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Ganga Expressway: पश्चिमी यूपी से पूरब तक, 12 जिलों को जोड़ने वाला 594KM लंबा एक्सप्रेसवे

नई दिल्ली Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश में सड़क नहीं, रफ्तार का एक नया अध्याय खुलने जा रहा है. 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) का लोकार्पण कर सकते हैं. ये सिर्फ एक प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं होगी, बल्कि 'नए यूपी' की रेस का अगला गियर लगेगा. सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार जिस इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल की बात करती रही है, गंगा एक्सप्रेसवे उसका सबसे बड़ा और सबसे तेज उदाहरण बनकर सामने आने वाला है।  सबसे ख़ास बात ये है कि, तकरीबन 36,402 करोड़ की लागत से बनकर तैयार होने वाला 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसव अब तक का यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे है. इसके बाद गोरखपुर–शामली ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे पर भी काम चल रहा है जो तकरीबन 700 किमी लंबा होगा. यानी फिलहाल गंगा एक्सप्रेसवे ही सबसे बड़ा है।  करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा. यह सड़क पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी हिस्से से जोड़ेगी. इससे लंबी दूरी का सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा. बताया जा रहा है कि, इस एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा केवल 6-7 घंटों में ही पूरी की जा सकेगी, जिसके लिए अभी तकरीबन 11 घंटे से ज्यादा समय लगता है।  इस एक्सप्रेसवे से मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को सीधा फायदा मिलेगा. करीब 519 गांव इस परियोजना से जुड़ेंगे. इससे गांव और शहर के बीच की दूरी सिर्फ किलोमीटर में नहीं, बल्कि विकास के रफ्तार में भी घटेगी।  AI बेस्ड हाईटेक टोल कलेक्शन  इस एक्सप्रेस वे पर कुल 14 टोल प्लाजा बनाए जाएंगे. टोल सिस्टम पूरी तरह से मॉडर्न और डिजिटल होगी, ताकि वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत ही न पड़े. इसके अलावा टोल कलेक्शन के लिए सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक पर बेस्ड हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं. जो सिर्फ वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से ही फास्टैग टोल कलेक्ट कर लेंगे।  इतना ही नहीं इस एक्सप्रेसवे पर  ‘नो-स्टॉप टोल कलेक्शन सिस्टम’ लगाया जा रहा है. यानी वाहन बिना रूके टोल कलेक्ट करवाते हुए आगे बढ़ते रहेंगे. इससे एक्सप्रेस के टोल प्लाजाओं पर लगने वाले ट्रैफिक जाम के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी. वाहनों की अधिकत स्पीड लिमिट 120 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. सड़क के आसपास कटीले तारों से फेंसिंग की जा रही है, ताकि किसी भी तरह से मवेशियों को सड़क पर आने से रोका जाए और दुर्घटना की स्थिति न बने।  एक्सप्रेसवे पर मिलेंगी ये सुविधाएं गंगा एक्सप्रेसवे पर कुल 9 फेसिलिटी सेंटर बनाये गए हैं. हर फैसिलिटी सेंटर पर यात्रियों को कई अलग-अलग तरह की सुविधाएं मिलेंगी. जिसमें पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग पॉइंट, फूड कोर्ट, कैफेटेरिया, ढाबा, मोटेल, डॉरमेट्री, ट्रामा सेंटर, टॉयलेट्स इत्यादि शामिल हैं. इसके अलावा बीच सड़क किसी के वाहन खराब होने की स्थिति को ध्यान में रखकर मोटर व्हीकल सर्विस सेंटर भी मिलेगा. इस फैसिलिटी सेंटर पर वाहनों को खड़ा करने के लिए बड़ी पार्किंग भी उपलब्ध होगी।  लाइटिंग का भी इंतजाम आमतौर पर रात में एक्सप्रेसवे से यात्रा करने पर सबसे बड़ी समस्या लाइटिंग को लेकर देखने को मिलती है. चूकिं एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ खेत होते हैं और आबादी काफी दूर होती है ऐसे में सड़क पर पर्याप्त रोशनी की जरूरत होती है. इसके लिए गंगा एक्सप्रेसवे पर रेड कलर के रेडियम लाइट, सड़क के दोनों किनारों पर ब्लिंकर्स, बीच में पड़ने वाले पुलों पर स्ट्रीट लाइट्स और बेरिकेड्स पीली रेडियम लाइट्स का इंतजाम किया गया है. ताकि रात के समय भी लोग सुरक्षित यात्रा कर सकें।  किसानों के लिए बड़ा गेमचेंजर किसानों के लिए यह एक्सप्रेसवे किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगा. अब फसलें तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगी. इससे फसलों की गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी. खासकर जल्दी खराब होने वाले फसलों और उत्पाद के लिए यह बड़ा फायदा साबित होगा. प्रयागराज समेत कई धार्मिक और सांस्कृतिक शहर इस एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेंगे. इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी. स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।  एक्सप्रेसवे में यूपी का दबदबा देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में पहले ही उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है. गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही यह आंकड़ा करीब 60 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. यानी एक्सप्रेसवे की रेस में यूपी बाकी राज्यों से काफी आगे निकलता नजर आ रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा मतलब है कम लॉजिस्टिक्स लागत. इससे उद्योगों को फायदा मिलेगा और नए निवेश के दरवाजे खुलेंगे. गंगा एक्सप्रेसवे एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तौर पर विकसित हो सकता है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे।  गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं है. यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा सकता है. पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के बाद अब यह प्रोजेक्ट यूपी को “एक्सप्रेसवे स्टेट” के रूप में और मजबूत बनाएगा. आने वाले समय में यही इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश को देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में खड़ा करने की बड़ी वजह बन सकता है। 

गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की गति से यात्रा करेंगे वाहन

गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगे वाहन   एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज तक सीधा संपर्क स्थापित होगा 02 मुख्य टोल प्लाजा और 19 रैम्प टोल प्लाजा के माध्यम से सुगम होगा आवागमन परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 960 मीटर और रामगंगा नदी पर 720 मीटर लंबे पुल का निर्माण एक्सप्रेसवे पर यात्रियों के लिए 09 जन-सुविधा परिसर भी किए गए हैं विकसित शाहजहांपुर के पास एक्सप्रेसवे पर 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी भी, एयरफोर्स कर चुकी है इमरजेंसी लैंडिंग ड्रिल 29 अप्रैल को पीएम मोदी करेंगे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, यूपी को मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी लखनऊ  उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पण प्रस्तावित है। यह परियोजना प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को सीधे जोड़ते हुए आवागमन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली मानी जा रही है। गंगा एक्सप्रेसवे को 120 किमी/घंटा की स्पीड के अनुसार डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि मेरठ से प्रयागराज की लंबी दूरी अब पहले के मुकाबले काफी कम समय में तय की जा सकेगी। जहां पहले यह सफर 10-12 घंटे लेता था,  अब 6-7 घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे आम यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। तकनीकी रूप से आधुनिक और भविष्य उन्मुख उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के एसीईओ हरि प्रताप शाही के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे 6 लेन में तैयार किया गया है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इसकी कुल लंबाई लगभग 594 किमी है और राइट ऑफ-वे 120 मीटर चौड़ा रखा गया है, जिससे यातायात सुगम और सुरक्षित रहेगा। परियोजना को 4 समूहों में बांटकर विकसित किया गया है, जिससे निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सका। इसमें आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और उच्च गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। टोल व यात्री सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन एक्सप्रेसवे पर 2 मुख्य टोल प्लाजा (मेरठ और प्रयागराज) के साथ 19 रैम्प टोल प्लाजा बनाए गए हैं। इससे वाहन चालकों को विभिन्न कट्स पर एंट्री और एग्जिट में आसानी होगी और जाम की स्थिति कम होगी। इसके अलावा यात्रियों के लिए 9 जन-सुविधा परिसरों का निर्माण किया गया है, जहां ईंधन, खानपान, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक आरामदायक बन सकेगी। इस परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 960 मीटर लंबा और रामगंगा नदी पर करीब 720 मीटर लंबा पुल बनाया गया है। ये पुल न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बाढ़ और जल प्रवाह को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक डिजाइन पर आधारित हैं। रणनीतिक दृष्टि से अहम् एयरस्ट्रिप शाहजहांपुर के पास लगभग 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी का निर्माण किया गया है, जो इस एक्सप्रेसवे की खास पहचान बन चुकी है। यहां इंडियन एयर फोर्स द्वारा इमरजेंसी लैंडिंग का सफल परीक्षण किया जा चुका है। यह सुविधा किसी भी आपात स्थिति जैसे प्राकृतिक आपदा या सैन्य जरूरत में बेहद उपयोगी साबित होगी, जिससे एक्सप्रेसवे की सामरिक महत्ता भी बढ़ जाती है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बल गंगा एक्सप्रेसवे के चालू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र और पूर्वी यूपी के कृषि प्रधान क्षेत्रों के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा। किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। उद्योगों को कच्चे माल और तैयार उत्पाद के परिवहन में समय और लागत की बचत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, खासकर धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के समग्र विकास का इंजन है। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा, नए रोजगार सृजित होंगे और प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मामले में और मजबूत होगा।

गंगा एक्सप्रेसवे से मेरठ से प्रयागराज 6 घंटे में, PM मोदी इस दिन कर सकते हैं उद्घाटन

मेरठ  गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से मेरठ से प्रयागराज तक का सफर करने की सोच रहे हैं, तो मेरठवासियों का यह सपना इसी महीने पूरा होने होनी की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर आम जनता के लिए इसे सौंप दिया जाए, जिसको लेकर अब अंतिम तैयारी का दौर शुरू हो गया है. ऐसे में लोकल 18 टीम की ओर से भी मेरठ के बिजौली मार्ग पर गंगा एक्सप्रेस पर ग्राउंड रिपोर्ट का जायजा लिया।  गंगा एक्सप्रेसवे की खासियत की बात की जाए, तो मेरठ से प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि वर्तमान समय में मेरठ से प्रयागराज जाने मे लगभग 12 घंटे का समय लग जाता है, जिस कारण उन्हें काफी दिक्कत का सामना भी करना पड़ता है. ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे की शुरुआत होने के बाद मात्र 6 से 7 घंटे में ही प्रयागराज तक की दूरी को तय कर सकते हैं।  इन जिलों से होकर गुजरेगा हाइवे आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से इस हाइवे को तैयार किया गया है, जहां आधुनिक स्पीड के माध्यम से सफर करते हुए यात्री प्रयागराज तक पहुंच पाएंगे. खास बात यह है कि सिर्फ प्रयागराज ही नहीं, बल्कि इसके माध्यम से अन्य जनपदों की दूरी भी कम होगी. इस नेशनल हाइवे के माध्यम से लगभग 12 जिले जुड़ते हुए नजर आएंगे. इसमें मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ से होते हुए प्रयागराज तक पहुंचेंगे।  औद्योगिक क्रांति को भी मिलेगी उड़ान उन्होंने बताया कि इस हाइवे के माध्यम से सिर्फ वाहन चालक ही नहीं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र को भी एक नई उड़ान मिलेगी. गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे ही औद्योगिक क्षेत्र भी डेवलप किया जाएगा, जिसको लेकर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. इससे आने वाले समय में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे ही विभिन्न ऐसी इकाइयों को स्थापित किया जाए, जिसके माध्यम से युवाओं को भी रोजगार मिल सके।  6 से 7 घंटे में पहुचेंगे प्रयागराज बताते चलें कि मेरठवासी इसके शुभारंभ का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अभी उन्हें प्रयागराज जाने के लिए नौचंदी ट्रेन या फिर बस का ही सहारा लेना पड़ता है, जिसमें लगभग 12 घंटे से अधिक का समय लगता है. वहीं अगर अपनी गाड़ी से भी जाते हैं, तो उसमें भी काफी समय लग जाता है, लेकिन 594 किलोमीटर के इस गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से सफर को मात्र 6 से 7 घंटे में ही पूरा कर पाएंगे।  दरअसल मेरठवासी इस बात का स्वागत भी कर रहे हैं. मेरठ के रहने वाले हिमांशु कहते हैं कि उन्हें प्रयागराज जाने के लिए अभी अन्य माध्यमों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब वह अपनी गाड़ी से भी जब इसका शुभारंभ हो जाएगा, तो सफर करेगे. इसी तरीके से स्टूडेंट सुजीत ने बताया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में जाने के लिए कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती है, लेकिन अब राहत मिलेगी। 

गंगा एक्सप्रेसवे दो महीने में होगा तैयार, मेरठ से प्रयागराज का सफर आसान, बस यह काम बाकी है

प्रयागराज  प्रयागराज-मेरठ के बीच 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। रविवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार ने मेरठ में निरीक्षण के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक्सप्रेसवे को शीघ्र ही जनता के लिए खोल दिया जाएगा।  मेरठ पहुंचे सीईओ ने मंडलायुक्त भानुचंद्र गोस्वामी और डीएम डॉ. वीके सिंह के साथ गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण की प्रगति के साथ ही औद्योगिक गलियारा विस्तार और टोल प्लाजा की तकनीक के बारे में जानकारी ली।  साइड की दीवार का मामूली काम अधूरा उन्होंने खड़खड़ी टोल प्लाजा पर अशोक के पौधे भी लगाए। सीईओ ने बताया कि तीसरे चरण में केवल एक्सप्रेसवे की साइड की दीवार का मामूली काम अधूरा है। यह काम भी एक माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। मेरठ जिले में 22 किमी एक्सप्रेसवे अक्तूबर 2025 में ही पूरा हो गया था।    खड़खड़ी में टोल प्लाजा भी बनकर तैयार बिजौली के निकट खड़खड़ी में टोल प्लाजा भी बनकर तैयार है और इसका परीक्षण भी हो चुका है। छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे का विस्तार कर आठ लेन का किया जा सकेगा। मेरठ से बदायूं तक के प्रथम सेक्टर में 130 किलोमीटर की लंबाई में 129 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है। एक्सप्रेसवे पर चार जगह लड़ाकू विमानों के लिए हवाई पट्टियां गंगा एक्सप्रेसवे पर केवल वाहन ही नहीं दौड़ेंगे, बल्कि आपातकाल की स्थिति में लड़ाकू विमानों को भी उतारा जा सकेगा। इस एक्सप्रेसवे पर चार स्थानों पर लड़ाकू विमानों के उतरने के लिए हवाई पट्टियां बनाई जा रही हैं। इनमें से शाहजहांपुर के जलालाबाद में 3.5 किलोमीटर लंबी पट्टी तैयार कर दी गई है।    एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार की सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाएगी। तीसरे चरण के अधूरे काम को तेजी से पूरा किया जा रहा है। सीईओ ने यूपीडा की परियोजना क्रियान्वयन इकाई के परियोजना निदेशक राकेश मोघा और गंगा एक्सप्रेसवे की संचालन एजेंसी आईआरबी के मुख्य प्रबंधक अनूप सिंह से एक्सप्रेसवे की प्रगति की जानकारी जानी। उन्होंने टोल पर बिना बैरियर के वाहनों के प्रवेश को लेकर अपनाई जा रही तकनीक को भी जाना। टोल पर बिना रुके गुजरेंगे वाहन गंगा एक्सप्रेसवे पर बिजौली के निकट खड़खड़ी में बनाए गए टोल प्लाजा पर वाहनों का प्रवेश बिना बैरियर के ही होगी। यह एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसके तहत वाहनों को टोल प्रवेश के लिए रुकना नहीं पड़ेगा। यह जानकारी आईआरबी के मुख्य महाप्रबंधक अनूप सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में निकास के दौरान भी इसी प्रकार टोल कट जाएगा। इस नई व्यवस्था से गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी लाइन नहीं लगेगी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार ने निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी हापुड़ और अन्य अधिकारियों के काफिले के साथ गंगा एक्सप्रेसवे का बदायूं तक निरीक्षण करने के लिए निकल गए। औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा मनोज कुमार ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे शीघ्र ही औद्योगिक गलियारा आकार लेता दिखेगा। इसके लिए काफी भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। विदेशी कंपनियां भी इस औद्योगिक गलियारे में अपनी यूनिट स्थापित करने के लिए आ रही हैं। आने वाले समय में यूपी उद्योग प्रदेश बन जाएगा। पूरा देश गंगा एक्सप्रेसवे किनारे बनने वाले औद्योगिक गलियारे की तरफ देखेगा। यह गलियारा प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।  

गंगा एक्सप्रेसवे के खुलने से मेरठ-प्रयागराज का सफर केवल 8 घंटे में पूरा

हापुड़  जनवरी में मेरठ से प्रयागराज तक का सफर सुहाना हो जाएगा। गंगा एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हो गया है। इनका ट्रायल दिसंबर में करने की तैयारियां की जा रही हैं। ट्रायल से पहले एक्सपर्ट की टीम निरीक्षण करने के बाद कुछ जरूरी प्रमाण पत्र जारी करेगी। उसके बाद ट्रायल रन की तिथि का एलान कर दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह में इसको जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। एक्सप्रेस-वे के तीसरे खंड में उन्नाव-हल्द्वानी सेक्शन में मात्र दो प्रतिशत कार्य ही अब बाकी है। इसके अलावा मेरठ-बदायूं सहित पूरा एक्सप्रेस-वे फर्राटा भरने के लिए तैयार है। मेरठ से प्रयागराज तक के 594 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे पर कुल 1498 बड़े स्ट्रक्चर हैं। इनमें से 1497 स्ट्रक्चर का कार्य पूरा हो गया है। मेरठ से बदायू तक के प्रथम सेक्टर में 129 किमी की लंबाई में कुल बड़े 322 स्ट्रक्चर हैं। इनमें सिंभावली सहित सभी पर कार्य पूरा हो चुका है। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार दिसंबर में इसका ट्रायल रन पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद अंतिम परीक्षण करके 15 जनवरी तक प्रधानमंत्री इसका उदघाटन करेंगे। एक्सप्रेस-वे पर पांच स्थानों पर लडाकू विमान उतारने योग्य स्ट्रक्चर तैयार किया गया है। जिसका प्रयोग आपात स्थिति में किया जा सकेगा। प्रदेश को आने वाले साल में गंगा एक्सप्रेस-वे के रूप में प्रयागराज तक का नया हाईवे मिल जाएगा। इस 594 किलोमीटर के एक्सप्रेस वे का निर्माण पूरा हो गया है। इसके बाद मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ व प्रयागराज के औद्योगिक विकास को भी रफ्तार मिलेगी। एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर औद्योगिक गलियारा बनाया जा रहा है। इससे प्रदेश के दोनों सिरों के लोगों के आवागमन का एक और सुगम पथ संचालित हो जाएगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा एक्सप्रेसवे के कार्य को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस 36,230 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए 7453.13 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। अभी इसका विस्तार हरिद्वार किया जा रहा है। छह लेन में बनाए गए इस एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की सामान्य रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहेगी। एक्सप्रेसवे पर शाहजहांपुर के जलालाबाद में लड़ाकू विमानों के लिए 3.5 किलोमीटर हवाई पट्टी का भी निर्माण पूरा कर लिया गया है। वहीं ऐसे तीन और स्थान विकसित करने की तैयारी है।     गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। अब इसके ट्रायल की तैयारी है। हमारा प्रयास है कि दिसंबर में ट्रायल रन कराकर जनवरी में इसका उदघाटन करा लिया जाएगा। हमारी ओर से उदघाटन के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। इस संबंध में यूपीडा व एनएचएआइ के अधिकारियों के साथ जल्द ही बैठक का आयोजन किया जाएगा। – संदीप कुमार, एडीएम गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ-प्रयागराज) नवीनतम निर्माण स्थिति विवरण                                                                     स्थिति एक्सप्रेस-वे निर्माण की कुल स्थिति                       लगभग 98 प्रतिशत पूरा मुख्य कैरिजवे का काम                                     99 प्रतिशत पूरा हो गया मेरठ और बदायूं के बीच खंड                           130 किलोमीटर का निर्माण ट्रायल के लिए तैयार प्रस्तावित ट्रायल रन का समय                            दिसंबर 2025 का पहला सप्ताह एक्सप्रेसवे का उद्घाटन                                   जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में मेरठ से प्रयागराज यात्रा का समय (एक्सप्रेसवे के बाद)     केवल 6 घंटे

गंगा एक्सप्रेसवे अपडेट: 594 किलोमीटर पर गाड़ियों की रफ्तार कब बढ़ेगी?

मेरठ  मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेसवे का काम लगभग पूरा हो गया है. अमरोहा जिले के हसनपुर तहसील इलाके में गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा किया जा चुका है. फिनिशिंग का काम बाकी है, लेकिन वो भी अंतिम फेज में है. एक महीने में वाहन भी यहां दौड़ते दिखेंगे. हसनपुर तहसील इलाके में गंगा एक्सप्रेसवे पर पूरी सड़क बनकर तैयार हो गई है. लाइटिंग का काम भी किया जा चुका है. हसनपुर तहसील इलाके में 23.60 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण 12 अक्टूबर 2025 तक पूरा किया जाना है. गंगा एक्सप्रेसवे के ऊपर से बरसात का पानी नीचे उतारने के लिए पाइप लाइन का काम भी हो चुका है. मंगरौला में हसनपुर रहरा मार्ग के ऊपर ओवरब्रिज और टी प्वाइंट बन चुका है. टी प्वाइंट के दोनों ओर चारों जगहों पर टोल बूथ भी बन चुके हैं. गंगा पर पाइंदापुर में पुल बनाया जा चुका है. गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर है लंबा अधिकारियों ने बताया कि बारिश की वजह से फिनिशिंग काम रुका हुआ था. इस काम को अगले महीने तक खत्म कर लिया जाएगा. हालांकि सुत्रों के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे के नवंबर में चालू होने की उम्मीद जताई जा रही है. बता दें कि गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा है. एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज तक का सफर फर्राटेदार और आसान हो जाएगा. मेरठ से प्रयागराज का सफर होगा आसान मेरठ, हापुड़ और अमरोहा के लोग जो संगम में आस्था की डुबकी लगाने प्रयागराज आने की ख्वाहिश रखते हैं, उनके लिए भी प्रयागराज का सफर काफी आसान हो जाएगा. पश्चिमी यूपी के वादकारियों और अधिवक्ताओं को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचने में आसानी होगी. यहां के वादकारी सुबह हाईकोर्ट में अपने मामलों की पैरवी करके रात तक वापस आ सकेंगे.