृद्धि की अद्भुत झलक रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज ओसाका (जापान) में चल रहे वर्ल्ड एक्सपो 2025 के भारत मंडपम के अंतर्गत स्थापित छत्तीसगढ़ पैवेलियन पहुँचे। यहाँ उन्होंने प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और आधुनिक प्रगति को दर्शाती प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि उद्घाटन दिवस पर ही छत्तीसगढ़ पैवेलियन में 22 हजार से अधिक दर्शक पहुँचे। यहाँ आने वाले लोग प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, आदिवासी लोककला, उद्योग और पर्यटन की अनूठी झलक देखकर उत्साहित हुए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपनी परंपरा और आधुनिकता के अनूठे संगम के साथ दुनिया के सामने उभर रहा है। “हमारी पहचान केवल धरोहर और लोकसंस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, नवाचार और वैश्विक सहयोग की दिशा में भी हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।” पवेलियन में छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला, बुनाई, हस्तनिर्मित उत्पाद, हर्बल आइटम्स और पर्यटन स्थलों को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही, प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश अवसर और भविष्य की संभावनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। जापान और अन्य देशों से आए आगंतुकों ने छत्तीसगढ़ के पैवेलियन की सराहना करते हुए विशेष रूप से हस्तशिल्प और बांस उत्पादों, बस्तर आर्ट और लोकसंगीत पर आधारित प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। इससे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच प्रदेश की एक सकारात्मक छवि बनी। मुख्यमंत्री साय ने पवेलियन में मौजूद मेहमानों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ निवेश और साझेदारी के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रदेश के साथ जुड़कर विकास की नई दिशा में कदम बढ़ाने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “वर्ल्ड एक्सपो जैसे वैश्विक मंच पर हमारी भागीदारी यह संदेश देती है कि छत्तीसगढ़ केवल भारत का ही नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारी का भी एक मजबूत केंद्र बन सकता है।” इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न देशों से आए निवेशकों और प्रतिनिधियों से भी चर्चा की। औद्योगिक विकास, पर्यटन संवर्द्धन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर केंद्रित इन मुलाकातों ने भविष्य में सहयोग के नए अवसर खोले। छत्तीसगढ़ पवेलियन की भव्यता और उसमें प्रदर्शित सामग्री ने यह संदेश दिया कि प्रदेश न केवल अतीत की सांस्कृतिक धरोहर से समृद्ध है, बल्कि आने वाले कल का भविष्य-रेडी हब भी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का यह प्रवास छत्तीसगढ़ को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।  

सीएम योगी ने देश के सपूत, अंतरिक्ष यात्री एवं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के लखनऊ आगमन पर नागरिक अभिनंदन में कार्यक्रम में की घोषणा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के नाम पर स्कॉलरशिप का किया ऐलान  – सीएम योगी ने देश के सपूत, अंतरिक्ष यात्री एवं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के लखनऊ आगमन पर नागरिक अभिनंदन में कार्यक्रम में की घोषणा – बोले, प्रदेश का विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के अनुभव का करे इस्तेमाल  – स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले एवं कैरियर बनाने वाले छात्रों को दी जाएगी स्कॉलरशिप – प्रदेश के दर्जन भर से अधिक टेक्निकल इंस्टीट्यूशन में संचालित हो रहे हैं स्पेश टेक्नोलॉजी के कोर्सेज  – शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष यात्रा से प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन, बाढ़, सूखा और कृषि के संकटों से निपटने के लिए दिखाई नई दिशा  लखनऊ  देश को चार दशक के बाद एक भारतीय को अंतरिक्ष यात्रा का अवसर मिला। यह हमारा सौभाग्य है कि यह अवसर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जन्मे ग्रुप कैप्टश शुभांशु शुक्ला काे प्राप्त हुआ। वह सफलतम यात्रा के बाद पहली बार लखनऊ आए हैं। ऐसे में उनका आगमन हम सभी को आनंदित करता है। उनकी अंतरिक्ष यात्रा हम सभी के लिए कोतहुल का विषय थी। हर भारतवासी बड़े विश्वास और आशा भरी निगाहों से उनकी अंतरिक्ष यात्रा को देख रहा था। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लोकभवन के सभागार में आयोजित देश के सपूत, अंतरिक्ष यात्री एवं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के लखनऊ आगमन पर नागरिक अभिनंदन में कार्यक्रम में कही।  कार्यक्रम में ग्रुप कैप्टन के पिता, माता और पत्नी काे किया गया सम्मानित कार्यक्रम में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की माता आशा शुक्ला, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पिता शंभु दयाल शुक्ला और मेयर सुषमा खर्कवाल ने ग्रुप कैप्टन की पत्नी कामना शुक्ला को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से ग्रुप कैप्टन की अंतरिक्ष यात्रा पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखायी गयी।  सीएम ने ग्रुप कैप्टन के नाम पर स्कॉलरशिप का किया ऐलान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के अनुभव का इस्तेमाल विभाग में करने को कहा। इसके अलावा सीएम योगी ने स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए शुभांशु शुक्ला के नाम से स्कॉलरशिप का ऐलान किया। सीएम ने कहा कि 3 वर्ष से 4 वर्ष पहले प्रदेश में स्पेस टेक्नोलॉजी को लेकर किसी भी विश्वविद्यालय, संस्थान में न तो कोई पाठ्यक्रम था, न ही सिलेबस, न डिग्री, न डिप्लोमा और न ही कोई सर्टिफिकेट कोर्स था। वहीं वर्तमान में प्रदेश के दर्जन भर से अधिक टेक्निकल इंस्टीट्यूशन में स्पेश टेक्नोलॉजी को लेकर कोर्सेज संचालित हो रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि भारत के विकास की यात्रा में प्रदेश के संस्थान बराबर सहभागी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत वासियों के सामने वर्ष 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने का लक्ष्य दिया है। इसे साकार करने के लिए विकास के उन सभी क्षेत्र के लिए अपने द्वार खुले रखने होंगे, जहां-जहां आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं। सीएम योगी ने कहा कि शुभांशु शुक्ला के पिता प्रदेश सरकार के सचिवालय प्रशासन में अधिकारी थे। उनके इस गौरवपूर्ण मार्ग पर चलते हुए आज उनके पुत्र ने न केवल उत्तर प्रदेश को बल्कि समूचे देश को गौरान्वित किया है। उन्होंने 18 दिनों की स्पेस यात्रा में पृथ्वी की 320 बार परिक्रमा की। इससे उनकी यात्रा की महत्वपूर्णता और उद्देश्य स्पष्ट होता है। स्पेस टेक्नोलॉजी के उपयोग से प्राकृतिक आपदाओं का किया जा सकता है बेहतर प्रबंधन सीएम ने कहा कि इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन से अंतरिक्ष यात्रा काे लेकर बातचीत हुई, जिसमें ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की यात्रा, अंतरिक्ष मिशन और भविष्य में होने वाली प्रयोगों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 18 दिनों में पूरी पृथ्वी का दौरा किया, जो किसी भी आम नागरिक के लिए अविश्वसनीय अनुभव है। उनका यह अनुभव भविष्य में उत्तर प्रदेश और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। इस यात्रा से ना केवल उन्होंने अंतरिक्ष में अपनी पहचान बनाई, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन, बाढ़, सूखा और कृषि के संकटों से निपटने के लिए भी नई दिशा दिखाई है। सीएम ने कहा कि स्पेस टेक्नोलॉजी के उपयोग से प्राकृतिक आपदाओं का बेहतर प्रबंधन और किसानों की आय में वृद्धि संभव है। सीएम ने कहा कि फिल्म के माध्यम से हम सभी ने देखा कि किन-किन क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं जबकि पहले यह फील्ड हम सभी से अछूती थी। वर्तमान में क्लाइमेट चेंज से हर व्यक्ति जूझ रहा है। ऐसे में इससे निपटने के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी का उपयोग कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) शिक्षा के महत्व पर बल दिया। सीएम ने कहा कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने भी युवाओं से स्पेस टेक्नोलॉजी में करियर बनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि आज के युवा के पास अंतरिक्ष मिशन जैसी नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के अनगिनत अवसर हैं, जो पहले कभी नहीं थे। ग्रुप कैप्टन की अंतरिक्ष यात्रा स्पेस सेक्टर को विकसित करने का अवसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शुभांशु शुक्ला के अनुभव से आने वाले समय में उत्तर प्रदेश और भारत के युवा इस क्षेत्र में और भी अधिक सक्रिय हो सकते हैं। यह यात्रा न केवल स्पेस सेक्टर को विकसित करने का अवसर है, बल्कि यह हमें आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की दिशा भी देती है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने पिछले 11 वर्षों में स्पेस सेक्टर में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की यात्रा के माध्यम से हम 2027 में गगनयान मिशन और 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में बड़े कदम उठा सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रदेश में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए गए हैं। इसके लिए … Read more

रायपुर: ओसाका इन्वेस्टर कनेक्ट में छत्तीसगढ़ ने निवेशकों का दिल जीता

ओसाका इन्वेस्टर कनेक्ट: छत्तीसगढ़ बना निवेशकों का भरोसेमंद विकल्प छत्तीसगढ़ का निवेश-अनुकूल इकोसिस्टम: जापानी कंपनियों ने दिखाई गहरी रुचि रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने जापान प्रवास के दौरान ओसाका में आयोजित प्रतिष्ठित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों, प्रतिभाशाली मानवबल और उद्योग-अनुकूल नीतियों का सशक्त संगम है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत और जापान विश्वास एवं साझा मूल्यों की गहरी डोर से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने जापानी साझेदारों से आह्वान किया कि वे नवाचार, अवसर और साझा समृद्धि से आगे बढ़ रही छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में भागीदार बनें। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सरताज फूड्स, ओसाका को छत्तीसगढ़ में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए 11.45 मिलियन डॉलर (₹100 करोड़) का निवेश प्रस्ताव दिया। यह परियोजना राज्य के फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र को नई ऊँचाई देगी, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करेगी और किसानों को नए अवसर प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से छत्तीसगढ़ की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (B2G) बैठकों के अंतर्गत मुख्यमंत्री साय ने मोराबु हंशिन कंपनी के प्रेसिडेंट एवं रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टर नाओयुकी शिमाडा से भी भेंट की। यह कंपनी कुशल इंजीनियरों, सिस्टम डेवलपमेंट और वर्कफोर्स सॉल्यूशंस के क्षेत्र में अग्रणी है। बैठक में कौशल प्रशिक्षण और वर्कफोर्स एक्सचेंज के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए वैश्विक अवसरों का मार्ग प्रशस्त होगा और राज्य का कौशल तंत्र और अधिक सशक्त बनेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक विशेषताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रचुर खनिज संपदा, सक्रिय सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम, विश्वस्तरीय औद्योगिक ढाँचा और वैश्विक निवेशकों को सहज वातावरण उपलब्ध कराना छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत है। राज्य में किए जा रहे सुधारों और निवेशकों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं की जापानी प्रतिनिधियों ने सराहना की। विशेषकर फूड प्रोसेसिंग, प्रौद्योगिकी और उन्नत वर्कफोर्स सॉल्यूशंस के क्षेत्र में निवेश की इच्छुक कंपनियों ने छत्तीसगढ़ को उपयुक्त अवसरों का प्रदेश बताया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “छत्तीसगढ़ निवेश-अनुकूल इकोसिस्टम प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ वैश्विक साझेदारों को अवसर और सहयोग दोनों मिलते हैं। जापान के साथ हमारी साझेदारी विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित है। ओसाका में हुई चर्चाएँ न केवल निवेश लेकर आएँगी, बल्कि हमारे किसानों को सशक्त बनाएँगी, युवाओं के लिए रोजगार उत्पन्न करेंगी और विकसित छत्तीसगढ़ की नींव को और अधिक मजबूत करेंगी।”

स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास और विस्तार में मध्यप्रदेश का अभूतपूर्व प्रदर्शन: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा

मध्यप्रदेश हैल्थ केयर फैसिलिटी और इनोवेशन में निभा रहा है अग्रणी भूमिका : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास और विस्तार में मध्यप्रदेश का अभूतपूर्व प्रदर्शन देश बदल रहा है, टोटल हैल्थ केयर में हम लिख रहे हैं एक नई कहानी बीमारी का इलाज और बीमार की मदद की व्यवस्था कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में 2003 में 5 मेडिकल कॉलेज थे, आज हैं 32 केंद्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्योपुर और सिंगरौली में नए मेडिकल कॉलेज का किया वर्चुअली लोकार्पण बैतूल, कटनी, धार और पन्ना में निजी भागीदारी से पीपीपी मॉडल से बनेंगे नए मेडिकल कॉलेज पात्र हितग्राहियों को मिली 8 लाख वय वंदना कार्ड की सौगात स्मार्ट चैटबॉट (आयुष्मान सखी) का हुआ शुभारंभ आशा कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद की पहल का हुआ शुभारंभ जबलपुर से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी से जुड़े कई नवाचारों का हुआ शुभारंभ जबलपुर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रसाद नड्डा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरगामी सोच से हमारा देश बदल रहा है। हम विकास के हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के विस्तार में भारत ने पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। दिल्ली से स्वास्थ्य सुधार के लिए तैयार की गई योजनाओं और स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मध्यप्रदेश में अभूतपूर्व तरीके से अमली जामा पहनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश के दूसरे राज्यों के लिए एक उदाहरण बन रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार, विस्तार और नवाचार में मध्यप्रदेश नेतृत्व कर रहा है। केन्द्रीय मंत्री नड्डा सोमवार को जबलपुर के घंटाघर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस सांस्कृतिक सूचना केन्द्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिमोट का बटन दबाकर श्योपुर और सिंगरौली जिले में नवनिर्मित नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों का वर्चुअली लोकार्पण किया। केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने इन दोनों मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स की 100-100 सीटों के प्रवेश के लिए केन्द्र सरकार की ओर से लैटर ऑफ परमिशन भी राज्य सरकार को दिया। उन्होंने कहा कि लैटर ऑफ परमिशन के जरिए इन दोनों मेडिकल कॉलेज के संचालन और प्रवेश की प्रक्रिया भी आज से ही प्रारंभ कर दी गई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने कहा कि हमारी नई स्वास्थ्य नीति में हमने बीमार होने के बाद इलाज करने की पुरानी व्यवस्था के बजाय नागरिक बीमार ही न पड़ें, इसके लिए प्रिवेन्टिव और प्रमोशनल हेल्थ केयर पर फोकस किया। टोटल हैल्थ केयर सेक्टर में हम विकास और विस्तार की एक नई कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का पहला ऐसा देश है, जिसने अपनी अधिकतम आबादी को बीमारी की इलाज के लिए 5 लाख रुपये सालाना हैल्थ कवरेज दिया है। आयुष्मान भारत निरामयम् योजना के जरिए हमने यह कर दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य विभाग का अमला इस उपलब्धि के लिए बधाई और साधुवाद के पात्र हैं। केन्द्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में बैतूल, पन्ना, धार और कटनी जिले में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर स्थापित होने वाले नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के लिए संबंधित निवेशक समूहों के साथ अनुबंध पत्रों पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान भी किए गए। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 8 लाख पात्र वरिष्ठ नागरिकों को ‘वय वंदना कार्ड’ के वितरण कार्य का शुभारंभ करते हुए मंच से 5 वरिष्ठ नागरिकों को वय वंदना के पीवीसी कार्ड का वितरण किया। साथ ही रिमोट का बंटन दबाकर ‘आयुष्मान सखी’ स्मार्ट चैटबॉट और आशा संवाद कार्यक्रम की शुरुआत भी की। मातृ-गर्भावस्था आहार प्रचार सामग्री एवं मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड का विमोचन भी किया गया। राज्य सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने ‘स्वस्थ यकृत मिशन’ के तहत एक करोड़ लोगों की लीवर स्क्रीनिंग पूरी कर ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा हासिल की गई इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले के समर्पण की सराहना की और बधाई दी। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता और मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। स्वस्थ भारत से ही सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण होगा। नड्डा ने कहा कि मध्यप्रदेश हैल्थ सैक्टर में नेतृत्व प्रदान कर रहा है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत सरकार देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर क्रांतिकारी बदलाव कर रही है। पहले हमारी स्वास्थ्य नीति क्योरेटिव थी अर्थात बीमारी के बाद उसका इलाज करना। अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में होलिस्टिक पॉलिसी बनी है, जिसमें प्रिवेंटिव क्योर, हैल्थ प्रमोशन जैसी बातों पर ध्यान दिया गया। एक लाख 77 हजार आरोग्य मंदिरों में डेंटल केयर, मेंटल केयर, कैंसर जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग शुरू की गई। 30 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति की आरोग्य मंदिर के माध्यम से हेल्थ स्क्रीनिंग शुरू की गई। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि देश में सबसे अच्छा हैल्थ सिस्टम है। पांच करोड़ से अधिक माताओं और बच्चों की स्क्रीनिंग भारत सरकार डिजिटली करती है। आशा वर्कर्स ने अंतिम पंक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाया है। गर्भावस्था के समय महिलाओं के 5 चैकअप होते हैं। पांच करोड़ एंटी नेटल चेकअप हमारे रोबस्ट हेल्थकेयर सिस्टम को दर्शाता है। इसी प्रकार वैक्सिनेशन के क्षेत्र में भी आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम है। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि आज देश में 89 प्रतिशत बच्चों का जन्म अस्पतालों में हो रहा है। मातृ मृत्यु-दर आज 130 से घटकर 93 पर आ गई है। शिशु मृत्यु-दर घटकर 39 प्रतिशत पर आ चुकी है, जबकि दुनिया में यह दर 11 प्रतिशत है। देश भर में 5 करोड़ 20 लाख लोगों को हाइपरटेंशन और 3 करोड़ 50 लाख लोग डायबिटीज से पीड़ित मिले हैं। भारत सरकार सिकल सेल एनीमिया की स्कीनिंग के लिए तेजी से कार्य कर रही है। टीबी के मरीजों की भी तेजी से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 12 करोड़ 74 लाख परिवारों अर्थात 50 करोड़ से अधिक आबादी … Read more

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नवीन विधानसभा भवन लोकार्पण के लिए किया आमंत्रित लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता नवीन विधानसभा भवन के उद्घाटन के लिए पीएम मोदी को भेजा निमंत्रण, अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया ऐलान 1 नवंबर राज्योत्सव के दिन प्रस्तावित है नई विधानसभा का लोकार्पण, नया रायपुर में नवनिर्मित ब्रह्मकुमारी शांति शिखर के नए भवन के लोकार्पण पर भी प्रधानमंत्री ने दी स्वीकृति रायपुर /नई दिल्ली  आज छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान संसद भवन में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से आत्मीय मुलाकात की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को 1 नवम्बर 2025 को प्रदेश के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवा रायपुर (अटल नगर) स्थित नवनिर्मित विधानसभा भवन में प्रवेश करने की जानकारी दी। डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री श्री मोदी जी को इस ऐतिहासिक अवसर पर नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण उनके कर-कमलों से करने हेतु सादर आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह गौरवशाली क्षण प्रदेश की जनता और सभी विधानसभा सदस्यों के लिए स्मरणीय होगा। साथ ही, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी सौजन्य भेंट की और उन्हें नवीन विधानसभा भवन के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करने हेतु आमंत्रित किया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधानसभा अध्यक्ष का आमंत्रण स्वीकार किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी से चर्चा करते हुए कहा कि नवा रायपुर में ब्रह्माकुमारी बहनों का नया भवन बन कर तैयार है, जिसके लोकार्पण समारोह में ब्रह्मकुमारी बहनें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आमंत्रित करना चाहती है। डॉ. रमन सिंह के इस आग्रह को प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर ब्रह्मकुमारी संस्थान के नवीन भवन लोकार्पण के लिए भी अपनी स्वीकृति प्रदान की है। आपको बता दे कि, छत्तीसगढ़ प्रदेश अपने गठन के 25 वर्ष पूर्ण कर रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर नवा रायपुर स्थित नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण न केवल प्रदेश की लोकतांत्रिक परंपराओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा, बल्कि यह क्षण छत्तीसगढ़ की प्रगति और सशक्त लोकतंत्र की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

मध्यप्रदेश में ताप्ती रिजर्व: वन्यजीव संरक्षण को मिली नई पहचान, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

भोपाल  मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व 'ताप्ती' को सरकार ने हरी झंडी दे दी है. यह कंजर्वेशन रिजर्व 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल होगा. यह कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीव कॉरिडोर का हिस्सा है. राज्य सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और इसकी सीमाएं भी घोषित कर दी हैं. इसी के साथ एक बार फिर मध्य प्रदेश के वन्य जीवों का घर लगातार बड़ा हो रहा है. यह होगी कंजर्वेशन रिजर्व की सीमाएं मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व ताप्ती की सीमाएं भी निर्धारित कर दी गई हैं. यह कंजर्वेशन रिजर्व दक्षिण और पश्चिम वन मंडल बैतूल की 3 तहसील बैतूल, भीमपुर और भैंसदेही में बना है. इसमें ताप्ती, चिचोली और तावड़ी वन क्षेत्र को शामिल किया गया है. इस रिजर्व क्षेत्र में टाइगर, तेंदुआ, जंगली कुत्ते, बायसन जैसे कई वन्य जीव मौजूद हैं. जानें नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में अंतर      ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 250 वर्ग किलोमीटर होगा.     इसमें 224.844 वर्ग किलोमीटर रिजर्व फॉरेस्ट और 25.156 वर्ग किलोमीटर संरक्षित वन क्षेत्र शामिल है.     यह पहला कंजर्वेशन रिजर्व बन गया है, जो दो टाइगर रिजर्व सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व को जोड़ता है.     रिजर्व में टाइगर, लैपर्ड जैसे वन्य जीवों के अलावा ब्लैक बक, चीतल और जंगली उल्लू भी देखे जा सकते हैं. यह होगा रिजर्व से फायदा एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ए. कृष्णामूर्ति कहते हैं, '' कंजर्वेशन रिजर्व टाइगर रिजर्व और सेंक्चुरी की तरह एक संरक्षित वन क्षेत्र है. इससे बाघ सहित दूसरे वन्य प्राणियों को संरक्षण मिलेगा. यह रिजर्व दो टाइगर रिजर्व के बीच कॉरिडोर का काम करेगा. इससे स्थानीय लोगों को नुकसान के स्थान पर फायदा होगा. इस रिजर्व के बनने से इस क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय लोगों के वनोपज संग्रह के अधिकार खत्म नहीं होंगे. वहीं, आदिवासी पहले के तरह तेंदुपत्ता, चिरौंजी, सूखी लकड़ी, गोंद आदि एकट्ठा कर सकेंगे.'' क्या होता है अलग-अलग रिजर्व में अंतर? आमतौर पर सवाल उठता है कि आखिर नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में क्या अंतर होता है? तो बता दें नेशनल पार्क में मानवीय गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध होता है. इस क्षेत्र में लकड़ी काटने, वनोपज इकट्ठा करने जैसी कोई भी गतिविधि नहीं की जा सकती. जबकि वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में कुछ सीमित मानवीय गतिविधियां जैसे जानवरों को चराने या स्थानीय उपयोग नियंत्रित तरीके से किए जा सकते हैं. जबकि कंजर्वेशन रिजर्व का क्षेत्र बफर जोन जैसा होता हैं. यहां स्थानीय समुदाय की सहभागिता की मदद से वन्य जीवों ओर वन्य क्षेत्र का संरक्षण किया जाता है. इस क्षेत्र में रहने वालों की आजीविका को भी महत्व दिया जाता है.