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वजन घटाना है तो डिनर में शामिल करें मिलेट्स से बनी ये हेल्दी डिशेज रोज।

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल के कारण वजन बढ़ना एक आम समस्या है, जिससे आज बड़ी आबादी परेशान है. लोग वजन घटाने के लिए जिम या डाइटिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन इसका सबसे सही और आसान रास्ता आपके किचन से ही होकर गुजरता है. दरअसल, हमारा रात का खाना (डिनर) वजन कंट्रोल करने में सबसे अहम भूमिका निभाता है. अगर आप रात में लाइट और न्यूट्रिशियस खाना खाते हैं, तो वजन तेजी से कम हो सकता है. अगर आप भी वेट लॉस जर्नी पर हैं, तो मिलेट्स यानी कि मोटे अनाज से बनी डिशेज आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हैं. मिलेट्स में भरपूर फाइबर, प्रोटीन और विटामिंस होते हैं, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं और बार-बार भूख लगने की आदत को रोकते हैं. तो चलिए जानते हैं मिलेट्स से बनने वाले ऐसे 3 टेस्टी और आसान डिनर आइटम्स के बारे में, जो वजन कम करने में आपकी मदद करेंगे. डिनर में ट्राई करें ज्वार की वेज खिचड़ी खिचड़ी को हमेशा से ही पचाने में सबसे आसान और हल्का भोजन माना गया है. ऐसे में रात के खाने के लिए ज्वार की खिचड़ी भी आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले साबुत ज्वार को कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोकर रख दें. इसके बाद प्रेशर कुकर में थोड़े से घी, जीरे, हरी मिर्च और अपनी पसंदीदा सब्जियों जैसे गाजर, बीन्स, मटर और टमाटर के साथ इसे अच्छी तरह से पका लें. बता दें ज्वार में मौजूद फाइबर डाइजेशन को बेहतर रखता है और साथ ही आपके शरीर में एक्स्ट्रा फैट को भी जमा नहीं होने देता. यह सिंपल सी डिश स्वाद और सेहत का एक यूनिक कॉम्बिनेशन है. रागी का डोसा भी है एक हेल्दी ऑप्शन अगर आपको रात के समय अक्सर कुछ क्रिस्पी और टेस्टी खाने का होता है, तो आप रागी का डोसा आपके लिए एक परफेक्ट चॉइस साबित हो सकता है. रागी में आपको भरपूर मात्रा में कैल्शियम और आयरन मिल जाता है. रागी का डोसा बनाने के लिए रागी के आटे में थोड़ा सा दही, पानी, बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च मिलाकर एक स्मूथ बैटर तैयार कर लें. इसके बाद एक नॉन-स्टिक तवे पर हल्का सा तेल लगाकर इसके पतले और करारे डोसे सेकें. अब इसे पुदीने या टमाटर की हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें. यह एक बेहद कम कैलोरी वाला लाइट डिनर ऑप्शन है. तेजी से वजन घटाने के लिए बाजरे का उत्तपम बात चाहे सर्दियों के मौसम की हो या फिर नॉर्मल दिनों की, बाजरे को हमारे सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद माना गया है. अगर आप अपना बढ़ा हुआ वजन घटाना चाहते हैं तो रात के खाने में आपको बाजरे का उत्तपम जरूर ट्राय करना चाहिए. इसके लिए बाजरे के आटे में थोड़ा सा पानी और छाछ मिलाकर थोड़ा सा गाढ़ा घोल तैयार कर लें. अब इस घोल को तवे पर फैलाएं और ऊपर से बारीक कटी शिमला मिर्च, टमाटर और धनिया पत्ती डालें. इसे दोनों ही तरफ से हल्का सा सेक लें. बता दें बाजरा धीरे-धीरे डाइजेस्ट होता है, जिस वजह से रात के समय आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है और आपको असमय भूख भी नहीं लगती है.

18 मिनट की इंटरवल वॉकिंग: क्या वाकई तेजी से कम होता है वजन?

आजकल इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर एक नया ट्रेंड छाया हुआ है. हर दूसरा इन्फ्लुएंसर एक जापानी वॉकिंग मेथड की बात कर रहा है. इस तरीके से चलने पर आम वॉक के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से फैट बर्न होता है. ऐसे में मन में यह सवाल आता है कि क्या वाकई इस बात में कोई सच्चाई है, या यह भी कुछ महीनों में गायब हो जाने वाला कोई नया चोचला है. आइए जाते हैं. Japanese walking Method: क्या है यह 3-3-3 वॉकिंग फॉर्मूला? यह जापान की एक खास रिसर्च पर बेस्ड है, जिसे ‘इंटरवल वॉकिंग’ कहते हैं. इसमें आपको कुल 18 मिनट की वॉक करनी होती है. शुरुआत के 3 मिनट आपको बिल्कुल आराम से, धीरे-धीरे चलना है. इसके बाद अगले 3 मिनट आपको जितनी तेजी से हो सके, उतनी तेज वॉक करनी है. बस इसी चक्र को आपको 3 बार दोहराना है. इसके लिए आपको न तो किसी जिम की जरूरत है, न किसी महंगे सामान की और न ही किसी कड़े वर्कआउट प्लान की. जब आप धीमे चलते हैं, तो आपके शरीर को आराम मिलता है. वहीं जब आप तेज चलते हैं, तो आपके दिल की धड़कनें बढ़ती हैं. यही उतार-चढ़ाव इस वॉक को आम सैर से अलग और असरदार बनाता है. वजन घटाने में यह कैसे मदद करता है? इस तरीके (Japanese walking Method) से वॉक करने पर आपका मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है. इसका मतलब यह है कि वॉक खत्म करने के कई घंटों बाद भी, जब आप आराम से कुर्सी पर बैठे होते हैं, तब भी आपका शरीर कैलरी बर्न कर रहा होता है. इसके अलावा, यह शरीर में इंसुलिन को बेहतर बनाता है जिससे पेट के आसपास की चर्बी को पिघलाने में मदद मिलती है. चूंकि यह सिर्फ 18 मिनट का है, इसलिए लोग इसे रोज आसानी से कर पाते हैं. आम वॉक से यह कितनी अलग है? रोजाना एक ही रफ्तार में आराम से टहलना सेहत के लिए अच्छा है, इसमें कोई बुराई नहीं है. लेकिन कुछ समय बाद हमारे शरीर को उसकी आदत हो जाती है, जिससे कैलरी बर्न होना कम हो जाता है. 3-3-3 मेथड शरीर को एक ढर्रे पर नहीं आने देता. जब आप अचानक धीमे से तेज होते हैं, तो शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. 30 मिनट की सामान्य सैर के मुकाबले यह 18 मिनट की इंटरवल वॉक आपके दिल और सेहत को कहीं ज्यादा फायदा पहुंचाती है. किसे करना चाहिए और कैसे शुरू करें? यह तरीका (Japanese walking Method) हर उस इंसान के लिए बेस्ट है जो भारी-भरकम एक्सरसाइज या जिम जाने से बचता है. जो लोग लंबे समय बाद दोबारा एक्टिव हो रहे हैं या जिनकी उम्र 40 से ज्यादा है, उनके लिए यह बेहद सुरक्षित और आसान है. बस दिल की बीमारी वाले लोग इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. इसे करने के लिए सबसे पहले 3 मिनट ऐसे चलें जैसे आप बाजार में घूम रहे हों. फिर अगले 3 मिनट इतनी तेज चलें जैसे आपकी बस छूट रही हो (दौड़ना नहीं है, बस तेज चलना है). ऐसा 3 बार करें. हफ्ते में कम से कम 5 दिन इसे करने का टारगेट रखें. Japanese walking Method: कितने दिन में दिखेगा असर? शुरुआती दो हफ्तों में ही आपको अपनी एनर्जी में सुधार दिखेगा और नींद भी बेहतर आएगी. चार से छह हफ्ते होते-होते आपकी सांस फूलना बंद हो जाएगी और तेज चलना आसान लगने लगेगा. अगर आप वजन और पेट की चर्बी में साफ बदलाव देखना चाहते हैं, तो आपको 8 से 12 हफ्ते यानी दो-तीन महीने लगातार इसे करना होगा.

ऑफिस में बैठकर काम से बढ़ रहा कमर दर्द, सही पोस्टर और ब्रेक से मिल सकती है राहत

आजकल ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है, लेकिन इससे कमर दर्द की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है. लगातार एक ही पोजिशन में बैठने से पीठ और कमर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे दिन के अंत में दर्द और जकड़न महसूस होती है. कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या बढ़ सकती है. सही बैठने का तरीका, बीच-बीच में ब्रेक लेना और हल्की एक्सरसाइज करने से इस दर्द से राहत पाई जा सकती है. कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी कमर को स्वस्थ और मजबूत रख सकते हैं. 1. सही पोस्टर रखें ऑफिस में बैठते समय हमेशा अपनी पीठ को सीधा रखें और कुर्सी के बैक सपोर्ट से सटाकर बैठें. कोशिश करें कि आपके कंधे ढीले रहें और झुककर काम न करें. पैरों को जमीन पर सीधा टिकाकर रखें, उन्हें हवा में लटकने न दें. गलत पोस्टर में लंबे समय तक बैठने से कमर की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या हो सकती है. 2. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना कमर दर्द का बड़ा कारण है. इसलिए हर 30-40 मिनट में 2-3 मिनट का छोटा ब्रेक जरूर लें. इस दौरान आप खड़े होकर थोड़ा चल सकते हैं या हल्का स्ट्रेच कर सकते हैं. इससे शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है.  3. आरामदायक कुर्सी का इस्तेमाल करें ऑफिस में काम करते समय ऐसी कुर्सी का चुनाव करें जिसमें अच्छा बैक सपोर्ट हो. कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि आपके पैर आराम से जमीन पर टिक सकें. अगर कुर्सी में लंबर सपोर्ट नहीं है, तो आप कुशन या छोटा तकिया लगाकर अपनी कमर को सपोर्ट दे सकते हैं. सही कुर्सी आपके पोस्टर को सुधारने में मदद करती है.  4. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें कमर दर्द से राहत पाने के लिए रोजाना कुछ आसान स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है. आप forward bend, back stretch और body twisting जैसी एक्सरसाइज कर सकते हैं. ये एक्सरसाइज मांसपेशियों की जकड़न को कम करती हैं और शरीर को लचीला बनाती हैं. दिन में 5-10 मिनट भी स्ट्रेचिंग करने से फर्क महसूस होगा. 5. गर्म सिकाई करें अगर दिनभर काम करने के बाद कमर में दर्द या भारीपन महसूस हो, तो गर्म सिकाई बहुत राहत देती है. आप गर्म पानी की बोतल या हीट पैड का इस्तेमाल कर सकते हैं. 10-15 मिनट तक सिकाई करने से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और दर्द कम होता है. यह एक आसान और असरदार घरेलू उपाय है. 6. सही गद्दे का चुनाव करें रात में सोते समय गद्दे का सही होना भी बहुत जरूरी है. बहुत ज्यादा सॉफ्ट गद्दा आपकी कमर को सही सपोर्ट नहीं देता, जबकि बहुत हार्ड गद्दा भी असहज हो सकता है. मीडियम फर्म गद्दा कमर के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को संतुलित सपोर्ट देता है और दर्द से बचाव करता है.  7. पानी और पोषण का ध्यान रखें अक्सर लोग पानी पीने और सही खानपान को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह भी कमर दर्द का एक कारण हो सकता है. शरीर में पानी की कमी से मांसपेशियां जल्दी थक जाती हैं. दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और अपनी डाइट में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन्स शामिल करें, ताकि आपकी मांसपेशियां मजबूत और स्वस्थ बनी रहें.

जापानी लाइफस्टाइल के 5 हेल्दी राज: लंबी उम्र और फिट बॉडी का आसान फॉर्मूला

हेल्दी और फिट रहने की बात आती है तो जापानी लाइफस्टाइल को दुनिया में सबसे बेहतर माना जाता है. जापान के लोग न सिर्फ लंबी उम्र जीते हैं, बल्कि बढ़ती उम्र में भी एक्टिव और एनर्जेटिक बने रहते हैं. उनकी फिटनेस का राज सिर्फ डाइट या एक्सरसाइज नहीं, बल्कि उनकी रोजाना की आदतों और लाइफस्टाइल में छुपा होता है. अगर आप भी बिना ज्यादा मेहनत के हेल्दी रहना चाहते हैं तो जापानी लोगों की कुछ आसान आदतें अपनाकर अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. धीरे-धीरे चबाकर खाएं जापानी लोग खाना बहुत आराम से और धीरे-धीरे चबाकर खाते हैं. इससे खाना अच्छे से पचता है और कम खाने में ही पेट भरा हुआ महसूस होता है. यह आदत ओवरईटिंग से बचाती है और वजन कंट्रोल रखने में मदद करती है. खाने में वैरायटी बढ़ाएं जापान में लोग एक बार में ज्यादा मात्रा में खाने के बजाय अलग-अलग चीजें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाते हैं. इससे शरीर को कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं और खाने में वैरायटी भी बनी रहती है, जबकि ओवरईटिंग नहीं होती. खुद को एक्टिव रखें जापानी लोग अपनी डेली रूटीन में फिजिकल एक्टिविटी को जरूर शामिल करते हैं. वे अक्सर पैदल चलते हैं या साइकिल का इस्तेमाल करते हैं. इससे उनका शरीर एक्टिव रहता है और फिटनेस बनी रहती है. भूख का 80% ही खाएं जापान में 'हारा हाची बू' नाम की परंपरा है, जिसमें लोग अपनी भूख का सिर्फ 80% ही खाते हैं. यह आदत ज्यादा खाने से रोकती है और वजन को बैलेंस रखने में मदद करती है. ग्रीन टी ग्रीन टी जापानी संस्कृति का अहम हिस्सा है. इसमें भरपूर एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. रेगुलर ग्रीन टी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है और वजन कंट्रोल में रहता है. अगर आप भी फिट और हेल्दी रहना चाहते हैं तो इन आसान आदतों को अपनी डेली रूटीन में शामिल कर सकते हैं. छोटी-छोटी ये आदतें आपके लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव ला सकती हैं.

रनिंग करते समय लोग कर रहे ये बड़ी गलती, डॉक्टर ने दी सलाह

रनिग ऐसी कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज है जिससे हार्ट के साथ-साथ शरीर के कई मसल्स ट्रेन होते हैं. आजकल काफी सारे ऐसे लोग हैं जिन्हें जिम जाने का समय नहीं मिल पाता तो वे लोग जिम की जगह रनिंग को अपनी डेली एक्टिविटी में शामिल किए हुए हैं. वहीं आजकल फिटनेस का क्रेज भी हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है तो सुबह-सुबह पार्कों और सड़कों पर दौड़ते लोग आम बात हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह मेहनत आपको फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा सकती है? हैदराबाद के एक न्यूरोलॉजिस्ट ने X पर बताया है कि ज्यादातर रनर्स गलत तरीके से ट्रेनिंग कर रहे हैं जिसका नेगेटिव असर भी हो सकता है. तो आइए रनिंग के दौरान लोग कौन सी गलती कर रहे हैं और सही तरीका क्या है, इस बारे में जान लेते हैं. क्या गलती कर रहे हैं लोग? हैदराबाद के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने बताया, हम अक्सर रनिंग के दौरान अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं लेकिन असली फिटनेस तेज दौड़ने में नहीं, बल्कि धीमे दौड़ने में छिपी है. यदि आपकी हर दौड़ आपको थकाकर चूर कर रही है तो आप ट्रेनिंग नहीं बल्कि खुद को थका रहे हैं.' 'फिटनेस की दुनिया में बोला जाता है कि तेज रनिंग करना चाहिए लेकिन फिजियोलॉजिकल यानी फिजिकल साइंस के लिहाज से तेज रनिंग करना सही नहीं है. हाई हार्ट रेट और हर बार रिकॉर्ड तोड़ने की होड़ शरीर पर एक्स्ट्रा दबाव डालती है. असल में परफॉर्मेंस में सुधार तब आता है जब आप अपने शरीर को समझने लगते हैं, न कि उसे हर वक्त लिमिट से पुश करने की कोशिश करते हैं. क्या है 'जोन 2-3' रनिंग का फंडा? डॉ. सुधीर ने समझाया, 'धीमी गति से रनिंग या जो 2-3 रनिंग हमारे माइटोकॉन्ड्रियल एफिशिएंसी को बढ़ाती है. यह हमारे शरीर का असली एंड्योरेंस इंजन है. दरअसल, जब आप धीमी गति से दौड़ते हैं तो आपकी रेस्टिंग हार्ट रेट कम होती है और एरोबिक बेस मजबूत होता है. इससे चोट लगने का खतरा कम हो जाता है और आप ज्यादा लंबे समय तक कंसिस्टेंसी के साथ दौड़ पाते हैं. इसके विपरीत लगातार तेज दौड़ने से थकान बढ़ती है और एक समय के बाद प्रोग्रेस रुक जाती है.' एथलीट्स का सीक्रेट फॉर्मूला यह सिर्फ एक थ्योरी नहीं है, बल्कि दुनिया के टॉप एथलीट्स इसी तरीके से ट्रेनिंग करते हैं. वे अपनी कुल ट्रेनिंग का 70 से 80 फीसदी हिस्सा आसान दौड़ को देते हैं. वे अपनी पूरी ताकत सिर्फ खास मौकों या रेस के लिए बचाकर रखते हैं. डॉ. सुधीर का कहना है कि अगर आप दौड़ते समय आसानी से बातचीत नहीं कर पा रहे हैं तो समझ लीजिए कि आपकी स्पीड जरूरत से अधिक है. हार्ट ट्रेन करें, ईगो को नहीं सोशल मीडिया पर अपनी स्पीड की फोटो-वीडियो दिखाने की होड़ अक्सर लोगों को चोटिल कर देती है. तेज दौड़ना सुनने में अच्छा लगता है लेकिन धीमी दौड़ आपको वास्तव में बेहतर बनाती है. डॉक्टर की सलाह साफ है कि अपने हार्ट को ट्रेन करें, अपने ईगो को नहीं. दौड़ना एक लंबी प्रोसेस है, इसे शॉर्टकट या दिखावे के चक्कर में खराब न करें. सही पेस वही है जिसमें आपका शरीर थके नहीं, बल्कि रिचार्ज महसूस करे.