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छत्तीसगढ़ की तीरंदाज सरिता तेलम को CM साय ने किया सम्मानित, बढ़ाया मान

रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके से निकलकर युवां अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अलग पहचान बना रहें हैं। इन्हीं में से एक है बीजापुर की सरिता तेलम, जिन्होंने तीरंदाजी के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी एक अलग पहचान बना ली है। सरिता की मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक मीडिया हाउस की ओर से आयोजित GenNext संवाद Youth Award में उनको सम्मानित किया। संघर्ष और समर्पण से बनाई पहचान आदिवासी अंचल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना उनकी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। सरिता ने राष्ट्रीय शालेय तीरंदाजी प्रतियोगिता सहित कई स्पर्धाओं में सफलताएं हासिल की है। तीरंदाजी के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां न केवल बीजापुर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय हैं। उनका संघर्ष और खेल के प्रति प्रतिबद्धता खासकर युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा उनकी सफलता ने क्षेत्र की प्रतिभाओं और बेटियों में आगे बढ़ने की उम्मीद और आत्मविश्वास को मजबूत किया है। उनकी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि मेहनत, लगन और समर्पण के साथ विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। CM साय ने संवाद में किया सम्मानित राजधानी रायपुर में संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीरंदाजी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए सरिता तेलम को सम्मानित किया।

सरकारी स्कूल को बनाया मॉडल, नवाचारों से बदली बच्चों की पढ़ाई; मुनमुन भट्टाचार्य को मिला राष्ट्रपति सम्मान

धनबाद शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने धनबाद के राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। देश के 48 चयनित शिक्षकों में शामिल मुनमुन को प्रशस्ति पत्र, शाल एवं 50 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई। सीमित संसाधनों और सरकारी व्यवस्था की पुरानी छवि में सुधार लाते हुए मुनमुन भट्टाचार्य ने शिक्षा के क्षेत्र में इतिहास रचा है। उनके नवाचारों और अथक प्रयासों ने इस साधारण से सरकारी स्कूल को राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट शिक्षण संस्था के रूप में स्थापित कर दिया है। धनबाद से विज्ञान भवन तक का सफर धनबाद से विज्ञान भवन तक का सफर तय करने के लिए मुनमुन के नवाचारों ने मुख्य भूमिका निभाई। अंग्रेजी की शिक्षिका के रूप में कक्षा से निरंतर जुड़ाव रखते हुए बच्चों के मन से अंग्रेजी भाषा का भय समाप्त किया। बच्चों की भाषा दक्षता और अभिव्यक्ति क्षमता बढ़ाने के लिए इंग्लिश अराउंड मी जैसी अनूठी गतिविधि शुरू की गई है। बच्चे अपने दैनिक जीवन और आसपास के माहौल की कहानियों के माध्यम से अंग्रेजी बोलने, पढ़ने और अपनी बात बेझिझक रखने का अभ्यास करते हैं। रीडिंग बडी सिस्टम से वरिष्ठ बच्चे छोटे सहपाठियों के पठन-पाठन में मदद करते हैं। आधुनिक तकनीक और डिजिटल संसाधनों का समावेश किया। स्मार्टफोन, शैक्षणिक वीडियो, दीक्षा पोर्टल और ई-कंटेंट का उपयोग कर बच्चों को सीखने के अतिरिक्त अवसर दिए गए। साउंड वाल, शब्द भंडार, बिग बुक, फ्लैश कार्ड, स्थानीय व अनुपयोगी सामग्रियों से तैयार खिलौनों के माध्यम से पढ़ाई को बोझिल होने से बचाया गया गणित विषय को सरल और रुचिकर बनाने के लिए विद्यालय में सभी बच्चों के लिए वैदिक गणित और अबेकस की शिक्षा अनिवार्य की गई। बालिका सशक्तिकरण के लिए स्थानीय मार्शल आर्ट प्रशिक्षकों के सहयोग से बालिकाओं के लिए नियमित आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं। विद्यालय के शिक्षक नियमित गृह भ्रमण करते हैं, ताकि ड्रापआउट बच्चों की पहचान कर दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। मध्य विद्यालय बरमसिया पूरे जिले के स्कूलों के लिए उत्कृष्ट माडल है। नवाचार से बच्चों की संख्या बढ़ी है। बहुत कुछ सीखने को भी मिल रहा है। राष्ट्रपति पुरस्कार मिलना धनबाद के लिए गर्व की बात है। अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। अभिषेक झा, जिला शिक्षा पदाधिकारी धनबाद