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स्वास्थ्य योजनाओं में गड़बड़ी पर सख्ती, आयुष्मान और चिरायु में होगा थर्ड पार्टी ऑडिट

चंडीगढ़. आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के तहत किए जा रहे दावों (क्लेम) का थर्ड पार्टी आडिट कराया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड को आडिट और क्लेम प्रक्रिया के लिए थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर को निर्देशित किया है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि योजना के कामकाज में थर्ड-पार्टी आडिट अनिवार्य किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयुष्मान भारत प्रक्रिया में कोई धोखाधड़ी न हो। आयुष्मान भारत के तहत सरकारी कालेजों और मेडिकल संस्थानों से क्लेम को कैसे बढ़ाया जा सकता है, इसकी जांच के लिए रणनीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि किडनी मरीजों के लिए क्रोनिक हीमोडायलिसिस, जो एक जरूरी और बार-बार होने वाला इलाज है, उसके लिए आयुष्मान भारत स्कीम के तहत सक्रिय दावा किया जाना चाहिए, ताकि यह पक्का हो सके कि रेगुलर डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों को बिना किसी पैसे की परेशानी के पूरा कवरेज मिले। समीक्षा बैठक में बताया गया कि हरियाणा ने आयुष्मान भारत और चिरायु स्कीम के तहत लगभग 28 लाख क्लेम निपटाए हैं। लाभार्थियों को 3900 करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक सहायता दी गई है। राज्य में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए क्लेम 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गए हैं, जो लोगों में स्कीम के बारे में बढ़ती जागरूकता और उपयोग को दिखाता है। राज्य में 1363 पैनल वाले अस्पतालों (प्राइवेट -777, पब्लिक -586) का नेटवर्क है, जिसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के संस्थान शामिल हैं। डा. मिश्रा ने कहा कि हरियाणा ने चिरायु योजना और इसके एक्सटेंशन को लागू करके राष्ट्रीय आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई रूपरेखा से आगे बढ़कर काम किया है। इसमें तीन लाख रुपये तक की सालाना इनकम वाले परिवार शामिल हैं। इससे राष्ट्रीय पात्रता मानदंडों से परे स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा नेट से भी ज्यादा बढ़ गया है और राज्य की आबादी का एक बड़ा हिस्सा सुनिश्चित स्वास्थ्य कवरेज के तहत आ गया है। पात्र लाभार्थियों के लगभग 1.38 करोड़ कार्ड बनाए गए हैं।

बैंक खाता अनफ्रीज कराने के नाम पर रिश्वत मांगने वाला गिरोह गिरफ्तार

सतनाली साइबर क्राइम के नाम पर ठगी और रिश्वतखोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां बैंक खाता अनफ्रीज कराने के बदले पैसे मांगने वाले दो आरोपियों को मंगलवार देर शाम एंटी करप्शन ब्यूरो ने महावीर चौक से रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से 10 हजार रुपये की रिश्वत राशि भी बरामद की गई है। सतनाली क्षेत्र के जवाहर नगर निवासी नीरज ने बताया कि उसका बैंक खाता फ्रीज हो गया था। इसी दौरान उसे उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित साइबर क्राइम शाखा से कॉल आई जिसमें खाता अनफ्रीज कराने के बदले 10 हजार रुपये की मांग की गई। नीरज ने इसकी शिकायत एसीबी को दी, जिसके बाद टीम ने जाल बिछाया। योजना के तहत नीरज ने आरोपियों को पैसे देने के लिए महावीर चौक बुलाया। जैसे ही उसने 10 हजार रुपये दिए टीम ने मौके पर पहुंचकर गौरव नामक युवक को रंगे हाथों पकड़ लिया। उसके पास से 500-500 रुपये के 20 नोट बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान गौरव की निशानदेही पर एसीबी ने जितेंद्र नाम के दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि जितेंद्र, सुल्तानपुर साइबर ब्रांच के आईओ सत्येंद्र का भाई है। तहसीलदार अजय कुमार ने बताया कि उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। उनकी मौजूदगी में पूरी कार्रवाई की गई । इस दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।  

डिजिटल अरेस्ट से करोड़ों की ठगी, पटना में एक्टिव गैंग

पटना पटना में औसतन हर माह करीब 206 लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। शहर में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर ठग गिरोह खुद को कभी सीबीआई अधिकारी तो कभी मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके उनकी पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं। ठग शेयर मार्केट में निवेश, क्रिप्टोकरेंसी सहित अन्य झांसे देकर लोगों को शिकार बना रहे हैं। खास बात यह भी है कि ठगी करने वाले लोग कम शिक्षित होने के बावजूद डॉक्टरों और प्रोफेसरों को शिकार बना रहे हैं। ठग अच्छे कम्युनिकेशन स्किल के कारण अपने इरादों में कामयाब हो जाते हैं। कई पेशेवर बने ठगी के शिकार पटना में हुईं ठगी की वारदातों पर नजर डालें तो पीड़ितों में से बहुत सारे डॉक्टर, प्रोफेसर, बड़े कारोबारियों के अलावा आईआईटी के छात्र तक शामिल हैं। इन उच्च शिक्षित वर्ग के लोगों को मैट्रिक और 11वीं तक शिक्षित शातिर बदमाश जाल में फंसा रहे हैं और लाखों रुपये हड़प रहे हैं। पटना की साइबर पुलिस ने जिन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया, उनमें से अधिकतर कम शिक्षित हैं। जाल में फंसाने वाला कम्युनिकेशन स्किल बताया जाता है कि कम औपरचारिक शिक्षा लेने के बावजूद ठगों के कम्युनिकेशन स्किल अच्छे होते हैं। वे हिंदी के साथ अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में भी फर्राटे से बातचीत करते हैं। उनके प्रभाव में आकर लोग उनके जाल में फंस जाते हैं। पटना में हाल ही में साइबर ठगों ने पटना यूनिवर्सिटी की रिटायर महिला प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाया और उनसे 3.07 करोड़ रुपये हड़प लिए। वे अलग-अलग झांसे देकर डॉक्टरों, अधिकारियों, कारोबारियों के साथ-साथ आईआईटी के छात्रों को भी शिकार बना चुके हैं। हर माह साइबर ठगी की 206 वारदातें साइबर पुलिस के मुताबिक पटना में हर माह औसतन 206 लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं। सन 2025 में साइबर थाने में साइबर ठगी के 2602 केस दर्ज हुए थे। जारी साल में जनवरी और फरवरी में 284 केस दर्ज हुए हैं। साइबर पुलिस ने पिछले साल 139 और इस साल अब तक 35 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। कुल मामलों में से करीब 30 प्रतिशत मामलो में ठगी शेयर मार्केट में निवेश और एपीके फाइल भेजकर की गई है। पटना में साइबर अपराधियों का नेटवर्क बताया जाता है कि, बिहार में साइबर ठग नालंदा, नवादा, शेखपुरा और जमुई के हैं। वे पटना में किराए के फ्लैटों और मकानों से गिरोह चला रहे हैं। दक्षिणी पटना में साइबर अपराधियों का नेटवर्क तेजी से फैला है। वे रामकृष्ण नगर, पत्रकार नगर और बेऊर इलाके को अपना ठिकाना बना रहे हैं। बीते दो सालों में 80 प्रतिशत मामलों में अपराधी इन्हीं क्षत्रों से गिरफ्तार किए गए हैं। पिछले माह साइबर पुलिस ने एक गिरोह के छह ठगों को गिरफ्तार किया था। यह सभी मैट्रिक तक शिक्षित हैं। सोशल मीडिया से सीख रहे ठगी के गुर पता चला है कि ज्यादातर ठग किशोर और युवा हैं। वे सोशल मीडिया के जरिए ठगी के तरीके सीखते हैं। यू-ट्यूब और टेलीग्राम जैसी सोशल मीडिया साइटों पर साइबर ठगी को अंजाम देने के तरीके सिखाने वाले कई वीडियो उपलब्ध हैं। वे इन्हीं वीडियो से ठगी के गुर सीखते हैं। ये साइबर ठग ठगी के लिए सॉफ्टवेयर आईटी पेशेवरों की मदद से तैयार कराते हैं।

आस्था कंपनी का बड़ा फ्रॉड, निवेशकों का पैसा लेकर फरार

  गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले से धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 'आस्था' नामक एक निजी कंपनी के संचालकों ने निवेश को दोगुना करने का लालच देकर करीब 256 लोगों से 80 करोड़ रुपये की ठगी की और रातों-रात चंपत हो गए। इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद पीड़ित निवेशकों में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में पीड़ितों ने एसपी विनय तिवारी से मुलाकात कर न्याय और आरोपियों की गिरफ्तारी की गुहार लगाई। 20 महीने में पैसे डबल करने का दिया था झांसा मिली जानकारी के अनुसार, इस ठगी का खेल साल 2023 में शुरू हुआ था। 'आस्था' कंपनी के कर्मचारियों और प्रबंधकों ने शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में भव्य बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में स्थानीय लोगों को निवेश की लुभावनी योजनाओं की जानकारी दी गई। कंपनी ने दावा किया था कि जो भी व्यक्ति उनके पास पैसा जमा करेगा, उसे मात्र 20 महीने की अवधि में दोगुना रिटर्न दिया जाएगा। ज्यादा मुनाफे के लालच में आकर मध्यम वर्गीय परिवारों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीणों ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी इस कंपनी में निवेश कर दी। रातों-रात दफ्तर बंद कर फरार हुए कर्मचारी ठगी का खुलासा तब हुआ जब करीब एक सप्ताह पहले कंपनी के गोपालगंज और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित कार्यालयों पर अचानक ताला लटक गया। पीड़ित जब अपने निवेश की स्थिति जानने दफ्तर पहुंचे, तो वहां सन्नाटा पसरा था। मैनेजर और कर्मचारी सभी अपने मोबाइल फोन बंद कर फरार हो चुके थे। काफी तलाश करने के बाद जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो पीड़ितों को एहसास हुआ कि वे एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो चुके हैं। एसपी से मिलकर दर्ज कराई एफआईआर दर्ज शुक्रवार को एसपी विनय तिवारी से मिलने पहुंचे पीड़ितों में सुदामा कुशवाहा, हरेंद्र राय, राजन कुमार, सागर गुप्ता, दिलीप शर्मा, आलोक कुमार बरनवाल और अजय कुमार सहित कई लोग शामिल थे। पीड़ितों ने बताया कि करीब 256 लोगों का पैसा फंसा हुआ है।नगर थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार प्रभाकर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बताया कि ठगी के इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की एक विशेष टीम गठित की जा रही है जो कंपनी के बैंक खातों और फरार कर्मचारियों के लोकेशन की जांच करेगी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और निवेश की गई राशि की बरामदगी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

रिटायर्ड डॉक्टर से 2.52 करोड़ की ठगी में दरोगा का भाई सहित चार आरोपी पकड़े

ग्वालियर. भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड डॉक्टर नारायण महादेव टिकेकर को डिजिटल अरेस्ट कर 2.52 करोड़ रुपये ठगने के मामले में ग्वालियर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। ग्वालियर पुलिस की टीम ने दिल्ली से चार आरोपियों को पकड़ा है। इनके बैंक खाते में ठगी की रकम में से 30 लाख रुपये गए थे। 30 लाख रुपये इन्होंने ही अपने एटीएम कार्ड के जरिये निकालकर बिचौलिये को दिए। इसके एवज में 1.70 लाख रुपये कमीशन मिला। पुलिस इन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी, जिससे ठगी की रकम की हेराफेरी करने वाले और भी लोगों तक पहुंचा जा सके। पकड़े गए आरोपियों में से एक का भाई दिल्ली पुलिस में दारोगा है। भाई के पकड़े जाने के बाद वह भी ग्वालियर आ गया। उसे यहां आकर पता लगा कि भाई ठगी की रकम की हेराफेरी करने के लिए अपने और दोस्तों के बैंक खाते ही किराये पर देता है। 89 वर्षीय नारायण महादेव टिकेकर सिरोल स्थित विंडसर हिल्स हाउसिंग सोसायटी में रहते हैं। 24 दिन तक ठगों ने खुद को सीबीआइ अधिकारी बताकर इन्हें मनी लांड्रिंग केस में फंसा बताकर डिजिटल अरेस्ट रखा था। इनसे 2.52 करोड़ रुपये ठग लिए थे। 500 बैंक खातों में ट्रांसफर हुई थी ठगी की रकम पुलिस ने पड़ताल की तो सामने आया कि ठगी की रकम दिल्ली, हरियाणा, उप्र, बिहार, गुजरात, असम, बंगाल सहित अन्य राज्यों के करीब 500 बैंक खातों में गया है। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने क्राइम ब्रांच के डीएसपी मनीष यादव, एसआइ अमित शर्मा और उनकी टीम को पड़ताल में लगाया। टीम ने तकनीकि विश्लेषण किया। उसके बाद चार आरोपित चिन्हित हुए। इनके बैंक खातों में 30 लाख रुपये गए थे। यह रुपये भी खाते में आते ही निकाल लिए गए। क्राइम ब्रांच की टीम ने रात को चार आरोपियों को पकड़ लिया। इन्हें पुलिस ग्वालियर ले आई है। पूछताछ में इन्होंने स्वीकार किया कि एक बिचौलिये के जरिये बैंक खाते ठगों को किराये पर दिए थे। इसके एवज में कमीशन मिलता था। पहले भी ठगी की रकम इनके खातों में आ चुकी है। यह आरोपित पकड़े गए 1.-मोहित मिश्रा पुत्र रामनरेश मिश्रा उम्र 31 वर्ष निवासी बी 40 चाणक्य पैलेस -1 स्ट्रीट नंबर 48 जनकपुरी नई दिल्ली 2- राहुल प्रजापति पुत्र प्रेम सिंह प्रजापति उम्र 25 वर्ष निवासी राजद 150 धरमपुर प्रथम नजफगढ़ नई दिल्ली 3-हरीश यादव पुत्र रामबाबू यादव उम्र 25 वर्ष निवासी हाउस नंबर 49 ब्लॉक धरमपुरा एक्सटेंशन नजफगढ़ नई दिल्ली 4-साहिल पुत्र फिरोज खान निवासी ए-5 175 एक्सटेंशन पार्ट 1 मोहन गार्डन उत्तम नगर नई दिल्ली टेलीग्राम के जरिये खाते किराये पर देने का नेटवर्क: प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यह टेलीग्राम एप के जरिये एक ग्रुप से जुड़े। यहां से ही ठगी की रकम की हेराफेरी के लिए खाते उपलब्ध कराने का पूरा नेटवर्क चलता है। यूएसडीटी के जरिये क्रिप्टो ट्रेडिंग: इस मामले में भी क्रिप्टो ट्रेडिंग हुई है। यूएसडीटी के जरिये ठग क्रिप्टो ट्रेडिंग कराते हैं और पूरा पैसा विदेश पहुंच रहा है। पुलिस ने पकड़े चार आरोपी रिटायर्ड डाक्टर से ठगी के मामले में चार आरोपित पकड़े गए हैं। इन्होंने अपने बैंक खाते किराये पर दिए थे। इन्हें रिमांड पर लिया जाएगा। धर्मवीर सिंह, एसएसपी

कलेक्टर ऑफिस में नौकरी दिलाने के नाम पर 11 लाख की ठगी

डोंगरगढ़. कलेक्टर कार्यालय खैरागढ़ में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर पांच लोगों से 11 लाख रुपये की ठगी का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है. इस प्रकरण में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन जांच में राजनीतिक संरक्षण और रसूखदार लोगों की भूमिका सामने आने की चर्चा ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है. पीड़ित धीरज साहू की शिकायत पर डोंगरगढ़ थाना में अपराध क्रमांक 97/2026 धारा 420 और 34 भादवि के तहत मामला दर्ज किया गया. आरोप है कि बेरोजगार युवाओं और उनके परिजनों को कलेक्टर कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर की सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया गया और उनसे अलग-अलग किस्तों में बड़ी रकम वसूली गई. कुल मिलाकर पांच लोगों से 11 लाख रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया. हालांकि जांच यहीं नहीं रुकी है और अब इस ठगी के नेटवर्क के पीछे छिपे प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच तेज कर दी गई है. सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल में कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. बताया जा रहा है कि भोले-भाले युवाओं को भरोसे में लेने और नौकरी का विश्वास दिलाने में इन प्रभावशाली चेहरों की भूमिका अहम रही. यही कारण है कि अब तक इस मामले के कई कथित सूत्रधार पुलिस कार्रवाई से दूर बने हुए हैं. पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव अंकिता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और इसमें शामिल अन्य रसूखदार आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा कि जल्द ही और आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा और पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा. यह मामला एक बार फिर बेरोजगारी के नाम पर सक्रिय ठगी गिरोहों और उनके कथित राजनीतिक संरक्षण पर सवाल खड़े कर रहा है. पुलिस की आगामी कार्रवाई पर अब पीड़ितों समेत पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं.

फर्जी मौत के सहारे भिलाई में 1.19 करोड़ रुपये की बीमा राशि हड़पने का खुलासा

भिलाई  दुर्ग पुलिस ने राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) से जुड़े एक करोड़, 19 लाख रुपये की बीमा राशि की धोखाधड़ी का राजफाश किया है। मामले में जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर फर्जी मृत्यु दावा प्रस्तुत कर राशि निकासी की गई थी। पुलिस ने मुख्य आरोपित राजेश कनोजिया (44) को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। आरोपित बोरसी दुर्ग का रहने वाला है। वह क्षेत्र में ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालित करता है और एनपीएस निकासी के नाम पर ग्राहकों से आधार, पैन और बैंक संबंधी जानकारी लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। फर्जी दस्तावेजों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जब्त पुलिस ने आरोपित से 10 हजार रुपये नकद और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। वहीं अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 फरवरी 2026 को एचडीएफसी लाइफ कंपनी लिमिटेड, बोकारो (झारखंड) के प्रबंधक ने लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई कि एनपीएस खातों में फर्जी मृत्यु दावा प्रस्तुत कर करीब 1.19 करोड़ रुपये की अनुचित निकासी की गई है। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और आधार दावे प्रस्तुत किए जांच में सामने आया कि आरोपीतों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जी आधार और अन्य केवाईसी दस्तावेजों का उपयोग कर बीमा दावे प्रस्तुत किए। जांच के दौरान यह भी पता चला कि सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम से मृत्यु दावा दाखिल किया गया, जबकि संबंधित व्यक्ति जीवित पाए गए।  

छत्तीसगढ़ में VIP ट्रेड कंपनी पर कार्रवाई, 8 लाख से अधिक की ठगी में चार आरोपी गिरफ्तार

लौदाबाजार  थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने ज्यादा रिटर्न का लालच देकर लोगों से ठगी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। ये आरोपी राजस्थान के किशनगढ़ और आसपास के इलाकों से जुड़े थे और उन्होंने वीआईपी ट्रेड नाम की फर्जी कंपनी बनाकर पूरे देश में ठगी का जाल फैलाया था। इस मामले में एक शिकायतकर्ता से ही 8 लाख 6 हजार 640 रुपये की ठगी हुई है। लेकिन, पुलिस को संदेह है कि इससे कहीं ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं। श्याम कॉलोनी बलौदाबाजार के निवासी रामचंद्र वस्त्रकर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि जुलाई 2025 के अंत से अक्टूबर 2025 के मध्य तक आरोपियों ने संपर्क किया और वीआईपी ट्रेड कंपनी में निवेश करने पर हर महीने 10 से 12 प्रतिशत की गारंटी के साथ मुनाफा मिलने का वादा किया। कहा गया कि पैसों में रोजाना ग्रोथ होगी और जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सकता है। इस झांसे में आकर रामचंद्र ने कुल 8 लाख 6 हजार 640 रुपये कंपनी में जमा कर दिए। जब उन्होंने पैसा वापस मांगा तो आरोपियों ने कोई जवाब नहीं दिया और बाद में अपने मोबाइल नंबर बंद कर लिए। इससे उन्हें ठगी का पता चला। इस शिकायत पर 13 फरवरी 2026 को थाना सिटी कोतवाली में अपराध क्रमांक 307/2025 दर्ज किया गया। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत मामला बनाया गया है। पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने थाना प्रभारी और साइबर सेल को सख्त निर्देश दिए। टीम ने तकनीकी जांच और विश्लेषण से पता लगाया कि ठगी का पूरा नेटवर्क राजस्थान से संचालित हो रहा था। एक मुख्य आरोपी अजमेर के केंद्रीय कारागार में पहले से बंद था। न्यायालय से प्रोडक्शन वारंट लेकर पुलिस टीम ने राजस्थान जाकर चारों आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में सभी ने वीआईपी ट्रेड कंपनी बनाकर ज्यादा रिटर्न का झांसा देकर लोगों से ठगी करने की बात कबूल की। 13 फरवरी 2026 को इन आरोपियों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की गई। मामला अभी जांच के दौर में है। पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति के साथ भी वीआईपी ट्रेड कंपनी ने ठगी की हो या निवेश के नाम पर पैसे मांगे गए हों, तो वह तुरंत थाना सिटी कोतवाली या स्थानीय साइबर सेल में संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराए। गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं: अब्दुल समद (60 वर्ष), निवासी भिश्ती मोहल्ला, गांधीनगर, किशनगढ़, राजस्थान; लोकेश चौधरी (26 वर्ष), निवासी रामदेव कॉलोनी, किशनगढ़, राजस्थान; कैलाश चौधरी (26 वर्ष), निवासी जाटो का मोहल्ला, थाना नारायणा, जयपुर ग्रामीण, राजस्थान; धीरज गट्टानी (25 वर्ष), निवासी न्यू कॉलोनी, कुचामन सिटी, राजस्थान। पुलिस का कहना है कि ऐसी फर्जी निवेश योजनाओं से बचें और किसी भी अनजान कंपनी में पैसे लगाने से पहले पूरी जांच करें।

फर्जीवाड़े का खेल: अपनी मिल का नाम बदला, रिश्तेदार के नाम करवाई एंट्री, जींद के आढ़ती से 2.25 करोड़ की ठगी

जींद करनाल के एक दम्पति ने जींद के एक अनाज मंडी के आढ़ती के साथ सवा 2 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। अनाज मंडी में आढ़ती का काम करने वाले अरविंद गोयल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि निसिंग स्थित एक राइस मिल में अनिल कुमार व उनकी पत्नी डायरैक्टर हैं। वे मिल के सभी कार्यों में भागीदारी करते हैं। इन दोनों ने उससे संपर्क किया और विश्वास में लेकर आश्वासन दिया कि वह जींद के अन्य आढ़तियों व किसानों से जीरी लेकर उन्हें सप्लाई करे। इसकी अदायगी वे सप्लाई के 15 दिनों के अन्दर कर देंगे जिसमें उसे कुल रकम का एक प्रतिशत की दर से कमीशन मिलेगा। वर्ष 2014-15 व वर्ष 2015-16 के सीजन में अरविंद गोयल ने मंडी के आढ़तियों से संपर्क किया और उनसे उधार में जीरी खरीद ली। इसकी सप्लाई अलग-अलग बिलों द्वारा आरोपियों को की गई परंतु उन्होंने पैसे हड़पने की नीयत से जीरी का कोई भुगतान नहीं किया। आरोपियों ने जीरी से चावल निकालकर बाजार में अधिक मूल्य पर बेच दिया है। इसके बाद जब भुगतान के लिए बातचीत की तो आरोपियों ने उसे जान से मारने, झूठे आत्महत्या करने के लिए उकसाने के मुकद्दमे में फंसाने के लिए धमकी दी। अरविंद गोयल ने शिकायत में कहा है कि 31 मार्च, 2016 को आरोपियों की तरफ 2,20,86,140 रुपए बकाया थे जो कि उन्होंने धोखे से हड़प लिए हैं और भेजी गई जीरी को भी खुर्द-बुर्द कर दिया है। एक रात वह परेशान होकर उनके घर के बाहर बैठ गए जिसके बाद उन्होंने अगले दिन उसे चैक दिया जिस पर 22 जनवरी, 2018 की तारीख डाल दी। इसके बाद आरोपियों ने किसी और से धमकी दिलवाई कि अगर आज के बाद दोबारा पैसों की मांग करने व घर पर आए तो तुम्हें और तुम्हारे बेटे को जान से मरवा देंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार आरोपियों ने अपनी राइस मिल का नाम बदलकर अपने रिश्तेदार के नाम पर रख दिया। इसका संचालन उक्त आरोपियों का रिश्तेदार कर रहा है। जींद शहर थाना पुलिस ने आरोपी दम्पति के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।

भीड़ का फायदा उठाकर मोबाइल चोरी , जज को लगाया लाखों का चूना, रांची पुलिस अलर्ट

रांची झारखंड की राजधानी रांची में एक हैरान करने वाली खबर आई, जहां चोरों ने जज को निशाना बनाया ओर भीड़ का फायदा उठाकर मोबाइल चोरी कर ली। मिली जानकारी के अनुसार, जज खूंटी जिले में पदस्थापित हैं। वहीं चोरी के कुछ ही देर बाद उनके बैंक खाते से 2.88 लाख रुपये की बड़ी राशि डिजिटल माध्यम से निकाल ली गई। इस संबंध में जज ने जगन्नाथपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई है।         पुलिस सूत्रों के अनुसार, जज धुर्वा के सेक्टर-2 बाजार में सब्जी खरीदने गए थे। इसी दौरान किसी अज्ञात अपराधी ने बड़ी चतुराई से उनका मोबाइल फोन चुरा लिया। जब तक जज को मोबाइल चोरी होने का पता चला, उससे पहले अपराधियों ने फोन के जरिये उनके बैंक खाते को निशाना बनाया। चोरों ने डिजिटल माध्यम से दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए और उनके अकाउंट से कुल 2 लाख 88 हजार रुपये सफलतापूर्वक निकाल लिए।