samacharsecretary.com

23 मोबाइल, 37 सिम, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप और छह पासबुक सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त; प्रतिमाह 7-8 करोड़ रुपए के लेन-देन का अनुमान

भोपाल  ग्वालियर पुलिस ने साइबर अपराध, ऑनलाइन सट्टा, ऑनलाइन गेम्बलिंग एवं बैंक खातों की खरीद-फरोख्त से जुड़े संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विंडसर हिल्स स्थित किराए के डुप्लेक्स से संचालित इस नेटवर्क से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप, छह पासबुक सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में नेटवर्क के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 7 से 8 करोड़ रुपए तथा वार्षिक स्तर पर करीब 100 करोड़ रुपए के वित्तीय लेन-देन का अनुमान सामने आया है। आरोपियों के दुबई एवं श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की जानकारी भी मिली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह के निर्देश पर साइबर अपराधों एवं साइबर फ्रॉड में बैंक खातों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई के क्रम में 12 सितम्बर को साइबर क्राइम विंग को विंडसर हिल्स स्थित एक डुप्लेक्स में ऑनलाइन सट्टा, बैंक खातों की खरीद-फरोख्त एवं ऑनलाइन गेम्बलिंग संचालित किए जाने की सूचना मिली। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए पांच व्यक्तियों को पकड़ा। पूछताछ एवं प्रारंभिक जांच में उनके उक्त गतिविधियों में संलिप्त होने की जानकारी सामने आई। आरोपियों के विरुद्ध क्राइम ब्रांच ग्वालियर में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है। ‘100 पैनल’ वेबसाइट से संचालित हो रहा था नेटवर्क प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ‘100 पैनल’ नामक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे का संचालन कर रहे थे। आरोपियों के मोबाइल फोन से बड़ी संख्या में बैंक खातों से संबंधित विवरण प्राप्त हुए हैं। संबंधित बैंकों से इन खातों की जानकारी प्राप्त कर यह पता लगाया जा रहा है कि इनका उपयोग साइबर ठगी सहित अन्य अपराधों में किस प्रकार किया गया। करोड़ों रुपए के वित्तीय लेन-देन की जांच प्रारंभिक जांच के अनुसार नेटवर्क में प्रतिमाह करीब 7 से 8 करोड़ रुपए का लेन-देन होने का अनुमान है। पुलिस द्वारा बैंक खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन, धनराशि के स्रोत, लाभार्थियों तथा पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच की जा रही है। दुबई और श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क की भी जांच पूछताछ में आरोपियों द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से दुबई एवं श्रीलंका से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में होने की जानकारी दी गई है। पुलिस जब्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डेटा का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। इससे नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, बैंक खातों एवं वित्तीय लेन-देन के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है। डुप्लेक्स मालिक की भूमिका की भी जांच जिस डुप्लेक्स में गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, उसे किराए पर देने वाले मकान मालिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि डुप्लेक्स में संचालित गतिविधियों की जानकारी मकान मालिक को थी अथवा नहीं। जब्त सामग्री आरोपियों से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप, छह पासबुक एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं। मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों एवं ऑनलाइन अवैध गतिविधियों के विरुद्ध निरंतर प्रभावी कार्रवाई कर रही है। पुलिस द्वारा ऐसे संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके वित्तीय एवं तकनीकी नेटवर्क को खंगाला जा रहा है, ताकि साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टा, गेम्बलिंग तथा बैंक खातों के दुरुपयोग में संलिप्त अन्य व्यक्तियों तक पहुंच बनाई जा सके। साथ ही नागरिकों से अपील है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम अथवा अन्य डिजिटल संसाधन किसी भी व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं और साइबर अपराध से संबंधित किसी भी घटना की तत्काल सूचना पुलिस को दें।  

ग्वालियर :खोए मोबाइल की उम्मीदें जगाईं पुलिस ने, 736 मोबाइल 1.82 करोड़ की कीमत में लौटाए

ग्वालियर  साल के आखिरी महीने में ग्वालियर पुलिस ने 736 ऐसे लोगों को ऐसा तोहफा दिया, जो हमेशा इस वर्ष की याद दिलाएगा। इन लोगों के गुम हुए मोबाइल पुलिस ने खोज निकाले। इसमें नई तकनीक ने भी पुलिस का साथ दिया, जिससे इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल मिल सके। जिनके मोबाइल गुम हुए थे, उन्होंने तो वापस मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। लेकिन जब यह मोबाइल दोबारा इनके हाथ में पहुंचा तो मायूस चेहरों पर मुस्कान लौट आई। किसी ने किस्तों पर मोबाइल खरीदा था तो किसी के पिता, भाई, पति ने उपहार में मोबाइल दिया था। किसी के मोबाइल में महत्वपूर्ण डेटा था, जो सुरक्षित मिला। पुलिस का दावा है कि बरामद हुए 736 मोबाइलों की कीमत 1.82 करोड़ रुपये है। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि एएसपी अनु बेनीवाल के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच के डीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार, साइबर सेल प्रभारी रजनी सिंह रघुवंशी और इनकी टीम ने कड़ी मेहनत की। देश के अलग-अलग राज्यों तक यह मोबाइल पहुंच गए थे, लेकिन जैसे ही मोबाइल चालू हुए तो पुलिस ने संपर्क किया। इसके बाद यह मोबाइल पुलिस तक पहुंचे। रविवार को इन लोगों को पुलिस कंट्रोल रूम में बुलाया गया और मोबाइल लौटाए गए। एसएसपी का कहना है कि मोबाइल ढूंढने में अच्छा काम करने वाली टीम को पुरस्कृत किया जाएगा। इन कंपनियों के थे मोबाइल एपल, सैमसंग, ओप्पो, वीवो, रेड-मी, रियलमी, पोको, लावा, गूगल, मोटोरोला, वनप्लस सहित अन्य कंपनियों के मोबाइल शामिल हैं। संचार साथी एप अगर कोई मोबाइल खो जाए तो अपने घर के किसी अन्य सदस्य के मोबाइल में संचार साथी एप डाउनलोड करें या संचार साथी पोर्टल के जरिये मोबाइल गुम होने की रिपोर्ट कर सकते हैं। सीईआईआर पोर्टल दूरसंचार विभाग के ही सेंट्रल इलेक्ट्रानिक आइडेंटिटी रजिस्टर पोर्टल पर जाकर रिपोर्ट करें, लेकिन इसमें पुलिस रिपोर्ट की अनिवार्यता है, जबकि पुलिस थानों में शिकायत लेने से ही इंकार कर दिया जाता है। यह जरूर संभाल कर रखें     मोबाइल का बिल।     मोबाइल के आईएमईआई नंबर। ये बोले लोग : किस्त पर लिया था मोबाइल     मेरे पति प्लम्बर का काम करते हैं। किस्त पर दो माह पहले ही मोबाइल लिया था। यह मोबाइल गिर गया था। आज वापस मिल गया, हम तो उम्मीद खो चुके थे, यह मोबाइल वापस मिलेगा। – लता कुशवाह। मोबाइल गिर गया था     मैं दिव्यांग हूं। सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर मोबाइल खरीदा था। यह मोबाइल गिर गया। अब वापस मिल गया। पुलिस को धन्यवाद देता हूं। – विनोद सिकरवार। मोबाइल तो मिला ही, डेटा भी मिल गया     मैं जीआरएमसी से एमबीबीएस कर रही हूं। इंदौर से ग्वालियर आ रही थी। तभी बस में मोबाइल गिर गया था। मोबाइल में महत्वपूर्ण डेटा था। मोबाइल तो मिला ही, डेटा भी मिल गया। – पायल सोलंकी।