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बकरी प्लेग की आशंका से इंदौर में अलर्ट, 8 लाख से अधिक पशुओं का हुआ PPR टीकाकरण

इंदौर  पशुपालक सावधान हो जाएं. क्योंकि कई एशियाई देशों में फैल रही भेड़ बकरियों में प्लेग की बीमारी का खतरा देश के पशुओं में भी मंडरा रहा है. लिहाजा पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के अंतर्गत पीपीआर (Peste des Petits Ruminants) रोग के नियंत्रण एवं उन्मूलन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है. इस महामारी से निपटने के लिए इंदौर संभाग में व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।  इंदौर में टीकाकरण अभियान शुरु अभियान के तहत 4 माह एवं उससे अधिक आयु के भेड़ एवं बकरियों को पीपीआर नि:शुल्क टीकाकरण किया जा रहा है. अभियान के दौरान पशुपालकों को टीकाकरण के साथ-साथ पशुओं की देखभाल एवं टीकाकरण संबंधी आवश्यक जानकारी भी दी जा रही है. मध्य प्रदेश में इस कार्यक्रम का प्रथम चरण वर्ष 2020 से प्रारंभ किया गया था. वर्तमान में पीपीआर टीकाकरण अभियान का तृतीय चरण संचालित किया जा रहा है।  2030 तक पीपीआर रोग मुक्त होने का लक्ष्य दरअसल, पीपीआर भेड़ एवं बकरियों में होने वाला अत्यंत संक्रामक एवं गंभीर विषाणुजनित रोग है, जिसे सामान्यतः भेड़ एवं बकरी प्लेग के नाम से भी जाना जाता है. संक्रमित पशुओं में यह बीमारी गंभीर एवं मृत्यु का कारण बन सकती है. रोग की रोकथाम के लिए समय पर टीकाकरण अत्यंत प्रभावी उपाय है. भारत सरकार द्वारा वर्ष 2030 तक पीपीआर रोग के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसी क्रम में इंदौर संभाग के इंदौर, धार, अलीराजपुर, बड़वानी एवं बुरहानपुर जिलों में भेड़ एवं बकरियों का व्यापक स्तर पर नि:शुल्क टीकाकरण किया जा रहा है।  8 लाख से ज्यादा पशुओं को लगा पीपीआर डोज पशुपालन विभाग की टीकाकरण टीमें गांव-गांव एवं पशुपालकों के पशु समूहों तक पहुंचकर टीकाकरण कर रही हैं. पशुपालन इंदौर संभाग के संयुक्त संचालक डॉ. मनीष इंगोले द्वारा बताया गया कि, ''अब तक 8 लाख 42 हजार 259 से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है. टीकाकरण अभियान 15 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा.'' उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि, ''वे अपने सभी भेड़ एवं बकरी पशुओं का अनिवार्य रूप से टीकाकरण करवाएं तथा टीकाकरण दल को आवश्यक सहयोग प्रदान करें।  उन्होंने पशुपालकों से यह भी अपील की है कि, ''बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें तथा पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम पशु चिकित्सा संस्था अथवा पशु चिकित्सक को सूचित करें, ताकि समय पर आवश्यक उपचार एवं रोग नियंत्रण की कार्रवाई की जा सके. पीपीआर से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण है। 

मध्य प्रदेश में बकरी पालन पर 50% सब्सिडी, सरकार की स्कीम से किसानों के लिए बन रहा है सुपरहिट बिजनेस

छिंदवाड़ा  किसानों के लिए एक ऐसी योजना आई है जो 50% सब्सिडी के साथ मालामाल कर सकती है. इसके लिए आधी रकम किसानों को लगाना होता है तो आधा सरकार खर्च उठाती है. कुछ ऐसा ही किया है बांका नागनपुर के किसान नवीन रघुवंशी ने. जिन्होंने एक करोड़ रुपए का बकरी फॉर्म खोलकर खेती को फायदा का सौदा बनाया है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन से हो जाएंगे मालामाल छिंदवाड़ा के बांका नागनपुर के किसान नवीन रघुवंशी ने बताया कि, ''पशुपालन विभाग की राष्ट्रीय पशुधन मिशन एनएलएम योजना का लाभ लेकर बकरी पालन शुरू किया है और फायदे का व्यापार साबित किया है. सीमित संसाधनों से शुरू हुई उनकी यह पहल आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण क्षेत्र में एक मॉडल बकरी फार्म के रूप में पहचान बना चुकी है.'' उन्होंने बताया कि, ''एनएलएम योजना के अंतर्गत स्वीकृत उनके इस बकरी फार्म में सिरोही नस्ल की कुल 175 बकरियाँ, बकरे एवं उनके बच्चे उपलब्ध हैं. फार्म को मॉडल स्वरूप में विकसित किया गया है, जिसमें बीमार बकरियों के लिए अलग क्वारंटाइन शेड, बच्चों के लिए अलग कमरे तथा बकरियों के बैठने के लिए 4 फीट ऊँचाई पर प्लाई प्लेटफॉर्म बनाया गया है. इसी प्लेटफॉर्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गी का पालन भी किया जा रहा है, जिससे एक्स्ट्रा इन्कम हो रही है.'' 1 करोड़ की लागत में आधी सब्सिडी उपसंचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया कि, ''बकरी फार्म की कुल लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है. योजना के अंतर्गत पहली किस्त के रूप में 25 लाख रुपये की राशि नवीन रघुवंशी को प्रदान की जा चुकी है. इस आर्थिक सहयोग से फार्म को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया गया है. पोषण, ब्रीडिंग और तकनीक पर विशेष ध्यान बकरियों के पोषण के लिए फार्म में तीन प्रकार की नेपियर घास का उत्पादन किया जा रहा है. दाना बनाने की मशीन एवं चैफ कटर जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं. ब्रीडिंग के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता के बकरे रखे गए हैं, जिनमें एक बकरे की कीमत करीब 2 लाख रुपये है. बेहतर पोषण और मैनेजमेंट के कारण बकरियों का स्वास्थ्य एवं उत्पादन अच्छा हो रहा है. खेती में डिजिटल टेक्निक का उपयोग देश-विदेश तक पहचान नवीन रघुवंशी के बेटे मंथन रघुवंशी बकरी पालन एवं उन्नत कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान दे रहे हैं. वे यूट्यूब एवं इंस्टाग्राम के माध्यम से बकरी पालन, उन्नत कृषि, मक्का उत्पादन तथा कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों जानकारी के वीडियो भी शेयर कर रहे हैं. कुछ दिन पहले उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ.एच.जी.एस. पक्षवार, एपीसी ग्रुप एवं एसडीएम चौरई प्रभात मिश्रा के साथ एनएलएम योजना के अंतर्गत संचालित इस बकरी फार्म के संचालन की व्यवस्थाएं देखने पहुंचे थे. निरीक्षण दल में उप संचालक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग जितेन्द्र कुमार सिंह, उप संचालक उद्यानिकी विभाग एम.एल. उइके, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. झाड़े, डॉ. अलवा तथा कृषि विज्ञान केंद्र देलाखारी के प्रमुख डॉ. आर.एल. राउत पहुंचे थे.