samacharsecretary.com

किसानों को नकली खाद-बीज से बचाने के लिए राजस्थान सरकार का नया सिस्टम, QR कोड और रैंडम लैब से होगी जांच

राजसमंद  किसान खेत में अच्छी फसल की उम्मीद से बीज बोता है, खाद डालता है और कीटनाशकों का इस्तेमाल करता है। लेकिन कृषि आदान ही अमानक निकल जाएं तो उसकी मेहनत और पूंजी दोनों जोखिम में पड़ सकती हैं। इसी चिंता को देखते हुए राजस्थान में बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की गुणवत्ता जांच को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने की पहल की गई है। अब नमूना लेने वाले निरीक्षक को यह पता नहीं होगा कि जांच किस प्रयोगशाला में होगी और प्रयोगशाला को भी संबंधित डीलर या निर्माता की पहचान नहीं बताई जाएगी। जयपुर के पंत कृषि भवन में राजस्थान सरकार के कृषि विभाग और भारतीय डाक विभाग के राजस्थान परिमंडल के बीच इस संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। एग्री क्यूएमएस ऐप से नमूना संग्रहण से लेकर परीक्षण और परिणाम प्रबंधन तक डिजिटल निगरानी होगी, जबकि प्रयोगशाला का आवंटन रैंडम आधार पर किया जाएगा। ऐप में दर्ज होगा नमूने का पूरा रिकॉर्ड नई व्यवस्था में कृषि आदान निरीक्षक मौके पर ही एग्री क्यूएमएस मोबाइल ऐप के माध्यम से नमूने का विवरण दर्ज करेंगे। संग्रहण स्थल की जीपीएस आधारित जियो-टैगिंग, उत्पाद की तस्वीरें और जरूरी दस्तावेज डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होंगे। प्रत्येक नमूने के लिए क्यूआर कोड बनाया जाएगा तथा उसे टैम्पर-प्रूफ पैकिंग में सीलबंद किया जाएगा। इससे नमूनों की अदला-बदली और छेड़छाड़ की आशंका कम करने में मदद मिलेगी। न निरीक्षक चुनेंगे लैब, न लैब को पता होगी पहचान ऐप के जरिए प्रयोगशाला का चयन रैंडम तरीके से होगा। निरीक्षक अपनी पसंद की लैब में नमूना नहीं भेज सकेंगे। वहीं, प्रयोगशाला को डीलर या निर्माता की पहचान नहीं दी जाएगी। इस दोहरी गोपनीयता से जांच में पक्षपात, अनुचित प्रभाव और संभावित मिलीभगत की गुंजाइश कम करने का प्रयास किया गया है। परीक्षण परिणाम ऑनलाइन दर्ज होंगे, जिससे जवाबदेही भी बढ़ेगी। डाक विभाग करेगा सुरक्षित परिवहन कृषि विभाग के नमूने जयपुर भेजे जाएंगे। वहां पहचान गोपनीय रखने की प्रक्रिया के बाद भारतीय डाक विभाग की स्पीड पोस्ट और बिजनेस पोस्ट सेंटर सेवाओं से अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाए जाएंगे। नमूनों की ट्रैकिंग भी हो सकेगी। समझौता तीन वर्ष के लिए किया गया है, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकेगा। डाक विभाग कृषि विभाग को ‘बुक नाउ पे लेटर’ सुविधा भी देगा। किसानों के हितों को मिलेगी मजबूती अमानक, नकली और घटिया गुणवत्ता वाले कृषि आदानों की निष्पक्ष जांच से उनकी पहचान और नियमानुसार कार्रवाई में मदद मिलेगी। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने तथा उनकी लागत, पैदावार और आय से जुड़े हितों की रक्षा करने का प्रयास होगा। गुणवत्ता मानकों का पालन करने वाले व्यापारियों और निर्माताओं को भी निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। कृषि आदानों की गुणवत्ता का सीधा संबंध उत्पादन लागत, उत्पादकता और किसान की आय से है। भारतीय डाक विभाग के सहायक पोस्ट मास्टर जनरल (पार्सल एवं लॉजिस्टिक्स) सुभाष चन्द मीणा ने नमूनों को सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने के लिए सहयोग का आश्वासन दिया। इस अवसर पर कृषि आयुक्तालय के अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक और गुणवत्ता नियंत्रण शाखा के अधिकारी-कर्मचारी तथा डाक विभाग के राजेश पारीक, रोहित जैन और नफीस खान मौजूद रहे।

हरियाणा के किसानों के लिए राहत की खबर, 2,100 टन DAP और 450 टन अमोनियम सल्फेट पहुंचा

झज्जर  क्षेत्र के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) की ओर से डीएपी और अमोनियम सल्फेट खाद का रैक झज्जर पहुंच गया है। रात के समय मालगाड़ी के माध्यम से 2100 मीट्रिक टन डीएपी और 450 मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट खाद की खेप पहुंची। इस खाद का वितरण झज्जर, रोहतक और सोनीपत जिलों में किया जाएगा। रैक पहुंचने से तीनों जिलों के किसानों को खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हालांकि अमोनियम सल्फेट खाद यूरिया के स्थान पर प्रयोग होता है। तीन जिलों में तय की गई खाद की मात्रा आईपीएल की ओर से पहुंचे खाद के रैक से तीनों जिलों के लिए अलग-अलग मात्रा निर्धारित की गई है। इसके तहत झज्जर जिले को 900 मीट्रिक टन डीएपी और 200 मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट मिलेगा। वहीं, रोहतक जिले के किसानों के लिए 600 मीट्रिक टन डीएपी और 100 मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार सोनीपत जिले को 600 मीट्रिक टन डीएपी और 150 मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट उपलब्ध कराया जाएगा। इस तरह तीनों जिलों में खाद की आपूर्ति जरूरत के अनुसार की जाएगी, जिससे किसानों को खेती के लिए आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। किसानों को खाद की आपूर्ति पर रहेगी नजर खेती के सीजन में खाद की उपलब्धता किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में डीएपी और अमोनियम सल्फेट की खेप पहुंचने से तीनों जिलों में उर्वरकों की आपूर्ति को मजबूती मिलेगी। अब निर्धारित मात्रा के अनुसार खाद संबंधित जिलों तक पहुंचाई जाएगी। वहीं, अगले सप्ताह प्रस्तावित यूरिया रैक से किसानों को एक और राहत मिलने की उम्मीद है। क्या है अमोनियम सल्फेट? अमोनियम सल्फेट एक नाइट्रोजन और सल्फर युक्त रासायनिक खाद है, जिसका इस्तेमाल फसलों की बढ़वार और पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए किया जाता है। किसानों के लिए यह खास तौर पर उपयोगी है, क्योंकि इससे फसल को दो जरूरी पोषक तत्व एक साथ मिलते हैं। अमोनियम सल्फेट खाद में नाइट्रोजन 21 प्रतिशत होता है जो पौधों की पत्तियों और तनों की बढ़वार में मदद करती है। सल्फर लगभग 24 प्रतिशत होती है जो प्रोटीन निर्माण और पौधों की सामान्य वृद्धि में सहायक होता है। अगले सप्ताह पहुंच सकता है यूरिया का रैक आईपीएल के सहायक प्रबंधक दीपक शर्मा ने बताया कि डीएपी और अमोनियम सल्फेट का रैक झज्जर पहुंच चुका है। इससे झज्जर के साथ रोहतक और सोनीपत जिलों के किसानों को भी खाद उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह यूरिया का रैक आने की संभावना है। इससे किसानों को आगामी जरूरतों के अनुसार खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

किसानों से धोखाधड़ी की तैयारी! मुरैना में नकली खाद फैक्ट्री पकड़ी, पुलिस ने किया खुलासा

मुरैना  प्रदेश के मुरैना में किसानों को नकली खाद तैयार करने के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। जेवराखेरा रोड पर बुधवार शाम पुलिस ने एक प्लॉट में छापा मारकर नकली डीएपी खाद की पैकिंग का काम पकड़ा। मौके पर हरे रंग के उन बोरों में खाद भरा जा रहा था, जिन पर इंडियन पोटाश लिमिटेड कंपनी का नाम, प्रधानमंत्री की तस्वीर और भारतीय जन उर्वरक परियोजना का उल्लेख था। पुलिस को मौके से पैक किए हुए 300 बोरे मिले, जबकि एक कमरे में सफेद बोरों में भरा खाद भी बड़ी मात्रा में रखा था। स्टेशन रोड थाना प्रभारी दर्शन शुक्ला के मुताबिक जेवराखेरा रोड पर कॉलोनी की प्लॉटिंग के बीच एक प्लॉट में दीवार खड़ी कर टिनशेड बनाया गया था। इसी के भीतर आठ लोग बोरों की पैकिंग कर रहे थे। जांच में पता चला कि सफेद बोरों से खाद निकालकर उसे हरे रंग की पैकिंग में भरा जा रहा था, ताकि वह असली डीएपी खाद जैसा दिखाई दे। पानी में डालते ही घुल गया खाद पुलिस ने मौके पर मिली सामग्री की जांच के लिए कृषि विभाग को सूचना दी। इसके बाद उप संचालक कृषि अनंत सड़ैया अपनी टीम के साथ पहुंचे। अधिकारियों ने खाद का नमूना पानी में डालकर देखा तो वह तत्काल मिट्टी की तरह घुल गया। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डीएपी में मौजूद नाइट्रोजन का हिस्सा आसानी से घुल सकता है, लेकिन इसमें मौजूद फास्फोरस को पूरी तरह घुलने में 10 से 12 घंटे तक लग सकते हैं। मौके पर खाद के इस तरह घुलने के बाद अधिकारियों ने उसके नकली होने की आशंका जताई। अधिकारियों का कहना है कि सामान्य किसान के लिए केवल देखकर खाद की असलियत पहचानना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में इस तरह की मिलावट किसानों तक पहुंचने पर उनकी फसल और खेती की लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि, खाद की गुणवत्ता और उसकी वास्तविक संरचना की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच महत्वपूर्ण होगी। 300 बोरे पैक मिले छापे के दौरान पुलिस को मौके पर पैकिंग के लिए इस्तेमाल की जा रही मशीन भी मिली। बाहर खड़े एक मिनी लोडिंग वाहन में डीएपी खाद के आठ बोरे रखे हुए थे। पूछताछ में सामने आया कि कुछ समय पहले ही एक लोडिंग वाहन से नकली बताए जा रहे खाद के बोरे वहां से भेजे गए थे। पुलिस ने मौके पर मिली खाद को जब्ती में लेकर जांच शुरू की। अब यह पता लगाने की जरूरत है कि खाद कहां से लाया जा रहा था, उसकी पैकिंग किसके निर्देश पर की जा रही थी और पहले भेजे गए बोरों की आपूर्ति किन लोगों तक हुई। दिहाड़ी पर लाए थे मजदूरों को प्लॉट में खाद की पैकिंग करते मिले आठ लोगों ने पूछताछ में बताया कि वे भवन निर्माण में मजदूरी करते हैं। उनके मुताबिक, सुबह दो लोग उनके पास आए थे और 700 रुपये मजदूरी देने की बात कहकर काम पर लाए थे। उन्हें बताया गया था कि रेत को बोरों में भरना है, लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद सफेद बोरों से सामग्री निकालकर हरे बोरों में भरने का काम मिला। मजदूरों ने बताया कि काम पर लाने वाले दोनों व्यक्ति बाद में वापस नहीं लौटे। उन्होंने अपने नाम श्रीनिवास जाटव, देवेंद्र जाटव, रामअवतार पिप्पल, सतीश जाटव, गिर्राज जाटव, लाखन जाटव और बारेलाल पचौरी बताए। सभी ने अपना निवास उत्तमपुरा बताया। उपलब्ध जानकारी में आठवें मजदूर का नाम स्पष्ट नहीं है। अधूरे भवन में चल रहा था पूरा खेल जिस प्लॉट में खाद की पैकिंग की जा रही थी, वहां एक कच्चा और अधूरा भवन बना हुआ था। भवन की दीवार पर 'यह जगह बिकाऊ है' लिखा था। इसी स्थान पर खाद को कथित तौर पर असली कंपनी की पैकिंग जैसा रूप देने का काम चल रहा था।  

नकली जैव खाद पर लगेगी लगाम, मोहाली में शुरू हुई तीसरी हाईटेक जांच लैब

मोहाली. जैविक खेती के नाम पर किसानों को घटिया या नकली जैव उर्वरक बेचने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। पंजाब सरकार ने जैव उर्वरकों की गुणवत्ता जांच के लिए प्रदेश में तीन प्रयोगशालाओं का नेटवर्क तैयार किया है। पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुदियन ने मंगलवार को एसएएस नगर (मोहाली) के कलकत भवन में एक बायो-फर्टिलाइजर परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया, जो 4.50 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित तीन ऐसी प्रयोगशालाओं के राज्य के नेटवर्क को पूरा करता है। मोहाली, गुरदासपुर और बठिंडा में स्थित प्रयोगशालाओं का उद्देश्य जैव-निषेचनकर्ताओं और अन्य जैव-इनपुट की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, किसानों को नकली उत्पादों से बचाना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है। उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए, खुदियन ने कहा कि प्रयोगशालाएं किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करते हुए प्रमाणित और प्रभावी उत्पादों तक पहुंचने में मदद करेंगी। वे उर्वरक नियंत्रण व्यवस्था के प्रवर्तन को भी मजबूत करेंगे, निर्माताओं और डीलरों की निगरानी की सुविधा प्रदान करेंगे, और पंजाब की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल जैव-उर्वर उपभेदों में सुधार के लिए डेटा उत्पन्न करेंगे। देश के खाद्य उत्पादन में पंजाब के योगदान पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य में भारत के गेहूं और चावल उत्पादन में 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करने और कृषि उपज की गुणवत्ता को बनाए रखने वाली स्थायी कृषि पद्धतियों के महत्व पर बल दिया। खुदियन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि उत्पादन के बारे में बढ़ती जागरूकता के बीच जैविक खेती को बरकरार रखा है। राज्य सरकार के अनुसार, पंजाब में लगभग 30,000 एकड़ जमीन 2025-26 में प्रमाणित जैविक खेती के अधीन थी। मंत्री ने कहा कि पंजाब की जैव उर्वरकों की सालाना खपत 15,000 से 16,000 मीट्रिक टन/किलोलीटर होने का अनुमान है और यह लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों के बढ़ते उपयोग और जैविक खेती के विस्तार के साथ गुणवत्ता परीक्षण आवश्यक हो गया है। तीन प्रयोगशालाओं से नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने, कृषि आदानों की गुणवत्ता में सुधार करने और स्थायी कृषि प्रथाओं को अपनाने वाले किसानों का समर्थन करने में मदद करने की उम्मीद है। उद्घाटन के मौके पर डेराबसी के विधायक कुलजीत सिंह रंधावा, अपर सचिव कृषि लतीफ अहमद और निदेशक कृषि गुरजीत सिंह बराड़ भी मौजूद थे।

छत्तीसगढ़ में खाद खरीदने का बदलेगा तरीका, किसानों को मोबाइल ऐप से करनी होगी खरीदी

दुर्ग. किसानों को समय पर, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग उर्वरक विक्रय की नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर रहा है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को अब खरीफ और रबी सीजन की खेती के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की खरीदी करनी होगी। रबी सीजन में किसानो को टोकन के माध्यम से खाद मिलेगा। जानकारी के मुताबिक, मोबाइल ऐप आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली को पहले गरियाबंद एवं बीजापुर जिलों में मॉडल के रूप में संचालित किया गया था। इसके सफल क्रियान्वयन के बाद अब रबी सीजन 2026-27 से इसे पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जा रहा है। यह किसानों के लिए नई व्यवस्था होगी। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण को सुव्यवस्थित करना, कालाबाजारी पर नियंत्रण रखना तथा किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में होने वाली अनावश्यक परेशानियों को कम करना है। नई प्रणाली के माध्यम से पीओएस मशीन से अनिवार्य विक्रय, उपलब्ध स्टाक का रियल टाइम मिलान, पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन एवं आधार लिंकिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे उर्वरकों की अग्रिम मांग का आकलन करने, भंडारण एवं वितरण की बेहतर कार्ययोजना तैयार करने तथा अमानक उर्वरकों और कालाबाजारी पर निगरानी मजबूत करने में सहायता मिलेगी। टोकन के लिए करना होगा यह प्रक्रिया नई व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से उर्वरक खरीदी की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। जिन किसानों के पास स्वयं का मोबाइल फोन नहीं है, वे परिवार के किसी अन्य सदस्य के मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर से एफएफएस फर्टिलाइजर ऐप इंस्टाल कर आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद टोकन अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से नजदीकी निर्धारित केंद्र से अनुशंसित मात्रा में उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।

खाद-बीज में अनियमितता का खुलासा, तीन के खिलाफ FIR; तीन गोदाम सील

रायपुर. किसानों तक पहुंचने वाले खाद, बीज और कीटनाशक सामाग्री में अनियमितता पाए जाने पर खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. बिना प्राधिकार के कारोबार किया जा रहा था. वहीं कुछ संस्थानों में एक्सपायरी कीटनाशक मिली. औचक निरीक्षण के दौरान गोदामों से भंडारण संबंधी बॉक्स, स्टीकर और सील जैसी सामान बरामद किया गया है. कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है. जांच के बाद तीन व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. वहीं 9 संस्थानों के विक्रय पर प्रतिबंध और 3 गोदाम को सील कर दिया गया है. वहीं एक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है. राज्य और जिला स्तरीय संयुक्त जांच दल ने प्रतिष्ठानों के औचक निरीक्षण किया. रायपुर जिले में मेसर्स पुलकित बायोफर्टिलाइजर, हरियाणा और रविन्द्र कुमार मित्तल को बिना प्राधिकार पत्र के बीज और उर्वरक का व्यापार किए जाने पर एफआईआर दर्ज की गई. इसके अलावा एकॉन क्रॉप साइंसेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एमिरॉन ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, डेक्सीस एग्रो सॉल्यूशन, भास्कर कृषि केंद्र, अभनपुर कृषि केंद्र और सोपन एग्री केयर प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य प्रतिष्ठानों पर भी अलग-अलग अनियमितताओं के चलते बिक्री प्रतिबंध और नोटिस की कार्रवाई की गई है. वहीं निधि मार्केटिंग सीएंडएफ, उरकुरा से जुड़े कुछ प्रतिष्ठानों में कृषि उत्पादों के भंडारण में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस जारी किया गया. गोदाम से बॉक्स-स्टीकर बरामद जांच के दौरान भंडारण से संबंधित बॉक्स, स्टीकर और सील जैसी सामग्री मिलने पर गोदाम सील कर दिया गया. इसके अलावा निरीक्षण में सहयोग नहीं करने पर आरडी इंटरप्राइजेस और डीसी इंटरप्राइजेस के विक्रय केंद्र भी सील किए गए हैं. उप संचालक कृषि ने बताया कि स्पष्टीकरण पर संबंधितों द्वारा पक्ष रखे जाने के बाद उर्वरक में अनियमितता पर उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 एंव आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और कीटनाशी उत्पादों में अनियमितता पर कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियम 1971 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी.

किसानों के लिए बड़ी सुविधा, ऐप से बुक करें खाद और QR कोड दिखाते ही मिलेगा उर्वरक

पूर्णिया  किसानों को अब खाद के लिए उर्वरक दुकानों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। किसान अब ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के नाम से डिजिटल प्रणाली विकसित किया गया है। इसके तहत किसान घर बैठे मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार खाद की बुकिंग कर सकेंगे। इसके लिए किसान की फार्मर आईडी होना अनिवार्य है। मोबाइल ऐप पर आधार संख्या और ओटीपी के माध्यम से किसान की पहचान का सत्यापन होगा। ऐप पर किसान अपने खेत और फसल का विवरण दर्ज कर आसानी से मोबाइल से ही खाद की बुकिंग कर रहे हैं। बुकिंग के बाद मोबाइल पर मिलने वाले क्यूआर कोड को अधिकृत विक्रेता के पास स्कैन कराने पर तुरंत खाद उपलब्ध कराई जाएगी। कृषि कर्मियों को दी गई है जागरूकता की जिम्मेदारी अधिकारियों का मानना है कि इससे खाद के वितरण में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था को लेकर किसानों को जानकारी देने की जिम्मेदारी पंचायत एवं प्रखंड स्तर के कृषि कर्मियों को दी गई है। किसान सलाहकार, कृषि फसल की जानकारी ऐप में दर्ज करेंगे तो उसके अनुसार उर्वरक की उचित मात्रा ऐप पर दिखेगी। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, उन्हें पहले इसे बनवाना होगा। फार्मर आईडी बनने के बाद किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। कृषि विभाग का मानना है कि डिजिटल बुकिंग शुरू होने के बाद खाद की उपलब्धता और वितरण पर निगरानी पहले से अधिक प्रभावी होगी। बटाइदार भी कर सकेंगे खाद का उठाव जिन किसानों की जमीन उनके नाम पर दर्ज है, वे आसानी से इस व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे। जिन किसानों के पूर्वजों के नाम जमीन दर्ज है या जिनका नाम जमाबंदी में नहीं है, उनके लिए भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्मर आईडी बनाने की व्यवस्था की गई है। संयुक्त स्वामित्व वाली जमीन समेत जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री आईडी नहीं बनी है, जो बटाईदार हैं या फिर सामुदायिक, मंदिर, सरकारी अथवा संस्थागत जमीन पर खेती करते हैं, उनके लिए भी इस निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद लेने की पूरी व्यवस्था की गई है। विभिन्न प्रकार की जमीन पर खेती करने वाले किसान भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इस व्यवस्था से जुड़ सकेंगे। जिले में ऐप के माध्यम से एक सितंबर से खाद की बुकिंग शुरू हो गई है। इस डिजिटल पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार अनुशंसित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना और पूरी बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। जिले में अब तक 4,846 किसानों ने ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग की है जिन्हें नियमानुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। – विजय प्रकाश, जिला कृषि पदाधिकारी, पूर्णिया  

कबीरधाम में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण, कालाबाजारी रोकने 170 केंद्रों का निरीक्षण

कबीरधाम में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण, कालाबाजारी  रोकने 170 केंद्रों का निरीक्षण दो विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित, 40 कृषि केंद्रों को  कारण बताओ नोटिस जारी रायपुर, राज्य सरकार खरीफ सीजन 2026 के लिए किसानों को पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध कराने सतर्कता के साथ कार्य कर रही है। जिलों में भी खाद-बीज की उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। खाद-बीज की कालाबाजारी को रोकने प्रशासन सतर्क है। इसी कड़ी में कबीरधाम जिले में भी खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण किया गया है तथा कालाबाजारी एवं अधिक मूल्य पर विक्रय रोकने के लिए व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जिला कबीरधाम में सहकारी क्षेत्र में 57,200 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण लक्ष्य के विरुद्ध सेवा सहकारी समितियों में 32,700 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जबकि डबल लॉक केंद्रों में 5,668 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध हैं। समितियों के माध्यम से किसानों को अब तक 21,151 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में 10,457 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 7,639 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। सहकारी समितियों एवं निजी विक्रय केंद्रों के माध्यम से उर्वरकों का वितरण निरंतर जारी है। डीएपी उर्वरक के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसाओं के अनुसार एनपीके, टीएसपी एवं एसएसपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग और वितरण के संबंध में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। मैदानी अमलों द्वारा किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। जिले में उर्वरकों के भंडारण, वितरण, कालाबाजारी, अधिक मूल्य पर विक्रय एवं अन्य अनियमितताओं पर नियंत्रण के लिए जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों, उड़नदस्ता दल तथा उर्वरक निरीक्षकों द्वारा अब तक 170 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 2 विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं तथा 40 कृषि केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सभी निजी उर्वरक विक्रेताओं को निर्धारित मूल्य एवं नियमानुसार उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। हाल ही में कलेक्टर की उपस्थिति में बोड़ला विकासखंड के तीन निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान किसानों से चर्चा कर उर्वरक वितरण व्यवस्था तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग के संबंध में जानकारी दी गई। इस दौरान अधिक मूल्य पर उर्वरक विक्रय की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। कृषि विभाग ने कहा है कि खरीफ 2026 के दौरान किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कालाबाजारी और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी एवं कार्रवाई जारी रहेगी।

सेवा सहकारी समिति मुनुंद में पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्धता

सेवा सहकारी समिति मुनुंद में पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद उपलब्धता  कालाबाजारी रोकने प्रशासन सतर्क रायपुर, राज्य सरकार खरीफ सीजन 2026 के लिए किसानों को पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध कराने सतर्कता के साथ कार्य कर रही है। जिलों में भी खाद बीज की उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। खाद-बीज की कालाबाजारी को रोकने प्रशासन सतर्क है। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिला प्रशासन के कृषि अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए जांजगीर-चांपा जिले में किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है तथा खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए नियमित निरीक्षण एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। कृषि विभाग के अनुसार सहकारी क्षेत्र में 39,200 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण लक्ष्य के विरुद्ध वर्तमान में 21,362 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जिसमें से 7,826 मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में 26,130 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 13,487 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है तथा 10,150 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। जिला जांजगीर-चांपा के नवागढ़ विकासखंड की सेवा सहकारी समिति मुनुंद में वर्तमान में यूरिया, डीएपी, एनपीके, जिंकेटेड सुपर फॉस्फेट तथा नैनो उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को निरंतर वितरण किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि किसानों को उनके खेती के रकबे के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शनिवार एवं रविवार सहित अवकाश दिवसों में भी सेवा सहकारी समितियों को संचालित कर खाद वितरण जारी रखा गया है। खाद की कालाबाजारी एवं वितरण में अनियमितता रोकने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय उर्वरक निरीक्षक दल द्वारा निजी कृषि केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान शासकीय दर से अधिक मूल्य पर उर्वरक विक्रय की शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

नारायणपुर में खरीफ सीजन की तैयारियां तेज, 47% खाद और 87% प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा

​नारायणपुर में खरीफ की तैयारियां तेज: 47% खाद और 87% प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा, वितरण में आई तेजी ​रायपुर     खरीफ सीजन 2026 को सफल बनाने और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग नारायणपुर द्वारा युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। जिले में किसानों को समय पर खाद और उन्नत बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भंडारण और वितरण के कार्य में तेजी आई है, ताकि मानसूनी बुवाई के दौरान अन्नदाताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।       ​कृषि विभाग द्वारा जारी ताजा प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जिले में खाद और बीज की उपलब्धता तथा वितरण की स्थिति काफी मजबूत है। जिले में लक्ष्य के मुकाबले अब तक आधे से अधिक खाद-बीज का वितरण पूरा किया जा चुका है।     जिले के खेतों को समृद्ध करने के लिए इस साल कुल 4,645 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक वितरण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य के मुकाबले विभाग अब तक 2,187.80 मीट्रिक टन खाद का सुरक्षित भंडारण कर चुका है, जो कि कुल लक्ष्य का लगभग 47 प्रतिशत है। राहत की बात यह है कि भंडारित की गई इस खाद में से 1,511.35 मीट्रिक टन यानी उपलब्ध खाद का 69 प्रतिशत किसानों के हाथों तक पहुंच चुका है, जिससे खेतों में शुरुआती पोषण की कमी नहीं होगी।       दूसरी ओर, खेतों में बेहतर अंकुरण और बंपर पैदावार के लिए प्रमाणित बीजों का वितरण भी बेहद संतोषजनक है। जिले को इस सीजन के लिए 2,303 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य मिला था, जिसके जवाब में विभाग ने रिकॉर्ड तेजी दिखाते हुए 2,011.80 क्विंटल बीजों का भंडारण कर लिया है। यह कुल लक्ष्य का शानदार 87 प्रतिशत है। इस उपलब्ध बीज में से 1,355.96 क्विंटल लगभग 67 प्रतिशत बीज किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, और किसान अब अपने खेतों में बुवाई की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। ​कालाबाजारी पर रोक और पारदर्शी वितरण प्राथमिकता         जिले की कृषि विभाग की उपसंचालक ने बताया कि इस बार रणनीति एडवांस प्लानिंग के तहत तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐन बुवाई के वक्त किसी भी किसान को कतारों में न लगना पड़े और न ही सामग्री की कमी हो। खाद और उन्नत बीजों का भंडारण व उठाव समानांतर रूप से जारी है ताकि अंदरूनी क्षेत्रों के अंतिम किसान तक इसकी समय पर पहुंच हो सके। ​कृषि विभाग ने राज्य के किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के भ्रम या बिचौलियों के झांसे में न आएं।       ​किसान केवल प्राधिकृत (अधिकृत) विक्रेताओं और शासकीय सहकारी समितियों से ही खाद-बीज की खरीदी करें।​खरीदी के समय पावती/बिल अवश्य लें। किसी भी प्रकार की किल्लत, गुणवत्ता में कमी या अधिक दाम वसूलने की शिकायत पर तत्काल अपने नजदीकी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करें। ​