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हरियाणा में ₹700 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला, CBI की कार्रवाई में 4 और गिरफ्तार

चंडीगढ़. हरियाणा के विभिन्न विभागों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट सोसायटी में 700 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई ने सोमवार को चार और आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें सेक्टर-35 के बर्तन कारोबारी गौरव कांसल के अलावा सिद्धार्थ नरूला, मोहित और मनोज शामिल हैं। चारों को पंचकूला की सीबीआई अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन के रिमांड पर भेजा है। सीबीआई के अनुसार, गौरव ने सरकारी खातों से निकाली गई रकम को कैश में बदलने और उसे दोबारा बैंक खातों में जमा कराने में अहम भूमिका निभाई। दो वर्षों के दौरान उसने आइडीएफसी बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर और मामले के कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि के साथ मिलकर 94 करोड़ रुपये ठिकाने लगाए। एजेंसी का आरोप है कि आरोपितों ने गिरोह की तरह काम किया। अब जांच की जा रही है कि रकम किन लोगों तक पहुंची और उससे कहां संपत्ति खरीदी गई। सीबीआई के मुताबिक, छह दिसंबर 2023 से पांच दिसंबर 2025 के बीच जाली कंपनियों आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से भारत डिस्ट्रिब्यूटर्स के खाते में 82 लेन-देन के जरिए 26.78 करोड़ रुपये भेजे गए। इसके बदले 66 लेन-देन के माध्यम से 25.18 करोड़ रुपये वापस भेजे गए। एजेंसी का आरोप है कि इस लेन-देन के बदले कैश भी दिया गया। सरकारी खातों से निकाली गई रकम को सीधे खर्च करने के बजाय कई बैंक खातों से घुमाकर कैश में बदला जाता था, ताकि स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो। सीबीआई के अनुसार, प्रक्रिया का संचालन रिभव ऋषि के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कार्यालय से होता था। गौरव कैश कन्वर्टर के तौर पर काम करता था। उसके एक चचेरे भाई की भूमिका की भी जांच हो रही है। सीबीआई के मुताबिक, गौरव ने 140 से अधिक लेन-देन के जरिए रिभव ऋषि के लिए सरकारी धन ठिकाने लगाया और कैश कन्वर्टर्स तक करीब 94 करोड़ रुपये पहुंचाए। नगर परिषद कालका के 18 करोड़ और आइएएस के बेटे तक हवाला  सबसे सनसनीखेज खुलासा 20 जनवरी 2026 का है। एमसी कालका के खाते से 18.46 करोड़ रुपये उड़ाए गए। इसमें से 4 करोड़ रुपये एसआरआर प्लानिंग गुरुज के आरबीएल खाते में गए, जिसने उसी दिन 2.50 करोड़ रुपये मेगा स्टोर को भेज दिए। 21 और 22 जनवरी को स्वास्तिक ने 80 लाख और 1.10 करोड़ रुपये और भेजे। 22 जनवरी 2026 को रिभव ऋषि के कहने पर मोहित गोयल ने अपने स्टोर और अपने जानकारों के जरिए 2 करोड़ रुपये कैश का इंतजाम किया। यही 2 करोड़ रुपये उसी शाम हवाला चैनल से दिल्ली में आरोपित आइएएस आरके सिंह के बेटे तक पहुंच गए। इस तरह कालका नगर परिषद का सरकारी पैसा 48 घंटे के अंदर कैश बनकर एक लोकसेवक तक पहुंच गया। सरकारी खजाने के 59.50 करोड़ डकारे वहीं गिरफ्तार तीसरा आरोपित सेक्टर-32डी में एससीओ 357 में संचालित चंडीगढ़ मेगा स्टोर का मालिक मोहित गोयल है। आरोपित सेक्टर-37बी का रहने वाला है। सीबीआइ के मुताबिक, मोहित गोयल जानता था कि आरएस ट्रेडर्स और कैपको फिनटेक सर्विसेज, रिभव ऋषि की फर्में हैं। आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि ने ही उसके स्टोर का खाता खुलवाया था। 11 अक्टूबर 2023 से 28 जनवरी 2026 के बीच आरोपित फर्मों आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक, स्वास्तिक देश और एसआरआर प्लानिंग गुरुज ने मोहित गोयल और उसकी दो फर्मों -चंडीगढ़ मेगा स्टोर और भगवती एजेंसीज को 112 बार में 59 करोड़ 50 लाख 47 हजार 515 रुपये भेजे। बदले में उसने सिर्फ 14 करोड़ 5 लाख 24 हजार रुपये ही बैंक से वापस भेजे।

हरियाणा में जमीन धोखाधड़ी का मामला, जींद रियासत की रानी और बहू समेत 5 पर FIR

जींद. जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार करने व दो बार जमीन की रजिस्ट्री करवाने के प्रयास में जींद रियासत की रानी इंद्रजीत कौर पर मामला दर्ज किया है। जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार करने व दो बार जमीन की रजिस्ट्री करवाने के प्रयास में जींद रियासत की रानी की पुत्रवधु हरसिमरन कौर, नगर परिषद के सचिव सुमित दहिया, पटवारी नरेश चहल, गांव रामराय निवासी सुभाष ठेकेदार के खिलाफ भी शहर थाना पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में वकील अभिमन्यु चौधरी की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जींद की रामबीर कॉलोनी निवासी व दिल्ली हाईकोर्ट में वकील अभिमन्यु चौधरी ने शहर थाना पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उनकी अपोलो रोड पर करीब 10 एकड़ जमीन है। इस जमीन पर उनका कब्जा भी है। कुछ लोगों ने भू-अभिलेख रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करके उनकी जमीन हड़पने का प्रयास किया है। चौधरी ने कहा कि उनके दादा बलदेव सिंह ने 1965 में 50 कनाल दो मरला का एक फार्म हाउस खरीदा था। अब यह प्रॉपर्टी उनकी तीसरी पीढ़ी के नाम आ चुकी है।

11 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, मंदसौर में 6 आरोपी गिरफ्तार

मंदसौर. मंदसौर जिले की शामगढ़ पुलिस ने देश के अलग-अलग कोनों में बैठकर ठगी का व्यवसाय करने वाले गिरोह को पकड़ा है। एसपी विनोद कुमार मीना ने बताया कि मुख्य सरगना सहित 6 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह 11 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की ठगी कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस गिरोह के तार जुड़े हैं। 100 से अधिक साइबर ठगी कर चुका है गिरोह। देशभर में फैला गिरोह का नेटवर्क पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से अन्य मामलों के संबंध में भी पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ में अन्य वारदातों का भी खुलासा होने की संभावना है। पुलिस ने बताया कि साइबर ठगों का गिरोह का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ था। ये लोग देश के अलग-अलग कोनों में बैठकर साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे।

सरकारी जमीन परिवार के नाम करने का आरोप, खंडवा पटवारी निलंबित

खंडवा   खंडवा में एक पटवारी ने स्वामित्व योजना का ऐसा गलत तरीके से लाभ उठाया कि सुनकर चौंक जाएंगे. मामला खंडवा के कोलगांव का है. शासकीय भूमि के रिकॉर्ड में अनियमितता के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पटवारी राजेश मंडलोई को निलंबित कर दिया है. उसने शासकीय भूमि के 50 से ज्यादा पट्टे अपने परिवार व रिश्तेदारों के नाम कर दिए।  कलेक्टर ने किया पटवारी को सस्पेंड ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह पुरनी ने आरोप लगाया था "ग्राम कोलगांव की शासकीय भूमि से संबंधित रिकॉर्ड में पटवारी ने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम 51 पट्टे दर्ज करा लिए हैं." इसके बाद कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने मामले की जांच के लिए अपर कलेक्टर को निर्देश दिए. राजस्व अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई. जांच प्रक्रिया के दौरान नायब तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन पटवारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।  नायब तहसीलदार की रिपोर्ट पर कलेक्टर की कार्रवाई कोलगांव की शासकीय भूमि से जुड़े रिकॉर्ड में अनियमितता सामने आने के बाद तत्कालीन पटवारी की भूमिका की जांच की गई. नायब तहसीलदार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने पटवारी राजेश मंडलोई को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम-9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. निलंबन अवधि के दौरान राजेश मंडलोई का मुख्यालय तहसील कार्यालय खंडवा निर्धारित किया गया है।  आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी. मामले में प्रशासनिक स्तर पर आगे की जांच और दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है. कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया "स्वामित्व योजना के अंतर्गत पटवारी ने स्वामित्व के प्लॉट में से ढेर सारे प्लॉट खुद और कुछ प्लॉट परिवार के नाम कर लिए. इसकी जांच करवाई गई. जांच में शिकायत सही पाए जाने पर पटवारी को निलंबित कर दिया है. विभागीय जांच भी शुरू के दी है।  

25 किलो अनाज का लालच देकर खुलवाए 65 खाते, बाद में पहुंची संदिग्ध रकम

पटना  बाढ़ में सामने आए साइबर फ्रॉड के इस मामले में ‘मनी म्यूल अकाउंट’ के इस्तेमाल की आशंका ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2024 में एक महिला ने अनाज देने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए और बाद में उन खातों से जुड़ा सिम, पासबुक और एटीएम अपने पास रख लिया। साइबर अपराध की भाषा में ‘मनी म्यूल’ ऐसे बैंक खाते या खाताधारक को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति की संदिग्ध या अवैध रकम प्राप्त करने, निकालने अथवा आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक को यह जानकारी नहीं होती कि उसका खाता साइबर अपराध की रकम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन बैंक रिकॉर्ड में खाता उसके नाम पर होने के कारण जांच की शुरुआती कड़ी उसी तक पहुंचती है। 25 किलो अनाज मिलने का लालच कोंदी पंचायत के सरपंच रूपेश कुमार के अनुसार, वर्ष 2024 में सीता देवी नाम की एक महिला ग्रामीणों के संपर्क में आई थी। आरोप है कि उसने हर महीने 25 किलो अनाज मिलने का लालच देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाए। बताया गया कि करीब 65 लोगों के आधार कार्ड के माध्यम से नए सिम लिए गए और उन्हीं नंबरों से सेंट्रल बैंक तथा केनरा बैंक में सीएसपी के जरिए खाते खुलवाए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि खाते खुलने के बाद नए सिम, पासबुक और एटीएम भी महिला ने अपने पास रख लिए। शुरुआत में कुछ लोगों को अनाज दिया गया, जिससे ग्रामीणों का विश्वास कायम हुआ। बाद में अनाज मिलना बंद हो गया और खाताधारकों को अपने खातों में होने वाले लेन-देन की जानकारी भी नहीं रही। मध्य प्रदेश और हैदराबाद से संदिग्ध पैसे आए मामले में हड़कंप तब मचा, जब कुछ खातों में मध्य प्रदेश और हैदराबाद से संदिग्ध रकम आने की जानकारी सामने आई और पुलिस संबंधित खाताधारकों के घर पहुंची। खाताधारकों का कहना है कि उन्हें इन पैसों के स्रोत की जानकारी नहीं थी। इसके बाद बड़ी संख्या में महिला और पुरुष खाताधारक बैंक पहुंच गए और अपने खाते बंद कराने की मांग करने लगे। इस पूरे मामले में मनी म्यूल का एंगल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि साइबर अपराध में सीधे अपराधी के खाते के बजाय किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते का इस्तेमाल रकम प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। इसके बाद रकम को नकद निकालने या दूसरे खातों में भेजने की प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि खाताधारक को इस गतिविधि की जानकारी नहीं है, तब भी जांच में उसके बैंक खाते का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण कड़ी बन जाता है। पुलिस कर रही पूरे मामले की जांच बैंक प्रबंधन का कहना है कि कोई भी ग्राहक निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैंक में खाता खुलवा सकता है, लेकिन खाता खुलने के बाद उसे किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए सौंपना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। बैंक का कहना है कि ऐसे मामलों में साइबर फ्रॉड की रकम खाते में आने पर पुलिस सबसे पहले खाताधारक से ही पूछताछ कर सकती है। इस मामले में फिलहाल पुलिस के पास आवेदन दिए जाने की जानकारी नहीं है। फिलहाल, जांच का सबसे अहम बिंदु यही होगा कि 65 खातों में रकम भेजने वाले कौन थे, रकम किसने निकाली और इन खातों के पीछे वास्तविक ऑपरेटर कौन था। यदि इन कड़ियों के बीच आपराधिक नेटवर्क स्थापित होता है, तो मनी म्यूल के जरिए बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क तक पहुंचने की संभावना की भी जांच की जा सकती है।

दिनेश बस्सी के बेटे वंश पर 50 लाख की धोखाधड़ी का केस, गिरफ्तारी के लिए छापेमारी

अमृतसर. कांग्रेस सरकार में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन रहे दिनेश बस्सी के बेटे वंश बस्सी और उसके एक साथी अमित बजाज के खिलाफ थाना सिविल लाइन की पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों आरोपितों ने जिला कचहरी के सामने कैनाल कालोनी निवासी कंवरदीप सिंह से पचास लाख की ठगी की है। उधर, थाना प्रभारी मोहित कुमार ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी की जा रही है। आरोपित अमित बजाज होली सिटी का रहने वाला है जबकि वंश बस्सी पुराने शहर स्थित घी मंडी के भीतर शहीद भगत सिंह रोड का रहने वाला है। शिकायतकर्ता ने बताया कि 26 जून 2023 को एक जमीन का एग्रिमेंट टू सेल किया था।

फर्जी दस्तावेज बनाकर CISF में नौकरी हासिल की, आरोपी राजस्थान से पकड़ा

दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र हासिल कर CISF में भर्ती हुआ था। अब पुलिस इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। दरअसल, सिटी कोतवाली पुलिस ने पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन सिंह (भा.पु.से.) के निर्देश में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र खूंटे (रा.पु.से.) के साथ एसडीओपी दंतेवाड़ा आकांक्षा ठाकुर (रा.पु.से.) के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी सत्यम दीक्षित को राजस्थान के देवली से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दंतेवाड़ा जिले का निवास और आय प्रमाण पत्र हासिल कर उसे CISF भर्ती में इस्तेमाल करने का आरोप है। जानिए कैसे हुआ मामले का खुलासा पुलिस के मुताबिक, आरोपी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर CISF में भर्ती हुआ था और वर्तमान में राजस्थान के देवली में नौकरी कर रहा था। मामले की विवेचना के दौरान दस्तावेजों को लेकर संदेह सामने आया, जिसके बाद राजस्व अधिकारियों और तहसील कार्यालय से संबंधित प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्रों के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज संदिग्ध और फर्जी पाए जाने संबंधी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। राजस्थान से पकड़ा गया आरोपी इसके बाद दंतेवाड़ा पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। आरोपी के राजस्थान में देवली में होने की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम वहां पहुंची और सत्यम दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अन्य लोगों की भूमिका की जांच में जुटी पुलिस पुलिस अब इस मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और प्रमाण पत्र हासिल करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने पर उसके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आम नागरिकों से पुलिस की अपील दंतेवाड़ा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सरकारी नौकरी अथवा किसी शासकीय लाभ के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग न करें। ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य योजनाओं में गड़बड़ी पर सख्ती, आयुष्मान और चिरायु में होगा थर्ड पार्टी ऑडिट

चंडीगढ़. आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत किए जा रहे दावों (क्लेम) का थर्ड पार्टी आडिट कराया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड को आडिट और क्लेम प्रक्रिया के लिए थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर को निर्देशित किया है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि योजना के कामकाज में थर्ड-पार्टी आडिट अनिवार्य किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयुष्मान भारत प्रक्रिया में कोई धोखाधड़ी न हो। आयुष्मान भारत के तहत सरकारी कालेजों और मेडिकल संस्थानों से क्लेम को कैसे बढ़ाया जा सकता है, इसकी जांच के लिए रणनीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि किडनी मरीजों के लिए क्रोनिक हीमोडायलिसिस, जो एक जरूरी और बार-बार होने वाला इलाज है, उसके लिए आयुष्मान भारत स्कीम के तहत सक्रिय दावा किया जाना चाहिए, ताकि यह पक्का हो सके कि रेगुलर डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों को बिना किसी पैसे की परेशानी के पूरा कवरेज मिले। समीक्षा बैठक में बताया गया कि हरियाणा ने आयुष्मान भारत और चिरायु स्कीम के तहत लगभग 28 लाख क्लेम निपटाए हैं। लाभार्थियों को 3900 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक सहायता दी गई है। राज्य में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए क्लेम 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गए हैं, जो लोगों में स्कीम के बारे में बढ़ती जागरूकता और उपयोग को दिखाता है। राज्य में 1363 पैनल वाले अस्पतालों (प्राइवेट -777, पब्लिक -586) का नेटवर्क है, जिसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के संस्थान शामिल हैं। डा. मिश्रा ने कहा कि हरियाणा ने चिरायु योजना और इसके एक्सटेंशन को लागू करके राष्ट्रीय आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई रूपरेखा से आगे बढ़कर काम किया है। इसमें तीन लाख रुपये तक की सालाना इनकम वाले परिवार शामिल हैं। इससे राष्ट्रीय पात्रता मानदंडों से परे स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा नेट से भी ज्यादा बढ़ गया है और राज्य की आबादी का एक बड़ा हिस्सा सुनिश्चित स्वास्थ्य कवरेज के तहत आ गया है। पात्र लाभार्थियों के लगभग 1.38 करोड़ कार्ड बनाए गए हैं।

बैंक खाता अनफ्रीज कराने के नाम पर रिश्वत मांगने वाला गिरोह गिरफ्तार

सतनाली साइबर क्राइम के नाम पर ठगी और रिश्वतखोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां बैंक खाता अनफ्रीज कराने के बदले पैसे मांगने वाले दो आरोपियों को मंगलवार देर शाम एंटी करप्शन ब्यूरो ने महावीर चौक से रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से 10 हजार रुपये की रिश्वत राशि भी बरामद की गई है। सतनाली क्षेत्र के जवाहर नगर निवासी नीरज ने बताया कि उसका बैंक खाता फ्रीज हो गया था। इसी दौरान उसे उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित साइबर क्राइम शाखा से कॉल आई जिसमें खाता अनफ्रीज कराने के बदले 10 हजार रुपये की मांग की गई। नीरज ने इसकी शिकायत एसीबी को दी, जिसके बाद टीम ने जाल बिछाया। योजना के तहत नीरज ने आरोपियों को पैसे देने के लिए महावीर चौक बुलाया। जैसे ही उसने 10 हजार रुपये दिए टीम ने मौके पर पहुंचकर गौरव नामक युवक को रंगे हाथों पकड़ लिया। उसके पास से 500-500 रुपये के 20 नोट बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान गौरव की निशानदेही पर एसीबी ने जितेंद्र नाम के दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि जितेंद्र, सुल्तानपुर साइबर ब्रांच के आईओ सत्येंद्र का भाई है। तहसीलदार अजय कुमार ने बताया कि उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। उनकी मौजूदगी में पूरी कार्रवाई की गई । इस दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।  

डिजिटल अरेस्ट से करोड़ों की ठगी, पटना में एक्टिव गैंग

पटना पटना में औसतन हर माह करीब 206 लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। शहर में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर ठग गिरोह खुद को कभी सीबीआई अधिकारी तो कभी मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके उनकी पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं। ठग शेयर मार्केट में निवेश, क्रिप्टोकरेंसी सहित अन्य झांसे देकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। खास बात यह भी है कि ठगी करने वाले लोग कम शिक्षित होने के बावजूद डॉक्टरों और प्रोफेसरों को शिकार बना रहे हैं। ठग अच्छे कम्युनिकेशन स्किल के कारण अपने इरादों में कामयाब हो जाते हैं। कई पेशेवर बने ठगी के शिकार पटना में हुईं ठगी की वारदातों पर नजर डालें तो पीड़ितों में से बहुत सारे डॉक्टर, प्रोफेसर, बड़े कारोबारियों के अलावा आईआईटी के छात्र तक शामिल हैं। इन उच्च शिक्षित वर्ग के लोगों को मैट्रिक और 11वीं तक शिक्षित शातिर बदमाश जाल में फंसा रहे हैं और लाखों रुपये हड़प रहे हैं। पटना की साइबर पुलिस ने जिन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया, उनमें से अधिकतर कम शिक्षित हैं। जाल में फंसाने वाला कम्युनिकेशन स्किल बताया जाता है कि कम औपरचारिक शिक्षा लेने के बावजूद ठगों के कम्युनिकेशन स्किल अच्छे होते हैं। वे हिंदी के साथ अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में भी फर्राटे से बातचीत करते हैं। उनके प्रभाव में आकर लोग उनके जाल में फंस जाते हैं। पटना में हाल ही में साइबर ठगों ने पटना यूनिवर्सिटी की रिटायर महिला प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाया और उनसे 3.07 करोड़ रुपये हड़प लिए। वे अलग-अलग झांसे देकर डॉक्टरों, अधिकारियों, कारोबारियों के साथ-साथ आईआईटी के छात्रों को भी शिकार बना चुके हैं। हर माह साइबर ठगी की 206 वारदातें साइबर पुलिस के मुताबिक पटना में हर माह औसतन 206 लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। सन 2025 में साइबर थाने में साइबर ठगी के 2602 केस दर्ज हुए थे। जारी साल में जनवरी और फरवरी में 284 केस दर्ज हुए हैं। साइबर पुलिस ने पिछले साल 139 और इस साल अब तक 35 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। कुल मामलों में से करीब 30 प्रतिशत मामलो में ठगी शेयर मार्केट में निवेश और एपीके फाइल भेजकर की गई है। पटना में साइबर अपराधियों का नेटवर्क बताया जाता है कि, बिहार में साइबर ठग नालंदा, नवादा, शेखपुरा और जमुई के हैं। वे पटना में किराए के फ्लैटों और मकानों से गिरोह चला रहे हैं। दक्षिणी पटना में साइबर अपराधियों का नेटवर्क तेजी से फैला है। वे रामकृष्ण नगर, पत्रकार नगर और बेऊर इलाके को अपना ठिकाना बना रहे हैं। बीते दो सालों में 80 प्रतिशत मामलों में अपराधी इन्हीं क्षत्रों से गिरफ्तार किए गए हैं। पिछले माह साइबर पुलिस ने एक गिरोह के छह ठगों को गिरफ्तार किया था। यह सभी मैट्रिक तक शिक्षित हैं। सोशल मीडिया से सीख रहे ठगी के गुर पता चला है कि ज्यादातर ठग किशोर और युवा हैं। वे सोशल मीडिया के जरिए ठगी के तरीके सीखते हैं। यू-ट्यूब और टेलीग्राम जैसी सोशल मीडिया साइटों पर साइबर ठगी को अंजाम देने के तरीके सिखाने वाले कई वीडियो उपलब्ध हैं। वे इन्हीं वीडियो से ठगी के गुर सीखते हैं। ये साइबर ठग ठगी के लिए सॉफ्टवेयर आईटी पेशेवरों की मदद से तैयार कराते हैं।