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भीषण गर्मी से बचें, गुरदासपुर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को किया सतर्क

गुरदासपुर. जिले में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीट वेव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग गुरदासपुर ने एडवाइजरी जारी की है। सिविल सर्जन डॉ. महेश कुमार प्रभाकर ने लोगों से गर्मी के मौसम में विशेष सावधानी बरतने और शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब मैदानी इलाकों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तो उसे हीट वेव माना जाता है। अत्यधिक गर्मी शरीर के तापमान नियंत्रित करने वाले सिस्टम को प्रभावित करती है और कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इन लोगों को हीट स्ट्रोक का ज्यादा खतरा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नवजात शिशु, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, मजदूर, मोटापे से ग्रस्त लोग, मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति तथा दिल, किडनी, लिवर या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हीट स्ट्रोक के अधिक खतरे में रहते हैं। हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करें – सुबह और शाम के समय ही बाहर की गतिविधियां करें। हर आधे घंटे में पानी पीते रहें, चाहे प्यास न लगे। हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें। धूप में निकलते समय सिर को टोपी, छाता, गमछा या स्कार्फ से ढकें। बाहर जाते समय हमेशा जूते या चप्पल पहनें। धूप में काम करने वाले लोग समय-समय पर छांव में आराम करें। अपने साथ हमेशा पानी रखें। तरबूज, खीरा, संतरा, अंगूर और टमाटर जैसे पानी से भरपूर फल व सब्जियां खाएं। नींबू पानी, लस्सी और नारियल पानी जैसे घरेलू पेय पदार्थों का सेवन करें। सनस्क्रीन और धूप का चश्मा इस्तेमाल करें। कम मात्रा में लेकिन बार-बार भोजन करें। ठंडे पानी से नहाएं और शरीर को ठंडा रखें। क्या न करें दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच धूप में बाहर निकलने से बचें। शराब, चाय, कॉफी और ज्यादा मीठे या कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का सेवन न करें। तला-भुना और बासी भोजन खाने से बचें। बच्चों और पालतू जानवरों को बंद गाड़ी में अकेला न छोड़ें। तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत कब पड़ती है स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यदि तेज सिरदर्द, चक्कर आना, बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत, तेज धड़कन, उल्टी, शरीर का तापमान 40 डिग्री से अधिक होना, मांसपेशियों में ऐंठन या मानसिक संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गुरप्रीत कौर ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से संबंधित दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। वहीं डॉ. महेश कुमार प्रभाकर ने अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।

सेहत पर संकट: मध्यप्रदेश में बच्चों और महिलाओं को तेजी से घेर रहा एनीमिया

भोपाल मध्यप्रदेश में पोषण और सेहत को लेकर एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है। एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम 2025-26 की ताजा स्क्रीनिंग रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के हर 10 में से पांच बच्चे (50%) और हर 10 में से तीन महिलाएं (30%) एनीमिया से पीड़ित हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि बड़ी आबादी अब भी कुपोषण और खराब खान-पान की समस्या से जूझ रही है। हालांकि, इस चिंताजनक तस्वीर के बीच एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। मध्यप्रदेश ‘एनीमिया मुक्त भारत’ अभियान के क्रियान्वयन में लगातार छह माह से देशभर में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। इसका श्रेय हेल्थ वर्कर्स, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जा रहा है, जो समय रहते मरीजों की पहचान कर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इसे स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता और टीमवर्क का परिणाम बताया है।   70 लाख बच्चों की हुई डिजिटल जांच वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ‘दस्तक अभियान’ के तहत 70.62 लाख बच्चों की डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से जांच की गई। इनमें से 35.21 लाख बच्चों में एनीमिया की पुष्टि हुई, जिनका उपचार शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही 9.42 लाख गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग में 3 लाख से अधिक महिलाएं मध्यम से गंभीर एनीमिया से ग्रसित पाई गईं, जिन्हें आयरन सुक्रोज और रक्ताधान जैसी सुविधाएं दी गईं। एनीमिया केवल थकान या कमजोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मानसिक विकास में भी बड़ी बाधा बनता है। सरकार का लक्ष्य उपचार और जागरूकता के माध्यम से प्रदेश को पूरी तरह एनीमिया मुक्त बनाना है। बचाव के लिए क्या करें? पालक : आयरन और फोलेट का समृद्ध स्रोत। अंजीर व चुकंदर : रोजाना सेवन से खून बढ़ाने में सहायक। केला व शकरकंद : ऊर्जा के साथ पोटैशियम और मैग्नीशियम की पूर्ति। लौकी : विटामिन और मिनरल से भरपूर, कोलेस्ट्राल नियंत्रित रखने में मददगार।

कैंसर अलर्ट: कौन से शहर हैं ‘कैंसर कैपिटल’ और कहाँ बढ़ रहा लंग्स कैंसर का खतरा?

नई दिल्ली हाल ही में एक रिसर्च स्टडी में यह दावा किया गया है कि देश के दक्षिणी राज्यों में कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। JAMA ओपन नेटवर्क में प्रकाशित राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद तो देश भर में स्तन कैंसर की राजधानी के रूप में उभरा है, जहाँ प्रति 100,000 महिलाओं में 54 इस असाध्य रोग के दंश से पीड़ित हैं जो देशभर में सर्वोच्च घटना दर है, जबकि बेंगलुरु का स्थान दूसरे नंबर पर आता है, जहां एक लाख महिलाओं में औसतन 46.7 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की मार झेल रही हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण भारत के महानगर न केवल ओवरऑल कैंसर संकट का सामना कर रहे हैं, बल्कि वहां विशिष्ट प्रकार का कैंसर महामारी के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट में इस पर कंट्रोल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया है। स्तन कैंसर के मामले में टॉप पर साउथ के शहर वर्ष 2015 से 2019 के दौरान देशभर में 43 जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों (PBCR) को कवर करने वाले इस स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक स्तन कैंसर दर वाले शीर्ष छह क्षेत्रों में से चार दक्षिण भारत के हैं। इनमें चेन्नई क्षेत्र में प्रति 100,000 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की दर 45.4 है, जबकि केरल के अलाप्पुझा और तिरुवनंतपुरम में यह क्रमशः 42.2 और 40.7 है। यह पैटर्न दक्षिण भारत, विशेषकर इसके शहरी केंद्रों को भारत में स्तन कैंसर महामारी का केंद्र बनाता है। 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर 238,085 महिलाओं के स्तन कैंसर से प्रभावित होने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन गया है। रिसर्च स्टडी के आंकड़ों से पता चलता है कि स्तन कैंसर दक्षिण भारतीय शहरों में तेजी से और व्यापक पैमाने पर पसरा है, जबकि देश के अन्य क्षेत्रों में दूसरे किस्म के कैंसर के मामले बढ़े हैं। रिपोर्ट में इन कैंसर मामलों के बढ़ने के पीछे विशिष्ट स्थानीय कारकों की ओर भी इशारा किया गया है। लंग्स कैंसर पर क्या रिपोर्ट? इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्तन कैंसर के मामले में जहां दक्षिण भारतीय शहर आगे हैं, वहीं फेफड़ों के कैंसर के मामले में पूर्वोत्तर के राज्य आगे हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि फेफड़ों के कैंसर के मामलों में मणिपुर की राजधानी आइज़ोल में प्रति 100,000 महिलाओं में 33.7 इससे ग्रसित हैं जबकि इस राज्य का औसत दर 24.8 दर्ज किया गया है। हालांकि, दक्षिण भारतीय शहरों में भी लंग्स कैंसर की स्थिति चिंताजनक दिखाई देती हैं, जहाँ हैदराबाद में प्रति 100,000 पर 6.8 और बेंगलुरु में प्रति 100,000 में 6.2 केस दर्ज किए गए हैं। ओरल कैंसर के मामले में कौन सा शहर आगे? पुरुष फेफड़ों के कैंसर के पैटर्न के मामले में दक्षिण भारत में केरल सबसे आगे है, जहाँ को कई जिलों में यह दर बेहद ऊँची हैं। धरती पर का स्वर्ग कहलाने वाले कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में भी लंग्स कैंसर के मामले में उच्चतम दर (39.5 प्रति 100,000) पर हैं, जबकि केरल के जिले उसके बाद के स्थान पर हैं। केरल के कन्नूर में यह दर 35.4, मालाबार में 32.5, कासरगोड में 26.6, अलप्पुझा में 25.3 और कोल्लम में प्रति 100,000 पर 24.2 है।ओरल कैंसर के मामलों में भी हैदराबाद, बेंगलुरु सबसे आगे है, जबकि अहमदाबाद इस मामले में सबसे ऊपर है।