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ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो को मिली रफ्तार, सेक्टर-9 से DLF साइबर सिटी तक जल्द जारी होगा टेंडर

पंचकूला ओल्ड गुरुग्राम के लिए मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण की टेंडर प्रकिया को नायब सरकार ने अनुमति दे दी है। उम्मीद है कि दस दिनों के अंदर गुरुग्राम मेट्रो रेल कारपोरेशन (जीएमआरएल) टेंडर से जुड़ी सभी प्रकिया पूरी करने के बाद टेंडर जारी कर देगा। दूसरे चरण में मेट्रो के लिए सेक्टर नौ से डीएलएफ साइबर सिटी तक के लिए मेट्रो लाइन बिछाई जानी है। ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो के तहत 30.5 किलोमीटर लंबा मेट्रो मार्ग तैयार होना है। दोनों चरण में 28 मेट्रो स्टेशन बनने हैं। पहले चरण के तहत मिलेनियम सिटी सेंटर, सेक्टर-45, यूनिटेक साइबर पार्क, सेक्टर-37, सेक्टर-101, सेक्टर-नौ समेत अन्य मेट्रो स्टेशन का निर्माण होना। दूसरे चरण में 15.3 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन बिछाने में करीब 1662 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। कुछ इलाकों में जगह कम होने तथा ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए डबल डेकर लाइन होगी। एलिवेटेड रोड बनेगी जिस पर वाहन चलेंगे, इसके ऊपर से मेट्रो ट्रैक बनाया जाएगा जिस पर मेट्रो चलेगी। यह व्यवस्था पालम विहार और कृष्णा चौक सुशील एमा मार्ग, ओल्ड दिल्ली रोड तथा कुछ अन्य इलाकों में होगी। पहले और दूसरे चरण को मिलाकर ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के तहत कुल 28 मेट्रो स्टेशन बनाए जाने हैं। दूसरे चरण में यहां बनेंगे स्टेशन सेकेंड फेज में सेक्टर-7, सेक्टर-4, सेक्टर-5, रेलवे स्टेशन, अशोक विहार, सेक्टर-3, बजघेड़ा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर-23ए, सेक्टर-22, सेक्टर-21, उद्योग विहार फेज-एक और डीएलएफ साइबर सिटी में मेट्रो स्टेशन बनेंगे।  

सेक्टर-56 से पचगांव तक दौड़ेगी मेट्रो, 35.25 किमी रूट पर बनेंगे 28 स्टेशन

गुरुग्राम  गुरुग्राम में प्रस्तावित सेक्टर-56 से पचगांव मेट्रो कॉरिडोर को तेज रफ्तार और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ विकसित करने की तैयारी है। 35.25 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और इसमें 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। कॉरिडोर को रैपिड मेट्रो, आरआरटीएस और हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर (एचओआरसी) समेत भविष्य की रेल आधारित प्रणालियों से बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को प्रस्तावित कॉरिडोर की समीक्षा की और संशोधित डीपीआर को तय समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। परियोजना को अगले 15 से 20 वर्षों की शहरीकरण, आबादी वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। प्रस्तावित कॉरिडोर मध्यम क्षमता वाली मेट्रो के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है। मेट्रो में सीबीटीसी सिग्नलिंग प्रणाली प्रस्तावित है। तेज डिजाइन स्पीड और आधुनिक सिग्नलिंग के साथ कॉरिडोर को गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क मजबूत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे गुरुग्राम-मानेसर-पचगांव क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर करने और सड़क यातायात कम करने की योजना है। RRTS और रैपिड मेट्रो से जुड़ेगा प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर को मौजूदा और प्रस्तावित रेल आधारित परिवहन नेटवर्क के साथ एकीकृत करने की योजना है। इसमें रैपिड मेट्रो और आरआरटीएस के साथ हरियाणा आर्बिटल रेल कॉरिडोर को भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा भविष्य में विकसित होने वाली रेल आधारित प्रणालियों के साथ भी बेहतर एकीकरण को ध्यान में रखा जाएगा। इससे सेक्टर-56 से पचगांव तक तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को व्यापक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। 35.25 किमी रूट पर 28 स्टेशन सेक्टर-56 से शुरू होने वाला कॉरिडोर सेक्टर-61, 65, 66, 50 और 49 से होते हुए खेड़कीदौला पहुंचेगा। इसके बाद ग्लोबल सिटी और न्यू गुरुग्राम के सेक्टर-84, 86 और 90 से होते हुए आईएमटी मानेसर और पचगांव तक जाएगा। पूरे 35.25 किलोमीटर लंबे रूट पर 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं। कॉरिडोर के जरिये प्रमुख आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों को सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। अगले 15 साल की जरूरतों पर जोर मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने परियोजना तैयार करते समय अगले 15 से 20 वर्षों की शहरीकरण प्रक्रिया, आबादी वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि डीपीआर के स्तर पर ही सभी योजना संबंधी मुद्दों का समाधान किया जाए, ताकि आगे चलकर परियोजना में देरी न हो। संशोधित डीपीआर को तय समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के एसीएस अनुराग अग्रवाल, निदेशक जे गणेशन, शहरी स्थानीय निकाय आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, एचएसआईआईडीसी के एमडी विनय प्रताप सिंह, एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक एवं एचएमआरटीसी के एमडी मुकुल कुमार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।  

गुरुग्राम मेट्रो विस्तार में बड़ा बदलाव, 3 स्टेशनों पर स्काईवॉक, बस बे और पिक-ड्रॉप की सुविधा

चंडीगढ़  गुरुग्राम में मेट्रो का विस्तार किया जा रहा है। नए रूट के तीन स्टेशन को मल्टी मॉडल बनाने की तैयारी कर ली गई है। सेक्टर 45, यूनीटेक साइबर पार्क तथा सेक्टर 72-ए मेट्रो स्टेशनों को मल्टी मॉडल बनाने के लिए चयन किया गया है। इन स्टेशनों के आसपास बहुमंजिला इमारतें हैं, जिनमें खेल, कारपोरेट कार्यालय तथा अन्य संस्थानों में हजारों की संख्या में लोग काम करते हैं। यहां पर स्काईवाक बनाए जाने से लोग सीधे कार्यालय से स्टेशन आ जा सकेंगे। इन स्टेशनों पर बस बे, आटो पिक एंड ड्राप पाइंट, फुटपाथ की भी सुविधा होगी। जिससे सड़क पर जाम की स्थिति नहीं होगी। इस सिलसिले में दो दिन पहले जीएमडीए के अतिरिक्त सीईओ विश्वजीत चौधरी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी, जिसमें गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) की ओर से बनाई गई योजना पर चर्चा हुई थी। जीएमडीए नगर निगम तथा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से आपत्ति तथा सुझाव लेकर योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक में गुरुग्राम नगर निगम के योजनाकार की ओर से सुझाव दिया गया था कि सेक्टर 45, यूनीटेक साइबर पार्क को मेट्रो स्टेशन से स्काईवाक से जोड़ा जा सकता है। साइबर पार्क में हजारों की संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। स्काईवाक बनने से लोगों को सड़क पर नहीं आना पड़ेगा और वह साइबर पार्क से सीधे स्टेशन पहुंच आ सकेंगे, जिससे पीक आवर्स में सड़क पर ट्रैफिक भी कम होगा और सुविधा मिलने से लोग निजी वाहन का उपयोग भी कम करेंगे। इसी तरह सेक्टर 72-ए मेट्रो स्टेशन के पास सेक्टर 33 और 34 में गुड़गांव टेक्नालॉजी पार्क लिमिटेड है। इसके साथ की इंडस्ट्री कारीडोर है। सेक्टर 34 में नगर निगम और जीएमडीए के कार्यालय तथा अन्य संस्थान हैं। स्काईवाक बनने से यहां पर काम करने वाले हजारों लोगों को लाभ मिलेगा।

पेड़ों की कटाई पर हरियाणा कोर्ट नाराज, गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट पर उठाए बड़े सवाल

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई स्वीकार नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी 'यदि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन ही नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी आपकी मदद नहीं करेगा।' दरअसल गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) की ओर से मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए 489 और पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई थी। कंपनी ने अदालत को बताया कि इससे पहले करीब 1700 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जा चुकी है और बदले में 7300 पौधे लगाए गए हैं। जीएमआरएल की ओर से कहा गया कि यह लगभग 28 किलोमीटर लंबी मेट्रो विस्तार परियोजना है, जिसकी लागत 5000 करोड़ रुपये से बढ़कर 7000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। परियोजना के लिए वर्ल्ड बैंक से वित्तीय सहायता पर बातचीत चल रही है और यदि समय पर कार्य नहीं हुआ तो यह सहायता प्रभावित हो सकती है। कंपनी ने दलील दी कि गुरुग्राम में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को देखते हुए यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। हालांकि अदालत ने पूछा कि जब मेट्रो का ट्रैक एलिवेटेड है और पिलर सीमित जगह लेते हैं तो फिर इतने अधिक पेड़ काटने की जरूरत क्यों है। अदालत ने निर्देश दिया कि न्यूनतम संख्या में ही पेड़ों की कटाई की जाए। साथ ही संबंधित डीएफओ को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए कि 489 प्रस्तावित पेड़ों में से जितने अधिक संभव हों, उन्हें बचाया जाए ताकि क्षेत्र में हरित आवरण बना रहे। जीएमआरएल की ओर से कहा गया कि मेट्रो के एलिवेटेड स्टेशन, पिलर और डिपो निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई जरूरी है। कंपनी ने दावा किया कि वह “एक के बदले दस” के अनुपात में पौधारोपण कर रही है और अब तक 7300 पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनकी “100 प्रतिशत सर्वाइवल रेट” है। यह पौधा रोपण केएमपी हाईवे के पास लगभग 21 किलोमीटर दूर किया गया है। इस पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि अदालत पहले ही कह चुकी है कि प्रतिपूरक पौधरोपण यथासंभव पांच किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल पौधे लगाने का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि शहर को “कंक्रीट जंगल” बनने से बचाया जाए। हालांकि अदालत ने परियोजना के राष्ट्रीय महत्व और सार्वजनिक हित को देखते हुए सशर्त राहत देते हुए 489 पेड़ों की कटाई पर लगी रोक में आंशिक ढील दे दी। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया कि न्यूनतम संख्या में ही पेड़ काटे जाएं और जिन पेड़ों को बचाया जा सकता है, उन्हें हर हाल में संरक्षित किया जाए। अदालत ने जीएमआरएल को पहले किए गए वनीकरण कार्य की मासिक सर्वाइवल रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट में कोई कमी पाई गई या समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई तो मामले को स्वत सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाएगी।