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गणेश चतुर्थी पर 200 साल बाद दुर्लभ संयोग, भद्र-मालव्य राजयोग से चमकेंगी 5 राशियां

इस बार गणेश चतुर्थी सिर्फ गणपति बप्पा की पूजा के लिए ही खास नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय नजरिए से भी इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के दिन ग्रहों की स्थिति से भद्र पंचमहापुरुष राजयोग और मालव्य पंचमहापुरुष राजयोग बनने की बात कही जा रही है. ज्योतिषीय मान्यताओं में इन दोनों योगों को बेहद शुभ माना जाता है. खास बात यह है कि दोनों योग एक साथ बनने का यह संयोग करीब 200 साल बाद बनने का दावा किया जा रहा है. कैसे बन रहा है भद्र योग? भद्र योग पंचमहापुरुष राजयोगों में से एक है. ज्योतिष के अनुसार जब बुध अपनी स्वराशि मिथुन या कन्या अथवा अपनी उच्च राशि कन्या में केंद्र भाव में स्थित होता है, तब भद्र योग बनता है. इस समय बुध कन्या राशि में गोचर कर रहा है. कन्या राशि बुध की अपनी राशि होने के साथ-साथ मूलत्रिकोण राशि भी मानी जाती है. इसलिए बुध की इस स्थिति को मजबूत माना जाता है. ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, लेखन, गणना, व्यापार, शिक्षा और संचार का कारक माना गया है. ऐसे में भद्र योग बनने से इन क्षेत्रों से जुड़े कामों में शुभ परिणाम मिलने की मान्यता है. कैसे बन रहा है मालव्य योग? दूसरी ओर शुक्र अपनी स्वराशि तुला में गोचर कर रहा है. ज्योतिष में जब शुक्र अपनी राशि या उच्च राशि में केंद्र भाव में स्थित होता है तो मालव्य पंचमहापुरुष राजयोग बनने की स्थिति मानी जाती है. शुक्र को धन, वैभव, प्रेम, सौंदर्य, कला, भौतिक सुख-सुविधा, वाहन और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है. इसलिए मालव्य योग को आर्थिक और भौतिक सुखों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. 200 साल बाद क्यों खास है यह संयोग? गणेश चतुर्थी के आसपास बुध का कन्या राशि में और शुक्र का तुला राशि में होना ज्योतिषीय रूप से खास संयोग माना जा रहा है. इसी वजह से इस बार गणपति उत्सव के दौरान भद्र और मालव्य योग की चर्चा हो रही है. इन दोनों योगों को पंचमहापुरुष राजयोगों में शामिल किया जाता है. हालांकि किसी व्यक्ति की कुंडली में इनका प्रभाव उसकी जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति, लग्न और दशा पर निर्भर करता है. इन 5 राशियों को मिल सकता है फायदा मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में अच्छा माना जा सकता है. नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है . व्यापार करने वालों को नई डील या नए संपर्कों से लाभ मिलने के योग बन सकते हैं. रुके हुए काम भी धीरे-धीरे आगे बढ़ सकते हैं. वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है. आय बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं. कारोबार में लाभ मिलने की संभावना है. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए भद्र योग विशेष महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बुध इसी राशि में स्थित है. इस दौरान बुद्धि, निर्णय क्षमता और कम्युनिकेशन स्किल मजबूत हो सकती है. नौकरी, बिजनेस, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं. तुला राशि तुला राशि वालों के लिए मालव्य योग विशेष लाभकारी माना जा रहा है. शुक्र अपनी राशि तुला में होने के कारण धन, करियर और सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. मकर राशि मकर राशि के जातकों के लिए भी यह समय करियर के लिहाज से अच्छा माना जा रहा है. कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है. नई जिम्मेदारी या पद में बदलाव के अवसर मिल सकते हैं. कब तक मिलेगा इन योगों का फायदा? ज्योतिषीय गणना के अनुसार बुध 26 सितंबर 2026 तक कन्या राशि में रहेगा. इसके बाद वह तुला राशि में प्रवेश करेगा. इसलिए भद्र योग का यह चरण सितंबर के अंत तक माना जा रहा है. वहीं शुक्र तुला राशि में 6 नवंबर 2026 तक रहने वाला है. इस वजह से मालव्य योग का प्रभाव नवंबर की शुरुआत तक रहने की बात कही जा रही है. यानी 14 सितंबर से 26 सितंबर 2026 के बीच भद्र और मालव्य योग का एक साथ प्रभाव विशेष रूप से चर्चा में रहेगा. इसके बाद मालव्य योग का प्रभाव आगे भी जारी रहने की ज्योतिषीय मान्यता है.

Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर से इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, बप्पा बरसाएंगे कृपा

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी यानी 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को देशभर में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि और शुभता के दाता हैं. गणेश चतुर्थी पर बप्पा के आगमन के साथ ही ग्रहों की विशेष स्थितियों और शुभ योगों के प्रभाव से कई राशियों के लिए यह समय अत्यंत भाग्यशाली रहने वाला है. गणेश चतुर्थी से इन मुख्य राशियों को सबसे अधिक लाभ और भाग्य का साथ मिलने की संभावना है. मेष राशि करियर व व्यापार: भगवान गणेश की कृपा से अटके हुए काम गति पकड़ेंगे. कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और पदोन्नति के योग बन रहे हैं. धन लाभ: अचानक धन लाभ हो सकता है और नए बिजनेस प्रोजेक्ट में सफलता मिलेगी. मिथुन राशि बुद्धि और वाणी का लाभ: मिथुन राशि के स्वामी स्वयं बुध देव हैं, जो गणेश जी से विशेष रूप से संबंधित हैं. आपकी निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा. आर्थिक पक्ष: आय के नए स्रोत बनेंगे. निवेश या पैतृक संपत्ति से बड़ा मुनाफा हो सकता है. कन्या राशि शुभ योगों का प्रभाव: गणेश चतुर्थी के दौरान बुध की अपनी उच्च राशि में मौजूदगी से आपको जबरदस्त लाभ मिलेगा. मान-सम्मान: समाज और कार्यस्थल पर आपकी प्रतिभा की सराहना होगी. प्रतियोगिता परीक्षा या नौकरी की तैयारी कर रहे जातकों को खुशखबरी मिल सकती है. तुला राशि सुख-साधनों में वृद्धि: घर-परिवार में मांगलिक कार्यों का आयोजन हो सकता है. नया वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने के योग बन रहे हैं. व्यापारिक डील: बिजनेस में कोई बड़ी पार्टनरशिप फाइनल हो सकती है, जिससे भविष्य में बड़ा फायदा होगा. मकर राशि बाधाओं से मुक्ति: लंबे समय से चली आ रही आर्थिक या मानसिक परेशानियां गणेश जी की कृपा से समाप्त होंगी. भाग्य का सहयोग: नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय वेतन वृद्धि और नए अवसरों से भरा रहेगा. गणेश चतुर्थी पर बप्पा की कृपा पाने के विशेष उपाय – गणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश को 21 दूर्वा (दूब घास) और मोदक या बेसन के लड्डू का भोग अवश्य लगाएं. – पूजन के समय ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.  

गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर से शुरू होगा गणेश महोत्सव, जानें पूजा मुहूर्त और शुभ योग

 हिंदू धर्म में गणेश महोत्सव का विशेष महत्व है. यह पर्व मुख्य रूप से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी के दिन इसका समापन होता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर से शुरू होगा और समापन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन अनंत चतुर्दशी के दिन होगा. धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों भगवान गणेश अपने भक्तों के बीच रहते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. भगवान गणेश की पूजा सार्वजनिक रूप से पंडालों में भी की जाती है और लोग अपने घरों में भी गणपति की स्थापना करते हैं. गणेश चतुर्थी तिथि (Ganesh Chaturthi 2026 Tithi) द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी की तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा. वहीं, गणेश जी का विसर्जन 25 सितंबर, शुक्रवार के दिन होगा. गणेश चतुर्थी पूजन मुहूर्त (Ganesh Chaturthi 2026 Pujan Muhurat) पंचांग के मुताबिक, गणेश चतुर्थी के पूजन का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 2 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 31 मिनट पर होगा. गणेश चतुर्थी 2026 शुभ योग पंडितों की मानें तो, इस बार गणेश चतुर्थी बहुत ही शुभ मानी जा रही है. क्योंकि इस दिन रवि योग का संयोग बन रहा है. इसके अलावा, गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी के बीच 10 दिनों में कईं विशेष ग्रह योग निर्माण कर रहे हैं. जिसमें गुरु इस समय कर्क राशि में उच्च के हैं, शनि मीन राशि में वक्री स्थिति में बैठे हुए हैं. गणेश चतुर्थी पूजन विधि (Ganesh Chaturthi Pujan Vidhi) गणेश महोत्सव के दौरान अगर आपने घर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की है तो सुबह और शाम दोनों समय उनकी पूजा करनी चाहिए. दोनों समय दीपक जलाकर भगवान गणेश की आरती करें. पूजा में भगवान गणेश को पीले फूल और दूर्वा जरूर अर्पित करें. इसके साथ भोग लगाएं और फिर आरती करें. गणेश महोत्सव के दौरान सात्विकता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. खान-पान भी सात्विक रखना शुभ माना जाता है. जिन लोगों ने घर में गणपति की स्थापना की है, उन्हें इन दिनों प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. भोजन तैयार करने के बाद पहले भगवान गणेश को भोग लगाएं और फिर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें. अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखकर भगवान गणेश की पूजा करने और विसर्जन में शामिल होने की परंपरा है. भगवान गणेश को क्या अर्पित करें? भगवान गणेश की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीजों में दूर्वा और मोदक माने जाते हैं. मोदक उपलब्ध न हो तो लड्डू भी अर्पित किए जा सकते हैं. इसके अलावा भगवान गणेश को पीले वस्त्र और सिंदूर अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. यहां एक मान्यता यह भी है कि महिलाएं भगवान गणेश को सिंदूर अर्पित न करें और केवल फूल व पीले वस्त्र अर्पित करें, जबकि पुरुष सिंदूर अर्पित कर सकते हैं. भगवान गणेश को पीले फूलों की माला भी चढ़ाई जा सकती है. विशेष मनोकामना के लिए फलों की माला अर्पित करने की परंपरा भी बताई जाती है. अगर आपने घर में गणपति की स्थापना की है तो पूरे गणेश महोत्सव के दौरान घी का अखंड दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है. सुबह और शाम कपूर या दीपक से भगवान गणेश की आरती जरूर करें. गणेश चतुर्थी उपाय (Ganesh Chaturthi Upay) – मनचाहे विवाह के लिए गणेश जी का उपाय गणेश महोत्सव के दौरान विवाह में आ रही बाधा को दूर करने के लिए भगवान गणेश का विशेष श्रृंगार करें. उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल और मोदक या लड्डू अर्पित करें. इसके बाद ऊं विघ्नहराय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें. पूजा के बाद भगवान गणेश से शीघ्र विवाह और मनचाहा जीवनसाथी मिलने की प्रार्थना करें. पूजा में अर्पित पीले वस्त्र को उतारकर सुरक्षित रख लें. यह उपाय गणेश महोत्सव के दौरान किसी भी दिन सुबह किया जा सकता है. – संतान प्राप्ति के लिए उपाय अगर किसी दंपति को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है तो गणेश महोत्सव के दौरान भगवान गणेश को फलों की माला अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है. इसके लिए केले, सेब, अंगूर और नाशपाती जैसे फलों को पीले धागे में बांधकर माला बनाएं और भगवान गणेश को अर्पित करें. इसके बाद संतान गणपति स्तोत्र का पाठ करें. पति-पत्नी साथ मिलकर 'ॐ उमापुत्राय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें और संतान प्राप्ति के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना करें. पूजा के बाद भगवान गणेश को अर्पित किए गए फलों को प्रसाद के रूप में बच्चों में बांट दें. इस उपाय को गणेश महोत्सव के दौरान लगातार तीन दिनों तक करने की परंपरा बताई जाती है. – मकान या संपत्ति प्राप्ति के लिए उपाय अगर आप मकान खरीदना चाहते हैं, नया घर बनाना चाहते हैं या संपत्ति से जुड़ी कोई इच्छा पूरी करना चाहते हैं तो गणेश महोत्सव के दौरान भगवान गणेश को लाल फूलों की माला अर्पित करें. इसके लिए गुड़हल या गुलाब के फूलों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके साथ लाल फल, लाल वस्त्र और तांबे का एक सिक्का भगवान गणेश को अर्पित करें. इसके बाद ऊं सर्वसौख्यप्रदाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें और भगवान गणेश से संपत्ति प्राप्ति की प्रार्थना करें.

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में गणेश चतुर्थी अवकाश कैंसिल, तय हुई नई तारीख पर स्थानीय छुट्टी

सूरजपुर  छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में गणेश चतुर्थी के दिन घोषित स्थानीय अवकाश की छुट्टी कैंसिल कर दी गई है. अब 27 अगस्त को अवकाश नहीं रहेगा. इसकी जगह कलेक्टर ने नई तारीख को स्थानीय अवकाश की घोषणा की है. कलेक्टर एस जयवर्धन ने इसके लिए आदेश भी जारी कर दिया है.  27 अगस्त को छुट्टी तय थी दरअसल सूरजपुर जिले में इस साल कैलेंडर वर्ष में कलेक्टर ने स्थानीय अवकाशों की घोषणा की थी. इसमें 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी पर अवकाश दिया गया था. यानि इस दिन जिले के सभी सरकारी दफ्तरों की छुट्टियां थीं. लेकिन अब इस आदेश में संशोधन कर दिया गया है. अब 27 अगस्त बुधवार को गणेश चतुर्थी की छुट्टी कैंसिल कर दी गई है.  अब इस दिन रहेगा अवकाश  जारी आदेश के मुताबिक 27 अगस्त की जगह अब 3 सितम्बर बुधवार को स्थानीय अवकाश होगा. दरअसल इस दिन करमा पर्व है. ऐसे में गणेश चतुर्थी की जगह अब करमा पर्व पर स्थानीय अवकाश रहेगा. संशोधन का आदेश जारी हो गया है. इस दिन जिले के सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे. आदेश के मुताबिक कोषागार व उपकोषागारों के लिए अवकाश लागू नहीं होगा. 

धन और सफलता की होगी बारिश! गणेश चतुर्थी पर बने दुर्लभ योग से इन राशियों को मिलेगा लाभ

इस साल गणेश चतुर्थी (27 अगस्त 2025) पर एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जो कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा. ज्योतिषाचार्य  के अनुसार, इस दिन शुक्र और वरुण ग्रह के बीच नवपंचम योग का निर्माण होगा. यह योग केवल आर्थिक समृद्धि ही नहीं, बल्कि करियर, स्वास्थ्य, प्रेम और पारिवारिक जीवन में भी शुभ परिणाम देने वाला माना जाता है. शुक्र को धन, ऐश्वर्य, प्रेम और सामाजिक प्रतिष्ठा का कारक माना जाता है, जबकि वरुण ग्रह अवसर, रहस्य और जीवन में नए बदलाव लाने के लिए प्रसिद्ध है. जब ये दोनों ग्रह 120 डिग्री पर स्थित होते हैं, तो नवपंचम योग बनता है, जो शुभ अवसरों और अनुकूल परिस्थितियों को जन्म देता है. डॉ. मिश्रा के अनुसार, “इस योग के प्रभाव से विशेष रूप से मेष, कर्क और मीन राशि के जातकों के जीवन में कई महत्वपूर्ण बदलाव और लाभ देखने को मिलेंगे.” मेष राशि: रुके कार्य होंगे पूरे मेष राशि वालों के लिए यह योग अत्यंत शुभ रहने वाला है. डॉ. मिश्रा बताते हैं कि लंबे समय से अटके कार्य पूरे होंगे. करियर में नई ऊंचाइयां हासिल होंगी और नए अवसर मिलेंगे. व्यापारियों और नौकरीपेशा जातकों को आर्थिक लाभ की संभावना है. पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. कर्क राशि: आय और वैवाहिक जीवन में वृद्धि कर्क राशि के जातकों के लिए यह संयोग विशेष रूप से लाभकारी साबित होगा. नए आय स्रोत प्राप्त होंगे और वित्तीय स्थिति मजबूत होगी. वैवाहिक जीवन में खुशहाली आएगी और पारिवारिक संबंधों में सामंजस्य बढ़ेगा. कार्यक्षेत्र में की गई मेहनत का उचित परिणाम मिलेगा. डॉ. मिश्रा कहते हैं कि “कर्क राशि वालों के लिए यह समय निवेश और नई योजनाओं को सफल बनाने के लिए अनुकूल है.” मीन राशि: कारोबार और सामाजिक मान-सम्मान में लाभ मीन राशि के जातकों को इस दुर्लभ योग का सबसे अधिक लाभ होगा. कारोबार में अप्रत्याशित सफलता मिल सकती है. जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की की संभावना है. नई योजनाओं में सफलता हासिल होगी और सामाजिक प्रतिष्ठा व मान-सम्मान में वृद्धि होगी. प्रेम जीवन में भी मधुरता आएगी. अन्य राशियों पर सामान्य प्रभाव यद्यपि नवपंचम योग का मुख्य लाभ मेष, कर्क और मीन राशि के जातकों को होगा, लेकिन यह संयोग अन्य राशियों के लिए भी सकारात्मक परिवर्तन और अवसर ला सकता है. नए प्रोजेक्ट्स में सफलता, सामाजिक संपर्कों में लाभ और व्यक्तिगत विकास के अवसर बढ़ सकते हैं.  “गणेश चतुर्थी का यह योग न केवल आर्थिक लाभ देगा बल्कि मानसिक संतुलन और पारिवारिक सुख-शांति को भी बढ़ावा देगा. जो लोग अपने लक्ष्यों और योजनाओं पर ध्यान देंगे, वे अधिकतम लाभ उठा पाएंगे.”

इस बार कब है गणेश चतुर्थी? गणपति स्थापना का सही मुहूर्त और टाइमिंग नोट करें

इस महापर्व की शुरुआत भादो शुक्ल चतुर्थी को होती है और चतुर्दशी तिथि को गणेश विसर्जन के साथ इसका समापन हो जाता है. यह त्योहार भगवान गणेश को समर्पित है. ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र घड़ी में भगवान गणेश धरती पर उतरते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इस साल ये पर्व 27 अगस्त से 6 सितंबर तक मनाया जाएगा. गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना का मुहूर्त क्या है?  हिंदू पंचांग के अनुसार, भादो शुक्ल चतुर्थी 26 अगस्त को दोपहर 01.54 बजे 27 अगस्त को दोपहर 03.44 बजे तक रहेगी. उदिया तिथि के चलते गणेश चतुर्थी 27 अगस्त को मनाई जाएगी और इसी दिन गणपति जी की स्थापना होगी. चूंकि गणपति स्थापना मध्याह्न काल में शुभ होती है, इसलिए 27 अगस्त को सुबह 11 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक गणपति जी की स्थापना होगी. अलग-अलग मूर्तियां स्थापित करने का क्या है महत्व?  भगवान गणेश की अलग-अलग मूर्तियां अलग परिणाम देती हैं. पीले और लाल रंग की मूर्ति की उपासना शुभ होती है. नीले रंग के गणेश "उच्छिष्ट गणपति" कहलाते हैं. इनकी उपासना विशेष दशाओं में ही की जाती है. हल्दी से बनी मूर्ति "हरिद्रा गणपति" कहलाती है. यह कुछ विशेष मनोकामनाओं के लिए शुभ मानी जाती है. एकदंत गणपति , श्यामवर्ण के होते हैं. इनकी उपासना से अद्भुत पराक्रम मिलता है. सफेद गणपति को ऋणमोचन कहते हैं. इनकी पूजा से आदमी कर्ज मुक्त होता है. चार भुजाओं वाले रक्त वर्ण गणपति को "संकष्टहरण गणपति" कहते हैं. इनकी उपासना से संकटों का नाश होता है. त्रिनेत्रधारी, रक्तवर्ण और दस भुजाधारी गणेश "महागणपति" कहलाते हैं. इनके अंदर समस्त गणपति समाहित हैं. सामान्यतः घरों में पीले रंग या रक्त वर्ण की मध्यम आकार वाली प्रतिमा ही स्थापित करनी चाहिए. गणपति स्थापना विधि  घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में एक चौकी लगाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. चौकी पर हल्दी से स्वस्तिक बनाएं और वहां अक्षत अर्पित करें. इसके बाद गणपति जी की मूर्ति को दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से स्नान कराएं. इसके बाद चौकी पर भगवान की  मूर्ति स्थापित करें. मूर्ति स्थापना के समय "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप जरूर करें. इसके बाद एक कलश में गंगाजल भरकर उसके मुख पर आम के पत्ते और नारियल रखें. दीपक और अगरबत्ती जलाएं. गणपति जी की दूर्वा, फल, फूल अर्पित करें. उन्हें मोदक या लड्डू का भोग लगाएं. इसके बाद भगवान गणेश की आरती करें. उनके मंत्रों का जाप करें और गणपति बप्पा के जयकारे लगाएं. गणेश महोत्सव में कैसे करें गणपति पूजन? यदि आपने घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की है तो नियमित रूप से दोनों वेला उनकी पूजा करें. अन्यथा सामान्य जीवनचर्या में भी दोनों वेला पूजा कर सकते हैं. सुबह और शाम के वक्त दीपक जलाकर गणेश जी की पूजा करें. उन्हें पीले फूल और दूर्वा अर्पित करें. दोनों वेला आरती करें. जितने दिन महोत्सव चल रहा है, उतने दिन पूर्ण सात्विकता का पालन करें. अनंत चतुर्दशी के दिन चाहें तो उपवास रखकर विसर्जन में शामिल हो सकते हैं.