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देशभर में गांधी जयंती और अहिंसा का उत्सव: शिल्पी नेहा तिर्की

रांची झारखंड में स्वर्गीय सोमा टाना भगत स्मारक समिति के सौजन्य से बीजुपाड़ा चौक पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एवं स्वर्गीय सोमा टाना भगत जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, स्मारक समिति के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र की जनता मौजूद रही। स्मारक समिति के द्वारा मंच से कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के हाथों टाना भगत, सामाजिक कार्यकर्ता, जन जनप्रतिनिधि, मूर्तिकार, शिल्पकार और पत्रकारों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में मनीष उरांव नमक युवक भी शामिल था जिसने पिछले दिनों भारी बारिश के बाद बांध में बह रहे अपने दो साथियों की जान बचाई। सम्मान के तौर पर मनीष को साइकल का उपहार मिला। इस मौके पर कृषि मंत्री तिर्की ने कहा कि देश में गांधी की जयंती को अहिंसा दिवस के तौर पर मनाया जाता है, लेकिन आज ही के दिन एक संगठन अपना 100 साल पूरे होने का जश्न मना रही है। ये वही लोग है जिन्होंने महात्मा गांधी की हत्या की। तिर्की ने कहा कि उनका जश्न देश की जनता को धर्म – जाति में बांटने, देश में नफरत फैलाने, देश को कमजोर करने का है। वही दूसरी तरफ गांधी को मनाने वाले लोग देश को एक जुट रखने, देश के तानाबाना को गढ़ने, सामूहिकता में जीने पर विश्वास रखते है। मंत्री ने कहा कि समाज में लोगों को ऐसी विघटनकारी शक्तियों से सावधान रहने और उनका जवाब देने के लिए तैयार रहने की जरूरत है। समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि वर्तमान हालात में युवाओं की भूमिका बढ़ गई है। उन्हें इस को समझना होगा की उनके भविष्य को लेकर केंद्र में बैठी सरकार कैसे बेपरवाह है। वोट चोरी का नारा सिर्फ वोट तक समिति नहीं है बल्कि ये युवाओं के रोजगार, उनके अधिकार, उनकी शिक्षा, उनके भविष्य से जुड़ा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जो सत्य – अहिंसा के साथ अपने अधिकार के लिए लड़ने का संदेश दिया है उसे अपने जीवन में उतारना होगा।  

बापू की समाधि पर पीएम और राष्ट्रपति का श्रद्धांजलि अर्पण, कहा- उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक

नई दिल्ली। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 156वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत तमाम नेता राजघाट पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी प्रतिमा को नमन किया और पुष्प अर्पित किए। बापू का रास्ता अपनाकर कर विकसित भारत का निर्माण करेंगे: पीएम नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता के आदर्शों ने मानव इतिहास की दिशा को बदल दिया और आज भी भारत के विकास की दिशा तय कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि गांधीजी ने दिखाया कि साहस और सादगी बड़े बदलाव के उपकरण बन सकते हैं। उन्होंने सेवा और करुणा की शक्ति में विश्वास रखा, जो लोगों को सशक्त बनाने का मूल आधार है। उन्होंने कहा, गांधी जयंती प्यारे बापू के असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है, जिनके आदर्शों ने मानव इतिहास का मार्ग बदल दिया। उन्होंने दिखाया कि साहस और सादगी कैसे बड़े बदलाव ला सकते हैं। वह सेवा और करुणा को लोगों को सशक्त बनाने के जरूरी माध्यम मानते थे। हम उनका रास्ता अपनाकर विकसित भारत के निर्माण की ओर बढ़ेंगे। दो अक्तूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी अहिंसा और सत्याग्रह के प्रवर्तक थे। उनके विचारों ने लाखों भारतीयों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में गांधी स्मृति स्थल पर नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी। भारत की स्वतंत्रता के कुछ महीने बाद यह घटना हुई। उनका जीवन और बलिदान दुनियाभर में शांति और मानव गरिमा का प्रतीक बना हुआ है। सशक्त व समृद्ध भारत का निर्माण कर गांधी के सपनों को साकार करेंगे: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।  इससे पहले गांधी जयंती के मौके पर राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, गांधी जयंती हम सभी के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों और जीवन मूल्यों के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करने का अवसर है। गांधीजी ने विश्व को शांति, सहिष्णुता और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया जो संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत है। वह आजीवन अस्पृश्यता, निरक्षरता, नशाखोरी और अन्य सामाजिक बुराइयों को मिटाने के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प से समाज के कमजोर से कमजोर व्यक्ति को संबल और शक्ति प्रदान की। राष्ट्रपति ने कहा, नैतिकता और सदाचार में उनका अटूट विश्वास था जिसका उन्होंने आजीवन पालन किया और जन समुदाय को भी उस मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। एक स्वावलंबी, आत्मनिर्भर और शिक्षित भारत के निर्माण के लिए उन्होंने चरखा चलाकर आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। अपने आचरण एवं उपदेशों के माध्यम से वे सदैव श्रम की गरिमा को प्रतिष्ठित करते रहे। उनके जीवन-मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं और भविष्य में भी बने रहेंगे। आइए, गांधी जयंती के इस शुभ अवसर पर हम सब यह संकल्प लें कि हम सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए राष्ट्र के कल्याण और प्रगति के लिए समर्पित रहेंगे और एक स्वच्छ, समर्थ, सशक्त व समृद्ध भारत का निर्माण करके गांधी जी के सपनों को साकार करेंगे।