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ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: अब अमेरिका में रहकर नहीं मिलेगा ग्रीन कार्ड

नई दिल्ली आज के समय में ज्यादातर लोग भारत छोड़ विदेश का रुख कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोग अमेरिका जा रहे हैं या जाना चाहते हैं। लेकिन अब अमेरिका की ट्रंप सरकार (Trump Government) ने ग्रीन कार्ड को लेकर नई नीति की घोषणा की है। पहले लोग अमेरिका में अस्थाई वीजा पर रहते हुए ही ग्रीन कार्ड मिलने तक वहीं रुक सकते थे, लेकिन अब ऐसा करना नहीं होगा। ग्रीन कार्ड के लिए छोड़ना होगा अमेरिका अब तक लोग अमेरिका में रहते हुए ही “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” प्रक्रिया के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे लेकिन अब से ये मुमकिन नहीं होगा। यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS ) ने जानकारी दी कि जो लोग अपने स्टेटस में बदलाव चाहते हैं, उन्हें पहले अपने गृह देश वापिस लौटना होगा फिर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलर प्रोसेसिंग के जरिए ही आवेदन करना होगा। ये प्रक्रिया पहले से अधिक जटिल हो गई है। 12 लाख भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में इमिग्रेशन एडवोकेट अजय भुटोरिया ने PTI को बताया कि नई ग्रीन कार्ड नीति भारतीयों के लिए झटका है। उन्होंने कहा, कि "कानून का पालन करने वाले 12 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी अब मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के नए नियम के तहत ग्रीन कार्ड आवेदकों को अमेरिका छोड़कर इमिग्रेंट वीजा पर दोबारा एंट्री करना जरूरी हो गया है।" उन्होंने कहा, "पिछले दो सालों में पढ़ाई के लिए अमेरिका आने वाले छात्रों की संख्या में 35 से 40 फीसदी की कमी देखी गई है। पिछले दिसंबर से जो लोग वीजा स्टैंपिंग के लिए भारत गए वे अभी भी अटके हुए हैं। उन्हें जो डेट मिली है वो अगस्त, अक्टूबर तक की मिली है।" क्या होता है ग्रीन कार्ड? ग्रीन कार्ड को आधिकारिक तौर पर स्थायी निवासी कार्ड (Permanent Resident Card) कहा जाता है। जो किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार देता है। ग्रीन कार्ड धारक अमेरिका में कहीं भी रह सकता है। ये कार्ड लोगों को ज्यादातर कंपनियों में नौकरी करने, पढ़ाई करने और नियमों के तहत अमेरिका से बाहर आने-जाने का अधिकार देता है। इस कार्ड के मिलने के बाद वह व्यक्ति अमेरिकी नागरिकता के लिए भी अप्लाई कर सकता है।  

30 साल बाद अमेरिका में पकड़ाई पंजाबी महिला, ग्रीन कार्ड इंटरव्यू में हुई गिरफ्तारी

जालंधर  अमेरिका में भारतीय मूल की 60 वर्षीय महिला को उनके ग्रीन कार्ड इंटरव्यू के आखिरी चरण के दौरान हिरासत में ले लिया गया है। गिरफ्तार महिला पंजाब की रहने वाली है और पिछले 30 साल से अमेरिका में रह रही थी। यह कार्रवाई अमेरिका के इमिग्रेशन अधिकारियों की ओर से की गई है।  बबलजीत कौर उर्फ बबली साल 1994 से अमेरिका में रह रही हैं और उन्हें उनके लंबित ग्रीन कार्ड आवेदन के लिए बायोमेट्रिक स्कैन अपॉइंटमेंट के दौरान फेडरल एजेंटों ने गिरफ्तार किया। इससे पंजाबी समुदाय में रोष है।  बबली की बेटी ज्योति ने बताया कि एक दिसंबर को उनकी मां अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट के ऑफिस के फ्रंट डेस्क पर थीं, इसी दौरान कई फेडरल एजेंट्स वहां पहुंचे। इसके बाद जिस कमरे में फेडरल एजेंट्स गए, उसी कमरे में कौर को भी बुलाया गया और उन्हें बताया गया कि उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है। कई घंटों तक कौर के परिवार को भी यह जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें कहां लेकर जाया गया है। उन्हें इस बात का पता बाद में चला कि कौर को रातों-रात एडेलांटो में ट्रांसफर कर दिया गया, जो पहले एक फेडरेल जेल थी और अब इसे आईसीआईसीआई डिटेंशन सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और फिलहाल बबलजीत कौर को यहीं हिरासत में रखा गया है। बबलजीत कौर का परिवार अमेरिका आने के बाद सबसे पहले लगूना बीच के पास रहता था। बाद में वे काम के सिलसिले में बेलमोंट शोर इलाके के पास लॉन्ग बीच पर रहने लगे। दंपती के तीन बच्चे हैं, जिसमें एक 34 वर्षीय बेटी ज्योति है, जिसके पास जीएसवीएम के तहत कानूनी दर्जा है, जबकि उनके बड़े बेटे और बेटी दोनों अमेरिकी नागरिक हैं। पिछले 2 दशकों से ज्यादा समय से कौर अपने पति के साथ बेलमोंट शोर की सेकंड स्ट्रीट पर नटराज क्यूजीन ऑफ इंडिया एंड नेपाल के नाम से एक रेस्टोरेंट चलाती है।