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कठिन समय में काम आएंगी चाणक्य की ये 4 नीतियां, जीवन में लौटेगी समृद्धि और सौभाग्य

भारत के स्वर्णिम इतिहास में कई बड़े-बड़े विद्वान हुए जिनकी कही गई बातें आज भी हमारे जीवन को सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। इन्हीं में से एक थे महान दार्शनिक और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य।जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जिसके बारे में आचार्य को ज्ञान नहीं था। आज हम आचार्य के बताए कुछ कुछ जीवन सूत्रों के बारे में ही जानेंगे। जैसा कि हम सभी को अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ता हैं। कई बार व्यक्ति के जीवन में इतना बुरा समय भी आ जाता है कि उस दौरान सब कुछ एकदम खत्म सा हो गया लगता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि जब व्यक्ति के सामने ऐसा बुरा समय आए तो उसे क्या करना चाहिए कि वो बुरा समय जल्द की अच्छे समय में तब्दील हो जाए। आइए जानते हैं- कड़ी मेहनत का ना छोड़ें साथ आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि व्यक्ति के जीवन में बहुत ही बुरा समय चल रहा है तो उसे हताश या निराश हो कर बैठने के बजाए कड़ी मेहनत का सहारा लेना चाहिए। यदि व्यक्ति अपने मजबूत इरादों के साथ कड़ी मेहनत पर अटल रहता है, तो बुरा समय भी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता। वहीं अगर वह निराश हो कर मेहनत से किनारा कर लेता है तो ये बुरा समय उसे कहीं का नहीं छोड़ता। जीवन में रखें लक्ष्य आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति के जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना बेहद जरूरी है। यदि जीवन का लक्ष्य तय है तो मुश्किल से मुश्किल समय भी आसानी से कट जाता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति को अपना लक्ष्य ही नहीं पता तो वो कठिन परिस्थितियों के आते ही भटकाव की स्थिति में चला जाता है, जहां से निकालना उसके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। आचार्य के अनुसार यदि कठिन परिस्थितियों के चलते आपका लक्ष्य पाना असंभव लग रहा है, तो उसे छोड़ने के बजाय उसे पाने के तरीके में बदलाव करें और निरंतर प्रयास में लगे रहें। करते रहें नए और बेहतर अवसरों की तलाश केवल प्रतिभावान होना ही काफी नहीं है बल्कि सही समय पर सही अवसर मिलना भी बेहद जरूरी है। आचार्य चाणक्य की नीति के अनुसार बुरा वक्त होते हुए भी नए और बेहतर अवसरों की तलाश में लगे रहना चाहिए। आचार्य कहते हैं कि आलसी लोग हमेशा सही अवसर ना मिलने की शिकायत में लगे रहते हैं। वहीं मेहनती इंसान स्वयं सही अवसर की तलाश करता है और अपना अच्छा समय खुद लाता है। आचार्य के अनुसार परेशानी को ले कर बैठने के बजाए उसके समाधान को ले कर चिंतित होना ज्यादा बेहतर है। चीजों को ना समझें असंभव आचार्य चाणक्य के अनुसार संसार की कोई भी चीज असंभव नहीं है। अगर आप किसी ऐसी स्थिति में फंसे हुए हैं जहां से निकालना आपको असंभव लग रहा है, तो सबसे पहले खुद को समझाएं कि असंभव जैसा कुछ भी नहीं है। आचार्य के मुताबिक सही दिशा में लगातार कठिन परिश्रम करते रहने से आप हर स्थिति को अपने अनुकूल मोड़ सकते हैं।  

इत्ती सी खुशी से जुड़ाव महसूस करेंगे दर्शक : राजेश मापुस्कर

मुंबई, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार राजेश मापुस्कर का कहना है कि दर्शक सोनी सब के शो इत्ती सी खुशी से जुड़ाव महसूस करेंगे। सोनी सब का हाल ही में लॉन्च हुआ शो इत्ती सी खुशी अपनी दिल को छू लेने वाली कहानी और सहज किरदारों के कारण दर्शकों का दिल जीत रहा है। सोमवार से शनिवार रात नौ बजे प्रसारित होने वाला यह शो अन्विता (सुम्बुल तौक़ीर खान) की कहानी बयां करता है। एक ऐसी युवा लड़की, जो जीवन की कठिनाइयों के बावजूद छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढ लेती है। इस शो की रचनात्मक दिशा-निर्देशन की कमान राजेश मापुस्कर ने संभाली है। राजेश मापुस्कर ने कहा, “टेलीविज़न में यह ताकत होती है कि वह हर घर तक पहुंचकर सार्थक प्रभाव छोड़ सकता है। जब सोनी सब और रोज़ प्रोडक्शन्स ने शेमलेस को भारतीय दर्शकों के लिए रूपांतरित करने का निर्णय लिया, तो चुनौती केवल कहानी दोहराने की नहीं थी, बल्कि इसे इस तरह गढ़ने की थी कि यह असली, जुड़ाव पैदा करने वाली और हमारी संस्कृति में जमी हुई लगे। बतौर क्रिएटिव मेंटर मेरी भूमिका टीम को इस दिशा में मार्गदर्शन देने की थी कि कहानी अपनी प्रामाणिकता कभी न खोए। हमने स्क्रिप्टिंग, कैरेक्टराइज़ेशन और कास्टिंग पर गहराई से काम किया ताकि हर पहलू भारतीय घरों की सादगी और गर्मजोशी को दर्शा सके। इत्ती सी खुशी का असली सार इसकी सादगी है।यह आम लोगों और उनकी असाधारण जिजीविषा की कहानी है, जिसे स्लाइस-ऑफ़-लाइफ़ शैली में प्रस्तुत किया गया है। मुझे सच्चे दिल से उम्मीद है कि दर्शक इन किरदारों में खुद को देख पाएँगे और शो की ईमानदारी व गर्मजोशी से जुड़ेंगे।”