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रहस्य खुला: हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी सिर्फ 17 साथियों के साथ, इस घर से हुई शुरुआत

नई दिल्ली  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे हो रहे हैं। 2 अक्तूबर को होने वाले विजयादशमी पर्व के साथ ही RSS अपनी स्थापना के 100 सालों के उत्सव को मनाने की शुरुआत कर रहा है। कभी नागपुर के मोहिते का वाड़ा नाम की जगह पर शुरू हुआ संगठन भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के तमाम देशों में चल रहा है। करोड़ों स्वयंसेवकों के साथ आरएसएस एक लंबी यात्रा पूरी कर चुका है। इस संगठन ने भारत छोड़ो आंदोलन, आजादी, विभाजन, आपातकाल से लेकर अब तक देश और समाज के जीवन में कई उतार चढ़ाव देखे। यही नहीं तीन बार प्रतिबंधों का भी सामना किया, लेकिन हर बार आरएसएस पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरा। आरएसएस की स्थापना से जुड़ी पहली मीटिंग डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के घर पर ही हुई थी, जो संघ के संस्थापक थे। 27 सितंबर, 1925 को पहली मीटिंग हुई थी और संयोग से वह दशहरे का दिन था। तभी से आरएसएस दशहरे को एक उत्सव के रूप में मनाता है और इस दिन पथ संचलनों का भी आयोजन किया जाता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि जिस दिन आरएसएस की स्थापना हुई थी, उस समय 17 लोग ही डॉ. हेडगेवार के साथ मौजूद थे। इनमें से कुछ लोगों ने आगे सालों तक संघ का कार्य किया, जबकि कुछ लोगों की राह अलग भी हुई। इन 17 नामों में ये लोग शामिल थे। हेडगेवार के जिस घर पर आरएसएस की पहली बैठक हुई थी, आज वह देश भर के स्वयंसेवकों के लिए आस्था का केंद्र रहा है। अकसर देश भर के स्वयंसेवक यहां पहुंचते रहे हैं और यादें ताजा करते रहे हैं। बता दें कि डॉ. हेडगेवार एक दौर में कांग्रेस में ही थे और तब मध्य प्रांत के अध्यक्ष हुआ करते थे। लेकिन उन्होंने कांग्रेस छोड़कर आरएसएस का गठन किया। उनका उद्देश्य था कि स्वतंत्र भारत में हिंदू समाज की जागरूकता के लिए एक संगठन का निर्माण हो। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार 2.    बापूजी साठे 3.    प्रल्हाद ठाकरे 4.    बालाजी हेडगेवार 5.    बापूराव भेड़ी 6.    भाऊजी कावरे 7.    अन्ना सोहनी 8.    विश्वनाथ राव केलकर 9.    रघुनाथराव बांडे 10.    अन्ना वैद्य 11.    नरहर पालेकर 12.    दादाराव परमार्थ 13.     अन्नाजी गायकवाड़ 14.    बाबूराव तेलंग 15.    तात्या तेलंग 16.     बालासाहेब आठाल्ये 17.     भाऊजी दाफे