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नया सिलेबस, गुरुग्राम के स्कूलों में अब एनसीईआरटी की किताबों से होगी पढ़ाई

गुरुग्राम  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (एचबीएसई) ने कक्षा दसवीं से बारहवीं तक कई विषयों की पाठ्यपुस्तकें बदल दी है। इस फैसले के बाद गुरुग्राम के सरकारी और निजी स्कूलों को निर्देश जारी दिए गए हैं कि वे नए सत्र से तय की गई किताबों को ही लागू करें। बोर्ड का मानना है कि इससे बच्चों को एक समान और बेहतर शिक्षा सामग्री मिल सकेगी और पढ़ाई का स्तर भी सुधरेगा। बोर्ड का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों को एक समान, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी पढ़ाई का स्तर बेहतर हो सके और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। बदलाव के तहत पंजाबी विषय में नई किताबें जोड़ी गई हैं, जबकि शारीरिक शिक्षा हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन और ललित कला फाइन आर्ट्स के लिए एनसीईआरटी की किताबों को लागू किया गया है। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ने का मौका मिलेगा। वहीं 11वीं और 12वीं के सैन्य विज्ञान विषय में भी बदलाव किया गया है। वर्जन पाठ्यपुस्तकों में बदलाव छात्रों को बेहतर और अपडेटेड कंटेंट उपलब्ध कराने के लिए किया गया है। इससे न केवल पढ़ाई का स्तर सुधरेगा, बल्कि सभी स्कूलों में एकरूपता भी आएगी।- इंदू बोकन, जिला शिक्षा अधिकारी  

Haryana Board Update: त्रि-भाषाई फॉर्मूले के साथ 9वीं-10वीं में 7 विषय होंगे जरूरी

भिवानी. हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने राज्य के स्कूलों में त्रि-भाषाई फॉर्मूला लागू करने के साथ ही कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए परीक्षा उत्तीर्णता यानी पास क्राइटेरिया के नए नियम तय कर दिए हैं। ये बदलाव कक्षा 9वीं में सत्र 2025-26 से और कक्षा 10वीं में सत्र 2026-27 से प्रभावी होंगे। अब सात विषय और बेस्ट सिक्स फार्मूला लागू बोर्ड के अनुसार, त्रि-भाषाई व्यवस्था लागू होने के बाद अब छात्रों को कुल सात विषय पढ़ने होंगे। पहले जहां बेस्ट फाइव फॉर्मूला लागू था, वहीं अब उसकी जगह बेस्ट सिक्स फॉर्मूला लागू होगा। विद्यार्थियों का परिणाम सात में से छह विषयों के आधार पर तैयार किया जाएगा। यह नया नियम नए बदलाव लेकर आ रहा है। संस्कृत, उर्दू, पंजाबी बनी अनिवार्य भाषा नई व्यवस्था के तहत छात्रों को संस्कृत, उर्दू या पंजाबी में से किसी एक भाषा का चयन करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पहले लागू नियम, जिसमें संस्कृत के जरिए हिन्दी विषय में फेल होने की स्थिति को समायोजित किया जाता था, अब समाप्त कर दिया गया है। आईटीआई छात्रों के लिए भी नियम सख्त बोर्ड ने आठवीं के आधार पर आईटीआई करने वाले छात्रों के लिए भी नियमों में बदलाव किया है। अब कक्षा 10वीं के समकक्ष प्रमाणपत्र के लिए छात्रों को दो के बजाय तीन भाषाएं हिन्दी, अंग्रेजी और एक वैकल्पिक भाषा संस्कृत, उर्दू, पंजाबी उत्तीर्ण करनी होगी। मुक्त विद्यालय में भी लागू होंगे नियम यह नया त्रि-भाषाई फार्मूला केवल नियमित छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हरियाणा मुक्त विद्यालय के विद्यार्थियों पर भी समान रूप से लागू किया जाएगा। कम्पार्टमेंट नियम में कोई बदलाव नहीं हालांकि विषयों की संख्या बढ़कर सात हो गई है, फिर भी कम्पार्टमेंट, पूरक परीक्षा से संबंधित नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एक या दो विषयों में असफल रहने वाले छात्र पहले की तरह कम्पार्टमेंट श्रेणी में ही रहेंगे। कौशल विषय का लाभ जारी रहेगा बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कौशल विषय का लाभ पहले की तरह जारी रहेगा। कोई छात्र गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में अनुत्तीर्ण होता है, तो कौशल विषय के अंक से उसे समायोजित किया जा सकेगा। इन नए नियमों के लागू होने से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे छात्रों को बहुभाषी शिक्षा का लाभ मिलेगा, वहीं परीक्षा प्रणाली भी अधिक व्यापक और संतुलित हो सकेगी। दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए भाषा नियम में रहेगी छूट दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए भाषा छूट नियम में बदलाव किया गया है। अब त्रि-भाषा प्रणाली के तहत केवल एक भाषा में छूट मिलेगी। छात्रों को हिन्दी, अंग्रेजी और एक अन्य भाषा में से दो का चयन करना होगा। सभी विद्यालयों को निर्देश लागू करने के आदेश दिए गए हैं। सुधार के लिए भी कारगर साबित होगा – त्रिभाषा फार्मूला के तहत यह बदलाव किया गया है। यह हरियाणा मुक्त विद्यालय के विद्यार्थियों पर भी लागू होगा। यह बदलाव परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए भी कारगर साबित होगा। – डॉ. पवन कुमार, चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड