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महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब, दान राशि पहुंची 142 करोड़ रुपए

उज्जैन  महाकाल लोक बनने के बाद बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ दान का प्रवाह भी लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महाकाल मंदिर समिति को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है, जिसमें केवल दान मद से ही 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। यह बीते छह वर्षों में सबसे अधिक दान है और पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 27 करोड़ रुपए ज्यादा है। मंदिर समिति के अनुसार दान पेटियों से 62 करोड़ रुपए, नगद काउंटर पर 5 करोड़ 50 लाख रुपए, मनी ऑर्डर से 1.23 लाख रुपए, ऑनलाइन माध्यम से 3 करोड़ 60 लाख रुपए, अन्नक्षेत्र से 3 करोड़ 38 लाख रुपए तथा गुप्त दान के रूप में 4 करोड़ 65 लाख रुपए प्राप्त हुए। लड्‌डू की बिक्री 65 करोड़ की वहीं लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की आय हुई। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के करोड़ों रुपए मूल्य के आभूषण भी दान किए हैं। गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दान कक्ष में सिली हुई जेब वाले कपड़ों में ही मिलती है एंट्री राम मंदिर में दान को लेकर चल रहे विवाद के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया ने बताया कि मंदिर में प्राप्त होने वाले दान के संबंध में पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। मंदिर परिसर में कुल 95 दान पेटियां स्थापित हैं, जिनमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में दान करते हैं। इसके अलावा श्रद्धालु क्यूआर कोड के माध्यम से भी ऑनलाइन दान कर रहे हैं। हर सप्ताह दान पेटियां खोली जाती हैं। इन्हें सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणना कक्ष तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद निरीक्षक, सहायक प्रशासक तथा मंदिर समिति के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। दान की गणना की फोटोग्राफी कराई जाती है और पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है। दान की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों को विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्हें बिना जेब वाले कपड़े या सिली हुई जेब वाले परिधान पहनने के बाद ही गणना कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे। दान बढ़ा तो खर्च भी दोगुना हुआ श्री महाकाल लोक के लोकार्पण से पहले महाकाल मंदिर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर था, जो विस्तार के बाद बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। वर्तमान में मंदिर समिति के कुल 306 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के वेतन के अलावा मंदिर की सुरक्षा, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, पर्व-त्योहारों की व्यवस्थाएं, धर्मशाला, अन्नक्षेत्र, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान, गोशाला तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बड़ी राशि खर्च होती है। मासिक खर्च भी बढ़कर 5 करोड़ से ज्यादा इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि, श्रावण मास, नागपंचमी सहित अन्य प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अतिरिक्त व्यय किया जाता है। पहले मंदिर का मासिक खर्च करीब 2.5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक प्रतिमाह हो गया है।

महाकाल भक्तों के लिए बड़ा बदलाव! भस्म आरती में अब 3 माह में एक बार ही मिलेगा मौका

उज्जैन उज्जैन में भगवान महाकाल की भस्म आरती की अनुमति के लिए अब श्रद्धालु तीन माह में केवल एक बार अपने मोबाइल नंबर का उपयोग कर सकेंगे। यह व्यवस्था प्रोटोकॉल से आने वाले ऐसे मोबाइल नंबरों पर भी लागू होगी, जिनसे हर माह भस्म आरती की अनुमति ली जा रही है। हालांकि, मंदिर समिति का कहना है कि यह व्यवस्था पहले से लागू है, जिसे अब और प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। करीब दो वर्ष पहले तक श्रद्धालु भस्म आरती की बुकिंग 15 दिन पहले ऑनलाइन करवा सकते थे। इसके लिए मोबाइल नंबर से जुड़ा कोई विशेष नियम नहीं था। वर्ष 2024 में भस्म आरती की अनुमति को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के चलते तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति देने का निर्णय लिया था। यह व्यवस्था कुछ समय तक लागू रही, लेकिन बाद में बंद कर दी गई थी। अब एक बार फिर भस्म आरती की अनुमति को लेकर मिल रही शिकायतों के चलते मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि एक मोबाइल नंबर का उपयोग तीन माह बाद ही दोबारा किया जा सकेगा। इस व्यवस्था को लागू भी कर दिया गया है। अब जो श्रद्धालु प्रोटोकॉल या अन्य माध्यमों से हर माह भस्म आरती की अनुमति लेकर दर्शन करने आते थे, उन्हें तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति मिल सकेगी। महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। इसे अब और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। अब एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग नहीं किया जा सकेगा। वर्ष 2024 में भी हुआ था नियम लागू बता दें कि 2024 में भी तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने भस्म आरती की बुकिंग में धांधली की शिकायतों के बाद एक आधार और एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में एक बार अनुमति का नियम बनाया था। कुछ समय तक ये व्यवस्था चली, लेकिन बाद में बंद कर दी गई थी। अब फिर से शिकायतें बढ़ने पर नियम को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। मंदिर प्रशासन ने दी सफाई महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भस्म आरती में सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिले और कुछ लोगों द्वारा बार-बार बुकिंग कर सीटें कब्जाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके। आम श्रद्धालुओं को मिलेगा फायदा मंदिर समिति का मानना है कि नए नियम से उन भक्तों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से भस्म आरती के दर्शन के लिए स्लॉट मिलने का इंतजार करते हैं। अब एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार बुकिंग करने की संभावना कम होगी और अधिक श्रद्धालु इस विशेष आरती में शामिल हो सकेंगे। इससे भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता भी बढ़ेगी। क्या बदला नए नियम में? अब एक मोबाइल नंबर और एक आधार कार्ड से तीन महीने में केवल एक बार ही भस्म आरती की अनुमति मिलेगी। यह नियम आम श्रद्धालुओं और प्रोटोकॉल श्रेणी दोनों पर समान रूप से लागू रहेगा। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य भस्म आरती में सभी भक्तों को समान अवसर उपलब्ध कराना और बुकिंग प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। प्रशासक बोले – नियम नया नहीं, सिर्फ सख्ती बढ़ाई महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने साफ किया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है। अब इसे और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि आम श्रद्धालुओं को भी आसानी से दर्शन का मौका मिले। अब एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग नहीं हो सकेगा। जानिए क्या बदला नियम में? • पहले: प्रोटोकॉल से हर महीने बुकिंग संभव थी • अब: हर मोबाइल नंबर से 3 महीने में सिर्फ 1 बार बुकिंग • लागू: आम श्रद्धालु + प्रोटोकॉल दोनों पर • मकसद: बार-बार दर्शन करने वालों पर रोक, सबको समान मौका • आधार कार्ड: एक आधार से भी 3 महीने में 1 बार ही अनुमति आम श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत इस नियम से उन आम भक्तों को फायदा होगा जो महीनों तक ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते थे। अब वीआईपी और बार-बार दर्शन करने वालों की मोनोपॉली टूटेगी। मंदिर समिति का दावा है कि इससे भस्म आरती में पारदर्शिता बढ़ेगी।    .

दक्षिणा नहीं, स्वच्छता का वचन चाहिए! रामघाट के पुरोहितों का अनूठा अभियान चर्चा में

उज्जैन  शिप्रा सहित देशभर के नदी-तालाबों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए रामघाट के तीर्थ पुरोहितों ने अनूठा नवाचार शुरू किया है। अब यहाँ पूजा-आरती के बाद श्रद्धालुओं से नकद दक्षिणा के बजाय सिर्फ नदी स्वच्छता का संकल्प मांगा जा रहा है। हर शाम होने वाली शिप्रा सांध्य आरती के समापन पर पुरोहित भक्तों को नदी स्वच्छ रखने का वचन दिलाते हैं। श्री क्षेत्र तीर्थ पुरोहित पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी ने बताया कि मात्र 51 दिन में करीब 2.50 लाख लोगों को यह संकल्प दिलाया जा चुका है। पुरोहितों का मानना है कि यदि यही जनभागीदारी देश के सभी धार्मिक घाटों पर लागू हो, तो बिना किसी भारी-भरकम बजट के जल संरचनाएं स्वच्छ हो सकेंगी। वैष्णव तिलक और आभूषण अर्पित कर राजा स्वरूप श्रृंगार विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। भगवान महाकाल का जटाधारी स्वरूप में चंदन, वैष्णव तिलक एवं आभूषण अर्पित कर राजाधिराज स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। इससे पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया। मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान कर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर दिव्य श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर भस्म रमाई गई। भस्म अर्पित करने के पश्चात भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों से निर्मित हार अर्पित किए गए। मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्प धारण कर भगवान महाकाल ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। इसके बाद फल एवं मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। महा निर्वाणी अखाड़ा की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।  

महाकाल दर्शन होंगे महंगे? लाइट एंड साउंड शो का टिकट ₹100, सभी सुविधाएं लेने पर खर्च ₹1050

उज्जैन  बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की जेब पर और बोझ बढ़ने वाला है। महाकाल मंदिर परिसर में चलने वाले प्रसिद्ध लाइट एंड साउंड शो को देखने के लिए अब श्रद्धालुओं को 100 रुपए प्रति व्यक्ति का शुल्क देना होगा।गौरतलब है कि करीब 7 महीने तक मुफ्त संचालन के बाद अब इस शो को पेड किया गया है। 18 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है शो इस शो का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 अक्टूबर 2025 को दीपावली के अवसर पर किया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने इसे करीब 18 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से तैयार किया है। करीब 25 मिनट के इस शो में वॉटर स्क्रीन, फाउंटेन, लेजर लाइट और बेहतरीन साउंड इफेक्ट्स के जरिए भगवान महाकाल, मां क्षिप्रा और प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) की गौरव गाथा दिखाई जाती है। शुल्क लगाने के पीछे मंदिर समिति का तर्क मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस भव्य शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इसी खर्च को पूरा करने और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए 100 रुपए का एंट्री शुल्क रखने का फैसला लिया गया है। हर माह 15 लाख रुपए कमाई का अनुमान कमाई के लिहाज से देखें तो मंदिर समिति को इस फैसले से अच्छी आय होने की संभावना है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, रोजाना करीब 500 श्रद्धालु लाइट एंड साउंड शो देखने पहुंच रहे हैं। यदि प्रत्येक श्रद्धालु से 100 रुपए शुल्क लिया जाता है तो समिति को प्रतिदिन लगभग 50 हजार रुपए की आय होगी। इस हिसाब से एक महीने में करीब 15 लाख और सालभर में लगभग 1.8 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है, जबकि शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह व्यवस्था मंदिर समिति के लिए आय का एक नया स्रोत भी बन सकती है। संध्या और शयन आरती के लिए भी लेते हैं 250 रुपए यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर में किसी सुविधा के लिए शुल्क बढ़ाया या लगाया गया हो। इससे पहले भी कई बदलाव हुए हैं। 19 फरवरी 2026 से संध्या आरती और शयन आरती के लिए भी 250 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जा रहा है, जबकि इससे पहले यह फ्री थी। वीआईपी या शीघ्र दर्शन के लिए पहले से ही शुल्क लिया जा रहा है। श्रद्धालु बोले- बढ़ जाएगा आर्थिक बोझ महाकाल मंदिर में रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भस्म आरती में ही रोजाना करीब 1700 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में लाइट एंड साउंड शो पर शुल्क लगने के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का खर्च बढ़ जाएगा। जहां एक तरफ मंदिर प्रशासन इसे मेंटेनेंस के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं श्रद्धालुओं के एक वर्ग का कहना है कि धार्मिक परिसर में होने वाले इस शो को पहले की तरह ही मुफ्त रखा जाना चाहिए था, क्योंकि आरती और शो के शुल्कों से आम भक्तों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

उज्जैन के महाकाल मंदिर की AI तकनीक बनी मिसाल, ‘त्रिनेत्र’ को राष्ट्रीय सम्मान

उज्जैन उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विकसित की गई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वीडियो सर्विलांस प्रणाली ‘त्रिनेत्र’ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा घोषित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों की सूची में महाकाल मंदिर की इस अत्याधुनिक प्रणाली का चयन किया गया है। यह सम्मान मंदिर प्रबंधन द्वारा तकनीक के माध्यम से सुरक्षा, निगरानी और व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए गए नवाचारों की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच बना सुरक्षा का मजबूत कवच अक्टूबर 2022 में श्रीमहाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में प्रतिदिन 80 हजार से लेकर एक लाख तक श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंच रहे हैं। वहीं श्रावण मास, पर्व-त्योहारों, विशेष तिथियों और अवकाश के दिनों में यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। इसी चुनौती से निपटने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए एआई आधारित वीडियो सर्विलांस सिस्टम विकसित किया, जिसे ‘त्रिनेत्र’ नाम दिया गया। AI तकनीक से हो रही हर गतिविधि की निगरानी ‘त्रिनेत्र’ प्रणाली मंदिर परिसर में स्थापित कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से भीड़ के मूवमेंट, सुरक्षा संबंधी गतिविधियों और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखती है। इससे भीड़ नियंत्रण, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया गया है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस तकनीक ने न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि व्यवस्थाओं को भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल नवाचार का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवार्ड के लिए चयन महाकाल मंदिर में लागू डिजिटल नवाचारों की सफलता का प्रमाण माना जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल मंदिर प्रशासन के लिए गौरव का विषय है, बल्कि धार्मिक स्थलों पर तकनीक आधारित प्रबंधन मॉडल को भी नई पहचान दिलाने वाली है। ऐसे काम करता है सिस्टम     इसके तहत ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर और श्री महाकाल महालोक परिसर में 600 से अधिक एडवांस एआइ आधारित कैमरे लगाए गए हैं।     सभी कैमरों को खास कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। यहां से सुरक्षाकर्मी और अधिकारी रियल-टाइम मॉनिटरिंग करते हैं।     यह सिस्टम श्रद्धालुओं की संख्या की सटीक जानकारी, भीड़ वाले क्षेत्र और प्रतिबंधित क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों का पता लगाता है।     सिस्टम से प्राप्त सटीक जानकारी से अधिकारी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए बेहतर कदम उठा पाते हैं।  

काल भैरव मंदिर में शुरू हुई पेड VIP दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालुओं को मिलेगी अलग सुविधा

उज्जैन  मध्यप्रदेश के उज्जैन में राजाधिराज महाकाल के कोतवाल बाबा कालभैरव मंदिर में अब प्रोटोकॉल दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 500 रुपए शुल्क चुकाना होगा। नई व्यवस्था बुधवार 20 मई से लागू की जा रही है। शुल्क जमा करने वाले श्रद्धालुओं को विशेष व्यवस्था के तहत गर्भगृह तक ले जाया जाएगा, जहां वे पुजारी के माध्यम से बाबा कालभैरव को मदिरा का भोग अर्पित कर दर्शन कर सकेंगे। 500 रुपये बाबा कालभैरव के VIP दर्शन मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं को 500 रुपए की अधिकृत रसीद दी जाएगी। इसके बाद उन्हें सामान्य कतार से अलग गर्भगृह तक पहुंचाया जाएगा। श्रद्धालु अपने साथ लाई मदिरा पुजारी को सौंपेंगे और उनके सामने ही बाबा को भोग लगाया जाएगा। यह शुल्क महाकाल के विभिन्न दर्शन शुल्क के मुकाबले दोगुना है। प्रतिदिन पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु कालभैरव मंदिर में प्रतिदिन करीब 50 से 60 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं पर्व और त्योहारों पर यह संख्या एक लाख से अधिक हो जाती है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और प्रोटोकॉल दर्शन की मांग को देखते हुए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। महाकाल मंदिर की तर्ज पर शुरू हुई व्यवस्था महाकाल मंदिर में पहले से ही विभिन्न दर्शन और आरती व्यवस्थाएं सशुल्क संचालित हैं। भस्म आरती में प्रवेश के लिए प्रति श्रद्धालु 200 रुपए शुल्क लिया जाता है। वहीं संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए ऑनलाइन शुल्क निर्धारित है। शीघ्र दर्शन व्यवस्था भी 250 रुपए में उपलब्ध है। इसी तर्ज पर अब कालभैरव मंदिर में भी प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा लागू की गई है, हालांकि शुल्क दोगुना रखा गया है। सीमित संख्या में रहेगी शुरुआत प्रोटोकॉल से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल सीमित संख्या में यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर आगे इसकी समीक्षा कर व्यवस्था को और सुचारू बनाने पर निर्णय लिया जाएगा। संध्या मार्कण्डेय, प्रशासक, कालभैरव मंदिर बाहरी तत्वों पर कसेगी लगाम फिलहाल वीआइपी प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था लागू की है। यह इसलिए किया जा रहा है, ताकि बाहरी तत्वों के चुंगल में फंसकर ये श्रद्धालु वैसे ही रुपए देकर गर्भगृह तक पहुंच रहे थे, तो यह राशि इस तरह से अब मंदिर की आय का स्रोत बनेगी। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था नि:शुल्क है। एलएन गर्ग, एसडीएम

उज्जैन पहुंचीं तमन्ना भाटिया, महाकाल के दरबार में लिया आशीर्वाद; बोलीं- यह अनुभव अविस्मरणीय

उज्जैन साउथ और बॉलीवुड इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री तमन्ना भाटिया मंगलवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद लिया। तड़के करीब 3 बजे मंदिर पहुंचीं तमन्ना भाटिया नंदी हाल में बैठकर भक्ति भाव से भस्म आरती में शामिल हुईं। इस दौरान वे मस्तक पर चंदन लगाए पूरी तरह बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आईं। करीब दो घंटे तक उन्होंने भस्म आरती का दिव्य नजारा देखा। आरती के बाद अभिनेत्री ने नंदीजी का पूजन-अभिषेक किया और नंदी के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को पुजारी के हाथों जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। भस्म आरती के बाद तमन्ना ने कहा, आज भगवान ने मुझे बुलाया था। बाबा महाकाल के बुलावे पर ही भक्त यहां आते हैं। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। आज जो आरती देखने को मिली, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। आरती में शामिल होकर बहुत ऊर्जा मिलती है। सब लोग एक साथ बैठकर जिस तरह आरती देखते हैं, ऐसा दृश्य कहीं और देखने को नहीं मिलता। मंदिर परिसर में अभिनेत्री की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष रूप से बढ़ाई गई थी।

महाकाल मंदिर का लड्डू अब बनेगा हाईटेक मशीन से, 40 करोड़ का टेंडर जारी, गड़बड़ी पर लगेगा 50 लाख तक जुर्माना

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रहा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए मंदिर समिति ने अत्याधुनिक मशीनों से लड्डू तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खास बात यह है कि महाकाल मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है जिसके लड्डू प्रसाद को FSSAI की 5 स्टार रेटिंग मिल चुकी है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लड्डू प्रसाद ग्रहण करते हैं। सामान्य दिनों में करीब 50 क्विंटल और विशेष पर्वों पर 100 क्विंटल तक लड्डू प्रसाद की खपत होती है। बढ़ती मांग और आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति अब आधुनिक तकनीक के जरिए प्रसाद निर्माण को नई दिशा देने जा रही है। मंदिर समिति ने करीब 40 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। जिसके तहत फुली ऑटोमेटिक मशीनों के माध्यम से लड्डू प्रसाद तैयार किया जाएगा। नई यूनिट त्रिवेणी संग्रहालय के पास बने अन्नक्षेत्र परिसर में स्थापित की गई है। जिसका निर्माण लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। मंदिर समिति के अनुसार मशीनों के उपयोग से लड्डुओं की एक जैसी सिकाई होगी। गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और उत्पादन क्षमता भी कई गुना बढ़ेगी। इससे सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर और स्वच्छ प्रसाद उपलब्ध कराया जा सकेगा। उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि टेंडर में गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं। आवेदन वही फर्म कर सकेगी जिसके पास कम से कम 3 साल का खाद्य निर्माण अनुभव हो। साथ ही FSSAI और ISO 22000 प्रमाणन अनिवार्य होगा। लड्डुओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 15 दिन रखना भी जरूरी किया गया है। वहीं गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। घटिया सामग्री उपयोग करने पर 5 लाख और वजन कम पाए जाने पर 2 लाख रुपए तक की पेनल्टी का प्रावधान रखा गया है। मंदिर समिति का कहना है कि प्रसाद की शुद्धता और स्वाद बनाए रखने के लिए शुद्ध घी, रागी, चना दाल, काजू-किशमिश सहित तय मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जाएगा। धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक के इस संगम को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में एक बड़े नवाचार के रूप में देखा जा रहा है।

एक्ट्रेस जानकी बोदीवाला पहुंची बाबा महाकाल के दर, नंदी महाराज से की मनोकामना की प्रार्थना

उज्जैन   अजय देवगन की फिल्म 'शैतान' से हिंदी फिल्मों में कदम रखने वाली अभिनेत्री जानकी बोदीवाला ने बुधवार को उज्जैन पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर के दर्शन करने पहुंची। अभिनेत्री ने नंदी हॉल से बाबा महाकाल की भस्म आरती और पूजन में भाग लिया। भस्म के दौरान हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहे और पूरा मंदिर परिसर ओम नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा। मुख्य रूप से गुजराती सिनेमा में सक्रिय अभिनेत्री जानकी बोदीवाला बाबा महाकाल के दर पर भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। नंदी मंडपम के पास बैठकर उन्होंने बाबा का ध्यान किया और नंदी महाराज के गानों में अपनी मनोकामना कही। दर्शन के बाद अभिनेत्री ने कहा, "बाबा महाकाल के दर्शन के अनुभव को शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन है क्योंकि यह भावना हमारे मन के भीतर होती है। आज बहुत अच्छे से दर्शन हुए और मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने इतने अच्छे दर्शन कराने में हमारी मदद की। बाबा से यही कामना है कि वो बार-बार अपने दर पर बुलाते रहें।" जानकी ने अपने करियर की शुरुआत ब्लॉकबस्टर गुजराती फिल्म 'छेलो दिवस' से की थी, जिसके बाद उन्होंने 'नाड़ी दोष' जैसी कई सफल फिल्में दीं। हाल ही में उन्होंने अजय देवगन के साथ बॉलीवुड फिल्म 'शैतान' में अपनी दमदार एक्टिंग से देशभर में पहचान बनाई है। सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सक्रिय जानकी बाबा का आशीर्वाद लेकर बेहद अभिभूत दिखीं। बता दें कि अभिनेत्री ने पहले गुजराती फिल्म वश में काम किया, जिसमें उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया। इसी फिल्म का रीमेक बॉलीवुड में 'शैतान' के नाम से बना और शैतान में भी जानकी को ही बतौर लीड कास्ट किया गया, जो एक वशीकरण से पीड़ित लड़की है। गुजराती फिल्म वश का दूसरा सीक्वल 'वश लेवल-2' भी साल 2025 में रिलीज हो चुका है। इस फिल्म ने भी सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी। फिल्म का डायरेक्शन कृष्णदेव याग्निक ने किया और फिल्म में जानकी के अलावा, हितू कनोडिया, हितेन कुमार और मोनल गज्जर ने अहम रोल्स किए हैं।

महाकाल के दरबार में मिलिन्द सोमन और नीतीश राणा, बाबा से की दिल की बात

उज्जैन   मंगलवार तड़के एक्टर मिलिंद सोमन व क्रिकेटर नीतीश राणा महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन पहुंचे. मिलिंद सोमन व नीतीश राणा दोनों ही अपनी पत्नी के साथ भस्म आरती में शामिल हुए. मिलिंद सोमन के साथ उनकी पत्नी अंकिता कोंवर व क्रिकेटर नीतीश राणा के साथ उनकी पत्नी सांची मारवाह ने महाकाल का आशीर्वाद लिया।  भस्म आरती में भावुक नजर आए मिलिंद सोमन फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन भस्म आरती के दौरन काफी भावुक नजर आए और लगातार महाकाल का जाप करते हुए दिखे. तड़के 2 बजे से भस्त आरती की तैयारियां शुरू हो गई थी, जिसके साथ ही मिलिंद सोमन व नीतीश राणा भी नंदी हॉल पहुंच गए।  यहां दोनों को पुजारियों ने गर्भग्रह स्थित सभी देवी देवताओं का पूजन कर जलाभिषेक कराया. इसके बाद भगवान का दूध, दही,घी, शक्कर व फलों के रस से अभिषेक करवाया गया और फिर भगवान को भस्म रमाकर भस्म आरती की शुरुआत हुई।  'बाबा का बुलावा आ ही गया' मिलिंद व नीतीश लगभग 2 घंटों तक नंदी हाल में बैठे रहे. आरती पूर्ण होने के बाद उन्होंने बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेककर दर्शन किए. इसके बाद राघव पुजारी के माध्यम से भगवान को जल अर्पित किया. दर्शन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए अभिनेता मिलिन्द सोमन ने कहा, '' खुशी की बात है कि यहां आने का मौका मिला, यहां आकर मन को बहुत शांति मिली है. हम लंबे समय से सोच रहे थे कि महाकाल के दर पर आना है, बहुत सालों से ऐसी आशा थी कि हम आएंगे लेकिन कहते हैं कि जब तक बुलावा नहीं आता है, तब तक नही आ सकते हैं. अब बुलावा आ गया है. इनके (पत्नी) के कारण हम आए हैं, ये मेरी धर्म पत्नी हैं, इन्होंने कहा था कि हम जाएंगे. यहा आकर बहुत-बहुत अच्छा लगा, सबका बहुत-बहुत धन्यवाद. जय महाकाल'' क्रिकेटर नीतीश राणा ने किया जल अभिषेक इस दौरा क्रिकेटर नीतिश राणा ने भी पत्नी संग विधि विधान से महाकाल का पूजन किया और पुजारियों के माध्यम से महादेव का जल अभिषेक किया. नीतीश काफी देर तक नंदी हॉल में बैठकर मंत्रजाप करते भी नजर आए. महाकाल मंदिर में हर दिन लाखों की तादाद में आम जनता के साथ-साथ सिलेब्रिटीज, क्रिकेटर, राजनेता समेत देश-दुनिया की तमाम हस्तियां दर्शन के लिए पहुंचती हैं।