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दतिया में बच्ची की छोटे भाई-बहनों के साथ खेलते समय साइलेंट अटैक से मौत

दतिया. भांडेर अनुभाग के ग्राम तालगांव निवासी 15 वर्षीय दसवीं की छात्रा उर्वांगी दुबे उर्फ गुनगुन पुत्री विनय दुबे की हाल निवास आलमपुर जिला भिंड स्थित अपने घर पर साइलेंट अटैक की वजह से शनिवार को अचानक मौत हो गई। कम उम्र में अचानक हुई इस मौत ने परिजन को विचलित और हैरान कर दिया। भांडेर क्षेत्र में इतनी कम उम्र में साइलेंट अटैक से मौत का यह पहला और इकलौता मामला बताया जा रहा है। इस घटना के बारे में उर्वांगी के पिता विनय ने बताया कि वे भिंड जिले के आरुषि में बतौर शिक्षक पदस्थ होकर आलमपुर में किराए के मकान में अपने परिवार के साथ रहते हैं। शनिवार को सामान्य दिन की तरह सुबह करीब दस बजे अपने दो अन्य बच्चों सहित उर्वांगी को हंसता खेलते छोड़ गए थे। करीब पौने तीन बजे उन्हें घर से मोबाइल पर सूचना मिली कि उर्वांगी की तबियत अचानक से बिगड़ गई है। घर पहुंचकर डॉक्टर को बुलाया, लेकिन डॉक्टर के आने से पहले ही उसने दमतोड़ दिया। परीक्षण करने वाले डॉक्टर भी इसे साइलेंट अटैक का केस मान रहे हैं। शनिवार शाम को ही भांडेर के तालगांव में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उर्वांगी कक्षा 10 की छात्रा थीं और शुक्रवार को ही उसकी वार्षिक परीक्षा संपन्न हुई थी। वह तीन भाई बहिनों में सबसे बड़ी थी। क्या कोरोना वैक्सीन साइलेंट अटैक की वजह – इस मामले में सीएचसी भांडेर पर पदस्थ एवं पूर्व बीएमओ डा.आरएस परिहार ने बताया कि साइलेंट हार्ट अटैक को साइलेंट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (एसएमआई) के नाम से जाना जाता है। यह तब होता है जब हृदय को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है, लेकिन लक्षण इतने हल्के या असामान्य होते हैं कि अधिकांश व्यक्तियों को यह अहसास ही नहीं होता कि कोई जानलेवा घटना घट रही है। हाल के समय में साइलेंट अटैक के चलते कम उम्र एवं युवाओं में मौत के कई मामले सामने आ रहे हैं, जिसे लेकर कोरोना और उसकी वैक्सीन को लेकर भी कथित तौर पर आशंका जताई जाती है। इस घटना को लेकर भी परिजन ने आशंका जताई कि कोरोना काल में उर्वांगी को भी वैक्सीन लगी थी, कहीं उसका कोई प्रभाव तो नहीं पड़ा। इस मामले में विशेषज्ञ राय ली गई तो डा.आरएस परिहार ने बताया कि साइलेंट अटैक की वजह कोरोना या कोरोना वैक्सीन की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खानपान और दैनिक दिनचर्या भी ऐसी मौतों की एक वजह हो सकती है।  

अब दिल बोलेगा पहले: एआई तकनीक बताएगी हार्ट अटैक का संकेत समय रहते

नई दिल्ली हृदय रोग-हार्ट अटैक हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत का कारण बन रहा है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले साल 2023 में, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों (सीवीडी) की वजह से दुनिया भर में लगभग 19.2 मिलियन (1.92 करोड़) लोगों की मौत हो गई, इसमें इस्केमिक हार्ट डिजीज के कारण 24 करोड़ लोग प्रभावित हुए। भारतीय आबादी में भी हृदय रोगों की समस्याएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चिंता जताते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है, यहां तेजी से बदलती जीवनशैली, तनाव, गड़बड़ खानपान, मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कारक हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई मामलों में हार्ट अटैक अचानक होता है और मरीज को पहले से कोई स्पष्ट चेतावनी नहीं मिलती। अच्छी खबर ये है कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ऐसे मामलों में नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।  हार्ट अटैक के जोखिमों का पहले से अनुमान लगाने में एआई को मददगार माना जा रहा है। साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने वाला एआई टूल अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट्स में हमने बताया है कि गर्भधारण को आसान बनाने के साथ, कैंसर जैसी बीमारियों का पता लगाने तक के लिए एआई को तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में अब विशेषज्ञों की टीम एक ऐसे एआई टूल के बारे में जानकारी दी है जो इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) के जरिए दिल के सिग्नल रिकॉर्ड करने में मदद करता है।     एआई एल्गोरिदम उन पैटर्न को एनालाइज करते हैं जिससे पता चल सकता है कि कहीं आपको पहले से कोई साइलेंट हार्ट अटैक तो नहीं हुआ है?     एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक पैड ईसीजी के जरिए पिछले अटैक का पता लगा सकता है, इसे मोबाइल फोन पर एआई से जोड़ा जा सकता है।     इस डिवाइस और एआई टूल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी मदद से डॉक्टरों को ऐसे मरीजों का पता लगाने में मदद मिल सकती है जो पहले साइलेंट हार्ट अटैक का शिकार रहे चुके हैं।     ऐसे मरीजों का समय पर इलाज करके दूसरी बार हार्ट को रोकने और जान बचाने में मदद मिल सकती है। साइलेंट हार्ट अटैक होता है खतरनाक साइलेंट हार्ट अटैक या साइलेंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन हृदय की गंभीर समस्या मानी जाती है। इसमें रोगी को दिल का दौरा तो पड़ता है पर उसे लक्षण महससूस नहीं होते।     इस तरह के हार्ट अटैक में सीने में तेज, हाथों में दर्द या सांस फूलने जैसे आम चेतावनी के संकेत नहीं दिखते हैं।     जिन लोगों को ये होते हैं, उनमें से अधिकतर लोग मेडिकल मदद नहीं लेते, जिससे दिल की मांसपेशियों को होने वाला नुकसान समय के साथ चुपचाप बढ़ता रहता है।     इससे भविष्य में हार्ट फेलियर, हार्ट अटैक से जान जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है।     उम्रदराज लोगों, डायबिटीज के शिकार, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों में साइलेंट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। कैंसर के मरीजों में हार्ट अटैक का पता लगाने वाला टूल हृदय रोग और हार्ट अटैक के बढ़ते जोखिमों के बीच एआई टेक्नोलॉजी को गेम-चेंजर के तौर पर देखा जा रहा है। एआई और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने की दिशा में एक अन्य खोज में यूके स्थित लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके कैंसर मरीजों में सेकेंडरी हार्ट अटैक के खतरे का पता लगाने के लिए एक नया टूल बनाया है।     कमजोर कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम की वजह से कैंसर के  मरीजों में  हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है।     अब तक, डॉक्टरों के पास ऐसे मरीजों के इलाज में गाइड करने के लिए कोई स्टैंडर्ड टूल नहीं था     अब विशेषज्ञों ने पहले से ही खतरे को बताने वाला मॉडल विकसित किया है, जो खास तौर पर उन कैंसर मरीजों के लिए मददगार हो सकता है जिनमें दिल की बीमारियों का जोखिम ज्यादा होता है।     ONCO-ACS नाम का यह टूल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके कैंसर से जुड़े फैक्टर्स को स्टैंडर्ड क्लिनिकल डेटा के साथ मिलाकर छह महीने के अंदर कार्डियक घटना का अनुमान लगा सकता है। जन्मजात हृदय रोगा वाल बच्चों के लिए एआई टूल एक अन्य खोज में  माउंट सिनाई क्राविस चिल्ड्रन्स हार्ट सेंटर के शोधकर्ताओ ने ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल विकसित करने के बारे में जानकारी दी है, जो जन्मजात हृदय रोग के शिकार बच्चों के लिए मददगार साबित हो सकती है।     कई अन्य संस्थानों के साथ मिलकर विशषज्ञों ने जो टूल तैयार किया है वह  टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट वाले मरीजों में हार्ट की समस्या, हार्ट डैमेज का पता लगाने में मदद कर सकती है।     टेट्रालॉजी ऑफ फैलोट का पता अक्सर जन्म के तुरंत बाद चल जाता है। इसके कारण आपके बच्चे की त्वचा नीली या ग्रे दिख सकती है। स्टेथोस्कोप से बच्चे के दिल की धड़कन सुनते समय फुसफुसाहट जैसी आवाज (हार्ट मर्मर) आती है।     यह टूल स्टैंडर्ड इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) को एनालाइज कर सकता है ताकि जोखिमों का पता लगाया जा सके। आमतौर पर इस खतरे का पता लगाने के लिए कार्डियक एमआरआई की जरूरत होती है।  

ग्वालियर मेडिकल सोल्लगे के इंटर्न छात्र को दिल का दौरा पड़ने पर बनाया ग्रीन कॉरिडोर

ग्वालियर. जीआरएमसी (GRMC) के इंटर्न छात्र को दिल का दौरा पड़ने के बाद उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी। शनिवार रात को उसे दिल्ली ले जाने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। पहले उसे एयर एंबुलेंस से ले जाया जा रहा था, लेकिन रात में एयर एंबुलेंस लैंड नहीं हो सकी। इसके चलते आपात स्थिति में रात करीब 10 बजे ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। महज 20 मिनट में ही जेएएच से पुरानी छावनी ले जाया गया। जीआरएमसी के इंटर्न छात्र शैलेंद्र को दिल का दौरा पड़ा था। ग्वालियर में वह जेएएच में भर्ती था। यहां उसकी हालत में सुधार नहीं आया। इसके चलते शनिवार दोपहर में उसे दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया गया। रात तक एयर एंबुलेंस नहीं आ सकी एयर एंबुलेंस से संपर्क किया। जेएएच प्रबंधन द्वारा पुलिस को सूचना दी गई, जिससे एंबुलेंस को एयरपोर्ट तक पहुंचने में परेशानी न हो। जाम का सामना न करना पड़े। रात तक एयर एंबुलेंस न आ सकी। इसके बाद छात्र को सड़क मार्ग से ही ले जाने का निर्णय लिया गया। महज आधा घंटे में ही सारे इंतजाम कर लिए रात 9:30 बजे ट्रैफिक पुलिस को सूचना मिली। महज आधा घंटे में ही सारे इंतजाम कर लिए गए। तुरंत ही जेएएच से लेकर पुरानी छावनी तक सभी मार्गों पर ट्रैफिक रोक दिया गया। जेएएच से एंबुलेंस रवाना हुई। पूरे रास्ते कहीं भी एंबुलेंस नहीं फंसी। आगे पुलिस की गाड़ी चल रही थी, साथ में एंबुलेंस जा रही थी। महज 20 मिनट में जेएएच से पुरानी छावनी पहुंचा दिया गया। पुरानी छावनी में बानमोर बॉर्डर तक एंबुलेंस को छोड़ा गया। दरअसल, छात्र शैलेंद्र को हाथ में दर्द की शिकायत लेकर न्यूरोसर्जरी विभाग पहुंचे थे, जहां अचानक उन्हें सीवियर हार्ट अटैक (गंभीर हृदयाघात) आ गया। जैसे ही छात्र की तबीयत बिगड़ी, वहां मौजूद चिकित्सकों ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया और उन्हें भर्ती कर गहन निगरानी में रखा। स्वजन दिल्ली से ग्वालियर पहुंच गए हृदय रोग विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष, कार्डियक सेंटर जया आरोग्य अस्पताल डॉ. पुनीत रस्तोगी ने बताया कि छात्र को काफी गंभीर हार्ट अटैक आया है। शैलेंद्र को हार्ट अटैक आने की सूचना मिलते ही उनके स्वजन दिल्ली से ग्वालियर पहुंच गए। छात्र की नाजुक स्थिति को देखते हुए स्वजन बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर किया गया है। युवा वर्ग में बढ़ते हार्ट अटैक ने बढ़ाई चिंता अस्पताल परिसर में एक युवा डॉक्टर के साथ हुई इस घटना ने छात्रों के बीच चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि हाथ में दर्द या सीने में भारीपन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर विशेषज्ञ के पास पहुंचकर  उपचार कराना चाहिए। शहर में दिल के दौरे के मरीज बढ़ते जा रहे हैं।

स्कूल में पीटी करते समय गिरी छठी की छात्रा, 13 साल की बच्ची की हार्ट अटैक से मौत की आशंका

धार   धार जिले के बदनावर इलाके में पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। इसका दुष्प्रभाव बच्चों पर दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में आज सुबह यहां नवोदय विद्यालय मुलथान में छात्रा की स्कूल के मैदान में खड़े-खड़े हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। बच्ची का नाम निशा पिता राहुल सूर्यवंशी निवासी ग्राम मुलथान बताया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि, जिस छात्रा की साइलेंट अटैक से मौत हुई है, उसकी उम्र महज 13 साल थी और वो स्कूल की 6वीं कक्षा में पढ़ती थी। मिली जानकारी के अनुसार, छात्रा रोजाना की तरह सुबह पीटी के लिए मैदान में अन्य बच्चों के साथ गई थी। तभी 7:15 बजे वो अचानक गिरी तो बच्चों के साथ-साथ मैदान में मौजूद शिक्षकों ने उसे संभाला लेकिन बच्ची में कोई हलचल मेहसूस न होने से उसे तत्काल बदनावर के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया। निशा रोज की तरह सुबह पीटी के लिए बाकी बच्चों के साथ ग्राउंड पर गई थी। सुबह करीब सवा 7 बजे वह पीटी करते-करते अचानक गिर पड़ी। ग्राउंड पर मौजूद बच्चों और टीचर्स ने उसे संभाला। शरीर में कोई हलचल नहीं होने पर उसे फौरन सिविल अस्पताल, बदनावर ले गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने चेकअप के बाद निशा को मृत घोषित कर दिया। तहसीलदार सुरेश नागर भी सिविल अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमॉर्टम किया। अस्पताल की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया।   पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोलेगी मौत का राज बाद में अस्पताल की सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव को परिजन के सुपुर्द कर दिया। हालांकि, अभी मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है, लेकिन कड़ाके की ठंड में अल सुबह खुले मैदान में खेलने से उसकी मौत होने का शक है। इस असामयिक घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया। फिलहाल, स्कूल में शोक की लहर है। बच्चों को लेकर माता-पिता रखें ये ध्यान ठंड में बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए बुजुर्गों की तरह बच्चों को भी गर्म कपड़ों में रखें। घर के अंदर खेलने या हल्की-फुल्की कसरत (जैसे योग) कराएं। भरपूर तरल पदार्थ (गुनगुना पानी, सूप) पिलाएं। पौष्टिक आहार दें और ज्यादा ठंड में बाहर निकलने से रोकें, ताकि रक्त वाहिकाएं सिकुड़ें नहीं और हृदय पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, खासकर अगर बच्चे को पहले से कोई हृदय संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है। बच्चों को सुरक्षित रखने के उपाय -गर्म और परतदार कपड़े पहने : बच्चे को हमेशा गर्म, ऊनी कपड़े, मोज़े, दस्ताने और टोपी पहनाएं, खासकर बाहर जाते समय। -घर के अंदर रखें : बहुत ज़्यादा ठंड या कोहरे के दौरान बच्चों को घर के अंदर ही खेलने दें। बाहर की गतिविधियां (जैसे मॉर्निंग वॉक) बहुत अधिक ठंड में टालें। -हाइड्रेटेड रखें : ठंड में भी शरीर को पानी की ज़रूरत होती है। उन्हें गुनगुना पानी, सूप, हर्बल चाय पिलाएं। -पौष्टिक आहार : फल, सब्जियां, फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन दें। तैलीये और ज़्यादा नमक/चीनी वाले खाने से बचाएं। -शारीरिक गतिविधि (घर के अंदर) : हल्के व्यायाम, स्ट्रेचिंग या योग कराएं, जो घर के अंदर किए जा सकें। -तनाव से बचाएं : बच्चों को तनावमुक्त रखें। उनका मनपसंद काम करने दें और सकारात्मक माहौल दें। -बीमारियों से बचाव : सर्दी-खांसी-जुकाम होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें. फ्लू और अन्य संक्रमणों से बचाने के लिए टीका लगवाएं। किन लक्षणों पर ध्यान दें (अगर बच्चा बीमार हो) -सांस लेने में तकलीफ -सीने में दर्द या बेचैनी -बहुत ज़्यादा थकान -होंठों या उंगलियों का नीला पड़ना -तेज़ धड़कन नोट- अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। माता-पिता के लिए अतिरिक्त सलाह -बच्चों को समय पर दवा दें (यदि कोई दवा चल रही है)। -ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं, खासकर अगर जोखिम हो।

ठंड के मौसम में दिल की सेहत पर मंडराता खतरा, हार्ट अटैक से बचाएंगे ये 5 योगासन

सर्दियों का मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। सर्दियों में जुकाम, खांसी, बुखार और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं होना आम बात है। लेकिन क्या आप जानते यहीं कि सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। जी हां, कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि सर्दी का मौसम दिल की सेहत के लिए काफी कठिन होता है। दरअसल, सर्दियों में तापमान में गिरावट, सर्द हवाएं, नमी और एयर प्रेशर में बदलाव के कारण दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ठंड के मौसम में ब्लड वेसल्स संकुचित हो जाती हैं, जिससे ब्लड फ्लो कम हो जाता है हार्ट को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। ऐसे में, बेहद जरूरी है कि हार्ट अटैक से बचाव के लिए सही कदम उठाएं जाएं। हार्ट अटैक से बचाव के लिए आपको अपने खानपान का खास ख्याल रखना चाहिए। इसके अलावा, कुछ योगासन भी हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। आज इस लेख में हम आपको कुछ योगासनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो दिल को हेल्दी रखने में मदद कर सकते हैं। ताड़ासन इस योगासन को करने के लिए जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं। इस दौरान अपनी कमर को सीधा रखें और आपके पैर आपस में जुड़े होने चाहिए। अब हाथ जोड़ने की मुद्रा में खड़े हो जाएं और धीरे-धीरे अपने हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं। अब अपनी एड़ियों पर उठने की कोशिश करें और शरीर का भार अपने निचले हिस्से पर डालें। कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस प्रक्रिया को 10-15 बार दोहराएं। भुजंगासन इस आसन को करने के लिए योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं। अपनी कोहनियों को कमर से सटा के रखें और हथेलियां ऊपर की ओर रखें। अब धीरे-धीरे सांस भरते हुए, अपनी छाती को ऊपर की ओर उठाएं। उसके बाद अपने पेट को धीरे-धीरे ऊपर उठा लें। इस स्थिति में 30 सेकंड तक रहें। अब सांस छोड़ते हुए, सिर को धीरे-धीरे जमीन की ओर नीचे लाएं। इस प्रक्रिया को आप 3 से 5 बार दोहराएं। वीरभद्रासन इस आसन को करने के लिए योगा मैट पर सीधे खड़े हो जाएं। अब अपने दोनों पैरों 2-3 फीट की दूरी पर रखें। फिर अपने सीधे पैर को आगे लेकर आए और उल्टे पैर को पीछे की ओर स्ट्रेच करें। इस दौरान हाथों को 180 डिग्री पर फैला कर रखें। इस अवस्था में 30-60 सेकंड तक रुकें। फिर प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं। इस आसन को आप 3 से 5 बार कर सकते हैं। अर्ध मत्स्येन्द्रासन इस आसन को करने के लिए योगा मैट पर बैठें और अपने बाएं पैर को दाहिने पैर के नीचे रखें। दाहिने पैर को बाएं घुटने के पार रखें। बाएं हाथ को दाहिने घुटने पर रखें और दाहिने हाथ को पीछे की ओर रखें। अब शरीर को दाहिनी ओर मोड़ें और इस स्थिति में कुछ सेकंड तक रहें। धीरे-धीरे वापस आएं और दूसरी ओर से भी इस प्रक्रिया को दोहराएं। इस प्रक्रिया को आप 3 से 5 बार दोहराएं। धनुरासन इस आसन को करने के लिए योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं। अपने दोनों हाथों को सीधा रखें। अब अपने घुटनों को मोड़ते हुए सांस छोड़ें। अपनी एड़ी को अपने नितंबों के पास लाएं। अब धनुषाकार होते हुए, अपने पैरों की उंगलियों को हाथों से पकड़ें। अब गहरी सांस लेते हुए अपनी छाती को जमीन से ऊपर उठाएं। फिर सांस छोड़े हुए, वापस प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं। इस आसन को आप 3 से 5 बार कर सकते हैं।

क्यों महिलाओं में हार्ट अटैक बन रहा है खतरनाक साइलेंट किलर? जानिए अहम बातें

लगभग 48 फीसद महिलाओं की मौत के ज्यादातर कारणों में से एक हैं- हार्ट अटैक। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए यह एक साइलेंट किलर के रूप में जाना जाता है। महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों के मुकाबले अलग होते हैं। आज की बदलती जीवनशैली में कम उम्र में भी महिलाएं हार्ट अटैक का शिकार बन रही हैं। फास्ट फूड का सेवन, तनाव, अनियमित खानपान और घर-बाहर की भागदौड़ में उनका स्वास्थ्य इग्नोर हो रहा हैं। ऐसें में छोटी-मोटी बीमारियों के अलावा बड़ी बीमारियां भी उन्हें चपेट में ले रही हैं। हार्ट अटैक के लक्षणों और अगर समय रहते न पहचाना गया, तो ये मृत्यु का कारण बनते हैं। पुरुषों में जहां हार्ट अटैक के लक्षणों में सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी शामिल है, वहीं महिलाओं में दर्द के बिना सांस लेने में दिक्कत होती है, इस वजह से कई महिलाएं इसे मामूली परेशानी समझ लेती हैं और नतीजा हार्ट अटैक। सांस संबंधी परेशानी में तुरंत डॉक्टर के पास जरूर जाएं ताकि समय रहते इलाज किया जा सकें। सर्वे के मुताबिक लगभग 40 फीसद महिलाओं में ऐसी परेशानी देखने को मिली है। इसके अलावा अगर आपके शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द हैं तो यह खतरनाक हो सकता है, जैसे गर्दन, पीठ, कंधा बगैरह। इनमें अगर दर्द ज्यादा हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह हार्ट अटैक के लक्षणों में से एक हो सकते हैं। इन जगहों से दिल की कई धमनियां जुड़ी रहती हैं। इसीलिए इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। दिल तक खून पहुंचाने वाली दाई धमनी में अगर कोई रूकावट आ जाए तो यह हार्ट अटैक का कारण बनते हैं। इस परिस्थिति में उल्टी, मितली और पेट की गड़बड़ी जैसे लक्षण महिलाओं में दिखते हैं। इसलिए ऐसे लक्षणों को हल्के में न लें, ये हार्ट अटैक के लक्षण भी हो सकते हैं। बेवजह की थकान और अचानक से तेज नींद आना हार्ट अटैक का कारण बनता हैं। कई महिलाओं में यह परेशानी देखने को मिलती हैं कि अचानक उन्हें बेवजह थकान महसूस होने लगती है और फिर हार्ट अटैक के कारण उन्हें अस्पताल में एडमिट होना पड़ा। कई महिलाएं तो ऐसी हालात को दिन-भर की थकान समझ बैठती है और नतीजा अच्छा नहीं होता। मेनोपॉज के बाद अचानक घबराहट या पसीना आए तो किसी भी महिला के लिए शायद नार्मल बात होगी। मगर मेनोपॉज के पहले ही अगर यह लक्षण नजर आने लगे, तो बुद्धिमानी इसी में हैं कि समय रहते संभल जाइए। वरना ये लक्षण आपको अस्पताल पहुंचा सकते हैं।  

डिवाइडर पर चढ़ी कार देख लोग समझे नशे में ड्राइवर, देख तो पूर्व सरपंच को आया हार्ट अटैक

कोटा जिले में कार चलाते समय एक व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई। घटना के दौरान गाड़ी तेजी से डिवाइडर पर चढ़कर दूसरी ओर उतर गई। राहगीरों ने पास जाकर देखा तो उसमें ड्राइवर की सीट पर 55 वर्षीय अर्जुन गुंजल बैठे हुए थे। उन्हें सीने में लगातार दर्द उठ रहा था, इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पहले राहगीरों को यह लगा था कि किसी ड्राइवर ने नशे की हालत में यह एक्सीडेंट किया है। गुंजल के रिश्तेदार भारत गुर्जर ने बताया कि अर्जुन गुंजल सरपंच रह चुके हैं और पूरी तरह स्वस्थ भी थे। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ घंटे पहले उन्हें उल्टी हुई थी, तब वे गैस की समस्या बताकर निकल गए। बाद में सूचना मिली कि यह हादसा हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई। वहीं एक प्रत्यक्षदर्शी रविंद्र सिंह ने बताया कि गाड़ी के आसपास काफी भीड़ लगी हुई थी। पहले लग रहा था कि किसी ड्राइवर ने शराब की नशे में गाड़ी ठोंक दी है। गाड़ी के पीछे गुंजल लिखा होने पर रविंद्र ने अपने दोस्त रूपचंद गुंजल को कॉल करके बताया। इसके बाद पता चला कि यह गाड़ी अर्जुन गुंजल की है। राहगीरों ने गाड़ी का शीशा तोड़कर अर्जुन को बाहर निकाला और सीपीआर देने की कोशिश की लेकिन उनके शरीर पर किसी भी तरह की कोई हलचल नहीं दिख रही थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इस दौरान चिकित्सकों ने भी उन्हें सीपीआर देकर रिकवरी करने की कोशिश भी की लेकिन सफल नहीं हो सके।

करवा चौथ पर दिल का दौरा पड़ा भारी, बरनाला की आशा रानी व्रत खोलने से पहले हुए निधन

बरनाला  पंजाब के बरनाला में करवा चौथ के पार्टी के दौरान 59 साल की एक महिला की मौत हो गई. आशा रानी नाम की महिला की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. वे अपनी सहेलियों के साथ नाच रही थीं, तभी अंतिम सांस ली. घटना की आखिरी वीडियो सामने आई है, जिसमें वे डांस करते हुए गिरती दिख रही हैं. स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद की, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस जांच कर रही है.  मृतक महिला की पहचान तपा मंडी की रहने वाली 59 साल की आशा रानी के रूप में हुई है। खुशी के मौके पर इस घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। मामला करवा चौथ की रात का है, लेकिन अब इसका वीडियो सामने आया है। लड़खड़ाते हुए गिरी, किसी का ध्यान नहीं गया आशा रानी ने भी अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए करवाचौथ का व्रत रखा था। रात को खुले आंगन में पार्टी रखी गई थी, जिसमें डांस का फ्लोर भी लगाया गया था। इसमें कई महिलाएं और लड़कियां पंजाबी गाने पर डांस कर रहीं थीं। आशा भी नाच रही थीं। इसी दौरान वह नाचते हुए थोड़ी लड़खड़ाते हुए नजर आईं। उन्होंने आसपास कुछ पकड़ने की कोशिश की, ताकि गिरने से बच सके, लेकिन वहां कोई ऐसी चीज नहीं थी। इस दौरान बाकी महिलाएं डांस में बिजी थीं, उसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। चंद सेकेंड में महिला मुंह के बल नीचे गिर गई। जिसके बाद वहां हड़कंप मच गया। महिला को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। आशा रानी एक संपन्न और समाजसेवी परिवार से ताल्लुक रखती थीं। इस घटना के बाद परिवार सदमे में है कि करवाचौथ के दिन हुई इस घटना ने खुशी के दिनों में परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। इस दुखद घटना से शहर में शोक की लहर है। शहरवासियों ने भी परिवार के साथ दुख साझा किया। 43 साल के एक्टर और बॉडी-बिल्डर भी बने थे हार्ट अटैक के शिकार 11 अक्टूबर को ही एक्टर और बॉडी-बिल्डर वरिंदर सिंह घुमन की हार्ट अटैक के चलते मौत हुई थी। वरिंदर सलमान खान के साथ वरिंदर फिल्म टाइगर 3 में नजर आए थे। उनकी बॉडी-बिल्डिंग की हर किसी ने तारीफ की थी और सलमान भी उनके दीवाने हो गए थे। द हीमैन ऑफ इंडिया कहे जाने वाले वरिंदर 'मिस्टर इंडिया 2009' में रह चुके थे। महज 43 साल की उम्र में वह भी हार्ट अटैक के शिकार बने। वह कंधे में दर्द था और वह इलाज के लिए अमृतसर के एक निजी अस्पताल गए थे, जहां सिंह अस्पताल में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई थी।