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यूरोपा लीग सेमीफाइनल: फॉरेस्ट ने विला को 1-0 से हराया

नॉटिंघम  क्रिस वुड के करियर के 200वें गोल से नॉटिंघम फॉरेस्ट ने यूईएफए यूरोपा लीग के सेमीफाइनल के दूसरे लेग में एस्टन विला के खिलाफ 1-0 से जीत हासिल की। इस जीत ने फॉरेस्ट को फाइनल की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है। मैच की शुरुआत में दोनों टीमें बेहद रक्षात्मक नजर आईं, लेकिन फॉरेस्ट ने धीरे-धीरे खेल पर पकड़ बनानी शुरू कर दी। मॉर्गन गिब्स-व्हाइट ने दो अच्छे मौके बनाए, हालांकि वह उन्हें गोल में नहीं बदल सके। इलियट एंडरसन ने भी एक कोशिश की, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। दूसरी ओर, एस्टन विला ने भी जवाबी हमला किया। मॉर्गन रोजर्स के शानदार कर्लिंग शॉट को स्टीफन ऑर्टेगा ने बेहतरीन तरीके से रोक लिया। फॉरेस्ट का दबाव लगातार बना रहा। एमिलियानो मार्टिनेज को इगोर जीसस के प्रयास को गोल लाइन पर रोकने के लिए तेज प्रतिक्रिया दिखानी पड़ी। दूसरे हाफ में भी मुकाबला कड़ा रहा, जहां ओली वॉटकिंस को पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोल करने से ऑर्टेगा ने शानदार बचाव कर रोका। मैच के अंतिम पलों में निर्णायक मोड़ आया। ओमारी हचिंसन ने गेंद को खेल में बनाए रखा, जिसके बाद लुकास डिग्ने के हैंडबॉल के चलते पेनल्टी मिल गई। इस मौके पर क्रिस वुड ने कोई गलती नहीं की और दमदार शॉट के साथ गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिला दी। मैच के बाद वुड ने कहा कि यह दो लेग की टाई का केवल पहला हिस्सा है और असली चुनौती अभी बाकी है। उन्होंने माना कि बर्मिंघम में अगला मुकाबला कठिन होगा, क्योंकि एस्टन विला अपने घरेलू मैदान पर मजबूत टीम है। फॉरेस्ट के मुख्य कोच विटोर परेरा ने टीम की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि टीम ने मुश्किल हालात में भी शानदार प्रदर्शन किया है और खिलाड़ियों का जज्बा काबिल-ए-तारीफ है। अगला मुकाबला बर्मिंघम में खेला जाएगा, जो तय करेगा कि फाइनल में जगह कौन बनाएगा।

हालैंड के गोल से सिटी की जीत, आर्सेनल को पीछे छोड़ा

 लंदन  स्टार स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड के गोल की मदद से मैनचेस्टर सिटी ने बर्नले को 1-0 से हराकर इंग्लिश प्रीमियर लीग (ईपीएल) फुटबॉल टूर्नामेंट में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। इस तरह सिटी ने लीग में आर्सेनल के 200 दिनों से पहले स्थान पर चल रहे दबदबे को समाप्त कर दिया। वहीं यह हार बर्नले के लिए एक करारा झटका रही, क्योंकि इससे वह दूसरे डिवीजन में खिसक गया। हालैंड ने खेल के पांचवें मिनट में ही जेरेमी डोकु के पास पर लीग का अपना 24वां गोल दागा। इस जीत से सिटी खिताब का प्रबल दावेदार बन गया है। अब सिटी और आर्सेनल के 33 मैच में समान 70 अंक हो गए हैं और उनका गोल अंतर भी (37) बराबर है। हालांकि, सिटी ने आर्सेनल के 63 गोल की तुलना में 66 गोल किए हैं, जिससे वह पहले स्थान पर पहुंच गया है। बुधवार को खेले गए लीग के एक अन्य मैच में लीड्स ने स्टापेज टाइम के सातवें मिनट में गोल करके बोर्नमाउथ के साथ 2-2 से ड्रॉ खेला। यह वीडियो भी देखें बार्सिलोना की जीत में गोल कर चोटिल हुए यमाल युवा फुटबॉलर लामिने यमाल स्पेनिश लीग फुटबॉल टूर्नामेंट के मैच में बार्सिलोना के लिए विजयी गोल करने के बाद चोटिल हो गए। बार्सिलोना ने इस मैच में यमाल के एकमात्र गोल से सेल्टा विगो 1-0 से हराया। यमाल के चोटिल होने से उनकी विश्व कप में खेलने को लेकर आशंका बन गई है। बार्सिलोना ने इस जीत से लीग में दूसरे स्थान पर चल रहे रीयल मैड्रिड पर नौ अंक की मजबूत बढ़त बना ली। यमाल ने 40वें मिनट में पेनल्टी पर गोल किया। जैसे ही उनके साथी खिलाड़ी जश्न मनाने के लिए पहुंचे, वह जमीन पर गिर पड़े और फिर अपने बाएं पैर के पिछले हिस्से को पकड़ते हुए दिखाई दिए। वह मुकाबले में आगे नहीं खेल पाए। बार्सिलोना बना चैंपियन बार्सिलोना ने एस्पेनयोल को 4-1 से हराकर लगातार सातवीं बार महिला स्पेनिश लीग फुटबॉल टूर्नामेंट का खिताब जीता। इस जीत से बार्सिलोना दूसरे स्थान पर मौजूद रीयल मैड्रिड से 16 अंक आगे हो गया है। यह खिताब जीतने के लिए पर्याप्त हैं। बार्सिलोना का यह 11वां लीग खिताब है। बार्सिलोना ने इस साल के टूर्नामेंट में अपने 26 मैचों में से 25 मैच जीते हैं। पिछले साल नवंबर में उसे रीयल सोसिदाद के हाथों 1-0 से हार का सामना करना पड़ा था, जो उसकी एकमात्र हार थी। बार्सिलोना की महिला टीम ने लीग में अब तक 116 गोल किए हैं और सात गोल खाए हैं। इस तरह से उसका गोल अंतर 109 है। रीयल मैड्रिड का गोल अंतर 38 है।

पीएसजी ने लिवरपूल को 4-0 से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया

 लिवरपूल  चैंपियंस लीग में मंगलवार रात जीत के बावजूद बार्सिलोना सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सकी। एटलेटिको मैड्रिड से उसके घर पर खेल रही बार्सिलोना ने क्वार्टर फाइनल के दूसरे लेग में 2-1 से जीत दर्ज की। एटलेटिको ने पहला लेग 2-0 से जीता था और इस तरह वह 3-2 के कुल अंतर के साथ सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहा। वहीं, दूसरे क्वार्टर फाइनल में मौजूदा चैंपियन पेरिस सेंट जर्मेन (पीएसजी) ने लिवरपूल को 2-0 से हराया और कुल 4-0 के अंतर से अंतिम चार में जगह बनाई। पहले लेग में भी पीएसजी ने 2-0 की जीत दर्ज की थी। नौ साल बाद अंतिम चार में एटलेटिको बार्सिलोना के शुरुआती हमलों के बावजूद एटलेटिको मैड्रिड की टीम ने डटकर मुकाबला किया और लगभग एक दशक में पहली बार चैंपियंस लीग के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। उसने इससे पहले 2017 में इस प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। बार्सिलोना ने पहले 24 मिनट में दो गोल करके स्कोर बराबर कर दिया था। उसकी तरफ से लामिने यमाल और फेरान टोरेस ने गोल दागे। एटलेटिको मैड्रिड ने पहले ही हाफ में अडेमोला लुकमैन के गोल से वापसी की। बार्सिलोना को 79वें मिनट के बाद 10 खिलाड़‍ियों के साथ खेलना पड़ा क्योंकि डिफेंडर एरिक गार्सिया को लाल कार्ड दिखाया गया था। लिवरपूल की उम्‍मीदों पर फिरा पानी वहीं, लिवरपूल में खेले गए क्वार्टर फाइनल के एक अन्य मैच में पीएसजी ने ओस्मान डेंबेले के दूसरे हाफ में किए गए दो गोल की मदद से 4-0 की कुल जीत सुनिश्चित की। डेंबले के पहले गोल ने लिवरपूल की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, क्योंकि प्रीमियर लीग का यह क्लब चैंपियंस लीग में एक और यादगार वापसी की तलाश में था।  

सेंट पाउली पर 5-0 की जीत के साथ बायर्न का धमाका, बुंडेसलिगा में नया कीर्तिमान

 बर्लिन बायर्न म्यूनिख ने जर्मन फुटबॉल लीग बुंडेसलिगा में एक सत्र में सर्वाधिक गोल करने का अपना ही 54 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। लियोन गोरेत्जका का गोल बायर्न का लीग में इस सत्र का का 102वां गोल था जिससे उसने नया रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले का रिकॉड (101 गोल) भी बायर्न के नाम पर ही दर्ज था जो उसने 1971-72 में बनाया था। बायर्न ने इस मैच में सेंट पाउली को उसके घरेलू मैदान पर 5-0 से करारी शिकस्त दी। इस जीत से बायर्न ने रियाल मैड्रिड के खिलाफ होने वाले चैंपियंस लीग मैच के लिए अपनी तैयारी का पुख्ता सबूत भी पेश किया और बोरुसिया डॉर्टमुंड पर 12 अंकों की बढ़त बनाकर बुंडेसलिगा में खिताब जीतने की अपनी उम्मीदों को मजबूत किया। प्रतियोगिता में अभी पांच दौर के मैच खेले जाने बाकी हैं। जमाल मुसियाला ने नौवें मिनट में हेडर से गोल करके फ्रैंज बेकेनबॉयर और गेर्ड मुलर की मौजूदगी वाली बायर्न की 1971-72 की टीम के 101 गोल के रिकॉर्ड की बराबरी की। गोरेत्जका ने 53वें मिनट में वॉली से गोल करके रिकॉर्ड तोड़ दिया। इसके ठीक एक मिनट बाद माइकल ओलिस ने गोल संख्या को 103 तक पहुंचाया। निकोलस जैक्सन ने बायर्न के लिए चौथा गोल दागा और राफेल गुएरेइरो ने इस सत्र में उसकी गोल संख्या 105 कर दी। बायर्न 29 मैच में 76 अंक लेकर शीर्ष पर काबिज है। डॉर्टमुंड 29 मैच में 64 अंक के साथ दूसरे स्थान पर है।  

फुटबॉल में छत्तीसगढ़ को मिला रजत पदक, फाइनल में पश्चिम बंगाल से 0-1 से हार

फुटबॉल में छत्तीसगढ़ को रजत पदक : फाइनल में कड़े मुकाबले में पश्चिम बंगाल से 0-1 से मिली हार फाइनल में कड़े मुकाबले में पश्चिम बंगाल से 0-1 से मिली हार रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के अंतर्गत आज रायपुर के स्वामी विवेकानंद एथलेटिक स्टेडियम, कोटा में खेले गए पुरुष फुटबॉल के फाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के बीच बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर देखने को मिली। इस बेहद संघर्षपूर्ण मुकाबले में छत्तीसगढ़ को पराजय का सामना कर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। फाइनल मैच में दोनों टीमों ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित किया। छत्तीसगढ़ की टीम ने शानदार तालमेल, तेज आक्रमण और मजबूत रक्षा का परिचय दिया। खिलाड़ियों ने पूरे जोश और आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए हर पल मुकाबले को संतुलित बनाए रखा। हॉफ टाइम तक पश्चिम बंगाल की टीम 1-0 की बढ़त बनाए हुए थी। छत्तीसगढ़ की टीम ने लगातार आक्रमण कर गोल उतारने की भरपूर कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, विभिन्न विभागों तथा भारतीय खेल प्राधिकरण के अधिकारी और खेलप्रेमी बड़ी संख्या में फाइनल मैच देखने के लिए मैदान में पहुंचे थे।

छत्तीसगढ़ की फुटबॉलर किरण पिस्दा की कहानी: जनजातीय जड़ों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक का संघर्ष

जनजातीय जड़ों से अंतर्राष्ट्रीय फलक तक: छत्तीसगढ़ की स्टार फुटबॉलर किरण पिस्दा के संघर्ष की कहानी किरण भारत के लिए खेल चुकी हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेली हैं किसी भी पोज़िशन पर खेलने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत रायपुर  जब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट के दौरान किरण पिस्दा ने गोलकीपिंग के दस्ताने पहने, तब वह अपने अब तक के अनुभवों पर भरोसा कर रही थीं। उन अनुभवों पर, जिन्होंने चुनौतियों और निराशाओं के बीच उन्हें और अधिक मजबूत बनाया।              24 साल की उम्र में किरण अपने खेल कौशल के शिखर पर नजर आती हैं। वह यूरोप में लीग फुटबॉल खेल चुकी हैं और अब बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की दहलीज पर हैं।          हालांकि, उनका यह सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा, भले ही उन्हें स्कूल और परिवार से शुरुआती समर्थन मिला। उनके भाई गिरीश पिस्दा, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उनके लिए प्रेरणा बने।          किरण ने साई मीडिया से कहा, “मुझे स्कूल में काफी सपोर्ट मिला। वहीं से मुझे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के मौके मिले और हर चयन के साथ मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया।” इसके बाद किरण शारीरिक शिक्षा में डिग्री हासिल करने के लिए रायपुर आईं। छत्तीसगढ़ महिला लीग के दौरान उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें राष्ट्रीय शिविर के लिए बुलावा मिला।             किरण बताती हैं, “उस समय मैं शारीरिक रूप से उतनी फिट नहीं थी और मेरा मानसिक स्तर भी सीनियर खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार नहीं था।”  यही कारण रहा कि उस राष्ट्रीय शिविर में उन्हें भारतीय टीम के लिए चयन नहीं मिला। वह कहती हैं, “मुझे एहसास हुआ कि वहां जो अनुभव मिला है, उस पर मुझे काम करना होगा।”             इसके बाद उनके जीवन में आत्म-सुधार का एक कठिन दौर शुरू हुआ। उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया, मैचों का विश्लेषण करना शुरू किया और अपनी पोज़िशनल समझ को बेहतर बनाया। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव उनकी मानसिकता में आया।          वह कहती हैं, “मैंने खुद से कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं नकारात्मक नहीं सोचूंगी। अगर आप नकारात्मक हो जाते हैं, तो उसका सीधा असर आपके प्रदर्शन पर पड़ता है।” इस बदलाव में उनके मेंटर और कोच योगेश कुमार जांगड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। किरन ने कहा,“जब भी मुझे लगता है कि मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हूं या मन खराब होता है, तो मैं उनसे बात करती हूं। वह हमेशा मुझे सकारात्मक रहने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।”            किरण की मेहनत का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। घरेलू स्तर पर उनके प्रदर्शन ने केरल ब्लास्टर्स जैसे क्लबों के दरवाजे खोले, जहां उन्होंने खुद को और निखारा। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा बन गई। वह कहती हैं, “मैंने स्ट्राइकर के रूप में शुरुआत की, फिर मिडफील्ड में खेली और अब राष्ट्रीय टीम के लिए फुल-बैक के रूप में खेलती हूं। एक फुटबॉलर के रूप में आपको अपनी टीम के लिए कई पोज़िशन पर खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।”            किरण कई बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2022 के सैफ़ चैंपियनशिप स्क्वाड का हिस्सा रही हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेल चुकी हैं। फिर भी, इस मुकाम पर भी असफलताएं उनके सफर का हिस्सा रही हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एएफसी (AFC) महिला एशियन कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना उनके लिए एक और परीक्षा थी।          किरण कहती हैं, “बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना दुख देता है। हर खिलाड़ी इसे महसूस करता है। लेकिन अब मैं इसे अलग नजरिए से देखती हूं। इसे मैं और मेहनत करने और मजबूत वापसी करने की प्रेरणा मानती हूं।” दबाव को संभालना उनकी पहचान बन चुका है। चाहे टीम में जगह के लिए प्रतिस्पर्धा हो या अहम मैचों में प्रदर्शन, उन्होंने खुद को संयमित रखना सीख लिया है। वह कहती हैं, “ऊंचे स्तर पर खेलते समय दबाव हमेशा रहता है। आपको उसे संभालना सीखना पड़ता है।”             किरण टीम के प्रदर्शन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने कहा, “अगर टीम अच्छा कर रही होती है, तो हर खिलाड़ी आत्मविश्वास से भरा होता है। लेकिन जब टीम हार रही होती है, तो व्यक्तिगत प्रदर्शन भी प्रभावित होता है।” जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाली किरण दूर-दराज के इलाकों के खिलाड़ियों की चुनौतियों को अच्छी तरह समझती हैं। उनका मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच इस अंतर को पाटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।            वह कहती हैं, “जनजातीय इलाकों में बहुत प्रतिभा है, लेकिन खिलाड़ियों को हमेशा मौके नहीं मिलते। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। इससे उन्हें आत्मविश्वास और राज्य तथा देश के लिए खेलने का सपना देखने की प्रेरणा मिलती है।” जहां तक किरण का सवाल है, उनका फोकस फिलहाल इंडियन वुमेंस लीग जैसी घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने और राष्ट्रीय टीम में नियमित जगह बनाने पर है। लेकिन उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है।            वह कहती हैं, “मैं लगातार खुद को बेहतर बनाना चाहती हूं, नियमित प्रदर्शन करना चाहती हूं और बड़े टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं। अगर आपका चयन नहीं होता, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं—इसका मतलब है कि आपको और मेहनत करनी होगी।”

शर्मनाक: 25 लाख के विवाद में टीम इंडिया की प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द, गेट पर सुरक्षा गार्ड्स ने अड़ाया रास्ता

कोच्चि भारतीय फुटबॉल एक बार फिर शर्मिंदगी का सामना कर रहा है. 26 मार्च 2026 को कोच्चि के जवाहरलाल नेहरू इंटरनेशनल स्टेडियम में ऐसा मामला सामने आया, जिसने देश की खेल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. टीम इंडिया के हेड कोच खालिद जमील और कई खिलाड़ियों को स्टेडियम में घुसने से रोक दिया गया. यह घटना उस समय हुई जब टीम को एएफसी एशियन कप क्वालिफायर के मुकाबले से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी थी. भारत को 31 मार्च को हांगकांग के खिलाफ अहम मैच खेलना है, लेकिन उससे पहले ही इस विवाद ने माहौल बिगाड़ दिया है. सुरक्षा गार्ड्स ने रोका, लौटना पड़ा टीम को हेड कोच के साथ खिलाड़ी आशिक कुरुनियान, सहल अब्दुल समद और बिजॉय वर्गीस भी मौजूद थे. सभी को स्टेडियम के गेट पर ही रोक दिया गया. सुरक्षा कर्मियों ने साफ कहा कि जब तक जरूरी भुगतान नहीं होगा, तब तक एंट्री नहीं मिलेगी.  बताया जा रहा है कि केरल फुटबॉल एसोसिएशन द्वारा स्टेडियम किराए के लिए 20 से 25 लाख रुपये की सिक्योरिटी जमा नहीं की गई थी. इसी वजह से यह स्थिति पैदा हुई. मजबूरी में पूरी टीम को बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस किए वापस लौटना पड़ा. रद्द हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस, बढ़ी नाराजगी इस घटना के कारण आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करनी पड़ी. इससे खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ में नाराजगी देखने को मिली. एक अंतरराष्ट्रीय मैच से पहले इस तरह की अव्यवस्था ने भारतीय फुटबॉल की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है. पहले भी हो चुका है ऐसा विवाद यह पहली बार नहीं है जब कोच्चि में इस तरह का मामला सामने आया हो. इससे पहले फरवरी 2026 में भी केरल ब्लास्टर्स के खिलाड़ियों को इसी तरह के भुगतान विवाद के कारण स्टेडियम में एंट्री नहीं दी गई थी. एआईएफएफ ने दिया भरोसा ,मैच तय समय पर खेला जाएगा हालांकि AIFF ने भरोसा दिया है कि हांगकांग के खिलाफ मैच तय समय पर ही खेला जाएगा. उम्मीद है कि मैच से पहले सभी जरूरी भुगतान पूरे कर दिए जाएंगे. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं भारतीय फुटबॉल की साख को नुकसान पहुंचा रही हैं. अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते इन समस्याओं को सुलझा पाएगा या फिर ऐसे विवाद आगे भी जारी रहेंगे.

ईरान की महिला फुटबॉलरों ने राष्ट्रगान नहीं गाया, चेहरे पर उदासी और दिल में ग़म

तेहरान  अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बीच ईरान की महिला फुटबॉल टीम एशियन कप में खेल रही है। इस दौरान महिला खिलाड़ियों ने अलग ढंग से अपना विरोध जताया। ईरान की महिला फुटबॉल टीम ने एशियन कप में दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले इस्लामिक शासन का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया। महिला एशियाई कप फुटबॉल टूर्नामेंट में जहरा घनबारी की अगुआई वाली ईरान की टीम को दक्षिण कोरिया से हार का सामना करना पड़ा। उदास नजर आईं खिलाड़ी राष्ट्रगान के दौरान ईरान की खिलाड़ी उदास दिख रही थीं। वहीं, मैच से पहले मुख्य कोच मरजियाह जाफरी ने हमले और अपने देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर बयान देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि टीम को टूर्नामेंट पर फोकस करने की जरूरत है। हालांकि गोल्ड कोस्ट स्टेडियम में समर्थकों को देखकर उनके चेहरे पर मुस्कुराहट भी दिखी। पहले मैच में हार हालांकि ईरान की टीम को इस मैच में हार का सामना करना पड़ा। 2022 महिला एशियाई कप की उप विजेता रही दक्षिण कोरिया की टीम ने 3-0 से जीत हासिल की। टूर्नामेंट में ईरान टीम का लक्ष्य अगले साल ब्राजील में होने वाले महिला विश्व कप में जगह पक्की करना है। इसके लिए ऑस्ट्रेलिया में उसे कम से कम क्वॉर्टर फाइनल में पहुंचना होगा। ईरान का अगला मैच बृहस्पतिवार को मेजबान ऑस्ट्रेलिया से होगा। कैसा है युद्ध का हाल गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला बोला है। इसके जवाब में ईरान भी हमलावर है और मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला बोला है। वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए एक बड़े हमले में मौत हो गई है। इस घटना ने ईरान के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है और क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है। 86 वर्षीय खामेनेई की तेहरान के मध्य क्षेत्र में उनके परिसर को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में मौत हुई।

इंडियन फुटबॉल लीग का काउंटडाउन शुरू, 27 फरवरी से मैदान में उतरेगी टीमें

नई दिल्ली अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने रविवार को घोषणा की कि इंडियन फुटबॉल लीग (आईएफएल) 2025-26 सत्र की शुरुआत अब 27 फरवरी से होगी। एआईएफएफ ने लीग का कार्यक्रम भी जारी कर दिया है। यह सत्र पहले 21 फरवरी से शुरू होना था, लेकिन अब इसे छह दिन आगे बढ़ा दिया गया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 27 फरवरी को दो मुकाबले खेले जाएंगे। शुरुआती दिन नामधारी एफसी का सामना आईजोल एफसी से होगा, जबकि चनमारी एफसी की भिड़ंत गोकुलम केरल एफसी से होगी। क्लबों के प्रस्ताव के अनुसार 2025-26 सत्र दो चरणों में खेला जाएगा। पहले चरण में 10 भाग लेने वाले क्लब राउंड-रॉबिन प्रारूप में मुकाबले खेलेंगे। दूसरे चरण में टीमों को दो समूहों में विभाजित किया जाएगा। पहले चरण में शीर्ष पांच टीमें चैम्पियनशिप राउंड में पहुंचेंगी, जबकि नीचे की पांच टीमें केंद्रीकृत रेलिगेशन राउंड में प्रतिस्पर्धा करेंगी।  

उमा केवट बनी मध्य प्रदेश टीम की बेस्ट गोलकीपर, गुजरात में होगा राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टूर्नामेंट

शहडोल  मध्य प्रदेश का शहडोल जिला अब अपनी पहचान मिनी ब्राजील के नाम से बना रहा है, जिसकी ख्याति अब देश विदेश तक फैल रही है. साथ ही साथ यहां के खिलाड़ी भी अपना जलवा लगातार बिखेर रहे हैं. अभी हाल ही में शहडोल की बेटी उमा केवट ने मध्य प्रदेश की महिला सीनियर टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है. जिसके बाद वो एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं. शहडोल की बेटी का कमाल शहडोल के विचारपुर में सांई सब सेंटर की कोच लक्ष्मी सहीस ने बताया कि "शहडोल जिले की रहने वाली उमा केवट का सिलेक्शन राष्ट्रीय ओपन सीनियर महिला फुटबॉल टूर्नामेंट के लिए हो गया है. उमा केवट का मध्य प्रदेश टीम में सिलेक्शन होने के बाद उनके चाहने वालों के बीच खुशी का ठिकाना नहीं है. शहडोल के लिए ये एक बड़ा एचीवमेंट है." बेस्ट गोलकीपर हैं उमा केवट कोच लक्ष्मी सहीस बताती हैं कि "उमा केवट की उम्र लगभग 22 साल है और वो वर्तमान में मध्य प्रदेश की बेस्ट गोलकीपर में से एक हैं. उनके खेल में एक अलग ही टैलेंट है. उमा केवट के खेलने का अंदाज जिस तरह का है. अगर उन्हें प्रॉपर सुविधाएं मिलती रहीं और अच्छे कोच मिलते रहे सही मार्गदर्शन मिलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब उमा केवट मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि भारतीय महिला टीम से भी खेलती नजर आएंगी." मिला बेस्ट गोलकीपर का अवॉर्ड उमा केवट ने अभी हाल ही में खेल दिवस के मौके पर खेले गए सद्भभावना मैच में बेस्ट गोलकीपिंग कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था. ये मुकाबला भोपाल के टीटीनगर स्टेडियम में खेला गया था. मैच शहडोल जिले के विचारपुर मिनी ब्राजील और सरदारपुर के बीच खेला गया था, जहां उन्हें बेस्ट गोलकीपर चुना गया था, जिसमें 21 हजार रुपए की राशि भी प्रदान की गई थी. कहां और कब खेले जाएंगे मैच नेशनल ओपन सीनियर महिला फुटबॉल टूर्नामेंट ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन करा रहा है. इस टूर्नामेंट के मुकाबले गुजरात के भावनगर में खेले जाएंगे. जिस पर शहडोल वालों की भी नजर रहेगी क्योंकि इस टूर्नामेंट में मध्य प्रदेश महिला टीम से शहडोल की उमा केवट भी अपना जौहर दिखाती नजर आएंगी. मिनी ब्राजील से जर्मनी तक का सफर बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले मन की बात के 103वें एपिसोड में शहडोल के मिनी ब्राजील का जिक्र किया था. उसके बाद पीएम मोदी ने मार्च 2025 में अमेरिकन पॉडकास्टर लेक्सफ्रिडमैन के साथ चर्चा के दौरान फिर से मिनी ब्राजील के नाम से फेमस विचारपुर गांव के फुटबॉल खिलाड़ियों के बारे में जिक्र किया. बीते रविवार 31 अगस्त को मन की बात कार्यक्रम में पीएम ने मिनी ब्राजील के फुटबॉल खिलाड़ियों को लेकर अच्छी खबर सुनाई थी. इस पॉडकास्ट को जब जर्मनी के फुटबॉल कोच डायटमार बेयर्सडॉर्फर ने सुना तो इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कुछ फुटबॉल खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने की पेशकश की है, साथ ही जर्मनी के लिए बुलावा भेजा है. अक्टूबर महीने में जर्मनी की उड़ान भरेंगे 4 खिलाड़ी विचारपुर के खिलाड़ी अब अक्टूबर महीने में जर्मनी की उड़ान भरेंगे. 4 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक ये खिलाड़ी जर्मनी में ही रहेंगे. बाकायदा सिलेक्शन प्रोसेस से इनमें से 4 खिलाड़ियों का सिलेक्शन किया जाएगा. जिसमें 2 बालक और 2 बालिका होंगी. चयन के अलग-अलग क्राइटेरिया में इन खिलाड़ियों को जांचा परखा जाएगा. इसके बाद विचारपुर की पूरी टीम में से 2 मेल और 2 फीमेल प्लेयर्स को जर्मनी जाने का मौका मिलेगा.