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महाकाल मंदिर का लड्डू अब बनेगा हाईटेक मशीन से, 40 करोड़ का टेंडर जारी, गड़बड़ी पर लगेगा 50 लाख तक जुर्माना

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रहा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए मंदिर समिति ने अत्याधुनिक मशीनों से लड्डू तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खास बात यह है कि महाकाल मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है जिसके लड्डू प्रसाद को FSSAI की 5 स्टार रेटिंग मिल चुकी है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लड्डू प्रसाद ग्रहण करते हैं। सामान्य दिनों में करीब 50 क्विंटल और विशेष पर्वों पर 100 क्विंटल तक लड्डू प्रसाद की खपत होती है। बढ़ती मांग और आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति अब आधुनिक तकनीक के जरिए प्रसाद निर्माण को नई दिशा देने जा रही है। मंदिर समिति ने करीब 40 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। जिसके तहत फुली ऑटोमेटिक मशीनों के माध्यम से लड्डू प्रसाद तैयार किया जाएगा। नई यूनिट त्रिवेणी संग्रहालय के पास बने अन्नक्षेत्र परिसर में स्थापित की गई है। जिसका निर्माण लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। मंदिर समिति के अनुसार मशीनों के उपयोग से लड्डुओं की एक जैसी सिकाई होगी। गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और उत्पादन क्षमता भी कई गुना बढ़ेगी। इससे सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर और स्वच्छ प्रसाद उपलब्ध कराया जा सकेगा। उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि टेंडर में गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं। आवेदन वही फर्म कर सकेगी जिसके पास कम से कम 3 साल का खाद्य निर्माण अनुभव हो। साथ ही FSSAI और ISO 22000 प्रमाणन अनिवार्य होगा। लड्डुओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 15 दिन रखना भी जरूरी किया गया है। वहीं गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। घटिया सामग्री उपयोग करने पर 5 लाख और वजन कम पाए जाने पर 2 लाख रुपए तक की पेनल्टी का प्रावधान रखा गया है। मंदिर समिति का कहना है कि प्रसाद की शुद्धता और स्वाद बनाए रखने के लिए शुद्ध घी, रागी, चना दाल, काजू-किशमिश सहित तय मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जाएगा। धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक के इस संगम को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में एक बड़े नवाचार के रूप में देखा जा रहा है।

एक्ट्रेस जानकी बोदीवाला पहुंची बाबा महाकाल के दर, नंदी महाराज से की मनोकामना की प्रार्थना

उज्जैन   अजय देवगन की फिल्म 'शैतान' से हिंदी फिल्मों में कदम रखने वाली अभिनेत्री जानकी बोदीवाला ने बुधवार को उज्जैन पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर के दर्शन करने पहुंची। अभिनेत्री ने नंदी हॉल से बाबा महाकाल की भस्म आरती और पूजन में भाग लिया। भस्म के दौरान हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहे और पूरा मंदिर परिसर ओम नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा। मुख्य रूप से गुजराती सिनेमा में सक्रिय अभिनेत्री जानकी बोदीवाला बाबा महाकाल के दर पर भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। नंदी मंडपम के पास बैठकर उन्होंने बाबा का ध्यान किया और नंदी महाराज के गानों में अपनी मनोकामना कही। दर्शन के बाद अभिनेत्री ने कहा, "बाबा महाकाल के दर्शन के अनुभव को शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन है क्योंकि यह भावना हमारे मन के भीतर होती है। आज बहुत अच्छे से दर्शन हुए और मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने इतने अच्छे दर्शन कराने में हमारी मदद की। बाबा से यही कामना है कि वो बार-बार अपने दर पर बुलाते रहें।" जानकी ने अपने करियर की शुरुआत ब्लॉकबस्टर गुजराती फिल्म 'छेलो दिवस' से की थी, जिसके बाद उन्होंने 'नाड़ी दोष' जैसी कई सफल फिल्में दीं। हाल ही में उन्होंने अजय देवगन के साथ बॉलीवुड फिल्म 'शैतान' में अपनी दमदार एक्टिंग से देशभर में पहचान बनाई है। सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सक्रिय जानकी बाबा का आशीर्वाद लेकर बेहद अभिभूत दिखीं। बता दें कि अभिनेत्री ने पहले गुजराती फिल्म वश में काम किया, जिसमें उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया। इसी फिल्म का रीमेक बॉलीवुड में 'शैतान' के नाम से बना और शैतान में भी जानकी को ही बतौर लीड कास्ट किया गया, जो एक वशीकरण से पीड़ित लड़की है। गुजराती फिल्म वश का दूसरा सीक्वल 'वश लेवल-2' भी साल 2025 में रिलीज हो चुका है। इस फिल्म ने भी सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी। फिल्म का डायरेक्शन कृष्णदेव याग्निक ने किया और फिल्म में जानकी के अलावा, हितू कनोडिया, हितेन कुमार और मोनल गज्जर ने अहम रोल्स किए हैं।

महाकाल के दरबार में मिलिन्द सोमन और नीतीश राणा, बाबा से की दिल की बात

उज्जैन   मंगलवार तड़के एक्टर मिलिंद सोमन व क्रिकेटर नीतीश राणा महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन पहुंचे. मिलिंद सोमन व नीतीश राणा दोनों ही अपनी पत्नी के साथ भस्म आरती में शामिल हुए. मिलिंद सोमन के साथ उनकी पत्नी अंकिता कोंवर व क्रिकेटर नीतीश राणा के साथ उनकी पत्नी सांची मारवाह ने महाकाल का आशीर्वाद लिया।  भस्म आरती में भावुक नजर आए मिलिंद सोमन फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन भस्म आरती के दौरन काफी भावुक नजर आए और लगातार महाकाल का जाप करते हुए दिखे. तड़के 2 बजे से भस्त आरती की तैयारियां शुरू हो गई थी, जिसके साथ ही मिलिंद सोमन व नीतीश राणा भी नंदी हॉल पहुंच गए।  यहां दोनों को पुजारियों ने गर्भग्रह स्थित सभी देवी देवताओं का पूजन कर जलाभिषेक कराया. इसके बाद भगवान का दूध, दही,घी, शक्कर व फलों के रस से अभिषेक करवाया गया और फिर भगवान को भस्म रमाकर भस्म आरती की शुरुआत हुई।  'बाबा का बुलावा आ ही गया' मिलिंद व नीतीश लगभग 2 घंटों तक नंदी हाल में बैठे रहे. आरती पूर्ण होने के बाद उन्होंने बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेककर दर्शन किए. इसके बाद राघव पुजारी के माध्यम से भगवान को जल अर्पित किया. दर्शन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए अभिनेता मिलिन्द सोमन ने कहा, '' खुशी की बात है कि यहां आने का मौका मिला, यहां आकर मन को बहुत शांति मिली है. हम लंबे समय से सोच रहे थे कि महाकाल के दर पर आना है, बहुत सालों से ऐसी आशा थी कि हम आएंगे लेकिन कहते हैं कि जब तक बुलावा नहीं आता है, तब तक नही आ सकते हैं. अब बुलावा आ गया है. इनके (पत्नी) के कारण हम आए हैं, ये मेरी धर्म पत्नी हैं, इन्होंने कहा था कि हम जाएंगे. यहा आकर बहुत-बहुत अच्छा लगा, सबका बहुत-बहुत धन्यवाद. जय महाकाल'' क्रिकेटर नीतीश राणा ने किया जल अभिषेक इस दौरा क्रिकेटर नीतिश राणा ने भी पत्नी संग विधि विधान से महाकाल का पूजन किया और पुजारियों के माध्यम से महादेव का जल अभिषेक किया. नीतीश काफी देर तक नंदी हॉल में बैठकर मंत्रजाप करते भी नजर आए. महाकाल मंदिर में हर दिन लाखों की तादाद में आम जनता के साथ-साथ सिलेब्रिटीज, क्रिकेटर, राजनेता समेत देश-दुनिया की तमाम हस्तियां दर्शन के लिए पहुंचती हैं। 

महाकाल के दर्शन के लिए पहुंची उल्का गुप्ता, किंजल दवे समेत कई सितारे, केरला स्टोरी-2 एक्ट्रेस भी मौजूद

उज्जैन  बुधवार सुबह प्रसिद्ध टीवी और फिल्म अभिनेत्री उल्का गुप्ता, गुजराती सिंगर किंजल दवे, साउथ फिल्म एक्ट्रेस मोनल गज्जर और पूर्व क्रिकेटर सुनील जोशी महाकाल मंदिर पहुंचे। सभी ने तड़के भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। सभी श्रद्धालु सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंचे और नंदी हॉल में बैठकर करीब 2 घंटे तक भस्म आरती में शामिल रहे। इस दौरान वे भगवान महाकाल का जाप करते नजर आए। नंदी जी का पूजन कर कान में अपनी मनोकामना भी कही। आरती के बाद सभी ने भगवान महाकाल के दर्शन कर जल अर्पित किया और मंदिर समिति की ओर से उनका सम्मान भी किया गया। “शब्दों में बयां नहीं कर सकती अनुभव” उल्का गुप्ता ने कहा कि महाकाल के दर्शन कर वह खुद को धन्य महसूस कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर के अंदर का माहौल इतना दिव्य था कि दो घंटे कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला। उन्होंने कहा कि शिवलिंग का श्रृंगार और जल अर्पण को इतने करीब से देखना अद्भुत अनुभव रहा। भस्म आरती के दौरान का माहौल, गूंजते मंत्र और तालियों की आवाज ने उन्हें रोमांचित कर दिया। उनके अनुसार, हर शिव भक्त को जीवन में एक बार इस अनुभव को जरूर करना चाहिए।

महाकाल के दरबार में अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ: नंदी से की देश की तरक्की की कामना, डिंपल कपाड़िया भी थीं साथ

उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर मैं लगातार बॉलीवुड हस्तियां पहुंच रही है. इसी कड़ी में बुधवार को फिल्म स्टार अक्षय कुमार अपनी सास डिंपल कपाड़िया ओर एक्टर टाइगर श्रॉफ के साथ बाबा का आशीर्वाद के दरबार में पहुंचे. तीनों ने बाबा का आशीर्वाद लिया।  मंदिर प्रबंध समिति ने बताया कि बॉलीवुड स्टार अक्षय, सास डिंपल ऐर टाइगर के साथ भस्म आरती के बाद सुबह करीब छह बजे महाकाल मंदिर पहुंचे. यहां तीनों ने बाबा के दर्शन किए. इस दौरान मान्यतानुसार तीनों ने नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना कही. दर्शन के बाद मंदिर के सहायक प्रशासक एसएन सोनी ने उन्हें दुपट्टा उड़ाकर सत्कार किया. तीनों कलाकारों को देखने के लिए श्रद्धालु उत्साहित नजर आए।  देश की तरक्की की कामना दर्शन पश्चात बाद अक्षय ने कहा उन्होंने बाबा महाकाल से परिवार ओर देश के लिए कामना की है. देश हमेशा अव्वल रहे ओर आगे बढ़ता रहे. बता दे अक्षय फिल्म ओएमजी-2 की शूटिंग करने भी महाकाल आए थे।  महाकाल मंदिर में सुरक्षा के लिए CISF की मांग वहीं, श्री महाकालेश्वर मंदिर की सुरक्षा के लिए एक बार फिर CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) तैनात करने की मांग की गई है. इसके लिए  सांसद अनिल फिरोजिया ने एक बार फिर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है. इससे पहले सांसद अनिल फिरोजिया और राज्यसभा सदस्य संत उमेशनाथ ने इस मुद्दों को सदन में उठाया है. बीते कुछ दिनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई मंदिर चर्चाओं में रहा. यहां गार्ड पर एक दंपती (ऑल इंडिया बाइक राइडर) ने अभद्रता करते हुए दर्शन नहीं करने देने का आरोप लगाया था। 

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान पर होगा वैश्विक मंथन मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में होंगे शामिल उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जो प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान की वैश्विक धुरी रही है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और बौद्धिक संगम का केंद्र बनेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम में साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। साथ ही यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) एवं आरसी (रिमोट कंट्रोल) और सैटेलाइट मेकिंग (उपग्रह निर्माण) विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करेंगी। तीन दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यक्रम की सह-आयोजक संस्थाएं हैं। डोंगला का ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कर्क रेखा के यहां से गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रमुख विषयों में विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स एवं कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां शामिल हैं। विविध कार्यक्रम होंगे आयोजन के आकर्षण तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डॉ. विक्रम साराभाई के विज़न को मिलेगा विस्तार उज्जैन प्राचीन काल से समय मापन का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के उस विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी। उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक “टाइम स्केल सेंटर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगा बल उज्जैन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ भव्य रूप कर रहा है। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।  

गुड़ी पड़वा के मौके पर महाकाल मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज फहरेगा, 2000 साल पुरानी परंपरा का फिर से शुरुआत

उज्जैन  चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और गुड़ी पड़वा के अवसर पर 19 मार्च को श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज का आरोहण किया जाएगा। यह आयोजन लगातार दूसरे वर्ष किया जा रहा है। यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि लगभग 2000 वर्ष पुरानी उस गौरवशाली परंपरा का पुनरुद्धार है, जिसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य के काल में हुई थी।  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर इस परंपरा को फिर से भव्य रूप दिया जा रहा है। विक्रमादित्य द्वारा प्रारंभ किया गया विक्रम संवत और ब्रह्म ध्वज की परंपरा भारत की सांस्कृतिक श्रेष्ठता और गौरव का प्रतीक मानी जाती है। ब्रह्म ध्वज की विशेषता विक्रमादित्य शोध संस्थान के निदेशक राम तिवारी के अनुसार ब्रह्म ध्वज शक्ति, साहस और चतुर्दिक विजय का प्रतीक है। केसरिया रंग के इस ध्वज की बनावट भी विशेष होती है। इसमें दो पताकाएं होती हैं, जो ध्वज के दोनों छोर पर स्थित रहती हैं। ध्वज के मध्य में सूर्य का चिन्ह अंकित होता है, जो तेज, ऊर्जा और विश्व विजय का प्रतीक माना जाता है। महिदपुर स्थित अश्विनी शोध संस्थान में आज भी वे प्राचीन मुद्राएं सुरक्षित हैं, जिन्हें सम्राट विक्रमादित्य ने इसी ब्रह्म ध्वज परंपरा को अमर बनाने के लिए जारी किया था। सम्राट विक्रमादित्य के काल में उज्जैन अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र माना जाता था। उस समय की मुद्राओं पर बने चिह्न बताते हैं कि उज्जैन को पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। इन सिक्कों के एक पक्ष पर भगवान शिव सूर्यदंड लिए दिखाई देते हैं, जबकि दूसरे पक्ष पर प्लस (+) का चिन्ह बना होता है, जिसकी चारों भुजाओं पर गोले बने रहते हैं। यह प्रतीक दर्शाता है कि उज्जैन जल, थल और नभ तीनों मार्गों से विश्व से जुड़ा हुआ था। 65 वर्षों तक सुरक्षित रखा गया था ध्वज शोधपीठ के निदेशक राम तिवारी ने बताया कि विक्रम संवत ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान और अनुसंधान का महापर्व है। विक्रम संवत के अवसर पर ब्रह्म ध्वज विभिन्न स्थानों पर फहराया जाएगा। मध्यप्रदेश में मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और निजी स्थानों पर भी लोग स्वप्रेरणा से इस ध्वज को फहरा सकेंगे। उन्होंने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर पर स्थापित यह ध्वज लंबे समय तक पंडित सूर्यनारायण व्यास के परिवार ने अपने पूजा स्थल पर लगभग 65 वर्ष तक सुरक्षित रखा था। उसी ध्वज से प्रेरणा लेकर वर्तमान ब्रह्म ध्वज का निर्माण किया गया है। 

रंग पंचमी के अवसर पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने महाकालेश्वर को अर्पित की दंडवत श्रद्धा

उज्जैन  रंग पंचमी पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। जहां उन्होंने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। सीएम ने गर्भगृह में जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक कर पूजन-अर्चन की। दंडवत होकर बाबा महाकाल को प्रणाम किया। वहीं उन्होंने परंपरागत महाकाल की गेर का ध्वज पूजन भी किया। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 8 मार्च से उज्जैन प्रवास पर है। सीएम डॉ यादव कल शाम उज्जैन पहुंचे और कई आयोजनों में शामिल हुए। आज रविवार सुबह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। पुजारी, पुरोहित आचार्यत्व में विधि-विधान से पूजन किया। बाबा महाकाल का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया और प्रदेश की सुख, समृद्धि की कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ यादव ने रंगपंचमी पर्व पर परंपरागत रूप से निकलने वाली श्री वीरभद्र ध्वज चल समारोह के ध्वज का पूजन किया। फिर सीएम ने शस्त्रों का पूजन कर शस्त्र संचालन-प्रदर्शन भी किया। रंगपंचमी पर्व पर आज शाम श्री वीरभद्र चल समारोह बड़े ही हर्षोल्लास के साथ निकलता है। जिसमें बैंड-बाजे, हाथी, घोड़े, रथ के साथ ही रंगबिरंगी रोशनी से नहाए विभिन्न मनमोहक धार्मिक झांकियां भी निकलती है।

महाकाल नगरी में रंगों का जश्न, शिव-पार्वती के साथ थिरके पंडे-पुजारी और भक्त

उज्जैन  धार्मिक नगरी उज्जैन में विराजमान बाबा महाकाल के दरबार में हर त्योहार विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. होलिका दहन से पहले ही शहर रंगों और भक्ति के रंग में सराबोर हो गया. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के सान्निध्य में शयन आरती परिवार पिछले 26 वर्ष से अनोखी होली की परंपरा निभा रहा है, जिसे देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज़ से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भगवान महाकाल की नगरी में इस बार होली का पर्व बेहद खास अंदाज में मनाया गया. शिप्रा नदी के किनारे नृसिंह घाट स्थित कुमार धर्मशाला में भक्त भक्ति में लीन होकर झूमते-गाते नजर आए. पूर्णिमा तिथि पर महाकालेश्वर मंदिर, माता हरसिद्धि मंदिर और महाकाल वन में विशेष होली उत्सव का आयोजन किया गया। शिव-पार्वती की प्रतीकात्मक उपस्थिति इस भव्य आयोजन का दृश्य उस समय और भी खास हो गया, जब शिव और माता पार्वती प्रतीकात्मक रूप में मंच पर प्रकट हुईं. ऐसा लग रहा था मानो स्वयं भोलेनाथ अपनी अर्धांगिनी के साथ भक्तों के बीच पधार गए हों. जैसे ही शिव-पार्वती ने नृत्य आरंभ किया, वातावरण भक्ति और उल्लास से भर गया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और भजनों की मधुर धुन पर भक्त अपने भावों को रोक नहीं सके. हर चेहरा खिल उठा। गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर सोमवार को संध्या आरती के दौरान मंदिर का गर्भगृह और नंदी हॉल रंगों से सराबोर नजर आया। पंडे-पुजारियों ने बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर उनके साथ होली खेली। जैसे ही पुजारी ने बाबा पर केसरिया और हर्बल गुलाल छिड़का, पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के उद्घोष से गूंज उठा। यहां मौजूद हर कोई शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। संध्या आरती के बाद मंदिर परिसर में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के सामने होलिका दहन किया गया। महाकाल करते हैं सभी त्योहारों की शुरुआत पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा महाकाल ही समस्त त्योहारों की शुरुआत करते हैं, इसलिए यहां सबसे पहले होलिका प्रज्वलित की जाती है। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने। सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति ने विशेष इंतजाम किए थे। गर्भगृह में केवल प्राकृतिक और हर्बल गुलाल के उपयोग की ही अनुमति दी गई, ताकि मंदिर की मर्यादा और गर्भगृह की सुरक्षा बनी रहे। शिवगणों के साथ भक्तों की टोलियां भगवान महाकाल के साथ होली खेलने के लिए शिवगण, भूत-पिशाच और नंदी विशेष वेशभूषा में नजर आए. पूरा दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे साक्षात शिव की सेना धरती पर उतर आई हो, ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज के बीच भक्तों की टोलियां नाचते-गाते जुलूस के रूप में आयोजन स्थल तक पहुंचीं. हर ओर रंग, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम दिखाई दिया, जिसने पूरे माहौल को शिवमय कर दिया। ग्रहण के चलते केवल शकर का भोग अर्पित धुलेंडी पर्व पर चंद्र ग्रहण होने के कारण महाकाल मंदिर में भस्मारती से लेकर शाम को ग्रहण समाप्त होने तक पट बंद नहीं किए जाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, सुबह भगवान को नियमित भोग नहीं लगाया जाएगा। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद ही भगवान को भोग अर्पित किया जाएगा। शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि शाम 6:32 से 6:46 बजे तक रहने वाले 14 मिनट के इस ग्रहण का वेध काल सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। वेध काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा। ऐसे होगा महाकाल का पूजन     3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 बजे तक चंद्र ग्रहण रहेगा। उसका वेध काल सुबह सूर्योदय से शुरू हो जाएगा।     वेध काल के चलते सुबह की दद्योदक एवं भोग आरती में केवल शकर का भोग अर्पित किया जाएगा।     ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान एवं पूजन किया जाएगा। इसके बाद भोग अर्पित कर संध्या आरती होगी। कल से ठंडे जल से होगा स्नान महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या में परिवर्तन होता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय तय होता है, जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार समय तय किया जाता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू हो रही है, जिससे भगवान महाकाल की दिनचर्या में भी परिवर्तन होगा। इस दिन से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है। भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। यह क्रम शरद पूर्णिमा तक चलेगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली 5 आरतियों में से 3 के समय में परिवर्तन किया जाएगा। इसलिए ग्रहण का असर नहीं महाकाल मंदिर पर ग्रहण का प्रभाव क्यों नहीं होता, इस पर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि भगवान महाकाल कालों के काल कहलाते हैं। दक्षिण दिशा काल की मानी जाती है और महाकाल का मुख दक्षिण की ओर है, इसलिए वे काल पर नियंत्रण रखते हैं। इस कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या ग्रहण महाकाल को प्रभावित नहीं कर सकता। ग्रहण के दिन मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य दिनों की तरह रहेंगी, लेकिन ग्रहण के चलते न पुजारी और न ही श्रद्धालु भगवान को स्पर्श करेंगे। इस दौरान गर्भगृह में पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद पुजारी स्नान कर मंदिर का शुद्धिकरण करेंगे, फिर भगवान का जलाभिषेक किया जाएगा। शाम को भोग अर्पित किया जाएगा। भजन-कीर्तन और अबीर-गुलाल इस दौरान महिला भक्तों ने शिव-पार्वती के साथ बैठकर भजन गाए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया. यह आयोजन महाकाल मंदिर शयन आरती भक्ति मंडल द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसमें मंदिर के पुजारी, भक्त और आम श्रद्धालु शामिल होते हैं. आयोजन के दौरान कुछ भक्त चौसर खेलते नजर आए, तो वहीं दूसरी ओर भांग भी तैयार की जा रही थी. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है  

चंद्र ग्रहण के बावजूद महाकाल के दरबार में खुलेंगे पट, बाबा महाकाल खेलेंगे रंग-गुलाल

उज्जैन 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. चंद्र ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों और शिवालयों के पट बंद रहते हैं. यहां तक की घरों में भी भगवान के मंदिर के पर्दे लगा दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं होती है. फिर ग्रहण खत्म होने पर शुद्धिकरण के बाद ही पट खुलते हैं. ये बातें तो सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दौरान भगवान महाकालेश्वर मंदिर के पट सामान्य दिनों की तरह खुले रहते हैं. भक्त बाबा के दर्शन कर सकते हैं. जानिए बाबा महाकाल मंदिर में क्यों ग्रहण पर भी पट खुले रहते हैं. महाकाल के आगे ग्रह, नक्षत्र का कोई दुष्प्रभाव नहीं अवंतिका नगरी उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर मंदिर में हर दिन की तरह 3 मार्च यानि चंद्र ग्रहण पर भी बाबा के दर्शन का क्रम सुबह भस्म आरती से देर रात शयन आरती तक चलता रहेगा. इसके पीछे की वजह को लेकर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने  चर्चा में बताया कि "बाबा महाकालेश्वर का मंदिर दक्षिण मुखी है. भगवान का मुख दक्षिण की और होने से वे कालों के काल महाकाल कहलाते हैं. दक्षिण दिशा काल का है, काल पर जिसका नियंत्रण हो वह महाकाल है. बाबा महाकाल के कारण कोई भी ग्रह, नक्षत्र या कोई बाधा किसी को प्रभावित नहीं कर पाता. इसलिए ग्रहण के दौरान भी कोई दुष्प्रभाव मंदिर क्षेत्र में नहीं पड़ेगा. लिहाजा चंद्रग्रहण के दौरान भी भगवान का पूजा-अर्चन और सभी आरती समय पर जारी रहेगी. इसके साथ ही भक्त बाबा के दर्शन हर दिन की तरह कर सकेंगे. मंदिर सुबह भस्म आरती से लेकर देर रात शयन आरती तक खुला रहेगा. मंदिर में 2 मार्च यानि सोमवार को होलिका दहन हुआ . इसके बाद 3 मार्च को ही होली पर्व मनाया जाएगा. वेद परंपरा का अपना महत्व है. उसका निर्वहन करने के लिए कुछ नियमों का पालन जरूर किया जाएगा." 14 मिनट का ग्रहण जानिए क्या रहेगा पूजन का क्रम मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का दिन है. शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया कि "सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान पूजन के बाद भगवान को भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी. ग्रहण 3 मार्च को शाम 6:32 से 6:46 तक यानि 14 मिनट का रहने वाला है. ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण महेश पुजारी ने कहा कि " ग्रहण के दिन मंदिर की सारी व्यवस्थाएं हर दिन की तरह तो रहेगी, लेकिन ग्रहण के चलते कोई भी यानि पुजारी हो या श्रद्धालु भगवान को स्पर्श नहीं करेगा. इस दौरान गर्भ गृह में पुजारी मंत्रोच्चार करते हैं. जब ग्रहण खत्म हो जाता है, तो पुजारी स्नान करने के बाद भगवान का जलाभिषेक करेंगे, मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का जलाभिषेक होगा. मंदिर शुद्धिकरण होगा. दूसरे मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर का पट बंद नहीं होंगे. दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से सारे दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं. भगवान महाकालेश्वर की ऊर्जा के आगे सब कुछ क्षीण है. जैसे सूर्य की ऊर्जा है, उससे कई गुना अधिक बाबा की ऊर्जा है." महाकाल मंदिर समिति ने क्या कहा? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि "पुजारी-पुरोहितों से चर्चा के बाद तय हुआ है कि होली पर्व 3 मार्च को ही मनाया जाएगा. ग्रहण में भी भगवान के दर्शन पूजन का क्रम हर रोज की तरह रहेगा. दर्शन करने आने वाले सभी दर्शनार्थियों को कोई परेशानी नहीं आए, इसका ध्यान रखा जाएगा. ग्रहण के कारण जो सामान्य जो बदलाव हुए हैं, जैसे मंदिर शुद्धिकरण हो या ग्रहण के दौरान गर्भ गृह के अंदर मंत्रोच्चार तमाम व्यवस्थाएं मंदिर समिति की ओर से की गई है.