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पास्ता के साथ ब्रेड क्यों परोसी जाती है? जानिए इटैलियन परंपरा

 जब भी आप दिल्ली-नोएडा या कहीं के भी किसी अच्छे कैफे या इटैलियन रेस्टोरेंट में पास्ता ऑर्डर करेंगे तो प्लेट में पास्ता के साथ गार्लिक ब्रेड या ब्रेड स्लाइस जरूर नजर आती है. बहुत से लोग इसे केवल एक साइड डिश या प्लेट सजाने का तरीका मान लेते हैं लेकिन वहीं कुछ लोग सोचते हैं कि रेस्टोरेंट वाले बस कस्टमर्स का पेट भरने के लिए ऐसा करते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस कॉम्बिनेशन के पीछे एक सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण है जिससे करीब 99% लोग पूरी तरह अनजान हैं. यदि आप भी नहीं जानते हैं तो आइए जानते हैं कि पास्ता की प्लेट में ब्रेड रखने की यह परंपरा कहां से आई और इसके पीछे क्या वजह है. इटली की पुरानी परंपरा 'फेयर ला स्कारपेटा' इटली के फेमस कैफे Tinello की वेबसाइट्स के मुताबिक, पास्ता के साथ ब्रेड सर्व करने की शुरुआत इटली से ही हुई थी. दरअसल, इटैलियन कल्चर में एक बहुत ही फेमस परंपरा है जिसे फेयर ला स्कारपेटा (Fare la scarpetta) कहते हैं. इस इटैलियन मुहावरे का सीधा मतलब होता है, अपनी ब्रेड से प्लेट को पूरी तरह साफ करना. इटली में जब लोग पास्ता खाते हैं तो प्लेट के नीचे बची हुई गाढ़ी और स्वादिष्ट सॉस को ब्रेड के टुकड़े से पोंछकर खाते हैं. वहां ब्रेड को खाना बर्बाद न करने और शेफ के प्रति सम्मान जताने का एक जरिया माना जाता है. और वहीं से इस प्रथा का चलन शुरू हुआ. सॉस को सोखने और स्वाद बढ़ाने का साइंस पास्ता बनाते समय शेफ ऑलिव ऑयल, चीज, टमाटर और कई तरह के मसालों का इस्तेमाल करके सॉस बनाते हैं. जब कोई फॉर्क से पास्ता खाता है तो काफी सारी सॉस प्लेट के नीचे ही छूटी रह जाती है. फूड एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ब्रेड एक स्पंज की तरह काम करती है और जब आप गार्लिक ब्रेड को उस बची हुई क्रीमी या टोमैटो सॉस में डिप करते हैं तो वह सॉस को पूरी तरह सोख लेती है. इससे पास्ता का असली स्वाद खराब नहीं होता और आप उसका लुत्फ उठा सकते हैं. टेक्सचर का कॉम्बिनेशन और पेट भरने का फंडा ब्रेड सर्व करने के पीछे केवल परंपरा ही नहीं बल्कि खाने का टेक्सचर भी मायने रखता है. पास्ता काफी सॉफ्ट और जूसी होता है लेकिन उसके साथ मिलने वाली गार्लिक ब्रेड क्रिस्पी और टोस्टेड होती है. यह सॉफ्ट और क्रंची कॉम्बिनेशन एक बेहतरीन फूड एक्सपीरियंस देता है. इसके अलावा अमेरिका और अन्य देशों में जब इटैलियन फूड पॉपुलर हुआ तो रेस्टोरेंट ने इसे ज्यादा पेट भरने वाला बनाने के लिए भी ब्रेड देना शुरू किया ताकि कस्टमर पूरी तरह संतुष्ट होकर जाएं.

ज्वार से बनी कलबुर्गी रोटी: स्वाद और सेहत का अनोखा संगम, महिलाओं को भी मिला रोजगार

 भारत विविधताओं का देश है और इसकी झलक यहां के खान-पान में भी साफ दिखाई देती है. देश के हर क्षेत्र का अपना एक खास स्वाद और पहचान है. जब किसी स्थानीय खान-पान की तारीफ खुद देश के प्रधानमंत्री कर दें तो वह पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना लेता है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 123वें एपिसोड में कर्नाटक की कलबुर्गी रोटी का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि यह रोटी न केवल लोगों तक पौष्टिक भोजन पहुंचा रही है, बल्कि हजारों महिलाओं को रोजगार भी दे रही है. आइए जानते हैं कि आखिर कलबुर्गी रोटी में ऐसा क्या खास है जो इसे गांवों से निकालकर बड़े शहरों की डाइनिंग टेबल तक ले आया है और सेहत के लिहाज से इसके क्या फायदे हैं. कलबुर्गी रोटी आखिर है क्या? कलबुर्गी रोटी कर्नाटक के कलबुर्गी (पहले गुलबर्गा) क्षेत्र की एक पारंपरिक रोटी है. इसे मुख्य रूप से ज्वार के आटे से बनाया जाता है जो उत्तर कर्नाटक का प्रमुख अनाज माना जाता है. यह रोटी अपने बड़े आकार, मुलायम बनावट और देसी स्वाद के लिए जानी जाती है. इसे बनाने के लिए ज्वार के आटे को गर्म पानी से गूंथा जाता है. इसके बाद हाथों से थपथपाकर रोटी का आकार दिया जाता है और तवे पर सेंकी जाती है. यह रोटी आमतौर पर भरवां बैंगन की सब्जी, मूंगफली की ग्रेवी या लहसुन, तिल और मूंगफली से बनी मसालेदार चटनी के साथ खाई जाती है. सेहत के लिए कितना फायदेमंद है यह रोटी? ज्वार को मोटे अनाजों का राजा कहा जाता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. ज्वार की रोटी वजन कंट्रोल रखने में मदद कर सकती है. यह डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद मानी जाती है और हार्ट हेल्थ के लिए भी बेहतर होती है. इसके अलावा, इसमें मौजूद फाइबर डाइजेशन को बेहतर बनाता है और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है. यही वजह है कि ज्वार की रोटी को हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा माना जाता है.