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पावापुरी से युवती गिरफ्तार, प्रेमजाल में फंसाकर युवक का कराया गया अपहरण

नालंदा बिहार के पावापुरी(नालंदा) से पुलिस ने एक ऐसी युवती को गिरफ्तार किया है जो हूस्न का जाल फैलाकर युवाओं को फंसाती है और फिर अगवा करवाकर फिरौती वसूलती है। पुलिस ने युवती को गिरफ्तार कर कर लिया है। अब गिरोह के अन्य बदमाशों की तलाश की जा रही है। युवती सोशल मीडिया के माध्यम से दोस्ती और प्यार के बहाने युवाओं को हनीट्रैप करती है। बुधवार को शेखपुरा जिले के शेखोपुरसराय थाना क्षेत्र के पांची गांव निवासी सागर रविदास के पुत्र विक्रम कुमार के अपहरण का मामला चर्चा में रहा था। पुलिस ने अपहृत को बरामद कर लिया है। एक युवती को गिरफ्तार किया गया है। उसकी पहचान पावापुरी ओपी क्षेत्र के चोरसुआ गांव निवासी रामधीन की पुत्री संध्या कुमारी के रूप में की गयी है। उससे पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। संध्या ने बताया कि उसने सोशल मीडिया के माध्यम से युवक से दोस्ती की। धीरे धीरे उसे प्यार का पाठ पढ़ाने लगी। युवक जब उसकी जाल में फंस गया तो उसे धोखे से पावापुरी बुलाया और अपने दोस्तों की मदद से उसका अपहरण कर लिया। उसके बाद गैंग ने युवक के परिजनों से छह लाख रुपये फिरौती की मांग की। बार बार फोन करने पर पिता ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कांड दर्ज करके कार्रवाई की तो यह चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। ग्रामीणों की मानें तो मंगलवार की रात से ही पुलिस कार्रवाई में जुटी थी। हालांकि, नालंदा पुलिस ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि पुलिस को बुधवार की रात सूचना मिली। इसके बाद कार्रवाई की गयी। पुलिस मात्र छह घंटे में अपहृत को बरामद करने का दावा भी कर रही है। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने प्रेस बयान जारी कर बताया कि बुधवार की रात पावापुरी ओपी को फोन से अपहरण और छह लाख फिरौती मांगने की सूचना मिली। उनके निर्देश पर स्थानीय पुलिस व डीआईयू की टीम कार्रवाई में जुट गयी। अपहरणकर्ताओं ने दोबारा की फिरौती की मांग अपहरणकर्ताओं ने दोबारा युवक के पिता को फोन कर फिरौती की मांग की। पुलिस ने लोकेशन के आधार पर पावापुरी फ्लाईओवर के पास से अपहृत युवक को बरामद किया। हालांकि, अपहरणकर्ता भाग निकले। अपहृत से पूछताछ में पता चला कि वह संध्या से सोशल मीडिया के माध्यम से बात करता था। इसके बाद संध्या से पूछताछ की गयी। उसने बताया कि उसके ब्यॉयफ्रेंड मानपुर थाना क्षेत्र के तेतरावां गांव निवासी राजा गोप ने अपने सहयोगी चोरसुआ गांव निवासी सोनू उर्फ नट्टू व अन्य की मदद से युवक का अपहरण किया।

हनी ट्रैप के जाल में फंसा राजस्थान, पुलिस ने 18 लोगों को किया गिरफ्तार

झालावाड़  राजस्थान – एक ओर दिखावटी प्यार का जाल, दूसरी ओर ट्रैक्टर चोरी और ठगी का संगठित नेटवर्क- राजस्थान के झालावाड़ जिले की पुलिस ने इन दोनों को जोड़ने वाला एक सनसनीखेज मामला उजागर किया है। पुलिस ने हनी ट्रैप और चोरी के मामलों में शामिल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। अब पुलिस इनके बाकी साथियों की तलाश में जुटी हुई है।   पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और फोन कॉल्स के ज़रिए लोगों से संपर्क करते थे। फिर महिला सदस्य जिनमें मुख्य भूमिका ज्योति उर्फ़ जान्हवी की बताई जा रही है पहले दोस्ती करतीं, फिर निजी मुलाकात का बहाना बनाकर पुरुषों को अपने जाल में फंसा लेतीं। एक बार मुलाकात हो जाने के बाद शुरू होता था असली खेल। गिरोह झूठे बलात्कार या छेड़छाड़ के केस में फंसाने की धमकी देकर पीड़ितों से मोटी रकम वसूलता था। कई मामलों में लोगों से लाखों रुपये ऐंठे गए। पुलिस के अनुसार, ज्योति उर्फ़ जान्हवी हिस्ट्रीशीटर हेमराज सुमन की करीबी साथी है। यही नहीं, यह गिरोह सिर्फ ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं था बल्कि ट्रैक्टर चोरी और वाहन ठगी में भी लिप्त था। चोरी के वाहनों को बेचकर यह लोग मोटा मुनाफा कमाते थे और उस पैसे से लग्जरी कारें व संपत्ति खरीदते थे। झालावाड़ पुलिस को पहले एक ट्रैक्टर चोरी की शिकायत मिली थी। जांच आगे बढ़ी तो कुछ संदिग्ध लेनदेन के सुराग मिले। जब पुलिस ने तकनीकी और मानवीय सूचना का इस्तेमाल कर गहराई से पड़ताल की, तब सामने आया कि चोरी और हनी ट्रैप दोनों मामलों में एक ही नेटवर्क सक्रिय है। एसपी अमित कुमार की अगुवाई में बनी विशेष टीम ने जाल बिछाकर ज्योति को पकड़ा। पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। इसके बाद पुलिस ने एक के बाद एक कर 18 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार लग्जरी कारें और एक ट्रैक्टर बरामद किया है। बताया जा रहा है कि यह सभी वाहन ठगी से कमाए गए पैसों से खरीदे गए थे। इस गिरोह के पास सिर्फ हनी ट्रैप के ज़रिए ठगे गए रुपये ही नहीं, बल्कि चोरी की संपत्तियों से भी बड़ी आमदनी होती थी। पुलिस का मानना है कि आरोपी लोग इस पैसों को जमीनों और गाड़ियों में निवेश करके अपना नेटवर्क फैला रहे थे। कई मामलों में स्थानीय दलाल और वाहन विक्रेता भी इनके साथ जुड़े हुए थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की लोकेशन ट्रेस कर रही है। साथ ही, जब्त की गई संपत्ति की मनी ट्रेल (पैसों की आवाजाही) खंगाली जा रही है ताकि यह पता चल सके कि यह पैसा कहाँ-कहाँ निवेश हुआ। एसपी अमित कुमार ने बताया कि “यह गैंग लंबे समय से सक्रिय था और कई जिलों में इसके तार फैले हैं। फिलहाल मुख्य आरोपी ज्योति से गहन पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।” यह मामला एक चेतावनी की तरह है हनी ट्रैप और ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अजनबियों से निजी बातचीत और मुलाकातों में सावधानी बरतें, और अगर कोई धमकी या ब्लैकमेलिंग का मामला सामने आए तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।