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राज्यपाल डेका बोले- डिजिटल एडिक्शन आज हर दूसरे नशे से ज्यादा खतरनाक, ICFAI यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में हुए शामिल

डिजिटल एडिक्शन आज किसी भी अन्य एडिक्शन से अधिक खतरनाक – राज्यपाल  डेका आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हुए शामिल 19 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा 16 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल से सम्मानित 504 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई रायपुर,   राज्यपाल रमेन डेका आज आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में वर्ष 2025 एवं वर्ष 2026 शैक्षणिक सत्र  के विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक प्रदान किए गए,  जिनमें 19 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा 16 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया शामिल हैं। स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर पर कुल 504 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए इसके दुष्प्रभावों से बचने सलाह         राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं, जबकि हम उस दौर के विद्यार्थी हैं, जब शिक्षा चाक ,पेंसिल पुस्तकों और गुरुओं के माध्यम से प्राप्त करते थे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज बहुत जरूरी है, लेकिन इसका उपयोग उतना ही होना चाहिए, जितना मानव समाज के हित में आवश्यक है। आज डिजिटल एडिक्शन किसी भी अन्य एडिक्शन से अधिक खतरनाक हो गया है। विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए इसके दुष्प्रभावों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर एनर्जी, क्लाइमेट चेंज और माइक्रो प्लास्टिक आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। 21वीं सदी में विकास के साथ उसके दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा और सतत विकास को प्राथमिकता देनी होगी। विद्यार्थियों पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहें         राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भगवत गीता के कर्मयोग का संदेश देते हुए कहा कि कर्म ही जीवन है। हमें इस बात की चिंता किए बिना कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, अपने कर्म, पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपका ज्ञान कोई आपसे नहीं छीन सकता। अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और सही रास्ते पर आगे बढ़ें। विद्यार्थियों को अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध ढंग से सफलता की ओर आगे बढ़ना चाहिए        डेका ने कहा कि विद्यार्थियों ने ज्ञान और डिग्री इसलिए हासिल की है कि उसका उपयोग मानव समाज के हित में हो। विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क प्रचुर मात्रा में है और यह देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अब छत्तीसगढ़ को एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में समाज के प्रत्येक वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध ढंग से सफलता की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने तथा मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।        समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य एवं डिफेंस साइंटिस्ट डॉ. वी. सतीश रेड्डी तथा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आर.पी. कौशिक ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. शिव दयाल पांडे ने दिया और विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शासी परिषद एवं कार्य परिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं उनके पालक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता को नई दिशा! राज्यपाल डेका ने कन्या छात्रावास और मेधा AI-मीडिया शोध केंद्र का किया शुभारंभ

पत्रकारिता में सत्य, तथ्य और जनहित सर्वाेच्च प्राथमिकता हो – राज्यपाल डेका राज्यपाल ने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में कन्या छात्रावास, मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का किया शुभारंभ रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का उद्घाटन भी किया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज का दिन विश्वविद्यालय के लिए विशेष महत्व रखता है। सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा के प्रसार और नारी सशक्तिकरण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके नाम पर कन्या छात्रावास का नामकरण छात्राओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह छात्रावास दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी उच्च शिक्षा और प्रतिभा विकास में सहायक होगा।         राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन से मीडिया और पत्रकारिता के स्वरूप में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय में स्थापित मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने तथा उनके जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यपाल डेका ने विश्वविद्यालय के प्रेरणा स्त्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे जी की प्रतिमा में श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। उन्होंने स्व. ठाकरे जी के सानिध्य में बिताए गए अवसरों और प्रेरणादायी उद्धरणों को साझा किया।         डेका ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है और इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना प्रत्येक पत्रकार का दायित्व है। समाचारों में तथ्य, सत्य और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के संबंध में समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूर्ण पुष्टि आवश्यक है, क्योंकि एक समाचार का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ सकता है।        डेका ने कहा कि सोशल मीडिया के वर्तमान दौर में सूचनाओं का तेजी से प्रसार हो रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उपलब्ध प्रत्येक सामग्री सत्य हो, यह आवश्यक नहीं है। ऐसे में पत्रकारों को तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद ही समाचारों को प्रसारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। एक श्रेष्ठ पत्रकार वह नहीं जो सबसे पहले खबर दे, बल्कि वह है जो सही, तथ्यपरक और जिम्मेदारी के साथ खबर दे।         राज्यपाल ने प्रिंट मीडिया के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एआई और सोशल मीडिया के आधुनिक दौर में भी प्रिंट मीडिया आज भी विश्वसनीय माध्यम समाज में बना हुआ है। पत्रकारिता को समाज के अंतिम व्यक्ति की आवश्यकताओं और समस्याओं को सामने लाने तथा व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए  अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में अनेक ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं, लेकिन वे व्यापक रूप से पहचाने नहीं जा सके। ऐसे अनसुने नायक-नायिकाओं के कार्यों को समाचारों और लेखों के माध्यम से समाज के सामने लाने से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।        राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने तथा कम से कम एक हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की आवश्यक मान्यता सुनिश्चित करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।       कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दयाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष मंडावी विभागाध्यक्ष प्रबंधन और आभार प्रदर्शन सुनील कुमार शर्मा कुलसचिव ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक, प्राध्यापकगण, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।दुबई में इथियोपिया के राष्ट्रपति से मिले मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विश्वविद्यालयों को राज्यपाल डेका का संदेश, छात्र कल्याण और क्वालिटी एजुकेशन पर दें सबसे ज्यादा जोर

विद्यार्थियों का कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हो विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता – राज्यपाल  डेका निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में नैक ग्रेडिंग, पीएचडी  की गुणवत्ता, पाठ्यक्रमों और सामाजिक दायित्वों की समीक्षा रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि विद्यार्थियों का कल्याण विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विश्वविद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर हैं, इसलिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।            राज्यपाल रमेन डेका ने आज निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक लेकर विश्वविद्यालयों में शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को नैक (NAAC) में बेहतर ग्रेडिंग प्राप्त करने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों का अनुपात संतुलित होना चाहिए तथा विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम 1000 विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करने को कहा। विश्वविद्यालय द्वारा शोधार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए        डेका ने कहा कि पीएच.डी. उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी होनी चाहिए। पीएच.डी. के लिए होने वाले पंजीयनों की विशेषज्ञों के माध्यम से रैंडम चेकिंग कराई जाएगी, ताकि शोध कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल उपाधि प्रदान करने तक सीमित न रहकर ऐसे शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसका समाज और देश के विकास में वास्तविक योगदान हो। रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दें         राज्यपाल ने कहा कि कोई भी नया पाठ्यक्रम प्रारंभ करने से पहले विश्वविद्यालय संबंधित क्षेत्र में सर्वेक्षण कर आवश्यकता और विद्यार्थियों की रुचि का आकलन करें। जिन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या नहीं है, उन्हें बंद करने पर विचार किया जाए। अनावश्यक रूप से पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाने के बजाय रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दी जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल           डेका ने एनवायरनमेंटल साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया। विश्वविद्यालय गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका हो        डेका ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नियमित कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने सामाजिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाना चाहिए। गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ब्रेस्ट कैंसर सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी विश्वविद्यालय सक्रिय भूमिका निभाएं। स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान महत्वपूर्ण        राज्यपाल ने विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को प्रत्येक विद्यार्थी तक योग पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों को योग के लिए इस प्रकार प्रेरित किया जाए कि यह उनकी दैनिक जीवनशैली और आदत का हिस्सा बन जाए। छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दें      डेका ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए विश्वविद्यालयों  को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें             राज्यपाल ने कहा कि फार्मेसी सीधे मानव स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए जिन विश्वविद्यालयों में फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित हैं, वहां विद्यार्थियों के बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ टाई-अप किया जाए। उन्होंने फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें             डेका ने विश्वविद्यालयों से नशा मुक्ति अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें नशे से दूर रखने में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय करें           राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करने का आह्वान किया।           बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उच्च शिक्षा सचिव अविनाश चंपावत, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष वी. के. गोयल सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।

विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना सर्वाेच्च प्राथमिकता – राज्यपाल डेका

रायपुर विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक राज्यपाल  रमेन डेका ने आज प्रदेश के विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक लेकर विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों की संख्या, रिक्त पदों की पूर्ति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन तथा नवाचार एवं स्टार्टअप गतिविधियों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की।             राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में सीटों के अनुपात में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली और इस दिशा में प्राथमिकता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में जहां भी व्यवस्थागत कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाए तथा शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए सभी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।   ’विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए’          राज्यपाल  डेका ने विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की जानकारी लेते हुए उन्हें शीघ्र भरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमानुसार स्थानीय योग्य एवं प्रतिभाशाली लोगों को प्राथमिकता देने के प्रयास किए जाएं, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर मिल सके।  डेका ने विश्वविद्यालयों की नैक  (NAAC) एवं एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय अपनी रैंकिंग में सुधार के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करें। ’नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ संकल्प अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ा’          राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां इनोवेशन एवं स्टार्टअप गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में उपलब्ध ज्ञान, विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचना चाहिए। विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए नवाचार एवं उद्यमिता से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ संकल्प अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा विद्यार्थियों को खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।  ’परीक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं लीक-प्रूफ बनाने पर विशेष जोर’           राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में इंटरनल ऑडिट अनिवार्य रूप से कराने तथा इसके लिए इंटरनल कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं लीक-प्रूफ बनाने पर विशेष जोर देते हुए इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रकों की आधिकारिक नियुक्ति सुनिश्चित करने कहा। उन्होंने आयुष विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित निजी मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि इन संस्थानों का संचालन निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुरूप सुनिश्चित हो।          बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव कृषि विभाग डॉ. सिद्धार्थ कोमल परदेशी, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव  अविनाश चंपावत, चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त  रितेश अग्रवाल, सहित संबंधित अधिकारी एवं प्रदेश के विभिन्न शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलसचिव उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल डेका का बड़ा संदेश, कहा- रोबोटिक्स और AI बनें मानव सेवा का माध्यम

रायपुर. राज्यपाल रमेन डेका ने आज भारत सेवाश्रम संघ द्वारा संचालित प्रणवानंद अकादमी में रोबोटिक्स लैबोरेट्री का लोकार्पण किया। इस लैबोरेट्री की स्थापना के लिए राज्यपाल द्वारा अपने स्वेछानुदान मद से राशि प्रदान की गई है । इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स जैसे तकनीक हमारे जीवन को आसान बनाते है। लेकिन आधुनिक तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग मानव जीवन के कल्याण और समाज के विकास के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान केवल  उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों से नहीं होती, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों से होती है जो ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दें।  प्रणवानंद अकादमी शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण को भी समान महत्व देती है यह प्रसन्नता का विषय है। राज्यपाल ने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोबोटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकें विश्व को नई दिशा दे रही हैं। ऐसे समय में विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों को भी आत्मसात करना चाहिए। कोई भी नया आविष्कार या नवाचार मानवता के हित में होना चाहिए। मानव पर खुद का नियंत्रण होना चाहिए न कि कोई तकनीक उसे नियंत्रित करे। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों का संदेश देते हुए कहा कि जीवन में संतोष का विशेष महत्व है। हमें जो प्राप्त है, उसमें प्रसन्न रहना सीखना चाहिए तथा कठिन परिश्रम, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में उतार-चढ़ाव एवं चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन गिरने के बाद फिर से उठना और आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है। उन्होंने कहा कि समाज ने हमें क्या दिया, यह सोचने के बजाय हमें यह विचार करना चाहिए कि हम समाज को क्या दे सकते हैं। समाज के प्रति सेवा, सहयोग, संवेदनशीलता और पड़ोसियों के प्रति आत्मीयता की भावना हमारे जीवन में आनंद लाता है। कार्यक्रम में अकादमी के अध्यक्ष स्वामी शिवरूपानंद ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्राचार्य नीति यदुवंशी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्थान के पदाधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

सर्वोदय शांति पदयात्रा के संतों ने राज्यपाल डेका से की मुलाकात

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में जैन मुनि राष्ट्र संत डॉ. मणिभद्र महाराज के नेतृत्व में संचालित सर्वाेदय शांति पदयात्रा से जुड़े संतों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ आगमन पर संतों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि संत समाज के विचार और जीवन मूल्य समाज में शांति, सद्भाव, नैतिकता तथा मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सर्वाेदय शांति पदयात्रा को सामाजिक समरसता, अहिंसा और विश्व बंधुत्व का प्रेरक अभियान बताते हुए इसकी सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि यह पदयात्रा नेपाल से प्रारंभ होकर लगभग 1,600 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए छत्तीसगढ़ पहुंची है। यात्रा का उद्देश्य शांति, सद्भाव, अहिंसा और मानवीय मूल्यों का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। इस अवसर पर श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रमण संघ, रायपुर के अध्यक्ष अशोक पटवा, कार्यकारिणी अध्यक्ष विनय पटवा सहित संघ के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

राज्यपाल डेका से सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ की स्टैंडिंग काउंसिल सुजैन ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल डेका से सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ की स्टैंडिंग काउंसिल सुजैन ने की सौजन्य भेंट रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ शासन की स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में कार्यरत युवा अधिवक्ता सुसुगंधा जैन ने सौजन्य भेंट की।             सुसुगंधा जैन एनसीईआरटी अंतर्गत राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान में बाहरी पॉश प्रशिक्षक के रूप में भी कार्यरत है तथा वे वर्ष 2025 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में भारत की ओर से जज की भूमिका निभाने वाली पहली भारतीय बनी थी। राज्यपाल ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी। भेंट के दौरान उनकी माता श्रीमती इंदिरा जैन भी उपस्थित थी।

गजराज बांध से शहर को मिलेगा पेयजल? राज्यपाल डेका ने शुरू की बड़ी पहल

राज्यपाल डेका ने गजराज बांध को शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में की पहल रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने कमल विहार रायपुर स्थित लगभग 230 एकड़ क्षेत्र में फैले गजराज बांध को रायपुर शहर की पेयजल आवश्यकता की पूर्ति के लिए एक विशाल जलाशय के रूप में विकसित करने की पहल की है। राज्यपाल ने आज लोकभवन में नगर निगम रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे और अतिरिक्त कमिश्नर विनोद पाण्डेय के साथ इस संबंध में विशेष चर्चा की।           राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में सिंचाई कार्याे में उपयोग नहीं हो रहे गजराज बांध की आवश्यक मरम्मत कर इसे रायपुर शहर की लाइफलाइन बनाया जा सकता है। इस बांध को एक पेयजल भंड़ार के रूप में विकसित करने से शहर को शुद्ध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। राज्यपाल ने महापौर से संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय कर इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए दिशा निर्देश दिए है।

AI मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक है: डेका; समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का शुभारंभ

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायक है, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं-डेका समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया राज्यपाल ने रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका आज डॉ सी.वी. रमन  विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर डेका ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ तकनीक भी निरंतर विकसित हो रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए। एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित में करें            राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, अर्थव्यवस्था और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए।  उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित के कार्यों में करें। अपने संबोधन में उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डिजिटल एडिक्शन न हो यह कोशिश करनी चाहिए। आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग          राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी, उसी प्रकार आधुनिक विज्ञान और तकनीक भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक प्रगति के साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना आज की आवश्यकता है।  भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता          छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि, वन उत्पाद, उद्योग और सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।  सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का कर रही है प्रयास           कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है इस तरह तकनीकी क्षेत्र में भी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज कंपनियों को जिस तरह के कोर्स की आवश्यकता है उसी के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में कोर्स संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है जिससे  युवा जाब मांगने वाले नहीं बल्कि  देने वाले बने। राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी            कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मअजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है। कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन            इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन एवं कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. ज्योति बाला गुप्ता  और आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने किया।  इस कॉन्क्लेव में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, उद्योग एवं बैंक के अधिकारी, आईसेक्ट इंडिया गु्रप के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी उपस्थित रहे।

सिनेमा बदल सकता है समाज की सोच, राज्यपाल डेका ने फिल्मों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका रायपुर,  फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल रमेन डेका ने आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।           राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।           राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से  देश और दुनिया  को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।           राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।            राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों  से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।           कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुमोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।