samacharsecretary.com

महाकाल सवारी उज्जैन में थ्री लेयर सिक्योरिटी के साथ भव्य आयोजन, सुरक्षा में ड्रोन लगाए

उज्जैन महाकाल की सवारी को लेकर पुलिस खासी सतर्क है। सवारी में सुरक्षा के लिए 1400 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे सवारी मार्ग पर बैरिकेड लगाए गए हैं। पुलिस व स्मार्ट सिटी के अलावा 200 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने भी मार्ग डायवर्ट किए हैं। श्री महाकालेश्वर की श्रावण-भाद्रपद मास में निकलने वाली सवारी की सुरक्षा को लेकर पुलिस काफी सतर्क है। इस बार पुलिस ने सवारी मार्ग पर बैरिकेड लगा दिए हैं। सुरक्षा के लिए 1400 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। सवारी मार्ग पर सभी ऊंचे भवनों जवानों को तैनात किया जा रहा है। यहां से संदिग्धों पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा पांच ड्रोन कैमरों से सवारी मार्ग व आसपास की गलियों से छतों की भी जांच कर सतत निगरानी की जा रही है। पुलिस तथा स्मार्ट सिटी के सीसीटीवी कैमरों के अलावा सवारी मार्ग पर 200 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। उज्जैन में थ्री लेयर सिक्योरिटी के साथ भव्य आयोजन उज्जैन में सावन-भादौ माह में बाबा महाकाल की शाही सवारी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 14 जुलाई से शुरू होने वाली इस सवारी में थ्री लेयर सिक्योरिटी सुनिश्चित की गई है। 1300 पुलिसकर्मी, ड्रोन और सीसीटीवी से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी। भक्तों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने चेकिंग तेज कर दी है। इस बार कुल छह सवारियां निकलेंगी, जिसमें भव्य थीम और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे। सवारी की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में सावन-भादौ माह में बाबा महाकाल की सवारी का आयोजन भव्यता के साथ किया जाएगा। पुलिस प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। सवारी मार्ग पर तीन ड्रोन तैनात होंगे, जो हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। इसके अलावा, अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सभी ऊंची इमारतों की छतों की जांच की जा रही है। सादी वर्दी में भी पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि सवारी से 15 दिन पहले ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। सवारी मार्ग पर नजर रख रहे 3 ड्रोन आज श्रावण माह का प्रथम सोमवार है। भगवान श्री महाकालेश्वर श्री मनमहेश के रूप में पालकी में विराजित होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी निकलने के पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री मनमहेश का विधिवत पूजन-अर्चन होगा। उसके बाद भगवान श्री मनमहेश रजत पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर पुलिस बल के सशस्त्र जवान पालकी में विराजित भगवान को सलामी देंगे। उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि सवारी के लिए 3 ड्रोन और थ्री लेयर की सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसकी तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि ड्रोन कैमरे से शहर के संवेदनशील इलाकों महाकाल लोक, मंदिर परिसर और सवारी मार्ग पर नजर रखी जा रही है। शहर में चेकिंग अभियान तेज किया है। सवारी मार्ग पर 3 ड्र्रोन लगाए हैं, जो चप्पे-चप्पे पर लगातार नजर रखेंगे। ड्रोन से ही सभी बिल्डिंग की छत की चेकिंग की जा रही है। ये भी देखा जा रहा है कि छत पर किसी ने ईंट पत्थर तो जमा नहीं कर रखे हैं। सवारी मार्ग की वीडियोग्राफी के साथ महाकाल मंदिर परिसर में लगातार ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है। सवारी का शेड्यूल और थीम इस बार बाबा महाकाल की कुल छह सवारियां निकलेंगी, जिसमें चार सावन माह (14, 21, 28 जुलाई और 4 अगस्त) और दो भादौ माह (11 और 18 अगस्त) में होंगी। पहली सवारी वैदिक उद्घोष की थीम पर होगी, जबकि पांचवीं सवारी धार्मिक थीम पर आधारित होगी, जिसमें श्री कृष्ण पाथेय और मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थलों की झांकियां शामिल होंगी। अंतिम राजसी सवारी 18 अगस्त को भव्य रूप में निकाली जाएगी, जिसमें 70 से अधिक भजन मंडलियां प्रस्तुति देंगी। श्रद्धालुओं की सुविधा और नियम पुलिस ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। सवारी के दौरान सेल्फी लेने पर प्रतिबंध रहेगा, ताकि अव्यवस्था और हादसों को रोका जा सके। सवारी मार्ग पर मोबाइल डिटेक्शन टीम तैनात होगी, जो नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करेगी। इसके अलावा, सवारी के दिन स्कूलों की छुट्टी रहेगी, ताकि भीड़ और यातायात की समस्या कम हो। बड़नगर, रतलाम, नागदा मंदसौर एवं नीमच जाने वाले वाहन शांति पैलेस चौराहे से डायवर्ट रहेंगे। देवास गेट बस स्टैंड से भारी वाहन एवं बसें हरिफाटक टी एवं हरिफाटक चौराहे तरफ नहीं जा सकेंगे। चार पहिया वाहन हरिफाटक टी से बेगमबाग, कोट मोहल्ला एवं गोपाल मंदिर तरफ नहीं जा सकेंगे। चार पहिया वाहन दौलतगंज चौराहे से कोट मोहल्ला, तेलीवाड़ा चौराहे से दानीगेट तरफ, कार्तिक चौक से हरसिद्धि पाल तरफ नहीं जा सकेंगे। इन मार्गों को किया गया प्रतिबंधित     देवासगेट चौराहे से दौलतगंज चौराहा की ओर।     इंदौरगेट से दौलतगंज की ओर।     यादव धर्मशाला, बेगमबाग से महाकाल घाटी की ओर।     हरसिद्धि की पाल से गुदरी चौराहा की ओर।     दानीगेट से ढाबा रोड, कमरी मार्ग की ओर।     जूना सोमवारिया से केडी गेट की ओर। यहां इतने वाहनों की रहेगी पार्किंग व्यवस्था     मन्नत गार्डन पार्किंग में 450 वाहनों की क्षमता है।     वाकणकर ब्रिज के नीचे 400 वाहनों की पार्किंग व्यवस्था।     कर्कराज पार्किंग में 1000 चार पहिया वाहनों की क्षमता।     भील समाज पार्किंग में 700 चार पहिया वाहनों की क्षमता।     कलोता समाज धर्मशाला में 2000 दो पहिया वाहनों की क्षमता।     नृसिंहघाट पार्किंग में 250 चार पहिया वाहन रखे जा सकेंगे। यहां भी रख सकेंगे वाहन     उपरोक्त पार्किंग भर जाने के बाद उजड़खेडा चौराहा से मुरलीपुरा, शंकराचार्य चौराहा से वाहनों को कार्तिक मेला मैदान पार्किंग में भेजे जाएंगे।     बड़नगर, रतलाम, नागदा की ओर से आने वाले दर्शनार्थी अपने चार पहिया वाहन कार्तिक मेला ग्राउंड में पार्क कर सकेंगे। इसके अलावा छोटी रपट से गणगौर दरवाजा होते हुए रामानुज कोट से हरसिद्धि की पाल पार्किंग में वाहन रख सकेंगे।     आगर रोड से आने वाले दर्शनार्थी अपने वाहन मकोडिया आम चौराहा, खाक चौक, जाट धर्मशाला, पिपलीनाका, जूना सोमवारिया से होते हुए … Read more

पहले सावन सोमवार को महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़, उमड़ा जनसैलाब

उज्जैन सावन मास की शुरुआत होते ही देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। सावन माह के पहले सोमवार को मध्यप्रदेश के उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), मुंबई, मेरठ और देहरादून सहित कई शहरों में श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लगी रहीं। भक्त भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए सुबह से ही कतार में लग गए थे। वहीं पुसिल-प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था कर रही है। जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया है और सीसीटीवी कैमरों से बराबार निगरानी भी की जा रही है। दरअसल, श्रावण मास के पहले सोमवार पर उज्जैन में रात 2:30 बजे महाकालेश्वर मंदिर के कपाट खोले गए।  इसके बाद सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। फिर भगवान से आज्ञा लेकर चांदी का पट खोला गया। जल से भगवान महाकाल का अभिषेक करने के पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। भगवान महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और आभूषण के साथ भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट से श्रृंगार किया गया। इसके बाद भस्म चढ़ाई गई। महाकाल ने शेषनाग का मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला के साथ-साथ सुगंधित पुष्प से बनी फूलों की माला धारण की। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया। ओंकारेश्वर में मंगला आरती खंडवा के ओंकारेश्वर में सुबह 5 बजे मंगला आरती हुई। ओंकार महाराज का फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। नैवेद्य में 56 भोग अर्पित किए गए। वहीं ग्वालियर में अचलेश्वर महादेव मंदिर को फूलों से सजाया गया है। सुबह 4 बजे से ही भक्त यहां भोले को अभिषेक करने पहुंच गए। छतरपुर के जटाशंकर धाम को फूलों से सजाया गया है। यहां आसपास से आए श्रद्धालुओं की भीड़ कुंड में स्नान के बाद भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंच गई। शिवलिंग का किया जलाभिषेक राजस्थान के जयपुर में झारखंड महादेव मंदिर बहुत प्रशिद्ध है। यहां पवित्र श्रावण मास के पहले सोमवार को भक्तों की भीड़ उम पड़ी। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त शिवलिंग का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करते नजर आए। वहीं दिल्ली के छतरपुर मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंचे। यहां सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। काशी में श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा उत्तर प्रदेश के अयोध्या में सावन माह के पहले सोमवार को नागेश्वर नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं पर जिला प्रशासन ने पुष्प वर्षा की। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा, विशेष कार्यपालक अधिकारी पवन प्रकाश पाठक, नायब तहसीलदार मिनी एल शेखर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं की सेवा की। हरिद्वार में उमड़ी भारी भीड़ उत्तराखंड के हरिद्वार में सावन माह के पहले सोमवार को दक्षेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक कर प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त कर किए। इस दौरान पूर अंचल भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा।

यामाहि ने मध्यप्रदेश को निवेश के लिये हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोहम्मद यामाहि को दिया मध्यप्रदेश आने का न्यौता मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अल यामाहि से मुलाकात यामाहि ने मध्यप्रदेश को निवेश के लिये हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया द्विपक्षीय साझेदारियों में मध्यप्रदेश के महत्वपूर्ण भागीदार बनने की जताई आशा मध्‍यप्रदेश में औद्योगिक पार्क-फार्मास्यूटिकल्स-पर्यटन में निवेश के उत्कृष्ट अवसर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को दुबई में अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अल यामाहि से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की उद्योग हितैषी, सरल एवं सुगम नीतियों और निवेश को प्रोत्साहन देने वाली सुविधाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने अल यामाहि को प्रदेश में आयोजित होने वाली एनर्जी समिट में शामिल होने के लिए आमंत्रण भी दिया। संयुक्त अरब अमीरात के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की सक्रिय और रचनात्मक भूमिका का उल्लेख करते हुए ऊर्जा, खनिज, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रसंस्करण और हरित निवेश के क्षेत्र में सहयोग की मंशा दोहराई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की सराहना करते हुए आशा जताई कि प्रदेश इन द्विपक्षीय साझेदारियों में सक्रिय और महत्वपूर्ण भागीदार बनेगा। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अल यामाहि का अभिनंदन किया और हाल ही में अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि अरब के 22 खाड़ी देशों की लोकतांत्रिक संस्था का नेतृत्व करना बड़ी उपलब्धि है और नए अध्यक्ष के नेतृत्व में यह संस्था निश्चित रूप से नई ऊंचाइयों को छुएगी। अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अल यामाहि और मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मुलाकात मैत्रीपूर्ण रही। उन्होंने भारत, विशेष रूप से मध्यप्रदेश के साथ दीर्घकालिक संबंधों को लेकर अपनी गहरी रुचि और प्रतिबद्धता व्यक्त की। यामाहि ने कहा कि वे मध्यप्रदेश को निवेश के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे एवं अरब के 22 देशों में मध्यप्रदेश की मदद करेंगे। उन्होंने राज्य के साथ व्यापार एवं उद्योग के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने की इच्छा भी जताई। यामाहि ने मुख्यमंत्री को “उम्म-ए-अली” दिया आत्मीय संबोधन यामाहि ने यूएई में बसे प्रवासी भारतीयों द्वारा देश के निर्माण में सहयोग के बारे में चर्चा की और उनके योगदान को सम्मानपूर्वक रेखांकित किया। इस विशेष मुलाकात के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आत्मीयता से “उम्म-ए-अली” कहकर संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आत्मीय संबोधन से अभिभूत हुए। उन्होंने डॉ. यादव और उनके परिवार को व्यक्तिगत रूप से अपने घर आमंत्रित भी किया। उन्होंने दोनों देशों के लोगों और उत्पादों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए सहमति दी, जिससे मध्यप्रदेश और यूएई के बीच द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा मिलेगी। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोहम्मद अल यामाहि को बताया कि मध्यप्रदेश भारत का हृदय है, इसकी जनसंख्या 8 करोड़ से अधिक है। मध्यप्रदेश अपने समृद्ध वन क्षेत्र के लिए जाना जाता है। यह वन क्षेत्र वन्यजीवों का आदर्श घर भी है। हमें गर्व है कि मध्यप्रदेश "विश्व की टाइगर राजधानी" है और राज्य बाघों के संरक्षण में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हमने टाइगर रिजर्व की संख्या में वृ‌द्धि भी की है। मध्यप्रदेश भारत और एशिया का एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां अब चीता पाए जाते हैं। विभिन्न देशों से लाए गए चीतों का राष्ट्रीय उ‌द्यान में सफल पुनर्वास किया गया है। हर संभव सहयोग के लिए तैयार : मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश को 'मोस्ट वेलकमिंग स्टेट' के रूप में जाना जाता है, जो हमारे आतिथ्य सत्कार को दर्शाता है। हमारे राज्य में खजुराहो, सांची और भीमबेठका जैसे तीन यूनेस्को विश्व विरासत स्थल हैं। ये हमारी समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। भौगोलिक रूप से "भारत का हृदय" होने से यह निवेश-व्यापार के लिए एक रणनीतिक केंद्र है। साथ ही, यह कृषि समृद्धि में भी अग्रणी है, विशेषकर दालों, सोयाबीन और गेहूं के उत्पादन में कई कीर्तिमान स्थापित किए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की हृदय से सराहना करते हैं। हमारी यह आकांक्षा है कि मध्यप्रदेश इन द्विपक्षीय साझेदारियों में एक सक्रिय और महत्वपूर्ण भागीदार बने। हम हर संभव सहयोग के लिए तत्पर हैं। खनिज संसाधनों की खान है मध्यप्रदेश मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विज्ञान, प्रौ‌द्योगिकी और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात ने अभूतपूर्व प्रगति की है। हम आपके अनुभवों से सीखने और इन क्षेत्रों में संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट्स में सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं। मध्यप्रदेश में सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में बड़ी क्षमता है। प्रदेश को भारत का अन्न भंडार भी कहा जाता है। हम सोयाबीन, गेहूं और बाजरा सहित कई फसलों के सबसे बड़े उत्पादक हैं। यहां खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में विशाल अवसर मौजूद हैं। हमारे पास प्रचुर मात्रा में खनिज संसाधन उपलब्ध हैं, जो विभिन्न उद्योगों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। मध्यप्रदेश में कई क्षेत्रों में निवेश के बेहतर अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े निवेश और सहयोग के लिए तत्पर हैं। हमारे पास गहरे कोयला भंडार हैं और हम कोल बेस्ड मीथेन के निष्कर्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जो ऊर्जा क्षेत्र में नए आयाम खोलता है। मध्यप्रदेश की हस्तशिल्प, कला और कारीगर परंपरा हमारी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। हम इन कुशल कारीगरों को वैश्विक मंच प्रदान करना चाहते हैं और उनके शिल्प को दुनिया भर में पहुंचाना चाहते हैं। मध्यप्रदेश में औ‌द्योगिक पार्क, फार्मास्यूटिकल्स, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी निवेश के उत्कृष्ट अवसर हैं।  

हीरा तो पन्ना में मिलता है, लेकिन मप्र के डायमंड तो दुबई में भी मिल रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश आपको बुला रहा है, बेहिचक निवेश करें, हम भी आपको रिटर्न गिफ्ट देने में कोई कमी नहीं रखेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव म.प्र. ने निवेशकों के लिए 18 पारदर्शी नीतियां लागू की, हमारी नीतियों का भरपूर लाभ उठाएं हीरा तो पन्ना में मिलता है, लेकिन मप्र के डायमंड तो दुबई में भी मिल रहे हैं दुबई में प्रवासी भारतीयों के फ्रैंड्स आफ एमपी इंटरनेशनल समूह से किया आत्मीय संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब देश का सर्वाधिक प्रगतिशील प्रदेश बन गया है। निवेशकों के लिए हमारी सरकार ने सभी द्वार खोल दिए हैं। हमने मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए 18 प्रकार की पारदर्शी औद्योगिक नीतियां लागू की हैं। हमारी सभी औद्योगिक नीतियां बेहद साफ सुथरी हैं। मध्यप्रदेश में आने वाले निवेशकों को किसी भी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। आईए मध्यप्रदेश आपको बुला रहा है, हम पर भरोसा करें, मध्यप्रदेश में निवेश करें, हम भी आपको रिटर्न गिफ्ट देने में कोई कमी नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को दुबई में प्रवासी भारतीयों के फ्रेंड्स ऑफ एमपी इंटरनेशनल समूह के साथ आत्मीय संवाद कर रहे थे। उन्होंने निवेशकों से कहा कि यदि आप मध्यप्रदेश के लोगों को रोजगार देने वाला कोई बड़ा उद्योग लगाते हैं तो हमारी सरकार अगले 10 साल तक प्रति लेबर 5 हजार रुपए की सहायता राशि भी मुहैया कराएगी। यदि मेडिकल एजुकेशन या मेडिकल कॉलेज जैसा बड़ा कोई निवेश करना चाहते हैं तो, हमारी सरकार आपको मात्र एक रूपए में जमीन देगी। उन्होंने कहा कि सरकार हर कदम पर निवेशकों के साथ है। मध्यप्रदेश को अपना दूसरा घर बनाइये और यहां निवेश जरूर कीजिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि दुबई मध्यप्रदेश के लोगों के लिए एक तरह से दूसरी मां के समान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित पारदर्शी नीतियां लागू की हैं। उद्योगपतियों को निवेश करने और इंडस्ट्री शुरू करने के लिए सिंगल विंडो फैसिलिटी प्रदान की जा रही है। उद्योगपतियों को बिजली के बिलों में छूट दी जा रही है। प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और जीआईएस के माध्यम से लगभग 30 लाख करोड़ रूपये का निवेश मिला है। मध्यप्रदेश निवेशकों को आमंत्रित कर रहा है आप लोग आइए और सभी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित कर प्रगति करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि व्यापारी अपनी युक्ति बुद्धि से उद्यमशीलता को बढ़ाते हैं। प्रदेश के पन्ना में हीरा मिलता है। मध्यप्रदेश के हीरे दुबई में भी मिल रहे हैं। उद्योगपति एक मौसम विज्ञानी की तरह हवा का रुख समझ लेते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है, जिन्होंने भारत ही नहीं, दूसरे देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की भी कठिन समय में हर संभव मदद की है। विकास का रास्ता भारत से होकर ही गुजरता है। कई देश भारत के साथ आजाद हुए। आज भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के गरीब और जरूरतमंदों को 4 करोड़ पक्के मकान बनाकर दिए हैं और 80 करोड़ लोगों को नि:शुल्क राशन बांटा जा रहा है। यह संख्या करीब 100 देशों की आबादी के बराबर है।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय लोग दूध में शक्कर की तरह घुल मिल जाते हैं, जो दुनियाभर में मिठास घोल रहे हैं। दुबई में निर्मित स्वामीनारायण मंदिर में सभी संप्रदायों की झलक नजर आती है। भारतीय संस्कृति में सभी का सम्मान है, जो विश्व कल्याण की भावना से ओतप्रोत है। कोविड काल में दूसरे देशों को मेडीसिन भेजकर भारत ने वसुधैब कुटुंबकम की भावना को चरितार्थ किया है। यूएई में रहने वाले मध्यप्रदेश के प्रवासी आज कई लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। नरेश भावनानी ने मंदसौर से आकर अपने पुरुषार्थ के बल पर यूएई में टेक्सटाइल सेक्टर का बड़ा उद्योग स्थापित किया है।   जितेंद्र वैद्य ने बाबा महाकाल के उद्घोष के साथ संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव सामान्य परिवार से आते हैं, जिन्होंने हमेशा मानव सेवा को सर्वोपरि रखा। अपने छात्र जीवन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कई जनहितैषी आंदोलनों में हिस्सा लिया। छात्र जीवन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉलेज के सीनियर्स का सम्मान करते हुए उनके लिए छात्र संघ चुनाव में दावेदारी छोड़ दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में प्रदेश के धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। अब उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ आने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में विकास की नई इबारत लिख दी है। प्रदेश के हर वर्ग को शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। यूएई में भारतीय महावाणिज्यदूत सतीश सिवान ने कहा कि यूएई में 44 लाख प्रवासी भारतीय निवास करते हैं। मध्य प्रदेश न केवल भारत का हृदय प्रदेश है, बल्कि यह यूएई में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए भी हार्ट के समान है। अपर मुख्य सचिव, नगरीय प्रशासन एवं आवास संजय दुबे ने कहा कि दुबई में हुए आत्मीय स्वागत से हम अभिभूत हैं। वर्तमान में राज्य सरकार 13 देशों के साथ मिलकर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा दे रही है। आप सभी यहां मध्य प्रदेश के हृदय के रूप में उपस्थित हैं। मध्य प्रदेश हर सेक्टर के निवेशक को निवेश के लिए आकर्षित कर रहा है। मध्यप्रदेश आर्थिक प्रगति और कृषि समेत अन्य क्षेत्रों में प्रथम स्थान पर है। मध्यप्रदेश वनों से समृद्ध है, जहां बिग कैट फैमिली के सभी वन्यप्राणी मौजूद हैं। प्रदेश में 5 लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क है। प्रदेश रोड, रेल और एयर नेटर्वक से जुड़ा है।    प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला राज्य है। यह पिछले 10 साल से अग्रणी बनी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का फोकस प्रदेश के औद्योगिक विकास पर है। वे प्रदेश के समग्र विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विजन के अनुरूप सरकार ने रीजनल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की और निवेशकों को अवसर उपलब्ध कराए। प्रदेश सरकार ने 18 नई नीतियां लागू की हैं, जो देश में सर्वश्रेष्ठ हैं। भोपाल में फरवरी 2025 में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में लगभग 30.77 लाख करोड़ रूपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त … Read more

भोपाल को जल्द मिलेगी वंदे भारत ट्रेन, बिहार-यूपी के लिए शुरू होगी सेवा

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बिहार के पाटलिपुत्र और यूपी के लखनऊ तक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के रैक अगस्त महीने में मिल सकते हैं। रैक पहुंचते ही ट्रायल शुरु हो जाएंगे। माना जा रहा है कि दोनों राज्यों के वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन सितंबर के आखिरी हफ्ते या फिर अक्टूबर की शुरुआत में हो सकता है। रेल मंत्रालय के आदेश का इंतजार भोपाल से पटना के लिए वीकली ट्रेन छोड़कर कोई और ट्रेन रोजाना नहीं चलती। इसी तरह भोपाल से लखनऊ के लिए चलने वाली ट्रेनें भी वीकली हैं। जिसमें अच्छी-खासी भीड़ रहती हैं। इसी कारण से यात्रियों को टिकट मिलने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इन सब पहलुओं को देखते हुए रेल मंत्रालय ने तकरीबन तीन साल पहले भोपाल से पाटलिपुत्र और लखनऊ के लिए वंदे भारत ट्रेन चलाने की घोषणा की थी। रेल मंत्रालय की हरी झंडी मिलते ही ट्रेन का संचालन शुरु हो जाएगा। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि सिटिंग कोच बेगलुरू में बनाए जाते हैं। स्लीपर कोच चेन्नई में बनते हैं। पहले सिटिंग कोच का रैक भोपाल आएगा। उसके बाद स्लीपर कोच वाले रैक आएंगे। 

राहत की बजाय संकट बनी मेट्रो! भोपाल में लोग परेशान इन 3 वजहों से

भोपाल पुराने शहर के सबसे व्यवस्त मार्गों में से एक बैरसिया पर करोंद चौराहा से सिंधी कालोनी तक मेट्रो की आरेंज लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। मेट्रो का काम करने के लिए कंपनी ने सड़क के बीचों-बीच बेरिकेड्स लगाए हैं, जिनकी वजह से सड़कों की चौड़ाई मुश्किल से 10 फिट की रह गई है। वहीं पसरा अतिक्रमण लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इस वजह से हर दिन इस मार्ग पर घंटों तक लंबा जाम लग रहा है तो वहीं वर्षा के दौरान कीचड़, गड्ढे, जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके बाद भी मेट्रो प्रबंधन, नगर निगम, पुलिस, प्रशासन व्यवस्थाएं नहीं बना पा रहा है।   मेट्रो के लिए खड़े किए जा रहे हैं पिलर बैरसिया रोड पर मेट्रो की आरेंज रेल लाइन के पिलर खड़े किए जा रहे हैं। जिसके लिए यहां पर बेरिकेड्स लगाकर गड्ढों की खोदाई करने के साथ ही पिलर तक खड़े करने का काम चल रहा है। इस काम के शुरू होते ही कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने नगर निगम, प्रशासन, पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों की चौड़ाई यदि कम हो गई है तो अतिरिक्त पट्टी बनाई जाए। सड़क किनारे व फुटपाथ पर पसरे ठेले, दुकानों के अवैध अतिक्रमण को प्रमुखता से हटाया जाए। जिससे वाहनों को आवागमन में समस्या न हो और जाम की स्थिति निर्मित न हो। कलेक्टर के निर्देश पर भी नहीं हुई कोई व्यवस्था कलेक्टर के निर्देश पर भी जिम्मेदार अधिकारी कोई व्यवस्था नहीं बना पाए हैं। नतीजतन इस मार्ग से हर दिन गुजरने वाले एक लाख से अधिक वाहन चालकों को जाम की समस्या से रूबरू होना पड़ रहा है। सड़क खोदाई कर मरम्मत तक नहीं की मेट्रो रेल लाइन के कार्य के दौरान करोंद से लेकर सिंधी कालोनी तक सड़क की खोदाई की गई थी लेकिन इसकी दोबारा से मरम्मत नहीं की गई है। वर्षा के दौरान उखड़ी सड़क पर जलभराव की स्थिति बनती है, गड्ढों से वाहनों को गुजरने में समय लगता है।ऐसे में यह लापरवाही भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती है। अतिक्रमण की बनी परेशानी बीच रास्ते में खड़े रहते हैं ई रिक्शा करोंद चौराहा, डीआइजी बंगला, काजी कैंप और सिंधी कालोनी क्षेत्र में मुख्य सड़क पर जगह कम बची है। इसके बाद भी यहां पर ई रिक्शा, ऑटो और आपे चालक अपना कब्जा जमाए रहते हैं। करोंद चौराहा के चारों तरफ इनका अतिक्रमण है, जिससे दो व चार पहिया वाहनों को निकलने के लिए जगह ही नहीं बचती है। फुटपाथ पर दुकान व ठेले वालों का कब्जा सड़क पर जाम की स्थिति निर्मित न हो इसके लिए अतिरिक्त पट्टी बनाई जानी थी लेकिन कुछ ही जगह बनाई गई थी। यह भी सफल नहीं हुई, क्योंकि करोंद चौराहा से लेकर सिंधी कालोनी तक फुटपाथ पर अवैध दुकानदारों व ठेले वालों ने अपना कब्जा जमा रखा है। वर्षा में उखड़ चुकी है सड़क इन पर पुलिस, प्रशासन, नगर निगम अमले द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। सामांनतर रोड भी खस्ता हाल बैरसिया रोड पर यदि जाम लगता है तो लोग छोला फ्लाईओवर समानांतर रोड से होकर आवागमन कर सकते हैं लेकिन यह भी खस्ता हाल हो गई है। वर्षा में सड़क उखड़ चुकी है तो वहीं दुकानदारों, ठेले वालों ने अतिक्रमण कर रखा है। करोंद मंडी मार्ग होने से इस पर भी जाम लग जाता है। लोग बोले सुबह-शाम रहती है आफत लांबाखेड़ा रहवासी विवेक गौर कहा कहना है कि करोंद चौराहा तक दो पहिया वाहन लेकर जाने से पहले भी सोचना पड़ता है। हालात यह हैं कि इतना लंबा जाम लग जाता है कि जेल रोड तक पहुंचने में ही आधे से एक घंटे तक लग जाते हैं। वहीं करोंद में एडवोकेट कृष्णा शर्मा ने कहा कि मेट्रो का कार्य तेजी से किया जा रहा है लेकिन जिम्मेदार लोगों ने न तो सड़कें चौड़ी की और न ही इन पर पसरा अतिक्रमण हटाया है। यही कारण है कि आमजन हर दिन परेशान हो रहे हैं।  

उज्जैन का सुपर लीग श्रेणी में सम्मानित होना गर्व का विषय

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वच्छता सर्वेक्षण पुरस्कार में मध्यप्रदेश एक बार फिर से गौरवान्वित होगा। उन्होंने बताया कि आगामी 17 जुलाई को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा मध्यप्रदेश के आठ शहरों को स्वच्छता की विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने इस उपलब्धि पर सभी स्वच्छता कर्मी, नगरीय निकायों के महापौर, अध्यक्ष, पार्षद, अधिकारी और कर्मचारियों सहित नागरिकों को बधाई दी है। सुपर स्वच्छ लीग श्रेणी में इंदौर आठवीं बार होगा सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इंदौर शहर को स्वच्छता के लिए सुपर स्वच्छ श्रेणी लीग में आठवीं बार सम्मानित किया जाएगा। इंदौर पूर्व में सात बार देश के स्वच्छतम शहर का पुरस्कार प्राप्त कर चुका है। विगत वर्षों में श्रेष्ठ प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर स्वच्छ लीग पुरस्कार इस वर्ष इंदौर को दिया जाएगा। उज्जैन को 3 से 10 लाख जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में स्वच्छ लीग पुरस्कार प्राप्त होगा, जो गर्व का विषय है। इसी प्रकार 20 हजार से कम आबादी वाले नगरों की श्रेणी में बुधनी नगर को भी सम्मानित किया जाएगा। देश की सर्वश्रेष्ठ राजधानी के रूप में सम्मानित होगा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजधानी भोपाल प्राकृतिक सुंदरता के अलावा स्वच्छता के क्षेत्र में भी आदर्श बना है और इस आधार पर देश की सर्वश्रेष्ठ राजधानी के रूप में सम्मानित होगा। विभिन्न श्रेणियों में ग्वालियर, देवास, शाहगंज और जबलपुर भी पुरस्कृत किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता का जो संकल्प लिया है, उसमें मध्यप्रदेश कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि स्वच्छता सर्वेक्षण के इस मापदंड के आधार पर अपने घर, मोहल्ले, कॉलोनी और नगर को स्वच्छ रखें और इस आदर्श जीवन शैली को दुनिया के बीच प्रदर्शित करने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को नई दिल्ली से दुबई रवाना होने से पहले यह संदेश प्रदेशवासियों के नाम जारी किया।  

ग्वालियर से श्योपुर तक विस्तार, अगस्त में सबलगढ़ और साल के अंत तक श्योपुर तक पहुंचेगी ट्रेन

ग्वालियर उत्तर मध्य रेलवे द्वारा ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट के तहत अगस्त माह में सबलगढ़ तक मेमू ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में यह ट्रेन कैलारस तक संचालित हो रही है, जबकि उससे आगे ट्रैक बिछाने और स्टेशनों के निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है। प्रयागराज स्थित मुख्यालय के अधिकारियों ने हाल ही में इस रूट का निरीक्षण किया है। अब रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) से फाइनल निरीक्षण कराया जाएगा। उनकी हरी झंडी मिलने के बाद अगस्त में मेमू ट्रेन सबलगढ़ तक दौड़ाई जाएगी। सबलगढ़ तक विद्युतीकरण का काम भी तेजी से चल रहा है और इसे जुलाई के अंत तक पूरा करने की संभावना है। श्योपुर तक प्रोजेक्ट में हुई देरी ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज लाइन का पूरा निर्माण कार्य मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पहले यह काम दिसंबर 2025 तक पूरा होना था, लेकिन अब लक्ष्य बढ़ाकर दिसंबर 2026 कर दिया गया है। वीरपुर तक ट्रैक निर्माण कार्य अगस्त 2025 तक पूरा करने और ट्रेन संचालन शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्वालियर के उप मुख्य अभियंता आकाश यादव और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ हाल ही में समीक्षा बैठक हुई, जिसमें कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। रेलवे ट्रैक के लिए भूमि अधिग्रहण और भवनों के मुआवजे के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया भी जारी है। यात्रियों को होगा सीधा लाभ सबलगढ़ से मुरैना की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है। फिलहाल यात्रियों को जौरा और मुरैना तक पहुंचने के लिए 50 से 70 रुपये तक का किराया और अधिक समय खर्च करना पड़ता है। मेमू ट्रेन शुरू होने से किराया भी कम होगा और समय की बचत भी होगी। आठ नए स्टेशन भी बनेंगे इस प्रोजेक्ट के तहत पुल-पुलियों के साथ आठ नए स्टेशन भी बनाए जाएंगे। ये स्टेशन हैं: वीरपुर, श्यामपुर, इकडोरी, टर्राकला, सिरोनीरोड, खोजीपुरा, दुर्गापुरी, गिरधपुर और श्योपुर।

इंदौर-निजामुद्दीन वंदे भारत ट्रायल की तैयारी, इस स्पीड से दौड़ेगी हाईटेक ट्रेन

इंदौर  जुलाई में इंदौर-निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस का परीक्षण हो सकता है। यह प्रक्रिया पलवल (हरियाणा) से मथुरा स्टेशन (87 किमी) के बीच होगी। इस हिस्से में कवच प्रणाली भी लगी है। इस ट्रेन का पांच से सात मिनट तक आगरा कैंट में ठहराव होगा। छह महीने पहले इंदौर से वंदे भारत की मांग उठी थी। रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। इसी बीच कवच की उपयोगिता की जांच भी की जाएगी। रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि नया रैक नई दिल्ली आ चुका है। जल्द ही इंदौर-निजामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण के दौरान छह से आठ कोच लगाए जाएंगे। फिलहाल परीक्षण की तारीख नहीं हुई है। रेलवे बोर्ड की अनुमति के बाद ट्रायल होगा। ट्रेन की अधिकतम गति 160 किमी प्रतिघंटा होगी। औसत गति 120 से 130 किमी प्रतिघंटा तक होगी।   इंदौर और दिल्ली के बीच यात्रियों को नई सुविधा मिलेगी बता दें कि फिलहाल इंदौर से नागपुर तक एक ही वंदे भारत चलाई जा रही है। ये इंदौर के प्लेटफार्म-1 से सुबह 6.10 चलकर भोपाल सुबह 9.10 बजे और नागपुर दोपहर 2.30 बजे पहुंचती है। इसी प्रकार नागपुर से दोपहर 3.20 चलकर भोपाल रात रात 8.38 बजे और इंदौर रात रात 11.50 बजे पहुंचती है। सांसद शंकर लालवानी के मुताबिक हमने छह महीने पहले केंद्रीय रेल मंत्री से इस ट्रेन की मांग की थी। इस ट्रेन के चलने से इंदौर-नई दिल्ली के बीच यात्रियों को नई ट्रेन की सुविधा मिलेगी। ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाती है प्रणाली भारतीय रेलवे द्वारा स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली विकसित की गई है, जिसका नाम कवच रखा गया है। यह प्रणाली सिग्नलों को पार करने और टक्कर से बचने जैसी मानवीय त्रुटियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करती है। कवच प्रणाली लोको पायलट को खतरे के संकेतों को पार करने और तेज गति से गाड़ी चलाने से रोकने में मदद करती है। खराब मौसम में भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में सहायता करती है।

नीति का इंतजार, हादसों का सिलसिला जारी: इंदौर में ई-रिक्शा बना संकट

इंदौर कुछ वर्ष पहले जब शहर में ई-रिक्शा का चलन शुरू हुआ था तो शहरवासियों को उम्मीद थी कि उन्हें आवागमन के लिए प्रदूषण रहित साधन मिल गया। न वाहन की कर्कश आवाज सुनाई देगी न इससे निकलने वाला काला धुआं नजर आएगा। ऐसा हुआ भी, लेकिन राहत के नाम पर शुरू हुई सुविधा शहरवासियों के लिए अब परेशानी का सबब बन गई है। शहर में ई-रिक्शा की संख्या इतनी तेजी से बढ़ी कि किसी को कुछ समझ ही नहीं आया। राजवाड़ा जैसा सघन क्षेत्र जहां पैदल चलना भी मुश्किल है वहां ये ई-रिक्शा बेखौफ होकर सड़क पर मंडराते हैं और कोई कुछ नहीं कर पाता। राजवाड़ा पर तो पुलिस चौकी के समीप जिम्मेदारों की आंखों के सामने ही अस्थाई ई-रिक्शा स्टैंड बन गया है। आज हालत यह है कि जिस गली, मोहल्ले, कालोनी, सड़क पर पर निकल जाओ, ई-रिक्शा ही नजर आते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित करने के लिए आज तक कोई नीति नहीं बनी। इतना ही नहीं न तो इनके लिए कोई रूट प्लान तैयार किया गया न और न कभी किराया नियंत्रित करने का प्रयास हुआ। ऐसा नहीं कि जिम्मेदारों ने कागजों पर ई-रिक्शा को नियंत्रित करने का प्रयास न किया हो, लेकिन ये प्रयास कभी कागजों से निकलकर मैदान में नजर नहीं आए।   बाहर हजार से ज्यादा ई-रिक्शा करीब छह माह पहले महापौर ने खुद सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि राजवाड़ा क्षेत्र ई-रिक्शा मुक्त होगा, लेकिन घोषणा भी हवा में उड़ गई और कुछ नहीं हुआ। परिवहन विभाग के अनुसार शहर में वर्तमान में बारह हजार से ज्यादा ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। हाई कोर्ट खुद परिवहन विभाग, जिला प्रशासन और नगर निगम को ई-रिक्शा की वजह से शहरवासियों को हो रही परेशानी को लेकर फटकार लगा चुका है, बावजूद इसके कुछ नहीं हुआ। कुछ वर्ष पहले जब शहर में ई-रिक्शा शुरू हुए थे तो लोग उन्हें अचरज भरी नजर से देखते थे। आज हालत यह है कि ई-रिक्शा देखते ही शहरवासियों को कोफ्त होने लगती है। जहां सवारी ने हाथ दिया, वहीं रिक्शा रोक दिया 22 जुलाई को कलेक्टर, पुलिस आयुक्त और निगमायुक्त को व्यक्तिगत रूप से हाई कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर बताना है कि यातायात सुधार के लिए उन्होंने क्या उपाय किए? आदेश को एक सप्ताह होने को आया है, लेकिन मजाल है शहर के यातायात में रत्तीभर भी कोई सुधार हुआ हो। जनप्रतिनिधियों का भी आलम यह है कि रोजाना नई-नई घोषणा कर रहे हैं, लेकिन शायद ही कोई घोषणा मूर्तरूप ले पाती हो। जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कुंभकर्णीय नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। ई-रिक्शा चालक प्रदूषण न फैलाने के नाम पर मिली छूट का फायदा उठाकर ट्रैफिक को बद से बदतर बना रहे हैं। जहां सवारी ने हाथ दिया, वहीं रिक्शा रोक दिया, चाहे पीछे से आ रहे वाहन चालक दुर्घटना का शिकार ही क्यों न हो जाएं। पिछले साल 26 रूट तय किए गए थे राजवाड़ा पर तो मनमर्जी का आलम ये है कि भले ही दो पहिया वाहन को जाने की जगह न मिलें, लेकिन इन्हें अपने वाहन खड़े करने की इतनी जल्दी होती है कि चाहे इनके कारण वाहनों की कतार लग जाए। इन्हें अपनी हिसाब से ही चलना है। पिछले साल प्रशासन ने इन पर सख्ती कर इनके 26 रूट तय किए थे, लेकिन संचालकों के विरोध के बाद सख्ती हवा में उड़ गया। इतना ही नहीं जिला प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस व आरटीओ ने भी अपनी जिम्मेदारी से हाथ खीच लिया है। इस अनदेखी का खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है। जनता के लिए एक अच्छी सुविधा परेशानी का सबब बन गई है।