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हमास को इजराइल की धमकी: गाजा को खंडहर बना देंगे, हमले में 17 फिलीस्तीनियों की जान गई

इजराइल  इजराइल के रक्षा मंत्री ने गाजा सिटी में हमले का दायरा बढ़ाने की तैयारी के बीच शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर हमास उसकी शर्तों को स्वीकार नहीं करता है तो इस शहर को तबाह किया जा सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को गाजा सिटी पर कब्जा करने की अनुमति देने का एलान किया। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने चेतावनी दी कि गाजा पट्टी का सबसे बड़ा शहर ‘‘रफाह और बैत हानून'' इलाकों की तरह मलबे में तब्दील हो सकता है, जिन्हें युद्ध के शुरुआती चरण में तबाह कर दिया गया था। उन्होंने ‘एक्स' पर कहा, ‘‘गाजा में हमास के हत्यारे और बलात्कारी अगर युद्ध को समाप्त करने के लिए इजराइल की शर्तों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो उनके लिए जल्द ही नरक के दरवाजे खुलने वाले हैं।'' काट्ज ने इजराइल की युद्ध-विराम शर्तों को दोहराया, जिसमें सभी बंधकों की रिहाई और हमास का पूरी तरह निरस्त्रीकरण शामिल है। वहीं, हमास का कहना है कि वह युद्ध खत्म करने के बदले बंधकों को रिहा कर सकता है, लेकिन फलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के बिना निरस्त्रीकरण को स्वीकार नहीं करेगा। गाजा सिटी में व्यापक पैमाने पर सैन्य अभियान कुछ ही दिनों में शुरू हो सकता है। गाजा सिटी हमास की गतिविधियों का गढ़ है और इजराइल का मानना ​​है कि शहर में हमास का सुरंगों का विशाल नेटवर्क है। गाजा सिटी में लाखों नागरिक भी शरण लिए हुए हैं और वहां अब भी गाजा पट्टी के कुछ महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे एवं स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं। हमास ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि वह अरब मध्यस्थों के युद्ध-विराम प्रस्ताव पर सहमत हो गया है, जिसे अगर इजराइल स्वीकार कर लेता है, तो हमलों को रोका जा सकता है। दोनों पक्ष सीधे तौर पर बातचीत नहीं कर रहे हैं और अतीत में भी ऐसी घोषणाएं की गई हैं, जिनसे युद्ध-विराम नहीं हो सका। कई इजराइलियों को डर है कि अगर हमला हुआ, तो हमास समर्थित आतंकवादियों के सात अक्तूबर 2023 के हमले के बाद अब भी जीवित बचे लगभग 20 बंधकों की जान खतरे में पड़ सकती है। सहायता समूहों और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि इससे गाजा पट्टी का मानवीय संकट और भी बदतर हो जाएगा। वहीं, नेतन्याहू का कहना है कि सैन्य अभियान ही बंधकों को छुड़ाने और हमास को कुचलने का सबसे ठोस उपाय है।  उन्होंने बृहस्पतिवार को दक्षिणी इजराइल में एक कमांड सेंटर के दौरे के दौरान कहा, ‘‘ये दोनों चीजें-हमास को हराना और हमारे सभी बंधकों को मुक्त कराना, साथ-साथ चलेंगी।'' गाजा शहर में स्थित शिफा अस्पताल ने बताया कि इजराइल द्वारा शुक्रवार को किए गए व्यापक हमले में कम से कम 17 फिलीस्तीनियों की मौत हो गयी। इजराइल ने शेख रादवान स्थित एक स्कूल पर हवाई हमला किया। शेख रादवान गाजा शहर का एक ऐसा इलाका है, जहां दर्जनों फलस्तीनी स्कूल के प्रांगण में अस्थायी तंबुओं में शरण लिए हुए हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी और अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, इस हमले में कम से कम सात लोग मारे गए। इजराइली सेना ने कहा कि उन्हें इस क्षेत्र में किसी हमले की जानकारी नहीं थी।    

गाजा संघर्ष: अल जज़ीरा के 5 पत्रकारों की जान गई, IDF की एक पत्रकार को आतंकी कहने वाली प्रतिक्रिया

गाजा  गाजा में इजरायल की तरफ से लगातार हवाई हमले जारी हैं. इस बीच, गाजा शहर में पत्रकारों द्वारा उपयोग किए जा रहे एक तंबू पर इजरायली हमले में कतर के मीडिया चैनल अल जजीरा अरबी के रिपोर्टर अनस अल-शरीफ की जान चली गई. इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर IDF की बमबारी का वीडियो शेयर किया था. उनके आखिरी पोस्ट में लिखा था, "लगातार बमबारी हो रही है, दो घंटे से गाजा शहर पर इजरायली आक्रमण तेज हो गया है." अल जज़ीरा के मुताबिक, 28 साल के अल-शरीफ की मौत तब हुई, जब गाजा शहर में अल-शिफा अस्पताल के मेन गेट के बाहर पत्रकारों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एक तंबू पर इज़राइली हवाई हमला हुआ. अल-शिफा अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि अस्पताल के बाहर एक तंबू को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में कुल सात लोगों की मौत हो गई. अल जज़ीरा ने इसी हमले में संवाददाता मोहम्मद क़ेरीकेह, कैमरा ऑपरेटर इब्राहिम ज़हेर, मोहम्मद नौफ़ल और मोआमेन अलीवा के साथ-साथ उनके असिस्टेंट मोहम्मद नौफ़ल की मौत की पुष्टि की है. इज़राइली सेना ने एक बयान जारी करते हुए अल-शरीफ पर हमास सेल का नेतृत्व करने का आरोप लगाया है.  इजरायल की सेना ने कहा, "अनस अल शरीफ हमास आतंकवादी संगठन में एक आतंकवादी सेल के प्रमुख के रूप में काम करता था और इजरायली नागरिकों और आईडीएफ सैनिकों के खिलाफ रॉकेट हमलों को आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार था." अनस अल-शरीफ़ कौन थे? अनस अल-शरीफ़ गाज़ा के एक जाने-माने पत्रकार थे, जिन्होंने अल जज़ीरा अरबी के लिए नॉर्थ स्ट्रिप से बड़े स्तर पर रिपोर्टिंग की थी. गाज़ा शहर स्थित अल-अक्सा यूनिवर्सिटी के मीडिया डिपार्टमेंट से ग्रेजुएट अनस अल-शरीफ की रिपोर्टिंग के लिए 2018 में फ़िलिस्तीन में उन्हें बेस्ट यंग जर्नलिस्ट अवार्ड मिला.  जुलाई में, इज़राइली सैन्य प्रवक्ता अविचाय अद्राई ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें अल-शरीफ़ पर हमास की सशस्त्र शाखा का सदस्य होने का आरोप लगाया गया था. वहीं, अल जज़ीरा मीडिया नेटवर्क ने इस दावे को खारिज कर दिया और इज़राइल पर पत्रकारों के खिलाफ 'उकसाने का अभियान' चलाने का आरोप लगाया. अल जज़ीरा ने कहा, "नेटवर्क इसकी कड़ी निंदा करता है. गाजा पर चल रहे इज़राइली युद्ध की कवरेज की शुरुआत से ही हमारे कर्मचारियों के खिलाफ लगातार उकसावे की कोशिश हो रही है. नेटवर्क इस उकसावे को इलाके में अपने पत्रकारों को निशाना बनाने को सही ठहराने का एक खतरनाक प्रयास मानता है." पत्रकारों की सुरक्षा समिति (CPJ) ने पिछले महीने अद्राई की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अल-शरीफ़ की सुरक्षा का आह्वान किया था. सीपीजे की क्षेत्रीय निदेशक सारा कुदाह ने एक बयान में कहा, "यह पहली बार नहीं है, जब अल-शरीफ़ को इज़राइली सेना ने निशाना बनाया है, लेकिन अब उनकी जान को गंभीर ख़तरा है."

इजरायल ने सीजफायर की कोशिशों पर फेरा पानी, गिराई मिसाइल, 74 फिलिस्तीनियों की मौत

गाजा "न कोई चेतावनी, न सायरन, अचानक एक विमान ने उस जगह पर हिट किया, फिर वहां कंपन ऐसी हुई जैसे भूकंप आ गया हो." इसके बाद का मंजर और भी भयावह था. सोशल मीडिया पर आ रहे वीडियो में जमीन पर खून से लथपथ और क्षत-विक्षत शव पड़े हुए दिखाई दे रहे हैं तथा घायलों को कम्बलों में लपेटकर ले जाया जा रहा है. ये आंखों देखा हाल गाजा में समंदर के किनारे बने अल-बाका कैफे में घटना के समय मौजूद एक चश्मीदद ने बताया. एपी की रिपोर्ट के अनुसार गाजा में फूड कैफे कुछ उन स्थानों में है जहां आज भी हलचल देखी जा सकती है. यहां पर लोगों को खाना तो मिल ही जाता है, वे मोबाइल भी चार्ज कर पाते हैं और उन्हें यहां इंटरनेट का कनेक्शन भी मिल जाता है.  ऐसी ही एक कैफे पर सोमवार को इजरायली हमले में 30 फिलिस्तीनी मारे गए हैं.  सोमवार को इजरायली हमले में फिलिस्तिनियों के हताहत होने की कुल संख्या ज्यादा है. एपी के अनुसार सोमवार को इजरायली हमलों में कम से कम 74 लोग मारे गए हैं.  इनमें 30 तो कैफे में मरे हैं और बाकी दुखद मौतें शहर के दूसरे इलाकों में हुई है.  शिफा अस्पताल के अनुसार गाजा सिटी की सड़क पर हुए दो अन्य हमलों में 15 लोग मारे गए. अल-अक्सा अस्पताल के अनुसार ज़ावैदा शहर के पास एक इमारत पर हुए हमले में छह लोग मारे गए. प्रत्यक्षदर्शियों, अस्पतालों और गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजरायली सेना ने दक्षिणी गाजा में भोजन की तलाश में जुटे 11 लोगों पर हमला किया और उन्हें मार डाला. दक्षिणी शहर खान यूनिस के नासेर अस्पताल ने कहा कि उन्हें उन लोगों के शव मिले जो मदद लेकर लौट रहे थे.  संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को चेतावनी दी कि गाजा में मानवीय संकट चिंताजनक गति से गहरा रहा है, क्योंकि इजरायली सैन्य अभियान जीवन और बुनियादी ढांचे पर विनाशकारी प्रभाव डाल रहे हैं. 15 दिनों में 1000 लोग मारे गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में राजदूतों को जानकारी देते हुए मध्य पूर्व के लिए सहायक महासचिव खालिद खैरी ने कहा कि अकेले मध्य जून से अब तक 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं. इनमें से कई सहायता मांगने के दौरान मारे गए थे. गाजा स्वास्थ्य अधिकारियों के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर 2023 से अब तक फिलिस्तीनी मौतों की कुल संख्या 56,500 को पार कर गई है. खालिद खैरी ने कहा कि, "गाजा में पीड़ा और क्रूरता का स्तर असहनीय है." "फिलिस्तीनी लोगों को लगातार सामूहिक रूप से दंडित करना अनुचित है." खियारी ने खाद्य वितरण प्वाइंट के पास आईडीएफ द्वारा गोलीबारी से जुड़ी कई घटनाओं का हवाला दिया.  खियारी ने हमास और अन्य फिलिस्तीनी आतंकी संगठनों द्वारा किए गए हमले के लिए संयुक्त राष्ट्र की कड़ी निंदा को दोहराया. जिसमें 1,200 से अधिक लोग मारे गए और 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया. इस हमले में एक महिला सहित पचास बंधक अभी भी हमास के कैद में हैं. उन्होंने कहा, "आतंक के इन कृत्यों को कोई भी उचित नहीं ठहरा सकता. हम इस बात से स्तब्ध हैं कि बंधकों के साथ लगातार दुर्व्यवहार किया जा रहा है और बंधकों के शवों को जब्त किया जा रहा है." खैरी ने कहा कि, "कब्जे वाले पश्चिमी तट पर बढ़ती हिंसा चिंताजनक है." उन्होंने चेतावनी दी कि सैन्य अभियान और बसने वालों का विस्तार मौत, विस्थापन और विनाश का कारण बन रहा है. 23 लाख लोग कर रहे हैं भुखमरी का सामना गौरतलब है कि गाजा में भोजन की आपूर्ति गंभीर संकट का सामना कर रही है. इजरायली नाकाबंदी के कारण यहां भोजन की सप्लाई नहीं हो पा रही है. मार्च 2025 से इजरायल ने भोजन, ईंधन और सहायता सामग्री की आपूर्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, जिससे अकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है. एजेंसियों के मुताबिक लोग एक दिन में एक बार खाना खा पा रहे हैं या भूखे रह रहे हैं. आटे और सब्जियों जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें 1000% तक बढ़ गई हैं. इजरायली हमलों ने खाद्य वितरण केंद्रों, बेकरियों और सहायता वाहनों को निशाना बनाया, जिससे सैकड़ों लोग मारे गए. गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन (GHF) द्वारा संचालित वितरण केंद्रों पर भीड़ के दौरान गोलीबारी में कई नागरिक मारे गए. संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों ने इसे युद्ध अपराध बताया है. असुरक्षित मार्गों और लूटपाट ने सहायता वितरण को और जटिल कर दिया है, जिससे 2.3 मिलियन लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं. इजरायल के बिना ढह जाएगा मध्य पूर्व इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार (30 जून) को इजरायली सैन्य नेतृत्व के सदस्यों को संबोधित करते हुए दावा किया कि इजरायल के बिना मध्य पूर्व ध्वस्त हो जाएगा.  अगले सप्ताह ट्रंप से मिलने अमेरिका जा रहे हैं नेतान्याहू इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के लिए वाशिंगटन का दौरा करेंगे.  इस दौरे में इजरायल-हमास के बीच सीजफायर पर अमेरिका से चर्चा हो सकती है.  व्हाइट हाउस गाजा में युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों को तेज कर रहा है. नाम न बताने की शर्त पर बोलते हुए अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आगामी यात्रा की पुष्टि की. इस बैठक का उद्देश्य गाजा में युद्ध विराम समझौते और बंधकों की रिहाई पर चर्चा को आगे बढ़ाना है. गौरतलब है कि इजरायल-ईरान के बीच सीजफायर कराने के बाद ट्रंप ने अपना ध्यान इजरायल और हमास के बीच चल रही लड़ाई पर केंद्रित कर दिया है. अमेरिका इस युद्ध को रुकवाने के लिए काम कर रहा है. ट्रंप ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा था कि, "हमें लगता है कि अगले सप्ताह के भीतर हम युद्ध विराम पर सहमत हो जाएंगे. हालांकि उन्होंने वार्ता या समय-सीमा के बारे में और अधिक जानकारी नहीं दी.