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देश में सर्वाधिक 13 लाख 41 हजार से अधिक किसानों से हुआ गेहूं का उपार्जन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का उपार्जन हुआ है। मध्यप्रदेश को गेहूं खरीदी के लिये 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केन्द्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य को 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नम्बर-1 है, वहीं गेहूं उपार्जन के मामले में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। प्रदेश में लघु एवं सीमांत किसानों से सबसे पहले गेहूं की खरीदी की गई। कुल 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया। सतत मॉनिटरिंग प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये थे, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी थी। किसानों को हुआ 23,708.13 करोड़ से अधिक का भुगतान किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 23,708.13 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। उपार्जित गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन का परिवहन भी किया जा चुका है। यह उपार्जित गेहूं का 93 प्रतिशत है। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया है। संभागवार उपार्जन रीवा संभाग में 6 लाख 15 हजार 851 मीट्रिक टन, जबलपुर में 12 लाख 73 हजार 667, शहडोल में 70 हजार 666, सागर में 8 लाख 56 हजार 968, भोपाल में 28 लाख 47 हजार 284, नर्मदापुरम में 9 लाख 22 हजार 508, उज्जैन में 22 लाख 84 हजार 47, इंदौर में 8 लाख 62 हजार 719, ग्वालियर में 4 लाख 36 हजार 805 और चंबल संभाग में 2 लाख 40 हजार 581 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ है।  उपार्जन के समुचित प्रबंध प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया गया। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई थी। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई थीं।  

अब तक 12.56 लाख किसानों से 93.31 लाख मीट्रिक टन से अधिक हुआ गेहूँ का उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 12 लाख 56 हजार 952 किसानों से 93 लाख 31 हजार 177 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 19 हजार 423 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 81 लाख 47 हजार 675 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि गेहूँ उपार्जन 23 मई 2026 तक किया जायेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।  

अब तक 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक हुआ गेहूँ का उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 12 लाख 30 हजार 426 किसानों से 90 लाख 8 हजार 469 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 18 हजार 707 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 78 लाख 52 हजार 546 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि गेहूँ उपार्जन 23 मई 2026 तक किया जायेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।  

11.54 लाख किसानों से 80.90 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 11 लाख 54 हजार 593 किसानों से 80 लाख 90 हजार 864 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 9522.92 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 69 लाख 12 हजार 735 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। भोपाल संभाग में 22 लाख 86 हजार 653, उज्जैन संभाग में 18 लाख 92 हजार 792, नर्मदापुरम संभाग में 6 लाख 43 हजार 490, जबलपुर संभाग में 8 लाख 96 हजार 187, सागर संभाग में 6 लाख 67 हजार 881, ग्वालियर संभाग में 3 लाख 32 हजार 94, रीवा संभाग में 4 लाख 77 हजार 510, इंदौर संभाग में 6 लाख 59 हजार 985, चंबल संभाग में एक लाख 77 हजार 589 और शहडोल संभाग में 5 लाख 66 हजार 83 मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन हुआ है।  

9.09 लाख किसानों से 53.40 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 9 लाख 9 हजार किसानों से 53 लाख 40 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जाता है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि अभी तक 14 लाख 81 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 9525.70 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

8.12 लाख किसानों से 44.16 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 8 लाख 12 हजार किसानों से 44 लाख 16 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जाता है। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि अभी तक 14 लाख 78 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 7383.01 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

6.91 लाख किसानों से 34.73 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का हुआ उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 6 लाख 91 हजार किसानों से 34 लाख 73 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। अभी तक 14 लाख 64 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए गए हैं। किसानों के हित में गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक की गई। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईसी सर्वर की क्षमता एवं संख्या में वृद्धि कराई गई। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन की मॉनीटरिंग की जा रही है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 5462.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाए आदि की व्यवस्थाएँ की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके, इस हेतु समस्त आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्था की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ की भर्ती जूट बारदाने के साथ साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे उपार्जित गेहूँ का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

राहतगढ़ में विकास को मिली नई रफ्तार, खाद्य मंत्री ने किया 20 करोड़ के कार्यों का भूमि पूजन-लोकार्पण

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों को भरोसा देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार समर्थन मूल्य पर किसान का एक-एक दाना खरीदेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसान हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने में परेशानी नहीं होने दी जाएगी। खाद्य मंत्री  राजपूत ने यह बात सुरखी विधानसभा क्षेत्र के राहतगढ़ विकासखंड के ग्राम बहादुरपुर, ख़ैजरामाफी, अलीनगर और भावुकाबारी में 20 करोड़ रुपए के विकास कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण अवसर पर कही। खाद्य मंत्री  राजपूत ने कहा कि इस वर्ष प्रदेश में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, जिसे देखते हुए खरीदी की व्यवस्थाएं और अधिक सुदृढ़ की गई हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा स्लॉट बुकिंग, खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ाने और भुगतान की त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। खाद्य मंत्री  राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। गेहूं खरीदी के लिए केंद्र से कोटा बढ़वाना हो या खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाना—हर कदम किसान हित में उठाया गया है। मंत्री राजपूत ने विश्वास जताया कि सरकार की पारदर्शी और किसान-केंद्रित नीतियों से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी रहेगा। विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  राजपूत ने राहतगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत बहादुरपुर में पुलिया निर्माण तथा बहादुरपुर एनएच-86 से खैजरामाफी मार्ग के नवीनीकरण कार्य का भूमिपूजन कर क्षेत्र को विकास की बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर मंत्री  राजपूत ने कहा कि इस मार्ग के सुधार की मांग क्षेत्र के ग्रामवासियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से की जा रही थी, जिसे प्राथमिकता देते हुए 4 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति प्रदान कराई गई है। सड़क निर्माण पूर्ण होने के बाद लगभग 15 गांवों के लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण विकास को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हर क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में मढ़िया बाघ परियोजना के माध्यम से क्षेत्र के 51 गांवों में लगभग 15 हजार हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे करीब 40 हजार किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मंत्री  राजपूत ने ग्राम कल्याणपुरवीर में नवीन आंगनवाड़ी भवन के निर्माण की घोषणा की, जिससे बच्चों और महिलाओं को बेहतर पोषण एवं देखभाल की सुविधा मिल सकेगी। इसके साथ ही ग्राम बहादुर में मंगल भवन के निर्माण तथा पेयजल समस्या के समाधान हेतु हैंडपंप स्थापना की भी घोषणा की गई। मंत्री  राजपूत ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना है और इसी उद्देश्य के साथ क्षेत्र में लगातार विकास कार्यों को गति दी जा रही है। इस अवसर जनप्रतिनिधि और ग्रामीण जंग मौजूद रहे।  

खाद्य मंत्री राजपूत ने किया अपील: पीएनजी पाइपलाइन वाले क्षेत्र में कनेक्शन जरूर लें

जिस क्षेत्र में पीएनजी पाइपलाइन है, वहां इसका कनेक्शन जरूर लें : खाद्य मंत्री राजपूत पीएनजी नेटवर्क का हो रहा तेजी से विस्तार भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि वर्तमान मिडिल ईस्‍ट संघर्ष से उत्‍पन्‍न परिस्थितियों से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा पीएनजी नेटवर्क का तेजी से विस्‍तार कर, ऐसे स्‍थानों पर जहां पर सीजीडी संस्‍था की पाईलाईन मौजूद है, घरेलू, व्‍यावयिक एवं औद्योगिक उपभोक्‍ताओं को एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। इस संबंध में जिला स्‍तर पर जिला प्रशासन, खाद्य विभाग, नगरीय निकाय, ऑयल कंपनी एवं सीजीडी संस्‍थाओं के अधिकारियों द्वारा सतत रूप से कैंम्‍पों का आयोजन कर पीएनजी के लाभ एवं पीएनजी कनेक्‍श्‍न प्राप्‍त करने की प्रक्रिया से आम जनता को अवगत कराया जा रहा है। जहाँ पर पीएनजी की पाइपलाइन है यदि वहाँ के उपभोक्ता ने पीएनजी कलेक्शन नहीं लिया तो उनको जून के बाद एलपीजी का सिलेंडर प्राप्त नहीं होगा। इसलिए ऐसे उपभोक्ताओं को जिनके घर के पास से पीएनजी की पाइप लाइन जा रही है, उनको पीएनजी का कनेक्शन लेना अनिवार्य है। मंत्री राजपूत ने गैस उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि जिस क्षेत्र में पीएनजी की पाइप लाइन है, वहां पीएनजी कनेक्शन जरूर लें। यह एलपीजी से ज्यादा सस्ती और सुरक्षित है। पीएनजी का मतलब पाइप्ड नेचुरल गैस (Piped Natural Gas) है। यह मुख्य रूप से मीथेन (CH4) से बनी एक प्राकृतिक गैस है, जो पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों और उद्योगों तक पहुंचाई जाती है। यह सिलेंडर (एलपीजी) का एक सुरक्षित, सुविधाजनक और स्वच्छ विकल्प है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से कुकिंग के लिए किया जाता है। पीएनजी के लाभ एक हरा ईंधन – मीथेन में कार्बन और हाइड्रोजन का अनुपात सबसे कम है, जो पीएनजी को सबसे स्वच्छ ईंधनों में से एक बनाता है। भारत में पीएनजी के घरेलू भंडार बहुत अधिक हैं, इसलिए एलपीजी की तुलना में पीएनजी का उत्पादन और आपूर्ति भू-राजनीतिक उथल-पुथल से कम प्रभावित होती है। एलपीजी प्राप्‍त करने के लिये उपभोक्ताओं को ऑयल कंपनी में बार-बार सिलेण्‍डर बुक कराना पड़ता है, जबकि पीएनजी में कुकिंग गैस 24×7 सुलभ रूप से उपलब्ध होती है। एलपीजी की अपेक्षाकृत पीएनजी कम दर पर उपलब्‍ध है। पीएनजी के उपभोक्‍ता को उसके द्वारा वास्‍तविक उपयोग की गई, मात्रा का ही भुगतान करना होता है, जबकि एलपीजी के संबंध में पूरा सिलेंडर बुक करके प्राप्‍त किया जाता है। पीएनजी पर पकाए गए भोजन का पोषण मूल्य बेहतर होता है, क्योंकि एलपीजी की तुलना में पीएनजी से निकलने वाली गर्मी की तीव्रता कम होती है। मौजूदा एलपीजी स्टोव को बहुत कम खर्च पर पीएनजी के उपयोग के लिए बदला जा सकता है। क्या PNG सुरक्षित है पीएनजी बिल्कुल सुरक्षित है, क्योंकि नेचुरल गैस (पीएनजी) हवा से हल्की होती है। रिसाव की स्थिति में, गैस ऊपर उठ जाएगी और पर्याप्त वेंटिलेशन के साथ आसपास की हवा में फैल जाएगी। पीएनजी कनेक्शन कैसे प्राप्त करें पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें। केवायसी दस्तावेज के रूप में पहचान और स्वामित्व प्रमाण/मकान मालिक की एनओसी लायें कण्‍ट्रोल रूम सीजीडी संस्‍थाओं को घरेलू एवं व्‍यावसायिक पीएनजी के आवेदनकर्ताओं को पीएनजी कनेक्‍शन प्राप्‍त करने के लिये सीजीडी संस्‍थाओं के कन्‍ट्रोल रूम नं. निम्‍नानुसार हैं। i. अवंतिका गैस लिमिटेड इंदौर, उज्‍जैन, ग्‍वालियर (9424098887) ii. गैल गैस लिमिटेड देवास, रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788) iii. नवेरिया गैस लिमिटेड धार (07292-223311) iv. थिंक गैस भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-5727-107) v. आईओसीएल गुना (9425991090), मउगंज, रीवा(9424836488), अशोकनगर(9425119522), मुरैना(7223982333) vi. बीपीसीएल मैहर, सतना, शहडोल(9424738607), सीधी, सिंगरौली(9424341954) vii. गुजरात गैस लि. रतलाम (7412230292) प्रदेश के उन शहरों में जिन स्‍थानों से पाईपलाईन गई है, उस पाईपलाईन के आस-पास के घरेलू एवं व्‍यावसायिक उपभोक्‍ता पीएनजी कनेक्‍शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। प्रदेश के अन्‍य जिलों में पाईपलाईन का विस्‍तार होने के उपरांत पीएनजी कनेक्‍शन प्रदाय किये जा सकेंगे। 

28199 किसानों से 12 लाख 52 हजार 470 क्विंटल गेहूँ की खरीदी : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक 28 हज़ार 199 किसानों से 12 लाख 52 हजार 470 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 10 करोड़ 23 लाख रुपए का भुगतान उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 9 अप्रैल से शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि शेष संभागों में 15 अप्रैल से गेहूँ का उपार्जन शुरू किया जायेगा। अभी तक 2 लाख 35 हजार 177 किसानों द्वारा 1 करोड़ 3 लाख 90 हजार 280 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। गेहूँ खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूँ की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूँ बिक्री की सभी सुविधाएं मंत्री राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूँ विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने, तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूं में से 7 लाख 69 हजार 720 क्विंटल गेहूं का परिवहन किया जा चुका है। प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है।