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सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का मिशन, यूपी में शुरू होगा बड़ा वृक्षारोपण अभियान

 लखनऊ प्रदेश में इस बार पौधारोपण सिर्फ हरियाली बढ़ाने का अभियान नहीं होगा, बल्कि सामाजिक समरसता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन का व्यापक मिशन भी बनेगा। “नवीन विशिष्ट वनों की स्थापना” थीम के तहत सरकार ने अलग-अलग उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के वनों के विकास की योजना तैयार की है। महाअभियान कई अभिनव माडलों के जरिए प्रदेश के पर्यावरणीय परिदृश्य को नई दिशा देने का प्रयास करेगा। पिछले वर्षों की भांति इस मानसून सीजन में भी एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने की तैयारी है। अभियान के तहत महर्षि चरक ''औषधि वन'', ''समरस वन'', ''समृद्धि वन'', ''कृषि वन'', ''ऊर्जा वन'', ''कपि '''' और पौराणिक वनों के पुनर्स्थापन जैसी योजनाएं तैयार की हैं। इसके साथ ही विशेष तिथियों में पौधारोपण कार्यक्रमों की शृंखला भी तय की गई है, जिससे आमजन की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। ‘विविधता में एकता’ की थीम पर आधारित समरस वन में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी पौधारोपण में होगी। ब्लाक स्तर तक पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया जाएगा। समृद्धि वन में किसानों की आय बढ़ाने वाले पौधे लगाए जाएंगे। कृषि भूमि पर विकसित किए जाने वाले समृद्धि वन से किसानों को कार्बन क्रेडिट और अतिरिक्त आय का लाभ मिलेगा। बंदरों के लिए आबादी के बाहर फलदार पौधे लगाकर ''कपि वन'' विकसित किए जाएंगे। इसके जरिए शहरों में इनके प्रवेश को रोका जाएगा। ऊर्जा वन में ऐसी प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे जिनसे ग्रामीणों को ईंधन के लिए लकड़ी मिल सके। महर्षि चरक औषधीय वन प्रत्येक जिले में औषधीय पौधों के संरक्षण और प्रचार के लिए न्यूनतम एक हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। अभियान का एक प्रमुख हिस्सा ‘मिशन छाया’ भी है, जिसके तहत गर्मी से राहत देने के लिए सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थलों पर छायादार पौधे लगाए जाएंगे। एक अध्ययन में पाया गया कि पेड़ों की छाया में तापमान में लगभग आठ डिग्री सेल्सियस तक कमी दर्ज की गई। इस मॉडल को प्रदेशभर में लागू करने की तैयारी है। प्रदेश के 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे सहित अन्य मार्गों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। मथुरा में 36 पौराणिक वनों के पुनर्जीवन के लिए 487 हेक्टेयर क्षेत्र में इको-रेस्टोरेशन कार्य किया जा रहा है। इन वनों में इस बार पारंपरिक और धार्मिक महत्व वाले पौधों का रोपण किया जाएगा। विशेष अवसरों पर भी होगा पौधारोपण 15 अगस्त: वंदे मातरम् वाटिका-‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर प्रत्येक जिले में कम से कम एक वाटिका विकसित की जाएगी, जिसमें 150 पौधे लगाए जाएंगे। इसमें ट्रस्ट, सामाजिक संगठनों और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। 28 अगस्त: भाई-बहन पौधारोपण-रक्षाबंधन के दिन इसमें भाई-बहन मिलकर पौधे लगाएंगे। 5 सितंबर: ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान-शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश में एक पौधा गुरु के नाम पर लगाया जाएगा।  

वन विभाग की नई योजना, मानसून से पहले ही शुरू होगा पौधरोपण अभियान

 रांची  झारखंड में वन क्षेत्र के अलावा औषधीय पार्क, सामुदायिक स्थल पर लगाने के लिए तीन लाख पौधे तैयार हैं। वन विभाग आमतौर पर जुलाई से पौधरोपण प्रारंभ करता है, लेकिन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से राज्य में बारिश हो रही है। विभाग की नर्सरी में तैयार पौधों को औषधीय पार्क, स्कूल, आवासीय सामुदायिक भूखंड पर लगाया जाएगा। ये पौधे अनुदानित दर पर लोगों को दिए जाएंगे। इसके अलावा वन भूमि पर इस वर्ष दस लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना है। कृषि विश्वविद्यालय स्थित वानिकी संकाय के विशेषज्ञ ज्ञानरंजन पांडेय ने बताया कि लोहरदगा से लेकर डाल्टेनगंज तक पिछले दस सालों में लाखों आंवला के पेड़ लगाए गए हैं आयुर्वेद से जुड़ी कंपनियों ने झारखंड में उत्पादित आंवला को उच्च गुणवत्ता वाला माना है। इस वर्ष आंवला और जामुन के पौधे पार्कों और सामुदायिक स्थलों पर लगाए जाएंगे। राज्य में छह औषधीय पार्क बनाकर उनमें वेलनेस उत्पाद में प्रयुक्त होने वाले फलदार पौधे लगाए जाएंगे। पांच साल पहले लगे पौधों की उत्तरजीविता बढ़ी राज्य के वन क्षेत्र में पांच साल पहले जो पौधे लगाए गए थे, उनमें से 80 प्रतिशत अब वृक्ष का स्वरूप ले रहे हैं। केंद्रीय वन उत्पादकता संस्थान ने राज्य में पौधों के संरक्षण की उत्तम श्रेणी की रिपोर्ट दी है। केंद्रीय संस्थान पांच वर्ष में पौधों की वृद्धि, उनके आसपास की हरियाली और सुरक्षा का आकलन कर रिपोर्ट देती है। पिछले दो सालों से हुई बारिश ने भी पौधों की वृद्धि में योगदान दिया है। 130 एकड़ नई भूमि पौधरोपण के लिए चिह्नित वन एवं पर्यावरण विभाग ने 130 एकड़ नई वन भूमि में मानसून के दौरान पौधरोपण की योजना बनाई है। इनमें सामाजिक वानिकी और क्षतिपूर्ति वानिकी योजना के तहत पौधे लगाए जाएंगे। विभाग ने इस वर्ष अतिक्रमण मुक्त की गई भूमि पर भी पौधरोपण की तैयारी की है।